Current time: 05-20-2018, 11:44 AM Hello There, Guest! (LoginRegister)


Post Thread Post Reply
Thread Rating:
  • 0 Votes - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
08-26-2012, 10:28 PM
Post: #1
आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
जब भी कामांगों और सेक्स (लंड, चूत और चुदाई) का नाम जबान पर आता है तो पता नहीं ये तथाकथित समाज और धर्म के ठेकेदार क्यों अपनी नाक भोंहें सिकोड़ने लगते हैं और व्यर्थ ही हंगामा मचाने लग जाते हैं। मैं एक बात पूछना चाहता हूँ कि क्या इन्होंने कभी सेक्स नहीं किया या बच्चे पैदा नहीं किये ? सेक्स तो प्राणी मात्र की अनिवार्य आवश्यकताओं में से एक है तो फिर इस नाम और नैसर्गिक क्रिया से इतनी चिढ़ क्यों ?

…… सेक्स की प्रचलित भ्रांतियों और मिथकों को खोलती प्रेम गुरु की एक कहानी

दरअसल इस पवित्र और नैसर्गिक क्रिया का नाम ही गलत रखा गया है। इसका नाम तो सेक्स या चुदाई के स्थान पर केवल ‘प्रेम’ ही होना चाहिए। ब्रह्मांड के कण कण में प्रेम समाया हुआ है। चकोर चन्द्रिका से प्रेम करता है, मीन जल से, झरना नदी से और नदी सागर से आलिंगन बद्ध होने को भागी जा रही है। सागर की लहरें पूर्णिमा के चन्द्र को चूमने के लिए आकाश को छू लेना चाहती है। इनके पीछे प्रेम की मोहिनी शक्ति है। उर्जायें प्रेम की तरंगों से उद्वेलित होती हैं। वस्तुतः प्रेम ही जीवन का सार और सुखमय दाम्पत्य जीवन का आधार है।

वातस्यायन ने सच ही कहा है कि सृष्टि के रचना काल से ही नर नारी के सम्बन्ध चले आ रहे हैं। यदि ये सम्बन्ध नहीं होते तो इतना बड़ा संसार कहीं नज़र नहीं आता और यह संसार केवल पत्थरों, पहाड़ों, जंगलों और मरुस्थलों से अटा पड़ा होता। इस संसार की उत्पत्ति काम से हुई है और यह उसी के वशीभूत है। प्रकृति ने संसार का अस्तित्व जन्म प्रक्रिया द्वारा हमेशा बनाए रखने के लिए "काम" को जन्म दिया है और उसमें इतना आनंद भरा है। स्त्री पुरुष के मिलन के समय प्राप्त होने वाले आनंद को बार बार प्राप्त करने की मानवीय चाह ने संसार को विस्तार और अमरता दी है। जिस प्रकार भूख प्यास और निद्रा सभी प्राणियों की अनिवार्य आवश्यकताएं हैं उसी प्रकार "काम" (सेक्स) भी एक अनिवार्य आवश्यकता है इसका दमन हानिप्रद होता है।

कोई जड़ हो या चेतन सभी किसी ना किसी तरह काम के वशीभूत हैं। क्या आप बता सकते है चकोर चाँद की ओर क्यों देखता रहता है ? नदियाँ सागर की ओर क्यों भागी जा रही हैं ? पपीहा पी कहाँ पी कहाँ की रट क्यों लगाए है ? मेघ पर्वतों की ओर क्यों भागे जा रहे हैं ? परवाने क्यों अपनी जान की परवाह किये बिना शमा की लो चूमने दौड़े चले आते हैं ? दरअसल ये सारी सृष्टि ही काम (प्रेम) से सराबोर है। तभी तो ये संसार ये सृष्टि और जीवन चक्र चल रहा है। व्यक्ति जैसे जैसे बड़ा होता है जीवन में तनाव और समस्याएं जीवन का अंग बन जाती हैं। इस तनाव को दूर करने का प्रकृति ने एक अनमोल भेंट काम (सेक्स) के रूप में मनुष्य को दी है। अगर वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाए तो सेक्स की पूर्णता पर ओर्गास्म होने पर फेरोमोन नामक हारमोंस का शरीर में स्त्राव होता है जिसके कारण पूरा शरीर तरंगित हो जाता है और व्यक्ति तनावमुक्त और संतुष्ट हो जाता है। फिर ऐसे पवित्र कर्म या इसके नाम को गन्दा और अश्लील क्यों कहा जाए ? दरअसल यह तो नासमझ और गंदे लोगों की गन्दी सोच है।

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:28 PM
Post: #2
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
मैंने अभी तक कोई 10-12 कहानियां तो जरूर लिख ही ली होंगी और आपने पढ़ी भी होंगी। मुझे अपने पाठकों और पाठिकाओं का भरपूर प्रेम और प्रशंन्सा मिली है। मेरी बहुत सी किशोर और यौवन की दहलीज़ पर खड़ी पाठिकाओं ने एक विशेष आग्रह किया था कि मैं एक ऐसी कहानी लिखूं जिसमें सेक्स की प्रचलित भ्रांतियों और मिथकों (Myths) के बारे में बताया जाए। मेरी उन सभी पाठिकाओं और पाठकों के लिए मेरा यह अनुभव प्रस्तुत है:

यह उस समय की बात है जब मैं उदयपुर में दसवीं में पढ़ता था। हमारे पड़ोस में एक नई आंटी रहने के लिए आई थी। वो आई तो दिल्ली से थी पर सुना था कि वो पंजाब के पटियाला शहर की रहने वाली थी। उनके माँ बाप बहुत सालों पहले कश्मीर से आकर पटियाला बस गए थे। नाम शायद सुषमा गुलचंदानी था पर उसकी देहयष्टि (फिगर) के हिसाब से तो उसे गुलबदन ही कहना ठीक होगा। अगर सच कहूँ तो मेरी पहली सेक्स गुरु तो ये आंटी गुलबदन ही थी। हालांकि हमारी चुदाई बहुत थोड़े दिनों ही चली थी पर उसने 7 दिनों में ही मुझे सेक्स के सात सबक सिखा कर प्रेम चन्द्र माथुर से "प्रेम गुरु" जरुर बन दिया था। जिस प्रकार की ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) उसने मुझे दी थी मुझे नहीं लगता कि उसके बाद अगर मैं आगे की जानकारी के लिए सेक्स में पी एच डी भी कर लूं तो मुझे मिल पाएगी।

उसकी उम्र कोई 32-33 साल की रही होगी। लम्बाई 5’ 7" फिगर 36-30-38 पूरी पंजाबी पट्ठी लगती थी जैसे उस जमाने की सुस्मिता सेन हो। गोरा रंग, भरा हुआ बदन, मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल मस्त चुन्चियाँ सानिया मिर्जा की तरह। जैसे कोई दो टेनिस की गेंदें हों। जो मानो कह रही हों कि हमें आजाद करो चूसो और मसलो। काले लम्बे बालों की चोटी तो उसके नितम्बों को छूती ऐसे लगती थी जैसे कोई नागिन लहरा कर चल रही हो। उसके सिर के लम्बे घुंघराले बाल देख कर तो आप और मैं अन्दाज लगा सकते हैं कि उसकी चूत पर कैसे घने और घुंघराले बालों का झुरमुट होगा। चूड़ीदार पाजामे और कुरते में तो उसके नितम्ब कयामत ही ढाते थे। जब कभी वो स्लीवलेस ब्लाउज के साथ सफ़ेद साड़ी पहनती थी उसमें तो वो राजा दुश्यंत की शकुन्तला ही लगती थी। लाल लाल होंठ जैसे किसी का खून पीकर आई हो। सुतवां नाक, सुराहीदार गर्दन और मोटी मोटी बिल्लोरी आँखें तो किसी मृगनयनी का भ्रम पैदा कर दे। जब वो चलती तो उसके हिलते, बल खाते नितम्ब देखकर अच्छे अच्छों के लंड उसे सलाम बजाने लगते। वो तो पूरी गुलबदन ही थी। वो एक स्कूल में अध्यापिका थी। उनका अपने पति से कोई 2 साल पहले अलगाव हो गया था।

मार्च का महीना था पर गुलाबी ठण्ड अभी भी बनी थी। थोड़े दिनों बाद मेरी दसवीं की परीक्षा होने वाली थी। मैं उसके पास इंग्लिश और गणित की ट्यूशन पढ़ने जाता था। मेरे लंड का आकार अब तक 6" का हो गया था। थोड़े थोड़े बाल अण्डों और लंड के चारों ओर आने लगे थे। हल्की सी काली धारी नाक के नीचे बननी शुरू हो गई थी। राहुल भी मेरे साथ ट्यूशन पढ़ता था। वह मेरी ही उम्र का था पर देखने में मरियल सा लगता था। जब भी वो बाथरूम में जाता तो बहुत देर लगाता। पहले मैं कुछ समझा नहीं पर बाद में मुझे पता लगा कि वो बाथरूम में जाकर आंटी की पैन्टी और ब्रा को सूंघता था और उसे हाथ में लेकर मुट्ठ भी मारता था। उसके बाद तो हम दोनों ही खुल गए और दोनों ही एक साथ शर्त लगा कर मुट्ठ मारते। यह अलग बात थी कि वो हर बार मुझसे पहले झड़ जाता और शर्त जीत जाता। कभी कभार हम मस्तराम की कहानियाँ भी पढ़ लिया करते थे। चुदाई के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था। हम दोनों ही साथ पढ़ने वाली सिमरन को चोदना चाहते थे पर वो पट्ठी तो हमें घास ही नहीं डालती थी। (सिमरन की कहानी "काली टोपी लाल रुमाल" पढ़ लें)

जब कभी हम दोनों मुट्ठ मारते तो कमरा बंद कर लिया करते थे पर कभी कभी मुझे शक सा होता कि आंटी हम लोगों को ऐसा करते कहीं देख रही है। वो हमें पढ़ाते समय गप्पें भी लगाती और कई बार तो वो चुटकले सुनाते समय मेरी पीठ और कभी कभी मेरी जाँघों पर धौल भी जमा देती थी तो मैं तो मस्त ही हो उठता था। मेरी लुल्ली भी झट से खड़ी होकर बीन बजाने लगती थी। अब तो उसे लुल्ली नहीं लंड कहा जा सकता था। 6 इंच लम्बे और 1.5 इंच मोटे हथियार को लुल्ली तो नहीं कहा जा सकता।

घर में अक्सर वो या तो झीनी नाइटी या फिर टाइट सलेक्स और खुला टॉप पहनती थी जिसमें से उसके बूब्स और चूत की दरारें साफ़ नजर आती थी। कई बार तो उसकी चूत के सामने वाला हिस्सा गीला हुआ भी नजर आ जाता था। जब वो घर पर होती तो शायद ब्रा और पैन्टी नहीं पहनती थी। उसके नितम्ब तो ऐसे लगते थे जैसे कोई दो चाँद या छोटे छोटे फ़ुटबाल आपस में जोड़ दिए हों। दोनों नितम्बों के बीच की खाई तो जैसे दो छोटी छोटी पहाड़ियों के बीच बहती नदी की घाटी ही हो। मांसल जांघें केले के तने की तरह। उरोज तो मोटे मोटे जैसे कंधारी अनार हों। दोनों उरोजों के बीच की घाटी तो जाहिदों (धर्मगुरु) को भी अपनी अपनी तौबा तोड़ने पर मजबूर कर दे।

कभी कभी जब आंटी मेरे हाथों से किताब लेकर अपनी गोद में रखती तो मेरा हाथ भी उसके साथ आंटी की गोद में चला जाता था और मेरे हाथ उनकी जाँघों से और कभी कभार तो चूत के पास छू जाता था। आंटी कोई परवाह नहीं करती थी। मुझे अपने हाथों में आंटी की चूत की गर्मी महसूस हो जाती थी। आप शायद विश्वास नहीं करेंगे आंटी की चूत से बहुत गर्मी निकलती थी और वो गर्मी मुझे किसी रूम हीटर से ज्यादा महसूस होती थी। वो जब कुछ लिखने के लिए झुकती तो उसके बूब्स का एरोला और मूंगफली के दाने जितने निप्पल्स तक दिख जाते थे और मेरा प्यारे लाल (लंड) तो हिलोरें ही मारने लग जाता था।

उस दिन राहुल पढ़ने नहीं आया था शायद बीमार था। आंटी बाथरूम में नहा रही थी। अन्दर से उनकी सुरीली आवाज आ रही थी। लगता था आंटी आज बहुत मूड में है। वो किसी पुरानी फिल्म का गाना गुनगुना रही थी :

तू चंदा मैं चांदनी, तू तरुवर मैं छाँव

तू बादल मैं बिजली, तू पंछी मैं पात …
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:29 PM
Post: #3
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
मैं तो उनकी मीठी आवाज में राजस्थानी विरह गीत सुनकर जैसे सतरंगी दुनिया में ही खोया था। वो नहा कर बाहर आई तो गीले और खुले बाल, भीगे होंठ और टाईट जीन पैन्ट और खुला टॉप पहने किसी अप्सरा से कम तो नहीं लग रही थी। बालों से टपकती पानी की बूँदें तो किसी कुहासे भरी सुबह में घास पर पड़ी शबनम की बूंदों का धोखा दे रही थी। अच्छा मौका देखकर मैं बाथरूम में घुस गया। मेरी निगाह जैसे ही उस जानी पहचानी काली पैन्टी पर पड़ी मैंने उसे उठाकर दो तीन बार सूंघा। मेरा सारा स्नायु तंत्र एक मादक महक से सराबोर हो गया। पैन्टी के बीच में जहां चूत का छेद लगता है वहाँ पर कुछ लेसदार सा सफ़ेद चिपचिपा सा पानी लगा था। मैंने आज पहली बार उसे चाट कर देखा था। वाह क्या मजेदार खट्टा और नमकीन सा स्वाद था। पेशाब, पसीने और नारियल पानी जैसी खुशबू तो मुझे मस्त ही कर गई।

अब मैंने पास में पड़ी नाइटी उठाई और उसे हैंगर पर लगा दिया और पैन्टी को बीच में दो हेयर क्लिप्स के सहारे अटका दिया। अब तो वो नाइटी और पैन्टी ऐसे लग रही थी जैसे सचमुच आंटी गुलबदन ही मेरे सामने खड़ी हों। अब मैंने अपनी पैन्ट और चड्डी नीचे कर ली। मेरा प्यारे लाल तो पहले ही अटेनशन था। मैंने उसकी गर्दन पकड़ी और ऊपर नीचे करके उसे दाना खिलाने लगा। मेरे मुंह से सीत्कार निकलने लगी और मैं बुबुदाने लगा – आह. ईईईइ. य़ाआआ…... आह… मेरी गुलबदन ओह … मेरी जान… मेरी सिमरन हाय… मेरी आंटी… मेरी गुलबदन…

मुझे कोई 7-8 मिनट तो जरूर लगे होंगे। फिर मेरे लंड ने वीर्य की 5-6 पिचकारियाँ छोड़ दी। वीर्य की कुछ बूँदें आंटी की नाइटी और पैन्टी पर भी गिर गई थी। मैं अपने हाथ और लंड को साफ़ करके जैसी ही बाहर आया आंटी बाहर सोफे पर बैठी जैसे मेरा इन्तजार ही कर रही थी। उन्होंने मुझे इशारे से अपनी ओर बुलाया और अपने पास बैठा लिया।

"अच्छा चंदू एक बात बताओ ?" आंटी ने पूछा। आप भी सोच रहे होंगे चंदू … ओह मेरा पूरा नाम ‘प्रेम चन्द्र माथुर’ है ना। मैं प्रेमगुरु तो बाद में बना हूँ। मुझे घरवाले और जानने वाले बचपन में चंदू ही कहकर बुलाते थे।

"जी आंटी … ?" मैंने आश्चर्य से उनकी ओर देखा।

"ये गुलबदन कौन है ?"

मैं चोंका "वो… वो … क… कोई नहीं …!"

"तो फिर बाथरूम में तुम यह नाम लेकर क्या बड़बड़ा रहे थे ?"

"वो… वो…" मैंने अपनी नजरें झुका ली। मैं तो डर के मारे थर थर कांपने लगा। मेरी चोरी आज पकड़ी गई थी।

"क्या राहुल भी ऐसा करता है ?"

मैं क्या बोलता ? पर जब आंटी ने दुबारा पूछा तो मैं होले से बोला "हाँ, कभी कभी !"

"देखो ये सब चीजें तुम्हारे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। अभी तुम बच्चे हो।"

मैं अपना सिर झुकाए बैठा रहा। आंटी ने कहना चालू रखा,"किसी विषय का उचित और पर्याप्त ज्ञान ना होने पर उस विषय में भ्रांतियां होना स्वाभाविक हैं। हमारे समाज में यौन शिक्षा का प्रचलन नहीं है इसे अशोभनीय माना जाता है इसलिए युवक-युवतियों के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं का उचित समाधान नहीं हो पाता जिस से वे ग़लतफ़हमी के शिकार हो जाते हैं और कई यौन रोगों से भी पीड़ित हो जाते हैं। अब हस्तमैथुन के बारे में ही कितनी भ्रांतियां हैं कि हस्तमैथुन से दुर्बलता, कमजोरी, पुरुषत्व हीनता और नपुन्सकता आ जाती है। कुछ तो यह भी मानते हैं कि वीर्य की एक बूँद खून की 100 बूंदों से बनती है। यह गलत धारणा है। वीर्य और खून पूरी तरह शरीर के दो अलग अलग पदार्थ हैं जिनका आपस में कोई लेना देना नहीं होता। पर यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि अति तो हर जगह ही वर्जित होती है, ज्यादा हस्तमैथुन नहीं करना चाहिए"

"सॉरी … आंटी मैं फिर ऐसा नहीं करूंगा !" जैसे मेरी जान छूटी। उसे क्या पता अब मैं बच्चा नहीं, पूरा जवान नहीं तो कम से कम दो तीन बार तो किसी को भी चोदने लायक तो हो ही गया हूँ।

"अरे नहीं, जवान लड़के और लड़कियों का कभी कभार मुट्ठ मार लेना अच्छा रहता है। अगर मुट्ठ नहीं मारोगे तो रात को वीर्य अपने आप निकल जाता है जिसे स्वप्नदोष कहते हैं। तुम्हें भी होता है क्या ?"

"हाँ, कई बार रात को मेरी चड्डी गीली हो जाती है !" मैंने बताया।

"ओह... तुम एक काम करना ! एक ग्राम मुलेठी के चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर पी लिया करो फिर अधिक स्वप्नदोष नहीं होगा !"

वो अपने एक हाथ को अपनी दोनों जाँघों के बीच रखे हुए थी और वहाँ बार बार दबा रही थी। फिर अपनी जाँघों को भींचते हुए बोली,"मैं जानती हूँ तुम अब जवान होने जा रहे हो। सेक्स के बारे में तुम्हारी उत्सुकता को मैं अच्छी तरह समझती हूँ। तुम्हारे मन में सेक्स से सम्बंधित कई प्रश्न होंगे? है ना ?"

मैं चुपचाप बैठा उनकी बातें सुनता रहा। उसने आगे कहना जारी रखा :

"ठीक है इस समय अगर तुम्हें सही दिशा और ज्ञान नहीं मिला तो तुम गलत संगत में पड़कर अपनी सेहत और पढ़ाई दोनों चौपट कर लोगे !" आंटी ने एक जोर का सांस छोड़ते हुए कहा। वो कुछ देर रुकी, फिर मुझसे पूछा "तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है ?"

वैसे तो मैं सिमरन को बहुत चाहता था पर मैंने उस समय कहा,"नहीं"

"अच्छा चलो बताओ तुम्हें कोई लड़की अच्छी लगती है?" मैं फिर चुप लगा गया।

आंटी ने फिर पूछा "सिमरन कैसी है ?"

मैं चौंक गया, मेरे लिए अब उलझन का समय था। मेरी हिचकिचाहट देख कर आंटी बोली,"देखो डरने की कोई बात नहीं है। मैं तो बस इसलिए पूछ रही हूँ कि तुम्हें ठीक से समझा सकूं !"

"हाँ मुझे सिमरन बहुत अच्छी लगती है !"

"ओह्हो …" आंटी ने एक लम्बा सांस लिया और फिर मुस्कुराते हुए बोली,"अच्छा यह बताओ कि तुम्हें सिमरन को देख कर क्या महसूस होता है ?"

"वो … वो … बस मुझे अच्छी लगती है ?" मेरे मुंह से बस इतना ही निकला। मेरे मन में तो आया कि कह दूं मुझे उसके नितम्ब और स्तन बहुत अच्छे लगते हैं, मैं उसे बाहों में लेकर चूमना और चोदना चाहता हूँ पर यह कहने की मेरी हिम्मत कहाँ थी।
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:29 PM
Post: #4
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
"साफ़ साफ़ बताओ उसे देखकर क्या होता है ? शरमाओ नहीं…"

"वो… वो…. मुझे उसके नितम्ब और स्तन अच्छे लगते हैं !"

"क्यों ऐसा क्या है उनमें ?"

"वो बहुत बड़े बड़े और गोल गोल हैं ना ?"

"ओह … तो तुम्हें बड़े बड़े नितम्ब और उरोज अच्छे लगते हैं ?"

"हूँ …"

"और क्या होता है उन्हें देखकर ?"

मेरा मन तो कह रहा था कह दूं, 'और मेरा लंड खड़ा हो जाता है मैं उसे चोदना चाहता हूँ' पर मेरे मुंह से बस इतना ही निकला "मेरा मेरा … वो मेरा मतलब है … कि … मैं उन्हें … छूना चाहता हूँ !"

"बस छूना ही चाहते हो या... कुछ और भी ?"

"हाँ चूमना भी … और … और.."

"क्या सिमरन से कभी इस बारे में बात की ?

"नहीं… वो तो मुझे घास ही नहीं डालती !"

आंटी की हंसी निकल गई। माहौल अब कुछ हल्का और खुशनुमा हो चला था।

"अच्छा तो तुम उसका घास खाना चाहते हो? मतलब की … तुम उसे … ?"

आंटी के हंसने से मेरी भी झिझक खुल गई थी और मेरे मुंह से पता नहीं कैसे निकल गया "हाँ मैं उसे चोद… ना …" पर मैं बीच में ही रुक गया।

"चुप बदमाश ! शैतान कहीं का ?" आंटी ने मेरी नाक पकड़ कर दबा दी। मैं तो मस्त ही हो गया मैं तो बल्लियों उछलने लगा।

"अच्छा चलो ये बताओ कि तुम्हें सेक्स के बारे में क्या क्या मालूम है? एक लड़का या मर्द किसी लड़की या औरत के साथ क्या क्या करता है…?" आंटी ने पूछा।

"उसे बाहों में लेता है और चूमता है और फिर … चोदता है !" मैंने इस बार थोड़ी हिम्मत दिखाई।

"ओह्हो … तुम तो पूरे गुरु बन गए हो ?" आंटी ने आश्चर्य से मुझे देखा।

"आपका ही शागिर्द हूँ ना ?" मैंने भी मस्का लगा दिया।

"अच्छा क्या तुम पक्के प्रेम गुरु बनना चाहोगे ?"

"येस… हाँ …"

"ठीक है मैं तुम्हें पूरी ट्रेनिंग देकर पक्का ‘प्रेम गुरु’ बना दूँगी … पर मुझे गुरु दक्षिणा देनी होगी… क्या तुम तैयार हो ?"

"हाँ" मैं तो इस प्रस्ताव को सुनकर ख़ुशी के मारे झूम ही उठा।

"चलो आज से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू !"

"ठीक है !"

आंटी कुछ देर रुकी फिर उसने बताना चालू किया "देखो प्रेम या चुदाई का पहला सबक (पाठ) है कि सारी शर्म छोड़ कर इस जीवन का और सेक्स का पूरा आनंद लेना चाहिए। प्रेम में शरीर का कोई भी अंग या क्रिया कुछ भी गन्दा, बुरा, कष्टप्रद नहीं होता। यह तो गंदे लोगों की नकारात्मक सोच है। वास्तव में देखा जाए तो प्रेम जैसी नैसर्गिक और सदियों से चली आ रही इस क्रिया में विश्वास, पसंद, सम्मान, ईमानदारी, सुरक्षा और अंतरंगता होती है !"

आंटी ने बताना शुरू किया। मैं तो चुपचाप सुनता ही रहा। वो आगे बोली : सेक्स को चुदाई जैसे गंदे और घटिया नाम से नहीं बुलाना चाहिए। इसे तो बस प्रेम ही कहना चाहिए। अपनी प्रेमिका या प्रेमी के सामने अगर प्रेम अंगों का नाम लेने में संकोच हो तो इनके लिए बड़े सुन्दर शब्द हैं जिन्हें प्रयोग में लाया जा सकता है। जैसे लंड के लिए शिश्न, मिट्ठू, पप्पू, कामदण्ड, मनमोहन या फिर प्यारे लाल, चूत के लिए योनि, भग, मदनमंदिर, मुनिया और रानी। गांड के लिए गुदा, महारानी या मुनिया की सहेली। स्तन को अमृत कलश या उरोज और चूतडों के लिए नितम्ब कहना सुन्दर लगता है। हाँ चुदाई को तो बस प्रेम मिलन, यौन संगम या रति क्रिया ही कहना चाहिए। जब उन्होंने गुदा मैथुन का नाम गधापचीसी बताया तो मेरी हंसी निकल गई।

हातिमताई की तरह सेक्स (प्रेम) के भी सात सबक (पाठ) होते हैं जो कि लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए लगभग समान होते हैं। अब मैं तुम्हें प्रेम के सातों सबक सिलसिलेवार (क्रमशः) बताउंगी। ये इस प्रकार होते हैं :

1. आलिंगन 2. चुम्बन 3. उरोजों को मसलना और चूसना 4. आत्म रति (हस्त मैथुन- मुट्ठ मारना) 5. प्रेम अंगों को चूसना 6. सम्भोग (चुदाई नहीं प्रेम मिलन) 7. गुदा मैथुन (गांडबाज़ी)

मैं तो मुंह बाए सुनता ही रह गया। मैं तो सोचता था कि बस चूत में लंड डालो और धक्के लगाकर पानी निकाल दो। ओह … असली सेक्स की बारीकियां तो आंटी ने ही बताई हैं। आंटी आगे बोली,"देखो, एक एक सबक ध्यान से सुनना, तभी तुम पूरे सेक्स गुरु … नहीं… प्रेम गुरु बन पाओगे"

"ठीक है मैडम!"

"फिर गलत ? देखो प्रेम (सेक्स) में मैडम या मिस्टर नहीं होता। प्रेम (चुदाई) में अंतरंगता (निकटता) बहुत जरुरी होती है। अपने प्रेमी या प्रेयसी को प्रेम से संबोधित करना चाहिए। तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड और प्रेमिका ही समझो और मैं भी ट्रेनिंग के दौरान तुम्हें अपना प्रेमी ही समझूंगी।"

"ठीक है गुरु जी … ओह … डार … डार्लिंग !"

"यह हुई ना बात … तुम मुझे चांदनी बुला सकते हो। हाँ तो शुरू करें ?"

"हाँ"
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:29 PM
Post: #5
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
1. आलिंगन

आंटी ने बताना शुरू किया : आलिंगन का अपना ही सुख और आनंद होता है। जब रात की तन्हाई में अपने प्रेमी या प्रेमिका की याद सताती है तो बरबस तकिया बाहों में भर लेने को जी चाहता है। ऐसा करने से कितनी राहत और सुकून मिलाता है तुम अभी नहीं जान पाओगे। इसी आलिंगन के आनंद के कारण ही तो प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे की बाहों में जीने मरने की कसमें खाते हैं। पहली बार जब अपनी प्रेयसी को बाहों में भरना हो तो यह मत सोचो की बस उसे धर दबोचना है ? ना… कभी नहीं… कोई जोर जबरदस्ती नहीं… होले से उसे अपनी बाहों में भरना चाहिए ताकि वो अपने शेष जीवन में उस पहले आलिंगन को अपनी स्मृतियों में संजो कर रखे।

आंटी ने अपनी बाहें मेरी ओर बढ़ा दी। मैं तो जैसे जादू से बंधा उनकी बाहों में समा गया। उसके बदन की मादक महक से मेरा स्नायु-तंत्र जैसे सराबोर हो गया। हालांकि वो अभी अभी नहा कर आई थी पर उनके बदन की महक तो मुझे मदहोश ही कर गई। मैं उनकी छाती से चिपक गया। उनके गुदाज और मोटे मोटे उरोज ठीक मेरे मुंह के पास थे। उनके दोनों उरोज तो ऐसे लग रहे थे जैसे कोई दो कबूतर ही हों। और उनकी घुन्डियाँ तो ऐसे तीखी हो गई थी मानो पेंसिल की टिप हों। मेरा मन तो कर रहा था कि उनको चूम लूं पर आंटी के बताये बिना ऐसा करना ठीक नहीं था। उनकी कांख से आती तीखी और नशीली खुशबू तो जैसे मुझे बेहोश ही कर देने वाली थी। उनकी गर्म साँसें मुझे अपने चेहरे पर साफ़ महसूस हो रही थी। उनका एक हाथ मेरी पीठ सहला रहा था और दूसरा हाथ सिर के बालों पर।

मैंने भी अपना एक हाथ उनके नितम्बों पर फिराना चालू कर दिया। मोटे मोटे दो फ़ुटबाल जैसी नरम नाजुक कसे हुए नितम्ब गोल मटोल। मैंने अपने आप को उसकी गहरी खाई में भी अपनी अंगुलियाँ फिराने से नहीं रोक पाया। मेरा लंड तो तन कर पैन्ट में उधम ही मचाने लगा था। पता नहीं कितनी देर हम दोनों इसी तरह आँखें बंद किये जैसे किसी जादू से बंधे आपस में बाहों में जकड़े खड़े रहे। मैं अब तक इस रोमांच से अपरिचित ही था। मुझे तो लगा मैं तो सपनों की सतरंगी दुनिया में ही पहुँच गया हूँ। इस प्रेम आलिंगन की रस भरी अनुभूति का वर्णन करना मेरे लिए संभव नहीं है।

आंटी ने अपनी आँखें खोली और मेरे चहरे को अपने हाथों में ले लिया और मेरी आँखों में देखने लगी। मैंने देखा उनकी आँखों में लाल डोरे तैरने लगे हैं।

वो बोली,"देखो चंदू आलिंगन का अर्थ केवल एक दूसरे को बाहों में भरना ही नहीं होता। यह दो शरीरों का नहीं आत्माओं के मिलन की तरह महसूस होना चाहिए। एक मजेदार बात सुनो- जैसे घोड़ा, फोड़ा और लौड़ा सहलाने से बढ़ते हैं उसी तरह वक्ष, चूतड़ और मर्ज दबाने से बढ़ते हैं। इसलिए अपनी साथी के सभी अंगों को दबाना और सहलाना चाहिए। शरीर के सारे अंगो को प्रेम करना चाहिए।"

सम्भोग के दौरान तो आलिंगन अपने आप हो जाता है और उसके अलावा भी यदि अपनी प्रेयसी के गुदाज़ बदन को बाहों में भर लिया जाए तो असीम आनंद की अनुभूति होती है। उस समय अपने प्रेमी या प्रेमिका का भार फूलों से भी हल्का लगता है।

थोड़ी देर बाद वो घूम गई और मैंने पीछे से उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया। आह उनके गुदाज नितम्बों की खाई में मेरा मिट्ठू तो ठोकरें ही खाने लगा था। मैंने एक हाथ से उनके उरोज पकड़ रखे थे और दूसरा हाथ कभी उनके पेट, कभी कमर और कभी उनकी जाँघों के बीच ठीक उस जगह फिरा रहा था जहां स्वर्ग गुफा बनी होती है। उन्होंने अपने हाथ ऊपर करके मेरी गर्दन पर जैसे लपेट ही लिए। उनके बगलों और लम्बे बालों से आती मीठी महक ने तो मुझे मदहोश ही कर दिया। पता नहीं हम इसी तरह एक दूसरे से लिपटे कितनी देर खड़े रहे।
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:29 PM
Post: #6
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
2. चुम्बन

पाश्चात्य देशों और संस्कृति में तो शादी के बाद प्रथम चुम्बन का विशेष महत्व है। भारतीय परंपरा में भी माथे और गालों का प्रेम भरा चुम्बन लिया ही जाता है।

आंटी बोली "देखो चंदू वैसे तो अपनी प्रेमिका और प्रेमी का ऊपर से लेकर नीचे तक सारे अंगों का ही चुम्बन लिया जाता है पर सबसे प्रमुख होता है अधरों (होंठों) का चुम्बन। लेकिन ध्यान रखो कि तुमने ब्रुश ठीक से कर लिया है और कोई खुशबूदार चीज अपने मुंह में रख ली है"

"चुम्बन प्रेम का प्यारा सहचर है। चुम्बन हृदय स्पंदन का मौन सन्देश है और प्रेम गुंजन का लहराता हुआ कम्पन है, प्रेमाग्नि का ताप और दो हृदयों के मिलन की छाप है। यह तो नवजीवन का प्रारम्भ है। अपने प्रेमी या प्रेमिका का पहला चुम्बन तो अपने स्मृति मंदिर में मूर्ति बना कर रखा जाता है।"

अब आंटी ने होले से अपने कांपते हुए अधरों को मेरे होंठों पर रख दिया। मिन्ट की मीठी और ठंडी खुशबू मेरे अन्दर तक समा गई। संतरे की फांकों और गुलाब की पत्तियों जैसे नर्म नाज़ुक रसीले होंठ मेरे होंठों से ऐसे चिपक गए जैसे कि कोई चुम्बक हों। फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे होंठों पर फिराई। पता नहीं कितनी देर मैं तो मंत्रमुग्ध सा अपने होश-ओ-हवास खोये खड़ा रहा। मेरा मुंह अपने आप खुलता गया और आंटी की जीभ तो मानो इसका इन्तजार ही कर रही थी। उन्होंने गप्प से अपनी लपलपाती जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मैंने भी मिश्री और शहद की डली की तरह उनकी जीभ को अपने मुंह में भर लिया और किसी कुल्फी की तरह चूसने लगा। फिर उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाल ली और मेरा ऊपर का होंठ अपने मुंह में भर लिया। ऐसा करने से उनका निचला होंठ मेरे मुंह में समा गया। जैसे किसी ने शहद की कुप्पी ही मेरे मुंह में दे दी हो। मैं तो चटखारे लेकर उन्हें चूसता ही चला गया। ऐसा लग रहा था जैसे हमारा यह चुम्बन कभी ख़त्म ही नहीं होगा।

एक दूसरे की बाहों में हम ऐसे लिपटे थे जैसे कोई नाग नागिन आपस में गुंथे हों। उनकी चून्चियों के चुचूकों की चुभन मेरी छाती पर महसूस करके मेरा रोमांच तो जैसे सातवें आसमान पर ही था। फिर उन्होंने मेरे गालों, नाक, ठोड़ी, पलकों, गले और माथे पर चुम्बनों की जैसे झड़ी ही लगा दी। अब मेरी बारी थी मैं भला पीछे क्यों रहता मैं भी उनके होंठ, गाल, माथे, थोड़ी, नाक, कान की लोब, पलकों और गले को चूमता चला गया। उनके गुलाबी गाल तो जैसे रुई के फोहे थे। सबसे नाज़ुक तो उनके होंठ थे बिल्कुल लाल सुर्ख। मैं तो इतना उत्तेजित हो गया था कि मुझे तो लगने लगा था मैं पैन्ट में ही झड़ जाऊँगा।
अचानक कॉल-बेल बजी तो हम दोनों ही चौंक गए और ना चाहते हुए भी हमें अलग होना पड़ा। अपने भीगे होंठों को लिए आंटी मेन-गेट की ओर चली गई।


आह … आज 14 साल के बाद भी मुझे उस का जादुई स्पर्श और प्रथम चुम्बन जब याद आता है मैं तो रोमांच से भर उठता हूँ।
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:30 PM
Post: #7
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
3. उरोजों को मसलना और चूसना

शाम के कोई चार बजे होंगे। आज मैंने सफ़ेद पेंट और पूरी बाजू वाली टी-शर्ट पहनी थी। आंटी ने भी काली जीन पेंट और खुला टॉप पहना था। आज तीसरा सबक था। आज तो बस अमृत कलशों का मज़ा लूटना था। ओह… जैसे दो कंधारी अनार किसी ने टॉप के अन्दर छुपा दिए हों आगे से एक दम नुकीले। मैं तो दौड़ कर आंटी को बाहों में ही भरने लगा था कि आंटी बोली,"ओह .. चंदू…. जल्दबाजी नहीं ! ध्यान रखो ये प्रेमी-प्रेमिका का मिलन है ना कि पति पत्नी का। इतनी बेसब्री (आतुरता) ठीक नहीं। पहले ये देखो कोई और तो नहीं है आस पास ?"

"ओह … सॉरी…. गलती हो गई" मेरा उत्साह कुछ ठंडा पड़ गया। मैं तो रात भर ठीक से सो भी नहीं पाया था। सारी रात आंटी के खयालों में ही बीत गई थी कि कैसे कल... उसे बाहों में भर कर प्यार करूंगा और उसके अमृत कलशों को चूसूंगा।

"चलो बेडरूम में चलते हैं !"

हम बेडरूम में आ गए। अब आंटी ने मुझे बाहों में भर लिया और एक चुम्बन मेरे होंठों पर ले लिया। मैं भी कहाँ चूकने वाला था मैंने भी कस कर उनके होंठ चूम लिए।

"ओह्हो … एक दिन की ट्रेनिंग में ही तुम तो चुम्बन लेना सीख गए हो !" आंटी हंस पड़ी। जैसे कोई जलतरंग छिड़ी हो या वीणा के तार झनझनाएं हों। हंसते हुए उनके दांत तो चंद्रावल का धोखा ही दे रहे थे। उनके गालों पर पड़ने वाले गड्ढे तो जैसे किसी को कत्ल ही कर दें।

हम दोनों पलंग पर बैठ गए। आंटी ने कहा "तुम्हें बता दूं- कुंवारी लड़कियों के उरोज होते हैं और जब बच्चा होने के बाद इनमें दूध भर जाता है तो ये अमृत-कलश (बूब्स या स्तन) बन जाते हैं। दोनों को चूसने का अपना ही अंदाज़ और मज़ा होता है। सम्भोग से पहले लड़की के स्तनों को अवश्य चूसना चाहिए। स्तनों को चूसने से उनके कैंसर की संभावना नष्ट हो जाती है। आज का सबक है उरोजों या चुन्चियों को कैसे चूसा जाता है !"

कुदरत ने स्तनधारी प्राणियों के लिए एक माँ को कितना अनमोल तोहफा इन अमृत-कलशों के रूप में दिया है। तुम शायद नहीं जानते कि किसी खूबसूरत स्त्री या युवती की सबसे बड़ी दौलत उसके उन्नत और उभरे उरोज ही होते हैं।

काम प्रेरित पुरुष की सबसे पहली नज़र इन्हीं पर पड़ती है और वो इन्हें दबाना और चूसना चाहता है। यह सब कुदरती होता है क्योंकि इस धरती पर आने के बाद उसने सबसे पहला भोजन इन्हीं अमृत कलसों से पाया था। अवचेतन मन में यही बात दबी रहती है इसीलिए वो इनकी ओर ललचाता है।

"सुन्दर, सुडौल और पूर्ण विकसित स्तनों के सौन्दर्याकर्षण में महत्वपूर्ण योगदान है। इस सुखद आभास के पीछे अपने प्रियतम के मन में प्रेम की ज्योति जलाए रखने तथा सदैव उसकी प्रेयसी बनी रहने की कोमल कामना भी छिपी रहती है। हालांकि मांसल, उन्नत और पुष्ट उरोज उत्तम स्वास्थ्य व यौवन पूर्ण सौन्दर्य के प्रतीक हैं और सब का मन ललचाते हैं पर जहां तक उनकी संवेदनशीलता का प्रश्न है स्तन चाहे छोटे हों या बड़े कोई फर्क नहीं होता। अलबत्ता छोटे स्तन ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:30 PM
Post: #8
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
कुछ महिलायें अपनी देहयष्टि के प्रति ज्यादा फिक्रमंद (जागरुक) होती हैं और छोटे स्तनों को बड़ा करवाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवा लेती हैं बाद में उन्हें कई बीमारियों और दुष्प्रभावों से गुजरना पड़ सकता है। उरोजों को सुन्दर और सुडौल बनाने के लिए ऊंटनी के दूध और नारियल के तेल का लेप करना चाहिए।

इरानी और अफगानी औरतें तो अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए ऊंटनी या गधी के दूध से नहाया करती थी। पता नहीं कहाँ तक सच है कुछ स्त्रियाँ तो संतरे के छिलके, गुलाब और चमेली के फूल सुखा कर पीस लेती हैं और फिर उस में अपने पति के वीर्य या शहद मिला कर चहरे पर लगाती हैं जिस से उनका रंग निखरता है और कील, झाइयां और मुहांसे ठीक हो जाते हैं !"

आंटी ने आगे बताया,"सबसे पहले धीरे धीरे अपनी प्रेमिका का ब्लाउज या टॉप उतरा जाता है फिर ब्रा। कोई जल्दबाजी नहीं आराम से। उनको प्यार से पहले निहारो फिर होले से छुओ। पहले उनकी घुंडियों को फिर एरोला को, फिर पूरे उरोज को अपने हाथों में पकड़ कर धीरे धीरे सहलाओ और मसलो मगर प्यार से। कुछ लड़कियों का बायाँ उरोज दायें उरोज से थोड़ा बड़ा हो सकता है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती। दरअसल बाईं तरफ हमारा दिल होता है इसलिए इस उरोज की ओर रक्तसंचार ज्यादा होता है।

यही हाल लड़कों का भी होता है। कई लड़कों का एक अन्डकोश बड़ा और दूसरा छोटा होता है। गुप्तांगों के आस पास और उरोजों की त्वचा बहुत नाजुक होती है जरा सी गलती से उनमें दर्द और गाँठ पड़ सकती है इसलिए इन्हें जोर से नहीं दबाना चाहिए। प्यार से उन पर पहले अपनी जीभ फिराओ, चुचुक को होले से मुंह में लेकर जीभ से सहलाओ और फिर चूसो।"

मैंने धड़कते दिल से उनका टॉप उतार दिया। उन्होंने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। दो परिंदे जैसे आजाद हो कर बाहर निकल आये। टॉप उतारते समय मैंने देखा था उनकी कांख में छोटे छोटे रेशम से बाल हैं। उसमें से आती मीठी नमकीन और तीखी गंध से मैं तो मस्त ही हो गया।

मेरा मिट्ठू तो हिलोरे ही लेने लगा। मुझे लगा तनाव के कारण जैसे मेरा सुपाड़ा फट ही जाएगा। मैं तो सोच रहा था कि एक बार चोद ही डालूं ये प्रेम के सबक तो बाद में पढ़ लूँगा पर आंटी की मर्जी के बिना यह कहाँ संभव था।

आंटी पलंग पर चित्त लेट गई और मैं घुटनों के बल उनके पास बैठ गया। अब मैंने धीरे से उनके एक उरोज को छुआ। वो सिहर उठी और उनकी साँसें तेज होने लगी। होंठ कांपने लगे। मेरा भी बुरा हाल था। मैं तो रोमांच से लबालब भरा था। मैंने देखा एरोला कोई एक इंच से बड़ा तो नहीं था। गहरे गुलाबी रंग का। निप्पल तो चने के दाने जितने जैसे कोई छोटा सा लाल मूंगफली का दाना हो। हलकी नीली नसें गुलाबी रंग के उरोजों पर ऐसे लग रही थी जैसे कोई नीले रंग के बाल हों। मैं अपने आप को कैसे रोक पता। मैंने होले से उसके दाने को चुटकी में लेकर धीरे से मसला और फिर अपने थरथराते होंठ उन पर रख दिए। आंटी के शरीर ने एक झटका सा खाया। मैंने तो गप्प से उनका पूरा उरोज ही मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आह… क्या रस भरे उरोज थे। आंटी की तो सिस्कारियां ही कमरे में गूंजने लगी।

"अह्ह्ह चंदू और जोर से चूसो और जोर से …. आह… सारा दूध पी जाओ मेरे प्रेम दीवाने …. आह आज दो साल के बाद किसी ने …. आह… ओईई …माआअ ……" पता नहीं आंटी क्या क्या बोले जा रही थी। मैं तो मस्त हुआ जोर जोर से उनके अमृत कलसों को चूसे ही जा रहा था। मैं अपनी जीभ को उनकी निप्पल और एरोला के ऊपर गोल गोल घुमाते हुए परिक्रमा करने लगा। बीच बीच में उनके निप्पल को भी दांतों से दबा देता तो आंटी की सीत्कार और तेज हो जाती। उन्होंने मेरे सिर के बालों को कस कर पकड़ लिया और अपनी छाती की ओर दबा दिया। उनकी आह… उन्ह … चालू थी। मैंने अब दूसरे उरोज को मुंह में भर लिया। आंटी की आँखें बंद थी।

मैंने दूसरे हाथ से उनका पहले वाला उरोज अपनी मुट्ठी में ले लिया और उसे मसलने लगा। मुझे लगा कि जैसे वो बिल्कुल सख्त हो गया है। उसके चुचूक तो चमन के अंगूर (पतला और लम्बा) बन गए हैं एक दम तीखे, जैसे अभी उन में से दूध ही निकल पड़ेगा। मेरे थूक से उनकी दोनों चूचियां गीली हो गई थी। मेरा लंड तो प्री-कम छोड़ छोड़ कर पागल ही हुआ जा रहा था। मेरा अंदाजा है कि आंटी की चूत ने भी अब तो पानी छोड़ छोड़ कर नहर ही बना दी होगी पर उसे छूने या देखने का अभी समय नहीं आया था। आंटी ने अपने जांघें कस कर बंद कर रखी थी। जीन पेंट में फसी चूत वाली जगह फूली सी लग रही थी और कुछ गीली भी। जैसे ही मैंने उनके चुचूक को दांतों से दबाया तो उन्होंने एक किलकारी मारी और एक ओर लुढ़क गई। मुझे लगा की वो झड़ (स्खलित) गई है।
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:30 PM
Post: #9
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
4. आत्मरति (हस्तमैथुन-मुट्ठ मारना)

किसी ने सच ही कहा है "सेक्स एक ब्रिज गेम की तरह है ; अगर आपके पास एक अच्छा साथी नहीं है तो कम से कम आपका हाथ तो बेहतर होना चाहिए !"

सेक्स के जानकार बताते हैं कि 95 % स्वस्थ पुरुष और 50 % औरतें मुट्ठ जरूर मारते हैं। जब कोई साथी नहीं मिलता तो उसको कल्पना में रख कर ! बस यही तो एक उपाय या साधन है अपनी आत्मरति और काम क्षुधा (भूख) को मिटाने का। और मैं और आंटी भी तो इसी जगत के प्राणी थे, मुट्ठ मारने की ट्रेनिंग तो सबसे ज्यादा जरूरी थी। आंटी ने बताया था कि जो लोग किशोर अवस्था में ही हस्तमैथुन शुरू कर देते हैं वे बड़ी आयु तक सम्भोग कार्य में सक्षम बने रहते हैं। उन्हें बुढ़ापा भी देरी से आता है और चेहरे पर झुर्रियाँ भी कम पड़ती हैं। कई बार लड़के आपस में मिलकर मुट्ठ मारते हैं वैसे ही लड़कियां भी आपस में एक दूसरे की योनि को सहला देती हैं और कई बार तो उसमें अंगुली भी करती हैं। मुझे बड़ी हैरानी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार तो प्रेमी-प्रेमिका (पति-पत्नी भी) आपस में एक दूसरे की मुट्ठ मारते हैं। मेरे पाठकों और पाठिकाओं को तो जरूर अनुभव रहा होगा ? एक दूसरे की मुट्ठ मारने का अपना ही आनंद और सुख होता है। कई बार तो ऐसा मजबूरी में किया जाता है। कई बार जब नव विवाहिता पत्नी की माहवारी चल रही हो और वो गांड मरवाने से परहेज करे तो बस यही एक तरीका रह जाता है अपने आप को संतुष्ट करने का।

खैर ! अब चौथे सबक की तैयारी थी। आंटी ने बताया था कि अगर अकेले में मुट्ठ मारनी हो तो हमेंशा शीशे के सामने खड़े होकर मारनी चाहिए और अगर कोई साथी के साथ करना हो तो पलंग पर करना अच्छा रहता है। अब आंटी ने मेरी पेंट उतार दी। आंटी के सामने मुझे नंगा होने में शर्म आ रही थी। मेरा 6 इंच लम्बा लंड तो 120 डिग्री पर पेट से चिपकाने को तैयार था। उसे देखते ही आंटी बोली,"वाह…. तुम्हारा मिट्ठू तो बहुत बड़ा हो गया है ?"

"पर मुझे तो लगता है मेरा छोटा है। मैंने तो सुना है कि यह 8-9 इंच का होता है ?"

"अरे नहीं बुद्धू आमतौर पर हमारे देश में इसकी लम्बाई 5-6 इंच ही होती है। फालतू किताबें पढ़ कर तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। एक बात तुम्हें सच बता रही हूँ- यह केवल भ्रम ही होता है कि बहुत बड़े लिंग से औरत को ज्यादा मज़ा आएगा। योनि के अन्दर केवल 3 इंच तक ही संवेदनशील जगह होती है जिसमें औरत उत्तेजना महसूस करती है। औरत की संतुष्टि के लिए लिंग की लम्बाई और मोटाई कोई ज्यादा मायने नहीं रखती। सोचो जिस योनि में से एक बच्चा निकल सकता है उसे किसी मोटे या पतले लिंग से क्या फर्क पड़ेगा। लिंग कितना भी मोटा क्यों ना हो योनि उसके हिसाब से अपने आप को फैलाकर लिंग को समायोजित कर लेती है। तुमने देखा होगा गधे का लंड कितना बड़ा होता है लेकिन गधी उसे भी बिना किसी रुकावट के ले पूरा अन्दर ले लेती है।"

"फिर भी एक बात बताओ- अगर मुझे अपना लिंग और बड़ा और मोटा करना हो तो मैं क्या करूं ? मैंने कहीं पढ़ा था कि अपने लिंग पर रात को शहद लगा कर रखा जाए तो वो कुछ दिनों में लम्बा और सीधा भी हो जाता है। मेरा लिंग थोड़ा सा टेढ़ा भी तो है ?"

"देखो कुदरत ने सारे अंग एक सही अनुपात में बनाए हैं। जैसे हर आदमी का कद (लम्बाई) अपनी एक बाजू की कुल लम्बाई से ढाई गुना बड़ा होता है। हमारे नाक की लम्बाई हमारे हाथ के अंगूठे जितनी बड़ी होती है। आदमी और लिंग की लम्बाई वैसे तो वंशानुगत होती है पर लम्बाई बढ़ाने के लिए रस्सी कूदना और हाथों के सहारे लटकाना मदद कर सकता है। लिंग की लम्बाई बढाने के लिए तुम एक काम कर सकते हो- नारियल के तेल में चुकंदर का रस मिलकर मालिश करने से लिंग पुष्ट हो जाता है। और यह शहद वाली बात तो मिथक है। यह टेढ़े लिंग वाली बात तुम जैसे किशोरों की ही नहीं, हर आयु वर्ग में पाई जाने वाली भ्रान्ति है। लिंग टेढ़ा होना कोई बीमारी नहीं है। कुदरती तौर पर लिंग थोड़े से टेढ़े हो सकते हैं और उसका झुकाव ऊपर नीचे दाईं या बाईं ओर भी हो सकता है। सम्भोग में इन बातों का कोई फर्क नहीं पड़ता। ओह... तुम भी किन फजूल बातों में फंस गए ?"
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-26-2012, 10:31 PM
Post: #10
RE: आंटी गुलबदन और सेक्स के सात सबक
और फिर आंटी ने भी अपनी जीन उतार दी। अब तो वो नीले रंग की एक झीनी सी पैंटी में थी। ओह … डबल रोटी की तरह एक दम फूली हुई आगे से बिलकुल गीली थी। पतली सी पैंटी के दोनों ओर काली काली झांट भी नज़र आ रही थी। गोरी गोरी मोटी पुष्ट जांघें केले के पेड़ की तरह। जैसे खजुराहो के मंदिरों में बनी मूर्ति हो कोई। मैं तो हक्का बक्का उस हुस्न की मल्लिका को देखता ही रह गया। मेरा तो मन करने लगा था कि एक चुम्बन पैंटी के ऊपर से ही ले लूं पर आंटी ने कह रखा था कि हर सबक सिलसिलेवार (क्रमबद्ध) होने चाहियें कोई जल्दबाजी नहीं, अपने आप पर संयम रखना सीखो। मैं मरता क्या करता अपने होंठों पर जीभ फेरता ही रह गया।

आंटी ने बड़ी अदा से अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे और अपनी पैंटी को नीचे खिसकाने लगी।

गहरी नाभि के नीचे का भाग कुछ उभरा हुआ था। पहले काले काले झांट नजर आये और फिर स्वर्ग के उस द्वार का वो पहला नजारा। मुझे तो लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते बाहर ही आ जाएगा। मैं तो उनकी चूत को देखता ही रह गया। काले घुंघराले झांटों के झुरमुट के बीच मोटे मोटे बाहरी होंठों वाली चूत रोशन हो गई। उन फांकों का रंग गुलाबी तो नहीं कहा जा सकता पर काला भी नहीं था। कत्थई रंग जैसे गहरे रंग की मेहंदी लगा रखी हो। चूत के अन्दर वाले होंठ तो ऐसे लग रहे थे जैसे किसी चिड़िया की चोंच हो। जैसे किसी ने गुलाब की मोटी मोटी पंखुड़ियों को आपस में जोड़ दिया हो। दोनों फांकों में सोने की छोटी छोटी बालियाँ। चूत का चीरा कोई 4 इंच का तो जरूर होगा। मुझे आंटी की चूत की दरार में ढेर सारा चिपचिपा रस दिखाई दे रहा था जो नीचे वाले छेद तक रिस रहा था। उन्होंने पैंटी निकाल कर मेरी ओर बढ़ा दी। पहले तो मैं कुछ समझा नहीं फिर मैंने हंसते हुए उनकी पैंटी को अपनी नाक के पास ले जा कर सूंघा। मेरे नथुनों में एक जानी पहचानी मादक महक भर गई। जवान औरत की चूत से बड़ी मादक खुशबू निकलती है। मैंने कहीं पढ़ा था कि माहवारी आने से कुछ दिन पहले और माहवारी के कुछ दिनों बाद तक औरत के पूरे बदन से बहुत ही मादक महक आती है जो पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करती है। हालांकि यह चूत कुंवारी नहीं थी पर अभी भी उसकी खुशबू किसी अनचुदी लौंडिया या कुंवारी चूत से कतई कम नहीं थी।

हम दोनों पलंग पर बैठ गए। अब आंटी ने मेरे लंड की ओर हाथ बढ़ाया। मेरे शेर ने उन्हें सलामी दी। आंटी तो उसे देख कर मस्त ही हो गई। मेरा लंड अभी काला नहीं पड़ा था। आप तो जानते हैं कि लंड और चूत का रंग लगातार चुदाई के बाद ही काला पड़ता है। उन्होंने पलंग के पास रखे स्टूल पर पड़ी एक शीशी उठाई और उसे खोल कर उस में से एक लोशन सा निकाला और मेरे लंड पर लगा दिया। मुझे ठंडा सा अहसास हुआ। आंटी ने बताया कि कभी भी मुट्ठ मारते समय क्रीम नहीं लगानी चाहिए। थूक या तेल ही लगाना चाहिए या फिर कोई पतला लोशन। मेरे कुछ समझ में नहीं आया पर आंटी तो पूरी गुरु थी और मेरी ट्रेनिंग चल रही थी मुझे तो उनका कहना मानना ही था। उन्होंने कुछ लोशन अपनी चूत की फांकों पर भी लगाया और अंगुली भर कर अन्दर भी लगा लिया। एक हाथ की दोनों अँगुलियों से उन्होंने अपनी चूत की फांकों को चौड़ा किया। तितली के पंखों की तरह दोनों पंखुड़ियां खुल गई। अन्दर से एक दम लाल काम रस से सराबोर चूत ऐसे लग रही थी जैसे कोई छोटी सी बया (एक चिड़िया) ने अपने नन्हे पंख खोल दिए हों। मटर के दाने जितनी लाल रंग की मदनमणि के एक इंच नीचे मूत्र छिद्र टूथपिक जितना बड़ा। उसके ठीक नीचे स्वर्ग का द्वार तो ऐसे लग रहा था जैसे कस कर बंद कर दिया हो काम रस में भीगा हुआ। जब उन्होंने अपनी जांघें थोड़ी सी फैलाई तो उनकी गांड का बादामी रंग का छेद भी नज़र आने लगा वह तो कोई चव्वनी के सिक्के से ज्यादा बड़ा कत्तई नहीं था। वह छेद भी खुल और बंद हो रहा था। उन्होंने कुछ लोशन अपनी गांड के छेद पर भी लगाया। जब उन्होंने थोड़ा सा लोशन मेरी भी गांड पर लगाया तो मैं तो उछल ही पड़ा।

आंटी ने बाद में समझाया था कि मुट्ठ मारते समय गांड की अहम् भूमिका होती है जो बहुत से लोगों को पता ही नहीं होती। अब मेरे हैरान होने की बारी थी। उन्होंने बताया कि चूत में अंगुल करते समय और लंड की मुट्ठ मारते समय अगर एक अंगुली पर क्रीम या तेल लगा कर गांड में भी डाली जाए तो मुट्ठ मारने का मज़ा दुगना हो जाता है। मैंने तो ये पहली बार सुना था।

पहले मेरी बारी थी। उन्होंने मुझे चित्त लेटा दिया और अपना एक पैर ऊपर की ओर मोड़ने को कहा। फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने नाजुक हाथों में ले लिया। मेरा जी कर रहा था कि आंटी उसे एक बार मुंह में ले ले तो मैं धन्य हो जाऊं। पर आंटी तो इस समय अपनी ही धुन में थी। उन्होंने मेरे लंड के सुपाड़े की टोपी नीचे की और प्यार से नंगे सुपाड़े को सहलाया। उन्होंने बे-काबू होते लंड की गर्दन पकड़ी और ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। वो मेरे पैरो के बीच अपने घुटने मोड़ कर बैठी थी। दूसरे हाथ की तर्जनी अंगुली पर थोड़ा सा लोशन लगाकर धीरे से मेरी गांड के छेद पर लगा दी। पहले अपनी अंगुली उस छेद पर घुमाई फिर दो तीन बार थोड़ा सा अन्दर की ओर पुश किया। मैंने गांड सिकोड़ ली। आंटी ने बताया कि गांड को बिलकुल ढीला छोड़ दो तुम्हें बिलकुल दर्द नहीं होगा। और फिर तो जैसे कमाल ही हो गया। 3-4 हलके पुश के बाद तो जैसे मेरी गांड रवां हो गई। उनकी पूरी की पूरी अंगुली मेरी गांड के अन्दर बिना किसी रुकावट और दर्द के चली गई। मैं तो अनोखे रोमांच से जैसे भर उठा। दूसरे हाथ की नाज़ुक अँगुलियों से मेरे लंड की चमड़ी को ऊपर नीचे करती जा रही थी। मैं तो बस आँखें बंद किये किसी स्वर्ग जैसे आनंद में सराबोर हुआ सीत्कार पर सीत्कार किये जा रहा था। सच पूछो तो मुझे लंड की बजाय गांड में ज्यादा मज़ा आ रहा था। इस अनूठे आनंद से मैं अब तक अपरिचित था। आंटी ने अपना हाथ रोक लिया।

"ओह … आंटी अब रुको मत जोर जोर से करो … जल्दी …हईई।... ओह …"

"क्यों … मज़ा आया ?" आंटी ने पूछा। उनकी आँखों में भी अनोखी चमक थी।

"हाँ … बहुत मज़ा आ रहा है प्लीज रुको मत !"
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
Post Thread Post Reply




Online porn video at mobile phone


nell mcandrew toplessnikki grahame nakedjacqueline bissett nudeBhupho k gand mar'kathleen kinmont sexMom ko looki laa kr dii chudai k liya storylisa maffia toplesskase chodavemom dad boob kiss or pussy press kr rhe h or bacche un k chup ke dekh rhe h aesi videomom sleeping time beta sex ka bhuka pornkamakathaikal incestsaif fucking kareenameri chut me sasurji kaa loha jesa lundFilm mangne aai priyanka chopra ki chudai storynipple visible bollywoodlilian garcia fakesannabelle sciorra nudemojave ki bra 20 May Lund Ka Pani chodaemmanuelle seigner toplesswwwapna papa.faimly inctent yum stories.jessie wallace nuderamya krishnan fake nudeAradhana ne papa ko penty dikhaiभैया ने गांड मार ली ट्रेन मेंshawnee smith upskirtivonne soto nudelesley anne warren nudeJabrdasti xxx ladki mana karti rahi aur laka chodta raha hdIniya nudemujhe kapda aur sabji bechne wale ne chodabollywood pokiesshawnee smith nip sliphudson leick nudegiglianne braga nudenude shamitaoh in hye nudedebby dunning nudekelly ripa nipbhiyaad porn maa betamichelle mone nakedgarcelle beauvais nude picturesbitty schram sexkate magowan nudeshari shattuck sexandrea mclean upskirtjenniferespositonudeemme rylan nakedghar ki nayi kirayedaar part 13beta ye galat hai mai teri maa hunatalya neidhart fakessonali kulkarni nudeapni bhan ko dost sa chodwasalli richardson-whitfield sexnude kim delaneykelis nudeghar ka jimedari samhala to maa sex karne diya storyjoey lauren adams boobsdanielle panabaker nip slipsharmila tagore nudestephanie powers nudemarin hinkle nudenude theresa russellbeatrice rosen nude picskate gosselin up skirtamelle berrabah nudeलुंड चूत में घुसा गोज तो दिखाओjoan collins fakessali ki betiellen hollman nudesarsura n bahu ko snan.com dasiamber lancaster sexmenegaki nudekellie shanygne nudejorja fox nudesamantha brown nip slipaur bas chudwati gYi pArayi mardo se