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गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
08-24-2012, 07:00 AM
Post: #1
गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
मै मुंबई से अहमदाबाद आ रहा था, एसी चैर कार मै मेरे पास एक २५ साल का लड़का बैठा था, उसने अपना नाम जतिन पटेल बताया, बोला प्यार से उसे जीतू कह सकते हैं .. बातो बातो में उसने बताया की उसके पिता बड़े अधिकारी हैं और उसका सरकारी मकान गांधीनगर में है. मुझे उस रोज़ अहमदाबाद ही रुकना था और अगले दिन सुबह वह से निकलना था, उसके आग्रह पर मैं उसके साथ उसके घर चल दिया..

उसके पिता का सरकारी घर ठीकठाक सा था . घर में शाम को नौकर आया और खाना बना कर चला गया. हमने खाना खाया फिर छत पैर गप्पे मारने लगे. थोड़ी गर्मी थी, उसने टी शर्ट और निक्कर पहना हुआ था, मैंने भी. ' गर्मी बहुत है अशोक, चाहो तो टी शर्ट खोल कर आराम से बैठो, तुम कहो तो मैं तुम्हे अपने पिताजी की लुंगी ला देता हू उसे पहन लो, ' मैं हाँ बोलता उस से पहले ही वह निचे से लुंगी ले आया,' तुम कहते हो तो पहन लेता हू, कह कर मैं नीचे जाने लगा, तो वो बोला,' अशोक दोस्तों में क्या शर्म यहीं पहन लो,' ' मैं हँसते हुए बोला, यार मैं घर में चड्डी नहीं पहनता, ' तो क्या हुआ, पहन लो यार, अँधेरा है वैसे भी छत से कोई देख नहीं सकता..' मुझे लगा अब पहन ही लेता हूँ, मैंने लुंगी उपर लपेटी और निक्कर सरका दिया और फिर लुंगी लपेट ली,' ' क्या यार तुम तो बड़ा शरमाते हो,' वो बोला, मैं हसने लगा..
' अशोक मैं मालिश बहुत अछी करता हूँ, तुम ट्रेन के सफ़र से थके हुए भी हो, कहो तो एक अछी मालिश कर दू? जीतू बोला. अब मालिश के लिए कौन मना करेगा, मैं वही छत पर बिछे बिस्टर पर लेट गया, जीतू तेल ले आया और मेरे पैरों से उसने मालिश शुरू कर दी, अँधेरा था ठंडी हवा थी बड़ा अच्छा लग रहा था, उसने रानो पर मालिश के बाद मेरी जांघों पर मालिश शुरू कर दी, मालिश करते करते उसके हाथ मेरे नितम्बों से टकराने लगे, और उसने थोड़ी देर बाद मेरे नितम्बों से लुंगी उपर कर दी, जांघों के बाद वो मेरे नितम्बों पर भी मालिश करने लगा और बीच के छेद पर भी खूब तेल लगता रहा, मुझे अच्छा लग रहा था, मैं चुपचाप लेटा रहा. मालिश करते करते वो खुद नंगा हो गया था और बिच बिच में उसका लंड मेरी जांघों से टकरा रहा था, पर यह सब मुझे अजीब नहीं लग रहा था न जाने क्यूँ? पहली बार मेरी मालिश कोई नग्न पुरुष कर रहा था और मैं भी तो नग्न ही तो था..

' यार अशोक लुंगी की गाँठ खोल दे, तेल से ख़राब हो जाएगी, मैंने भी कपडे इसी लिए उतारे हैं, जीतू बोला. मैंने उसके कहे मुताबिक लुंगी हटा दी, अब मैं उल्टा और नंगा लेटा था.. उसने मेरी पीठ और हाथो पर भी मालिश की, और फिर वापस वो मेरी गांड पर आ गया, गांड के छेद पर उसने खूब सारा तेल डाला और उसको धीरे धीरे सहलाने लगा,' अशोक बुरा न मनो तो गांड चाट लू ? मुझसे कुछ बोला न गया और मैंने गांड उपर कर दी, जैसे मैं कोई चौपाया जानवर हूँ, उसने अब मेरी गांड के छेद को खोला और अंडर जीभ डाल दी, उसकी जीभ और गहरी जा रही थी, वो गांड ऐसे खा और चाट रहा था जैसे lollypop चूस रहा हो, मुझे आस्चर्य हो रहा था की इसको घिन नहीं आ रही पर मैं आनंद ले रहा था जीवन मैं पहली बार गांड चटाई का,
किसी उस्ताद खिलाडी की तरह वो रुका नहीं और अब उसके हाथ मेरे लटक रहे थेले पर आ गए, मेरे अंडकोष वो अब सहला रहा था और बीच बीच में उनको भी चाट रहा था, लेकिन उसका पूरा जोर गांड पर ही था, गांड में उसकी जीभ कोई एक- डेढ़ इंच जा चुकी थी बीच बीच में वो छेद को थोडा खोलता और जीभ और अन्दर दाल देता, अब मेरी हालत ख़राब थी और उसको इसका अंदाज़ा था, उसने चटाई के साथ साथ एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसको हिलाने लगा.. दुसरे हाथ से वो मेरे आंड दबा रहा था, गांड आंड और लंड तीनो को उसने अपने कब्ज़े में कर रखा था, मैं झड़ने को ही था और मेरी गांड अब तेज़ी से उपर नीचे होने लगी थी, उसने जीभ से मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया और हाथ की स्पीड बाधा दी, 'ओह्ह चूतिये पानी छूट रहा है मेरा, मैं बोला, ' हा रजा पानी नहीं अमृत ' कह कर उसने ठीक पानी की पिचकारी छूटने से पहले मुह को गांड से हटा कर मेरे लंड के छेद पर रख दिया, मेरी फूट रही वीर्य की बूंदों को वो गटागट पी गया, अशोक तेरा अमृत बड़ा गाढ़ा और रसीला है, वो बोला . मैंने पहली बार किसी आदमी के मुह में पानी छ्होड़ा था, मुझे किस चूत को चोदने का मौका भी नहीं मिला था इसलिए पहली बार किसी और ने मेरे लंड पर हाथ लगाया था और पहली बार किसी ने पानी छुट्वाया था... मैं उत्तेजित तो था लेकिन पूरा रोमांचित नहीं था, मुझे लगा मैं कहीं होमो तो नहीं हूँ या हो रहा हूँ?

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08-24-2012, 07:01 AM
Post: #2
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
एक बार खुलते ही जीतू फॉर्म में आ गया, बोला जब वो 7-8 साल का था तब घर के एक नौकर ने उसको लंड चुसवाने और गांड मरवाने की आदत डाल दी थी, ' मैं घर से थोडा दूर एक दूधवाले के यहाँ दूध लेने जाता था,' वो मुझे दूध के बहाने रोक के रखता फिर अपनी धोती खोल कर मेरा मुह चोदता, 12-13 साल का होते होते जीतू ने कोई 10-15 लोगों से गांड मरवा ली थी.. ' उन दिनों मैं अछे स्कूल में पढने सूरत आया, जहाँ पूरा परिवार रहता था, मैं मेरे पिताजी, मेरी मान और मेरी बहिन, यहाँ जीतू के घर उसको और उसकी बहन को पढ़ने एक अध्यापक आता था, ' उसका नाम था अमीन खान और वो साथ के अस्स्पास था, जीतू ने बताया, ' दिन में जब माँ सो जाया करती थीं या कई बार बहार गयी हुई होतीं तब वह बड़ा ज़ालिम बन जाता, जीतू कह रहा था. ' मुझे वो नंगा कर के डंडे से मरता, मेरी बहन के सामने मेरी गांड लाल कर देता, कई बार उसी डंडे को मेरी गांड में डालता और मेरी बहन और मुझे दोनों को डराअ धमका कर नंगा कर देता, मेरी बहन की छोटी छोटी चुचियों को वो बड़ी बेरहमी से दबाता और उसकी चूत में ऊँगली करता और कभी डंडा डालने की कोशिश करता, फिर वो नंगा हो कर मेरे मुह पर बैठ जाता, मैं उसकी बदबूदार गांड चाटता और मेरी बहन उसका कटा हुआ लंड चूसती, हालाँकि उसका लंड खड़ा नहीं होता था लेकिन वो नरम लंड से ही मेरे और मेरी बहन के मुह में पानी छोड़ देता था, जीतू ने बताया . ' बस तब से ही मेरी गांड चाटने की आदत पड़ गई .
जीतू की बाते सुन कर में फिर से उत्तेजित होने लगा था, अशोक अब तक मैंने कोई 40 से 50 के बीच लोगों की गांड चाटी है और कोई 60 लोगों का लंड चूसा है या गांड मरवाई है,' वो बोला. ' जीतू तुम्हें कभी किसी औरत को चोदने की इच्छा नहीं हुई ? मैंने पूछा . ' नहीं कभी नहीं हुई मुझे सिर्फ आदमी ही आकर्षित करते हैं, मैं चाहता हूँ मैं मेरे पापा का लंड भी चूसूं, एक दो बार बहाना कर के उनके साथ भी सोया लेकिन उन्होंने कोई इंटेरेस्ट नहीं लिया, वो बोला. ' और कभी माँ या बहिन को चोदने की इच्छा नहीं हुई ? ' नहीं कभी नहीं लेकिन अगर तुम उनको चोदोगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा ? ' मुझे उत्तेजना हुई, मैंने पूछा, ' कैसे ? ' कैसे क्या तुम चोदो मेरी माँ को और बहिन को मैं तुम्हारा लंड चूसूंगा और गांड चाटूंगा, ' वो बोला,' अच्छा तुम्हारी माँ और बहिन की गांड चाटने की इच्छा नहीं होगी ? मैंने पूछा . 'गांड का गू तो मैं किसी का भी चाट लूँ, माँ हो या बहिन, लेकिन अब तक किसी औरत की गांड चाटी नहीं, उसने कहा .

मैंने कपडे पहने नहीं थे इसलिए मेरा फूलता हुआ लंड अब साफ़ दिख रहा था, जीतू ने उसको प्यासी नज़रों से देखा और अपना मुह उसके पास ले आया, अशोक तुम्हारा लंड बहुत मोटा है किसी काले केले के जैसा, वो बोला, ले गांडू अब तू इस केले का छिलका उतर और खा इसको, मैं बोला, जीतू ने अपने होठों से मेरे लंड के आगे की चमड़ी उपर नीचे करना शुरू कर दिया और सुपाड़े को गीला कर के उसको दांतों से हल्का हल्का दबाते हुए चूसने लगा, मेरा सुपाडा फूल कर आलू जैसा हो गया था, ' अशोक तू मेरी गांड बाद में मरना अगर तुझे सुसु आ रही हो तो पहले मेरे मुह में मूत ले मुझे प्यास लगी है, मुझे कुछ उल्टा सीधा सोचना पड़ा ताकि उत्तेजना कम हो और लंड सामान्य हो जाए क्यूंकि सुसु तो लंड के छोटे होने पर ही निकलती है, खैर थोड़ी देर में मेरा लंड छोटा हो गया ' मेरे मुह पर बैठ जाओ अशोक और मूतो, वो बोला, मैं उसके मुह पर बैठ गया उसने मेरा लंड पकड़ा और उसको होठों से लगा दिया, मेरी धार छूट रही थी, मैं मूत रहा था और वो सांस बंद करके उसको पी रहा था, कोई आधा लीटर मूत वो पी गया, आह अशोक तुमने मेरी प्यास बुझा दी, अब अगर तुमको बाथरूम का कोई भी काम हो टट्टी आये तो भी मेरे मुह में करना, मैं तुम्हारा टोइलेट हू, वो बोला.
' तुमको ये अपमान कैसे अच्छा लगता है? मैंने पूछा, ' अशोक मुझे अपमान में बहुत आनंद आता है, ' एक बार मुझे दो ऑटो रिक्क्षा वाले अपने साथ अपनी चाल में ले गए और मेरा खूब अपमान किया वो रात मुझे अभी तक याद है, वो बोला, ' क्या किया उन्होंने ?' मैंने जिज्ञासा में पूछा, ' उन्होंने मुझे नंगा कर के एक कुर्सी से बाँध दिया, फिर वो भी नंगे हो गए फिर पहले तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे जोर जोर से मुह पर, फिर उन्होंने मेरे मुह में मूता और गन्दी गन्दी गालियाँ दीं, वो बोला,' क्या गलियां दीं ? बोलते रहे कुत्ते, हरामजादे, कमीने, गांडू, भोसड़ी के, चूतिये, मादरचोद, भेन्चोद, भड़वे वगेरह फिर मुझे कहा अपनी माँ और बहिन को गालियाँ दे भड़वे, तो मैंने मेरी माँ को रंडी कहा लंड चोद कहा भोसड़ी की कहा चूत कहा, बहिन को भाई चोद, बाप चोद रंडी और खूब साडी गालियाँ दीं, फिर उन्होंने मेरे हाथ पांव बाँध कर मुझे घोड़ी बना दिया, एक ने अपना लौड़ा मुह में डाला दुसरे ने गांड में उन्होंने पूरी रात मुझे चोदा मूता गांड चटवाई और गालियाँ दीं और मेरी माँ बहिन को गालियाँ दिलवायीं, जीतू बोला.

" तुम्हारी माँ बहिन को ये सब पता है? मैंने पूछा . ' नहीं उनको नहीं पता कि मैं गांडू और गांड चाटू हूँ, बहिन को सिर्फ वो मास्टर वाला किस्सा पता है पर तब हम दोनों छोटे थे, ' वो बोला,' अच्छा जीतू तुम मुझे अपनी माँ और बहिन को चुदवादोगे ? ' हा क्यूँ नहीं? लेकिन मैं सिर्फ मदद कर पाउँगा बाकी काम तुमको खुद करना होगा, वो बोला, ' मैं कैसे करूँगा ? और तुम क्या करोगे ? ' देखो एक साथ तो कुछ होगा नहीं मेरी माँ अगले शनिवार को यहाँ आ जाएगी, मैं उनको कह दूंगा की तुम एक कॉलेज में पढ़ते हो और मेरी पढाई में मदद के लिए यहाँ आ रहे हो, बाकी सब तुमको करना पड़ेगा, वो बोला, इधर उसकी बातें सुनकर मेरा लौड़ा फिर बेकाबू हो चुका था, ' जीतू फिर से मेरे लंड की टिप से मेरी गांड के छेद तक अपनी जीभ और उँगलियाँ चला रहा था, जब लंड पूरा कड़क हुआ तो वो घोड़ी बन गया, ' अशोक अब मेरी गांड की प्यास बुझाओ, सहन नहीं होता अब, कहके उसने गांड ऊँची कर दी, मैंने उसकी गांड पर कसके थप्पड़ मारे और फिर बिना थूक लगाये सूखा लंड गांड के छेद पर रख के दबाव दिया तो सुपाडा गांड में धंस गया, उसकी हलकी चीख निकली, ' ये सोच भड़वे मैं तेरी माँ को चोद रहा हूँ, बता तेरी माँ कैसी है? '
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08-24-2012, 07:01 AM
Post: #3
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
चुदते चुदते ऊ ओह आह करते करते वो बोलने लगा,' मेरी माँ का नाम सजल पटेल है, वो 45 साल की है, उसकी लम्बाई 5 फूट 3 इंच है, शादी के वक्त तो दुबली थी अब मोटी है,' ' मैंने जोर से लंड गांड में डाला और बोला,' कितनी मोटी है भड़वे ? ' कोई 80 किलो होगी, उसके स्तन कोई 36 इंच के होंगे एक बार मैंने ब्रा का साइज़ पढ़ा था बाथरूम में', वो बोला, ' अपनी रंडी माँ को कभी नंगा देखा ? मैंने पूछा, ' हा थोडा सा देखा था, वो बोला, मैंने फिर लवडे का stroke लगाया और पूछा कैसे और कब देखा बता रंडी की औलाद, ' बाथरूम के छेद से देखा था, वो अपनी काख के बाल और नीचे की झांटें razor से साफ़ कर रही थी, ' कैसे ? मैंने पूछा, ' वो नंगी कड़ी थी उसके स्तन थोड़े लटके हुए हैं और निप्प्ल्स थोड़े छोटे हैं और पीले से रंग के हैं, थोडा सा पेट निकला हुआ है, नीचे झांट ज्यादा भरे हुए नहीं थे थोड़े ही थे कम गहरे और थोड़े गुन्घराले, मेरी रंडी माँ ने नीचे बैठ कर चूत के फांकें फैलायीं और फिर पहले क्रीम लगाया ऊऊ गांड फट गयी अशोक तुम्हारी चुदाई से,' ' तू माँ के बारे में बता गांडू, अपनी गांड की चिंता छोड़ इसमें सुबह मैं टाँके लगवा दूंगा, मैंने कहा, ' हा फिर उसने नीचे झुक के अपने झांटों में razor फिराया मुझे साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था क्यूंकि वो नीचे बैठी थी, पर उसकी चूत के होठ फुले हुए और मोटे लग रहे थे थोड़े से भूरे या काले रंग के, फिर मेरी चोदु माँ ने खड़े होकर नल से चूत और काख धोयी और फिर मुझे लगा की वो बहार न आ जाये इसलिए मैं वहां से हट गया,' गांड कैसी थी रंडी सजल की ? ' गांड बहुत मोटी है मेरी गांड की दोनों फांकें मिला दो तो उसकी एक फांक बनती है, वो बोला,' .

,' अच्छा भड़वे ये बता तेरी जगह अगर इस वक़्त मैं तेरी माँ की गांड मर रहा हूँ तो तू क्या करेगा? ' मैं पीछे आकर आपके अंडकोष और गांड चाटूंगा
, और जब आप माँ की गांड में पानी छोड़ दोगे तो वो पानी भरी गांड चाटूंगा
, ये सुनकर मुझे इतनी उत्तेजना हुई कि मेरी पिचकारी भर गयी, ले रंडी के बेटे ले तेरी माँ के खसम.
तेरे बाप का पानी अपनी भोसड़ी में मादरचोद रंडवे, कोठे की औलाद ये ले, ऊऊह्ह्हआआआआआआआआआआअहऊऊऊऊऊ, कहकर मैंने फिर पानी छोड़ दिया, ऐसे करके सुबह तक उसने मुझे कोई 5 बार खाली किया.

सुबह वो अपनी गाडी में मुझे स्टेशन छोड़ने आया, अशोक अगले सन्डे आ जाना, और एक बार माँ को जैसे तैसे पटा लेना, फिर आगे देखेंगे . मैंने हाँ कहा और ट्रेन में बैठ गया

अगले शनिवार मैं वापस अहमदाबाद पंहुचा, जीतू मुझे स्टेशन पर लेने आया था, गाडी में बैठकर आधे घंटे से भी ज्यादा समय में मैं उसके घर पंहुचा, जीतू ने मेरा बैग उठाया और जैसे ही अन्दर गया उसकी माँ ने नमस्ते किया, और बोली, ' जीतू आपकी बहुत तारीफ कर रहा था की सर बहुत अच्छा पढ़ते हैं और इसके लिए इतनी दूर से चलकर आये, वो बोलीं, ' मैं चाहकर भी ठीक से जीतू की मा को देख नहीं पाया, और सीधा उपर वाले कमरे में चला गया जो जीतू का कमरा था. मैं थकान उतरने के लिए नहाया और नहाकर बहार आया तो जीतू खड़ा था,' जीतू बता क्या पहनू, लूंगी चलेगी या पजामा कुरता पहनूं ? ' लुंगी पहन लो मेरे पापा भी तो पहनते हैं, और पापा वाली लुंगी ही लाया हूँ ताकि माँ को अच्छा लगे, कहकर उसने मुझे लुंगी दे दी, मैंने उपर एक कुरता पहना हुआ था, नीचे जीतू के पापा की लुंगी पहन ली. इससे पहले की आगे की बात बताऊँ, जीतू के पापा के बारे में बता देता हूँ, उनको सरकार ने deputation पर जामनगर भेजा हुआ था इसलिए वे गांधीनगर नहीं के बराबर आते थे . जीतू कोअचिंग के लिए गांधीनगर था जबकि उसकी बहन सूरत में ही कॉलेज में पढ़ रही थी. .

मैं सीढ़ी उतर के नीचे आया और हम दोनों dining table पर बैठ गए जीतू की माँ और उनका नौकर खाना परोस रहे थे, ' आंटी आप भी साथ बैठ कर खा लीजिये ना, मैंने कहा, ' नहीं आप और जीतू खाईये वैसे भी मेरा शुक्रवार का व्रत है, जीतू की माँ बोलीं, मैं उनको तिरछी नज़रों से देख रहा था, उन्होंने गावन पहना हुआ था वे औसत महिला थी, गोरी थीं और बदन भारी था, उनके स्तन खास बड़े नहीं थे मगर गांड विशाल थी, थोडा पेट उभरा हुआ था मगर इतना तो उत्तेजित करता ही है. उन्होंने गाउन के उपर इज्ज़तदार महिलाओं की तरह चुन्नी नहीं लपेटी हुई थी

मुझे लगा वे थोड़ी खुली हुई महिला हैं.ओह हाँ मैं मेरे बारे में तो बताना ही भूल गया, मैं अशोक हूँ, 29 साल की मेरी उम्र है, मैं एक कॉलेज में पढाता हूँ .5 फूट 10 इंच मेरी लम्बाई है, रंग गेहूँ है और फ्रेंच कट दाढ़ी रखता हूँ, मेरी कमर 32 इंच है और मेरा सीना चौड़ा है मेरे सारे बदन पर काफी बाल हैं . लंड मेरा औसत से कुछ ज्यादा है, यही कोई 7 इंच और औसत से ज्यादा मोटा भी, जीतू के मुताबिक एकदम साफ़ और रसीला . खाना खाने के बाद मैं wash basin में हाथ धो रहा था तो जीतू की माँ मेरे पास तौलिया लेकर आई, हाथ पोंछने के बहाने मैंने उनकी उँगलियाँ और थोडा कोहनी से पेट छूने की कोशिश की, उनको इस से कोई खास परेशानी नहीं हुई, ' अशोक sir मेरी माँ cold coffee बहुत अछी बनाती है, पियोगे ? जीतू बोला,' आंटीजी cold coffee से तो व्रत तो नहीं टूटता ? मैंने पुचा, ' नहीं सर, cold coffee तो आपके साथ ज़रूर पियूंगी, ' वो बोलीं, ' आप मुझे sir मत कहिये मैं आपसे छोटा हूँ, मैं बोला,' नहीं जीतू के sir हमारे भी sir हैं, वो बोलीं .
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08-24-2012, 07:02 AM
Post: #4
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
मैं और जीतू बहार लोन में आकर बैठ गए, ' अशोक कैसी लगी मेरी माँ ? उसने पूछा, ' यार जीतू चुद जाये तो ज़िंदगी बन जाये, माल है तेरी माँ तो, मैं धीरे से बोला, कोई सुन न ले इसलिए हम दूसरी बातें करने लगे. थोड़ी देर में सजल coffee ले आई और हमारे साथ ही बैठ गयी, फिर हम घर गृहस्थी की बातें करने लगे, मेरे घर में कौन है वगेरह वगेरह, बातों बातों में पता चल गया कि उनके पति यानि जीतू के पापा बरसों से सरकारी नौकरी में इधर उधर रहे हैं यानि उनको पति सुख नहीं के बराबर मिला है, उधर जीतू बिस्तर लगाने के बहाने उठ कर चला गया, मैंने बातों ही बातों में सजल को साथ घूमने केलिए राज़ी कर लिया, वो नाथद्वारा जाना चाहती थीं मगर संभव नहीं हो पाया था क्यूंकि उनके पति व्यस्त रहते थे और दूसरा कोई साथ मिल नहीं पाया था, चूँकि मैं बीसियों बार वहां गया था इसलिए वे मेरे साथ जाने की इच्छुक थीं, मगर वे चाहती थीं की वे मैं और जीतू साथ चलें .
फैसला हुआ की अगले हफ्ते हम तीनों एक साथ नाथद्वारा चलेंगे. .

मैं उसके बाद फ़ोन पर सजल से बात करता रहा, और उसके बेटे जीतू से भी, जीतू को मैं बताता की मैं उसकी मां को कैसे कैसे चोद रहा हूँ और वो उस वक्त क्या क्या कर रहा है.. और फिर फ़ोन पर ही मैं मुठी मारता जीतू अपनी माँ को फ़ोन पर खूब चुदवाता.. शनिवार को मैं नाथद्वारा पहुच गया.. और वही कोटेज में मैंने एक कमरा ले लिया, जीतू और सजल भी अहमदाबाद से वहां बस से पहुच गए.. कोटेज में ज़मीन पर ही बिस्तर बिछा कर सोना पड़ता था, ओढने को रजाई और तकिया वगेरह वहीँ से किराये पर मिलता था.. कमरा काफी बड़ा था और ठण्ड भी थी, मैंने पहले से ही तीनो बिस्तर एक साथ ज़मीन पर बिछा दिए थे.. जीतू की मां को कोटेज और जगह बहुत पसंद आई,' इसके कितने पैसे लगे सर? ' उन्होंने पूछा,' अब आप मेरे विद्यार्थी की मां हैं आपसे छोटे मोटे पैसों की बात थोड़े ही करूँगा? ' फिर भी? 'वे बोलीं.. ' आप से मैं वसूल लूँगा इसकी कीमत,' मैंने हँसते हुए बोला, 'ठीक है सर, वे बोलीं.
हमने शीघ्र ही मंगला के दर्शन कर लिए, वहीँ से मैंने प्रसाद भी ले लिया, और दर्शन की भीड़ में मैंने उनका हाथ पकड़ लिया था और मौके बेमौके उनसे खूब चिपटा और उनको दबाता रहा.. वे दर्शन के बाद भाव विव्हल थीं,' सर आपने मेरा सपना पूरा कर दिया, आप का मुझ पर बहुत बड़ा एहसान है, ' ' मैंने कहा,' अच्छा इस को आप एहसान मानती हैं तो बदले में आप मुझे क्या देंगी? ' जो आप मांगो मेरे बस में जो भी होगा दे दूंगी आपको, आपका मुझ पर और मेरे बेटे पर बहुत अहसान है सर, उन्होंने कहा,' ' जो मैं मांगूं? पक्का? ' हाँ सर बिलकुल पक्का, वे बोलीं..
दिन में हमने खाना खाया और घूमे फिरे, शाम को उन्होंने एक बार फिर दर्शन की इच्छा ज़ाहिर की, मैं नहीं आऊंगा मां आप सर के साथ चले जाओ.. जीतू बोला. हम लोग दरवाज़ा खुलने का इंतजार करने लगे. जैसे ही दरवाज़ा खुलने वाला था मैंने कहा, देखो आप मुझे सर कहते हो और मैं आपको आंटी दोनों शब्द मुझे अटपटे लगते हैं, कोई और शब्द खोजते हैं,' आपको घर में किस नाम से बुलाते थे? ' मैंने पूछा,' मुझे बचपन में सज्जू कह कर पुकारते थे, ' और मुझे आशु, ' मैं बोला,' दर्शन से पहले आप मुझसे वादा कीजिये की आप मुझे आशु बुलायेंगीं और मैं आपको सज्जू, मैंने कहा, ' पर जीतू क्या समझेगा? उन्होंने कहा, ' ओके आप जब जीतू नहीं हो तब मुझे इस नाम से बुला लीजियेगा, ठीक है, उन्होंने कहा, पक्का वादा? मैंने पूछा, ' हाँ पक्का वादा आशुजी, 'आशुजी नहीं आशु कहो सज्जू' ओके आशु,' कह कर हम दोनों हस पड़े और मैंने उनका हाथ पकड़ लिया,' भीड़ में प्रवेश से पहले मैंने उनके कान में कहा आज श्रीनाथजी से मैं आपकी दोस्ती मांगूंगा' और हम अन्दर चल पड़े..

मैंने प्रवेश से पहले सजल की कमर में हाथ डाल दिया, भीड़ बहुत है इस से लोगों के धक्के नहीं लगेंगे सज्जू, मैंने कहा, सजल ने कोई प्रतिरोध नहीं किया. भीड़ के बहाने मैंने उनको खूब दबाया और उनसे चिपटता रहा, शायद सज्जू को भी अच्छा लग रहा था.. कई बार मैंने भीड़ के बहाने से उनकी कमर पर हाथ फिराया, दबाया और एक दो बार हाथ थोडा नीचे खिसका कर नितम्ब पर भी सहलाया.. हम बहार आये तो शाम हुई ही थी और अभी खाने में काफी समय था, मैंने जीतू को फोन लगाया, ' मैं बाज़ार में घूम रहा हूँ अशोक सर आप मान के साथ खाना खा लीजिये मैं सीधा कमरे पर आ जाऊंगा, वो बोला, ( आखिर उसको सहयोग तो करना ही था... ), मैंने फोन सजल को दिया, जीतू ने उससे भी यही बात कही.. ' सज्जू अभी काफी समय है, बगीचे में चलें?' हाँ सर ओह सॉरी आशु, चलिए,'' कह कर सजल हस पड़ी...

सर्दी थी इसलिए बगीचे में ज्यादा भीड़ नहीं थी. हम थोड़ी देर तो घूमे फिर एक बेंच पर बैठ गए. सजल घर गृहस्थी पति बच्चे और ज़िन्दगी की बातें बताती रहीं, मुझसे वो काफी सहज हो चुकी थीं.. मुझे लगा अब बात थोड़ी आगे बधाई जा सकती है.. ' सज्जू अगर मैं कोई व्यक्तिगत बात पूछूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी? ' नहीं, आपकी किसी बात का बुरा मानने का तो प्रश्न ही नहीं उठता,' वो बोली. ' शादी से पहले आपका कोई boyfriend था या किसी से इश्क हुआ था? ' सज्जू थोड़ी चुप हो गयी फिर बोली,' आप किसी से कहोड़े तो नहीं?' ' सज्जू श्रीनाथजी की कसम खता हूँ तुम्हारे मेरे बीच जो भी बात या जो कुछ भी होगा उसका किसी को पता नहीं चलेगा,' मैंने कहा, ओके आशु, मुझे आप पर विश्वास है..' मैंने जोड़ा,' लेकिन आपको भी श्रीनाथजी की कसम खानी पड़ेगी की हमारे बीच जो कुछ भी बात होगी या कुछ भी होगा उसकी जानकारी किसी को नहीं होगी..' हाँ मैं कसम खाती हूँ,' वे बोलीं. तो फिर बताओ न, मैं बोला..' ठीक है..'
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08-24-2012, 07:03 AM
Post: #5
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
' मैं तब छोटी थी शायद आठवीं या नवीं में पढ़ती थी, मेरा घर भी सूरत में ही है, मेरे सात भाई और तीन बहने हैं, घर में काफी भीडभाड थी, चार भाई मुझसे बड़े और तीन छोटे थे. मेरा ननिहाल सौराष्ट्र में है वहां हमारा बड़ा घर है हालाँकि कहने को गाँव है लेकिन सारी सुविधाएँ वहा थीं, मेरे चार मामा थे और तीन मासियाँ. सबसे बड़े मामा मुझसे कोई ३० साल बड़े थे लेकिन सबसे छोटे मामा मुझसे भी ३ साल छोटे थे. हम हर छुट्टियों में वहां जाते थे.. बीच वाले मामाओं में से एक मुझसे कोई १५ साल बड़े थे और दूसरे कोई ५ साल. हम वहां अक्सर खेलते थे.' क्या खेलते थे बताओ न सब? मैंने पूछा सारे खेल वो बोली, ' फिर भी? दिन में डॉक्टर डॉक्टर खेलते थे, वे बोलीं, मैं समझ गया, सजल क्या खेल खलती थी, ' क्या उम्र थी तब आपकी" ' कोई १२-१३ साल होगी,' वो बोलीं. ' अच्छा एक बात पूछूँ बुरा न मनो तो? ' हाँ पूछो? 'उस उम्र में आपके periods शुरू हो गए थे? ' क्या आप भी कैसे कैसे सवाल पूछते हैं..' बताओ न इसमें क्या हुआ..' ' नहीं मेरे periods to १४-१५ की उम्र में शुरू हुए थे, हमारे समय में आज की लड़कियों की तरह जल्दी periods नहीं आते थे..

सजल अब आराम से बात करने लगी थी,' सब कुछ खुल कर आराम से बताओ सज्जू, मैं तो आपका दोस्त हूँ,' ' कैसे बताऊँ बताते हुए भी शर्म आती है, बस इतना बता सकती हूँ मेरे मामा ने मेरे साथ गलत काम किया, कहते हुए उनकी आँखें भर आयीं, मुझे लगा ये मौका अच्छा है इसलिए मैंने तुरंत उनको जकड कर चिपटा लिया, वे मेरे सेने पर चिपक गयीं. मैं अब सज्जू के बालों पर हाथ फिराने लगा,' आप बहुत अच्छी हैं और बहुत सुंदर भी,' कह कर मैंने उनका चेहरा उपर किया और अचानक से होठ चूम लिए, सज्जू को इस की उम्मीद नहीं थी वो अचकचा गयीं, ' ये क्या किया सर? ' ' सर नहीं आशु, मैं मुस्कराते हुए बोला,' हाँ आशु ये तो अच्छी बात नहीं,' ' देखो सज्जू हम दोस्त हैं और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं और दोस्तों के बीच कुछ भी गलत नहीं होता मैंने प्यार ही तो किया है इसमें क्या गलती? ' लेकिन मेरी उम्र आपसे ज्यादा है आप मेरे बेटे के दोस्त हैं कल को जीतू को पता चल गया तो वो तो शर्म से मर जायेगा या फिर जीतू के पापा तो मेरी जान ही ले लेंगे,' वे बोलीं . ' किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और आज की इस दुनिया में किसी को किसी से कोई मतलब नहीं जीतू के पापा आपको कितना प्यार करते हैं? कितना वक़्त देते हैं? बिना प्यार कोई कैसे हक जमा सकता है सज्जू? मैं बोला, सज्जू कुछ बोलीं नहीं चुप हो गयी मुझे लगा बात थोड़ी सी जम गयी है..

थोड़ी देर बाद हम पार्क से निकल पड़े क्यूंकि आठ बजने वाले थे, मैंने अँधेरे में सज्जू का हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा.. उन्होंने कोई प्रतिरोध नहीं किया, ' अच्छा सज्जू तुमने मामा वाली बात तो बता दी लेकिन प्यार हुआ या नहीं ये नहीं बताया? ' ओह हाँ प्यार तो होगा ही, जब मैं स्कूल मैं पढ़ती थी तो मेरा एक classmate था जय वो मेरा बहुत ध्यान रखता था और हम दोनों में प्यार था मगर दोनों एक दूसरे को कह न सके, फिर कॉलेज में गयी तो वहां के एक टीचर थे अनुराग सर, उनसे थोडा आकर्षण हुआ, ' उनसे कुछ हुआ क्या? चुदाई वुदाई? ' ये क्या बोल रहें हैं सर? सजू बोली,' ओह सॉरी मेरी आदत है गंदे शब्द निकल जाते हैं, मैं बोला ' सज्जू हसने लगी, मैंने दुबारा पूछा बताओ न,' सब बातें बतायीं थोड़ी जतिन,' सज्जू ने हंस कर कहा, मैं समझ गया..
मुझे लगा अगर आज की रात जीतू आसपास नहीं हुआ तो बात बन सकती है, हम खाना खाने गए, वहीँ बातों बातों में मैंने जीतू को sms भेजा' सज्जू चुदने को तैयार है किसी बहाने से आज रात कमरे से बाहर सो जा ' ओ के ' जीत का जवाब आया.

खाना खाने के बाद हम फिर बातें करने लगे शायद सज्जू से पहली बार कोई इतने दिनों बाद इतनी फुर्सत से बात कर रहा था' ' आशु पता नहीं इतनी फुर्सत से मैं शायद बरसों बात बातें कर रही हूँ मुझे ये ट्रिप हमेशा याद रहेगी' वो बोली. तभी जीतू का फोन आया सज्जू गुजराती में बातें कर रही थी पर मुझे आईडिया हो गया की जीतू किसी बहाने से बाहर रुकने वाला है पर मैंने अपनी तरफ से कुछ नहीं बोला और इंतजार करने लगा की सज्जू क्या कहती है थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने कहा ' अब थकान हो गयी है कमरे पर चलें सज्जू बाकी बातें वहीँ कर लेंगे?' ठीक है लेकिन एक प्रॉब्लम है..!' प्रॉब्लम यहाँ क्या प्रॉब्लम हो गयी? मैंने पूछा' जीतू को कोई दोस्त मिल गए हैं इसलिए वो आज बाहर ही रुकेगा..' सज्जू बोली' बाहर मतलब? मैंने जान बूझ कर पूछा ' बाहर मतलब वो शायद सुबह आएगा कमरे पर सज्जू बोली' कोई बात नहीं अच्छा है न रात भर बातें करेंगे मैंने कहा.
रस्ते में ही पीने का पानी ले लिया था हम सीधे कमरे पर चले गए . सज्जू बाथरूम में बदलने के लिए चली गयी बाहर आई तो मैंने देखा उसने नाईटी पहनी हुई थी और उपर एक शाल लपेट लिया मैं भी बाथरूम में गया और कुरता और लूंगी पहन आया आशु ठंड नहीं लगेगी खाली कुरता पहना है आपने सज्जू बोली. नहीं सज्जू लगेगी तो आपका शाल ले लूँगा' मैंने मजाक किया' और अगर मैं नहीं दू तो? सज्जू बोली, तो मैं आधी बाँट लूँगा, मैंने फिर मजाक किया..
थोड़ी देर में हम दोनों ज़मीं पर बीचे बिस्तर पर अधलेटे हो गए, सज्जू मुझसे दूर लेटी थी बीच में जैसे जीतू की जगह छोड़ रखी हो, इतनी दूर रहोगे तो फिर मैं शाल कैसे लूँगा? मैंने कहा, ' सोना नहीं है क्या? सजू बोली. ' ठीक है मगर सोने से पहले थोड़ी देर बातें और करेंगे, मैंने कहा,, सज्जू ने हाँ में सर हिला दिया, ' बत्ती तो बुझा दो बात तो अँधेरे में भी कर सकते हैं, सज्जू ने कहा, मैंने उठ कर बल्ब बुझा दिया. सज्जू मुझे आपका साथ और आपकी बातें बहुत अछी लगती हैं, आपको मेरा साथ और बातें कैसी लगती हैं? मैंने पूछा. ' ये भी कोई पूछने की बात है आप हो ही अच्छे बाकी जीतू के पता नहीं कैसे कैसे दोस्त आते हैं, वे बोलीं, ' कैसे मतलब? मैंने पूछा, अरे कोई कोई तो बिलकुल गंवार लगते हैं इसको डांटती भी हूँ पर इसको असर ही नहीं होता, वे बोलीं. ' ओह्ह. मैं बोला.
थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने यकायक अपना हाथ बढाया और सज्जू को पास खींच लिया, इतनी दूर बैठी हो की आवाज़ तक नहीं सुनाई दे रही, कल जीतू आयेगा तो दूर सोना ही है कम से कम आज की रात तो पास बैठ कर बातें करो, मैंने बोला,' क्या सर, सज्जू बोली, मगर मेरा प्रतिरोध नहीं किया. अब सज्जू मेरे बिलकुल पास थी..
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08-24-2012, 07:03 AM
Post: #6
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने सजू से पूछा, अच्छा मैं आपका दोस्त हूँ?, हाँ ये बात भी पूछने की ज़रूरत है क्या? सज्जू बोली तो फिर एक वादा करो जो कुछ भी पूछूँगा उस का सही सही उत्तर दोगे कोई लाग लपेट बिना, मैंने कहा. ' हाँ बाबा हाँ' सज्जू बोली. ' तो फिर बताओ आपकी रजोनिव्रत्ति हो गयी? ' कैसे कैसे सवाल पूछते हो आप भी ..' वो बोली, अब इसमें क्या है बताओ न, मैंने सुना है उसके बाद औरतों की पुरुष में रूचि ख़त्म हो जाती है.. ' नहीं ऐसा तो नहीं पर हाँ मेरी रजोनिव्रत्ति दो साल पहले आ गयी..सज्जू बोली, तो फिर सच बताओ प्रेम में रूचि ख़त्म हो गयी क्या दो साल पहले,' मैंने पूछा, क्या आशु आप भी.. मैंने मौका देखा और कहा, सज्जू एक बात कहूँ अगर बुरा नहीं मनो तो? ' हाँ कहो मैंने आपकी किस बात का बुरा मन है? वे बोलीं.. .. मुझे थोड़ी देर आपकी गोद में सोना है, कह कर मैं तुरंत उनकी गोद में सो गया, उनकी मज़बूत जांघें मेरे होठों को छु रही थीं, वे थोड़ी देर चुपचाप बिना हिले डुले बैठी रहीं फिर मैंने उनका हाथ अपने बालों पर रख दिया थोड़ी देर बाद वे मेरे बालों में उंगलिया घुमाने लगीं.. मैंने इसी दौरान उनका हाथ पकड़ा और उसको चूम लिया, सज्जू ने विरोध नहीं किया..

बातों बातों में मैंने सज्जू के पावों पर उंगलिया फिरना शुरू किया वो बोली,' पाव मत छुओ आप,' अरे आपके पाव कितने नाज़ुक और सुंदर हैं ये भी तो आपके बदन का हिसा हैं क्यूँ नहीं छूँउ? मैं बोला, धीरे धीरे मैंने उनकी रान और फिर थोडा सा जांघों पर हाथ फिराना शुरू कर दिया इसी प्रकिर्या में मैंने अपना सर उनकी गोद से उठाया और सीधा उनके सीने से सटा दिया और उनके हाथ अपने सर और कंधे पर रख दिए, सज्जू ने मुझे अपनी छाती से भींच लिया.. मैंने अपने दोनों हाथ उपर किये और उनके कंधे और पीठ पर रख कर उनको भी अपनी बाँहों में कस लिया, वे हलकी सी सिसका कर कर चुप हो गयीं अब सज्जू की साँसें तेज़ चलने लगीं थीं.. अब मैं अपना मुह होठ नाक गाल औत पूरा चेहरा उनके सीने पर घुमा रहा था और चेहरे से उनकी छातियाँ दबा रहा था.. उनकी छोटी और नरम छातियाँ मेरे चेहरे से दब रही थी और उनका सीना उत्तेजना में फूल रहा था.. मुझे लगा लोहा गरम है.. मैंने अपने दोनों हथों को आगे किया और उनके स्तन दबाने और मसलने शुरू कर दिए,''' ओह्ह आआआआअह्ह कर के उनके मुह से हलकी सी चीख निकली, इसी दौरान मेरे हाथ में उनके निप्पल्स आ गए और मैंने उनको भी मसलना शुरू कर दिया, मैं खुद अब गरम था और मेरी सांस तेज़ चलने लगी थी, अब मेरे हाथ सज्जू के स्तन गले कंधे पीठ पेट सब जगह घूम रहे थे उसने मुझे जकड़ा हुआ था उसकी सांस तेज़ चल रही थी और साथ ही वो पूरी गरम हो चुकी थीं.. मैंने इसी दौरान अपने होठ उनके होटों पर रखे तो सज्जू ने होठ हटा दिए मुझे रुकना नहीं था मैंने सज्जू का चेहरा हाथ से जबड़ो से कस कर पकड़ लिया और उनके होटों को चूमने चूसने लगा, उन्होंने शायद घबराहट या डर से या अनुभव नहीं होने के कारण अपने होठ पूरे नहीं खोले मगर मैंने जबड़ा कस कर पकड़ लिया और होठ थोड़े से चौड़े कर के अन्दर जीभ दाल दी, ओह्ह आह कर के वे आनंद ले रही थीं थोड़ी देर में वे चुम्बन का मज़ा ले रही थीं और उनकी सांस धोंकनी सी चल रही थी.. मैंने चुमते चुमते ही उनके गाउन को नीचे से सरकाना शुरू कर दिया, जो जांघों तक तो आ गया लेकिन आगे उनकी मोटी गांड के नीचे दब गया जहाँ से उनके सहयोग के बिना उसे उपर कर पाना संभव नहीं था.. मैं उनके कंधो, गर्दन स्तनों, पेट और जांघों के उपरी हिस्से को चुमते चुमते नीचे आया और उनकी नंगी हो चुकी जांघों को चूमने चाटने काटने लगा और इसी प्रक्रिया में मैंने अपने हाथ पीछे ले कर पहली बार उनकी मोटी और मांसल गांड को छुआ और दबाया जैसे ही वे उत्तेजना में थोड़ी सी हिलीं मैंने तुरंत गाउन को उनकी गांड से उपर सरका दिया. अब मैं चड्डी के उपर से उनकी चूत को चूमने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे अपने पावों को आपस में दबा रही थीं, इसी दौरान मैंने पीछे हाथ ले जा कर उनकी विशाल गांड को दबाना शुरू कर दिया और चड्डी के साइड से हाथ डाल कर अन्दर से भी नंगी गांड मसलना जरी रखा, इसी दौरान मैंने दुबारा अपना सफ़र उपर की तरफ शुरू कर दिया और चूमने के साथ साथ गाउन को उपर करना जारी रखा, उनके थोड़े मांसल मगर लज़ीज़ पेट को भी मैंने चूमा और चाता फिर उपर आ कर उनकी ब्रा के उपर अपना मुह फेरने लगा इसी दौरान मैंने उनका गाउन उपर कर दिया और उन्होंने अपने हाथ भी उपर कर दिए मैंने गाउन को उपर ले कर हटा दिया अब वे सिर्फ चड्डी और ब्रा में थीं, खिड़की के कांचों से आ रही रिशनी में उनकी स्तन काली ब्रा में मस्त लग रहे थे मगर में किसी जल्दी में नहीं था, मैंने ब्रा के उपर से ही उनके स्तनों पर मुह घुमाना चालू रखा और ऐसा करते करते पीछे हाथ ले जा कर ब्रा का स्ट्रप खोल दिया, ब्रा खुलते ही उनके छोटे कोई संतरे के आकर के स्तन आजाद हो गए और मेरे भीटर के बच्चे को माँ का दूध मिल गया मैं उनके स्तनों को मसलते हुए काटते हुए खाते हुए चूसते हुए उनके निप्पल्स को दबाने लगा चूसने लगा, अब वे पूरी तरह उत्तेजित थीं और उनके मुह से सिस्कारियां निकल रहीं थीं.. मैंने तुरंत क्षण भर में अपना कुरता हटा दिया अब उपर से मैं निर्वस्त्र था, वे मेरे निप्पल्स को सहलाने दबाने लगीं मुझे लग गया वे काम कला में पूर्ण रूप से निपुण हैं..

मैंने अब उनके कंधे गर्दन और स्तनों पर चुम्बनों की ताबड़तोड़ झड़ी लगा दी वे शायद ही कुछ सोच पातीं, मैंने उन्हें मुझसे दूर होने और मेरी गिरफ्त ढीला करने का मौका ही नहीं दिया, चूमते चूमते मैंने उनका हाथ अपनी लुंगी में फडफडा रहे लौड़े पर रख दिया.. मैंने चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए वो लगभग पूरा ही उनके हाथ में आ गया, उन्होंने लौड़े को सहला हिलाना और दबाना शुरू कर दिया.., मैंने तुरंत लुंगी को ऊँचा किया और नंगा लौड़ा उनके हाथों में थमा दिया, वे अब मेरे सुपाडे के उपर की चमड़ी को हिला रहीं थीं, सुपाडे के उपर उनकी उंगलिया अभ्यस्त चुदक्कड़ औरत की तरह हिल रहीं थीं बेच बीच में वे मेरे मूत के छेद को भी संभल लेतीं.. मैंने अब उनको लिटा दिया और उनकी गांड उपर कर उनकी भूरे रंगकी फूलों वाली चड्डी को हटा दिया.. उनके पाव फैलाये और उनकी चूत के पास मुह ले गया, उनके झांट बढे हुए थे.. और मैं जैसे ही चूत चाटने की कोशिश करने लगा उन्होंने पाँव जोड़ लिए, मुझे पता था ऐसा वो ही औरत करती है जिसकी चूत काफी संवेदनशील हो, मुझे लगा अगर मैंने लौड़ा डाल दिया तो सज्जू शायद दो मिनट में पानी छोड़ देगी और मैं उनकी जांघें चूत पेट बोबे कंधे गर्दन चूम्तेचूमते उनके उपर आने लगा और अपने लौड़े को हमले के लिए adjust करने लगा ...
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08-24-2012, 07:04 AM
Post: #7
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
सज्जू ने पाँव मिलाये हुए थे मैं उपर आया और एक हाथ से उसकी गर्दन पकड़ कर ताबड़तोड़ चुम्मिया लेने लगा खास तौर पर गर्दन और कंधे पर और बीच बीच में उसके मम्मे सहला और दबा देता निप्पल को खा लेता चूम लेता चाट लेता, सज्जू अब निचे से हिल रही थी उसकी गांड अपने आप ही उपर नीचे हो रही थी मैंने एक हाथ नीचे किया और उसकी चूत के होठ खोल दिया.. धीरे धीरे मैं उसकी क्लिटोरिस से खेलने लगा और बीच बीच में ऊँगली अन्दर छेद में सरकता रहा उसकी चूत पनिया गयी थी और मेरी उंगलिया भीग चुकीं थीं.. वो मेरी उंगलीओं के साथ साथ अपनी विशाल गांड को हिला रही थी, अब मेरे हथिआर को सब्र नहीं हो रहा था, मैंने उसके पाव चौड़े किया और जांघें खोल दी उसने अपने पाँव लंड की प्रतीक्षा में मोड़ लिए थे.. अब देरी ठीक नहीं थी, मैंने अपने लंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया ताकि वो खुद ही उसको अन्दर डाले, सज्जू ने दोनों हाथ नीचे ले लिए एक हाथ से वो अपनी चूत के होंट खोलने लगी और दूसरे से मेरा लौड़ा पकड़ कर उसका टोपन चूत के द्वार पर रख दिया या यूँ कहूँ की लगभग पूरा सुपाडा ही अन्दर ले लिया था, मैंने अब थोडा adjustment किया और लगभग आधा लंड उसकी गीली चूत में सरका दिया, सज्जू एक बात कहूँ?' मैं बोला, उसने सी सी करते हुए हाँ में सर हिला दिया, तुम्हारी चूत इतनी टाईट है की ऐसा लगता है जैसे किसी सोलह साल की कुंवारी लड़की की चूत चोद रहा हूँ, मैं बोला, हठो आशु झूठ मत बोलो, वो बोलीं, नहीं सज्जू मेरे लंड की कसम इतनी टाईट चूत मैंने कोई बरसो बाद चोदी है, मैं झूठ नहीं बोल रहा तुम्हारी चूत बहुत टाईट है ऐसा लग रहा है जैसे मेरे लौड़े को कस कर पकड़ रखा है इसने, मैं बोला, ' जिस चीज़ का इस्तेमाल कम होता हो वो टाईट ही तो होगी, वो बोली, ' सज्जू अब इसको चोद चोद के मैं भोसड़ा बना दूंगा पूरा लौड़ा अन्दर ले लो मेरी जान, मैं बोला. मैंने थोड़े घिस्से और लगाये और मेरा पूरा लंड उसकी फुद्दी में समां गया सिर्फ आंड बाहर बचे जो भी अन्दर जाने को कसमसा रहे थे.. मैंने अपने होट सज्जू के होटों से जोड़ रखे थे और दोनों हाथ नीचे ले लिए थे और दोनों हाथों में उसकी मोटी गांड की फांकें पकड़ी हुई थीं, जिनके वज़न से मेरे हाथ दब से गए थे.. मैं उसकी गांडों को मसल रहा था दबा रहा था और उनमे अपने नाख़ून चुभा रहा था इतनी मोटी थी सज्जू की गांड की नाख़ून मोटी चमड़ी में कुछ असर नहीं कर रहे थे.. इसी दौरान मैंने गांड को थोडा सा खोल कर अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद में तीन चौथाई सरका दी सज्जू को कोई असर नहीं हुआ मुझे पता चल गया की गांड खुल जाये तो सज्जू उसको आसानी से मरवा भी लेगी या शायद पहले भी मरवा चुकी हो.. अब सज्जू ने अपने दोनों पाँव आसमान में कर लिए थे और मेरा लवड़ा अब फचफच उसकी चूत की ठुकाई और सैर कर रहा था. सज्जू ने पैर थोड़े और उपर करके लगभग मेरे कंधे पर रख दिए दे अब उसकी चूत की फांकें पूरी तरह खुल चुकी थी और लौड़ा आसानी से आ जा रहा था, अब वो गांड को नीचे से और जोर से हिलाने लगीं और उनके मुह से सी सी की आवाजें और तेज़ हो गयीं और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और उसका एक हाथ मेरे बालों पर था जिन्हें उसने कस कर पकड़ा हुआ था और उसकी साँसें अब मेरे कंधे को छू रही थीं.. उसका दूसरा हाथ मेरी पीठ और कंधे को जकड कर उसको सहला रहा था.. ' सज्जू कैसा लग रहा है मेरा लंड? मैंने पुछा, वो अब गरम थी इसलिए शर्म की कोई संभावना नहीं थी.. बहुत अच्छा, ' अच्छा कैसे? मैंने पूछा,' अच्छा मतलब अच्छा, वो बोली, चूत को कैसा लग रहा है? मैंने फिर पूछा,' अच्छा, वो बोलीं और फिर सी सी की आवाज़ आने लगी.. अच्छा या बहुत अच्छा? मैंने पूछा, बहुत अच्छा आह्ह वोह बोलीं,' रुको मत और जोर से करो रुको मत, सज्जू बोली, ' जोर से क्या करूँ? मैंने पूछा, ' वही जो कर रहे हो ' क्या कर रहा हूँ मैं? मैंने पूछा' ओह्ह वही जो कर रहे हो.. वो बलिं. ' क्या सज्जू चुदाई बोलने में क्या शर्म बोलो न चुदाई,' मैंने कहा,' हाँ चुदाई.. ' वो बली,' कैसी है मेरी चुदाई सज्जू? ' बहुत अछि है आही ऊऊऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊऊऊऊऊ आआआआआअह, ' अब कैसे चोदुं सज्जू? मैंने पूछा, 'ऐसे ही बस थोडा जोर से.. वो बोलीं, मुझे पता था सज्जू झड़ने वाली है इसलिए मैंने गति बढा दी, सज्जू ने अब अपने दोनों हाथों से मेरी गांड पकड़ ली थी और वे उसको guide कर रही थी, मैं अब पूरी स्पीड से घचाघच चोद रहा था मेरे मुह से भी अब ऊऊ ऊऊ आह्ह निकलने लगा था सज्जू की चूत अब गीली झील बन चुकी थी मेरा वीर्य आने से पहले का रस भी खूब सारा उसकी चूत में डल चुका था और उसके खुद के रस भी थे, सज्जू की सांस एकदम से तेज़ हुई और उसने मेरी गांड कस कर पकड़ी खुद की गांड तेज़ी से हिलाई फिर वो शांत पड़ गयी और उसकी सांस जो धोंकनी की तरह चल रही थी शांत पड़ने लगी. ' क्या हुआ सज्जू चूत का पानी निकल गया? मैंने पूछा,' हाँ ' उसने आँखें बंद करके बोला, ' मैं मेरा वीर्य निकालूं या थोड़ी देर और चोदूं सज्जू रानी? ' जैसी आपकी मर्ज़ी, वो बोली, ' नहीं सज्जू तुम बताओ जो तुम कहोगी वही करेगा मेरा लंड, मैंने कहा ' तो थोड़ी देर और करो.. सजू बोली, मुझे लग गया सज्जू की चूत प्यासी है उसने शायद बहुत दिनों से चुदाई नहीं की थी..

सज्जू का ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैंने अब धीरे धीरे फिर से उसकी चुदाई और घिसाई शुरू कर दी.. मैंने सज्जू को बिस्तर पर ही टेढ़ा कर दिया और इसी मुद्रा में लंड अन्दर सरका दिया उसकी मोटी गांड के बीच से लंड चूत की खुदाई कर रहा था.. उसने पाँव मोड़ कर खुद के सीने की तरफ कर दिया इससे उसकी गांड बाहर निकल गयी और चूत खुल गयी.. मेरा लंड अब आसानी से अन्दर जा रहा था मैं पूरा लंड बाहर निकल कर अन्दर डाल रहा था, उसको चुदाई अच्छी लग रही थी.. कोई २-४ मिनट ऐसे चोद कर मैंने सज्जू को बिलकुल उल्टा कर दिया और उसकी जांघों और चूत के आसपास तकिया रख दिया इससे उसकी मोटी गांड और उपर हो गयी और चूत भी थोड़ी उपर आ गयी इस मुद्रा में मैं उसको छोड़ने लगा सज्जू का बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उसकी गर्दन को काटना शुरू कर दिया.. वो ऊओह्ह आह करने लगी मैंने स्पीड बढा दी थी और फचाफच चोदने लगा, सज्जू को भी मज़ा आ रहा था अब मैंने सज्जू का पेट पकड़ा और उसके गांड उपर कर दी सज्जू ने अपना सर बिस्तर पर टिकाया हुआ था इस position में उसकी चूत पूरी खुली हुई थी और लंड को चूत के फूले और मोटे होंट साफ़ दिख रहा थे नीचे हाथ कर के मैंने सज्जू का मोटा पेट पकड़ लिया और एक हाथ से उसके झूल रहे स्तन पकड़ लिए और उनको दबाने लगा.. उसकी चूत से अब चुदाई की आवाजें जोर जोर से आ रही थीं.. मेरी गोटियाँ उसकी चूत के होटों से टकरा रही थीं. सज्जू इसी मुद्रा में शायद एक बार और झड़ने वाली थी, सज्जू मेरा लंड कैसा है? बताओ न..? मैंने पूछा, बहुत अच्छा, वे बोलीं.. अच्छा, ये बताओ ऐसे छोड़ते वक़्त मेरा लंड घोड़े का लग रहा है या कुत्ते का? ' घोड़े का, सज्जू बोली,' घोड़े का तो डेढ़ फूट का होता है सज्जू मेरा तो सिर्फ ८ इंच का ही है, मैं बोला, नहीं ये घोड़े जैसा है ऊऊ अह्ह्ह वो बली, ' ओह्ह सज्जू तेरा घोड़ी अपनी घोड़ी की मोटी फुद्दी चोद रहा है आआआआआ मेरी रानी सज्जू तू बहुत प्यारी और चोदू है,, मैं बोला ' आप भी तो एक नंबर के चोदू घोड़े हो,, ओह्ह्ह आआआआआह अशूऊऊऊओ ' कह कर उन्धोने फिर अपनी विशाल गांड हव में लहरानी शुरू कर दी.. मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारने शुरू कर दिए, उनकी गांड थप्पड़ों से सूज रही थी, मैंने चुदाई और पिटाई दोनों चालू रखे फिर से ग्रर्र्रर्र्र घर्रर की की आवाजें आने लगी और सज्जू की चूत ने दूसरी धार छोड़ दी..
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08-24-2012, 07:04 AM
Post: #8
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
अब सज्जू थक चुकी थी मैंने कहा, ' जान अब और चोदूं या अपनी थेली खली कर दूँ? ' अब बिलकुल नहीं, अब खाली कर दो अपना अमृत मेरे अन्दर,' वो बोली. मैंने उसको वापस सीधा लिटा दिया और टाँगे खोल दीं, अब मैंने अपने हाथों पैर अपना उपर का बदन टिका कर निचे खचाखच जोर के झटके लगाने शुरू कर दिया उसकी चूत और पेट के टकराने से कमरे में फच फच फचाफच की आवाजें गूँज रही थीं, ' जब तक कुछ सेक्सी बोलोगी नहीं सजू मेरा पानी नहीं निकलेगा, मैं बोला,' क्या सेक्सी बोलूं? सज्जू ने पुछा,' कुछ भी बोलो मेरे लंड के बारे में चुदाई के बारे में तुम्हारी चूत को कैसा लग रहा है, मेरी गन्दी आदत है सज्जू मैं गन्दी बातें नहीं सुनूँ तो पानी नहीं झड़ता, मैंने कहा. ' सज्जू ने ये सुन कर मुझे भींच लिया और टांगे और खोल दीं, ' ओह मेरे राजा चोदो अपनी रानी को इसकी प्यासी चूत को अपना अमृत पिलाओ राजा हाँ मेरे राजा मेरे आशु रुको मत चोदते जाओ और गीली कर दो मेरी चूत हाँ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊओ आआआआआअह राजा, सज्जू ने कहा और उसकी सी सी की आवाजें तेज़ हो गयीं, मैंने पानी छोड़ने का वादा कर दिया था नहीं तो शायद सज्जू एक बार और चूत की पिचकारी अवश्य छोडती.. मुझे भी अब नियंत्रण नहीं हो रहा था मैं चाह रहा था सज्जू की चूत को पानी पिला ही दूं, ' हाँ सज्जू मेरी रानी मेरी गरम चूत मेरी मोटी गांड वाली चोदू मेरी चुदक्कड़ मेरे लंड और मेरे गरम पानी की प्यासी मेरी चोदू रानी मेरे मोटे लौड़े की गुलाम मेरे आंड के रस की प्यासी ये ले तेरा पानी ये आ रहा है गरम पानी गाढ़ा और ताकतवाला वीर्य, चूत खोल दे रानी और अपनी बच्चेदानी को भी खोल ले ले तेरे आशिक का असली वीर्य, ये ले ऊऊऊऊह आआआआआआआआअह हाआं हाआआआआआआन याआआआअ ऊऊऊऊऊऊऊ ahhhhhhhhhhhhh, कह कर मैं झड गया वीर्य की बूँदें उछल उछल कर उसके भोसड़े में समां गयी, उसने मुझे भींच लिया और सारा वीर्य अपने भीतर समाने दिया, जब मैं शांत हो गया तो वो रोने लगी, मैंने उसके आंसू पोंछे और कहा, क्या हुआ सज्जू दर्द हुआ? सोरी.., नहीं ये बात नहीं,, ' तो फिर? ' कुछ नहीं, वो बोली, बताओ न क्या हुआ, बताओ न प्लीज़, मैंने कहा, कुछ नहीं आशु तुमने इतना प्यार दिया की बस मरे ख़ुशी के आंसू छलक गए.. वो बोलीं मैंने उसको गले से लगा लिया और ऐसे ही ५ मिनट तक उपर पड़ा रहा..

उसके बाद हम दोनों बारी बारी से बाथरूम गए और धो कर आये अपने अपने हथियार, तलवार और ढाल. मैंने सज्जू को कपडे नहीं पहनने दिए और रजाई में ही भींच कर अपने से चिपटा दिया, ' देखो तुमने सर्दी में भी मेरे पसीने छुटा दिए, मैंने कहा. ' इतनी मेहनत की ज़रूरत ही कहाँ थी? सज्जू बोली. ' अरे जब ज़मीं इतनी मस्त हो तो तो किसान को हल चलाने में मज़े आते हैं चाहे पसीने बहें या पानी.. कह कर हम दोनों हसने लगे..' सज्जू अब तुम मुझसे कुछ नहीं छुपा सकती बताओ न तुम्हारे साथ बचपन में मामा ने क्या किया था? ' अरे वो सारे मामा थे ही मादरचोद उनका बस चलता तो अपनी माँ तक को नहीं छोड़ते,' सज्जू के मुह से गाली निकली. ' ओह्ह,' कैसे. ' सबसे बड़ा मामा तो मैं जब १० साल की थी तो मुझे खिड़की में उल्टा खड़ा कर देता फिर मेरी फ्रोक ऊँची कर के मेरी गांड को दबाता और उसकी पिटाई करता और अपना लंड इस दौरान बाहर निकाल कर उसको हिलाता, मुझे कुछ पता नहीं चलता, मैं मरे डर के खिड़की में उलटी खड़ी रहती.. बीच बीच में वो मेरी चूत को भी ऊँगली करता फिर वो मेरी चूत और गांड दोनों को छत्ता, ' उसने छोड़ा नहीं? नहीं बड़े वाले मामा ने सिर्फ यही किया, ' लेकिन तीसरे नंबर के मामा ने ज्यादा बदमाशियां की, ' कैसे? ' हम लोग खेलते थे तो एक दिन वो सीढ़ी में बैठा था मैं उपर जा रही थी तो उसने मुझे पकड़ कर बिठा दिया और फिर अपने निक्कर की साइड से अपना लंड बाहर निकल लिया और मुझे पकड़ा दिया और बोला इसको हिला, मैं उसके कहे अनुसार उसका लंड हिलाती रही फिर उसका पानी निकल जाता, फिर उसके बाद तो लगभग हर रोज़ वो तीन चार बार वो मुझसे मुट्ठी मरवाता, रात में भी हम साथ साथ ही सोते थे तो सब के सोते ही वो चद्दर ओढ़ कर घुटने मोड़ लेता और मेरा हाथ अन्दर डाल देता मैं उसकी मुट्ठी मारती.. एक दिन घर में कोई नहीं था तो उसने अपने कपडे उतारे और मुझे भी नंगा कर दिया, मेरी छातियाँ तब थोड़ी सी उभरी थीं, और नीचे हलके हलके बाल आये ही थे.. उसने अब अपना लंड मेरे मुह में दे दिया और मुझसे चुस्वाने लगा मुझे बहुत गन्दा लगा मगर मैं मजबूर थी, ऐसा करते करते उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुह में ही अपना वीर्य खाली कर दिया उसके बाद उसने मेरी कुंवारी चूत भी चाटी..

सज्जू ने अपनी दर्द भरी कहानी जारी रखी, ओह्ह सज्जू फिर क्या हुआ? उसने तुमको चोदा? ' सब बता रही हूँ आशु ..' सज्जू बोली . ओ के, मैंने कहा, उसके बाद मेरा मामा नंगा कर के मुझ पर लेट जाता और मैं अपनी टांगें भींच लेती ताकि वो अन्दर नहीं डाल सके.. लेकिन वो मेरे पाँव मिला कर मेरी जांघों के बीच और चूत के मुह को चोदता और फिर पानी छोड़ देता कभी कभी उल्टा कर के गांड और जांघों के बीच लंड फंसा के पानी निकालता.. उस वक्त सिर्फ बड़े दो मामा की शादी हुई थी.. बाकि दोनों मामा कुंवारे थे, सज्जू बोली. सभी की उम्र में फर्क था.. सबसे बड़े मामा उस वक़्त ५० के आसपास थे और उनके एक लड़का था जो मुझसे ५-६ साल बड़ा था, उनसे छोटे मामा शायद तब ४० के थे और उनकी कोई औलाद नहीं थी, बाकि दोनों मामा कुंवारे थे.. घर के नौकर चाकर भी बदमाश किस्म के थे.. दूसरे नंबर के मामा कुछ अजीब थे और बहुत लम्बी उम्र तक तो मुझे पता ही नहीं चला वो मुझसे क्या करवाते थे.. वे कई बार मौका देख कर मुझे कमरे में ले जाते और उलटे हो कर नंगे हो जाते फिर मुझसे पीछे कुछ न कुछ डलवाते, मैं कई बार कहती मामी आ जाएँगी, मगर वे कभी दरवाज़ा बंद नहीं करते थे.. कई बार उनकी गांड में मैंने मामी की लिपस्टिक भी डाली थी.. ओह्ह, मेरे मुह से निकला.. तुमको तुम्हारे मामा ने चोदा तो नहीं? ' नहीं चोद नहीं पाए लेकिन बाकि सब कुछ कर डाला..
लेकिन मेरे कसन ने आखिर मेरी सील तोड़ ही डाली ' कज़न कौनसा? वही मेरे बड़े मामा का इकलौता लड़का, सुमित नाम था उसका तब वो कोई २२-२३ साल का था.. लेकिन ये काम उसने गावं में नहीं किया बल्कि मेरे घर में किया, वो हमारे घर में रह कर शहर में पढता था.. गर्मिओं में हम अक्सर छत पर सोते थे, हालाँकि हमारा घर भरा पूरा था और खूब भीडभाड थी लेकिन कई बार छत पर हम बच्चे ही सोते थे क्यूंकि बड़े कहीं बिज़ी होते.. ऐसे ही रात में कई बार वो मेरे पास अपना बिस्तर लगा लेता. रात में कई बार वो पजामे में मेरा हाथ घुसा देता और मैं उसका लंड हिला देती.. फिर वो मेरी चूचियां भी सहलाता और मेरी चूत में भी ऊँगली करता' ऐसे ही एक रात उसने मुझे गरम किया हालाँकि मैं उसका एक बार पानी निकाल चुकी थी लेकिन उसने मुझे नंगा किया और मेरे उपर चढ़ गया मैं शोर करती तो आवाजें नीचे जातीं इसलिए मैं चुप थी, उसने मेरी कुंवारी चूत के दरवाज़े पर अपना मोटा लंड रखा और जोर जोर से धक्के मार कर अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा.. मेरी दर्द से हालत ख़राब थी लेकिन वो रुका नहीं बड़ी बेरहमी से वो अपनी तलवार को ज़बरदस्ती अन्दर घुसाता रहा हालाँकि उसका लंड अन्दर तो नहीं जा सका लेकिन मेरी दर्द के मारे रो रो कर हिचकियाँ बंध गयीं, मुझे कुछ पता नहीं चला सिवाय दर्द के शायद उसके लंड का टोपा अन्दर जा पाया था, पर उसने पानी वहीँ छोड़ा..
उसके बाद मैं उससे बचने लगी और नीचे सोने लगी, एक दिन उसने मुझे कहा, देखो चुपचाप उपर आ जाना नहीं तो बुआजी ( मेरी माँ) को सब कुछ कह दूंगा और ये भी कहूँगा की तुमने मेरे साथ ज़बरदस्ती की.. मैं बहुत घबराई और फिर छत पर सोने लगी अगली रात उसने फिर मुझे चोदने की कोशिश की इस बार भी मुझे भयंकर दर्द हुआ लेकिन वो रुका नहीं रात में कोई ३-४ बार वो कोशिश करता, मैं रोते रोते उसके हाथ जोडती तो वो मुझे थप्पड़ मार कर चुप करवा देता, भईया रहम करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है मैं रो रो कर कहती, पर उसने कोई रहम नहीं किया, ऐसे ही कोई १५-२० दिन बाद उसके लंड का काफी हिस्सा अन्दर जाने लगा या शायद पूरा ही जाता होगा, मुझे थोडा बहुत मज़ा आने लगा क्यूंकि दर्द अब गायब हो चूका था, लेकिन मेरी बदकिस्मती से मेरे periods शुरू हो गए और उस हरामजादे ने बंद भी कर दिए, मुझे मजबूरन माँ को बताना पड़ा माँ ने बहुत मारा फिर किसी डॉक्टर के पास ले जा कर मेरा गर्भपात करवाया, उसको घर से निकला और माँ ने चुपचाप लड़का देखना शुरू कर दिया फिर जीतू के पापा से मेरी छोटी उम्र में ही शादी हो गयी.. मेरी उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन ये बहुत अच्छे थे और इन्होने मुझे प्यार से रखा और प्यार से ही सम्भोग किया और मेरे बच्चे होते गए.. ' लेकिन इश्क के बारे में तो बताया ही नहीं सज्जू, मैं बोला, हाँ बताती हूँ, सज्जू ने कहा..
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08-24-2012, 07:04 AM
Post: #9
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
बाद में जब जीतू के पापा की पोस्टिंग इधर उधर होने लगी तो मैं अकेले ही बच्चों को संभालती, बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अध्यापक आता था जिसका नाम था अमीन खान, वो मेरा बहुत ध्यान रखता, घर की छोटी मोटी ज़रूरत की चीज़ें भी ले आता हालाँकि उम्र में काफी बड़ा था लेकिन धीरे धीरे वो मेरे घर के सदस्य की तरह हो गया, मैं उसको फीस के अलावा भो थोड़े पैसे दे देती थी ताकि उसकी थोड़ी मदद हो.. ( मुझे याद आया ये वही टीचेर था जो जीतू और उसकी बहन की गांड की पिटाई करता था और गांड चुसवाता था.. )' ओ के सज्जू, ' धीरे धीरे मुझे उस से प्यार हो गया, वो मुझे बहुत प्यार करता था.. ' चुदाई वुदाई हुई या नहीं? ' नहीं चुदाई नहीं हुई तभी तो सच्चा प्यार था.. सज्जू बोली. चुदाई क्यूँ नहीं हुई? मैंने पुछा. शायद उम्र ज्यादा थी या फिर भगवान ने कोई कमी रखी थी, लेकिन कोई २ साल में हम दोनों पति पत्नी से हो गए, उसके लिंग में शायद कोई दोष था और था भी छोटा मगर बिना खड़ा हुए ही उसका वीर्य निकल जाता वो मेरी चूत को चाट कर मुझे लगातार २--३ बार चरमसुख देता था.. फिर अपना लंड भी चट्वाता.. ' और क्या करवाता? मैंने पूछा, अब आपसे क्या छुपाऊं आशु उसको गांड चटवाना बहुत अच्छा लगता था, ओह्ह सज्जू तुमको सूग नहीं आती? ' शुरू शुरू में बहुत आती थी लेकिन वो खुद भी मेरी गांड चाटता था और फिर प्यार में मैं भी चाटने लगी धीरे धीरे आदत हो गयी.. लेकिन बाद में अमीन ने मेरी मुहब्बत का फायदा भी उठाया. ' कैसे?" मैंने पूछा. उसके चाचा का एक लड़का था जो जवान था उसका नाम जावेद था. एक दिन वो उसको रात में साथ ले आया, बच्चे ननिहाल गए हुए थे मैं घर में अकेली थी.

रात में अमीन और उसके चचेरे भाई जावेद ने दारू के ग्लास बनाये मुझे भी पिलाया, और खुद भी पीने लगे.. कोई दो पेग पीते ही मुझे नशा हो गया, अमीन ने उसके बाद मेरे कपडे उतर दिए और मुझे पागलों की तरह चूमने लगा मैं भी उसको चूम रही थी.. वो भी नंगा हो गया फिर उसने मेरे पूरे बदन पर चूमना चाटना काटना शुरू कर दिया, मैं तो मदहोश हो चुकी थी, इसी दौरान जावेद भी मेरे पास आ गया उसने मेरी एक चूची मुह में ली और उसको मसलना दबाना चाटना चूसना शुरू कर दिया उधर अमीन दूसरी चूची चूस चाट दबा रहा था मैंने दोनों के बालों में उंगलिया फिरानी शुरू कर दी... थोड़ी देर बाद अमीन चूसते चाटते नीचे आ गया और मेरी चूत में अपनी मोटी जीभ डाल दी मेरी गीली चूत को थोड़ी देर बाद उसने जीभ से चोदना शुरू कर दिया और अपनी उंगलियो से उसने मेरी चूत के दोनों होठ फैला दिए थे, जिससे उसकी जीभ आसानी से मेरी योनी में आ जा रही थी.. अब मरे उत्तेजना के मैंने नीचे से अपनी गांड ऊँची नीची करनी शुरू कर दी थी, उधर जावेद मेरे दोनों मम्मे मसल रहा था और मेरे हॉट चूम रहा था उसने मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया था वो पागलों की तरह ममे दबा रहा था जैसे इससे पहले उसने कभी किसी औरत के बोबे देखे न हो.. मैं भी पूरी गरम थी, उधर अमीन चूत चाटने और छोट चुसाई में एक्सपर्ट था उसको पता था की उसकी चुसाई से कोई दो मिनट में मैं पानी छोड़ दूंगी और ऐसा ही हुआ मेरी गांड अब तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी और मैं नशे में बडबडा रही थी, अमीन मेरी जान चोदो मेरी रानी को तुम्हारी जीभ लौड़े से भी ज्यादा मज़ा देती है जान चोदो मेरी फुद्दी हाँ चोदो रुको मत कह कर मैंने अमीन के बाल पकड़ लिए अमीन ने अब जीभ से मेरी क्लिटोरिस चाटना शुरू कर दिया और चूत को दो उंगलिओं से चोदने लगा मैं २ मिनट में झड गयी और हांफने लगी.. उधर जावेद नंगा हो चूका था और उसने अपना जवान और सख्त लौड़ा मेरे हाथ में पकड़ा दिया था मैंने अपने हाथ में इतना मोटा तगड़ा लौड़ा नहीं लिया था उसका लौड़ा आगे से अमीन की तरह कटा हुआ था और चमड़ी नहीं थी सिर्फ मोटा फूला हुआ सुपाडा दिखाई दे रहा था, मैंने नीचे हाथ ले जा कर उसकी थेली पकड़ी उसके अंडकोष भी बहुत बड़े थे जैसे किसी जवान सांड के हो लटके हुए और बहुत मोटे.. अब अमीन ने मुद्रा बदली और मेरे उपर ही उल्टा हो गया उसका लंड तो खड़ा नहीं होता था मगर थोडा सा फूल जाता था.. उसने अपना लौड़ा मेरे मुह में दे दिया.. और खुद ने चूत चुसाई जरी रखी, अब चोद दे इस कुतिया को गांडू किस चीज़ का इंतजार कर रहा है मादरचोद, उसने अपने भाई से कहा, ये सुनते ही जावेद मेरे उपर आ गया उसने मेरी गांड के नीचे तकिया रखा और अपना आलूबुखारे जैसा सुपाडा मेरी भोस में ठूंस दिया.. मेरे मुह से ऊओफ़्फ़ ऊऊई निकला, रंडी गरम है जावेद चोद डाल चूत का भुरता बना दे अपने मज़बूत लौड़े से भोसड़ी के.. अमीन अपने भाई को उत्तेजित कर रहा था, ये सुनते ही जावेद ने अपनी गांड का जोर लगा कर अपना लगभग ६ इंच लंड मेरी चूत में पेल दिया,, ऊऊई मां में मर गयी.. मेरे मुंह से निकला, अरे रंडी इतने मोटे लौड़े से तो तेरी मां भी खुश हो जाएगी बुढ़ापे में, मरना तो दूर रहा कुत्ती, अमीन बोला और मेरे मुंह में अपने आंड भी ठूंस दिए ताकि मैं बोल न सकूँ कोई १० - १५ झटकों के बाद जावेद का पूरा ९ इंच का हथिअर मेरे भोसड़े में चला गया, मेरे भोस ने इतना बड़ा और लम्बा और मोटा लौड़ा पहले कभी नहीं खाया था चूत की दीवारों की मस्त रगड़ाई हो रही थी लेकिन अमीन के आंड मुंह में होने से मैं सिर्फ ग्ग्ग्र गर्र कर पा रही थी... जावेद ने मेरी टांगें उपर कर के अपने कंधे पर रख दी और नीचे से चोदने लगा मेरी गीली चूत से फ़च्छ फच की आवाजें आ रही थीं.. उसके आन्दिये मेरी गांड की मालिश कर रहे थे वो रुका नहीं पागलों की तरह चोदने लगा जैसे राजधानी एक्सप्रेस चल रही हो.. अमीन ने उधर दुबारा मेरे मुह की दुर्गत करने ठान ली थी उसने अपना लौड़ा मेरे मुह में डाला और मेरे बाल पकड़ कर मुह चोदने लगा मैंने मुह को गोल कर चूत जैसा बना लिया था उसका नरम लंड आ जा रहा था, मुझे पता था अब वो दुबारा २-४ बूँदें मेरे मुह में डाल कर रहेगा.. और ऐसा ही हुआ वो बोलने लगा ले रंडी ले कुतिया ले मादरचोद रांड ले भोसड़ी की ले कुतिया.. ये ले तेरे खसम का पानी तेरी प्यास बुझाने ले ये ले रंडी ये ले कुत्ती ये ले गाय ये ले अपने सांड का पानी ओह्ह्ह मादरचोद रंडी ये ले ले जल्दी ले पी जा पूरा नहीं तो गांड मर दूंगा ले रंडी .. आह कह कर उसके टोपे से बूंदें छलक गयीं.. मैं किसी गुलाम की तरह उसका वीर्य पी गयी.. उधर जावेद चोदे जा रहा था, अमीन मेरे उपर से हटा तो जावेद मेरे उपर से हटा और खुद नीचे लेट गया और अपने छत को देख रहे लंड पर मुझे बिठा दिया. मैंने अपनी गांड को उपर नीचे कर चूत से उसका लंड खाना शुरू कर दिया उधर अमीन मेरे पीछे आ गया था वो मेरी गांड पकड़ कर उसको उपर नीचे कर रहा था मैं जावेद को चोद रही थी वो मेरे झूलते हुए बोबे मसल रहा था, उधर थोड़ी देर बाद अमीन ने मेरी गांड के छेद पर अपनी जीभ रखी और मेरी गांड चाटनी शुरू कर दी.. वो गांड चाटने का उस्ताद था, पूरी जीभ अन्दर डाल कर उसको इतनी अछी तरह चोदता और चाटता की कई बार चूत से भी ज्यादा मज़ा देती थी गांड, बाद में वो अपनी ऊँगली से मेरी गांड को मस्ती से चोदता था. उधर गांड में जीभ और चूत में गरम लौड़ा हो तो औरत को क्या चाहिए,, मैं दुबारा पनिया रही थी..
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08-24-2012, 07:05 AM
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RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
मैं गरम थी आशु और दारू के नशे से बिलकुल रंडी बन चुकी थी बेशरम, मैंने बोलना शुरू कर दिया, ओह्ह रजा चोद मेरी मोटी गांड चोदो राजा तेरी जीभ को लौड़ा बना मेरे राजा चोद इस गांड को चोद राजा, चोद मादरचोद रंडुए चोद रुक मत खोल दे मेरी गांड और पूरी जीभ घुसा दे अन्दर. कह कर मैंने गांड को उसकी जीभ पर गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया उधर जावेद का लौड़ा भी अन्दर फस रहा था मैंने कहा, मेरे राजा तेरे भाई का लौड़ा तो जवान है और मस्त भी किसी औरत की चूत में एक बार घुस जाये तो उसको गुलाम बना दे.. ऐसा लौड़ा तो हजारों में एक होता है.. चोद जावेद चोद तेरी इस रंडी को चोद इसको ऐसे मोटे लवडे की दासी बना दे गांडू चोद भेनचोद चोद मादरचोद कुत्ते चोदता जा रुक मत आज मेरी चूत तेरा जवान पानी पी कर ही शांत होगी रंडी के बेटे चोद चोद रे मादरचोद.. कह कर मैं उसको घचाघच चोद रही थी मेरी चूत का पानी उसके आंड को भर चुका था. थोड़ी देर बाद अमीन ने अपने भाई के आंड चाटने शुरू कर दिए और उसकी गांड भी चाटने लगा.. जावेद तेरे आंड सांड जैसे हैं इनको इस गाय की भोस में खाली कर के इसको एक बछड़ा दे दे गांडू चोद इस रंडी को मादरचोद.. थोड़ी देर में मैं झड गयी, हाँ चोदु भाइयों चोदो इस गाय को हाँ रे चोदो ओह्ह चोदो रे चोदो गांदुओं चोदो, कह कर मैंने चूत से पिचकारी छोड़ दी उधर जावेद भी आंड चटाई और चूत चुदाई से गरम था और उसने मेरे बोबे मसलने शुरू कर दिए ये ले रंडी मर्द का पानी ये देगा तुझे मोटे लौड़े वाला बेटा ये ले रंडी ये ले ओह्ह्ह ले रंडी ले कुत्ती ले भोसड़ी की ले गांडू ओह्ह्ह आह आ रहा हु भाईजान, हा जावेद कर दे अंडे खाली भाई कर दे जल्दी से.. कह कर अमीन ने अपने भाई की गांड चाटते हुए उसके आंड दबाने शुरू कर दिए, जावेद जोर से चीखा ऊऊऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊउईईइ और झड गया, उस रात जावेद ने मुझे ८ बार चोदा दो बार उसने अमीन की गांड भी मारी. कुतिया बन गयी थे मैं उस रात लेकिन उस रात की चुदाई से मुझे दो नुकसान हुए तब तक मेरे दो ही बच्चे थे जीतू और इसकी बहन मगर जावेद के वीर्य से मुझे तीसरा बचा ठहर गया था, जिस कारन मुझे मेरे हसबंड को भी उनकी पोस्तिंह वाली जगह जा कर चोदना पड़ा ताकि उनको लगे की ये इनका बछा है इसलिए जीतू के भाई से उसकी शक्ल नहीं मिलती है और जीतू की तुलना में उसका लंड बहुत मोटा और बड़ा है पैदा हुआ तब से ही था.. और दूसरी बात ये की दोनों भाइयों ने मुझे अपना गुलाम बना लिया था मर्ज़ी आये जब और मर्ज़ी आये तब वो मुझे चोदते थे, मैं कुछ नहीं कर पाती थी..

सज्जू को बाद में दोनों भाईओं ने खूब चोदा. ' कभी कभी उनके दोस्त या रिश्तेदार भी आते और मुझे चोद जाते, मैं उनकी गुलाम बन चुकी थी.. ' अच्छा सज्जू सच बताना तुमको ये अच्छा लगता था या नहीं? ' अच्छा भी लगता था मगर कभी कभी डर भी लगता था खास तौर पर जीतू के पापा का या फिर इस बात का की किसी को पता नहीं चल जाये.. पर हाँ अमीन के प्यार में मैंने सब कुछ कुर्बान कर दिया,, उसके भाई ने मुझे खूब चोदा और फिर बाद में मुझे भी मज़ा आने लगा.. जीतू के पापा का लंड इतना बड़ा नहीं और वे कभी कभी ही चोदते थे और ज्यादा देर नहीं चोद पाते थे इसलिए मुझे जावेद अच्छा भी लगता था. लेकिन उसके बाद मैंने नसबंदी करवा ली थी ताकि कोई दिक्कत नहीं हो.. लेकिन वहां से जीतू के पापा का वलसाड तबादला हो गया, हम सब उनके साथ चले गए. अमीन और जावेद से साथ छूट गया.
' वलसाड में कुछ हुआ सज्जू? ' हाँ कुछ तो होना ही था..' सजू बोली, 'बताओ न, क्या हुआ? वहां शुरू शुरू में तो कुछ नहीं हुआ बस घर गृहस्थी में ही दिन निकल जाता. ' इनको ( जीतू के पापा) को नौकर मिलते थे, घर में ड्राईवर अलग आता था, माली अलग, सफाई अलग आदमी करता कपडे अलग आदमी धोता और खाना अलग आदमी बनता इसलिए घर में दिन भर भीड़ लगी रहती थी. बाद में मैंने उसने कहा इतने लोगों के बजाय एक -दो आदमी रख लो जो सारे काम कर दिया करे. उसके बाद घर में एक नौकर परमानेंट रख दिया उसका नाम बसभई था. बसाभाई अधेढ़ था और खाना बनाने और सफाई झाड़ू पोंचे का सारा काम करता था. बच्चे स्कूल चले जाते तो वो मुझ से बातें भी करता. वो मेरा और मैं उसका खूब ख्याल रखते थे, जीतू के पापा अक्सर सौरे पर रहते तो रात को हम दोनों टी वी देखते हुए भी बातें करते. मैं उपर कमरे में सोने आती तो उसके बाद वो वहीँ लोब्बी में टी वी देखने के बाद सो जाता. एक रात मैं कमरे में पानी ले जाना भूल गयी रात में प्यास लगी तो मैं नीचे रसोई में पानी लेने आई. सीढ़ी उतर ही रही थी तो देखा की बसाभाई ने टी वी पर कोई विडियो केसेट लगे हुई है जो कोई ब्लू फिल्म की थी. मेरी नज़र पड़ी तो मैंने देखा उसमे एक आदमी खड़ा था और दो औरतें उसका औजार चाट रही थी, एक उसकी मोटी और गुलाबी गोलिया चाट रही थी दूसरी लंड चूसने में लगी थी.. बसाभाई ने अपनी लूंगी ऊँची कर के अपना लंड बाहर निकला हुआ था और उसको हिला रहे थे, मैंने दरवाज़े के पीछे छिप कर देखना शुरू कर दिया, कोई ५ मिनट बाद बसभई के लंड ने पानी छोड़ दिया, मेरी नज़र पड़ी तो मैंने देखा वे मेरी चड्डी और ब्रा ले कर बैठे थे, उन्होंने मेरी चड्डी और ब्रा से अपना वीर्य पोछा, इतने में ही उनको शांति नहीं थी कोई २-४ मिनट बाद उन्होंने वापस लंड हिलाना शुरू कर दिया और इस बार मेरे पेटीकोट से पोंछा, बाद में मैंने छूप छुप कर देखना शुरू कर दिया, बसाभाई मौका देखते ही ब्लू फिल्म लगाते और फिर मेरे कपड़ों पर मूठ मारते, ये दृश्य मैं कोई १५ दिन तक देखती रही, फिर मेरे मन में एक विचार आया..
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