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गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
08-24-2012, 07:05 AM
Post: #11
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
एक दिन मैंने थोड़ी सी पारदर्शी नाइटी पहनी और चुपचाप बसाभाई के पास पहुच गयी और बोली, ' सु थिओ बसाभाई? ' बसा भाई अचकचा गए और अपनी लूंगी खड़े हुए लंड पर डाल दी, बताओ न बसा भाई क्या कर रहे थे सच सच बताओ नहीं तो साहब को कह दूंगी, ' कुछ नहीं मेमसाहब बस खुजली कर रहा था, ' खुजली कर रहे थे कहाँ? बताओ कहाँ खुजली कर रहे थे और क्यूँ? बताओ नहीं तो.. ' कुछ नहीं मेमसाहब बस यहाँ सूसू वाली जगह पर खुजली आ रही थी तो कर रहा था. ' तो मैं आई तो फिर खुजली बंद क्यूँ की? बसाभाई कुछ बोले नहीं, मैंने टी वी की तरफ देखा और इशारा किया ये कौनसी फिल्म देख रहे हो आप? ' वो तो किसी दोस्त ने दे दी थी मेमसाहब इसलिए.. अच्छा तो ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ बैठ कर फिल्म देखूंगी और तुमको मेरे सामने खुजली करनी पड़ेगी नहीं तो मैं साहब से कह दूंगी, मैं बसाभाई के सामने बैठ गयी, उस ब्लू फिल्म में एक लाला और एक गोरा आदमी एक छोटी सी उम्र की लड़की को अपने मोटे लंडों से चोद रहे थे एक का लंड उसकी गांड में था दूसरे का छूट में थोड़ी देर में एक तीसरा भी आ गया जिसने लड़की के मुह में लंड पेल दिया. बसाभाई का अकड़ा हुआ लंड लूंगी में साफ़ दिख रहा था, सु सु वाली जगह पहले जैसे बाहर निकालो और जैसे पहले खुजली कर रहे थे वैसे करो. मैं बोली. बसाभाई ने अब लूंगी ऊँची की और अपने लंड को मुथिअने लगे मेरी नज़र पड़ी तो मैंने देखा बसाभई का लंड ह्रिष्ट्पुष्ठ था, कोई ७ इंच को होगा एकदम काला मगर मोटाई अच्छी थी और नीचे का माल भी मोटा था. मैं बोली, बसाभाई इसको खुजली कहते हैं? उनका हाथ रुक गया, मैं उठ कर पास गयी और बोली, चलो मैं करू खुजली? बसाभाई कुछ नहीं बोले. मैं उनके सामने बैठ गयी और उनका लंड हाथ मैं पकड़ कर मूठ मारने लगी, दुसरे हाथ से मैंने उनकी झूलती हुई गोलिया सहलानी शुरू कर दी बसा भाई ने एक मिनट में पिचकारी छोड़ दी, मैंने कहा, ये क्या बसाभाई आपने तो यही सु सु कर दी, बसाभाई कुछ बोले नहीं तुरंत बाथरूम चले गए..

' बसाभाई चुपचाप लौटे और वही बैठ गए, ' बसाभाई, अब रोज़ सोने से पहले आपकी खुजली मैं करुँगी, मैंने कहा. उसके बाद से ये नियम सा हो गया, बसाभाई रोज़ रात बच्चों के सोने के बाद टी वी पर ब्लू फिल्म लगा देते और धीरे धीरे उनकी शर्म खुल गयी और वे अलग अलग मुद्रा में मुठ मरवाने लगे, ' कैसे? मैंने पूछा. जैसे कभी वे मेरे सामने उकडू बैठ जाते, मैं उनका लंड हिलाते हिलाते आंड पर मालिश करती, कभी वे लेट जाते और मैं मुठिया देती, कभी वे टेढ़े हो कर लेट जाते और गांड मेरी तरफ कर देते, मैं उनकी गांड के बीच से लंड और आंड हिलाती, कभी वे घोडा बन जाते, मैं उनके लंड को थन की तरह दुह देती, फिर बाद में मैं उनकी इच्छा के मुताबिक उनके गुप्तांग पर तेल लगाती कभी क्रीम लगा कर मुठी मारती, कभी वे बाथरूम में बैठ जाते और मैं डब्बे से पानी उनकी गोलिओ पर डालते हुए मुठ्ठी मारती, ऐसे अलग अलग तरीके से वे कोई ३-४ बार दिन में मुझसे मुट्ठी मरवाते. थोड़े दिनों बाद वे दिन में भी मौका देख कर ऐसा करवा लेते. धीरे धीरे उनकी हिम्मत खुली और मुठ्ठी मरवाते समय वे मेरे मम्मे दबाने और मसलने लगे फिर मुझे चूमने लगे फिर गांड दबाने लगे फिर चूत सहलाने और उसमे ऊँगली करने लगे. एक दिन हम दोनों नंगे थे मैं उनके सामने उकडू बैठ कर उनके औजार को सहला रही थी तो बसाभाई बोले, ' सजल बहिन आज आपकी मुठ्ठी मैं मारता हूँ, ' अरे बसाभाई कैसी चूतियापंती की बातें करते हो, मेरे पास लंड कहा है जो आप मुट्ठी मरोगे? ' अरे बहन मैं अपनी चूत को सहला कर उसमे से पानी निकालूँगा, वे बोले ., मैं तैयार थी, उन्होंने मेरे पाँव चौड़े किये और मेरी चूत की फांके खोल कर उसमे अन्दर वाले होटों को ढूंढा और वहा ऊँगली करने लगे, थोड़ी देर में मेरी चूत पनिया गयी फिर उन्होंने छेद में दो उंगलिया डाली और चोदने लगे, मैं पूरी तरह गरम थी और गांड ऊँची नीची करने लगी दोनों मुसलमानों ने मुझे गन्दा बोलने की आदत डाल दी थी, ओह बसाभाई चोदो मेरी चूत चोदो इसको फाड़ दो इसको ओह्ह चोदो कह कर मैं पानी छोड़ गयी, बसाभई ने मौका देख कर अपना लौड़ा मेरी गीली चूत में पेल दिया और घिस्से लगाने लगे. मैंने गांड ऊँची की और पाँव उपर कर के चौड़े कर दिए. बसाभाई का पूरा मर्द मेरे अन्दर घुस कर मेरी मिटटी पलीत कर रहा था, उन्होंने तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी, शायद बरसो बाद उनको चोदने के लिए कोई चूत मिली थी, बसाभाई ने सिर्फ २-३ मिनट में पानी छोड़ दिया मगर उस रात उन्होंने मुझे घोड़ी बना कर, उल्टा कर के, गोद में बिठा कर, टेढ़ा कर के कोई तीन बार चोदा, उसके बाद लगभग हर रोज़ मैं और बसाभाई चुदाई कर लेते, कोई २-३ साल उनसे मैं चूड़ी फिर वहा से भी इनका तबादला हो गया, बस बसाभाई के बाद सिर्फ आपका लंड लिया है, अरसे बाद मेरी चूत ने कोई जवान लंड खाया है तृप्ति मिल गयी इसको.. कह कर सज्जू मुझसे चिपक गयी..

मैंने सज्जू से कहा, सज्जू एक बात कहू बुरा न मानो तो? और हा कहूँ उस से पहले वादा करना होगा की जो में कहूगा वो ज़रूर करोगे? ' मेरे बस में होगा तो ज़रूर करुँगी, वो बोली, बस वस नहीं हाँ बोलनी पड़ेगी चाहे जो हो जाये, मैंने कहा, ठीक है आशु वादा किया, अब बताओ क्या बात है.. वो बोली. ' देखो बाद में मुकरना मत चाहे जो हो जाये, मैंने कहा, हाँ बाबा कह तो दिया हाँ.. ' चाहे जो हो जाये, मैंने कहा, हाँ चाहे जो हो जाये आशु, सज्जू बोली.
' देखो सज्जू तुम्हारे उस प्रेमी अमीन ने जीतू को बचपन से लगभग नामर्द बना दिया है और वो सिर्फ आदमी को ही पसंद करता है,, मिने कहा, ' कैसे आशु क्या किया उसने मेरे बेटे के साथ? ' देखो वो उसकी गांड मारता था और उससे अपना लंड चुसवाता था मुझे ठीक से पता नहीं क्युकी मैंने कभी जीतू से ऐसी बात पूछी नहीं लेकिन शायद उसने जीतू के औजार के साथ कुछ ऐसा किया है जिससे उसका विकास नहीं हुआ, मैं बोला, ' ओह्ह आशु बताओ न क्या किया ? वो क्या आदमी नहीं है? देखो पूरी बात तो मुझे नहीं पता सज्जू लेकिन अब वो जैसा भी है हमें स्वीकार करना पड़ेगा और अतीत को याद रखने से क्या फायदा.. ' ठीक है आशु, लेकिन तुमको ये बात कैसे पता? तुमने जीतू को नंगा देखा है क्या? ' हाँ सज्जू तुमने मुझसे कुछ नहीं छुपाया इसलिए मैं भी तुमसे कुछ भी नहीं छुपाऊंगा. ' जीतू आदमी की गांड चूसने और आदमी से चुदने का आदी हो चुका है मैं भी उसके शौक पूरे किये हैं, ' ओह्ह आशु हाँ. सज्जू बोली. ' एक बात और मैंने तुम्न्हें पाने के लिए भी जीतू का इस्तेमाल किया, ' कैसे? सज्जू ने पूछा, मैंने उसकी सारा वाकया बता दिया, और ये भी बता दिया की जीतू जान बूझकर बाहर रुका है.
' अब तुम एक काम कर सकती हो सज्जू मेरी और अपने बेटे की खातिर, मन मत करना प्लीज़, मैंने कहा, बोलो आशु मैं सब कुछ करुँगी, वो बोली. ' देखो अपने बेटे और मुझसे कोई शर्म मत रखना, मैं चाहता हूँ मैं उसके सामने तुमसे प्यार करूँ ताकि उसको ये लगे की स्त्री पुरुष भी सेक्स कर सकते हैं, धीरे धीरे हो सकता है वो स्त्री में रूचि लेना शुरू कर दे और धीरे धीरे सामान्य मर्द हो जाये, एकदम से तो उसकी आदमियो में रूचि जाएगी नहीं लेकिन शायद धीरे धीरे चली जाये.. मैं बोला. ' लेकिन मैं अपने बेटे के सामने ही पराये मर्द से कैसे प्यार कर सकती हूँ? वो बोली. ' मैं पराया कहा और बेटे की खातिर ही तो ये सब कुछ हम करेंगे, देखो सज्जू तुमने वादा किया है मना मत करना. मैं बोला सज्जू चुप हो गयी और थोड़ी देर बाद बोली ठीक है आशु जैसी तुम्हारी मर्ज़ी कह कर वो मेरे सीने से लग कर रोने लगी..

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08-24-2012, 07:06 AM
Post: #12
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
अब यह तय हो चुका था की अगली रात जीतू वापस जब धर्मशाला आयेगा तो मैं और उसकी मां उसको चुदाई का पाठ पढ़ाएंगे. ' मैंने जीतू को फोन कर के सब बताया तो वो बहुत खुश हुआ, ' देख जीतू मैंने तेरी माँ को यही कहा है की तू पूरा मर्द नहीं है और तेरे सामने चुदाई कर के मैं तेरी स्त्रीओं में रूचि जगाऊंगा, तुझे इस बात को ध्यान रखना है, ' ' वो चिंता छोडो अशोक वैसे भी मैं मर्द हूँ कहा मैं तो तेरी रंडी हूँ, वो बोला. दिन भर मैं सज्जू को सामान्य करने में लगा रहा, रात को जब हम कमरे पर पहुचे तो वो बोली,' आशु मुझे बहुत डर लग रहा है कोई भी मां बेटे के सामने कैसे नंगी हो सकती है? वो बोली. ' अच्छा सज्जू एक बात पुछू तुम्हे मेरी कसम है सच सच उत्तर देना, मैं बोला. ' हाँ पूछो, सज्जू ने कहा. ' क्या किसी भी औरत का मन अपने बेटे को चोदने का नहीं होता? ' सच कहूँ तो शायद हर औरत कहीं न कहीं अपने बेटे को मर्द बनते देखना चाहती है पर शायद समाज और पति वगेरह के कारण ऐसा नहीं कर पाती.. वो ईमानदारी से बोली. ' बस फिर क्या है तुम अपने प्रेमी यानि मुझसे प्यार करो और अपने बेटे को अपना दोस्त मान कर उसको सामान्य स्त्री पुरुष के रिश्ते की जानकारी दो ज्यादा टेंसन मत लो जान, मैं बोला. ' ओ के, सज्जू बोली.
मैंने जीतू को कहा, तू क्या करेगा ये बता दे,' ' मैं आपकी गांड चाटूंगा और लंड चूसूंगा, वो बोला, और तेरी माँ मुझे छोड़ेगी तब? कुछ नहीं तब भी यही करूँगा, वो बोला, अरे गांडू अपनी माँ के साथ क्या करेगा? मैंने पुछा, वो चाहेंगी तो उनकी गांड भी चाट लूँगा, वो बोला. ठीक है फिर तैयार हो जा, अपनी माँ का भोसड़ा देखने के लिए.

रात को खाना वाना खा कर कोई दस बजे हम कमरे पर आये सज्जू सहज नहीं थी घबराई हुई भी थी, मुझे एक उपाय सूझा, मैंने जीतू से कहा की वो राजसमन्द जा कर दारू ले आये, जीतू आधे घंटे में आ गया, ' कमरे में तब तक हम अकेले ही थे, सज्जू तुम इतनी चिंता मत करो मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा, जीतू आ जाये फिर थोडा सा पी लेंगे मस्ती से नींद आयेगी, और तुम्हें नहीं जमा तो कुछ नहीं करेंगे जान, कह कर मैं उसको चूमने लगा और ब्लाउज पर से ही उसके ममे मसलने लगा, जीतू आया तब तक हमने कपडे बदल लिए, मैंने लूंगी कुरता पहना और सज्जू ने गाउन, फिर तीन गिलासें लाये, ' सज्जू अब साथ बैठ कर थोडा सा पी ले? ' लेकिन मैंने तो कभी पी नहीं है वो बोली,' तो क्या हुआ आ चख लो, कह कर मैंने व्हिस्की का गिलास उसके होटों से लगा दिया, हम तीनो अद्धा पी गए और चढ़ भी गयी.
मैंने बिना झिझक के सज्जू के होटों से अपने होठ मिलाये और उसको चूमना शुरू कर दिया वो भी मस्त थी, फिर मैं उसके गले कंधे और स्तनों के उपर भी चूमने लगा, मेरे हाथ उसके स्तनों पर गए और मैं उनको मसलने लगा और घुंडिया पकड़ कर मरोड़ने लगा, वो ऊऊइ उई सी सी करने लगी मैंने उसके बदन पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी और इसी प्रक्रिया में उसको लिटा कर उसके उपर आ गया, धेरे धीरे चूमते चूमते मैं उसके पावों तक आ गया और चूमते चूमते उपर जांघों तक गाउन उपर करते करता जाने लगा. अब सज्जू की मोटी चिकनी और मदमस्त जांघें नंगी थीं..
मैंने सज्जू की जांघें खोल दीं हालाँकि वो उनको जोड़े हुए थी.. और उसकी छड़ी ज़बरदस्ती उसके घुटनों तक उतर दी और जीतू को इशारा कर दिया, जीतू ने तुरंत अपनी मां की चड्डी पावों से खिसका दी, अब मैंने उसकी छूट के पपोटे खोल दिए और जीतू को दिखाया, जीतू अपनी जन्मस्थली देख रहा था और मैं अपनी कर्मस्थली, मैंने धीरे धीरे अपनी जीभ से छूट की खोजबीन चालू कर दी चट चाट की आवाजें कमरे में आने लगीं, इसी दौरान मैंने सज्जू का गाउन उपर कर दिया नीचे से तो वो नंगी थी ही उपर सिर्फ ब्रा थी, सज्जू ने शर्म से अपनी आँखों पर कोहनी रखी हुई थी जो मुझे हटानी थी..
मैं फिर चूमते चूमते बोबो तक पंहुचा और फिर उनको ब्रा के नीचे से आज़ाद कर दिया सज्जू के स्तन अब ब्रा से मुक्त थे और उसके खड़े हुए निप्पल्स मैं चूसने मसलने चाटने लगा, जीतू अब वे स्तन देख रहा था जिनको पी कर मसल कर वो बड़ा हुआ था.. और अब उसको दिखा दिखा कर मैं उन स्तनों को पी रहा था.. इसी दौरान मैं उपर हुआ और सज्जू के होटों को खाने लगा और चूमते चूमते ब्रा पीछे से खोल दी,अब सज्जू बेटे और उसके दोस्त के सामने नंगी थी..

मैं जब सज्जू को चूम रहा था तो जीतू ने मेरी लूंगी सरका दी, और मेरे लौड़े पर अपनी जीभ और होठों का काम चालू कर दिया, उधर सज्जू की चूत शायद नशे और मेरे चुम्बनों से गरम थी जीतू ने मेरे लौड़े को पकड़ा और अपनी मां के भोसड़े के मुह पर रख दिया शायद उसने भोसड़े के दोनों होठ चौड़े कर मेरे लौड़े का सुपाडा वहा फ़सा दिया था.. मैंने गांड को थोडा सा ऊँचा किया और उसका जोर लगाया तो फ़च्छ की आवाज़ से आधा घंटा उसके भोसड़े में चला गया.. अब मैं मेरी गांड को ऊँचा नीचा करने लगा थोड़ी देर में पूरा लंड पार्किंग में चला गए सिर्फ लंड के दो मालिक बाहर बैठे देख रहे थे. सज्जू ने अब शर्म त्याग दी थी और उसने पाँव उठा लिए उसके पाँव अब मुड़े हुए थे और इसी कोशिश में चूत पूरा लौड़ा आराम से खा रही थी, धीरे धीरे उसने अपने घुटने मोड़ कर अपने स्तनों के पास कर लिए अब पूरा भोसड़ा लंड के आने जाने के लिए खुल चुका था मैं घचाघच चोदने लगा, उसनी चूत से रस बह कर मेरी गोलिओ और चद्दर पर गिर रहे थे, जीतू अपनी मां को नंगा और उसकी भयानक चुदाई देख कर चकित था पर उसको उसका काम पता था उसने पीछे आ कर अपना काम शुरू कर दिया था वो मेरी गोलिओ और मेरी गांड के छेद को चाट रहा था बीच बीच में वो लंड का आधार भी पकड़ता और उसको जोर से दबाता. ' जीतू मेरी गोटिया और गांड चाट रहा है सज्जू बहुत मज़ा आ रहा है मुझे. ' माँ की चूत और बेटे की जीभ इससे मस्त चुदाई कहाँ होगी? सज्जू कुछ बोली नहीं और गांड हिलाने लगी मुझे लगा वो जल्द झड जाएगी..
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08-24-2012, 07:06 AM
Post: #13
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
मैंने सज्जू की गांड को नीचे हाथ ले जाकर पकड़ा और उसको जोर से दबाने लगा वो सी सी कर रही थी इसी दौरान मैंने अपनी एक ऊँगली गांड में सरका दी ऊऊईइ करके सज्जू चिहुंकी, अब मैंने लघभग पूरी ऊँगली गांड में सरका के उसकी खुदाई और चुदाई चालू कर दी सज्जू गांड ऊँची नीची करने लगी .. मैंने दूसरी ऊँगली भी सरका दी और उपर से लौड़े औए नीचे से उंगलियो से चोदने लगा.. सज्जू चुद रही थी, और अब पूरी गरम हो कर झड़ने को थी.. ' चोदो आशु छोड़ो मुझे और जोर से चोदो रजा छोड़ो अपनी रंडी को चोदो ऊऊ आह्ह्ह चोदो जान ऊऊऊऊऊउई हाँ चोद राजा छोड़ रुक मत फाड़ डाल मेरी चूत अपने मोटे मूसल से चोद मादरचोद चोद कुत्ते ऊऊऊऊओह आआआआआह हाआं ऊऊऊऊऊउ ईईईईईईईइ आआआआआआआह चोद जान चोद रुक मत गांडू जोर लगा गांड का फाड़ मेरा भोसड़ा ऊऊऊऊऊऊऊह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आआआआआआआआआआअ ऊऊऊऊ, कह कर सज्जू की गांड स्थिर हो गयी उसने खूब सारा पानी छोड़ा. मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला जिस चूत से जीतू बाहर आया था उसी के रस में लिपटा हुआ था वो उसने किसी स्वामिभक्त कुत्ते की तरह मेरे लंड से अपनी मां की चूत का रस चाटना शुरू कर दिया..अब मैंने नया काम किया एक झटका तो मैं सज्जू की चूत में लगाता और दूसरा उस से बाहर निकल कर जीतू के मुह में मैं बारी बारी माँ बेटे को चोद रहा था. थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद मैं सज्जू के उपर से हटा और नीचे लेट गया और बोला सज्जू अब तेरे लौड़े को चोद चोद कर तू इसका रस निकल जान.
मैं लेता और सज्जू उपर आ गयी उसने अपनी मोटी गांड को मेरे लौड़े पर रखा और बीच से चूत को सुपाड़े पर रख दिया और फचाक से आधा लौड़ा गटक लिया चूत में. जीतू अब पीछे से अपनी मां की विशाल गांड देख रहा था और मेरे लौड़े को हजम करती अपनी मां की चूत. सज्जू ने अपने दोनों घुटनों पर हाथ रखे और मेरे उपर बैठ कर चुदाई शुरू कर दी. उधर जीतू अब अपनी तमन्ना पूरी करने वाला था इतनी विशाल गांड उसने आज तक न देखी थी न चाटी थी क्युकी उसने अब तक सिर्फ आदमियो की गांड ही चाटी थी. जीतू अपनी माँ की गांड के छेद को खोल कर उसमे अपनी जीभ घुसा चुका था, वो दुनिया का सबसे बढ़िया गांड चाटने वाला था सज्जू को मज़ा आने लगा बेटा गांड चाट रहा है और उसका दोस्त चुद रहा है.. जीतू बीच बीच में मेरे आंड भी चाट लेता और मेर गांड भी अपनी माँ की गांड से मेरी गांड के बीच उसकी जीभ चल रही थी.. मेरे अंडकोष उसके थूक से गीले हो गए थे अब सज्जू मेरे उपर लेट गयी और चोदने लगी, जानू बहुत मज़ा आ रहा है चुदाई में तो बहुत चोदु है रांडबाज़, चुदाई का राजा है तू तेरे लौड़े और गांड में इतना दम है की अच्छी से अच्छी औरत अपनी फोकी खोल दे तेरे सामने ऊओह राजा मेरे राजा मेरे चोदु लौड़े चोद अपनी रंडी को चोद चोद चोद ऊऊऊऊऊऊओ चोद आआआआह चोद ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओईईईए चोद चोद चोद आआआआअह ऊऊऊऊऊइ चोद चोद और जोर से चोद, सज्जू इस बार साथ साथ पानी छोड़ेंगे जान मेरे आंड भी खली करूँगा तेरे भोस में तुझे एक मज़बूत लौड़े वाला बेटा दूंगा रंडी ओह्ह्ह अह ले मेरा लौड़ा रांड ले इसका रस रंडी कुटिया ओह मादरचोद चाट तेरी माँ के लौड़े का माल, कह कर मैंने उसकी गांड पकड़ ली और उसके उछलते स्तन मुह में ले लिए, ओह्ह आह की आवाज़ों की बीच हम दोनों ने साथ साथ पानी छोड़ा. थोड़ी देर बाद मैं जैसे ही उपर से हटा जीतू ने अपनी मां की चूत में से सारा वीर्य भूके कुत्ते की तरह चाट लिया और मरे उत्तेजना के सज्जू की गांड हिलने लगी उसका बेटा ही उसकी चूत साफ़ कर रहा था..

वोह रात तो कमाल की थी मैंने और सज्जू ने पूरी रात चुदाई की कोई ८ बार मेरा पानी निकला और जीतू का उसे पी पी कर पेट भर गया. सज्जू पूरी तृप्त थी और अब बेटे के सामने चुदने में उसे कोई शर्म नहीं थी. ' आशु मैं मेरे बेटे की नुन्नी तो रात के नशे में देखना ही भूल गयी, वैसे उसने मां को बड़ी तबीअत से चाटा. वो बोली. ' कोई बात नहीं सज्जू आज की रात तुम सबर करना मैं आज सिर्फ जीतू को अपना लौड़ा दूंगा, तुम उसकी नुन्नी आराम से देखना. जीतू रात की चुदाई की बात से बड़ा रोमांचित था. और रात का इंतजार कर रहा था. पूरा दिन बातों और घूमने में चला गया. रात को हमने फिर शराब पी और वापस बिस्तर पर आ गए.
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08-24-2012, 07:07 AM
Post: #14
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
कमरे पर आ कर हमने फिर दारू पी. फिर पीते पीते ही मैंने अपने सारे कपडे उतर दिए और नंगा हो गया. नशे और माँ बेटे के साथ चुदाई की कल्पना से मेरा लंड आधा तो वैसे ही फूल चुका था. मैंने सज्जू को अपने पास कस लिया और उसको चूमना शुरू कर दिया, चूमते चूमते ही मैंने उसके स्तनों से खेलना शुरू कर दिया और उनको मसलना शुरू कर दिया. गाउन के अन्दर ही उसके निप्पल्स खड़े हो चुके थे और पत्थर जैसे हो चुके थे. मैंने चूमते चूमते सज्जू का गाउन उपर कर दिया अब वो सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी. अब मैं उसके पेट को भी चूमने दबाने लगा. थोड़ी ही देर में मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों मम्मे आजाद कर दिए. अब मैं उसके स्तन चूस रहा था और उनको जोर जोर से मसल रहा था. उसी वक्त मैंने जीतू से कहा जीतू नंगा हो जा, जीतू ने तुरंत कपडे उतार दिए. मैंने जीतू को इशारा किया वो अपनी मां की बायीं तरफ आ गया जबकि मैं दायीं तरफ था. जीतू मेरे मन की बात जनता था उसने अपनी मां का स्तन चूसना शुरू कर दिया, एक तरफ जवान बेटा दूसरी तरफ जवान प्रेमी और दोनों उसके स्तन पी रहे थे सज्जू बड़ी खुश थी और हम दोनों के बालों में उंगलिया फिरा रही थी. दो नंगे जवान उसकी दोनों तरफ थे, मैंने सज्जू की मोटी गांड उपर की और उसके आज्ञाकारी बेटे ने उसकी चड्डी नीचे खिसका दी अब हम तीनो मादरचोद नंगे थे..

अब हम वापस उसके स्तन चूस रहे थे. मैंने सजू के दोनों हाथों को नीचे किया और एक हाथ में मेरा और दूसरे में उसको अपने बेटे का लंड पकड़ा दिया.. जीतू का लंड आधा खड़ा था मगर उसका लंड पूरा खड़ा होने के बाद भी कोई ४.५- ५ इंच का होता था.. मेरा लौड़ा अब लगभग पूरा तन्ना गया था और लगभग ८ इंच फ़ैल चुका था और सज्जू की मुट्ठी में नहीं आ रहा था.. उधर जीतू अब उधर से हट गया और उसने मेरे लौड़े की चुसाई और चटाई शुरू कर दी..

मैंने सज्जू से कहा सज्जू थोडा सरसों का तेल ले आओ मुझे कुछ काम है, वो ले आई, मैंने अब उसके बेटे को घोड़ी बनाया और उसकी गांड के छेड़ को सरसों का तेल लगा खोलने लगा जीतू किसी मछली की तरह मारे उत्तेजना के फडफडा रहा था.मैंने अपनी एक फिरदो फिर तीन उंगलिया उसकी गांड में डाल दी और उसकी गांड को उसकी माँ की चूत जितना चौड़ा कर दिया.अब मौका था अपने हथिअर को पेलने का मैंने अपना मोटा सुपाडा उसकी गांड के चिकने छेद पर रखा और गांड का थोडा जोर लगा कर उसको अन्दर पेल दिया, औउ ऊउई माँ मर गया ये चोदु तो मेरी गांड फाड़ डालेगा ऊऊऊ ऊऊऊऊह्ह ओह आआआआआआआआआआ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह करके जीतू मेरा सुपाडा गांड से खा गया अब मैंने थोडा जोर और लगाया और आधा लौड़ा अन्दर पेल दिया, सज्जू ये अनूठा दृश्य देख रही थी जिसमे उसका जवान बेटा उसके प्रेमी से चुद रहा था, थोड़ी देर बाद उसका ममत्व जागा और उसने पुछा, बेटा दर्द तो नहीं हो रहा? ' नहीं माँ मैं तो जन्नत की सैर पर हूँ तेरे आशिक का लौड़ा इतना मस्त है की तेरी चूत के साथ साथ मेरी गांड को भी मज़ा देता है चोदो आशु सर फाड़ो, कह कर वो अपनी गांड ऊँची नीची करने लगा अब जीतू किसी रंडी की तरह चुद रहा था, ' साले तो तो तेरी माँ से भी बड़ा चोदू है गांडू ऐसे तो लंड तेरे माँ भी नहीं खाती हरामजादे.. कह कर मैंने लगभग पूरा लौड़ा उसकी गांड में पेल दिया और उसकी कमर पकड़ कर चोदने लगा उसकी गीली गांड में मेरा लौड़ा फच फच की आवाजें कर रहा था, ' सज्जू अपने राजा की सेवा करो पीछे आ जाओ जान, मैंने सज्जू से कहा वो पीछे आ कर मेरे अंडकोष और गांड को सहलाने लगी, उसको अपने पुत्र की गुदा में जाता मेरा विशाल लौड़ा दिख रहा था और नीचे लटकता उसका छोटा औजार भी दिख रहा था, मैंने सज्जू का एक हाथ पकड़ा और उसके बेटे के लंड पर रख दिया. सज्जू अब मेरे आंड और बेटे के आंड साथ साथ सहला रही थी और दोनों का वज़न तोल रही थी. फिर उसने अपने बेटे की नुन्नी सहलानी शुरू की जो थोड़ी फूलने लगी, कोई ५ मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने को था, उधर सज्जू ने बेटे के लंड को हिलाना मसलना शुरू कर दिया था, शायद थोड़ी देर बाद जीतू का पानी निकल गया जो मुझे चुदाई की उत्तेजना में दिखाई नहीं दिया, बेटे की सेवा के बाद सज्जू वापस मेरे नीचे आ गयी और मेरा उछलता थैला मुह में ले कर चाटने लगी, ' हाँ सज्जू इसका बीज तेरे बेटे की चूत में जा रहा है चाट रंडी चाट इसको निकल इसका पानी ओह्ह गांडू जीतू ये ले तेरा बीज ये ले भोसड़ी के ले गांडू ओह्ह रंडी की औलाद ये ले ऊऊऊऊऊओ आआआआआअह ऊऊऊऊऊऊउइ कर के मैंने जीतू की गांड में पिचकारी छोड़ दी, सज्जू ने अपने बेटे की गांड से रसता मेरा वीर्य देखा, जीतू गांड धोने बाथरूम गया तो सज्जू मुझसे बोली, आप सही थे आशु आपकी एक गोली के बराबर इसकी दोनों गोलिया हैं, और लंड छोटा भी है और पूरा खड़ा भी नहीं होता, अब आप जो कहोगे मैं करुँगी मेरे बेटे की ज़िन्दगी का सवाल है.. राजा
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08-24-2012, 07:08 AM
Post: #15
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
उस रात जीतू ने मेरे लंड को खूब चाटा और चूसा और कोई ५ बार उससे अपनी गांड मरवाई, सज्जू अपने बेटे को चुदवाती रही और मुझे गरम करती रही. उधर जीतू ने अपनी मां की चूत और गांड चाट कर उसका बदला चुकाया. अब मां बेटा और मैं एक दूसरे से पूरी तरह खुल चुके थे. अब कोई शर्म नहीं थी हमारे बीच. नाथद्वारा से जाने का वक्त आ चुका था और जीतू ने अपना आधा वादा पूरा कर दिया था, बचा हुआ वादा भी पूरा करना था यानि अपनी बहन को भी मुझसे चुदवाना था. हम बिछड़ने लगे तो सज्जू ने मुझसे कहा, मुझे अधूरा मत छोड़ना, मैंने कहा नहीं ऐसा नहीं होगा सज्जू तुम तो मेरी जान हो. उसके बाद जीतू से मेरी बातें होती रहीं, एक दिन उसने कहा, सर आप सूरत आ जाओ मां वगेरह बाहर जा रहे हैं घर में सिर्फ मैं और मेरी बहन हैं, उसको एक बार चोद लोगे तो फिर कोई दिक्कत नहीं होगी.. मैंने कहा लेकिन सज्जू से बहाना बनाना होगा, मैंने साडी बातें तय कर के सज्जू को बताया की मुझे कुछ काम है साथ ही जीतू को भी चोद लूँगा, सज्जू ने अपने कार्यक्रम में बदलाव कर दिया, ठीक है दो दिन उसके साथ रह लो तीसरे दिन मैं आ जाउंगी, मुझे भी लंड चाहिए आपका, वो बोली. मैं सूरत पहुँच गया जीतू मुझे स्टेशन पर लेना आया, मैं उसके घर पहुंचा..

जीतू की बहन ने ही दरवाज़ा खोला और खोलते ही मेरे पाँव छू लिए. वो दुबली पतली थी एकदम गोरी, लम्बाई होगी कोई ५ फीट ३ इंच, उसने घर की ड्रेस पहनी हुई थी टी शर्ट और पजामा, जैसे ही वो झुकी मेरी नज़र टी शर्ट के अन्दर पड़ी उसकी गुलाबी ब्रा मुझे दिख गयी, उसके बोबे अच्छे थे, शायद ३४ की साइज़ होगी गोल लग रहे थे, और फिगर शायद ३४-२४-३६ था. उसके हॉट एकदम गुलाबी थे, मैंने उसको कंधो से पकड़ कर उठा लिया. अरे इस औपचारिकता की कोई ज़रूरत नहीं.. हमने खाना वगेरह खाया, ' रात में किसी बहाने से मैं तुमको बहन के साथ एक कमरे में सुला दूंगा फिर पारुल (उसकी बहन का नाम) को चोदना तुम्हारा काम है, हाँ जीतू मैं शायद सफल हो जाऊ, तुम क्या करोगे?, मैं जब तक तुम चुदाई में खुल नहीं जाते तब तक पास नहीं आऊंगा ताकि पारुल घबराये नहीं, वो बोला. ओ के, ठीक है जीतू, मैंने कहा. मैं रात का इंतजार करने लगा.

जीतू ने मुझे सब समझा दिया था, उसने मुझे कहा की वो शाम को किसी बहाने बाहर जायेगा फिर रात को फ़ोन कर के कह देगा की वो सुबह आएगा, मेरे पास सिर्फ एक रात थी पारुल को चोद कर अपना बनाने के लिए.. शाम को पारुल ने मुझसे चाय के लिए पूछा फिर हम बालकोनी में बैठ कर चाय पीने लगे, मैंने रोमांटिक बातें शुरू कर दी और उस से काफी खुल गया. थोड़ी देर में अँधेरा हो गया पारुल बत्ती जलाने उठी तो मैंने कहा, पारुल ऐसे ही अच्छा लग रहा है रहने दो लाईट, मैं बालकोनी की रेलिंग पकड़ कर खड़ा हो गया पारुल भी पास ही खड़ी थी. मैंने बात करते करते पारुल के हाथ से अपना हाथ टच किया, उसने हाथ हटाया नहीं, थोड़ी देर बाद मैंने पारुल से कहा, 'पारुल सच बताना तुम कितनी सुंदर हो ये बात तुम्हे किसी ने कही है या नहीं? ' धत्त मैं कोई सुंदर वुंदर नहीं, कह कर पारुल ने हाथ हटा दिया. ऐसे क्या करती हो पारुल तुम्हे सुंदर ही तो कहा है कोई गाली थोड़े ही दी है, मैं बोला. पारुल चुप हो गयी, मैं उसके पास गया और उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, क्या कर रहे हो सर कोई देख लेगा, वो बोली. इस अँधेरे में तो मैं तुम्हारे सुंदर चेहरे को भी ठीक से नहीं देख पा रहा हूँ कोई दूसरा कैसे देख पायेगा पारुल? कहा कर मैं उसके सामने खड़ा हो कर उसके हाथ दबाने लगा, छोडो सर क्या कर रहे हो? वो बोली. पारुल मुझे तुम्हे नजदीक से देखना है, मैंने इतनी नजदीक से आज तक इतनी सुंदर लड़की को नहीं देखा पारुल, कह कर मैं उसके और पास आ गया अब मुझे उसकी साँसें महसूस हो रहीं थीं, पारुल की साँसें मारे घबराहट के तेज़ हो गयी थी, मैंने हाथ पीछे लिए और उसको भींच कर खुद से सटा लिया और गले लगा लिया उसने अपना सर नीचे रखा हुआ था, मैंने उसके बालों को सहलाते सहलाते उसके कंधे और गर्दन पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी अब उसका सर इधर उधर होने लगा मेरी गरम साँसों ने उसको मदमस्त कर दिया था, धीरे धीरे मैंने उसके गालों, ठोडी आँखों, ललाट, कान वगेरह पर चुम्बन बरसाने शुरू कर दिए. पारुल किसी पट्टी की तरह कांप रही थी और मेरी गिरफ्त में किसी लाचार हिरनी सी जकड़ी थी. मैं रुका नहीं कंधे को चुमते चुमते मैंने उसके टी शर्ट के उपर से ही उसके बूब्स पर चुम्बन जड़ दिए और फिर टी शर्ट को थोडा उपर कर के उसकी सुंदर और पतली कमर और पेट पर चूमने लगा, इसी दौरान मैंने उसके टी शर्ट के अन्दर हाथ दल कर कमर पर हाथ फिरना शिरी कर दिया और पीछे से हिप्स दबाने लगा और टी शर्ट के अन्दर ही मेरा मुह उपर चढ़ने लगा मैं अब ब्रा की उपर अपना चेहरा रगड़ रहा था और ऐसा करते करते मैंने उसका टी शर्ट उपर कर दिया, सर बाहर कोई देख लेगा अन्दर चलो प्लीज़, वो बोली.

अन्दर बिस्तेर पर मैं पारुल को हाथ पकड़ कर ले गया और उसको बिस्तर पर बिठा दिया, मैं खुद घुटनों के बल ज़मीं पर अध खड़ा था, वापस मैं उसके पेट को चूमने लगा उसने मेरे बालों में हाथ फिराना शुरू कर दिया, मैंने उसका टी शर्ट उतर फेंका, और अब उसकी गुलाबी ब्रा के उपर से उसके गोल और नरम स्तन दबा और मसल रहा था उसके मुह से मां की तरह सी सी की आवाजें आना शुरू हो गयीं थीं. मुझे लगा मां बेटियां शायद चुदाई में एक जैसी होती हैं. अब मुझसे नियंत्रण नहीं हो रहा था, मैंने पीछे हाथ दल कर उसकी ब्रा की हुक खोल दिए अब उसके स्तन आज़ाद थे, मैंने कभी इतने गोरे नरम और गोल स्तन मुह में नहीं लिए थे चूसते चूमते मेरा लौड़ा पागल हो गया. उसके निप्पल्स छोटे थे और गुलाबी - भूरे रंग के थे. मां के निप्पल्स का रंग बेटी से अलग था शायद मां ने चुसा खिला कर रंग बदल दिया था.. अब पारुल अधनंगी थी, मैंने इसी कोशिश में अपना टी शर्ट भी उतर फेंका अब मैंने सिर्फ पेंट पहनी थी. परुल को अब मैंने खड़ा कर दिया और उसकी छूट वाले हिस्से और पेट के नीचे मुह रगड़ने लगा और पीछे से उसके गोल और नरम नितम्ब मसलने दबाने लगा उत्तेजना में वोह अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी. मैंने उसकी पजामे का इलास्टिक फैला कर पजामा नीचे सरका दिया, उसने मरून रंग की चड्डी पहनी हुई थी. अब मैं उसकी जांघों को चूमने लगा और चाटने लगा फिर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसकी गांड पर जीभ फिरनी लगा और चड्डी को गांड की दरार में फस दिया उसके नितम्ब मेरे सामने नंगे थे, वह क्या गांड थी.. गोरी और नरम और गोल मैं दबा दबा कर मज़े ले रहा था, जब मैं उसकी गांड दबा खा रहा था तभी मैंने अपनी उंगलियो को चड्डी में दाल कर उसकी छूट की फांके सहलाना शुरू कर दिया. उसकी चूत पर नरम नरम झांटे थीं. उसकी चूत गील थी और उसका रस बाहर झांटों में पहुँच चूका था मैंने होठ फैला कर चूत में ऊँगली सरका दी और ऊँगली करने लगा पारुल गांड हिलाने लगी और मैंने झट से चड्डी उतर दी अब वो मादरजात बिलकुल नंगी थी. मैंने उसको बिस्तर पर पटक दिया और खुद उपर आ कर फिर से चूमने लगा और एक हाथ से अपना निचला हिस्सा नंगा करने लगा. अब उसके मिले हुए पावों के बीच मेरा लौड़ा चुभ रहा था. मैंने तुरंत position बदली और उल्टा हो गया अब मेरा लौड़ा उसके मुह के उपर था और मेरे मुह के सामने उसकी जवान चूत.

मैंने जैसे ही पारुल की चूत के फांके खोलीं अन्दर से उसकी चूत के दूसरे होठ दिखाई दिए जो भूरे रंग के थे उसकी क्लिटोरिस फूली हुई थी. मैंने क्लिटोरिस पर होठ रखे और उसको हल्का हल्का काटते हुए चूसना शुरू कर दिया.उसकी गांड अब ऊँची नीची होने लगी इसी दौरान मैंने अपना लौड़ा उसके होटों पर रख दिया वो उस पर जीभ फिराने लगी और सुपाडे को चूसने लगी.. उसने अब अपने एक हाथ से मेरा लौड़ा कास के पकड़ लिया और मुह में उसको अन्दर बाहर करने लगी उसके थूक से मेरा लिंग एकदम गीला था. मोटाई के कारन वो पूरा उसके मुह में नहीं जा रहा था लेकिन मैंने अपनी गांड हिलाते हुए उसके मुह की चुदाई जारी रखी. उधर मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा, वो अब चुद रही थी मेरी ऊँगली से ठोडी देर में वो ऊँगली पूरी अन्दर चली गयी मैंने साथ में दूसरी ऊँगली भी डाल दी उसकी एकदम गीली चूत बहुत चुदी हुई लग रही थी. वो मुझे बहुत अछी तरह चूस रही थी उधर मुझे पता था की वो दो मिनट में पानी छोड़ देगी. मैंने चुदाई और चुसी जारी रखी वो अब मारे उत्तेजना के गांड ऊँची नीची कर रही थी और सी सी कर रही थी, कोई दो मिनट बाद उसकी गांड एकदम टाईट हो गई और उसने मेरे मुह में पानी छोड दिया, और उसकी सांस फूल गई. उधर मेरा लंड था की अभी तक मारे भूक प्यास के लपलपा रहा था.. उसने चुसी जारी रखी, मैंने अब लंड उसके मुह से हटा दिया और वापस उसके उपर आ गया. अब मैं उसके गुलाबी रसीले होठ चूमने लगा और जीभ अन्दर डाल दी, इसी दौरान एक हाथ से मैंने अपने लंड को अन्दर सरकाने की कोशिश की, ' सुनो आप कंडोम लगा लो, वो बोली. ' मेरे पास कंडोम तो नहीं है पारुल चिंता मत करो मैं पानी तुम्हारे अन्दर नहीं छोडूंगा, मैं बोल, नहीं सर डर लगता है, चिंता मत करो मैं हु न कहा के मैंने लंड उसकी गीली झान्तवाली चूत में सरका दिया उसके मुह से ऊई निकला और आधा लौड़ा गीली गुफा में चला गया..
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08-24-2012, 07:08 AM
Post: #16
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
अब मैं पूरा गरम था पारुल की चूत के दरारें मेरे लौड़े को अच्छी तरह घिस रही थी और उसकी चूत की पकड़ भी मज़बूत थी. अब वो मेरे साथ साथ अपनी भी गांड हिलाने लगी और उसके दोनों हाथ मेरी गांड को पकडे हुए थे. और हर घिस्से पर वो मेरी गांड को दबाती ताकि लंड पूरा अन्दर चला जाये, उसकी चूत मेरा लौड़ा आराम से खा रही थी, अब मैं गरम था और स्पीड बढ़ा दी, पारुल अब तेज़ी से चोदुंगा जान बहुत गरम हो तुम मेरी जान ऊओह आह मेरी जान मेरी गुडिया ओह्ह आआआआआह क्या टाईट चूत है तुम्हारी ओह्ह मेरे लौड़े को कस के पकडे हुए है ऊऊऊ उईइ ओह्ह पारुल ओह मेरी जान चोद जान चोद.. अब मैं घचाघच चोद रहा था चूत से फछा फच की आवाजें आ रहीं थीं. पारुल के मम्मे भी मसल रहा था और निप्पल्स काट रहा था. उसने भी गांड ऊँची नीची करनी शुरू कर दी, और ऊऊऊऊऊऊइ माआआआ कह कर उसने दूसरी बार पानी छोड़ दिया. अब मुझसे नियंत्रण नहीं हो रहा था मैंने गीला लौड़ा बाहर निकला और उसके होटों पर रख दिया, उसने मेरे लौड़े को मुह से चोदना शुरू कर दिया गर्रर ओह्ह्ह जान ओह्ह्ह्हह्हह्ह्ह आ रहा है वीर्य सारा पीना मेरी जान ऊऊऊऊऊ ahhhhhhhhhhh गर्रर कह कर मेरी पिचकारी छूट गई, पारुल गट गट कर सारा पी गयी और फिर मेरे मूत के छेद को जीभ से साफ़ करने लगी, अब मेरा सारा वीर्य उसके पेट में था और मेरी सांस फूल गयी थी मैं उसके उपर लेट गया उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे बालों में हाथ फिरते हुए मुझे चूमने लगी..

अब वो मुझे प्यार कर रही थी, मैं कोई ३-४ मिनट बाद उसके उपर से हटा, मैं भारी तो नहीं पारुल? ' नहीं सर आप बिलकुल भी भारी नहीं, वो बोली, देखो पारुल तुम मुझे सर मत कहो चाहो तो आशु कह दो मैं तुम्हे पारो कहूँगा, ठीक है आशु, वो बोली. फिर पारुल ने मुझे खाना बना कर खिलाया और अब मुझे अभिनय करना था की मुझे जीतू के बारे में कुछ भी पता नहीं. हम अब बातें करने लगे, तभी जीतू का फ़ोन आया, पारुल उसे गुजराती में बातें करने लगी, मैंने पूछा क्या बात की उसने पारुल? ' कुछ नहीं वो आज किसी दोस्त के यहाँ रहेगा, सुबह आयेग,' वो बोली, फिर तो आज मुझे केसर वाला दूध पिला दो पारुल और कमरे में आ जाओ, मैं बोला.

रात को कमरे के टी वी पर मैंने ब्लू फिल्म लगा दी, फिल्म मस्त थी. उसमे एक १२ इंच के लंड वाला कला एक गोरी चोरी को चोद रहा था और उसकी चूत में उसका पूरा लंड नहीं जा रहा था.. पारुल नाईट ड्रेस पहन कर दूध ले कर आई और टी वी देख कर बोली, ये असली है? ' हाँ असली है जान इन काले मादरचोदों के लौड़े ऐसे ही होते हैं, मैं बोला,' सबके? उसने पुछा. ' सबके तो नहीं कुछ कुछ के ज़रूर होते हैं, मैं बोला. ओह्ह ये तो पूरा ले ही नहीं पायेगी, पारुल मुह पे हाथ रख के बोली. ' बहुत बड़ा है ये तो, वो आगे बोली. मैंने कहा देखो ये कैसे चीख रही है.. हाँ चीखेगी ही बेचारी, पारुल बोली. उधर अब वो लड़की अपने दोनों हाथ घुटने पर रख कर उस काले के उपर बैठ कर उसको चोद रही थी, काले का तीन चौथाई लंड बाहर था और नीचे थी एक काली गेंद जिसमे दो छोटे छोटे अंडे थे. लड़की ऊऊ आह आआअ कर रही थी और कला मस्ती से चोद रहा था, उसकी चीखों ने कमरे को गूंजा दिया था.
पारुल ने मुझे दूध दिया और बोली, आपने कहा था इसलिए केसर वाला दूध लायी हूँ, ' मैंने दूध लेते वक्त उसका हाथ पकड़ लिए, पहले असली दूध पी लू फिर गाय का दूध पिऊंगा, और उसके मम्मे मसलने शुरू कर दिए, दूध तो पी लो शांति से पूरी रात पड़ी है, वो बोली, पी लूँगा जान, मैंने कहा. कहते कहते मैंने उसके बदन पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी, उसकी सांस फूल गयी. मैंने उसको बिस्तेर पर पटका और आनन फानन में उसका शर्ट और ब्रा उतर फेंके और उसकी गेंदें मसलना लगा और निप्पल्स खाने लगा, ओह्ह्ह अहह अहह रुको ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह रुको तो आआआआआआआ ऊऊऊऊऊऊउइ करने लगी पारुल. मैं कहाँ रुकने वाला था उसका माखन जैसा गोरा चिकना जवान बदन मेरे लौड़े को पत्थर बना चुका था. मैंने अब उसकी चड्डी और पजामा भी नीचे सरका दिया और चूत में जीभ घुसा दी और पीछे गांड में ऊँगली डाल दी अब मेरी जीभ और ऊँगली उसके दोनों छेदों को चोद रही थी और मारे गर्मी के उसकी गांड ऊँची नीची हो रही थी. पारुल की चूत काफी गरम और गीली थी और वो पानी जल्दी छोडती थी थोड़ी देर में उसके पाँव ऊँचे हो गए और मेरे सर को उन्होंने कस लिया ताकि मेरा मुह चूत से हटे नहीं. अब वो झड़ने वाली थी उसने मेरे बाल कस के पकड़ लिए और गांड तेज़ी से हिलने लगी ऊऊउई माँ ऊऊऊऊऊऊओ ओहोहोहोहोह आआआआआआआह सीईईईई उई आह अहह ओह कह कर वो पानी छोड़ गयी अब मेरे हथोड़े से उसकी चूत की कुटाई का मैदान तैयार था. मैंने अपना गीला लौड़ा बिना देर के छेद पे रखा और गांड का जोर लगाया फच की आवाज़ से आधा लौड़ा एक ही धक्के में चूत में समां गया. ओह्ह कह के पारुल ने मुझे बाँहों में कस लिया और मेरे होटों से अपने गुलाबी नाज़ुक होठ भिड़ा दिए. मैं उसकी जीभ होठ खाने चूसने लगा वो अद्मास्त थी, इसी दौरान मेरा पूरा लौड़ा अन्दर जा चुका था और मैं धक्के लगा रहा था, देखोजान मेरा इतना मोटा लौड़ा तुम्हारी चूत आराम से खा गयी और तुम कह रही थी दर्द होता है, ओह्ह आशु बस चोदते जाओ आप बहुत अच्छा चोदते हो. रुको मत चोदो मुझे चोदो ओह्ह, चोद रहा हु मेरी जान ये ले लौड़े की चोट ये ले रंडी ये ले मोटा लौड़ा ले खा हथोड़े की चोट कह के मैं जोर से झटके मारने लगा मेरी गोलिया उसकी गांड घिस रही थीं. उसने पाँव फैला कर उपर कर लिए मेरे लौड़े को मज़ा आ रहा था और उसकी गरम चूत को भी, बोल मेरे जैसा मज़बूत लौड़ा लिया कभी? नहीं जान ये लौड़ा नहीं हथोडा है ओह्ह्ह ऊईईई जान, पारुल बोली. अब मैं तेज़ी से फच फच चोद रहा था चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं साथ ही जांघों के टकराने की आवाज़ भी. अब पारुल उई उई कर रही थी और उसकी सांस फूल गयी थी सांस रुक न जाये इसलिए उसने मेरे होटों से अपने होठ दूर ले लिए. उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ और गांड में धंसा दिए थे. मैं आ रही हूँ जान, वो बोली, हाँ जान छोड दे चूत का पानी मेरी पिचकारी गीली कर दे. मैं बोला. ohhhhhhhhhhh आआआआआह कर के वो दुबारा झड गयी, पानी अन्दर मत छोड़ना जान, उसने कहा, छोडूंगा तो अन्दर ही नीचे वाले होटों में नहीं तो उपर वाले होटों में, मैं बोला और गीला गरम लौड़ा उसके होटों से लगा दिया. उसके अपने हॉट मेरे सुपाड़े पर लगाये और हाथ से मुठी बना लंड उसमे कस लिया और मुह चोदने लगी मैं गांड हिलाने लगा, ले रंडी मेरा ताक़त्वाला वीर्य ये ले पी जा इसको ओह्ह पी घोड़े का पानी ओह्ह्ह आह ये ले ले आआआआआआआआआआआआ आआआआआआआआह, कह कर मेरी गांड कस गयी मेरा पानी उसके मुह में छूट गया वो सारा पानी पी गयी. ' कैसा लगा घोड़े को? वो बोली, बहुत मज़ा आया घोड़ी को चोदने में अब घोडा गाय का दूध पिएगा कह कर मैं गट गट दूध पी गया.
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08-24-2012, 07:09 AM
Post: #17
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
पारुल को उसके १० मिनट बाद मैंने फिर चोदा, वो हर बार पानी बाहर निकालने को कहती आखिर बाद में मैंने उस से पूछ ही लिया, ' कोई खास वजह तो नहीं पारुल? यह पूछते ही वो मेरे सीने से लग के सुबक सुबक कर रोने लगी, मुझ पर बहुत ज़ुल्म हुए हैं आशु क्या क्या बताऊँ? ' सब बताओ पारुल मुझसे क्या छुपाना, मैं बोल कर उसके सर पर हाथ फेरने लगा. पारुल बताने लगी की कैसे अमीन उस से अपनी गांड लंड और आंड चतवाता था . उस से पहले तो कुछ नहीं हुआ? मैंने पुचा, उस से पहले जब बहुत छोटी यानि कोई ६-७ साल की थी तब मेरे घर के पास एक मंदिर था वहां मुझे कई बार मेरी दादी पानी लेने भेजती थी, मुझे वह का एक कला साधू कुए की ऊपर चढ़ा देता फिर मेरे नीचे कुछ कुछ करता, कई बार वो मुझ गोद में बिठा देता और मुझे नीचे कुछ चुभता था. पर मुझे कुछ समझ नहीं आता इसी तरह एक गुब्बारे वाला आता था बुड्ढा वो अपना एक पाव उपर किसी स्टूल पर रख देता और अपनी धोती साइड से ढीली कर के वह हाथ फिरवता था पर मुझे कुछ समझ नहीं आता था. लेकिन अमीन की बात मुझे समझ में आती थी वो मेरी चूत में लंड तो नहीं डालता पर ऊँगली करता और जीभ भी डालता था, एक बार माँ को कहा तो उन्होंने मुझे डराया की मैं पिताजी या किसी से नहीं कहों नहीं तो मेरी बदनामी होगी.

बाद में जावेद भी पारुल को चोदने लगा,' जब भी माँ बहार होती या इधर उधर होती तो अमीन मुझे चूसता और फिर जावेद चोदता, ऐसे ही मेरे periods मिस हो गए मैंने माँ को बताया तो उसने मुझे खूब डांटा फिर डॉक्टर के पास ले जा कर बच्चा गिरवाया, मगर उन्होंने मुझे चोदना जरी रखा जिस दिन abortion हुआ उसके अगले दिन ही जावेद मुझे चोद गया, मैं गिड़ गिडाती रही मगर वो न तो कंडोम पहनता था न पानी बाहर गिराता था, एक साल में मुझे दो बार बच्चे गिराने पड़े. माँ की डांट और पिटाई अलग. ' ओह इसलिए तुम मुझे बार बार पानी बाहर गिराने को कहती हो चिंता मत करो मैं इंसान हूँ जानवर नहीं अगर गलती से कुछ हो भी गया तो तुम से शादी कर लूँगा मगर बच्चा नहीं ठुकराऊंगा या गिराऊंगा, मैं बोला, ये सुनते ही पारुल मेरे सीने से लग कर रोने लगी, आप बहुत अछे हो .तुम भी अच्छी हो पारुल.. .

उस रात मैंने पारुल को चार बार चोदा, वो बहुत खुल कर चुदी और उसने और भी बातें बतायीं, ये भी बताया की उसको पता था की जावेद और अमीन माँ को भी चोदते थे, ये भी बताया की उसको पता था उसका भाई गांडू है, ये भी बताया की उसके बाद उसके एक प्रोफ़ेसर ने बाद में उसको खूब चोदा, ' वो कॉलेज में पढाता था और मैं उसके घर टूशन के लिए जाती थी, वो भी बुड्ढा था मैं जब १८ साल की थी वो ५८ का होगा, टूशन के समय वो मुझे कई बार अकेला बुलाता और सिर्फ लुंगी पहन कर बैठ जाता, फिर पढ़ाते पढ़ाते टेबल के निचे अपनी लुंगी बीच मैं से फैला कर लंड बाहर निकाल देता और फिर उसको हिलाता और सहलाता वो ये सब ऐसे करता था ताकि मुझे सब पता चले, कई बार तो वो पानी निकाल देता और उस वक्त मेरे सामने ही मुह से आवाजें भी निकालता, एक दो बूँदें उछल कर मेरे पाँव पर भी गिरती, कुछ दिनों बाद वो कुर्सी सामने के बजाय मेरे पास लगाने लगा दो- तीन दिन तक तो वो लुंगी के उपर ही पढ़ाते पढ़ाते लंड हिलाता फिर उसने मेरे साइड में बैठ कर ही लुंगी उपर कर दी और लंड को हिलाने लगा, मैं पढने का बहाना करने लगी, निचे नज़र जाती तो उसका लंड दीखता, उसका लंड तो ६ इंच का ही होगा मगर बहुत मोटा था और एकदम काला था, आगे से उसका सुपाडा भी बहुत गोल और फूला हुआ था, कोई ५-७ मिनट हिलाने के बाद उसका पानी गिरता, ३-४ दिन बाद उसने लंड हिलाते हिलाते मेरे सीने पर हाथ रख दिया और हिलाते हिलाते मेरे बूब्स दबाने लगा, और फिर ओह्ह रानी ओऊ ऊऊ अहह कर के पानी की धर छोड़ी अगले दिन उसके हाथ ब्रा के अन्दर पहुच गए फिर उसने अपना मोटा काला लंड मेरे हाथ में दे दिया, मैं उसकी मुठ मारती, उसके बाद वो मुझे नंगी कर के मुझे चूमता चूसता और फिर खुद बिस्तर पर कभी उकडू बैठ जाता कभी उल्टा हो कर घोडा बन जाता, कई बार कहता मैं गाय हूँ मेरे थन से दूध निकाल और फिर मैं उसकी अलग अलग तरीके से मूठी मारती, कई बार तेल लगवाता कभी पौडर, कभी बर्फ आइसक्रीम न जाने क्या क्या. बाद मैं उसने मुझे चोदना भी शुरू कर दिया, उसकी कामवाली को भी वो चोदता था, कई बार हम दोनों को एक साथ भी चोदता, लेकिन उसने पानी अन्दर कभी नहीं छोड़ा उसके बाद मैं आपसे पहले किसी से नहीं चुदी लेकिन आप जितने प्यार से किसी ने नहीं चोदा आशु, वो बोली.

सुबह जीतू आया तो मैंने उसको बता दिया की मैंने उसकी बहन को चोद दिया और ये भी बता दिया की उसको पता है की वो गांडू है. अगले दिन सज्जू भी आ गयी, दिन में सज्जू ने तीनों भाई बहनों को पिक्चर भेज दिया. सबसे छोटा भाई जो जावेद की औलाद था वो सज्जू के साथ ही लौटा था. उसका नाम परेश था, वो कोई १३-१४ साल का था. सज्जू ने सबके जाते ही पागलों की तरह मुझे चूमना चाटना शुरू कर दिया और बिस्तर पर नंगी हो कर टांगे फैला दी और बोली, मेरी चुदास मिटा मेरी जान मेरे लवडे.. मैंने आव देखा न ताव अपना कड़क लौड़ा पेल दिया उसकी गीली गरम भोस में, साजू और मैंने दो बार पानी छोड़ा, मैंने उसको सच बताना उचित समझा, सज्जू बुरा मत मानना लेकिन मैंने कल रात पारुल को चोद दिया, और हाँ पानी बाहर निकला तुम चिंता मत करना, ' मादरचोद तू मेरे कुनबे को चोद कर मानेगा, कह कर सज्जू हंसने लगी, अब लंड एक है और दो चूतें और एक गांड की प्यास इसी घर में तू अकेला कैसे बुझाएगा गांडू? वो बोली, बुझा दूंगा मेर जान कह कर मैं सज्जू की मोटी गांड मसलने लगा.
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08-24-2012, 07:09 AM
Post: #18
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
अब रात में मैं किस किस को चोदूंगा यह बात तय करनी थी. जीतू के मुझ पर एहसान थे इसलिए उसके भी हक बनते थे. अगर खाली सज्जू को चोदता और पारुल को ये बात पता चलती तो वो बहुत नाराज़ होती. आखिर तय हुआ की मैं और जीतू एक कमरे में सोयेंगे और बारी बारी से उस कमरे में सज्जू और पारो आ कर चुद लेंगे. पारुल को पहले चोदना था ताकि वो संतुष्ट हो कर सो जाये. उधर सज्जू के मन में शायद कुछ और था. मैं, पारुल और जीतू एक कमरे में ही खाना खा कर टी वी देखने लगे. सज्जू अपने कमरे में चली गयी, थोड़ी देर बाद मैंने जीतू से कहा कोई ब्लू फिल्म लगा यार बोर हो रहे हैं, ' मेरे पास तो खाली आदमियो की है, जीतू बोला, कोई भी लगा लगा तो सही..' मैंने कहा. मैं पारुल के पास बैठ गया और उससे सैट गया, जीतू बहार जा कर सी डी लाया और लगाने लगा. मैंने बैठ बैठे पारुल को सहलाना शुरू कर दिया, भैया है न, वो बोली, अरे क्या फरक पड़ता है पारो, चिंता मत कर. ' लाईट तो बंद कर दो, वो बोली, जीतू ने लाईट बन्द कर दी. ये होमोस की फिल्म थी, तें लड़के थे और वे बारी बारी से एक दूसरे के मोटे मोटे लौड़े चूस रहे थे और गांड मार रहे थे उनमे से एक को दोनों ने चोद चोद कर भुरता बनाना शुरू कर दिया था, मैंने अब पारुल के मम्मे दबाने शुरू कर दिए थे, आदमी क्या सच में ऐसे करते हैं? पारुल बोली, अभी देखना तुम्हारा भाई कैसे मुझसे चुदता है जानू, मैं बोला. ' मैंने अब पारुल को उपर से नंगा कर दिया था और उसके मम्मो को बेरहमी से दबा और मसल रहा था. उसके निप्प्ल्स खड़े हो चुके थे उधर जीतू कहा रुकने वाला था उसने मेरी लुंगी सरका दी और गांड से लेकर लंड की टिप तक चटाचट चाटने लगा, बीच बीच में वो दांत भी लगा देता था, अब मेरा लंड टी वी की रौशनी में चमक रहा था. जीतू रुक नहीं रहा था उसकी चटाई की आवाजें गूँज रही थीं, उधर मैंने पारुल को भी नंगा कर दिया था, और उसको लिटा कर उसकी चूत में जीभ दल दी, वो चुसाई का मज़ा ले रही थी, मैं बहन को चूस रहा था जबकि भाई मेरा चूस रहा था. जीतू मेरी गांड भी चाट रहा था. उधर जब पारुल गरम हो गयी तो मैंने उसके उपर आ कर अपना सुपाडा उसकी चूत के झांट वाले होटों से लगा दिया. जीतू पीछे से आया और उसने मेरे लौड़े को दबा दिया, वो आधा उसकी बहन की चूत में सरक गया. जीतू पीछे आ कर अब मेरी गांड जीभ से चोद रहा था, थोड़ी देर में उसने मेरे आंड और बहन की गांड भी चाटना शुरू कर दिया. मैं अब फच फच चोद रहा था पारुल भी गांड उचका रही थी जेतु हम दोनों की गांडे चाट रहा था, पारुल अब सी सी ऊ ऊ करने लगी थी, मं भी भेन्चोद ओह्ह ऊ करने लगा था, तभी यकायक बत्ती जली देखा तो सज्जू थी, ' ये क्या हो रहा है? वो बोली. मैं और जीतू और पारुल अचकचा गए, कुछ नहीं आंटी, मेरे मुह से निकला, 'क्या कर रहे थे तुम तीनों? वो बोली, ; कुछ नहीं.. जीतू और पारुल बोले, अच्छा तो फिर तुम तीनो नंगे हो कर सांप सीढ़ी खेल रहे थे? मेरे लंड की तरफ इशारा कर के वो बोली, इस सांप के साथ? हम कुछ नहीं बोले. ' अच्छा तुम जो कुछ कर रहे थे करते रहो मैं बत्ती जला कर देखूंगी, और अगर रुक गए तो तुम्हारे पापा से कह दूंगी.
मैंने वापस पारुल को लिटाया पाव चौड़े किये और लौड़ा भिड़ा दिया, मरे डर के उसकी चूत सूख गयी थी, ' अब? वो बोली,' कुछ नहीं चिंता मत कर माँ को भी लंड दे दूंगा अभी तू मज़ा ले, ' अच्छा मेरी माँ को भी चोदोगे? वो बोली, हाँ इसीलिए तो आई है वो अभ माँ के चक्कर में तेरे चूत का रस छोटना नहीं रह जाये छोड़ दे पिचकारी मेरी रानी, मैं बोला. ये सुन कर पारुल वापस गांड उच्चालने लगी उधर जीतू तो था ही गांड रस का प्यासा वो दोनों की गाँदें चाट रहा था. ' अब मेरा पानी निकलने को था, लेकिन उस से पहले बिना ज्यादा शोर किये पारुल ने पानी छोड़ दिया था. ' मेरा पानी आने को है जीतू मैं जैसे ही छोटने को होऊंगा लौड़ा तेरी बहन की चूत से बाहर निकालूँगा तू उसका रस पी जाना गांडू, मैं बोला. थोड़ी देर में मेरी गोलिया भर गयी मैंने लंड बाहर निकला जीतू उसको हिलाते हुए सारा रस गटागट पी गया. ' अब मुझे भी छोड़ो सर, जीतू बोला. ' आंटी एक बार जीतू को भी चोद लूँ? मैंने पूछा, सज्जू कुछ नहीं बोली.

उसके बाद मैंने जीतू को चोदा और उसको चोदते वक्त मैं पारुल की चूत चाटता रहा और उसके स्तनों का रस पीता रहा. जैसे ही मेरा जीतू की गांड में पानी छोटने को था सज्जू पास आ गयी और मेरे अंडकोष सहलाने लगी, जल्दी खाली कर तेरा मोटा थैला मेरे बेटे की गांड फट जाएगी, ओह्ह हाँ आंटी ऐसे ही सहलाओ थोडा थूक भी लगा दो, मैं बोला. अब सज्जू मेरे अंडकोष चाट रही थी मेरा लौड़ा उसके बेटे की गांड में था और मेरे हॉट उसकी बेटी के होटों पर थे. ' हाँ आंटी अब तुम्हारे बेटे की चूत भर रहा हूँ ओह्ह हाँ रुको मत चाटो ओह्ह हाँ ले भडवे ले तेर माँ के सामने तेरे सांड का रस ये ले भोसड़ी के ले. ओह्ह अह गांडू ले ओह्ह ऊऊउइ आआः ऊऊऊ ऊऊऊउ, कह कर मेरे अंडकोष उसकी गांड में खाली हो गए, दो बार की चुदाई से पस्त मैं जैसे ही बिस्तर पर लेता तो सज्जू बोली, अच्छा मुझे चोदे बिना कैसे सो पाओगे? लो तुम दोनों, पारुल और जीतू आशु का लौड़ा खड़ा करो अपनी माँ की चूत की सेवा के लिए, वो बोली, और नंगी हो गयी, माँ बेटी और बेटा तीनों आदमजात नंगे थे और उनका सांड भी नंगा था.
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08-24-2012, 07:09 AM
Post: #19
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
उस रात मैंने तीनों को दो दो बार चोदा अब घर में चुदाई का खेल नंगा हो चुका था सिवाय परेश को छोड़ कर. पर उसे भी शायद सब कुछ पता था. हम तीनों अब खुले आम चोदते थे. ये खेल कोई दो साल तक चलता रहा. मैंने उनके शहर यानि सूरत में ही अपना टूशन सेंटर खोल लिया था और उनके सामने वाला फ्लैट किराये पर ले लिया था. कोई दो साल बाद एक दिन सज्जू ने कहा, आशु जीतू के लिए एक रिश्ता आया है बहुत अच्छे घर का और इसके पापा हाँ कह आये हैं, अब क्या करू? ' मैंने कहा हाँ कह दो और क्या शादी ही तो करनी है, ' लेकिन आशु जीतू तो मर्द नहीं है उस लड़की की ज़िन्दगी बिगड़ जाएगी, ' देखो सज्जू घर की बात घर में रहेगी मैं हु न, शादी जीतू से होगी पर उसको मर्द का सुख मैं दे दूंगा, ' मैं बोला,' ओह आशु तो तुम मेरी बहू को भी नहीं छोड़ोगे? उसने हँसते हुए कहा, छोडूंगा नहीं चोदूंगा और हाँ तुम्हे बेटा नहीं दे सका पोता तो दे ही सकता हु, मैंने कहा, वो बुढ़ापे में तुम्हे चोदेगा, ' मैंने कहा, हट कहीं के, कह कर सज्जू मुझसे चिपक गयी.

पटेल साहब के घर शादी की तय्यारियां होने लगीं. मैंने फोटो देखे तो चकित रह गया, जीतू की होने वाली पत्नी बहुत सुंदर थी. और उसकी माँ और उसकी बहन जो की शादी शुदा थी वे भी सुंदर थे. जीतू की इच्छा थी की वो एक बार अपने ससुर से चुद ले. ' तुम मेरी बीवी को और उसके पूरे कुनबे को चोद लो सर पर मेरी सेट्टिंग मेरे ससर से करवा दो, वो बोला, पूरी कोशिश करूँगा जीतू, मैं बोला.

तय्यारियाँ ज़ोरों से चल रही थीं. मुझे पता था ये जीतू की नहीं मेरी शादी है इसलिए मैं मन लगा कर काम कर रहा था. एक दिन एकांत में मैंने और सज्जू ने बातचीत शुरू कर ही दी, ' सज्जू, शादी के बाद जीतू की होने वाली पत्नी नाराज़ होगी की तुमने उसको बताया क्यूँ नहीं की उसका होने वाला पति पूरा मर्द नहीं है और ये भी की उसका दोस्त उसको चोदेगा? कोई भी नयी दुल्हन ये सब तो नहीं मानेगी न?, सज्जू भी चिंता में थी, फिर बोली, ' चिंता मत कर आशु मैं रास्ता निकाल लूंगी.' वो बोली. ' लेकिन उसको तो सुहाग रात के दिन ही सब पता चल जायेगा? मैं बोला,' धत्त तेरे की जब जीतू कुछ करेगा ही नहीं तो उसको कैसे पता चलेगा? ' हाँ वो तो सही है, चिंता मत कर शादी के बाद श्रीनाथजी के आशीर्वाद के लिए वापस नाथद्वारा चलेंगे वह सब कुछ हो जायेगा, कह कर उसने मुझे चूम लिया.
शादी बड़ी धूमधाम से हुई, ' सुहाग रात को ही मैं, सज्जू और जीतू कमरे में थे, जब जीतू की नयी दुल्हन नेहल कमरे में आई तो थोडा चकित रह गयी, सुहाग रात के दिन तो सिर्फ पति होता है,' उसने सज्जू के पाँव छूए, ' बेटी सुखी रह दूधो नहाओ पूतो फलो, ये तेरी प्यारी ननद है पारुल, ये तेरा प्यारा पति है जीतू और ये अशोक सर हैं, हमारे घर के सदस्य, ये तेरे जेठ हैं, उसने यानि नेहल ने मेरे भी पाव छू लिए, मैंने उसको कंधे से उठा कर आशीर्वाद दिया, सुखी रहो..' मैं बोला. कोई हफ्ते भर में सब कुछ सामान्य हो गया, नेहल को सब सुख थे सिवाय मरदाना लंड के..
आखिर सज्जू ने अपना जाल बिछा ही दिया. ' बेटा अब हम चारों यानि जीतू तू मैं और तेरे जेठ श्रीनाथजी चलेंगे. यात्रा की योजना बन गयी, हमने अपनी टवेरा गाडी ली और पूरी तय्यारी के साथ चल दिए.
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08-24-2012, 07:10 AM
Post: #20
RE: गांडू का परिवार - Hindi Sex Story
हम जल्दी निकले थे रुकते रुकते शाम तक नाथद्वारा पहुच गए, वह पहुच कर हमने दो कमरों के बजाय एक बड़ा कमरा लिया जिसमे तीन बेड थे जो आपस में सटे हुए थे. जाते ही शाम को हम दर्शन के लिए चल दिए, देख तू नेहल से पूरी दोस्ती गाँठ ले बाकि सब मैं संभाल लूंगी, सज्जू मेरे कान में बोली. उधर जीतू मुझे कोने में ले गया, चाय के बहाने, मैंने उससे कहा, जीतू क्या करू? तेरी बीवी को चोदू या नहीं? ' आराम से चोद आशु, बस मुझे तो इसके बाप का लौड़ा दिलवा दे और बीच बीच में उसकी पति की गांड भी भर देना प्लीज़, ' वो बोला,' लेकिन बच्चा हो गया तो? इससे अच्छा क्या होगा आशु, तेरा तो बच्चा भी बुढ़ापे में मेरी गांड की सेवा कर देगा, वो बोला, तो ठीक है जीतू जो तू चाहेगा वही होगा. बस जब तुझे कहू तब तू गायब हो जाना, मैं बोला, वो चिंता छोड़ आशु, उसने कहा. मैं नेहल को दर्शन करवाने ले गया फिर उससे खूब बातें की, हम खुल चुके थे.. देखो नेहल मैं तुम्हारा जेठ बनू या दोस्त कोई एक चीज़ चुन लो, मैं बोला,' दोस्त ही ठीक हो आप, उसने कहा..

सास की ही तरह नाथद्वारा में इस बार बहू से दोस्ती बढ़ रही थी. बातों बातों में मैं और नेहल खूब खुल गए, मैंने कहा, नेहल अब मैं तुम्हे नेहा कहूँ तो चलेगा? ' हा आराम से कहो वैसे भी मैं आपसे छोटी हूँ,' वो बोली. ' लेकिन तुम मुझे बदले में आशु कहोगी, मैंने कहा, नहीं आप मुझसे बड़े हैं, वो बोली, देखो दोस्ती में बड़ा छोटा नहीं होता, बोलो कहोगी? वो बोली ' हाँ, क्या कहोगी, मैंने पुछा, आशु, वो बोली और हम हंसने लगे. उस दिन हम शाम तक बातें करते रहे, ' मम्मीजी ( यानि सज्जू नेहल की सास) को चिंता हो रही होगी, वो बोली, मैंने कहा चलो मैं बात करलेता हूँ, मैंने सज्जू को फोने मिला कर कहा आज नेहल और मैं गप्पे मार रहे हैं कमरे में देरी से आएंगे तब कहीं जा कर नेहा की चिंता दूर हुई.

शाम को दर्शन के समय मैंने भीड़ से बचने की बात कह कर नेहा का हाथ पकड़ लिया और उसको धक्को से बचाने के बहाने उस से खूब चिपकता और चिपटता रहा. उसका जवान बदन जैसे ही मुझे छूता मेरी नस नस में कर्रेंट दौड़ जाता. अब बगीचे में चलते हैं नेहा, मैंने उस से कहा, हम उसी बगीचेमें पहुच गए जहाँ से उसकी सास की चुदाई के रास्ते खुले थे. इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने अँधेरा होते ही नेहा सेपूछ ही लिया, सब कुछ अच्छा तो चल रहा है सखी? तुम खुश तो हो? वो कुछ बोली नहीं, एयर उसकी पलकें थोड़ी गीली हो गयीं, मैंने उनको पोछने के बहाने उसके गालों पर हाथ फिराया और उसको भींच लिया, देखो दोस्त माना है तो सब कुछ बताना पड़ेगा तुम्हे श्रीनाथजी की कसम है, मगर आपको कसम है श्रीनाथजी की अगर आपने किसी को कुछ कहा तो, वो बोली. ' मुझे सब सुख है आशु भैय्या( मुझे भैय्या सुनना अजीब लगा लेकिन फिर भेनचोद भी तो था मैं) इतनी अछी सास है, अच्छा देवर है, प्यारी ननद है, ये भी बहुत अच्छे हैं लेकिन मुझे इन्होने शादी के बाद अभी तक मेरे स्त्री होने का एहसास नहीं दिलाया है.. ' साफ़ बोलो सखी मुझे समझ नहीं आ रहा.. मैंने कहा, ' अब कैसे बोलूं भैय्या आप समझ जाओ आप समझते ही हो मर्द का सुख किसको कहते हैं, ' वो बोली. ' अच्छा सखी एक वादा करोगी? मैंने कहा, क्या वादा? उसने पूछा, जब करोगी तब ही बताऊंगा, ' ओ के, वादा है भईया, वो बोली. ' आज की रात जो मैं कहूँगा वो ही करोगी और उसके बाद जो कुछ पूछोगी सब बता दूंगा. ' ठीक है भईया, ' तो फिर होटल चलते हैं.. मैंने कहा और हम होटल आ गए..

खाना खा कर मैंने सज्जू से कहा की आज की रात वो मुझे और नेहल को अकेला छोड़ दे. ' लेकिन तुम बहाना क्या बनोगे? ' बहाना कुछ नहीं आप कह दो आप और जीतू आज की रात कांकरोली जायेंगे विशेष पूजा के लिए. सज्जू ने ऐसा ही किया, शायद वो दोनों माँ और बेटा धर्मशाला जा कर रुक गए होंगे, मुझे पता था जीतू मां की चूत और गांड रात को तबीअत से चाटेगा और माँ अपने बेटे के लंड को मरदाना बनाने की पूरी कोशिश करेगी . रात को मैं और नेहा बातें करने लगे, फिर बत्ती बुझा कर हम टी वी देखने लगे. वो नाइटी में थी और मैंने लुंगी और कुरता पहना था. हम बातें करने लगे, फिर मैंने उस से कहा, नेहा अगर तुम मुझे अपना मनो और मुझसे वादा करो की जो मैं कहूँगा वो करोगी तो मैं तुम्हे बहुत सारी सच्चाइयाँ बताऊंगा. उसने वादा किया.
मैंने उसको लगभग सारी बातें बता दी ये भी की उसका पति लगभग नपुंसक है और ये भी की अगर उद्को पुरुष का सुख चाहिए तो वो विरफ मुझसे ही मिलेगा. नेहा रोते रोते मेरे सीने से लग गयी, और मैं उसके बाल सहलाने लगा. धीरे धीरे मैंने उसको सहलाना शुरू कर दिया वो कोई प्रतिरोध नहीं कर रही थी..

नेहा एक सुंदर गोरी और नाज़ुक लड़की थी. उसकी लम्बाई होगी कोई ५ फीट ३ इंच, और वज़न होगा शायद ५५ किलो. उसके होठ एकदम गुलाबी थे और थोड़े से उभरे हुए थे जिससे किस में बहुत मज़ा आये. हाथ पाँव ज्यादा मोटे नहीं थे, गर्दन लम्बी थी और स्तन शायद ३४ आकर के थे, और शायद उसकी निप्पल्स गुलाबी होंगी, हिप्स उभरे हुए थे शायद ३६ या ३८ का आकर होगा, उसका पेट पतला था और गोरा था, वो बड़ी कच्ची और कामुक लगती थी.
सहलाते सहलाते मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और कोई दस मिनट तक मं उसके होठ चूमता रहा उसने भी पूरा साथ दिया इसी दौरान मेरे हाथ गाउन के उपर उसकी गोलाईयां नापने लगे उसके स्तन कड़क और गोल थे और कमर पतली. मैंने अपना कुरता उतर फेंका और उसका गाउन ऊँचा कर दिया, उसकी गुलाबी ब्रा और पीली चड्डी उसके बदन पर बचे थे, मैंने उसके हाथ को लुंगी के उपर ही मेरे अकड़े हुए लौड़े पर रख दिया वो चूमते चूमते उसको दबाने लगी. मैंने अब ब्रा हटा कर उसके गुलाबी निप्पल्स चूसने शुरू कर दिए साथ ही उसके स्तन सह्लानेलगा धीरे धीरे मसलने भी लगा उसकी सांस तेज़ हो गयी थी.. मैंने लुंगी हटा फेंकी और नंगी तलवार उसके हाथ में दे दी, उसका चड्डी खोल कर मैंने उसको बिस्टर पर लिटा दिया और उसको पागलों की तरह चूमने लगा, रुक जाओ भईया, वो बोली, मैं भईया नहीं तेरा सैय्याँ हूँ तेरा जेठ तेरा मर्द मेरे नियोग से ही तुझे बच्चा होगा नेहा. मैं बोला,
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