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देसी मामी
11-29-2012, 04:01 AM
Post: #11
RE: देसी मामी
भाग ११
हालांकि रात का वक्त था और अँधेरा बहुत था, उसे महेश काफी हद तक साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. कोहनी के बल वो बिस्तर से थोडा उठ कर महेश को देखने लगी. हालांकि वो अभी भी दुनिया कि नज़र में बच्चा ही था, चंदा उसके मांसल शरीर को देखकर रोमांचित हो रही थी. महेश ज़्यादातर लड़कों कि तरह हाफ पैंट पहने हुए था. काफी हृष्ट पुष्ट था. चंदा कि नज़र खास तौर से उसके पैरों के बीच घूर रही थी. उसे याद था कि उसने महेश के लिंग कि उभारन को देखा था जिससे वो समझ गयी थी कि महेश एक विशाल लंड का मालिक है.

गर्मी तो थी ही, साथ में चंदा के तन में धीरे धीरे जो आग सुलग रही थी उसने उसकी नींद हराम कर रखी थी. आग में जलती वो कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या करे. सही-गलत का खेल अब भी उसके मन में जारी था. वहाँ महेश के मोटे लंड का आकर्षण उसे पगला रहा था और यहाँ उसकि चूत में जो आग लगी थी, उसे ठंडा भी करना था. बहुत देर तक इसी उधेड़ बुन में जलते जलते आखिर तन कि आग ने मन के द्वंद्व का निर्णय घोषित कर दिया.

अब जो भी चंदा के मन में चल रहा था उसका नाता न तो इस बात से था कि वो महेश कि मामी है, उसके माँ समान, न तो इस बात से कि महेश उससे काफी छोटा था, न इस बात से कि उसकी बेटी तारा भी उसी बिस्तर पर थी और न इस बात से कि उसका पति उसीके लिए इतनी रात में मेहनत कर रहा था.

इस समय वो एक नारी नहीं एक मादा थी जिसे एक नर चाहिए था. उसकी चेष्टा केवल अपनी चूत में एक लंड डलवाने कि थी. उसके तन बदन में आग लगी थी और आग में जलती वो इस आग को बुझाना चाहती थी. उसे बुझाने का एक ही तरीका उसे सुझा.


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11-29-2012, 04:01 AM
Post: #12
RE: देसी मामी
भाग १२
वो बिस्तर से उठ खड़ी हुई और जल्दी से अपनी साड़ी उतार फेंकी. फिर तारा को धीरे से बिस्तर के किनारे खिसका के उसके और महेश के बीच लेट गयी. उसकी साँसे तेज चल रही थी. डर भी उसे खूब लग रहा था, लेकिन जिस रास्ते वो निकल चुकी थी, वहाँ से वापसी के बारे में सोचने लायक उसकी हवस ने उसे नहीं छोड़ा था.

महेश के बिलकुल पास जा कर उसने अपने ब्लाउस के ऊपर के दो बटन खोल दिए. अब उसके बूबे आधे बाहर झलक रहें थे. अब उसने पेटीकोट को खींच कर अपनी चड्ढी तक कर लिया. उसकी गद्रे गोरी टाँगे और मस्त दुधिया जांघे रात के अँधेरे में भी चमक रही थी. फिर वो महेश कि तरफ पलटी और ब्लाउस का एक और बटन खोल दिया. फिर बायें निप्प्ल को हल्का सा ब्रा के बाहर खींच लिया. अब उसने आँखे बंद कि और अपनी जांघ को महेश कि जांघ पर ऐसे रख दिया कि उसका लंड उसकी जांघ पर महसूस होने लगा. उसकी साँसे तेज चल रही थी और दिल मानो धड़कते धड़कते फट जाने वाला था. अब वो सिर्फ इन्तेज़ार कर सकती थी. गर्म साँसों के साथ वो महेश के कुछ करने का इंतज़ार करने लगी.

हाँ, उसे डर लगा था कि कहीं महेश ने उसे दुत्कार दिया और चंदर से कह दिया तो क्या होगा? लेकिन तन कि ज्वाला दिमाग को ठीक से सोचने भी नहीं दे रही थी.

थोड़ी देर बाद उसे अपनी जांघ पर महेश के लंड के बढ़ने का एहसास हुआ. एक बार तो उसका दिल धक् रह गया. क्या इस 18 साल के लड़के का लंड उसके पति के लंड से दुगना बड़ा है? उसने हलके से आँखे खोली तो देखा कि महेश उठ चूका है और आँखे फाड फाड के उसे देख रहा है. कभी उसके अधनंगे बब्लों को तो कभी उसकी गोरी जांघों को. लेकिन वो डरा भी हुआ था. समझ नहीं पा रहा था क्या करे. बस यही मौका था. चंदा ने नींद में पलटने का बहाना करते हुए पीठ के बल लेट गयी. टाँगे मोड कर उठा ली जिससे उसकी पूरी टांगें नन्गी हो गयी. और नींद के ही बहाने उसने अपने ब्लाउस में हाथ डाल अपने बांये बूबे को नंगा कर दिया और महेश का इन्तेज़ार करने लगी.

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11-29-2012, 04:01 AM
Post: #13
RE: देसी मामी
भाग १३
यहाँ महेश कि हालत खराब थी. उसकी चंदा मामी के कपडे नींद में उथल पुथल हो गए थे जिसके कारण उनका ब्लाउस आधा खुला हुआ था और उनका एक बुबे का निपल बाहर झाँक रहा था. उफ़ उनके गोरे गोरे बादल जैसे बूबे. उनकी टाँगे नंगी थी उनकी गदराई जांघों को देख महेश का लिंग तन गया था. इससे पहले मामी के पैर उसके ऊपर थे. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और साँसें तेज हो चली थी. इस अर्धनग्न अवस्था में उसने कभी किसी औरत को इतने करीब से नहीं देखा था. उसका लिंग फूल के खूब मोटा और खूब कड़ा हो चूका था. उसके लंड कि ऐसी हालत कभी नहीं हुई थी.

मामी के सांस लेने के साथ उनकी छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी. मामी के होंठ अधखुले थे. और उनकी जांघे... महेश होश खोकर मदहोश होने लगा था. उसे हल्का हल्का शक था कि चंदा ये जानबूझ के कर रही थी, लेकिन अगर शक गलत निकला तो?

इधर चंदा भी बेचैन हो रही थी. वो जानती थी कि महेश पर मनचाहा असर हो चूका है. फिर भी वो कुछ कर नहीं रहा था. शायद डर गया था. उसने सोचा कि वही कुछ शुरुवात करदे तो? लेकिन अगर महेश बुरा मान गया या ज़रूरत से ज़्यादा डर गया तो?

दोनों कामुक हो चुके थे. चंदा कि चूत गीली और गर्म हो चुकी थी. वहीँ महेश का लंड भी पूरी तरह से तैयार था और रीस रहा था. एक नर और एक मादा, चुदाई का नैसर्गिक खेल खेलने के लिए बेचैन और आतुर थे, लेकिन दोनों के मन में समाज के बनाये नियम अंदर से डर के रूप में उन्हे रोके हुए थे.

हवस और नैतिकता का यह संघर्ष कितनी देर तक चल सकता है. चंदा और महेश के लिए यह संघर्ष करीब ३ मिनटों तक चलता रहा जिसके कारण दोनों कि कामोत्तेजना बढती जा रही थी. अंत में दोनों इतने उत्तेजित हो गए कि चंदा ने करवट बदल के महेश कि तरफ चेहरा कर लिया और फिर अपनी बायीं टांग को उसके ऊपर रख दिया. उसी समय महेश का हाथ चंदा कि जांघ पर जा पहुंचा. चंदा ने आँखें खोल दी. महेश को अधखुली आँखों कि प्यासी नज़रों से उसने देखा और उससे लिपट गयी. महेश ने भी उसे भींच लिया और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए. धीरे धीरे दोनों ने चुम्बन करना शुरू किया. महेश चंदा कि जांघ को सहला रहा था. चंदा बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी. महेश के होंठो को जोर जोर से चूसने लगी और उसे अपने ऊपर खींचने लगी.

महेश ने भी अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी और उसके ऊपर चढ गया. कपडे पहने हुए ही, कुदरत से मजबूर दोनों एक दुसरे से रगड़ने लगे. चंदा को उसके मोटे लंड का एहसास होने लगा था. लेकिन इस रगड से उसका जी नहीं भर रहा था. उसकी चूत जल रही थी और उसे सिर्फ महेश का मोटा लंड ठंडा कर सकता था.

उसने महेश को हटाने कि बहुत कोशिश कि लेकिन महेश अपने लंड को शायद पैंट फाड कर उसकी चूत में उतारना चाहता था. बहुत मुश्किल से ही वह उससे अलग हुआ. उसके हटते ही, चंदा उठ बैठी. महेश उसके सामने ही बैठा था. चंदा ने ब्लाउस का एक और हुक खोलते हुए, आँखों ही आँखों में महेश को आमंत्रित किया. महेश समझ गया. झट से उसका ब्लाउस उतार फेंका. ब्रा निकालने में उसे मुश्किल हो रही थी तो चंदा को हलकी सी हंसी आ गयी. महेश झेंप गया. चंदा ने खुद ही ब्रा उतार दी.

अब उसके गोरे गोरे गोल गोल बूबे अपने पूरे जलवे के साथ अँधेरे में चमक उठे. महेश आँखे फाड फाड के उन्हें देखने लगा. चंदा ने उसका हाथ पकड़ के अपने बूबों पर रख दिया. उन्हें दबाते ही महेश चौंक गया. इतने मुलायम बूबे! उसने उन्हें बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया. चंदा के मुंह से सिसकारी निकाल पड़ी, बोली, "हाय. आराम से गोलू बेटा, उखाड दोगे क्या?"

"दर्द हो रहा है क्या?" महेश ने पुछा.

"इतनी जोर से रगड़ोगे तो दर्द नहीं होगा?"

"अच्छा चलो इनका दर्द गायब कर देता हूँ मामी." कहते हुए महेश ने उसके एक बूबे को चूम लिया. चंदा को मानो कोई करंट लग गया हो. दुसरे बूबे को वह हलके हाथ से दबाता रहा. चंदा कि चूत इंतना पानी छोड़ रही थी कि उसकी पैंटी गीली हो गयी थी.

चंदा ने फिर महेश को बड़ी मुश्किल से अपने से अलग किया और ऊँगली से नीचे कि ओर इशारा किया. महेश समझ गया. उसने उसके पेटीकोट का नाडा खोल दिया और पैंटी और पेटीकोट को एक साथ उतार दिया. पहली बार पूरी तरह से नंगी औरत को देख महेश को लगा कि वह अभी झड जाएगा. तभी चंदा ने उसकी पैंट को खींचना शुरू कर दिया. महेश भी नंगा हो गया.

उसके लंड को देख कर चंदा के चेहरे का रंग उड़ गया. करीब ८ इंच लंबा था. खूब मोटा भी. पता नहीं उसका क्या होगा? अचानक जैसे उसने मन में देख लिया कि उसका क्या होगा और वो मुस्कुराई. महेश के लंड को सहलाने लगी. महेश ने आँखें बंद कर ली. अब चंदा से रहा नहीं जा रहा था. झट से लेट गयी और महेश को अपने ऊपर खींच लिया.

महेश के लंड को पकड़ कर चूत में हल्का सा उतार दिया. महेश को चूत कि गर्मी और गीलापन जैसे ही महसूस हुए उसने खच्च से पूरा लंड अंदर उतार दिया. चंदा के मुंह से एक चीख निकाल गयी और आँखों से आंसू निकाल पड़े.

महेश डर गया और चंदा को देखने लगा. करीब आधे मिनट के बाद चंदा को कुछ होश आया. महेश का लंड अभी भी पूरा का पूरा उसकी चूत में समाया हुआ था. उसे लग रहा था जैसे उसके गर्भाशय को फाड के उसका लंड उसके पेट तक पहुँच गया है. महेश कि आँखों में उसने देखा तो उसे सहमा हुआ पाया. चंदा महेश के कान के पास होंठ लायी और बोली, "इतनी जोर से पेला है यार कि ये तो होना ही था. घबराओ मत, कुतिया समझ के पेलो. आज खूब चोद मेरे राजा. बहुत समय से किसी ने मेरी चूत नहीं फाड़ी है. आज फाड दे. कितना भी चीखूँ, कितना भी चिल्लाऊं, खबरदार अगर चोदना रोक तो. चोद मुझे हरामी, चोद."

ये सुनकर जितना आश्चर्य महेश को हुआ उससे ज्यादा चंदा को हुआ. वह नहीं जानती थी वह यह सब भी बोल सकती थी. लेकिन ऐसी गन्दी बोली सुन, महेश और उत्तेजित हो गया. वह भी ख्यालों में लड़कियों को भद्दी भद्दी गालियाँ दे के चोदता था. सो, यहाँ उसे मौका मिल गया.

"क्यों कुतिया? मुझे नहीं पता था कि तू इतनी बड़ी रंडी है. तुझपे रहम कौन खायेगा? तू चे रो चाहे चिल्ला, मई तो तेरी बुर फाड़ के ही दम लूँगा. रांड मामी, छिनाल कहीं कि, मेरा लौड़ा पसंद है तुझे?", धक्के लगता हुआ वोह बोला.

हालांकि इतने मोटे लंड से चुदते हुए चंदा को थोड़ी तकलीफ हो रही थी, लेकिन उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था, "हाँ मेरे माधरचोद भांजे, तेरा लौड़ा मुझे बहुत पसंद है. रोज पेलना ऐसे ही मुझे. मैं तो तेरी ही रंडी हूँ, कुतिया हूँ तेरी, खूब चोद. ज़रा और जोर से धक्का लगा ना, कुत्ते. ज़रा जल्दी जल्दी चोद न. थक गया क्या?"


"थक गया होगा तेरा पति, तभी तो तू रंडी बन गयी है."

इस तरह कि भद्दी बातें करते हुए महेश उसे चोदे जा रहा था. पूरे कमरे में उसके लंड के उसकी चूत के दीवार से होते घर्षण से उनके रस के मिश्रण कि खुशबु फैल गयी थी. उनकी आंहें, गालियाँ और चंदा कि हलकी हलकी चींखों के बीच, चुदाई कि फच्च फच्च कि आवाज़ भी गूँज रही थी.

थोड़ी देर में महेश कि रफ़्तार तेज हो गयी. दोनों सिर्फ आहें भर रहें थे और कमरे में केवल चुदाई का शोर था. फिर अचानक महेश ने एक जोर का धक्का लगाया और झड गया. चंदा को नाभि के भीतर, खूब अंदर उसके गर्म वीर्य का एहसास हुआ तो वह भी खुद को रोक नहीं पायी और उसे जोर से भींच के झड गयी.

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11-29-2012, 04:01 AM
Post: #14
RE: देसी मामी
भाग १४
थोड़ी देर बाद जब दोनों को होश आया तो चंदा मुस्कुरा रही थी और महेश शिथिल हो चुका था. उसे बहुत नींद आ रही थी. दिन भर के घूमने फिरने और फिर जिंदगी में पहली बार इतनी ज़बरदस्त चुदाई के बाद वह काफी थक चुका था. वह केवल सोच रहा था कि सबने उससे कहा था कि पहली बार मर्द बहुत जल्दी झड जाता है. क्युकि वह पहले ही मुठ मार चुका था और शायद क्यूंकि वह इतना थका हुआ था, वह सम्भोग का इतना आनंद ले पाया. चुदाई के बाद वह इतने सुख और आनंद कि अनुभूति कर रहा था कि उसके चेहरे पर भी एक हलकी सी मुस्कान थी.

चंदा तो जैसे स्वर्ग में थी. पहली बार किसी ने उसे ऐसे चोदा था. अपने पति से वह कभी ऐसे नहीं चुदवाती थी. हालांकि चंदर उसे खूब बढियां चोदते थे और दोनों मौखिक सम्भोग का भी आनंद लेते थे, इस तरह गालियाँ देते हुए और इतने बड़े और मोटे लंड से चुदने का सुख कुछ अलग ही था. पति से चुदना तो स्वाभाविक है लेकिन अपने भांजे से चुदने में जो रोमांच था वह उसे और कहाँ मिलता.

इसी बीच महेश धीरे से चंदा के ऊपर से उठने लगा. जब उसका लंड उसकी चूत से बाहर निकलने लगा तो चंदा ने महेश को रोक लिया. महेश ने सवालिया नज़रों से उसे देखा तो चंदा ने आँखे बंद करके अपने होंठ उसकी ओर बढ़ा दिए. महेश से रहा न गया. वह भी उसपर झुक गया और दोनों फिर एक गीले और गहरे चुम्बन में डूब गए.

थोड़ी देर बाद जब दोनों के होठ अलग हुए तो चंदा को महसूस हुआ कि उसकी चूत फिर गीली हो चुकी थी और महेश का लंड फिर तन गया था. बिना वक्त गवाए महेश ने लंड को चूत में पेलने का काम फिर शुरू कर दिया. इस बार दोनों कुछ नहीं बोल रहें थे. दोनों कि आँखें बंद थी. केवल तेज साँसें चल रही थी. चंदा बीच में सुख से कराह रही थी और हलके हलके चीख रही थी. उनकी चुदाई फिर चरम पे पहुँच गयी. जब महेश अंत में चंदा के अंदर झाडा तब तक चंदा तीन चार बार झड चुकी थी और पस्त हो चुकी थी.

जब महेश ने अपना लंड बाहर निकाला तो उसपर थोडा खून था. चंदा कि चूत में हल्का दर्द हो रहा था और उसकी चूत हलकी हलकी जल भी रही थी. महेश का लंड भी दुःख रहा था और हल्का सा जल रहा था. दोनों पसीने से भीगे हुए थे. चंदा ने उठ कर महेश को चूमा और उसका हाँथ पकड़ कर उसे बाथरूम कि ओर खींचने लगी. दोनों गए और अपने अपने गुप्तांगों को धोने लगे. महेश पेशाब करने चला गया तो चन्दा को भी पेशाब करने का ख्याल आया. महेश के बाहर निकलने का इन्तेज़ार करने कि बजाय उसने वहीँ बाथरूम में पेशाब कर लेना मुनासिब समझा. फिर वह जा कर लेट गयी. उसके लेटते ही महेश भी बाथरूम से लौट आय और पैंट पहनने लगा. चंदा भी उठी और जाकर एक नाइटी पहन ली. फिर जब बिस्तर में लौटी तो महेश सो चुका था.

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11-29-2012, 04:01 AM
Post: #15
RE: देसी मामी
भाग १५
चंदा उसके बगल में लेट गई और उसकी छाती सहलाने लगी. फिर उसके हाफ-पैंट में हाथ डाल कर उसे नीचे खींच लिया और उसके लंड और टट्टों से खेलने लगी. महेश के लंड और गोटे, तीनों पे खूब बाल थे जिन्हें वह सहलाने लगी. महेश गहरी नींद में था फिर भी उसके गोटे उसके सहलाने कि वजह से काफी हरकत कर रहें थे और उसका लंड भी धीरे धीरे तनने लगा.

चंदा जानती थी कि इस बार महेश न तो उठेगा न उसे चोदेगा. उसकी चूत भी छिल चुकी थी. एक और बार अगर वह चुदती तो कल चलने फिरने में भी तकलीफ होती. लेकिन नींद अभी उसे आ नहीं रही थी. अचानक उसके मन में एक ख्याल आया और वह उठ कर महेश के लंड के पास गयी और उसे सूंघने लगी. अभी भी उसके लंड से वीर्य के बाद निकलने वाला चिकना द्रव्य रीस रहा था. उसकी खुशबु उसे अच्छी लग रही थी. उसकी चूत भी हलकी सी मचलने लगी. उसने जीभ से लंड के छोर को चाट लिया और उसके रस का स्वाद चखा जो उसे बहुत अच्छा लगा. फिर तो उसने महेश के लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे हलके हलके चूसने लगी. फिर चूसते हुए उसने उसके लंड को अपने मुंह से निकाला और महेश कि ओर देखने लगी. महेश सो रहा था लेकिन उसका लंड अभी जगा हुआ था.

फिर क्या था, चंदा भूखी सी उसके लंड को चूसने और चाटने लगी. बीच बीच में वह उसके गोटों को एक एक करके अपने मुंह में भर लेती और जीभ से खूब चाटती. उसका लंड पूरा मुंह में लेने का प्रयत्न करती लेकिन लंड उसके हलक में घूस जाता. उसे उबकाई आ जाती लेकिन उसकी चूत खूब रिसने लगी थी. बीच बीच एक बाल उसके मुंह में रह जाता तो एक हाँथ से वह बाल निकलती और दुसरे हाँथ से महेश के लंड को रगड़ती. फिर महेश को चूसते चूसते, एक हाथ से वह अपनी चूत भी सहलाने लगी. अंततः महेश नींद में ही झड गया. चंदा ने जैसे सी उसका वीर्य निकलते देखा उसने उसका लंड अपने मुंह में लिया और चूस चूस कर सारा वीर्य अपने मुंह भे भर लिया. उसने सोचा कि वह बाथरूम जा के उसे थूक दे. उसका मुंह पूरा भर चुका था. लेकिन महेश अभी खाली नहीं हुआ था. अब भी उसके लंड से वीर्य निकला जा रहा था. उसका वीर्य गर्म था और उसकी खुशबु तेज थी. बाकी वीर्य चंदा ने अपने हाथ में जमा कर लिया. भरे हुए हाथ और भरे हुए मुंह से चंदा बाथरूम जाने के लिए उठ ही रही थी कि गलती से थोडा वीर्य उसके गले से उतर गया.

चंदा को कुछ भी परेशानी नही हुई. फिर तो चंदा सारा वीर्य निगल गयी. निगलने के बाद मुंह में बचे बाकी वीर्य का स्वाद और उसकी खुशबु उसे बहुत अच्छे लग रहे थे और उसे उत्तेजित भी कर रहें थे. फिर उसने अपने हाँथ में बचे वीर्य को भी सूंघना, चाटना और पीना शुरू कर दिया. सारी उँगलियों को चाट चाट के साफ़ करने के बाद उसने महेश के लंड को भी चाट चाट के साफ़ किया. फिर अपनी उँगलियों को अपनी चूत सहलाने पर लगा दिया. कुछ देर बाद जब वह झड़ने लगी तो खुद के रस को भी उसने खूब चाटा और उसके स्वाद और खुशबु का खूब आनंद लिया. फिर बाथरूम जाकर खुद को साफ़ किया और महेश के हलफ पैंट में हाथ डाल कर, उसकी कंधे पर सर टिका कर और उसकी जांघों पर जांघ चढा कर वह सो गयी.

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11-29-2012, 04:02 AM
Post: #16
RE: देसी मामी
भाग १६
महेश जब सुबह नींद से जागा तो उसे पेशाब लगी थी जिसके कारण उसका लंड तना हुआ था. होश आते ही उसे महसूस हुआ कि चंदा का हाथ उसके लंड को पकडे हुए था. उसके हाँथ के स्पर्श से उसका लंड और कड़ा हो गया था और महेश भी उत्तेजित ही गया. उसे ख्याल हुआ कि शायद चंदा रात में उसका लंड चूस रही थी या शायद वह उसका सपना था. लेकिन चंदा को वह दो बार चोद चुका था, यह उसे अच्छे से याद था. चंदा का हाँथ उसने अलग किया और उसकी टांग को अपने ऊपर से उठा कर जब वह मूतने जाने के लिए उठा तो चंदा कि नींद भी खुल गयी. महेश ने इशारे से उसे समझा दिया कि वह बाथरूम जा रहा है तो चंदा ने फिर आँखें बंद कर ली और सो गयी.

लौटकर जब महेश आया तो देखा कि नींद में चंदा कि नाइटी उसकी जाँघों से ऊपर सरक चुकी थी. चंदा पीठ के बल लेटी थी और लंबी और गहरी साँसे ले रही थी जिसके कारण उसके बूबे ऊपर नीचे गोटे लगा रहें थे. महेश का लंड मचलने लगा और तनने लगा. उसने नाइटी को और उठा दिया और चंदा कि चूत को उसकी जांघों के बीच खोजने लगा, चंदा भी नींद से जाग गयी और अपने पैर फैला लिए. महेश ने अपनी ऊँगली उसकी चूत में उतार दी. वह अपनी ऊँगली से हलके हलके उसकी चूत को सहलाने लगा. चंदा के चूत गीली होने लगी थी. वह उसकी ओर पलट गयी. और उसे अपने ऊपर खींचने लगी. महेश उसपर चढ बैठा और लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा. चंदा बेताब हुए जा रही थी. उसने महेश के लंड को पकड़ा और चूत में घुसा दिया. महेश ने एक जहतके में उसकी चूत में अपने पूरे लंड को घुसा दिया तो चंदा कि कराह के साथ साथ उसे एक अजनबी आवाज़ भी सुनाई पड़ी. यह आवाज़ चंदा ने भी सुनी. तारा जग रही थी. हडबडाहट में उसने महेश को अपने से अलग किया और घडी कि ओर देखा. तारा के जागने का समय हो गया था. उसे तैयार कर स्कूल भेजना था. वह तारा को उठा कर बाथरूम ले गयी.

महेश मन मसोसते और लंड मसलते रह गया. तारा को नेहला धुला के चंदा ने उसे तैयार किया और किचन में नाश्ते, चाय और तारा के तिफ्फिन कि तय्यारियों में जुट गयी. महेश तारा के साथ खेलने लगा. थोड़ी देर में तारा को स्कूल ले जाने वाली बस आई तो चंदा उसे छोड़ने बाहर चली गयी. इस दरम्यान महेश ने भी सुबह के काम खत्म कर लिए.

तारा को जब वह छोड़ रही थी तब ड्राईवर उसे खूब घूर रहा था. अचानक उसे ख्याल आया कि क्यूंकि वह केवल एक नाइटी पहने थी और हलकी हलकी हवा चल रही थी, उसके बदन कि एक एक गोलाई साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. ड्राईवर कि नज़रों में भरी वासना को वह भांप गयी और उसकी चूत में एक हलकी सी तरंग उठी जिससे उसके सारे शरीर में एक रोमांचक सिहरन दौड गयी. मन में अनेक ख्याल दौड़ने लगे. जब तक वह घर में लौटी, उसकी चूत फिर से गीली होने लगी थी. अभी चंदर को आने में दो घंटे बाकी थे. दो घंटे वह क्या करने चाहती थी, यह बताने कि ज़रूरत यहाँ है ही नहीं. मुस्कुराते हुए वह बेडरूम में घुसी.

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11-29-2012, 04:02 AM
Post: #17
RE: देसी मामी
भाग १७
चंदा जब कमरे में घुसी तो महेश जैसे उसी का इंतज़ार कर रहा था. उसपर झट से लपका और उसकी नाइटी निकाल फेंकी, फिर उसे बिस्तर पर धकेल के अपनी पैंट निकाल कर उस पर चढ़ गया. चंदा ने पूरा जोर लगा कर उसे अपने से अलग किया और उसपर चढ़ गयी. महेश कि छाती पर बैठकर उसने महेश को इशारे से रुकने को कहा.

अब वह पलट गयी जिससे उसकी पीठ महेश के चेहरे कि ओर थी और धीरे धीरे वह महेश का लंड और गोटे सहलाने लगी. महेश चंदा कि गांड कि गोलियों को नज़रों से नाप रहा था. चंदा का स्पर्श उसे बहुत भा रहा था. वह चंदा कि चिकनी पीठ सहलाने लगा और उसके चुत्तडों को दबाने और मसलने लगा. अचानक उसे अपने लंड पर गीला और ठंडा स्पर्श महसूस हुआ. चंदा उसके लंड पर झुक गयी थी और उसे अपनी जीभ से चाट रही थी. ऐसा करने के लिए वह महेश कि छाती से थोडा उठ गयी थी जिससे महेश को उसके चूत के नजदीकी दर्शन मिल रहें थे.

महेश उसके चुत्तडों को फैला कर उसकी चूत को छूने लगा. चंदा को इतना मज़ा आया कि उसने झुक कर महेश का लंड मुंह में ले लिया और अपनी गांड महेश के चेहरे के बिलकुल करीब ले आई. फिर उसने अपनी गांड को उसकी छाती पर से उठा लिया जिसके कारण उसकी चूत महेश के चेहरे के ऊपर आ गयी.

महेश ने कई फिल्मों में लडको को और लड़कियों को भी चूत चाटते हुए देखा था लेकिन उसे इससे काफी घृणा थी. उसे यह सब काफी गन्दा लगता था. लेकिन चंदा उसके लंड और टट्टों को चूस चाट कर उसकी उत्तेजना बढ़ाये जा रही थी. साथ ही चंदा भी कामुक हो चुकी थी जिससे उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी और उससे रस बाहर चू रहा था. उसकी खुशबु महेश के दिमाग पर असर करने लगी थी. चंदा कि चूत सहलाते सहलाते उसे समझ में ही नहीं आया कि कब उसकी जीभ उसके चूत के होंठो को चाटने लगी थी. उसकी चूत के दो होंठ बहुत गुलाबी, नरम, रसीले थे. महेश उन्हें कभी चूमता, कभी चाटता और कभी चूस लेता. चूत के होंठ जहां मिलकर एक होते थे वहाँ वह जानता था कि चंदा का दाना है. वहाँ जब भी उसके होंठ या जीभ पहुँचती, चंदा उसके लंड को जोर से चूसती.

फिर महेश ने उसकी चूत में अपनी जीभ कि नोक घुसा दी. चंदा ने उसके लंड को चूसने कि रफ़्तार बढ़ा दी. अब महेश अपनी जीभ, होंठ, नाक, ठुड्डी और उँगलियाँ, इन सभी का आनंद चंदा कि चूत को दे रहा था. उसे भी इसमें खूब मज़ा आ रहा था. चंदा कि चूत रिसती जा रही थी जिसे महेश पीता जा रहा था. उसका रस हल्का नमकीन और बहुत हल्का खट्टा भी था और उसकी खुशबु नशीली और मजेदार थी.

दोनों एक दुसरे को चूसते और चाटते रहें. चंदा ने तो जैसे महेश के सर को अपनी जाँघों के बीच जकड लिया था और उसे अपनी चूत में दबाए जा रही थी. वहीँ महेश भी कमर उछाल उछाल कर उसके मुंह में अपना लंड ठूसे जा रहा था. थोड़ी देर बाद इसी तरह एक दुसरे कि सांस रोकते हुए दोनों झड गए. जब चंदा पलती तो उसके मुंह से महेश का वीर्य हल्का सा होंठो के कोने से बह रहा था. महेश के तो सारे चेरे पर चंदा का रस था. इसी अवस्था में दोनों ने एक दुसरे को चूमना शुरू किया. तब दोनों के रसों का मिला जुला स्वाद दोनों ने पाया और फिर से काम देवता के बाण उनके शरीर को भेदने लगे.

चंदर के घर लौटने से पहले दोनों ने जानवरों कि तरह तीन बार एक दुसरे को चोदा. जी हाँ! चंदा भी इतने उत्साह से इस काम-क्रीडा में लीं थी कि कभी कभी लगता था महेश उसे नहीं, वह महेश को चोद रही थी.

चंदर के आने से करीब आधे घंटे पहले दोनों नहा धो कर तैयार हुए और चंदा घर के काम काज में लग गयी. महेश चंदा को बार बार छेड़ देता. कभी उसके चुत्तड पर चिकोट देता तो कभी उसके बूबे मसल देता. कभी उसे जकड कर उसके चुत्तडों के बीच लंड टिका कर उसकी गर्दन और कान चूम लेता.

चंदा भी इस छेद खानी का खूब आनंद ले रही थी. करीब ११ बजे चंदर घर पहुंचे तो दोनों ने सामान्य रहने कि कोशिश शुरू कर दी.

यदि हम और आप उन्हें देखते तो भांप जाते कि कुछ गडबड है, लेकिन चंदर निहायत ही शरीफ किस्म का और सीधा साद भोला इंसान था. उसकी शर्मीली पत्नी अपने बेटे समान भांजे के साथ रासलीला रच रही है, इस बात को वह सपने में भी नहीं सोच सकता था. दोनों के चेहरे पर उसने रौनक देखि लेकिन उसका कारण उसने मामी भांजे के बीच का हंसी मजाक समझा.

इस बार चंदर दो दिनों कि छुट्टी ले कर आया था. यह बात चंदा और महेश दोनों को ही याद नहीं थी. दोनों मन मसोस के रह गए. हसरत भरी निगाहों से दोनों ने एक दुसरे को देखा. पता नहीं अब उन्हें फिर मौका मिले न मिले!

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11-29-2012, 04:02 AM
Post: #18
RE: देसी मामी
भाग १८
दो दिनों तक चंदर घर पर ही रहने वाला था. इस बात को सोच सोच कर महेश और चंदा काफी परेशान थे. सुबह से चंदर घर पर ही था. कई दिनों के बाद उसे इतनी फुरसत मिली थी. दोपहर का खाना खाते खाते दोनों एक दुसरे को व्याकुलता से देख रहें थे. चंदर ने देखा कि दोनों के चेरों पर सबेरे कि रौनक के बजाय मायूसी छाई थी. वह समझ नहीं पा रहा था कि मामी और भांजे कि इस मायूसी का कारण क्या था.

खाना खाने के बाद चंदर सोने चला गया. चंदा बर्तन साफ़ करने किचन चली गयी. महेश टीवी देखने लगा. हॉल रूम में बैठे बैठे महेश चंदा को देख सकता था. बर्तन साफ़ करती हुई चंदा कि पीठ महेश कि तरफ थी. उसके हिलती हुई गोल गदराई गांड उसे लालायित कर रही थी. उसका लंड तनने लगा था.

वह हलके से बिना आवाज़ के उठा और बेडरूम कि ओर गया. उसने देखा कि चंदर अभी तक सोया नहीं था लेकिन उसे नींद आ रही थी. वह दबे पांव वापस हाल में आया और टीवी का वाल्यूम बढ़ा दिया. तभी चंदर उठा और बेडरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया. महेश कि योजना कामयाब हुई!

अभी तक चंदा को उसकी योजना का आभास नहीं था. महेश धीरे धीरे दबे पांव किचन में गया और हलके से चंदा कि गांड से लंड सटा कर खड़ा हो गया. चंदा को अचानक अपनी गांड पर महेश के लंड का एहसास हुआ तो वह पलटने लगी. लेकिन उससे पहले ही महेश ने उसे भींच लिया और उसकी गर्दन चूमने लगा. चंदा उससे अलग होने के लिए छटपटाने लगी तो कुछ बर्तन आपस में टकराए और महेश भी उससे अलग हो गया. दोनों चंदर कि प्रतिक्रिया का इन्तेज़ार करने लगे. दोनों सांस रोके खड़े थे. कुच्छ देर तक जब कुच्छ नहीं हुआ तो महेश समझ गया कि चंदर सो गया है और दरवाज़ा बंद होने के कारण उसने कुच्छ नहीं सुना. इससे पहले कि चंदा कुछ समझ पाती, महेश ने उसे फिर जकड लिया. उसके कानों में उसने फुसफुसा दिया कि मामा सो रहे हैं.

चंदा बोली, तो क्या हुआ, अगर बीच में आ गए तो, कुछ देख लिया तो. थोडा तो सब्र करो.

नहीं, सब्र नहीं, मैं तो सब करूँगा, कहते कहते महेश उसकी गांड को अपने लंड से कपड़ों सहित ही रगड़ने लगा. उसने चंदा को सिंक से लगा कर दबा लिया था. एक हाथ से उसके एक बूबे को मसलते हुए और उसकी गर्दन को चूमते हुए, दुसरे हाथ से उसकी साड़ी उठा रहा था. साड़ी उठाते हुए, उसके जांघों को भी सहला रहा था.

महेश कि हरकतें और पति के कभी भी आ सकने का डर मिलकर चंदा को कुच्छ अधिक ही उत्तेजित कर रहें थे. उसका पति वहीँ पास के कमरे में था और कभी भी आ सकता था, यह बात उसकी चूत को और गीली कर रही थी. वह भी महेश का साथ देने के लिए पलटने कि कोशिश करने लगी. लेकिन महेश उसे हिलने नहीं दे रहा था. अब उसकी ससदी को कमर तक खीच चुका था और उसके हाथ उसकी झांटों से मुलाकात कर रहा था. चंदा समझ नहीं पा रही थी कि महेश के मन में क्या है. तभी महेश उसके कान में फुसफुसाया,

ऐसे ही रहना, पलटना मत.

वह चाहती तो थी, लेकिन नहीं पलटी. उसे भी हल्का हल्का रोमांच हो रहा था. वह देखना चाहती थी कि महेश आखिर क्या नया करने वाला है. तभी महेश ने उसकी चड्ढी खींची और नीचे उतारने लगा. चंदा ने उसकी मदद कि और अर्धनग्न हो गयी. अब महेश ने फिर उसकी साड़ी को कमर तक खींच लिया और उससे सट गया. इस बार चंदा को उसके मोटे और ताने हुए लंड का आभास अपनी गांड पर हुआ. महेश ने उसे अपने दबाव से हल्का झुकाया और उसके पैरों के बीच हाथ डाल उन्हें फैलाने का इशारा कर दिया. चंदा झुक गयी और हलके से पैर फैला दिए. अब उसे अपनी चूत पर उसके लंड कि दस्तक मिलने लगी. चंदा ने उसकी मदद कि जिससे कि उसका लंडा उसकी चूत में घुस गया. महेश ने चंदा कि कमर पकड़ी और लंड पूरा अंदर तक पेल दिया. चंदा और झुक गयी. थोडा तो इस अकस्मात वार के दर्द से और थोडा आनंद से उसे और अंदर लेने के लिए. उसने किचन का प्लेटफोर्म पकड़ लिया और थोडा पीछे आ गयी. महेश ने लंड को थोडा बाहर खींचा और फिर पेल दिया. इस बार लंड बहुत प्रेम से चंदा कि गीली चूत में घर्षण के साथ पूरा उतर गया. हर्ष कि एक लहर दोनों के चेहरों पर दौड गयी. उत्तेजना के कारण दोनों कि आँखें बंद हो गयी और मुंह से हलकी आह निकाल पड़ी.

इसके बाद महेश रुका नहीं. एक के बाद एक धक्के लगाने लगा. चंदा भी अपनी गांड उसके लंड पर धकेलने लगी. बाहर टीवी चल रहा था और किचन के नल से पानी बह रहा था. फिर भी चंदा कि चूत इतनी गीली थी और उनकी चुदाई इतनी ज़ोरदार कि खच्च फच्च कि आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी. कुत्ता-कुट्टी का यह खेल दोनों को बहुत मज़े दे रहा था. चंदा होठ दबाए महेश के लंड के मज़े ले रही थी और महेश उसकी चूत को अंदर अंदर तक भेद रहा था. इसी तरह कुछ देर में चंदा झड गयी. चंदा के झाड़ते ही महेश ने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसकी गांड पर मुठ मारने लगा. एक दो सेकंड में ही उसने अपना सारा वीर्य उसकी गांड पर गिरा दिया. सांस और होश सँभालते हुए दोनों एक दुसरे को देख मुस्कुराये. दोनों एक दुसरे कि बाहों में आ चुम्बन करने लगे. फिर दोनों ने कपडे ठीक किये. महेश संतुष्ट होकर टीवी देखने लगा. चंदा ने अपनी पैंटी से अपनी गांड को पोछा और साड़ी नीचे कर बचे-खुचे बर्तन धोने में लग गयी.

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11-29-2012, 04:02 AM
Post: #19
RE: देसी मामी
भाग १९
अगले दिन चंदर कि छुट्टी होने के कारण वह ज़्यादातर घर पर ही रहता. वह कहीं बाहर भी गया तो तारा घर पर ही थी.

महेश के मुंह तो नया नया खून (या चूत कहें?) लगा था. वह बेचैनी से तिलमिला उठा था. इधर चंदा भी मौके कि तलाश में थी. दोनों आँखों ही आँखों में अपनी प्यास ज़ाहिर कर रहें थे. लेकिन कुछ हो नहीं पाया.

बेचैन परेशान सब रात को सोने चले गए. चंदर चंदा को नहीं चोद रहा था क्योंकि महेश घर में था. वह तो सो गया. लेकिन चंदा कि आँखों में नींद कहाँ थी. बाहर महेश भी करवटें बदल रहा था और अपने दुखी लंड को सांत्वना दे रहा था.

रात में कुछ भी करना खतरे से खाली नहीं था. खासकर इसलिए कि रात को काफी शान्ति होती है. १२ बज चुके थे. कामोत्तेजना से परेशान महेश उठा और सोचा बाथरूम जाकर मुठ मरकर सो जायेगा. बाथरूम कि तरफ बढते हुए अचानक बेडरूम का द्वार खुला और चंदा बाहर निकली. महेश अचानक खुश हो गया. उसे लगा कुछ हो सकता है. वह चंदा कि तरफ लपका. चंदा हडबडा गई और झट से बेडरूम का द्वार बंद कर दिया. महेश को दूर हटाया और फुसफुसाई:
"पागल हो गए हो? ये उठ गए तो?"
"और जो मेरा उठा हुआ है?", महेश उसकी बायीं चूची को मसलते हुए बोला.
"देखो जो तुम चाहते हो, वह मैं भी चाहती हूँ. लेकिन समझ से काम लो. अभी हम जो चाहते हैं, वह नहीं हो सकता. सब्र करो बाबू."
"अच्छा चलो, आपको चोद नहीं सकता लेकिन मेरी हालत बहुत खराब है, सोया नहीं जा रहा. कुछ तो करो मामी." कहते हुए चंदा का हाँथ पकड़ अपने लंड पर पैन्ट के ऊपर से ही रख दिया.

चंदा को अपने भूखे भांजे पर थोड़ी हंसी आई, क्यूंकि वह उससे लगभग सम्भोग कि भीख मांग रहा था. लेकिन उसपर प्यार भी आ रहा था और दया भी. उसकी भी चूत व्याकुल थी महेश के लंड के लिए. झटपट उसने एक तरकीब निकाली.

बाथरूम का दरवाज़ा खोला और महेश को अंदर खींच कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया. फिर नाइटी को घुटनों तक खिंच कर फर्श पर घुटनों के बल बैठ गयी. झट से महेश कि पैन्ट खिंच दी और उसके अकड़े हुए लौडे को मुंह में भर लिया. महेश के मुंह से यकायक एक आह निकल गयी. फिर लंड को मुंह से निकाल लिया और जीभ से उसके सिरे को चाटने लगी. उसकी चमड़ी को खींच कर उसके नंगे लंड को छोमने, चाटने और चूसने लगी. उसके गोटों को भी चूसा और चाटा. महेश का लंड अकड कर पूरी तरह से तैयार था.

अब वह उठी और दिवार कि तरफ मुड गयी. एक पैर एक छोटे स्टूल पर रख कर पानी के नल को पकड़ लिया और झुक गई. महेश जानता था उसे क्या करना है. झट से निशाना लगाया और लंड को छोट में दाग दिया. चंदा अभी न तो पूरी तरह से गीली थी न फैली थी, न मानसिक रूप से उसके इस वार के लिए तैयार थी. उसे लगा महेश थोडा धीरे शुरुवात करेगा. लेकिन महेश ने तो तव में आकार पूरा लंड अकस्मात ही उसकी चूत में घुसेड दिया था. सुखी छोट में इतना घर्षण हुआ और इतना दर्द हुआ कि उसकि आँखों के आगे अन्धेरा छा गया. कुछ ही पलों में अँधेरा जब साफ़ हुआ तो उसे एहसास हुआ कि महेश तोह पुरजोर वार पर वार कर रहा था. अब दर्द उसे आनंद देने लगा था. इस बदहवास, भिसन दर्द कि स्थिति में उसे एक नशा सा प्रतीत हो रहा था जिससे उसे कुछ अलग किस्म का रोमांच हो रहा था. वह भी चुत्तर उचका उचका कर चुद रही थी. सारा बदन पसीने से भीग चुका था और उसकी सांस भी काफी फूल रही थी. लेकिन इतना मज़ा उसे कभी चुदने में नहीं आया था.

महेश को तो कुछ सुध ही नहीं थी. उसका दिमाग उसके लंड के अधीन था. उसकी मामी कि स्थिति का न उसे अंदाजा था न ही फ़िक्र. आंकें बंद किये वह उसे पेल रहा था. कुछ देर में उसकी रफ़्तार दुगनी हो गई और चंदा कि चूत भी उसके लंड पर कसने लगी थी और उसे निचोड़ने लगी थी. तभी महेश ने चंदा में अपने बीज बो दिए और चंदा कि चूत ने जितना हो सका उन्हें निगल लिया.

जब महेश ने अपना लंड बाहर निकाला तो उसपर खून के धब्बे थे. चंदा भी पलती तो उसके चेहरे के भाव देख वह समझ गया कि मामी पर क्या बीती थी. चंदा को अपनी बाँहों में भर लिया और उसका माता चूमते हुए उससे माफ़ी मांगी. अपना लंड धोकर महेश बाहर आ गया और चन्दा खुद को साफ़ करने लिए बाथरूम में ही रुक गयी. जैसे ही महेश बिस्तर पर लेता, चंदर बेडरूम का दरवाज़ा खोल बाहर आ गया.

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