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मज़ेदार अदला-बदली
08-30-2012, 09:10 AM
Post: #1
मज़ेदार अदला-बदली
रोमा: और कितनी देर लगेगी रवि, देखो मैं तुमसे पहले तैयार हो गई हूँ.
रवि: बस दो मिनट और, अभी आया.

दोनों की शादी को दो साल हो चुके थे. बहुत खुले विचारो वाले थे दोनों और वैसा ही उनका ग्रुप था. उस ग्रुप में दस कपल हो चुके थे अब तक. सभी के सभी बेहद अमीर और हाई-प्रोफाइल . आज उसी ग्रुप की आउटिंग, इंदौर से पच्चीस किलोमीटर दूर खंडवा रोड पर, ग्रुप के ही एक मेम्बर रोनी के चार एकड़ के फ़ार्म-हाउस पर रखी गई थी और रोमा को वहां पहुँचाने की रवि से भी ज्यादा जल्दी थी.

रोमा सोफे की पुश्त पर टिक कर आने वाले अगले दो दिनों के बारे में सोचने लगी. जबसे उसने उन दो दिनों में क्या क्या होने वाला है इसके बारे में सुना है, उसकी योनी में लगातार बाड़ बनी हुई है, अभी अभी उसने नई पेंटी पहनी थी और अब फिर वो पूरी गीली हो चुकी है. उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ रही थी. अचानक रवि की आवाज़ से उसका ध्यान भंग हुआ.

दोनों तैयार होकर अपनी होंडा अकॉर्ड से अपने गंतव्य की और प्रस्थान कर गए.
रोमा: रवि, मैं परेशान हो चुकी हूँ, मेरी चूत का झरना रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है, पिछले एक घंटे में तीन पेंटी बदल चुकी हूँ, और फिर से ये गीली हो गई है.
रवि: जानू, जरा सब्र से काम ले, अब दो दिन तेरी चूत इतनी झड़ने वाली है क़ि तेरा सारा पानी ख़तम हो जायेगा. मनोज का दिमाग, मानना पड़ेगा, कितनी जोरदार प्लानिंग की है इस बार. इस तरह की ओरजी तो कोई पोर्न मूवी में भी कभी नहीं देखी है. पता नहीं मेरे लंड का क्या हाल होने वाला है.

बस आने वाले वक़्त क़ि बातें करते करते वो फ़ार्म हाउस पर आ पहुंचे.
बड़ा सा मेन गेट. रोनी ने मोनिटर पे कार को रुकते ही पहचान लिया और रिमोट कंट्रोल से गेट को खोल दिया. रवि कार को बीचो बीच बने बड़े से बंगले के अहाते क़ि और चला कर ले आया जहाँ पर रोनी क़ि खूबसूरत पत्नी मेरी उनके स्वागत के लिए खड़ी थी. कार के रुकते ही रोमा बहार आई और बहुत ही जोर से मेरी के गले लग गई. दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थी. रवि रोमा सबसे पहले पहुंचे थे. कार को पार्क करके रवि भी बड़े से हाल में पहुँच गया.

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08-30-2012, 09:10 AM
Post: #2
RE: मज़ेदार अदला-बदली
अगले एक घंटे में सभी सदस्य उस बड़े से हाल मैं इकट्ठे हो गए. सभी कपल करीने से सजी कुर्सियों पर बैठ गए. मनोज और उसकी पत्नी alka इस बार की party के sanyojak थे. दोनों uth khade huwe.
मनोज: aap सभी का स्वागत है. aap सभी के chehre बता रहे हैं क़ि आप सब कितने उत्सुक है आने वाले समय को लुत्फ़ उठाने के लिए. और आपके उन पलों में हजार हजार चाँद लगाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हम सभी आपस में पहले भी बहुत बार एकसाथ चुदाई कर चुके हैं परन्तु इस बार ये बहुत ही अलग सेशन होने वाला है जिसके बारे में आप सभी जानते ही हैं. ज्यादा वक़्त बर्बाद न करते हुवे हम अपने पहले दौर में प्रवेश करते हैं. और पहला दौर है क़ि "अपनी पत्नी के गालों को पहचानो". मनोज ने सभी नौ जेंट्स क़ि आँखों पर काली पट्टियाँ बाँध दी और कुर्सियों पर लाइन से बैठा दिया. अब सभी लेड़ीस बारी बारी से अपने गाल एक एक मर्द के होंटो से सटाएगी और मर्द उस पर जोरदार चुम्मा देगा और फिर कोनसे नंबर वाली लेडी उसकी बीवी है ये एक स्कोर शीट पर अंकित करेगा.
अब यहाँ से आगे की कहानी रवि अपनी जबानी सुनाएगा .............
मेरा नुम्बर दूसरा है.....तभी पहले चुम्मे की आवाज़ आती है, फिर कुछ पल बाद मुझे अपने होंटों पर एक बेहद मुलायम गाल की अनुभूति होती है, पता नहीं चल रहा रोमा का है या किसी और का. मैं उसे बड़े ही चाव से चूमने लगता हूँ. अपनी जीभ से थोडा सा चाट ता भी हूँ, मस्त मस्त खुशबू का अहसास हो रहा था. पहले चुम्मे में ही मेरा लंड अकड़ने लगा है. अभी तो ये शुरुवात है और मैंने अपने लंड को दिलासा दिलाया. तभी पहला गाल हटा और दूसरा गाल आकर मेरे होंटों से सट जाता है.... ये एकदम चिकना गाल है में उसे चूसना और चूमना चालू करता हूँ. ये तो रोमा का गाल नहीं हो सकता है इतना चिकना नहीं है. एक एक करके सभी महिलाएं गालों पर चुम्मा लेने आती है.......मैं अपने अंदाज़ से रोमा का नुम्बर अंकित करता हूँ. मनोज को ये बात पता है की सब अपने अपने साथी के शरीर की खुशबू से अच्छी तरेह से वाकिफ है इसलिए शुरुवात में सभी जोड़ो को एक ही खुशबू का बॉडी स्प्रे अप्प्लाई किया. अब सभी की खुशबू सामान होने से अंदाज़ लगाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा था. आँखों पर पट्टी बंधी होने की वजह से अनजाने गालों पर चुम्मा देना बहुत ही रोमांच पैदा कर रहा था.
तभी मनोज की आवाज़ गूंजती है की अब लेडिस चुम्मा देंगी और अब पट्टियां महिलाओं को बाँध दी जाती है. मेरा नुम्बर आते ही मैं मेरी के होंटों पे अपने गाल ले जाता हूँ.......वो बड़े ही मादक अंदाज़ मैं मेरे गालों को चूसने लगती हैं.....फिर दूसरा चुम्मा फिर तीसरा और अब रोमा का चुम्मा. क्या पता रोमा पहचान पायेगी की नहीं..........गेम में पॉइंट्स स्कोर करना बड़ा जरूरी है. ऐसे ही एक एक करके चुम्मो को बारिश होने लगती है........कुछ चुम्मे एक गाल पे लिए तो कुछ दुसरे गाल पर. इस तरेह पहला राउण्ड समाप्त होता है........सभी शूरूआत से काफी उत्तेजित महसूस कर रहे थे लेकिन गेम के रुल के मुताबिक अपने आपको संयम में बंधे हुवे थे. अब हम सभी एक दुसरे से बातें करने लगे थे.......
मैं: यार सलीम, जब चुच्चे पहचानने की बारी आएगी तो बड़ा मज़ा आएगा....एक के बाद एक लगातार चुच्चे मसलने को मिलेंगे........हमारे यहाँ तो हर तरह की चुच्चे हैं........
सलीम: हाँ यार रवि, पर ये तो सोच जब हमारे लंड चुसे जायेंगे एक के बाद एक........सारी की सारी रंडियां चुसुक चुसुक करके हमारे लौड़े चूसेगी......यार मेरा कहीं माल ना निकल जाये......बड़ी किरकिरी हो जाएगी........
मैं: हां, खासतौर पे रोमा जब चुसे तब ख्याल रखना.....मादरचोद रोमा का तू बहुत बड़ा दीवाना है..........तेरा बस चले तो रोमा की छूट मैं लंड डाले पड़ा रहे जिंदगी भर.......चुदक्कड़ साला....
सलीम: हे हे, तू देख रोमा के साथ इस बार क्या क्या करता हूँ गेम के बाद................
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08-30-2012, 09:11 AM
Post: #3
RE: मज़ेदार अदला-बदली
सभी की आँखों पर पट्टियाँ बांध दी जाती है.....ये फ्रेंच किस राउण्ड है.......मैं एकदम अपने आप को काबू से बाहर पता हूँ...........अगले पांच मिनट मैं अलग अलग सुंदरियों के लगातार होंठ चूसने को मिलेंगे....ऐसा पहले कभी अनुभव नहीं किया था.....इस राउण्ड में मनोज और अलका को बहुत ज्यादा मदद करनी पड़ेगी क्योंकि किस करते वक़्त कोई भी अपने पार्टनर को छू नहीं सकता है वरना पत्नी के होंठ कोनसे हैं ये आसानी से पता चल जायेगा...........तो हम सब मर्द लाइन में खड़े हो गए और शायद पहले मनोज एक भाभी को पकड़ के पहले मेम्बर के पास ले गया लिप टू लिप चुम्मे के लिए....दूसरी को अलका मदद कर रही थी.......अचानक मेरे सर पर किसी का हाथ आता है और वो सर को आगे की दिशा मैं धकेलता है.....और अचानक मेरे होंठ एक बेहद नाज़ुक होंठो से जुड़ जाते हैं .....मेरे दोनों हाथ पीछे हैं......मैं उन नर्म और मुलायम लबों को चुसना चालू करता हूँ.....बेहद उत्तेजना महसूस होने लगती है .....अब मेरी जीभ उसके मुंह में प्रवेश करती है तो वो भी अपनी जीभ को बाहर लाती है और फिर दोनों एक दुसरे की जीभ को बुरी तरह से चूसने लगते हैं........तभी सामने से मेरी पार्टनर को हटा दिया जाता है ......और फिर तुरंत ही एक नाज़ुक हाथ मेरे गालों को खींचता है और एक और नए लिप्स पर मेरे लिप्स टिक जाते हैं.......इस बार एक नयी और ताज़ा खुशबू का अहसास होता है.....मैं फिर पूरी तन्मयता से उन होंठो को चूमने लगता हूँ........बड़ा ही मज़ा आ रहा था..........ऐसे ही एक एक करके हर बार नए होंठो का रसपान ......जब लास्ट पार्टनर का नुम्बर आया तब तक मेरा लंड बहुत ही बेकाबू होने लगा था.......जेसे ही चूमा चाटी शुरू हुई मुझे एकदम लगा कि साली को कस के दबोच लूं और निचे पटक के ठोक दूं........और अपने आप ही मेरे दोनों हाथ उसकी तरफ पकड़ने को उध्यत होने लगे........परन्तु छूने से ठीक पहले किसी ने मेरे दोनों हाथो को पकड़ के जोर से बोला .............ऐ मिस्टर, गेम से आउट होना है क्या........अपने लंड को समझाओ कि आराम आराम से गेम खेले...........क्या तुम्हे पता नहीं कि कितने शानदार इनाम रखे गए हैं ............और अचानक मेरे हाथों को ब्रेक लगा और मैंने फिर से अपने हाथ पीछे खिंच लिए................. अलका के याद दिलाते ही मैंने मन को समझाया गेम में बने रहो.......और फिर उन अंतिम होंठो को चूसने में खो गया............जेसे ही चुम्बन ख़तम हुआ मैंने अलका के कान में संभावित नुम्बर बताया जो मेरी पत्नी के होंठ हो सकते थे.....उसने नुम्बर शीट में अंकित किया और मैंने अपनी पट्टी खोल दी.......रोमा इस वक़्त सलीम के होंठो को चूसने में तन्मय थी........मैं उनके नज़दीक आ गया और नज़ारा देखने लगा.........सलीम बड़ा ही उन्मत्त होकर मेरी बीवी के होंठो से रसपान कर रहा था.........शायद उसे रोमा के होंठो का अहसास हो गया था.......उसने करीब करीब अपना पूरा मुंह रोमा के मुंह मैं घुसा दिया था...लग रहा था कि रोमा को सांस लेने में कुछ तकलीफ होने लगी थी.....पर तभी मनोज ने रोमा के दोनों चुच्चों को पकड़ा और धकेल कर अगले सदस्य के होंठो से जोड़ दिए.......अच्छा.....ये मादरचोद मनोज इस तरह से सहायता कर रहा है..........मैंने देखा वो रोमा के ठीक पीछे एकदम चिपक के खड़ा है.....उसका लंड ठीक गांड के ऊपर टिका हुआ है और दोनों हाथ अभी भी रोमा के दोनों कबूतरों पर हौले हौले मचल रहे हैं........मैंने कुछ और चुम्बन रत जोड़ों पर निगाह डाली बड़ा ही शानदार नज़ारा था.............अनजान का चुम्बन ज्यादा उत्तेजना देता है और उसी के वशीभूत हमारे सभी दोस्तों कि हालत दुसरे दौर में ही ख़राब होने लगी..............मेरा लंड बहुत ज्यादा फट पड़ने की स्थिति में आ चूका था............मैंने देखा मेरी अब फ्री हो चुकी थी और अपनी पट्टी खोल रही थी........मैं भाग कर उसकी और पहुंचा और उसे दबोच लिया .......और उसके अंगो का मर्दन करने लगा.....चूँकि बोलने कि इज़ाज़त नहीं थी इसलिए वो मुझे धक्के देकर दूर हटाने लगी परन्तु मैंने उसे उठा लिया और थोड़ी दूर सजे दस शयन शैया वाले सेक्शन की ओर ले जाने लगा और फिर एक बिस्तर पर उसे पटक दिया और मैं भी उसके ऊपर लगभग कूद पड़ा.....अब मैंने अपने दोनों हाथों और पैरों से लगभग पूरा दबा दिया और अपने होंठों से उसके होंठ दबा दिए ....वो गूं गूं करके छटपटाने लगी..........मैं अपने शरीर को उसके शरीर पर बुरी तरह से मसलने लगा............तभी राउण्ड पूरा हो गया और कुछ दोस्तों का ध्यान हमारी तरफ गया...........जेसे ही उन्हें माज़रा समझ में आया कुछ लोग हमारी और आये और हमें अलग किया.........जेसे ही सबको देखा मुझे एकदम होश आया.........साडी महिलाएं मेरी बेसब्री को देख कर हंसने लगी और तरह तरह के कमेंट्स आने लगे.....अलका और मनोज मेरे पास आये कि क्या मैं गेम को छोड़ना चाहता हूँ तो फिर अभी सारी लेडिस मिलकर तुम्हारे लंड का कीमा बना देगी............बोलो क्या करना है...........रोमा मेरे पास आई .....रवि, हमें गेम के आखिर तक रहना है ........जरा अपने पर काबू करो............जेकपोट नहीं जीतना है क्या.................अब तक मैं काफी हद तक नोर्मल हो चूका था...........मैं वाटर कुलेर कि और बड़ा और ठंडा पानी पीकर एक कुर्सी पर बैठ गया.................मैंने देखा कि बाकि सभी मर्दों कि हालत भी मेरे जेसी ही हो रही थी.....परन्तु सभी जेसे तेरे अपने पर काबू किये हुवे थे.........अब में थोड़े तनाव में था कि यही हाल रहे तो आखिर तक टिके रहना बड़ा मुश्किल हो जायेगा........चलो देखते हैं क्या होता है.....ये सोचकर मैं फिर से सभी कि ओर बड़ चला.......
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08-30-2012, 09:11 AM
Post: #4
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मुझे अपनी ओर आता देख रोमा मेरे पास आती है और बड़े प्यार से मेरे दोनों गालों को अपने हाथों से सहलाने लगती है.
फिर मुझे अपने गले से लगा लेती है.
शायद वो मुझे थोडा प्यार देकर मेरी उत्तेजना को कम करने का प्रयास कर रही थी.
तभी मेरे कंधे पर मनोज ने थपथपाया.
मनोज: क्या हो गया था रवि.
मैं: कुछ नहीं यार, बस एकदम बहक गया था.
मनोज: समझ सकता हूँ.......बल्कि मुझे ख़ुशी है कि मेरी गेम प्लान इतनी तेजी से सभी के लौड़ो में आग लगा रही है.
मैं: यार इस तरह से कैसे आगे बढेंगे. उत्तेजना तो संभाले नहीं संभल रही है.
मनोज: कुछ सोचना पड़ेगा.....बाकि के भी यही हाल है.....
मैं: हाँ यार कुछ सोचो.....और जल्दी ही सोचो.....वरना अब तो हालात ऐसे हो रहे हैं कि माल अब निकला के तब निकला.
मनोज: अरे औरों का तो छोड़ो......मेरा ख़ुदका लंड बहुत बेकाबू हो रहा है...........
मैं: तो चलो सब मिलकर गेम के फॉर्मेट पर पुनर्विचार करते हैं............
मनोज: चलो आओ............

तभी मनोज सबका ध्यान आकर्षित करता है और सबसे पूछता है उनसब के लौड़ो के क्या हाल है........

कोई बोले उसके पहले सलीम की बीवी हिना बीच में बोल पड़ती है.......

हिना: मनोज तुमको सिर्फ लौड़ो की ही फिकर है...........चुंतों के बारे में कोई ख्याल है कि नहीं..........
मनोज: माफ़ करना.....देवियों आपसे भी पूछता हूँ कि आपकी चूतें किस हाल में हैं कृपया बताएं..
हिना: मनोज, साले.....भेन के लवडे......हमारी चूचियां किस कदर मसली है तूने.....और अब पूछ रहा है कि हमारी चूतों से पानी रिस रहा है कि नहीं...........

हिना की बात सुनकर सब ठहाका मार कर हंसने लगे................

मनोज थोडा खिसिया गया और फिर पूरी बेशर्मी से बोलने लगा......तो आप सब बताओ कि अभी क्या करें.......
सब एक दुसरे की तरफ देखने लगे............सबके मन मैं बस एक ही ख्याल था कि एक राउण्ड चुदाई हो जाये........

रवि: मनोज, एक बार चोद लेने दे यार.........फिर इत्मीनान से गेम को आगे बढाएंगे........

और फिर क्या था.........जैसे सभी के मन की बात बोल दी हो रवि ने.............सब चिल्ला उठे कि हाँ एक राउण्ड चुदाई हो जाये..........

और इस चिल्लाहट में सबसे ज्यादा जोश महिलाओं को था.........मनोज ने चूचियां मसल मसल कर उन्हें पागल जो कर दिया था.......

और इधर अभी मनोज ने अपना अंतिम निर्णय दिया भी नहीं था कि मैंने देखा सलीम ने रोमा को दबोच लिया है और उसे उठा कर वो बिस्तर की और प्रवत्त होने लगा.....

सभी जोर जोर से हंसने लगे.........अलका दौड़ कर सलीम के पास गई और कहा - वाह रे वाह......साले अपनी मर्ज़ी का माल खायेगा......चल छोड़ उसे........कौन किसे चोदेगा...ये फैसला भी हम करेंगे...

सलीम रोमा को छोड़ देता है और अपना लंड पकड़ के वहीँ बैठ जाता है और बड़ी ललचाई नज़रों से रोमा को देखने लगता है............रोमा उसके पास ही खड़ी-खड़ी मुस्कुराने लगती है.......

अचानक रोमा को मस्ती सूझती है और वो अपनी चूत को बिलकुल सलीम के मुंह के पास ले जाती है और झुक कर झटके से अपनी साड़ी पेटीकोट समेत ऊपर कर देती है..........फिर एक हाथ से अपनी पेंटी को थोडा साइड में कर देती है............

सलीम के हाथ अपने लंड पे रहते हैं..........रोमा की गोरी और गुदाज चूत सामने देख कर वो सन्न हो जाता है.......जैसे ही वो रोमा की चूत पर झपटने कि उपक्रम करता है उसके पूर्व रोमा झट से साड़ी नीचे करके भाग जाती है.

सलीम उसके पीछे भागता है......रोमा आगे और सलीम पीछे......रोमा सभी के बीच में घुस घुस कर दौड़ लगाती है और सलीम उसके पीछे.........
रोमा हिना के पीछे छिप जाती है और जैसे ही सलीम आता है वो हिना को सलीम की और धक्का दे देती है........हिना कस के सलीम को पकड़ लेती है.......

हिना: अरे मेरे चोदू शौहर.......रोमा भी मिलेगी खाने को ....इतना बावला क्यों हो रखा है अपने को..........
ये कहकर अपने होंठ सलीम के होंठो पर टिका देती है और कस के पकड़ लेती है.............सलीम भी हिना में खो जाता है...............
सभी लोग हिना के लिए तालियाँ बजाते हैं...............
अलका: हिना बस तू ही अपने शौहर को संभल सकती है......वरना तो ये गेम के सरे रुल तोड़ देगा.......

अब मनोज और अलका दोनों थोडा अलग हो जाते हैं और विचार विमर्श करने लगते हैं..................

कुछ देर बाद मनोज अपना निर्णय सुनाता है........
मनोज: सभी के लौड़ो और चूतों के हालातों को देखते हुवे अभी एक राउण्ड चुदाई करवाए जाने का निर्णय लिया है........लेकिन वो चुदाई सेशन हम अभी आपको प्लान करके बताते हैं..............

और फिर सभी हलके नाश्ते के लिए पास ही सजी खाने कि मेज कि और बढ जाते हैं............................
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08-30-2012, 09:11 AM
Post: #5
RE: मज़ेदार अदला-बदली
आप सभी रवि-रोमा; रोनी-मेरी; मनोज-अलका और सलीम-हिना से तो मिल चुकें हैं........अब मैं आपको बाकि कपल से भी वाकिफ करा देता हूँ........

देव-शिल्पा
राज-चांदनी
अमित-मीनू
अमन-श्वेता
प्रेम-शालू
सागर-शाहीन (यह हिन्दू-मुस्लिम जोड़ी है)

अब तक के प्रसंग- वर्णन पर आप सभी महानुभाव अपने- अपने विचार व्यक्त करने की कृपा करें, ताकि आप सभी की भावनाओं के अनुरूप कहानी को विस्तार दिया जा सके................
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08-30-2012, 09:11 AM
Post: #6
RE: मज़ेदार अदला-बदली
जब तक नाश्ते का दौर चलता है अलका और मनोज दिमाग लड़ा रहे हैं कि आपस में केसे चुदवाया जाय सबको......
अलग अलग विकल्पों पर विचार कर रहे थे.......
अंत मैं वो उठ कर सभी के पास आये....

अलका: तो तय यह हुआ है कि एक मर्द और एक लेडी का नाम लौटरी से निकला जायेगा और फिर उस मर्द को बाकी की ९ लेडिस झड्वाएगी और इसी तरेह से लेडी को बाकि सब मर्द मर्दन करेंगे....

ये सुनते है सब तालियाँ बजने लगते हैं................

लौटरी का पहला नाम पुकारा जाता है...............सागर.....
और दूसरा................अलका....

सब आश्चर्य से एक दुसरे की तरफ देखने लगते हैं...............ये तो खेल खिलाने वाले हैं...........अलका का नाम कैसे आ गया..............

अलका: क्या क्या खुसुर पुसुर हो रही है.........

और झट से अपना छोटा सा स्कर्ट ऊपर करके अपनी चड्डी सबको दिखाती है.............

अलका: ये देखो मेरी पेंटी.......पूरी कि पूरी गीली हो गई है.............लगता है जैसे अभी स्विम्मिंग पूल से निकल कर आ रही हूँ.............हमारा भी तो सोचो यार.......

प्रेम: लाओ ....लाओ... दिखा तो अलका .......
और ये कहकर प्रेम अलका कि गीली चड्डी पे झपट्टा मरता है.............
प्रेम: चलो चलो निकालो इसको..........गीली चड्डी पहनी रहोगी तो रेशेस हो जायेंगे...........
और इतना कहकर चड्डी उतरने लगता है..........
परन्तु गीली होने कि वजेह से उतरने में आसानी नहीं हो रही थी.........
प्रेम: तेरी माँ की चूत साली..............ले..........
और ये कहकर प्रेम अलका की चड्डी फाड़ देता है..........
मनोज: गांडू मेरी बीवी की चूत के सबको दर्शन करा दिए......अब देख बेटा.....
ये कहकर वो श्वेता पर झपटता है........
श्वेता को कुछ समझ आये इसके पहले ही वो टॉप को खींच कर फाड़ देता है....
श्वेता उईईईईई कहकर भागती है......
तभी कई जोड़ी मरदाना हाथ उसे थाम लेते हैं और मनोज के लिए उसे हाज़िर कर देते हैं.......
श्वेता कसमसाने लगती है............
श्वेता: नहीं मनोज..........प्लीज .....फाड़ना मत...लो मैं खुद ही नंगी हो जाती हूँ........
मनोज: नहीं दोस्तों.....इस रांड को छोडना मत........
और यह कहकर वो श्वेता को दबोच लेता है.........
और जोर से उसकी ब्रा को खींच कर अलग कर देता है..........
श्वेता: प्लीज़ ...... मेरी जींस मत फाड़ना......
मनोज इस बार जींस खोल कर उसे जोर से खींच कर निकालता है..........
और फिर उसका अन्डरवियर भी पलक झपकते ही हवा में लहराता नज़र आता है............

ये सब इतनी तेज़ी से हुआ और संयोजक ही इसमें शामिल था तो बस फिर क्या था सबके सब्र के बाँध टूट गए......
सभी एक दुसरे को नंगा करने में जुट गए............
जिसका हाथ जहाँ पहुंचा वो ही खींच खींच कर हवा में उडाया जाने लगा........
चारो और शोर मचा हुआ था........
कोई बचने के लिए उधर भागी जा रही थी तो पता चला दुसरे मर्द ने पकड़ लिया और वोही उसे नंगा करने में भिड़ गया .....
मेरी नज़रें शाहीन पर जा लगी ......
राज अभी तक शाहीन के एक भी कपड़े खींच कर निकल नहीं पाया था........
तभी राज़ ने गुस्से में शाहीन को उठाया और अपने कंधे पर लटका लिया....
अब वो बिस्तर कि और बड़ चला...........
मैं भी उसके पीछे लग गया........
राज़ ने उसे बिस्तर पर पटक दिया और लगा सलवार का नाडा खींचने......
शाहीन जोर से नाड़े कि गाँठ को दोनों हाथों से पकड़े हुई थी.............
राज़ बहुत जोर लगा रहा था और गन्दी गन्दी गलियां भी बकते जा रहा था...........
अचानक मैंने शाहीन के कुरते को फाड़ना चालू कर दिया..............
उसने मुझसे अपना कुरता बचने के चक्कर में सलवार पर से अपनी पकड़ ढीली की......
मुझसे अपना कुरता तो बचा नहीं पाई .....उधर सलवार से भी हाथ धो बैठी...........
राज़ ने सलवार का नाड़ा खीन्चा और फिर........
नीचे से चड्डी सहित सलवार हवा में ..............
ऊपर मेरे हाथों से कुरता दो खंडो में परिवर्तित ........
जैसे ही मुझे उसकी ब्रा में कैद कबूतर कि झलक मिली.......मेरे हाथ कबूतरों को आज़ादी दिलवाने में लिप्त हो गए.......
राज़ भी नीचे का वेंटी-लेशन शुरू करवा कर ऊपर कबूतरों पर झपटा.......
अब चार जोड़ी हाथ..............पलक झपकते ही शाहीन मादरजात नंगी......
अब तक लगभग सभी चूतें सार्वजनिक हो चुकी थी............
लौड़े वालों ने अभी जरा सांस ली ही थी कि सारी नंगियों से एक एक करके लौड़ो पर हमला बोल दिया......
एक एक लंड को रोशनी में लेन के लिए दस दस जोड़े हाथ काम पर लगे हुवे थे............
अंत में जब सब वस्त्र-विहीन हो गए तब सब निचे बैठ गए............
मनोज: सागर, आप अपने लंड महाशय को सभालें और शयन शैया कि और प्रस्थान करें........
आपकी सेवा में इस महफ़िल की सारी योवनाएँ तुरंत प्रस्तुत कि जा रही है......

सागर उठ कर एक बड़े से बेड कि और भागा.....
इसी तरह का निर्देश अलका को भी दिया गया..........
वो भी तुरंत एक रुमाल से अपनी चूत से निकलते हुवे पानी को एक बार फिर से पूछ कर बेड कि और चलीं........
सारे मर्द अलका के बेड के इर्द गिर्द और सारी नंगी परियां सागर को घेरे...............
अब दोनों ही एक बहुत ही वाइल्ड और अति उत्तेजक आर्गाज्म से ज्यादा दूर नहीं थे.............
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08-30-2012, 09:12 AM
Post: #7
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मैं अलका के एक बोबे पर हमला करने की तैयारी करते हुवे सोच रहा था कि इतने मर्द एक यौवना के अंग प्रत्यंग का मर्दन करेंगे तो चुदाई कि नौबत ही नहीं आएगी....
ये तो अभी खल्लास होती है..............
और तभी पांच लंड एकसाथ अलका के चेहरे, गालों और होंठो पर रगड़ खाने लगे...........
अलका मदहोशी के साथ उन सभी लंडों से चुहल करने लगी.......
किसी को चुम्मी दे रही थी....किसी को पुचकार रही थी...........
किसी को मसल रही थी...............
समझ नहीं आ रहा था एक साथ इतने सरे हथियारों के साथ क्या किया जाय.......
पागल सी होने लगी...............
तभी उसके एक बोबे पर मेरे होंठो ने हमला किया..............
और साथ ही उसका दूसरा बोबा भी एक जोड़ी होंठो के कब्ज़े में आ गया............
मैंने उसके कड़क परन्तु बहुत ही रसीले कलामी आम को बेतरतीबी से चूसा चालू कर दिया........दुसरे आम को भी बुरी तरह से खाया जा रहा था.............
अलका के शरीर मैं २२० वाट का करंट दौड़ने लगा.......
उसके शरीर में रह रह कर ऐंठन पड़ रही थी.......
वो अपने कूल्हों को बुरी तरह से पटक रही थी..............
तभी दिलीप ने, जो अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था, बुरी तरह से मचल रहे विचलित कूल्हों को अपने दो मज़बूत हाथों से थाम लिया.........
अब अलका एकदम जकड़ ली गई..................
उसके मुंह से आन्हे निकालने लगी..............
तभी दिलीप के हाथ कूल्हों से फिसलकर जांघो की ओर बढाने लगे.............
और फिर एक झटके से दोनों जांघो को यथा-संभव दूर फैला दिया............
अब चिकनी और सपाट चूत जो कि योनी-रस से सराबोर थी मनोज के ठीक मुंह के सामने थी...........
अलका के साथ ऊपर जो सात लोग कृत्य कर रहे थे उसके घोर प्रभाव से अलका कि चूत एक झरने में तब्दील हो गई............
रह रह कर अमृत कलश छलक रहा था..............
मनोज से ये दिलकश नज़ारा और नहीं देखा गया और वो बस उस अमृत कलश से छलक रहे जाम का रसास्वादन करने के लिए आगे बड़ा..........
ऊपर हमारे भाई लोग अपने हाथों को अलका की कंचन काया पर अविरल फिसला रहे थे.............
शायद ही कोई अंग बचा होगा जो मर्दों कि ज़द से बाहर हो............
हर जगह मरदाना छाप छोड़ी जा रही थी...............
अलका को लग रहा था की बस कोई उसके शरीर को बुरी तरह से तोड़ डाले...........
इतनी तरंगे उठा रही थी उसमे.................और तभी................
दिलीप ने अब अपनी अंतिम छाप छोड़ने का फैसला किया...............
वो तुरंत अलका के योनी-फलकों को अपने हाथों से फैलाते हुवे........
झुका और अपने होंठो से उसके दाने पर जोरदार आक्रमण कर दिया..............बस यही वह क्षण था जब.............
अलका की एक जोरदार चीख उस विशाल कक्ष में गूंजी.............
ये चुदास से भरपूर प्री-आर्गाज्म चीख़ थी............
अलका अपनी मंजिल से जरा दूर थी.....................
ये महसूस होते ही सारे के सारे मर्द तेज़ी से अपने काम को अंजाम देने लगे.............
दिलीप कि चुसी और चटाई बुरी तरह से जारी थी....
जितना दिलीप का मुंह अलका की चूत में घुसता...........
उतना ही अलका चीख़ रही थी...............
और फिर अलका जोर से दहाड़ कर ढेर हो गई..............
पूर्ण रूप से संतुष्ट और निढाल............
एक लाश की भांति पड़ी थी जिसकी सांसे अस्त व्यस्त अंदाज़ में चल रही थी............
सभी मर्द उसे छोड़ कर हटे........................

(उधर दुसरे बिस्तर पर...................)
सागर अपने आस पास ८ नग्न सौंदर्य को एकसाथ पाकर उत्तेजना के शिखर पर था.................
इस पल की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी उसने ................
और ये प्रत्यक्ष घटित होने जा रहा था....................
उसका लंड रह रह कर उछाले खा रहा था..............
वो अपने हाथ और पैर फैला कर पीठ के बल लेट गया..............
लंड अपनी पूर्ण कठोरता के साथ.............ऊपर नीचे हो रहा था............
सभी सुंदरियों ने आसपास घेरा बना लिया और ....................
फिर घुटनों के बल.........पलंग के ऊपर सागर के समीप आने लगी...............
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08-30-2012, 09:12 AM
Post: #8
RE: मज़ेदार अदला-बदली
सागर अपने आस पास ८ नग्न सौंदर्य को एकसाथ पाकर उत्तेजना के शिखर पर था.................
इस पल की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी उसने ................
और ये प्रत्यक्ष घटित होने जा रहा था....................
उसका लंड रह रह कर उछाले खा रहा था..............
वो अपने हाथ और पैर फैला कर पीठ के बल लेट गया..............
लंड अपनी पूर्ण कठोरता के साथ.............ऊपर नीचे हो रहा था............
सभी सुंदरियों ने आसपास घेरा बना लिया और ....................
फिर घुटनों के बल.........पलंग के ऊपर सागर के समीप आने लगी...............
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........ अब आगे
-------------------------------
समीप आते आते वो धीरे धीरे झुकने लगी.......
अब चारो तरफ से सागर को अपने शरीर की तरफ बढते हुवे सिर्फ चूचियां ही चूचियां नज़र आ रही थी..............
और फिर एक एक करके सभी ने अपने अपने चुचचे उसके शरीर पर सटा दिए............
एक साथ नौ जोड़े चुच्चे जैसे ही उसके शरीर के संपर्क में आये................
उसे लगा.... अठारह बिजली के नंगे तार चारों ओर से उसे चुभो दिए गयें हों..............
एक दम जोर का झटका बहुत जोरों से लगा उसे.......
और फिर सभी ने एक लय में उन चुच्चों को सागर के शरीर से रगड़ना शुरू कर दिया.........
२ चूचियां उसके मुंह में, चार चेस्ट पर, चार पेट पर और दो उसके लंड और जांघो पर........
कोई दो मिनट तक उसकी ऐसी ही रगड़ाई होती रही..............
सागर के मुंह से गूं गू कि आवाजें आ रही थी............
अचानक उसके हाथ हरकत में आये.....................
उसके दोनों हाथ दो नंगे शरीरों के निचे दबे हुवे थे................
उसने अपनी दोनों हथेलियों से कुछ ढूँढना शुरू किया..............
तुरंत ही उसे दो जोड़ी रसीली चूंते मिल गई............
उसने अपनी हथेलियों से चूतों को मसलना चालू कर दिया............
जिन जिन गोरियों कि चूतें मसली जा रही थी उन्होंने भी साथ देते हुवे अपने कुल्हे थोड़े हवा में ऊपर उठा लिए.........
अब सागर आसानी से बिना झांट वाली एक दम चिकनी चूतों को जोर जोर से मसलने लगा.............
मीनू जिसे अभी तक सागर के पास आने कि जगह नहीं मिल पाई थी.................
उसने सबको पकड़ पकड़ कर हटाया और फिर सागर के ऊपर लेटकर उसे दबोच लिया..........
अब अपने शरीर को उसपर जोर जोर से रगड़ने लगी............
श्वेता जो सागर को अपने बोबे चूसा रही थी वो उठी और घूमकर लंड वाले स्थान पर आई........
मेरी ने अभी अभी लंड से अपने बोबे हटाये थे..............
उसे हटाकर...................झट से लंड पे कब्ज़ा कर लिया............
दोनों हाथों से लंड को कस के पकड़ के मसलने लगी............
मीनू सागर के ऊपर अपना पूरा शरीर जोर जोर से रगड़ रही थी............
श्वेता के लंड पकड़ लिए जाने से वो अब ज्यादा मूवेमेंट नहीं कर पा रही थी...........
इसलिए उसने अपने शरीर को थोडा ऊपर सरकाया और फिर रगड़ना चालू कर दिया.............
इस बीच.......बाकि सभी को जहाँ जगह मिली वहीँ से सागर को छूने, मसलने और रगड़ने लगीं......
दो ने तो अपने अपने बोबे सागर को पकड़ा दिए ..............
वो जोर जोर से उन बोबों से खिलवाड़ करने लगा.............
सागर की बीवी शाहीन ने एकदम से अपना हाथ सागर कि गांड की और बढाया.........
और गांड का छेद महसूस होते ही उसमे एक उंगली घुसेड दी...............
सागर की उन्माद मिश्रित दर्द कि एक कराह सुनाई दी...............
सागर अब जोर जोर से छटपटा रहा था.................
मीनू को जैसे ही लगा कि सागर का किनारा नज़दीक आने वाला है..............
उसने लंड को मसलते मसलते उसे अपने होंठो से लगा लिया........
और फिर एक ही झटके में उसे मुश्टंड लंड को निगल गई............
और फिर अपने सर को जोर जोर से ऊपर निचे करके लंड कि जोरदार चुसाई शुरू कर दी...........
सागर काँप रहा था साथ ही जोर जोर से आह आह भी कर रहा था...............
सभी ने अपनी अपनी स्पीड बड़ा दी...............
शाहीन ने जैसे ही सागर को झड़ने के नज़दीक पाया ...............
उसने अपनी पूरी उंगली उसकी गांड में घचोड़ दी.................
सागर के लंड ने तुरंत भरभरा के मीनू के मुंह में पिचकारियाँ छोडनी शुरू कर दी.............
दोनों हाथों में जो बोबे थे उन्हें कस दे भींच लिए.............
और फिर एक जोर कि डकार लेते हुवे ढेर हो गया...............
मीनू अभी भी लंड को हौले हौले अन्दर बाहर कर रही थी..........
लंड के सहारे सहारे उसका माल रिस रिस कर मीनू के मुंह से बाहर आ रहा था..........
मीनू यथा संभव माल गटक चुकी थी..............
सारी लेडिस अब सागर के पलंग से उठने लगी...............
और फिर मीनू ने लंड बाहर निकला और अपने हाथों पर चिपटे माल को फिर से चाट चाट कर हज़म करने लगी................
अंत में शाहीन ने भी अपनी उंगली उसकी गांड से बाहर निकली........
और फिर अपने शौहर पर एक बहुत ही प्यार भरी निगाह डाली.............
सागर आँख बंद करे अभी अभी गुज़रे तूफ़ान के बाद सुस्ता रहा था...........
फिर वो वहां से उठा खड़ी हुई .................क्योंकि सागर को किनारा मिल चूका था.................
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08-30-2012, 09:12 AM
Post: #9
RE: मज़ेदार अदला-बदली
Karib karib ek sath hi alka aur sagar ka jhadna hota hai……..
Alka aur sagar ka to kaam ho chukka tha………
Parantu is puri prakriyan mein sabhi log behad garam ho chuke the………..
Ab manoj phir se awaz lagata hai………..
chaliye ab naye do sadasya chudne ke liye teyyar ho jaiye………….
Teen char mardon ne aankho hi aankho mein kuch ishara kiya………..
Phir sabhi mard aapas mein kuch phusphusa ke kuch baat karne lage………..
Sari mahilayen sagar ke hi palang par baith gai………….
Sagar aur alka uth kar manoj ke paas aa gaye jo ki agle do naamo ki goshna karne wala tha………..
Tabhi………………….
Roni jor se chillaya…………….
Manoj teri ye list teri gaand mein ghused le……………
Aur achanak sabhi aantho mard palang par bethi nagn yovnaon ki aur bade………….
Jese sabhi ne man hi man soch liya tha ki kon kis pe hath saf karega…………
Sabhi tezi se un par jhapate aur …………
Jhapatta mar mar k ek ek nage badan ko utha kar ek ek khali palang ki aur jane lage………….
Kuch kuch auraton par ek sath do do log kabza jamane ki koshish karne lage…………..
Phir apas mein hi saltara kar liya aur aathon mardon ko ek ek haseena hath lag gai……………
Sir shweta hi palang par bach gai……………..
Ye sab itni achanak hua ki manoj aur alka ko pratikriya dene ka mouka hi nahi mila………….
Shweta ko sara mazra samajh aa gaya……………..
Parantu ab use kon chodega…………….
Ye soch kar wo paglo ki tarah uthi aur manoj ki aur bad gai………….
Shweta: Manoj…ye sagar ka land to abhi kaam ka hi nahi hai…………
Ab tu hi meri pyaas bujha de yaar…………..
Dekh sab ke sab ek ek ko le ude…………….
Chal tu bhi aaja aur meri chudai kar…………..

Manoj aur alka ko apni sab planning fel hoti nazar aai……….
Wo dono tezi se un sabke piche doude taki unhe rok sake………
Udhar sab ke sabon ne mahilaon ko bistar pe patka aur chad gaye unpar………….
Itne bhare huwe the ki kisi ko bas chodne ke alawa kuch aur sooz hi nahi raha tha…………
Sari auraten bhi kush thi ………………….
Bas khush nahi the to wo the manoj aur alka…………
Manoj aur alka sabse kahne lage…………….abhi chudai mat karo
Dekho hamne jordar planning kar rakhi hai…………..
Sara game choupat mat karo…………….
Aur ek ek kam krida rat jodon ke paas ja ja ke unko hatane lage…………..
Parantu koi kuch samajhane ko teyyar hi nahi tha……………
Alka roni ko pakad ke kheech rahi thee…………..
Aur roni laga tha shilpa ki choot mein land ghusane mein…………….
Teen char bar ki jaddojahad ke baad roni ko gussa aa gaya…………..
Roni: saali raand……..khud to maze le gai aur ab mujhe chudai bhi nahi karne de rahi…………..
Aur use jor se dhakka marta hai……………..
Wo phir se aakar roni ko pakad ke shilpa ke upar se uthane ki koshish karti hai…………..
Udhar manoj bhi betahasha sabhi ke paas ja jaakar sabko keench keench kar chudai karne se rokta hai…
Aur sweta……..wo apni risti hui choot liye manoj ke piche piche bar bar uske land ko pakadane ka prayas karti hai…………
Kya scene tha………….
Aath jode sambhog ki mudra mein sambhog rat hone ka prayas kar rahe hain………….
Alka …….wo aise reach kar rahi hai jese uski betiyan chodi ja rahi ho…………
Aur manoj…..kabhi is palang pe kabhi us palang pe jese kisi ko bhi land nahi ghusane dega………
Aur chudai ki bawali shweta…….wo land pane ke liye gidgida rahi hai manoj se…………
Sagar….but bana apni jagah khada hai…………..
Agle teen-char minute manoj aur alka sabka naak mein dam kar dete hain……….
Sabhi ko itna pareshan karke rakh diya ki sab chidchida uthe………….
Tabhi…………
Roni chillata hai……………..
e….sab ke sab jara ruko to………….
In dono madarchodon ne chodna muhaal kar diya hai…………
Sab ek-ek karke apne landon ko chuton se bahar nikalate hain aur roni ke paas jakar khade ho jate hain…..
Udhar manoj aur alka bhi paas paas khade hain…………..
Parantu………….shweta………use to bas manoj ke land ke alawa kuch sooz hi nahi raha hai…………
Sari stithi se anjaan wo phir manoj ke land pe toot padati hai………
Aur dono hathon se pakad kar usse khilwad karne lagti hai………….
Manoj bar bar use dutkar kar door kar raha hai……………..
Sabhi chudi ja rahi auraten bhi dheere dheere uth khadi hoti hai…………..
Roni: kyonre manoj……..bechari shweta ko kyon bhaga raha hai………tujhe hi chodna hai use………..abhi aur koi free nahi hai……….
Manoj: yaar roni ye kya ho gaya hai tum sabko ……..dekho main samjhata hoon tum sabko….suno….suno…..
Aur aage kuch boke uske pahle roni usko piche se pakad leta hai…………alka use chudane ki koshish karti hai to do-teen mard aakar use bhi pakad lete hain………….
Ab ek do log aur aakar manoj ko kas ke pakad lete hain…………..
Roni: ab dekho ….mein batata hoon asli khel……………………
Ey shweta chal sabse pahle tujhe chudwata hoon………..
Shweta: nahi mujhe manoj se hi chudna hai…………..
Roni: ok bebi….manoj hi chodega……….
Manoj: nahi main nahi chodunga……….
Roni: dekhta jaa mera gem…………
Roni ke ishare par manoj ko pakad kar ek bed par jabardasti lita diya jata hai……..
Abhi bhi char logon ne uske hath pair kaske pakad rakhe hain…………..
Manoj ka land ek dam murjhaya huwa hai……….use shweta ko chodna jo nahi tha…………
Roni ke ishare par teen-char mahilayen morcha sambhal leti hai…………
Meenu seedhe manoj ke aadhe soye land ko gappa se munh ke andar le leti hai………
Teen-char uske shareer par har jagah chuma chati chalu kar deti hai………..
Meri meenu ko ishar karti hai thoda side se land choosne ke liye aur wo manoj ki gaand jara upar karwati hai………….
Jin logon ne manoj ke pair kas ke daba rakhe the wo uske ghutno ko modte huwe dono jangho ko phaila dete hain……………
Meri neeche gaand ki taraf se apne hathon se dhakaa dekhar kulho ko thoda hawa mein utha kar ek takiya gaand ke niche sarka deti hai…………..
Meenu yathawat land chusai mein talleen rahti hai…………..
Ab manoj ki khuli gaand meri ke theek samne…………….
Wo pet ke bal let kar apna munh manoj ki gaand mein ghusa deti hai…………….
Manoj ke munh se naa chahte huwe bhi ek jor se aah nikal jati hai………….
Ekdam meenu ko manoj ke kadak hote hathiyaar ka ahsaas hota hai……………..
Wo munh bahar karke hath se muthiyane lagti hai…………
Tabhi do-teen aur land ke paas aa jati hai……..meenu phir se land chusne lagti hai………
Do uski gotiyon ko munh mein lekar choosne lagti hai…………..
Aur meri………..wo bade jatan se gaand ko chaat rahi thee….choos rahi thi…….jeebh ki nonk ko ched mein daalne ki koshish kar rahi thee………..
Manoj ka ab ekdam khada ho chukka tha…………….
Roni ne jese hi dekha manoj taiyaar hai…………wo shweta ko ishara karta hai……….
Shweta jhat se palang pe chad jaati hai……………..
Sabhi mahilayen wahan se hat jati hai………….
Manoj ke niche se takiya nikal ke uske pair phir se seedhe kar diye jate hai…………..
Parantu abhi bhi manoj ko kas ke pakad rakha hai sabhi ne……………
Ab shweta land ke theek upar apna ek pair manoj ke dusri taraf rakhti hai…………..
Aur phir dheere dheere niche jhukane lagti hai…………….
Manoj ka land jor jor se phadphada raha hai………….
Niche jhukate jhukate ek hath se manoj ka land tham leti hai…………….
Aur phir use sidha upar ki taraf karti hai……………..
Ab wo land pe baithne lagti hai……………
Land sidha shweta ki choot mein ghusta chala jata hai……………..
Jese hi wo pura andar hota hai…………Shweta aage jhukkar apne dono hath manoj ke seene aas-paas tika deti hai……………
Position set hote hi wo jor jor se land ke upar uchalane lagti hai………….
Roni shweta ki peeth ki aur aata hai aur jhukkar uske hichkole khate kabootaro ko tham leta hai……..
Aur uski ghundiyon ko masalane lagta hai……………..
Udhar abhi bhi alka teen-chaar hathon ki giraft mein hai…………..
Ab wo hath alka ke vibhinna angon ka jayza lene lagte hain…………..
Do hath uske dono bobe masalate hain……………ek hath choot ko berahami se ragadata hai………
Aur ek to uski gaand phailaa kar usme ek ungali daakhil kar deta hai………
Alka karah rahi hai………
Udhar shweta badi tezi se jhadane ke kareeb badi chali ja rahi hai………….
Wo bahut jor jor se land pe uchaale kha rahi hai………………
Aur phir ek cheekh ke sath wo dher ho jati hai……………
Land pe dhakke abhi bhi laga rahi hai………….
Roni wahan se hatta hai aur alka ke paas aa jata hai…………..
Tab tak uski gaand mein teen ungali daali ja chuki thi…………
Wo dard ke mare chatpata rahi thee…………..
Roni ko ye dekhkar muskurata hai……….
So ishara karta hai…………ishara pate hi alka ko ek palang par charpaya bana diya jata hai…………
Wo bar bar letne ka prayas karti hai……par kai jode hath use ghodi bana kar rakhte hain…………
Roni palang pe khada ho jata hai………………
Roma ko ishare se apne land ki aur bulata hai………….
Roma uske land ko choosne lagti hai…………..
Wo apni ungaliyon ko thook se bhigo kar alka gi gaand mein ghusa deta hai…………..
Ek ungali aasani se chali jati hai…….phir wo ek-ek karke teen ungali daal deta hai…………..
Gaand kaphi khul chuki hoti hai ………………….
Jese hi roma uske land ko achhe se thook se lathed deti hai wo use hata ta hai aur apna land alka ki gaand par tika deta hai…………….
Udhar manoj abhi jhada nahi tha………wo minnaten karne lagta hai are mujhe bhi to jhadao………
Koi uski nahi suntan……………..
Chalo kisi choos ke jhadane ke liye hi bula do…………..
Koi asar na hote dekh kar bolta hai…………..are yaar hath hi chhod do, apne se hi jhad jaunga………….
Lekin kisi pe koi pratikriya nahi………….
Use alka ki aur bhi dekhne nahi diya ja raha tha……………
Meri ko shararat soojhati hai………………
Lao manoj tujhe main choos deti hoon……………
Wo uske land pe jhukati hai…………………aur char paanch baar choos kar phir land chhod deti hai……………
Thoda ruk kar wo phir teen char bar choos ke chhod deti hai………………..
Manoj tadapane lagta hai…………aur meri se gidgidane lagta hai………….please pura choos ke jhada do….
Aise mat tadpao nahi to mar jaunga…………
Lekin koi raham karne ko taiyaar hi nahi tha………………..
Udhar roni apni puri taqat laga kar teen-chaar dhakko mein hi pura land alki ki gaand mein thoons deta hai……………
Alka ke dard ke mare aansoo nikal jate hain…………..
Wo raham ki bheek mangane lagti hai…………….
Lekin roni is waqt kisi darinde ki bhaanti alka ki gaand ka mardan kar raha tha…………..
Thodi der mein apna dher sara pani alka ki gaand mein chhod deta hai………….
Phir apna land riste huwe maal ke sath bahar kheenchata hai…………..
Maal ka rang……………..laal
Alka ki gaand ka jam kar khoon kharaba kiya roni ne…………………
Meri manoj ko abhi bhi tadpa rahi thee……………….
Manoj pagal sa huwa ja raha tha……………..
Roni bolta hai…………….chhod do ab use………………
Jese hi manoj ke hath free hote hain……….wo turant apni mooth marne lagta hai………….
Aur 1 minute mein hi apna sara maal hath se khali kar deta hai…………….
Dono ko wo paryapt saza de chuke the………………….
Roni sabko apni apni position lene ko kahta hai…………….
Agle kuch palaon mein eksath aath chudai shuru ho jati hai…………..
Roni chunki jhad chukka hota hai ……..wo sagar ko apni jagah kaam pe laga deta hai………
Sagar ke land mein itni der mein phir se jaan aa chuki hoti hai………………….
Aur phir charon aur chudai ki karahen, aanhe aur cheenkhe…………………..
Agle das minute mein ek-ek karke sab dher hone lagte hain……………….
Sab mahilaon par hi let jate hain………………….
Us kamre mein abhi ek bahut badi chudai ki sunami apna kaam bata kar ke shant hone lagti hai……………..
Sab apni apni sanso ko vyavasthit hone mein lagen hain……………………………….
Sham dhalane ko hai……………………. Dekhte hain ab aage kya hota hai…………………..
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08-30-2012, 09:13 AM
Post: #10
RE: मज़ेदार अदला-बदली
एक जोर कि चीख से मेरी झपकी टूटती है. सब चीख कि दिशा कि और देखते हैं. मेरी दोनों हाथ मुंह पर रखे अलका के पलंग के पास दहशत के भाव लिए जड़ हो गई.

सभी लोग दौड़ कर वहां पहुंचे. अलका बेहोश पड़ी थी और उसकी गांड से बहुत खून बह रहा था...................सब सन्न रह गए.

शिल्पा जो कि एक गायनिक सर्जन थी वो तुरंत चेक करने लगी.

एकदम माहौल बदल गया...........सबके सर से सेक्स का भूत काफूर हो गया.

शिल्पा: इसे तुरंत मेरी क्लिनिक ले चलना होगा, कहीं खून ज्यादा न बह जाये......................

और फिर अगले ३-४ मिनट में सब अपने कपड़ो में बाहर.

तय यह हुआ कि ३-४ कपल अलका के साथ जायेंगे..................

और अगले चंद मिनटों में अलका को ले गए................

अब सभी बचे हुवे कपल एक एक करके रोनी और मेरी से बिदा लेने लगे...................

सबके सब एकदम चुप थे और सदमे कि हालत में थे.................किसी ने किसी से कोई बात नहीं की................

मैंने कार में रोमा कि बैठाया और गेट से बाहर आया.........................

मैं: कहाँ चले.................घर जाकर क्या करेंगे.........

रोमा: चलो भोपाल चलतें है पिंकी के घर......... कम से कम छुट्टियाँ को ख़राब नहीं होगी.................

मुझे आईडिया पसंद आता है और मैं मुस्कुराते हुवे कार को भोपाल की और बड़ा देता हूँ.........................

(अब आगे कि कहानी.............रोमा कि जबानी.............)

मुझे बड़ी थकान महसूस हो रही थी तो मैं पीछे कि सीट पर सोने चली गई........................

जैसे ही आँख बंद की, अलका वाला सीन आँखों के सामने आने लगा..............

बार बार उस से बचने कि कोशिश करने लगी परन्तु वो घटना पीछा ही नहीं छोड़ रही थी..................

फिर मैंने सोचा इस से पीछा छुड़ाने का एक ही रास्ता है कि मैं अपनी ज़िन्दगी के अच्छे फ्लैशबैक में जाऊं ................

और मेरा मन अतीत के पन्ने पलटने लगा......................

कॉलेज के समय में मैं बहुत ज्यादा शर्मीली लड़की थी...........परन्तु दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत
थी.......जवानी भी समय से पहले ही मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गई थी...........

पिंकी मेरे से सिर्फ सवा साल छोटी थी और मेरे एकदम विपरीत उसका स्वाभाव था........चंचल, शोख और बिंदास............

पापा मम्मी दोनों इंग्लैंड में डॉक्टर थे और हम दोनों बहने हॉस्टल में साथ-साथ रहते थे....................

एक दिन मेरे चचेरे भाई का फ़ोन पिंकी के पास आया और फिर पिंकी ने मुझसे उसके साथ घूमने जाने की इज़ाज़त मांगी..............

मुझे पता था कि मेरे मना करने पर भी उसे करना तो अपने मन की ही है.............सो मैंने उसे हाँ कह दी.....

पिछले कई दिनों से ये दोनों ऐसे ही लगातार घुमने जा रहे थे..............पूछने पर पिंकी हर बार असंतोषजनक जवाब देती थी..............

आज मुझे लगा कि ये कहाँ जाते हैं......क्या करते हैं इसका पता लगाना चाहिए और मैंने उसकी जासूसी करने का निश्चय किया...............

मैं: चल मैं भी अपनी कोचिंग में जारही हूँ.................

और फिर हम साथ ही नीचे आये...............मिंटू, मेरा कज़न, जैसे ही अपनी बाईक पर पिंकी को बैठा कर जाने लगा मैंने भी अपनी एक्टिवा उसके पीछे लगा दी और बड़ी ही सावधानी से पीछा करने लगी............
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