Current time: 06-18-2018, 02:09 PM Hello There, Guest! (LoginRegister)


Post Thread Post Reply
Thread Rating:
  • 0 Votes - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
मज़ेदार अदला-बदली
08-30-2012, 09:15 AM
Post: #21
RE: मज़ेदार अदला-बदली
सुबह मेरी ९ बजे आँख खुली. रवि मेरी बगल में सोया पड़ा था. रात में जब उन दोनों को अपनी योजना बताई तब वे दोनों एकदम रोमांचित हो उठे थे. फिर हमने मिलकर सब कुछ तय किया और फिर मैं अपने कमरे में सोने आ गई. रवि ने कहा कि पिंकी के साथ एक और राउण्ड निपटाकर तुम्हारे कमरे में सोने आ रहा हूँ.

बाहर से पिंकी और अमित की आवाजें आ रही थी. मैं तुरंत बाथरूम में घुस गई. तैयार होकर मैंने रवि को उठाया और बाहर चली गई.

दोपहर में खाने की टेबल पर-

अमित: तो रवि, खाने के बाद का क्या प्रोग्राम है.

रवि: यार अमित, यहाँ आये हैं तो मिंटू का नया फर्म हाउस भी देख आयें, उसे पता चला तो बहुत नाराज़ होगा. रोमा को साथ ले जा रहा हूँ, वो एक बार जा चुकी है वहां.

अमित: ठीक है यार पर वहां ज्यादा रुकना मत, शाम को कहीं चलेंगे साथ.

खाने के बाद सब वाश बेसिन हाथ धोने चले जाते हैं. मैं पास ही बाथरूम की तरफ हाथ धोने बढ जाती हूँ और गिले फर्श पर पैर रखते ही में पेट के बल गिरने का नाटक करते हुए एक जोरदार चीख मारती हूँ. रवि मुझे उठा कर बाहर बेड पर लिटा देते हैं. थोड़ी देर बाद मैं बताती हूँ कि अब मैं काफी ठीक हूँ. रवि बोलता है कि चलो मैं अकेला ही मिंटू से मिलकर आ जाता हूँ परन्तु तभी पिंकी बोलती है कि वो रवि के साथ चली जाती है दीदी तब तक आराम कर लेगी. अगले पंद्रह मिनट में दोनों जल्दी ही लौट कर आने का बोल कर निकल जाते हैं.

अभी तक सब कुछ हमारी योजनानुसार ठीक चल रहा था.

अब मैं अमित को बोलती हूँ कि मैं कमरे में जाकर आराम करना चाहती हूँ और उठ कर जैसे ही कमरे की तरफ चलने लगती हूँ, उईईइ की आवाज़ के साथ पैर पकड़ लेती हूँ. अमित कहता है कि मेरे कंधे का सहारा ले लो और फिर एक हाथ उसके कंधे पर रख कर धीरे धीरे रूम में जाकर लेट जाती हूँ. अमित परदे लगाकर बोलता है कि दीदी आप आराम करो मैं हॉल में टी वी देख रहा हूँ, कुछ काम हो तो आवाज़ लगा देना.

अब योजना के दुसरे चरण के लिए मुझे एक घंटे इंतज़ार करना था.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:16 AM
Post: #22
RE: मज़ेदार अदला-बदली
एक घंटे बाद मैं कराहते हुए अमित को आवाज़ लगाती हूँ. वो आकर पूछता है क्या हुआ.

मैं: लगता है गिरने के कारण नाभि फिर सरक गई है, बड़ा तेज़ पेट में दर्द हो रहा है.

अमित: डॉक्टर को लेकर आता हूँ अभी.

मैं: नहीं ये डॉक्टर वाली प्रॉब्लम नहीं है, मुझे अक्सर ऐसा होता है और रवि ये देसी तरीके से ठीक कर देता है.

और फिर मैं जोर जोर से कराहने लगती हूँ. और अमित की कोई बात नहीं सुनती हूँ बस पेट पकड़ कर कराहने लगती हूँ.

अमित घबरा कर रवि को फ़ोन लगा कर उसे सब बताता है. कुछ देर बात करके आखिर में वो बोलता है....... ओके मैं देखता हूँ ........

फिर फ़ोन कट करके बाहर चला जाता है......२ मिनट बाद वापिस आता है. मैं कराहते हुवे पूछती हूँ क्या हुआ.

अमित मेरे पास आकर मेरी सर पर हाथ फेर कर चिंतित स्वर में कहता है कि रवि को तो वापिस आने में बहुत वक़्त लगेगा क्योंकि वो होशंगाबाद रोड पर जाम में फंस गए हैं तो पिंकी ने सुझाव दिया कि पास वाली निधि भाभी को बुला लाओ उन्हें फ़ोन पर समझा कर बता देंगे कि क्या और कैसे करना है.

मैं: तो फिर?

अमित: निधि भाभी के यहाँ तो ताला लगा है.

पिंकी तो पता था कि भाभी आज बाहर गई हुई है तो वहां अमित को ताला ही तो मिलना था.

मैं: तो और कोई भाभी या आंटी को बुला दो.

अमित: और तो कोई नहीं रहता आस पास.

मैं फिर से थोडा तड़पने का नाटक करती हूँ. अमित बेचारा डर के फिर रवि को फ़ोन लगता है. इस बार वो स्पीकर चालू कर देता है. उधर से पिंकी की हेल्लो की आवाज़ आती है और वो पूछती है कि निधि भाभी को फ़ोन दो मैं समझाती हूँ क्या करना है.

अमित: पिंकी, निधि के यहाँ तो ताला लगा है.

पिंकी: मर गए, अमित तुम्हे पता है दीदी का दर्द बढ गया तो बहुत तकलीफ होती है उन्हें. हमें तो अभी भी २ घंटे से काम नहीं लगेंगे बहुत लम्बा जाम लगा है.

फिर वो रवि से पूछती है कि अब क्या करें. रवि उससे पूछता है कि तुम्हे और अमित को एतराज़ ना हो तो अमित ही हेल्प कर दे रोमा की.

पिंकी: पर जीजू उसमे तो.........मुझे पता है आप दीदी का कैसे इलाज़ करते हैं........कैसे कर पाएंगे अमित वो सब......और शायद दीदी तो राज़ी ही न हो उस सब के लिए..........हाँ, हालात को देखते हुए, मुझे कोई एतराज़ नहीं है.........मैं दीदी की ऐसी हालत बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ.

रवि: तो जल्दी जल्दी बताओ अमित को कि क्या करना है, रोमा बेचारी तड़प रही होगी......हे भगवान् हमें भी अभी जाम में फँसना था.

पिंकी: अमित, जरा फ़ोन को स्पीकर पे तो करना दीदी की रजामंदी लेनी हैं.

अमित: फ़ोन स्पीकर पे ही है और दीदी तुम्हारी बात सुन रही है......तो जल्दी बताओ क्या करना है. दीदी बहुत दर्द में है.

पिंकी: अमित, ये इतना आसान नहीं होगा तुम्हारे लिए और दीदी के लिए तो जरा भी नहीं, इसलिए पहले उनसे तो पूछ लूं ......दीदी, अमित कर देगा तुम्हारा इलाज़, तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं.

दीदी.............दीदी............सुन रही हो क्या.........

अमित: पिंकी, शायद दर्द बहुत ज्यादा है वो सुन तो रही है पर बोल नहीं पा रही है.

पिंकी: अमित ............बस तुम सुनो और समझ कर ठीक तरह से करना............अब वक़्त गंवाने का कोई फायदा नहीं.......तुम बस ये सोचना कि तुम डॉक्टर हो और तुम्हारे सामने जो है वो तुम्हारी मरीज़ है और तुम्हे उसे ठीक करना है. जरा भी मत शर्माना.

अमित: ऐसा क्या करना है मुझे.

पिंकी: अभी बताती हूँ............

तभी मैं बोलती हूँ................अमित, दर्द बर्दाश्त नहीं होता अब तो........... आआआआआआ ..............समझ लो पिंकी से कैसे करना है........आआआआआआआआ.......

मेरी हरी झंडी देख कर अमित तेज़ी से फ़ोन पर क्या करना है वो पिंकी के मुंह से सुनता है.............सुनते सुनते उसे इतनी शर्म आने लगती है कि वो स्पीकर ऑफ करके कान में लगाकर सुनने लगता है. उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ती साफ़ नज़र आ रही थी और पसीना पसीना हो रहा था........मैं बेसुध सी होने का नाटक करते हुए कनखियों से उसे देखती जा रही थी...........हमारी योजना एकदम सही जा रही थी.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:16 AM
Post: #23
RE: मज़ेदार अदला-बदली
अमित: (धीरे से), ये सब मैं कैसे कर पाउँगा, तुम एक बार और सोच लो कोई और रास्ता है क्या...........

अरे मेरे भोंदू महाराज और कोई रास्ता नहीं है, आज तुझे मुझसे कोई नहीं बचा पायेगा..........मुझे ये सोचते हुए मुस्कराहट सी आने लगती है पर मैं दबा जाती हूँ. अभी तो मुझे बहुत कुछ दबाना है, पुरे इलाज़ के दौरान कंट्रोल रखना है और मैं कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार थी.

अमित: ठीक है पिंकी, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता हूँ, दीदी ठीक हो जाये बस.....................ओके, बाय.

फ़ोन बंद करके वो एक मिनट मुझे देखता है और जैसे ये निश्चय करने का प्रयास कर रहा था कि वो करे या न करे...........पर और कोई रास्ता नहीं था उसके पास, उसकी प्यारी और पतिव्रता बीवी ने उसे ऐसा करने का बोला है. वो जल्द ही अपने अपराध बोध को झटक कर मेरे पास आया और सर पे हाथ फेरा कर बोला दीदी धीरज रखो मैं जल्दी ही कुछ करता हूँ. और फिर वो पिंकी के बताये अनुसार गरम तेल और घिसा चन्दन लाने के लिये किचन में घुस गया.

मेरी योनी ने अभी से पनियाना शुरू कर दिया. देखती हूँ ये भोंदू महाराज आज मेरे से कैसे बचेगा.

जब से पिंकी की सुहागरात हुई है पिंकी ने अपने इस भोंदू की चुदाई के ऐसे गुण गान किये कि मैं पिंकी से जलने लगी थी. दीदी ऐसे चोदता है, वैसे चोदता है. गोद में उठा के चोदता है, हवा में निचे लटका के चोदता है, गर्दन में उल्टा लटका कर चूसता चुसवाता है, इतनी ताक़त है मेरे दारा सिंग में. और जब मैंने पिंकी से पूछा कि यार मेरी चूत का भी भुरता बनवा ना अपने पहलवान से तो पिंकी गंभीरता से बोली थी कि ये हनुमान भक्त भोंदू महाराज बहुत स्ट्रोंग केरेक्टर वाले हैं, मेरे अलावा किसी और को चोदना तो बहुत दूर, हाथ तक नहीं लगायेंगे किसी को. मैं अमित से चुदने के लिए बहुत आतुर हो उठी. और उसपे तुर्रा ये कि हर रोज़ दोपहर फ़ोन पर पिंकी, पिछली रात की चुदाई के किस्से सुना सुना कर, सुना सुना कर, पागल करती रही. अमित बॉडी बिल्डिंग और कराटे का चेम्पियन था और देखने में बहुत ही आकर्षक. उसकी सेक्स पॉवर से पिंकी बहुत ज्यादा संतुष्ट थी और कभी कभी तो उसे ही खुद अमित के हाथ जोड़ने पड़ते थे कि मेरे बाप अब तो सोने दे, कितना चोदेगा, थकता ही नहीं है, रुकता ही नहीं है, सांड जैसी पॉवर और खिलोने जैसा उठा कर हर तरह के पोज़ में बेहतरीन चुदाई. लंड भी उसका सांड जैसा . जब पिंकी ने इस मामले में मेरी कोई भी मदद करने में अपनी लाचारी जताई थी तभी से मैंने ठान लिया था कि मैं पिंकी के पिंकू का धर्म भ्रष्ट करके ही रहूंगी चाहे जो हो और आज वो मौका हाथ लग गया था . कल रात जब मैंने रवि और पिंकी को ये योजना सुनाई तो वो दोनों फटाक से तैयार हो गए.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:16 AM
Post: #24
RE: मज़ेदार अदला-बदली
अमित: लो दीदी मैं तेल गरम कर लाया हूँ.

मैं बस बेसुध होने का नाटक कर के पेट को पकड़ के आँखे बंद किये धीमे धीमे कराह रही थी जैसे दर्द ने मेरे कराहने की भी शक्ति ख़तम कर दी हो. मेरी कोई प्रतिक्रिया न होते देख वो थोडा सहज हुआ कि उसे जल्दी ही अपना काम निपटाना है.......अब मैं भी देखना चाहती थी कि जेसा बताया गया होगा इसे सिर्फ उतना उतना ही करेगा या मुझे बेसुध सा देख कर कुछ कमीनापन भी सूझेगा इसे.

सबसे पहले तो उसने मेरे दोनों पैरों के अंगूठों पर रबर-बेन्ड चढ़ा दिए. अब उसने मेरी नाभि से मेरा हाथ हटाया और पूछा दीदी, बहुत दर्द है, तो मैंने बस हूँ कहा, फिर उसने बहुत कुछ पूछा तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया.......कुछ कुछ देर में बस कराह रही थी........

वो बेचारा अब बहुत परेशान हो रहा था क्योंकि मैंने नाइटी पहन रखी थी और अब उसे मेरी नाभि को बेपर्दा करना था. कांपते हाथों से उसने मेरो नाइटी ऊपर करनी शुरू की, घुटनों के ऊपर लाकर वो रुक गया, फिर उसने ऊपर की परन्तु नीचे से फँसी होने कि वजह से वो जांघो से ऊपर नहीं हो पा रही थी. मैं आँखों में थोड़ी सी झिरी बना कर उसके चेहरे की रंगत देख रही थी. उसने अपना एक हाथ मेर पुट्ठे के नीचे फसांया और फिर दुसरे हाथ से जांघ ऊँची करके वो नाइटी ऊपर खींचने लगा. उसकी पूरी हथेली मेरी जांघो और पुट्ठों से रगड़ खा रही थी. इसी तरह से उसने दूसरी तरफ से भी मेरे पुट्ठो से नीचे फँसी नाइटी को ऊपर किया.

और जैसे ही आगे से ऊपर सरकाई वो शाक्ड रह गया. मैंने पेंटी नहीं पहन रखी थी और मेरी खुली चूत उसकी आँखों के सामने थी, उसने मेरी तरफ देखा, मैंने आँखों की झिरी में से उसे देखा, उसने चूत से परे मुंह घुमा कर नाभि को खोला. अब तेल की आठ दस बुँदे नाभि पर गिराई और बड़ी हिम्मत करके अपने होंठ का अंदरूनी भाग पेट पर रखा और हलके से मालिश देने लगा. बेचारा.....मान गया की हाथ से मालिश मत करना वो कड़क होते हैं....शरीर के सबसे मुलायम अंग से हलकी मालिश देना.

उसने दोनों हाथ दूसरी और टिकाये और झुक कर मेरी नाभि की अंदरूनी होंठो से मालिश करने लगा. इतनी मुलायम मालिश से मेरी उत्तेजना बड़ने लगी परन्तु जाहिर नहीं कर सकती थी सो मैंने फिर कराहना चालू कर दिया. वो रुका फिर जब मैं चुप हुई तो उसने फिर शुरू कर दी.....वो मालिश क्या...एकदम चटाई थी होंठो से..... थोड़ी ही देर में वो कामुक मालिश में तब्दील हो गई और मैं अपने को जज़्ब किये इस स्थिति का घोर आनंद लेने लगी. ५ मिनट बाद अमित हटा वहां से.

अब वो मेरी ओर पीठ करके खड़ा हो गया. मुझे पता था कि अब उसे अपना लंड निकाल कर घोट घोट के खड़ा करना है ताकि वो मेरी नाभि को अपनी उर्जा दे सके. इस रामबाण रेकी की विधि का आविष्कार कल रात इसी कमरे में हुआ था. काफी देर लगा रहा था, शायद उसके संस्कार उसके आड़े आ रहे थे, पर मेरे जाल में फँस कर वो फडफडा तो सकता है परन्तु बच नहीं सकता.

फिर उसके हाथ हिलते देखे मैंने, हाँ लंड की घुटाई शुरू कर दी थी उसने, मैं उसके पहलवानी लंड के प्रथम दर्शन की प्रतीक्षा में रोमांचित हुई जा रही थी. लंड तो बहुतेरे देखे जीवन में परन्तु, मेरे से भी ज्यादा चुदक्कड़ मेरी रांड बहन को जिस लंड ने अस्थाई तौर पर पतिव्रता नारी बना दिया उस लंड में कुछ ना कुछ तो बात होगी ही.

कुछ देर की लंड घुटाई के बाद वो जैसे ही पलटा, मेरी नज़र एक श्वेत-वर्ण, झांट विहीन, काफी उभरे मुख वाले, स्वस्थ, तेजस्वी और विशालकाय दंड रूपी स्त्री-चुदाई यंत्र पर पड़ी तो मेरी फुद्दी के कोने कोने में मौजूद सनसनी मचने वाले हर एक पाइंट में जोरो से खुजली मचने लगी. चूत का हर एक तंतु इस मूसल से अपने आप को रगड़वाने को होड़ में पसीना पसीना हो रहा था और वो सारा पानी मेरी बुर की झिरी में से तेज़ बहाव के साथ बाहर आने लगा.

अब उसे अपने खड़े लंड को नाभि के छेद से सटा कर अपनी उर्जा देते हुवे होले होले मालिश करना थी.....वो मेरी चूत के ठीक ऊपर बैठ गया और अपने भीमकाय अस्त्र को अपनी दोनों हथेलियों से थमा और आगे से निचे झुकाते हुवे अग्र भाग को नाभि के छेद पर टिका दिया और आँख बंद करके वो उर्जा हस्तांतरण करने लगा. फिर वो मेरी नाभि को घोटने लगा, फिर नाभि के चारो और सुपाड़े से मसलने लगा. उसकी इस लंड घिसी से जहाँ में सातवे आसमान पर पहुँच गई थी तो काम से काम पांचवे आसमान तक तो वो भी पहुँच गया होगा क्योंकि उसे भी काम ज्वर चड़ने लगा था.

साले ने बहुत नाभि चुदाई कर डाली. जैसे तैसे वो वहां से हटा और फिर उसने एक प्याली उठाई जिसमें वो चन्दन घिस कर लाया था. अब थोडा चन्दन अपनी जीभ पर लिया और उसे सीधा नाभि में घुसेड दिया .... मैं सिहर उठी.........कुछ देर जीभ छेद के अन्दर घुमाई और फिर चन्दन में डूबी जीभ पुन: मेरे छेद में आ गली. ऐसा उसने बराबर ९ बार किया. थोडा रुका वो. शायद अपनी उत्तेजना को काबू में करने का प्रयत्न कर रहा था.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:16 AM
Post: #25
RE: मज़ेदार अदला-बदली
घडी भर के विश्राम के बाद अब वो मेरे उभारों कि ओर आया. फिर उसने मेरी नाईटी ऊपर सरकाना चालू की और थोड़ी जद्दोजहद के बाद पूरी निकाल दी. मैंने ब्रा नहीं पहनी थी.....उसकी नज़र दो मोटे मोटे मम्मो पर पड़ी. उसका लंड जो अभी थोडा मुरझा गया था वो पुन: स्पंदित होकर तरंगित होने लगा और झटके से लहू-गुंजीत होकर उर्ध्व-अधोगति करने लगा. पिंकी के बताये अनुसार उसने फिर चन्दन जीभ पर लिया और अबकी बार मेरे एक निप्पल पर लथेड दिया. फिर ऐसे ही दुसरे पर भी लगाया. फिर पहले पर. .........और हाँ लगाते समय वो जीभ को घुंडी की परिधि पर पूरा राउण्ड राउण्ड घुमा रहा था. ऐसा उसने दोनों दानो पर ९-९ बार किया. मेरी घुन्डिया एकदम कड़क हो गई.

उसने चन्दन की प्याली निचे रख दी. अब जो वो करने जा रहा था, बेचारा उसे भी इलाज़ का हिस्सा ही समझ रहा था जबकि मेरी तो उसके बाद जान ही निकल जानी थी.

अब उसने अपने दोनों हाथों में मेरे एक कबूतर को कस के भरा, भींच कर ऊपर कि और उभारा और कंचनजंगा की चोटी सद्रश्य आसमान की और मुंह ताकते मेरे नुकीले छोर को अपने मुंह में गहराई तक भर लिया. अब उसे चूचीं पर लगे चन्दन को चूस चूस कर अपने मुंह में इकट्ठा करना था. पिंकी ने बताया होगा कि चन्दन और मुख-लार, स्तन के संपर्क में आकर दर्दनिवारक अमृत बन जाती है सो वो भी कुछ देर तक अपनी लार को चन्दन लिपटी घुंडी को चूस चूस कर अपने मुख में अमृत इकट्ठा करता रहा.....

फिर उसे पूरा नाभि में भर दिया. गरमा गरम द्रव की अनुभूति अपनी नाभि में पाकर मेरी चूत में एक बार फिर बिजली कौंध गई....................... फिर इसी तरह से वो दूसरी चूचीं को चूसने लगा ....और फिर चूसता ही चला गया....कोई पांच मिनट हो गए वो भोंदू हटा ही नहीं............. और इधर मैं उसके बेलगाम दुग्ध-पान से उपजे अवर्णनीय आनंद में लिपटी मदहोश सी हुई जा रही थी............ पर किसी भी तरह से, अपने को प्रतिक्रिया विहीन बनाये रखना, मेरी प्लानिंग का अहम् हिस्सा था........ वो मग्न हो कर चुसाई के मज़े लेने लगा .....और देखो तो..... वो, मेरे दूध्दू का भुक्कड़....... मदहोशी के आलम में, भूलवश सारा चन्दन ही गटक गया. ............ उसे जब इस बात का अहसास हुआ तो उसने अपना माथा ठोका......... क्या करा मैंने? परन्तु.....लेकिन.....but ......मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होता देख, उसने थोड़ी राहत महसूस की.......वो क्या था कि, अब डाक्टर बाबु को भी इलाज करने में मज़ा आने लगा था और ये उसके बात चेहरे से साफ पता चल रही थी.

अब उसने मुझे धीरे से पेट के बल लिटाया. दोनों अंगूठो में तेल लगा कर एक साइड बैठ गया और गर्दन के नीचे रीड की हड्डी के दोनों और अंगूठे टिकाये और हलके हाथ से नीचे की ओर मालिश करते हुए सरकाने लगा. जैसे ही नाभि के पिछले भाग के एक खास पॉइंट पर दबाव पड़ा, मैं जोर से चीख कर झटके से उछली और पीठ के बल दूर जा गिरी और फिर बेहोश हो गई. योजना आयोग की प्रवक्ता पिंकी रानी से उसे हिदायत मिली ही हुई थी कि, अगर मैं इस तरह से जोर का झटका खा कर बेहोश हो जाती हूँ, इसका मतलब......... मतलब......यानि कि नाभि ठीक जगह बैठ गई है और उसका इलाज़ सफल.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:16 AM
Post: #26
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मेरे शरीर का अब नज़ारा कुछ इस तरह था कि मेरे दोनों पैर चौड़े थे........ चूत, पहलवान के लंड की आस में एकदम मुंह खोले हुई थी. मेरा मुंह, कन्धा, एक ओर का चुच्चा और एक हाथ बिस्तर के छोर से नीचे की ओर ढुलके हुवे थे............... अब वो उठा, मेरी तरफ आया और अपने कटी-प्रदेश के मध्य स्थित झुला झूलते मुलायम चर्म से आच्छादित मांस के सख्त दंड को एक हाथ में थामा और दुसरे हाथ से मेरे ढुलके पड़े यौवन-उभार को नोंचते हुवे, कुछ जल्दी जल्दी घस्से मारे........ कुछ देर पश्चात् उसने मेरे लटके शरीर को उठाया......एकदम फूल जैसे...... क्या मज़बूत पकड़ थी.........वाह........ और फिर आराम से बिस्तर के बीचो बीच रख दिया.

अब उसे आधा घंटा इंतज़ार करना था मेरे होश में आने का. वो मेरे पास बैठ गया. अब उसे अपने गहरे अंतर्मन में दबे कमीनेपन को सतह पर आकर अपना शैतानी रूप दिखाने की, वक़्त ने कुछ लम्हों की आज़ादी प्रदान कर ही दी थी सो वो अपने लंड को कुछ देर मुठियाया और नज़रे मेरे मम्मो पर टिका दी.......तदुपरांत, एक बार मेरी ओर नज़र डाल.......वो मेरे स्तन-अंकुरों पर झुका और झकाझक उन्हें पीने लगा. चूसते वक़्त हाथों से वो दोनों स्तनों की विस्तृत गोलाइंयों को निचोड़ रहा था. शायद पर्वत-शिखर पर उसके अति-व्यस्त मुखारबिंद को 'दो बूँद ज़िन्दगी की' तलाश थी. मेरी घाटी के दोनों ओर गगन की बुलंदियों को स्पर्श करती अट्टालिकाओं पर बारी बारी से आगमित-प्रस्थित होकर उन्हें अपने लबों से बुरी तरह से खंगाल रहा था. पांच पांच मिनट तो दोनों पर्वतों पर गुज़ारे होंगे उसने. उसकी इस अदम्य कारगुजारी के फलस्वरूप दूर नीचे की ओर अवस्थित मेरे दुसरे दर्रे से फिर से एक बार पहाड़ी नाले में घनघना के उफान आया और अविरल तराई की और बह चला.

बहुत देर के बाद वो पहाड़ से उतरा. लेकिन ये क्या ......इस बार तो उसका जानवर मुझे कुछ खतरनाक नज़र आया. उसने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और थोडा सा उमेठ कर मेरे होंठो पर फिराया. फिर बड़ी तेज़ी से उसका सुपाडा मेरे लबों पर स्कीइंग करने लगा, चिकनाई स्वयं सुपाडा-प्रदत्त थी इसलिए अठखेलियाँ नजाकत से चल रही थी. अब तो फिर उसने अगला पैंतरा चला और थोडा होंठ खोल कर अपने स्निग्ध शिश्नाग्र को मेरे मुलायम और मखमली अंदरूनी होंठो पर रगड़ने लगा. क्या बताऊँ.........उसके बाद तो मुख-मैथुन की समस्त तकनीकें आजमाने लगा. अचानक उसे समय-बध्धता का कुछ ख्याल आया और फिर वो कुछ अति-विशिष्ठ क्रिया के संपादन के लिए पहाड़ी नाले की और चला गया.

उठ कर वो मेरी चौड़ी टांगो के बीच लेट गया और जांघो को पकड़ कर उन्नत कर दिया. जैसे ही उसने चौड़ाई को बढाया उसे ताज़े निर्मल जल से लबालब भरे, अभी अभी फूट पड़े चश्मे की झलक दिखाई दी. रह रह कर उस चिकनी, गर्म और गीली दरार के एकदम नीचे स्थित छिद्र से कंचन यौवन जल छलके ही जा रहा था.....छलके ही जा रहा था. और नीचे तराई पर नज़र डाली तो दंग रह गया. नीचे पूरा बिस्तर गीला था. उसने नीचे छुआ, फिर मेरे कंपकपाते भगोष्ठों को स्पर्श किया और वहां की नमी को अपनी उंगली से लपेटा. अब उसने उंगली पर लगे गीलेपन को सुंघा. और सूंघते ही शाक्ड हो गया. बेचारा सु सु समझ रहा था परन्तु वो तो मेरा जूस था. वो एकदम कन्फ्यूज़ हो गया था. उसने मुझे झिंझोड़ कर उठाया. शायद उसे कुछ शक हो गया था.

लेकिन जब मैं नहीं उठी तो वो बोला माँ का भौसडा, जो होगा देखा जायेगा. कामदेव के बाणों से आहत उसका दिमाग वो सब कुछ नहीं सोचना चाहता था जो तथ्य अब आईने की तरह बिलकुल साफ़ था. कोई बेहोशी में उत्तेजित होकर गंगा जमना कैसे बहा सकती है.........शायद मेरा प्रतिक्रिया-विहीन शरीर उसे कुछ और ही संकेत दे रहा था...... तो वो फूल्टू कन्फ्यूज़ था. अब वो घुटनों के बल बैठ गया और अपने लंड को हिलाने लगा. बेचारा बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था, थोड़ी देर हिलाता रहा फिर एकदम से मेरी चूत पर अपना लंड टिकाया और अन्दर घुसेड़ने लगा. मैं दम साधे पड़ी रही और फिर वो मेरे ऊपर आ गया. उसने अपना पूरा वजन अपने हाथो पर दे रखा था ताकि मैं उठ ना जाऊं .

अभी उसका आधा लंड अन्दर घुसा था अब वो धीरे धीरे घस्से मार मार कर पूरा लंड अन्दर घुसाने लगा. मेरी चूत में आग लग चुकी थी. अब योजना के अनुसार, ऐन इसी वक़्त, मेरे दोनों सह-कलाकारों को मंच पर एंट्री मारना थी, जो कब से बाहर छुपे बैठे रहे होंगे और अन्दर चल रही एकल प्रस्तुति का लुत्फ़ उठाते हुए अपनी रास लीला भी सवस्त्र रचा रहे होंगे. अचानक दोनों ने अन्दर प्रवेश किया और मंच के मतवाले खिलाडी की खोपड़ी को एकदम झन्नाटे से अंतरिक्ष की सैर करा दी. जहाँ एक और अमित उन्हें वहां अचानक देख कर हतप्रभ रह गया वहीँ वे दोनों भी अनहोनी घटना को देखे जाने पर, चेहरे पर आने वाले भावों को, जीवन्तता से उभार कर अपने किरदार का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रहे थे....................
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:17 AM
Post: #27
RE: मज़ेदार अदला-बदली
पिंकी दोनों हाथों से अपना सर पकड़े अविश्वास की मुद्रा में मंच के समीप आई. रवि ने उसके पीछे आकर कंधे पर अपना हाथ रख दिया. दोनों थानेदारों द्वारा रंगे हाथों पकड़ लिए जाने पर वो एकदम जड़ हो गया. अभी भी उसका आधा लंड मेरी मस्ती में पिनपिनाती संकरी गली में बेशर्मी से आवारागर्दी करने में तल्लीन था.

वहां चुदाई का दृश्य देखकर दोनों शाक्ड थे. पिंकी मेरी ओर लपकी और चेक किया तो मुझे बेहोश पाया. बड़ी मुश्किल से उसके हलक से कंपकपाती लेकिन गुस्से से भरी आवाज़ में ये बोल फूटे-

पिंकी: अमित.........................ये क्या कर रहे थो तुम...........

वहां का दृश्यावलोकन करके रवि ने भी अपना सर पकड़ लिया....हे भगवान् ये क्या देख रहा हूँ मैं.............

अब जैसे अमित को होश आया और उसने अपना लंड खींचा और पिंकी से याचना भरे स्वर में बोला....मुझे माफ़ करदो, पता नहीं मैं बहक गया था, मुझे खुद पता नहीं ये मुझसे क्या हो रहा था.

पिंकी ने अब प्रचंड रूप धारण कर लिया था........ ऐय्याशी कर रहे थे और क्या........, हे भगवान...... तुम्हारा असली रूप सामने आ गया मेरे.

अमित: पिंकी आधा तो तुम्ही लोगों ने करवाया मुझसे और अब मुझ ही पर इलज़ाम लगा रहे हो. क्यों इलाज करवाया इस तरह से, इसके बोबे चूसो, लंड निकाल कर खड़ा करो, नाभि को चूसो, लंड से मसाज़ करो, उसपर, ये इस तरह मेरे सामने पड़ी थी, मेरे हाथ से बात निकल चुकी थी........मुझे इतना आगे तुम्ही लोगों ने बढ़वाया और अब मुझे कोस रहे हो.

रवि: अमित, ये इसी तरह से हर बार ठीक होती है तो मैंने यही तरीका पिंकी के माध्यम से तुमको बताया, पर तुम तो..............हे भगवान्.

पिंकी: अमित, मैं तुम्हे माफ़ नहीं कर सकती, तुमने वो किया है जिसका कोई प्रायश्चित ही नहीं है...........और वो रोने लगी.

उन दोनों की शानदार अदाकारी देख कर जोर से आती हंसी को भी रोका मैंने.

पिंकी: देखो देखो अभी भी नियत ठीक नहीं, अपने लंड को देखो अभी भी खड़ा है.

वो तुरंत संभला और अपना लोअर पहन लिया और सर पकड़ कर खड़ा हो गया, उसकी निगाहें मुझ पर पड़ रही थी.

पिंकी फिर बोली....अभी जरा सी भी शर्म बची हो ऐसे घूरना बंद करो और दीदी के ऊपर चादर डाल दो. ऐसा लग रहा है कुछ करने नहीं मिला तो अपनी आँखों से ही................और फिर वो रोने लगी.

तभी रवि उसकी और बड़ा और उसके सर पर हाथ रख कर उसे दिलासा दिलाने लगा......जो होना था वो तो हो गया, हम तो लुट ही चुके हैं, अब क्या हो सकता है.

ये लोग अमित का अपराध बोध बड़ा रहे थे.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:17 AM
Post: #28
RE: मज़ेदार अदला-बदली
पिंकी: इसकी पत्नी के साथ ऐसा कुछ हुआ होता तब पता चलता इसे.

अमित: अरे माफ़ी मांग तो ली मैंने अब और क्या करूं.............. चल अगर इसे ही तू सजा मानती है तो मैं ये सजा भुगतने के लिए तैयार हूँ.

और वो आगे बढ कर पिंकी के कपडे निकालने लगा. पिंकी बच कर भागी पर कहाँ बच सकती थी.........रवि ने रोकने की कोशिश की तो उसे ऐसा धक्का पड़ा कि बेचारा बिस्तर पर मेरे पास आ गिरा. उसके कान मेरे मुंह के पास थे.........मैंने धीरे से कहा बहुत बढ़िया रवि........बस थोड़ी सी एक्टिंग और .........

उधर देखते ही देखते पिंकी को नंगा कर दिया उसने. पिंकी ने अपने हाथ से अपने यौवन को छुपा रखा था.

अमित अब रवि के पास आया. रवि देखो यही मेरी सजा है........ कुछ गलत कर रहा हूँ तो माफ़ करना परन्तु बीवी के बदले बीवी. तुम पिंकी के साथ वही सब करो जो मैंने दीदी के साथ किया है.
और यहीं मेरे सामने ही करो, मुझे अपनी बीवी को उस हाल में देखना ही पड़ेगा, जैसा बदकिस्मती से तुमको देखना पड़ा है. प्लीज़ यार, अपने कपडे उतारो और यहीं पर शुरू हो जाओ.

ये सब सुन कर रवि ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की परन्तु उस पर जैसे पिंकी को चुदवाने का जूनून सवार हो चूका था सो उसने रवि के पैर पकड़ लिए. रवि तब भी तस से मास ना हुआ तो अमित ने एकदम से अपना पैंतरा बदला और जोर से चिल्लाया............रवि....अब एक नहीं सुनूंगा किसी की भी, मैं अपराध बोध के साथ जी नहीं सकता, इसलिए तुम्हे ये हिसाब यहीं पर बराबर करना ही पड़ेगा और अभी के अभी.......और फिर उसने रवि को धक्का देखर पिंकी के पास पहुंचा दिया. रवि अभी भी चुपचाप खड़ा रहा.

अमित अब एक कोने में सिमटी सी खड़ी पिंकी के पास गया और उसे एक झटके में उठा कर पलंग पर मेरे बाजू में पटक दिया. फिर पलट कर जैसे ही एक चीख मारी ....रवि............... और अबकी बार रवि ने डरने का अभिनय करते हुए स्वीकृति में अपना सर हिलाया और अपने कपडे निकालने लगा......पिंकी भी बहुत डरने की एक्टिंग कर रही थी......रवि पूरा नंगा हो कर धीरे से पिंकी के पास जाकर खड़ा हो गया. अब अमित बोला - प्लीज़ पिंकी, उसका हथियार चूस चूस कर तैयार कर और ले ले अपनी दीदी पर हुए इस ज़ुल्म का बदला ....

पिंकी ने आदेश का पालन किया और रवि का खड़ा कर दिया.....रवि को अमित ने अब पिंकी के ऊपर आकर आकर चुदाई करने का इशारा किया .....रवि ने पिंकी के ऊपर आते हुए अपने फुंफकारते नाग को पिंकी की संकरी सी पिटारी में डाल दिया. नाग महाराज तो जैसे अन्दर घुसने को आतुर ही थे, एक ही प्रयास में पुरे के पुरे पिटारी में. अब रवि ने अपना जोर हाथों पर ले लिया परन्तु अब क्या करे वो इस सोच में पड़ गया. अमित ने तो बस यहीं तक ही किया था, क्या घस्से मरे या नहीं.

तभी अमित ने रवि की पीठ पर हाथ फेरा और बोला क्या बात है रुक क्यों गए. अब किसका इंतज़ार है, शुरू हो जाओ भाई.

उसका इशारा होते ही रवि ने हौले हौले पिंकी के टार्गेट पर निशने लगाना चालू कर दिया. हर निशाना सही जगह पर लग रहा था.

अपनी बीवी को चुदते हुए देखते देखते अमित का लंड यकायक करंट से भर उठा. वो बिस्तर पर खड़ा हुआ और फिर अपना लोवेर नीचे खिसका दिया. मूसल महाराज ने पुन: शक्ति अर्जित कर ली थी और अबकी बार उसे रोकने वाला कोई भी नहीं था. वो जोश में आने लगा और उसका हाथ उसके शाही लंड की ओर बढ़ा, यक़ीनन उसे दिलासा दिलाने के लिए कि, अब तेरी बारी भी आने वाली है और वो उसे मसलने लगा.

पिंकी ने जब अमित को बेशर्मी से अपना लौड़ा मसलते देखा तो उसने इशारे से रवि को बताया की देखो अमित को. रवि ने चुदाई रोक कर अमित की ओर देखा. अमित बड़ी ही बेशर्मी से अपनी खींसे निपोरकर बोला- लगे रहो मुन्ना भाई अपने काम पे, और मुझे भी अब अपना काम करने दो, यह कहकर वो नीचे झुका और मेरी चूत पर अपना लंड टिकाते हुवे उसे मेरे अन्दर डाल दिया और वो धीरे धीरे मुझे चोदने लगा. उसकी इसी हरकत का बेसब्री से इंतज़ार था मुझे........... मेरी तो अब जान में जान आई.

रवि और पिंकी ने ये देखा तो वो चौंक गए. पिंकी ने अमित से तीखा सवाल किया - अब ये फिर क्या करने लगे तुम.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:17 AM
Post: #29
RE: मज़ेदार अदला-बदली
अमित: जब सजा भुगत ही रहा हूँ तो कम से कम अपराध तो पूरा कर लूं, डाल तो दिया ही था मैंने, अब क्या फर्क पड़ता है, पूरी चुदाई की सजा भी वही बनती है जो इस वक़्त मैं भुगत रहा हूँ. इसलिए बातें का कम और काम ज्यादा. चलो रवि चलो, ठोको मेरी बीवी को फिर से.

पिंकी: पर अमित मुझे क्यों सजा मिल रही है, अपराध तो तुमने किया है.

अमित: क्यों री, पांच मिनट से अमित तुझे चोद रहा है और तुझे अभी भी ये सजा ही लग रही है, तू गरम नहीं हुई अभी तक और मज़ा नहीं आ रहा तुझे.

पिंकी: अमित तुमको तो पता ही है मेरा, बिना फॉरप्ले के मैं गरम कहाँ होती हूँ, अभी ये चुदाई तो एक सजा ही है.........................

अरे उसने तो ये बात बोलकर एकदम से मामला ही उल्टा दिया. अब अमित ने क्या बोलना है.........वही बोलना है जो हम उससे बुलवाना चाहते हैं.

अमित: रवि, क्या करते हो, भाई, उसकी सुक्खी-सुक्खी क्यों मार रहे हो. तुम उसको गरम भी करो, देखो तुमको अपनी पत्नी देकर कोम्पेंसेट कर रहा हूँ, तुम कम से कम पिंकी का तो थोडा ख्याल रखो ना.

रवि ने कहा- अब ये भी करना पड़ेगा............. ठीक है........और फिर वो पिंकी पर छा गया. उसके बोबे और होंठो पर टूट पड़ा.

इधर अमित ने भी धक्के लगाने चालू कर दिए और मैं अमित के लंड के दमदार घस्से अपनी चूत में खाकर धन्य हो रही थी......मैं मज़े से चुद रही थी भोंदू महाराज से और अपनी योजना के पूर्ण सफल हो जाने पर मन ही मन इतरा भी रही थी.

पांच मिनट में ही रवि और पिंकी ढेर हो गए और एक दुसरे की बाँहों में समां गए.

इधर अमित भी फुल पॉवर में मुझे चोद रहा था......मुझे अमित के झड़ने तक अपना झड़ना रोके रखना था....

कुछ देर की तगड़ी मारामारी के बाद अमित तनिक सा अकड़ा और ये संकेत था मेरे लिए और मैंने भी अपनी पतंग को एकदम से ढील दे दी. दोनों की पतंगे सुदूर आसमान में एक दुसरे से गुथ्थम गुथ्था होकर बड़ी तेज़ी के साथ अपनी मंजिल की ओर बही चली जा रही थी. दोनों के दोनों गुरुत्वाकर्षण के किसी भी आभास से परे बस उड़े चले जा रहे थे.............

अब उसने जोर से चीख मारी और अपनी पिचकारी चला दी.........

उसकी एकदम गरम और तेज़ पिचकारी जैसे ही मेरे गर्भाशय के मुंह पर महसूस हुई मेरी भी छूट होने लगी और मैं भी चिल्ला चिल्ला कर झड़ने लगी और अमित को कस कर अपने गले से चिपका लिया.

पिंकी और अमित हमें देख रहे थे.........मैं तो मानो स्वर्ग में थी.........अमित को कस के भींच रखा था.......

अब मुझे अपनी बेहोशी से बाहर आने का अभिनय करना था, सो आँखे बंद किये किये ही में बुदबुदाने लगी- ओह रवि,....... क्या चोदा है तुमने आज मुझे,............ ऐसा मज़ा तो कभी नहीं आया,.................. तुमने ये आज क्या किया.

अमित को मेरे मुंह से रवि का नाम सुन कर एक झटका लगा....... अरे ये तो मुझे रवि समझ रही थी.........और अभी तो इसकी अदालत बाकि है .....अब वो फिर डरा कि जैसे ही मुझे ये सब पता चलेगा फिर उसे टार्चर होना पड़ेगा.

अब जैसे ही मैंने आँख खोली अपने ऊपर अमित को हटते पाया. उधर रवि और पिंकी भी एक दुसरे में समाये हुए थे.......रवि ने भी अपने लंड को पिंकी खोह में से खींच कर निकला जो दोनों के काम-रस से सराबोर था.

मैं चीखी, ये क्या हो रहा था और ये अमित मेरे साथ क्या कर रहा था.......छि छि छि छि .......और रवि और पिंकी तुम दोनों भी ये ............हाय राम ...........और मैंने एक चादर अपने ऊपर खींच ली और आँख बंद करके रोने लगी.
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
08-30-2012, 09:17 AM
Post: #30
RE: मज़ेदार अदला-बदली
रवि मेरे पास आया कि मैं तुम्हे सब बताता हूँ.............मैंने थोड़ी देर तक बहुत सीन क्रियेट किया और फिर जब तीनो ने हाथ जोड़ कर सिर्फ सुन भर लेने की याचना की तब कहीं बमुश्किल उनकी बात सुन ने के लिए राज़ी हुई.

उन तीनो ने मिलकर सारी घटना बताई.............और पूछा कि अच्छा बताओ अब किसका दोष है इसमें......मैंने सर पकड़ लिया........अमित ने माफ़ी मांगी और कहा दीदी जो होना था सो तो हो गया और फिर हम सब तो घर के ही लोग हैं.........एक दुसरे के हमराज़....बाहर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा......बोलो रवि..... पिंकी...... ठीक कहा ना मैंने, दोनों ने हाँ में सर हिलाए, अरे उनको तो हिलाना ही थे...........पिंकी ने धीरे से ओ शेप में हाथ बनाते हुवे इशारा किया कि मान गए दीदी तुम्हे...........

मैंने धीरे धीरे नार्मल दिखने की कोशिश की.........कुछ देर की चुप्पी के बाद मैंने कहा..........चलो जो हुआ सो हुआ ....परन्तु मेरा एक बहुत बड़ा नुक्सान हो गया इन सब में.............

अमित: दीदी,....... नहीं,.......... आप बोलो मेरी गलती थी ना,................. आप आदेश करो,........ मैं कुछ भी कर सकता हूँ,........... आपका क्या नुक्सान हुआ है............

अब मैं शर्माने लगी.....नहीं नहीं जो हुआ सो हुआ, अब क्या किया जा सकता है...............

पिंकी: बोलो दीदी, अमित बोल तो रहा है बेचारा, देखो अभी भी तुम्हारे लिए इसके दिल में कितना रेस्पेक्ट है........तुम बताओ तो उसे............

मैं: पर वो सुन कर रवि को बुरा लग सकता है.............

रवि: देखो रोमा, मैं अमित के न्याय करने के तरीके पर फ़िदा हो गया. अपनी गलती के लिए इसने अपनी पत्नी मुझे सौंप दी, तुम मेरी चिंता छोडो और बताओ.

अब मेरी बाज़ी का अंतिम पत्ता निकालना था मुझे और मैंने वो निकाल कर फेंका..........

मैं: आप सब ने सुना होगा ना.....मैं जब झड रही थी तो क्या बडबडा रही थी.........कि मुझे आज तक इतना मज़ा नहीं आया, मुझे होश आते ही मैं झड़ने के करीब थी और मैं बंद आँखों से अमित को रवि समझ रही थी..............पर वो बात सच थी कि मुझे आज से पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया.......अब इतना मज़ा चख लिया है......रवि प्लीज़ तुम बुरा मत मानना.....पर अब शायद ही मुझे इतना मज़ा कभी आएगा......मुझे ये स्वाद चखा कर अमित ने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, अब कैसे मिलेगा मुझे ये परमानन्द . क्यों अमित क्यों.......मुझे क्यों ये स्वाद चखाया, मैं रवि से सम्पूर्ण संतुष्ट थी, मुझमे एक नयी प्यास जगा कर जिंदगी भर के लिए प्यासा छोड़ दिया है..............ये नुक्सान हुआ है.............

मेरी बात सुनकर तीनो सकते में आ गए............पिंकी अपने शानदार अभिनय को जारी रखते हुए अविश्वास से मुझसे बोली- तो क्या दीदी तुमने अमित को माफ़ कर दिया, हे भगवन तेरा बहुत बहुत शुक्रिया, वरना मैं ये अपराध बोध लेकर केसे जीती.

अमित को तो जैसे अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ- बस इतनी सी बात, और फिर रवि से बोला- अब तुम बोलो क्या बोलते हो, क्या अपनी पत्नी की ख़ुशी के लिए मुझे उसे सुख देने की इज़ाज़त दे सकते हो.......देखो बदले में मैं तुम्हे भी कुछ दे रहा हूँ............पिंकी, तुम अपने जीजू के साथ खुशियाँ बाँट सकती हो क्या..............

पिंकी ने अपनी नज़रे शर्म से झुका ली.............अमित फिर बोला देखो रवि, तुम्हारी प्यारी साली तुम्हारी पूरी घरवाली बन ने को तैयार है............दोस्त क्या कहते हो.....हाँ कह दो ना..........वैसे मेरी पिंकी भी रोमा दीदी से कुछ कम नहीं है.....घाटे में नहीं रहोगे...............

ये सुन कर रवि ने मेरी ओर प्रश्नवाचक निगाह डाली.................मैंने अब हंस के रवि को स्वीकृति दे दी........

"जाओ रवि, मैं अपनी प्यारी सी छोटी बहन तुम्हारे हवाले करती हूँ.............तुम्हे उसका साथ पसंद तो आएगा ना........"

अब शर्म से नज़रे झुकाने की बारी रवि की थी.............बिलकुल लड़कियों की तरह शर्मा कर बोला........हाँ पिंकी मुझे बहुत पसंद है.........

अमित: बस तो हो गया आपका मसला हल दीदी. अब तुम्हारा नुक्सान पूरा करने की जिम्मेदारी पूरी की पूरी मेरी.............

मैं: पर अभी भी एक गड़बड़ कर रहे तो अमित तुम.........

सब हैरान कि अब क्या रह गया है..............

मैं: अब मैं तुम्हारी दीदी नहीं.........अब तुम्हारी रोमा डार्लिंग हूँ............बुलाओ मुझे ऐसे..........

और सब जोर से हंस पड़े...........................................

और फिर हम चारों ने अगले दो दिन, बिना रुके, इस "मज़ेदार अदला-बदली" का भरपूर आनंद उठाया..........
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
Post Thread Post Reply




Online porn video at mobile phone


mamta kulkarni boobborth nudemahima chaudhary asslund khdaa ho jada to kase bithayeimogen poots nuderimi sen boobsaif ali khan penisrimi sen fuckbadi Sali shweta ki chudaiwww.meri lambi samuhik chudayihaley webb sexcindy crawford nude pussy“innocent OR shareef” “bhabi OR bhabhi” “gaand” “surakh OR suraakh OR hole” “smell”kavita ek sex machine sexy kahanineha julka nudelakshmi rai armpitsmarin hinkle sexJavine ke aag sex videos HD catherine dent nudeGuruji ke ashram me jabardasti chudayi huebiwi ko chote kapde phena ke chodvaya hindi sex storybhai se pyar kiya sexy incest storiesnude scenes actres malayalam seemavalery bertinelli nudejoey lauren adams nudexxx haste metun ladkekayla ewell toplessbahan ki shadi bhai se celeb shwetaleila lopes nudebahen.ke.chut.ma.lada.is.seelping.bhap ne beti ki peshab pisania mirza nip slip picsleila lopes nakedbete ka garam virya meri mukh pewendy crewson nudenikki webster nakedxxx new girl hd ek chut me 4land ghusnacharlotte lewis nudemayrin villanueva nudejaid barrymore nudenude jewel staiteDidi boli meri jaan chod bhai chod chod re chut bhosda bna deshriya sex storymelina perez nip slipkeri hilson upskirtsasur sexy storybap biti ki gahdia storiedshashi naidoo nudealyson hannigan nip sliptina karol nakednia peeples nudehelen chamberlain upskirtssamantha mumba nudesamantha janus toplesstamara beckwith toplesssexy story in oriyapantiless cheerleadersrosa acosta nudemere chote bhai ke samne mere pati kabhi mere chuche dabatebarbara bermudo nude  handsome looking Sudesh. When he saw Namita his face lit up like a 100  juliette lewis fakeskristen johnston nipplesolga fonda nude  मेरी सलवार का नाडा खोल दिया.  chodnne ke want Nikki chile vidionagi chodvani vartadaniela ruahnudegina philips nakedtulip joshi nude picslara dutta oopsgloria velez nudeDesi incest chudai kahani bhai maa behn aaahhh uffff long story