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मस्तानी बहन
09-26-2012, 05:59 PM
Post: #1
मस्तानी बहन
मेरा नाम मोहित है (बदला हुआ नाम) मेरी उम्र 25 साल और, इस कहानी के लिए मैं अपनी छोटी बहन रुचि (बदला हुआ नाम) को धन्यवाद देता हूं जो खुद इस कहानी का हिस्सा है और उसने भी हिन्दी में इस कहानी को लिख़ने में मदद की।

अपनी बहन के बढते हुए शरीर को ना जाने कितनी बार लोग बार बार चोरी छुपे देख लेते है ये हर एक व्यक्ति जिसके जवान बहन हो, वो अपने जीवन के अनुभवों से जान जाता है जब भी उसकी बहन, सगी सौतेली, मामा की लडकी, चाचा की लडकी या खुद की सगी बहन जब जवान होने लगती है तब उसके बढ्ते हुए शरीर को चोरी चोरी ना जाने कितनी बार देखते हैं, आदमी के इरादे चाहे कितने भी साफ़ हों पर ये आँखे उस जगह चली जाती हैं जहां उन्हे नही जाना चाहिये, जैसे कभी उनकी धीरे-धीरे बढती हुइ निप्पल की गाँठे जब स्तन का आकार लेने लगती हैं और उनकी शर्ट या अन्य कपडे के अन्दर से उनके कच्चे उभार उनके जवान होने की चुगली करने लगते हैं तो अनायास ही आदमी की नजरे उसके सीने पर चली जातीं हैं और मन करने लगता है कि उन कच्चे आम को कैसे चखा जाए और थोडी ही देर बाद वो आदमी मन ही मन शर्मिन्दा होता हैं कि वो ये क्या सोच रहा हैं। कई बार बहन लापरवाही से बैठी हुइ होती है और भाइ की नजरें उसकी स्कर्ट के अन्दर तक पहुंच जाती है जहां से उस की जांघों के बीच में फ़ंसी हुई अण्डरवीयर को उसकी आंखे तुरन्त ही ढूंढ लेती हैं और अनायास ही उसका मन उसके छेद के बारे में सोचने लगता है कि उस छेद में कितनी गहराइ हो सकती है, उनके गोल गोल कूल्हों पर नजर चली जाती है, तो इच्छा करने लगती है कि इन कूल्हों को नंगा करके सहलाने में कितना मजा आगेगा। ये सच है कि कोइ भाइ अपनी बहन को इस तरह से नही देखना चाहता लेकिन आंखे तो आंखे हैं, कोइ अपने मन को चाहे कितना भी समझा लें या कितना भी पश्चाताप करें, जब भी मौका मिलता हैं वो कभी भी ऐसे मौके को नही चूकता है।

ऐसा नही है कि भाइ ही ये सब देखा करते हैं यही स्थिती सभी बहनों के साथ भी है जब भी लडके थोडी टाइट जीन्स या कपडे पहनते हैं तो लडकियों की नजरें तुरन्त उनके जांघों के बीच में चली जाती है और उस खास जगह का फ़ुलाव नापने लगती है जैसे लडके लडकियों के सीने का फ़ुलाव देखते हैं इसी तरह लडकियां भी लडकों की नेकर या लूंगी के अन्दर देखने का कोइ भी मौका नही चूकती ऐसा नही है (ये मुझे मेरी बहन से ही पता चला) कि लडकियों का स्वभाव ऐसा होता है उनकी भी नजरें अनायास ही उस जगह पर चली जाती हैं वो भी मन ही मन शर्मिन्दा होती हैं लेकिन चंचल मन हमेशा धोखा दे जाता है।

ये सब देखने के बाद भाइ और बहने सोचती हैं कि हमें ऐसा नही करना चाहिये ये गलत है, और ये बात सचमुच में गलत है, संस्कृति हमे इस बात की कतई इजाजत नही देती कि भाइ और बहन में इस तरह के सम्बन्ध बनें, क्योंकि भाइ-बहन का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है और इस पर कलंक नही लगना चाहिये, समाज में बदनामी लोगों के ताने और ना जाने क्या क्या बातें हो जाती हैं। इसलिये इस गर्त में नही गिरना चाहिये पर हर जगह अपवाद तो होते ही हैं और मोहित और रुचि उनमे से एक हैं।

ये कहानी सन 2000 से शुरु होती है जब मोहित और उसकी बहन दोनो ही कच्ची उम्र के थे 11 वीं क्लास में मोहित और उसकी बहन आठ्वीं क्लास में थी उस समय मोहित के मन में कोइ गन्दा खयाल या पाप नही था सामान्य भाइ बहन की तरह दोनो एक ही स्कूल में जाते थे एक अच्छे भाइ बहन की तरह दोनो एक दूसरे का खयाल भी रखते थे। मोहित ने अपनी बहन के बारे में कभी गलत नही सोचा था हालांकि उसे सेक्स के बारे में बहुत जानकारी थी जो उस समय उसकी उम्र के हिसाब से काफ़ी थी। जब वो अपने दोस्तों के ग्रुप में बैठता तब वो अपनी क्लास की लडकियों और मैडम के बूब्स के बारे में बातें करता था और जिसके जितने बडे होते वो ही उसके स्कूल की हिरोइन होती थी। सभी लडके उस लडकी या मैंडम के बूब्स के बारे में तरह-तरह की मनगढ्न्त बातें करते थे और और उन्हे याद करके वो भी घर में आ कर मुठ मार लेता था (हस्तमैथुन), उस समय इन्टरनेट का भी इतना प्रचलन नही था लेकिन उनके स्कूल में कम्प्यूटर की क्लासें भी लगती थी इसलिये इन्टरनेट का थोडा बहुत जानकरी उसे हो चुकी थी। और वो अपने एक खास दोस्त के साथ कई बार इन्टर्नैट पर अश्लील साइटें देख चुका था।
उसकी बहन रुचि हल्के भरे हुए गदराए शरीर की लडकी है इसलिए वो कई बार उसे चिढाने के लिए मोटी भी कहता था वैसे वो मोटी नही है बस उसका शरीर भरा भरा सा था और शरीर के खास जगह भराव आना अभी शुरु ही हुआ था।
उस समय मोहित एक साथ एक ऐसा वाकया हुआ जिसने उसकी जिन्दगी ही बदल दी उसने गलती से उसे एक बार नहाते हुए देख लिया, उसने पहली बार रुचि के उभरते हुए कcच्ची उम्र के भराव वाले सीने को देख लिया सर्दी के कारण घर में लोग अक्सर घर के पिछ्ले हिस्से में नहाते है वहां पर धूप भी आती रहती है। वैसे पीछे का हिस्से में दीवार उंची थी और गेट बन्द करने के बाद और किसी भी जगह से कुछ नही दिखाइ देता लेकिन उस दिन रुचि खिडकी का पर्दा लगाना भूल गई और मोहित ने उसे पहली बार उस स्थिती में देखा वो 24 दिसम्बर का दिन था और रविवार था मोहित को आज भी वो दिन अच्छी तरह से याद है रुचि अपनी मस्ती में नहा रही थी और उसे नही पता था कि मोहित उसे देख रहा है।

वैसे मोहित ने उसे 1 मिनट से भी कम समय के लिए देखा था लेकिन वो एक मिनट मोहित और रुचि दोनो की जिन्दगी बदल देगा ये उन दोनो ने नही सोचा था वो अपने गीले शरीर को पोंछ रही थी और उसके बाल सूखे हुए थे उसने अपने बालों को नही धोया था उसके निप्पल के भूरे रंग के घेरे उभरे हुए थे और ऐसा लग रहा था जैसे जैसे उस जगह पर सूजन हो रही हो। उसके स्तन आधे कटे हुए सन्तरे से भी छोटे थे उसे देख कर तो जैसे मोहित सुन्न रह गया, उसके शरीर में अजीब सी सनसनाहट होने लगी एसा लगने लगा जैसे शरीर में कुछ चल रहा है जब उसने अपने कपडे पहने तो ऐसा लगा कि वो किसी सपने से जागा हो।


रुचि जब कपडे पहन कर अन्दर आइ तो उसे बहुत पछ्तावा हुआ कि उसने रुचि को ऐसे क्यो देखा। क्योंकि उसके चेहरे की मासूमियत और भाइ बहन का रिश्ता याद करके उसे बहुत अजीब सी ग्लानि महसूस होने लगी उसे ऐसा लगने लगा जैसे उसने जिन्दगी कि बहूत बडी गलती की हो वो कई दिनों तक पछ्ताता रहा ये बात आइ – गई हो गई।

उस बात के लगभग 5-6 दिन बाद एक रात को मोहित अपने कमरे में हस्तमैथुन कर रहा था और आँखे बन्द करके सोच रहा था तभी उसे रुचि की याद आइ और उसकी छोटी छोटी अनछुइ गोलाइया याद आने लगी उसने उस द्र्श्य को अपने मन से बहुत निकालने की कोशिश कि लेकिन रुचि की छोटी-छोटी गोलाइयां मोहित के दिलो दिमाग पर बहुत बडा असर कर गई थी, और वो मुठ मारता रहा और मुठ मारने के साथ रुचि के लिए हर उस तरह की कल्पनाएं करने लगा जो वो खुद भी नही सोच सकता था वो अपनी ही बहन को उन अश्लील साइट्स की हिरोइनो की तरह देखने लगा, और उसकी कल्पनाओं मे उसकी मासूम बहन एकदम नंगी खडी थी और उसके साथ वो हरकतें कर रही थी जो एक भाइ और बहन आपस में करने के लिए सोच भी नही सकते, और ये सोचने लगा की वो रुचि के साथ संभोग कर रहा है और ऐसी कल्पनाएं जो कभी भी एक भाइ को अपनी बहन के लिए सपने में भी नही सोचनी चाहिये और सोचते सोचते उसके हाथ की स्पीड बढती गई और उसका वीर्य बारिश की बूंदो की तरह झटके के साथ निकल गया।

वीर्य निकलने के एक दो मिनट बाद ही उसे होश आया की वो रूचि के लिए क्या सोच रहा था अपनी प्यारी छोटी बहन के लिए। उसका मन वो बात सोच कर खट्टा हो गया वो मन ही मन बहुत पछताया लेकिन अब वो क्या कर सकता था उसने अपने आप को मन ही मन समझाया और फ़िर से ऐसा नही सोचने की की कसम खाइ लेकिन फ़िर भी जब कभी वो हस्तमैथुन करने लगता उसके खयालों में रुचि आ ही जाती थी। मैं अक्सर रोज ही हस्तमैथुन किया करता था और अक्सर रुचि उसके विचारों मे आ जाती थी। और जब भी रुचि उसके सामने आती थी तब वो उससे ठीक से नजर भी नही मिला पाता था। उसे ऐसा लगता था जैसे रुचि उसके बारे में सब जानती है कि वो उसके लिए क्या सोचता है।
लेकिन रुचि को थोडी पता था कि मोहित उसे किस हालत में देखा है और voवो हस्तमैथुन करते समय उसके बारे में क्या सोचता है वो तो जब भी खेलने के मूड में होती मोहित के पास आ जाती एक मासूम बहन की तरह मोहित के साथ सामान्य हरकतें करती और उसे छूते ही मोहित के शरीर में झुरझुरी सी छूट जाती थी्।


इस बात को इस बात को पाँच महीने बीत गए और मोहित उस बात को भूलने की नाकाम कोशिश करता रहा और मौका मिलते ही रुचि के शरीर को देखने का सामान्य अवसर वो नही चूकता था, रुचि के अधखिले छोटे छोटे स्तन अब आकार में आने लगे थे और मोहित उन्हे देख कर और ज्यादा बैचैन होने लगा था। हर समय वो उसके स्तनों को देखने के लिए बेताब रहता था ये जानते हुए कि वो उसकी छोटी बहन है

उस समय गर्मी की छुट्टियां आ गई थी और उनकी मम्मी को बैंक की तरफ़ से नैनीताल घूमने के लिए पैकेज मिला उनके पापा जा नही सकते थे और इसी कारण मम्मी मोहित और रुचि को नैनीताल ले गई वहा पर मम्मी के आफ़िस के भी 2 लोग अपने परिवार के साथ आए हुए थे और एन्जाय कर रहे थे एन्जाय तो मोहित भी अपने नए बने हुए दोस्तो के साथ कर रहा था पर सब लोग पापा को मिस कर रहे थे।
पहली रात सब लोग एक रूम मे सो गए। थकान के कारण जल्दी ही नींद भी आ गई अगले दिन हम लोग घूम फ़िर कर आए और खाना खाने के बाद उनकी मम्मी अपने बैंक वाले लोगों के साथ बातें कर रही थी और मोहित की भी एक लडके ज्यादा पटने लगी थी जो लगभग उसकी ही उम्र का था मोहित उसके साथ बातें कर रहा था तभी होट्ल के बाहर कुछ लड्कियां दिख़ाइ दी तो वो लडका बोल पडा –
देख यार कितने मस्त माल है। ये मिल जाए तो होटल में आने का मजा ही आ जाए।

वास्तव में वो लडकियां सुन्दर थी और देखने लायक थी उन लोगों ने बातचीत की और बातचीत मे उनका टापिक सेक्स की तरफ़ भी मुड गया, और उसका दोस्त अपने सेक्स की कहानी उसे बताने लगा जिन्हे सुन कर मोहित गरम हो गया।
थोडी देर बाद सब सोने के लिए चले गए उस रात मोहित अपनी मम्मी और रुचि के साथ एक ही रूम मे सोया, आज रुचि उसके बगल में ही सो रही थी और मोहित की आंखों से नींद गायब थी उसने अपने दोस्त के साथ जो सेक्स की बाते की थी उसका असर उसके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था और रात को अचानक मेरा लण्ड खडा हो गया और मैं उसे सहलाने लगा हम तीनो एक ही बिस्तर पर ही सो रहे थे लण्ड को सहलाते हुए ही अचानक उसे फ़िर रुचि का नहाने वाला सीन याद आ गया और मोहित की धडकने बढ गई क्योंकि रुचि उसके ही बगल में सो रही थी और उसने उसके ओर करवट ले रखी थी। हमेशा की तरह एक बार फ़िर शैतान मोहित के दिमाग पर हावी हो गया और वो अन्धेरे में उसकी तरफ़ देखने लगा हांलाकि उसे साफ़-साफ़ कुछ दिखाइ नही दे रहा था लेकिन उसे अन्धेरे मे देखने का का थोडा अभ्यास हो गया था और वो रुचि का चेहरा देखने लगा।

रुचि एकदम शांत और निश्च्ल थी सोते हुए वो एकदम मासूम गुडिया जैसी लग रही थी, उसके मन में कोइ छ्ल कपट या सेक्स जैसी बातें नही थी पर ना जाने क्यों मोहित के सिर पर भूत सा सवार हो चुका था और एक बार फ़िर वो अपनी गन्दी हरकत पर उतर आया उसने बडी सावधानी से अपना एक हाथ उसकी एक चूची की ओर बढा दिया उसकी चूची पर पहले उसकी उंगलियां पडी उंगलियां पडते ही मोहित का दिल बहुत जोर जोर से धडकने लगा उसके शरीर की हालत वैसी ही हो गई जैसे पहली बार रुचि को नंगी देख कर हुइ थी उसने अपनी पूरी हथेली उसकी चूची से टच कर दी, उसने अपनी टी शर्ट के अन्दर समीज पहन रखी थी उसकी चूचिया एकदम गरम सी महसूस हो रही थी और इतनी नरम लग रही थी जैसे किसी गुब्बारे को फ़ुला कर उसमे थोडी सी हवा निकालने पर नरम हो जाता है।

वो रह – रह कर उसके सीने को बहुत देर तक सहलाता रहा उसका लण्ड तन कर लोहे जैसा हो गया दिन भर की थकी हुइ रुचि एकदम निढाल पडी हुइ थी उसे कुछ भी नही पता था कि उसके साथ क्या हो रहा है, इधर मोहित अपने लण्ड को हाथ मे लेकर सहलाने लगा और दूसरे हाथ से रुचि की चूचियों पर हाथ फ़ेर रहा था थोडी देर बाद उसने हस्तमैथुन किया और सो गया अगले दिन उसे बहुत अजीब सा फ़ील हुआ कि उसने रुचि के साथ रात को किस तरह की हरकत की थी लेकिन अब हवस का वो शैतान जाग चुका था जो एक बहन और भाइ के बीच बने उस कच्चे धागे को तोड देता है अब मोहित का मन रुचि के उपर भटकने लगा। नैनीताल से आने के बाद वो रुचि के साथ ज्यादा से ज्यादा रहने की कोशिश करने लगा और जानबूझ कर उसके शरीर को छूने की कोशिश करता था लेकिन उसका ये खेल ज्यादा दिनों तक नही चल पाया क्योकि मेडिकल कि तैयारी के साथ पढाने के लिए उसके पापा ने मोहित का एडमिशन कोटा मे करवा दिया। उसका रुचि के साथ कुछ भी करने का सपना अधुरा रह गया.


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09-26-2012, 05:59 PM
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RE: मस्तानी बहन
कोटा में उसने अपनी 12वीं क्लास की पढाइ के साथ कोचिंग भी ली वहां पर उसकी एक गर्लफ़्रेण्ड भी बनी जो उसकी ही क्लास में पढती थी उसका नाम एकता था। वह दिखने में एकदम साधारण सी लडकी थी, उसकी आंखें भूरे रंग की थी। वो मोहित की ही उम्र की थी और देखने में गोरी थी। वह मोहित से जब भी मिलती तो मुस्कुरा देती ।

ऐसे ही दो महीने बीतते गये और उनके पेपर के लिए कुछ महीने शेष रह गये। तब मोहित को भी अन्य विद्यार्थीयों की तरह पेपर में अच्छे नंबर लाने के लिए एक ट्यूशन अलग से लेना पडा। एक दिन मोहित थोड़ा सा बिमार पड़ गया और वो उस दिन कोंचिग क्लास नहीं ले पाया। उसकी आदत थी कि वो कोचिंग शुरु होने से पहले ही वहाँ पहुँचकर अपने दोस्तों के साथ थोड़ी यहाँ-वहाँ की बातें करता था।

अगले दिन रोज की तरह जब मोहित ट्यूशन गया तो उसके दोस्तो ने बताया कि कल ही उसके स्कूल की एक लड़की ने यहाँ ऐडमिशन लिया है और उसका नाम एकता है।ये सुन कर मोहित की बांछें खिल गई और वो सोचने लगा कि काश ये लडकी पट जाए तो कितना मजा आए ।

कुछ ही देर हुई थी कि वह भी आ गई आ गई। मोहित ने उसे वहाँ देखा तो देखते ही रह गया, वह नीले कलर की जींस और सफ़ेद शर्ट पहन कर आई थी उसने पहली बार उसे ऐसी ड्रेस में देखा था वरना हमेशा स्कूल ड्रेस में ही देखा करता था। मोहित ने उसे देखते ही हाय किया लेकिन वो उसे अनदेखा करते हुए यहाँ-वहाँ देखने लगी। जब क्लास खत्म हो गई और सब वहाँ से जाने लगे तो एकता ने मोहित को पीछे से रोका और आवाज दी। मोहित वहाँ ही रुक गया ।
उसने कहा- आप भी यहाँ पढ़ते हो ?
तो मोहित ने कहा- हाँ !

उसने कहा- कबसे ?
मोहित ने कहा- बहुत दिन से ।
इसी तरह उनकी बातों का सिलसिला चल निकला और वो रोजान ट्यूशन से पहले आकर बातें करते। बातों ही बातों में एकता ने मोहित को बताया कि उसका एक ब्वायफ़्रेण्ड भी है लेकिन आजकल उसका किसी और लडकी से चक्कर चल रहा है और उस लडके ने उस पर ध्यान देना भी बन्द कर दिया और बात भी नही करता।

मोहित उसकी बेबाकी पर दंग रह गया क्योंकि कोइ लडकी इस तरह से शायद ही अपनी निजी बात बताती होगी मोहित को ये सुन कर बहुत धक्का लगा कि उसके कोइ ब्वायफ़्रेण्ड भी है लेकिन ये सुन कर तसल्ली हुइ कि उसका अभी कोइ चक्कर नही चल रहा है
एक दिन अचानक मोहित के पास एकता का फोन आया और उसने मोहित से कहा कि उसके कुछ नोटस खो गये हैं और वो अपने नोटस ले कर उसके घर पहुच जाए। मोहित कुछ ही देर बाद उसके घर पहुँच गया ।
एकता ने दरवाज खोला और अन्दर आने के लिए कहा वो अन्दर जा कर बैठ गया थोडी देर में एकता चाय लेकर आइ। और दोनो चाय पीने लगे।
चाय पीते हुए मोहित ने उससे पूछा- तुम्हारे घर में और कौन कौन रहते हैं?
उसने कहा मैं, पापा और मम्मी, और एक दीदी जिनकी शादी हो चुकी है।
तो मोहित ने पूछा अभी घर में कौन कौन है?
तो उसने कहा- मम्मी पापा दोनो सर्विस में है शाम को आ जाते हैं!

इसी तरह दोनो इधर उधर की बातें करने लगे और जब चाय खत्म हुइ तो मोहित उसे अपने नोट्स निकाल कर देने लगा तो एकता कहा -

मुझे नोट्स नही चाहिए मै तो सिर्फ़ तुमसे बातें करना चाह्ती थी इसलिए तुम्हे बुलाया था।

मोहित को ये जान कर बडी खुशी हुइ कि उसने उसे अपने घर पर सिर्फ़ बातें करने के लिए बुलाया, उस दिन के बाद वो अक्सर उसके घर पर चला जाता था और दोनो बातें भी करते और पढाइ भी लेकिन मोहित की कभी हिम्मत नही हुइ कि उसके साथ कुछ कर सके लेकिन एकता जब कभी टाइट ड्रेस पहनती तो मोहित की नीयत खराब हो जाती और वो उसके सीने को बार बार देखता एकता को भी पता रहता कि पता रहता था कि मोहित कहां देख रहा है लेकिन वो कभी कुछ नही कहती बल्कि जानबूझ कर अनजान बनती और मोहित को उकसाने की कोशिश करती रहती थी और हल्के से मुस्कुरा देती।

इसी बीच दीवाली की 12 दिनों की छुट्टियां लग गई और मोहित घर पर चला गया घर पर जाने के बाद एक बार फ़िर रुचि मोहित के सामने थी और तीन महिनों में रुचि की छोटी छोटी चूचियां अब अपना असली आकार लेने लगी थी मोहित उसके आकार को देखकर और ज्यादा उत्साहित हो गया वो एकता जैसी गर्लफ़्रेण्ड के होते हुए भी रुचि को दिमाग से नही हटा पा रहा था रुचि भी अपने भाई से 3 महीनों के बाद मिली थी इसलिए मोहित के ज्यादा ही नजदीक रहने की कोशिश करती थी वो निश्पाप होकर मोहित पास जाती थी और मोहित भाइ बहन का रिश्ता भूल कर उसके साथ जानबूझ कर उसके उभरते हुए स्तन और कूल्हों को छूता रहता था।

दिवाली की खरीददारी करने के लिए उनकी मम्मी ने मोहित और रुचि को बाजार भेजा उस दिन रुचि ने जीन्स और टाप पहन रखा था जिसमे उसके स्तन कुछ ज्यादा ही उभर कर दिखाइ दे रहे थे मोहित तो उसे देखता ही रह गया उसका भरा-भरा गदराया हुआ बदन जीन्स में और निखर कर दिख रहा था मोहित अपने पापा की मोटरसाइकिल लेकर बाजार गया रास्ते में उसने कई बार ब्रेक लगा कर अपनी पीठ पर रुचि के स्तनों को महसूस किया दोनो अपनी खरीददारी की और घर आ गए उस रात रुचि को याद कर के मोहित ने दो बार हस्तमैथुन किया। मोहित ने रुचि को सिर्फ़ एक बार ही नंगी देखा था और उसके बाद उसे कभी वैसा मौका भी नही मिला था लेकिन वो सीन याद करके मोहित के हस्तमैथुन का मजा दुगुना हो जाता था।

कहते है कि लडकियों को भगवान ने आदमियों के पहचाने की अद्भुत शक्ति दी है और रुचि के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था उसे भी लग रहा था कि भैया उसके साथ कुछ ज्यादा ही प्यार दिखा रहे है और खासकर उसके स्तनों की ओर कुछ ज्यादा ही आकर्षित हो रहे हैं पर उसने इसे अपने मन का वहम समझ कर अपने मन से निकाल दिया।

12 दिनो के बाद मोहित वापस कोटा चला आया वापस आते समया पापा ने उसे ओएसिस कम्पनी का प्रीपेड मोबाइल भी दिया ताकि वो उनसे सम्पर्क में रह सके कोटा आते ही सबसे पहले उसने एकता को अपना फ़ोन दिखाया एकता फ़ोन को देख कर बहुत खुश हुइ और उससे कहने लगी अब मैं जब भी तुम्हे फ़ोन करूं तुम मेरे पास आ जाना।

एक दिन दोपहर को एकता का फ़ोन मोहित के पास आया और वो उससे बोली आज रात को मुझे शादी में जाना है क्या तुम मुझे छोड दोगे,

मोहित ने उससे कहा तुम्हे तो तुम्हारे पापा भी छोड सकते हैं

तो वो बोली मम्मी पापा भी शादी में गए हुए हैं अगर हो सके तो तुम घर के बाहर आ कर मुझे फ़ोन कर देना

मोहित ने कहा ठीक है लेकिन तुम मुझे घर पर क्यों नही बुला रही हो?

तो उसने कहा घर पर दादा जी आए हुए है अगर उन्होने तुम्हे घर पर देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी।
उसकी बात सुन कर मोहित के अरमानों पर पानी फ़िर गया। क्योंकि उसने सोचा था कि शायद आज वो एकता रात के अकेलेपन में कुछ कर सके।

शाम को आठ बजे मोहित अपने मकान मालिक को रात मे देर से आने के लिए कह कर चला आया उसके घर के पास आ कर उसने अपनी हीरो पुक गाडी का हार्न बजाया एकता जैसे उसका इन्तजार कर रही थी।

वो तुरन्त बाहर आ गई और मोहित से थोडा आगे चलने का इशारा किया, मोहित थोडा आगे जा कर रुक गया और एकता आगे आकर उसकी गाडी पर बैठ गई उसने थोडी ही दूरी पर गाडी रुकवाइ और एक जगह जहां सजावट हो रही थी मोहित को इन्तजार करने के लिए कह कर अन्दर गई और लगभग 10-15 मिनट में आ गई।

बाहर आते ही फ़िर उसने ्मोहित से चलने के लिए कहा और मोहित ने गाडी चला दी गाडी चलाते हुए उसने एकता से कहा


ये तो तुम्हारे घर के एकदम नजदीक है तुम तो खुद भी यहां आ सकती थी
तो उसने कहा कि वो मोहित के साथ घूमना चाहती थी.

दोनो लगभग एक-डेढ घण्टे घूमते रहे शहर में शादियों का माहोल था इसलिए रात तक बहुत भीड थी दोनो ने एक होटल में खाना खाया और मोहित उसे घर छोडने के लिए निकल पडा। उसके घर के पास एक पार्क था वहा उसने मोहित को रुकने के लिए कहा वहां पर एक खाली प्लाट था जिसके अन्दर एक कमरा सा बना हुआ था और उस प्लाट की चाबी एकता के पास थी वो ख़ाली प्लाट भी एकता के पापा का ही था उसने मोहित की गाडी अपने प्लाट के अन्दर लाने को कहा और गाडी खडा करने के बाद उसने कहा – मेरा ब्वायफ़्रेण्ड भी यही पर गाडी खडी करता था।

उसने इधर उधर देखा और मोहित को एक लिप टू लिप किस कर दिया। मोहित को पता तो था कि उसके और एकता के बीच कुछ होने वाला है लेकिन ये नही पता था कि इस तरह शुरू होगा। जब दोनो के बीच किस स्टार्ट हुइ तो बहुत देर तक चलती रही और मोहित उसके बूब्स दबाने लगा और एकता भी उसका साथ देने लगी। जब उसने अपना हाथ उसके गले के अन्दर हाथ डालना शुरु किया तो वो कहने लगी – सब कुछ यही करोगे क्या?

मोहित ने पूछा – मतलब?

तो उसने कहा – मै अभी घर में घुस रही हूं, और जब मैं तुम्हारे मोबाइल पर घण्टी दूं तो तुम गेट पर आ जाना ये कह कर एकता चली गई

और मोहित वही खडा रहा लगभग आधे घण्टे तक वो वही पार्क के आसपास चक्कर लगाता रहा और बार बार मोबाइल की तरफ़ देख लेता था उत्तेजना और डर के मारे उसकी टाँगें काँप रही थी और दिल धाड – धाड कर के धडक रहा था। वो मन ही मन इसलिए डर रहा था कि कहीं वो फ़ंस ना जाए लेकिन ये सोच कर तसल्ली भी कर रहा था कि अब जो भी होगा देखा जाएगा।

जब एकता की घण्टी बजी तो वो तुरन्त उसके घर की ओर रवाना हो गया उसका दिल बहुत तेज धडक रहा था और मन में ना जाने कितने तरह खयाल आ और जा रहे थे और दिमाग कुछ ज्यादा सोचने की स्थिति में नही था उसका लिंग भी रह रह कर पैण्ड मे कभी उत्तेजित होता तो कभी शिथिल हो जाता वो सीधे उसके घर के गेट पर चला गया एकता उसका ही इन्तजार कर रही थी और मोहित के वहां पहुंचते ही उसने अपने गेट को खोला और मोहित को मुंह पर उंगली रख कर चुपचाप रहने के लिए कहते हुए सीढियों की ओर ले गई। और उसे उपर जाने का इशारा कर के वो दूसरी तरफ़ चली गई और अपने दादाजी को अपनी स्थानीय भाषा में पढाइ करने के लिए कहा और उपर चली आइ।
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09-26-2012, 05:59 PM
Post: #3
RE: मस्तानी बहन
उसके उपर आते ही वो मोहित को एक कमरे में ले गई और दरवाजा खोल कर अन्दर बैठने के लिए कहा, मोहित कमरे में गया कमरा एकदम साफ़ सुथरा था और चारो ओर पर्दे लगे हुए थे साथ में ही अटैच लेट बाथ था उसे बहुत तेज पेशाब आ रहा था और वो पेशाब करने चला गया। जब वो पेशाब कर के आया तो एकता एक जग मे पानी भर कर लाइ और पानी रखने के बाद बाहर जा कर सीढियों का गेट बन्द कर के वापस आइ और अपने कमरे का गेट भी बन्द कर लिया और अपने सीने पर हाथ रख कर जोर से सांस ली जैसे उसे अब तसल्ली मिली हो।

फ़िर वो बेड पर जा कर बैठ गई और मोहित को भी पास बैठने के लिए कहा मोहित उसके पास बैठ गया बैठने के साथ ही मोहित ने उससे पूछा

एकता तुम बहुत ज्यादा रिस्क ले रही हो तुम्हारे दादा जी घर पर ही हैं और तुम मुझे अन्दर तक ले आई और वो भी इतनी रात को।

तो एकता बोली कुछ नही होगा दादीजी अभी सो जाएंगे और बिना रिस्क लिए कभी भी कोइ काम नही होता है। मैं तुम्हे पाना चाहती थी इसीलिए इतना रिस्क लिया है। तुम्हें इतना बताना चाहती हूं कि मेरे पहले ब्वायफ़्रेण्ड के साथ मै सब कुछ कर चुकी हूं और कोइ सती सावित्री नही हूं। मैं अपने अकेलेपन से तंग आ चुकी हूं, घर में कोइ रहता नही है एक ब्वायफ़्रेण्ड था वो भी धोखेबाज निकला। अब मैं घुट कर जीना नही चाहती इसीलिए मैने तुमसे दोस्ती की।

फ़िर वो आगे बोली – मैं जान गई हूं कि फ़्रेण्डशिप का मतलब शादी नही होता और अगर किस्मत को मन्जूर होगा तो किसी से भी हो सकती है, पर अब मैं आजाद पंछी की तरह जीना चाहती हूं अगर तुमको मन्जूर हो तो मेरे साथ दोस्ती कायम रख सकते हो या छोड सकते हो मुझे तुमसे कोइ शिकायत नही रहेगी। उसने सारी बातें मोहित को खोल कर बता दी अब मोहित भी सच जानकर उसे छोड कर नही जा सकता था और ऐसा मौका शायद कोइ बेवकूफ़ लडका ही छोड कर जा सकता था।

मोहित ने एकता के कन्धे पर हाथ रख दिया और अपनी ओर खीच कर सीने से लगा लिया और उसके चेहरे को देखने लगा – वो उसे देखते हुए बोली मोहित मै तुम्हारे सामने हूं तुम्हे जो चाहिये ले लो।

मोहित ने अपने गर्म होठ उसके गुलाबी होठो पर रख दिये। और उसे जी भरकर चाटना-चूमना शुरु कर दिया। इतना प्यार पाकर दोनों काम वासना की ज्वलंत अग्नि में जलने लगे। दोनों का शरीर वासना की प्रचण्ड गर्मी से जला जा रहा था मोहित के लिंग ने और एकता की गर्म योनी ने लार टपकाना शुरु कर दिया था। मोहित ने बेदर्दी से उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और उसके गले में हाथ डाल कर उसके गर्म और गुदाज बूब्स को मसलने लगा दोनो एक दूसरे के होठों चुम्बक की तरह चिपका कर एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे।

अब मोहित ने हिम्मत दिखाते हुए उसके कुर्ते की चेन खोल कर एकता के गदराए हुए शरीर से अलग कर दिया। वह थोड़ा शरमाने लगी।

मोहित ने कहा- अब तक तुमने सारी शुरुआत की है अब मेरी बारी है। फ़िर सलवार निकालने के बाद तो उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेन्टी ही शेष बाकी रह गये थे। उसके रसीले यौवनयुक्त शरीर को देखकर वो पागल हुए जा रहा था।

एकता ने नजरें झुकाते हुए कहा - मुझे ही नंगा किये जा रहे हो मुझे बहुत शर्म आ रही है
मोहित ने कहा- अभी लो मैं मेरे कपडे भी उतार देता हूं !

और वो झट से नग्न अवस्था में उसके सामने खड़ा हो गया, एकता ने उसके शरीर को ऊपर से नीचे तक निहारा और प्यार से उसकी छाती पर अपने होठों का घुमाने लगी।

उसने एक हाथ से मोहित के उत्तेजित लिंग को पकड लिया और हिलाते हुए होठों पर एक बार फ़िर अपने होंठ रख दिए। मोहित तो बस पागल ही हुए जा रहा था। अब वो उसकी ब्रा को उठाने लगा तो उसने अपने हाथ आगे कर लिए। धीरे धीरे मोहित ने आगे बढ़ते हुए उसकी ब्रा को उसके कोमल से शरीर से अलग कर दिया। वह अब किसी परी की तरह लग रही थी। अब मोहित ने उसके रसभरे स्तन चूसने प्रारंभ किये। उस समय कितने सुख की अनुभूति मुझे हो रही थी दोनो मे से कोइ नही बता सकता था दोनो के यौनांग रस से विभोर हो रहे थे और रस बाहर टपकने लगा था।


एकता अब सिसकियाँ लेने लगी .........

यह सब उसके मुख से निकल रहा था। कुछ देर तक रसीले स्तनों का रस चूसने के बाद मोहित ने उसके शरीर पर बची हुइ पैन्टी भी उतार दी।

अब उसके शरीर पर एक धागा तक शेष ना बचा था। उसके इस नग्न छरहरे कामुक बदन को देखकर तो किसी बुड्ढे का लण्ड भी खडा हो जाए।

मोहित अब उसकी रस से भरी हुइ फ़ूली हुइ योनि को निहारने लगा, बिल्कुल गुलाबी सा रंग, एक भी बाल न था उसकी चूत पर। अब तो सारा काम मोहित को ही करना था ।

मोहित ने पूछा – लगता है आज ही बाल साफ़ किये है तुमने?

उसने कहा – हां मैने आज ही साफ़ किए हैं और तुम्हे एक बात और बताना चाहती थी कि मैने उस दिन भी मेरे बाल साफ़ किये थे जिस दिन तुम मेरे घर पर पहली बार आए थे। अब मोहित के चौंकने की बारी थी।
मोहित ने पूछा – तुम्हारा मतलब? क्या तुम उस दिन भी मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी?

उसने कहा – हाँ अब लडकी हर बात मुंह से तो कह नही सकती मैने तो तुम्हे पूरा इशारा दिया था घर पर बुला कर, जब अजय मेरे घर पर आया था तब उसने 15 मिनट बाद ही पहली किस कर ली थी और सेक्स भी कर लिया था और तुम थे कि 1½ घण्टे मेरे साथ बिताने के बाद भी मेरे साथ कुछ नही किया यही नही आज ढाइ महिने से ज्यादा हो गए अब भी शुरुआत मुझे ही करनी पडी।

मोहित मन ही मन अपनी बेवकूफ़ी पर पछ्ताया और उससे बोला – मुझे पता नही था नही तो ये मौका कभी हाथ से जाने नही देता।

अब एकता ने कहा – जब तुम्हे एक लडकी अकेले में बुला रही है, बातें भी तभी कर रही है जब दोनो अकेले हों और अपनी सारी बातें बता रही है तो समझ लो कि वो तुमसे क्या चाहती है।

अब मोहित ने कहा – अरे भाषण ही देती रहोगी या कुछ करने भी दोगी तब वो चुप हुइ और मोहित ने अपना काम चालू किया

मोहित ने धीरे-धीरे उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरु किया, पहले तो उसे कुछ गुदगुदी सी हुई फिर उसे मजा आने लगा, मैं अब एक अँगुली उसकी गुलाबी चूत के मुहाने पर रखकर अन्दर-बाहर करने लगा।

वह तो मानो पागल हो गई और कामवासना की आग में जलने लगी और कहने लगी- हाँ SSS !! ऐसे ही हाँ ऐसे ही !! ऊम......ऊममममम......ऊईईई� �ईई........

अब उसे बर्दाशत नहीं हो रहा था .... थोड़ी देर बाद मोहित ने सोचा- अब बस बहुत खेल लिया अब इस लंड की प्यास भी बुझाई जाए और वो अपने लंड को आगे लेकर उसकी चूत की ओर बढ़ा़।

एकता ने कहा- थोडा आराम से करना मै ये सब कर तो चुकी हूं लेकिन इतना ज्यादा भी नही किया?

मोहित ने कहा- एकता मैने भी पहले कभी नही किया लेकिन तुम बस देखती जाओ...... तुम्हें बिल्कुल भी दर्द नही होने दूंगा ये मेरी जिन्दगी का पहला सेक्स है और मैं इसका मजा खराब नही करूंगा।

यह सुनकर वो मुस्कुराइ। अब मोहित ने अपने उत्तेजित और कुवारे लिंग को उसके योनि-द्वार पर रखा और हल्के से झटका मारा, लिंग अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया होगा कि वो एक बार फ़िर से बोली थोडा धीरे से करो फ़िर एक बार घुसाने के बाद चाहे जितनी भी जोर से कर लेना।

उसकी तरफ से हरी झंडी मिलते ही मोहित ने फिर से एक बार चूत पर अपने तने हुए लिंग की दस्तक दी और उसकी चूत दरार में अपने लण्ड को थोडी देर तक रगडता रहा और फ़िर गर्म लंड का घर्षण पाते ही एकता की योनि ने रस की धारा छोडनी शुरु कर दी जब वो गीली हो गई तो मोहित ने थोडा सा धक्का दिया और उसका लण्ड सुपाडे से भी ज्यादा अन्दर घुस गया और एकता के मुह से आह सी निकली


मोहित ने उससे पूछा कि दर्द तो नही हो रहा है तो उसने कहा नही तुम करते रहो ।

मोहित नेअबफिरसेलण्ड को निकाला और फ़िर पूरा अन्दर डालदिया इस बार एक ही बार में उसे एकता के शरीर के अन्दर की गर्मी महसूस होने लगी, उसका लिंग एकता की योनि की दीवारों के बीच कैद हो गया था, मोहित समझ नही पा रहा था कि उसे कौनसा अलौकिक आनन्द मिल रहा था एकता की योनी का वो गीला चिकना सा स्पर्श उसके लिंग को साफ़ महसूस हो रहा था उसके लिंग में करण्ट सा दौडने लगा था।


इधर एकता भी बहुत दिनो के बाद लिंग का अपने प्यासे योनिद्वार मे प्रवेश पा कर तो वो धन्य ही हो गई कई दिनो से बन्द दरवाजा आज मोहित ने खोल कर उसे आनन्द देना शुरु कर दिया था एकता के मुंह से एक ठण्डी सी सांस छूट गई और उसकी योनि ने कामरस बहाना चालू कर दिया वहअबबारउसने मुझे अपनी ओर खींच लिया और मैं उसके उपर लेट गया मेरा पूरा लण्ड उसके अन्दर घुस चुका था अब मैंनेअबहौले-हौलेचुदाईशुरुकरद� �।
थोड़ी देर बाद उसको भी मजा आने लगा और वह कहने लगी- हाँ राजा ऐसे ही ऐसे ही.........उममम ममममम म.........आआआआआआआा......... हाय............ ।




उसने कहा – अपना वीर्य बाहर ही निकालना वर्ना मैं प्रेगनेण्ट हो जाऊंगी।


मोहित ने कहा ठीक है बाहर ही निकालूंगा


अब मोहित भीअपने पूरे जोर से चोदना चालू कर दिया।


दोनो को ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग में हों।


लगभग 5 मिनट की तेज चुदाई के बाद में मोहित का निकलने लगा, और वो बोलने लगा मेरा काम तमाम होने वाला है


एकता ने कहा- बस थोड़ी औरदेर ! मैं भी होने वाली हूँ।


मोहित ने कहा- जल्दी से हो जाओ और वो अपने पूरे तेज के साथ झडने लगा और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और एकता भी उसके साथ झड़ गई। दोनों का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और लगभग आधे घन्टे तक एक दूसरे के साथ ही चिपकर लेटे रहे।
फिर आधे घन्टे बाद मोहित ने उसे उस रात फिर दो बार जम कर चोदा ये मोहित की जिन्दगी की पहली चुदाइ थी जो उसने एकता के साथ की थी सुबह चार बजे ही मोहित एकता के घर से चुपचाप निकल गया।

अब आगे की कहानी मोहित की जुबानी

अब ये काम अक्सर होने लगा मुझे जब भी मौका मिलता मै उसके साथ सेक्स करता रहा एकता भी प्यासी सेक्स गुडिया बन कर मेरा जबरदस्त साथ देती थी इसी बीच पापा का फ़ोन आया कि उन्होने एक नया कम्प्यूटर ले लिया है। अब मैं घर पर इन्टरनेट से चैट भी करता था। रुचि और पापा मम्मी से इन्टरनेट पर अक्सर चेटिंग पर ही बात हो जाती थी वहां पर मैं कई बार सेक्स साइट भी देखता रहता था कई बार एकता भी मेरे साथ होती थी और वो साइबर कैफ़े के केबिन मे मेरा मुठ मार देती थी। मैं एकता को इन्टरनेट की फ़ोटो दिखा कर उसे मुख मैथुन करने के लिए कहता था लेकिन वो हमेशा मना कर देती थी और कहती थी कि उसे अच्छा नही लगता।

समय बीतता रहा और मेरी परीक्षाएं आ गई, परीक्षा के बाद प्री मेडिकल टेस्ट भी देना था। और उसके लिए मुझे डेढ महिने और रुकना था इधर एकता परिक्षा के बाद छुट्टियां मनाने अपने किसी रिश्तेदार के घर चली गई। इधर मै प्री मेडिकल टेस्ट तैयारीयों में लगा रहा और जब मौका मिलता घर पर चैट करने लगता एक दिन मैं रुचि के साथ चैट कर रहा था उसका रिप्लाइ बहुत देर में आ रहा था तो मैने उससे फ़ोन पर बात की – उसने बताया कि वो जैसे ही चैट रूम मे आती है लगातार लडकों के मेल आने लगते है और उन्हे बन्द करने में टाइम लगता है। मै उसकी बात समझ गया और उसे एक नई ID लडके के नाम से बना दी और कहा तू इस ID को यूज किया कर तेरे पास ऐसे मेल नही आया करेंगे।
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09-26-2012, 06:00 PM
Post: #4
RE: मस्तानी बहन
अब मै रुचि से आराम से चैट किया करता था एक दिन मैं रुचि से चैट करते हुए पार्न साईट खोल कर बैठा हुआ था तभी मेरे मन मे एक खयाल आया और मैने रुचि से एक घण्टे बाद चैट करने के लिए कहा इस बीच मैने एक दूसरे नाम के लडके से ID बनाइ और रुचि को के ID खोल कर उसमें खुद को एड कर लिया क्योंकि रुचि की IDID मैने ही बनाइ थी इसलिए मुझे कोइ दिक्कत नही हुइ और ठीक एक घण्टे बाद मैं वापिस साइबर कैफ़े गया और दूसरे नाम के लडके की ID से लोगिन किया तो पता चला कि रुचि भी ओनलाइन है अब मैने उससे चैट करना शुरू कर दिया।

शुरु शुरु में तो रुचि ने कोइ रेस्पांस नही दिया लेकिन कुछ ही दिनों में वो काबू में आ गई क्योकि मुझे उसकी पसंन्द और नापसन्द का पूरा ध्यान था और मै उसे अच्छी तरह जानता था कि मैं उसे किस तरह से राजी कर सकता हूं रुचि ने थोडी चालाकी दिखाइ और ये नही जाहिर होने दिया कि वो एक लडकी है। अब मैं अक्सर उससे चैट करता और वो भी मुझसे लडका बन कर चैट करती अब मै धीरे धीरे उससे उसकी गर्ल फ़्रेण्ड के बारे में पूछने लगा और हल्की फ़ुल्की सेक्स की बातों की शुरुआत कर दी।
इधर मेरी प्री मेडिकल की परीक्षा भी हो गई और परीक्षा के बाद मैं अपने घर पर आ गया घर आने के बाद मेरे पास एक ही लक्ष्य रह गया रुचि को किसी तरह हासिल कर के उसके साथ सेक्स करना और मैं घर पर आने के बाद साईबर कैफ़े चला जाता और रुचि से घण्टों तक चैट करता। अब मैं उसके साथ खुल कर सेक्स की बातें करता और मेरे लण्ड के बारे में बताता था वो भी मुझसे खुल कर बातें करने लगी थी। जब मैं उससे उसके लण्ड के बारे में पूछता तो वो ठीक से जबाब नही दे पाती थी अगर लण्ड होता तो बताती ना।

जब मैं घर पर रुचि को देखता था तब वो एकदम नादान सी बच्ची लगती उसे देख कर नही लगता था कि वो सेक्स के बारे में बातें भी कर सकती है लेकिन मुझे तो सब पता था कि अब वो मुझसे ज्यादा दिन दूर नही रह पाएगी। मैने कम्प्यूटर के लिए एक वेब कैम भी ला कर लगा दिया ताकि मौका मिलने पर उसका यूज कर सकूं।
खैर मैने एक दिन उसे चैट करते हुए कहा मेरे लण्ड की खाल एकदम पीछे तक सरक जाती है क्या तेरे लण्ड की खाल भी सरकती है तो उसने कोइ जबाब नही दिया फ़िर मैने वेब कैम पर उसे पहली बार अपना लण्ड दिखाया वो लण्ड को देख कर पागल हो गई और बहुत देर तक देखती रही वो बार बार मुझसे पूछ्ती थी कि ये हमेशा टाइट ही रहता है, उसमें से वीर्य कैसे निकलता है तब मैं उससे कहता था तू लडका होते हुए भी मेरे से ऐसे सवाल क्यों पूछता है? मैने उसे उसका लण्ड दिखाने के लिए कहा तो वो मुझे टाल गई मुझे पता तो था ही कि जब उसके पास लण्ड है ही नही तो वो मुझे क्या दिखाएगी

एक दिन चैट पर उससे बातें करते हुए बताया कि मेरी कोइ गर्लफ़्रेण्ड नही थी इसलिए मैने अपनी बहन पर ही लाइन मारना चालू कर दिया और वो मुझसे पट भी गई और अब मैं रोज उसके साथ सेक्स करता हूं उसने मेरी बात का यकीन नही किया मैने बहुत तरीके और जतन से उसे यकीन दिलाया कि मैं सचमुच मेरी बहन के साथ सेक्स करता हूं और उसे यकीन दिलाने के लिए मैने इन्टरनेट से ही रुचि की उम्र की एक लडकी की फ़ोटो डाऊनलोड की और उसे ई-मेल कर के बताया कि यही मेरी बहन है।

उसने लडकी की फ़ोटो देख कर कहा

रुचि : ये तो मेरी उम्र की है ये कैसे सेक्स कर पाती होगी?

मैं : मै इसके साथ पिछ्ले 6 महिनों से सेक्स कर रहा हूं।

रुचि : क्या ये पूरा सेक्स कर लेती है


मैं : पूरा सेक्स क्या ?

रुचि : मतलब तुम्हारी बहन पूरा लिंग अन्दर घुसवा लेती है

मैं : हां ये मेरे साथ पूरा सेक्स कर लेती है।

रुचि : तुम ये बताओ क्या ये पूरा लिंग अन्दर घुसवा लेती है क्या?

मैं : हां भाइ पूरा घुसवा लेती है और ये मेरा चूसती भी है।

रुचि : चूसती है मतलब?

मैं : मेरे लण्ड को मुंह मे लेकर चूसती है?

रुचि : तुम्हारी बहन ऐसा क्यों करती है। यहां से तो पेशाब करते हैं

मैं : तुमने कभी विदेशियों का सेक्स या ब्लू फ़िल्म देखी है


रुचि : नही

मैं : मै तुम्हे एक साइट बताता हूं तुम उस पर चेक करना

रुचि : तुम साईट का नाम बताओ।

मैने रुचि को एक साईट का नाम बताया जो के नाम से थी और मैं यही साइट सबसे ज्यादा देखता था उस समय आज की तरह वीडियो डाउनलोड करने के लिंक नही मिलते थे इसलिए फ़ोटो देखने का बहुत क्रेज था मैने उसे पूरा तरीका बताया कि फ़ोटो कैसे देखा जाता है और अगले दिन चैट करने को कह कर अपना अकाउण्ट लोग आउट कर लिया मैं घर पर देर से गया ताकि रुचि आराम से फ़ोटो देख सके।
मै जब घर पर गया तो रुचि मेरे पापा के रूम मे ही थी और उसने मेरे जाते ही कम्प्यूटर बन्द कर दिया मैने रुचि पर ध्यान दिए बिना ही घर पर इधर उधर घूमता रहा और शाम को कम्प्यूटर आन किया तो उसकी हिस्ट्री में उसी साइट के बहुत सारे लिंक दिखाइ दिए मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि मेरा प्लान कामयाब हो रहा था।
मैने कम्प्यूटर में ज्यादा कुछ नही देखा क्योकि जो मुझे देखना था वो मुझे मिल गया था अब मैने कम्प्यूटर बन्द किया और रुचि के बारे में सोचने लगा। एकता के कारण मैं लडकियों के मामले मे थोडा बोल्ड हो गया था और रुचि के साथ मेरी चैटिंग ने भी मेरी हिम्मत बढा दी थी। मैं कम्प्यूटर से उठ कर बाहर आया रुचि और मम्मी बातें कर रहे थे मैं आकर उनके बीच बैठ गया और बातें करने लगा थोडी देर में मम्मी खाना बनाने चली गई।

अब मेरे पास मौका था मैं रुचि से बातें करने लगा और जानबूझ कर उसके सीने की तरफ़ देखता रहा, मै रुचि को महसूस कराना चाहता था कि मैं उसके बूब्स की तरफ़ देखता हू, रुचि मेरी इस हरकत से सकपका गई और बार-बार अपनी चुन्नी को सेट करने लगी वो जितना अपने आप को सेट करती मैं उतना ही उसके बूब्स की तरफ़ देखता। वो इधर-उधर देखती और मुस्कुरा देती वो समझ नही पा रही थी कि मै ऐसा क्यो कर रहा हूं।

मैने उसे एकदम इस तरह से देखा कि वो भी सोचने पर मजबूर हो जाए कि मैं ऐसा क्या कर रहा हूं।

अगले दिन फ़िर मैं घर से बाहर गया और सीधे साइबर कैफ़े गया और रुचि से चैट करने लगा चैट के दौरान हमारे बीच बहुत बातें हुइ उसे मैं हिन्दी मे लिख रहा हू मैं पूरी बात तो नही लिख रहा लेकिन जो मुझे और रुचि को याद है वो लिख रहा हूं


मैं : तुने फ़ोटो देखी थी

रुचि : हां देखी थी।

मैं : कैसी लगी।

रुचि : अच्छी लगी।

मैं : चूसने वाला सीन देखा?

रुचि : हाँ

मैं : अब तो तुम्हे यकीन हुआ कि मैं भी अपनी बहन के साथ ऐसे ही करता हूं।

रुचि : पर ये लोग एक दूसरे का क्यों चूसते हैं?

मैं : इससे वो लोग ज्यादा सेक्सी बनते है और सेक्स पावर भी बढती है।

रुचि : उन्हे गन्दा नही लगता

मैं : अगर गन्दा लगता तो वो ऐसा क्यूं करते, इसमे ही तो असली मजा है

रुचि : पर मुझे तो बहुत अजीब सा लगा

मैं : जब तू करेगा तब तुझे भी अपना लण्ड चुसवाने में बहुत मजा आएगा। जब मेरी बहन ने मेरा लण्ड अपने होठों के बीच डाल कर चूसा था तो मुझे भी बहुत मजा आया था।

रुचि : तो क्या तुम भी उसकी चूत में अपने मुंह से करते हो?

मैं : हां यार हमें तो बहुत मजा आता है एक दूसरे का चूसने में वो बहुत मजे ले कर अपनी चूत चुसवाती है।


रुचि : क्या? सच में?

मैं : हां यार जब तू अपना लण्ड किसी लडकी को चुसवाएगा तो तुझे बहुत मजा आएगा। अच्छा तू बता तेरा लण्ड कितने इन्च का है?

रुचि : मुझे नही पता?

मैं : क्या तूने नाप कर नही देखा?

रुचि : नही।

मैं : अब जब मौका मिले तो नाप कर देखना।

रुचि : पर मैं लडका नही लडकी हूं।

मैं : मजाक मत कर यार

रुचि : मै मजाक नही कर रही हूं मैं एक लडकी हूं

मैं : पर तेरा आई डी तो लडके के नाम से है

रुचि : है पर मैं एक लडकी हूं ।

मैं : तेरे पास वेब कैम है


रुचि : हां है

मैं : तो दिखा

रुचि : वेट करो पर मैं फ़ेस नही दिखाउंगी।
रुचि ने पांच मिनट बाद ही कैमरा चला दिया और अपना चेहरा नही दिखाया उसने कैमरा चला कर मुझे हाय किया। मुझे विश्वास नही हो रहा था कि रुचि इतनी जल्दी मुझे अपनी असलियत बता देगी और बात वेबकैम तक पहूंच जाएगी।

मैं : तू तो सचमुच लडकी निकली यार मुझे इतने दिनों से बेवकूफ़ बना रही थी

रुचि : बनाना पडता है

मैं : तू तो बहूत शानदार लडकी है यार तेरे बूब्स देख कर तो किसी का भी लण्ड खडा हो जाए। तेरा फ़ेस तो दिखा दे।


रुचि : अभी नही

मैं : तेरा कोइ भाइ है क्या

रुचि : ए मिस्टर जबान संभाल कर मैं ऐसी लडकी नही हूं।

मैं : अरे मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था

रुचि : हां मेरे एक बडे भैया हैं

मैं : क्या करते है तेरे बडे भैया

रुचि : पढाइ करते हैं और क्या

मैं : उसकी कोइ गर्ल फ़्रेण्ड है क्या

रुचि : मुझे नही पता

मैं : तुम्हारे कितने ब्वायफ़्रेण्ड हैं

रुचि : मैं ऐसी लडकी नही हूं मेरा कोइ ब्वाय फ़्रेण्ड नही है।

मैं : फ़िर तुम अपने सेक्स की इच्छा का क्या करती हो


रुचि : मतलब

मैं : जब तुम्हारे मन मे सेक्स की इच्छा होती है तब क्या करती है जैसे हम लडके मुठ मारते है

रुचि : मै अपने हाथ से करती हूं

मैं : फ़िर तो तेरा भाइ भी ऐसे ही मुठ मारता होगा

रुचि : मेरे भैया के बारे में ऐसी बात मत करो।

मै : मै तो ऐसे हि पूछ रहा था।


रुचि : ओके

मैं : तूने सेक्स करते हुए किसी को देखा है?

रुचि : नही देखा।
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09-26-2012, 06:00 PM
Post: #5
RE: मस्तानी बहन
मैं : तुझे अंग्रेजों का लण्ड कैसा लगा।

रुचि : अच्छा लगा

मैं : अगर मैं तुम्हारे सामने आ जाऊं तो मेरा चूसोगी।

रुचि : मुझे नही पता

मैं : तुम्हे अंग्रेजों का सेक्स कैसा लगा


रुचि : अच्छा लगा

मैं : फ़िर तो मेरा चूस ही लोगी

रुचि : मुझे नही पता।

मैं : मेरी बहन तो मेरा ख़ूब चूसती है और हाथ में पकड कर हिलाती भी है।

रुचि : तुम्हारी बहन को शर्म नही आती क्या और तुम्हे शर्म नही आती अपनी बहन के लिए ऐसी बातें करते हुए।

मैं : अगर शर्म आएगी तो हम कैसे करेंगे। वो तो खुद कहती है बार बार करने के लिए।

रुचि : पता नही वो तुम्हारे साथ कैसे कर लेती है इतना सब

मै : उसे तो करने में बहुत मजा आता है

रुचि : तुम कैसे कर लेते हो उसके साथ

मै : हम दोनों कपडे उतारते है और कर लेते हैं

रुचि : मै पूछ रही हूं तुम अपनी बहन के साथ कैसे कर लेते हो।

मैं : पहले तो मैं भी यही सोचता था लेकिन जब मैने पहली बार उसके बूब्स दबाए तब से मुझे ऐसा मजा

आया कि मैं उसे अपने दिमाग से निकाल ही नही पाया

रुचि : तुम एक भाइ हो कर बहन के साथ कैसे कर लेते हो

मैं : मै अकेला नही करता मेरी बहन भी मेरे साथ करती है और दोनों को बहुत मजा आता है, और मैं

दुनिया में अकेला ऐसा लडका नही हूं दुनिया में बहुत भाइ अपनी बहन के साथ सेक्स करते हैं


रुचि : तुम्हे डर नही लगता

मैं : कैसा डर

रुचि : किसी को पता चल गया तो

मैं : हम दोनो तो किसी को बताने से रहे

रुचि : पर तुम मुझे तो बता रहे हो

मैं : तो क्या हुआ मैं तुमसे कितना दूर हूं और तुम मुझे जानती भी नही हम दोनो तो मिलने से रहे

(मैने रुचि को ये जाहिर कर रखा था कि मैं उसके शहर से बहुत दूर रहता हूं)

रुचि : वो तो है लेकिन फ़िर भी

मैं : फ़िर भी क्या हम दोनो आपस में ही करते हैं बल्कि हम दोनो सुरक्षित हैं


रुचि : वो कैसे

मैं : अगर मेरी बहन बाहर किसी ब्वायफ़्रेण्ड के साथ करती तो कितना डर रहता ब्लेकमेलिंग का या बाहर

किसी के साथ पकडे जाने का, घर में जब हमें मौका मिलता है कर लेते हैं और किसी को पता भी नही


चलता.

रुचि : और अगर तुम्हारी बहन की शादी के बाद उसके पति को पता चल जाए तो।

मैं : कैसे पता चलेगा

रुचि : मैने सुना है लडकियों के कोइ सील होती है जो फ़किंग के टाइम खतम हो जाती है।

मैं : पर कई बार साइकिल चलाते समय और खेलते समय भी सील खतम हो जाती है ये बकवास है कि

फ़किंग के टाइम ही सील टूटती है ।

रुचि : क्या तुमने कभी किसी और लडकी के साथ सेक्स किया है

मैं : जब घर में ही इतना मजा है तो बाहर जाने का क्या फ़ायदा

रुचि : और अगर वो प्रेगनेण्ट हो गई तो?

मैं : मैं कण्डोम लगा कर सेक्स करता हूं वैसे तुम्हे बहुत मालूम है सेक्स के बारे में

रुचि : मेरी सहेलियों ने बताया था ये सब

मैं : तुम सहेलियों से ऐसी बातें करती हो


रुचि : कभी कभी

मै : एक बात पूछूं बुरा तो नही मानोगी

रुचि : पूछो

मैं : तुम्हारे भाइ ने तुमसे कभी छेड छाड की है

रुचि : तुम फ़िर शुरु हो गए

मैं : मैने तुमसे पहले ही कहा था तुम बुरा नही मानोगी प्लीज बताओ ना

रुचि : मुझे नही पता

मैं : तुम्हे मुझ पर यकीन नही है और एक मैं हूं जो सब कुछ तुम्हे बताए जा रहा हूं लगता है तुम्हे मेरे

उपर जरा भी भरोसा नही है, मैने तुम्हे अपनी इतनी बडी बात बता दी और तुम अपनी जरा सी भी बात

नही बताना चाहती हो(अब मैने उसे इमोशनली ब्लेकमेल किया)

रुचि : मुझे कई बार लगता है भैया मेरे बूब्स की तरफ़ घूर- घूर कर देखते हैं

मैं : फ़िर तुम क्या करती हो


रुचि : कुछ नही

मैं : इसका मतलब तुम्हारे भैया तुम्हारे बूब्स में इन्ट्रेस्ट लेते है और उनको देखना चाहते हैं

रुचि : मेरे भैया ऐसे नही है

मैं : मैं यकीन के साथ कह सकता हूं, और तुम्हारे भैया को अगर मौका मिले तो वो तुम्हारे इन शानदार

बूब्स को जम कर चूसे।

रुचि : तुम कोइ और बात करो मुझे ऐसी बातें पसन्द नही

मैं : आज आखिरी बार कर रहा हूं उसके बाद कभी ऐसी बात नही करूंगा

रुचि : अगर तुमने आज के बाद ऐसी बात की तो मैं तुमसे कभी बात नही करुंगी

मैं : ओके पर अभी तो कर सकता हूं ना

मुझे समझ में आ गया था कि रुचि को भी इस तरह की बात करने में इन्ट्रेस्ट आ रहा है और वो मेरे बारें

में सोच कर उत्तेजित हो रही है।

रुचि : ओके पर ये आखिरी बार होगा समझे

मैं : क्या तुम हमेशा ऐसा महसूस करती हो कि तुम्हारा भाइ तुम्हारे बूब्स में देखता है

रुचि : नही अभी पिछ्ले कुछ दिनों से मुझे ऐसा लगता है, वो अक्सर मेरे सीने की ओर बडे ध्यान से

देखते है और जब वो ऐसे देखते हैं तो मुझे शर्म आने लगती है, पता नही उनके मन में क्या है?

मैं : अगर तुम्हे तुम्हारे भाइ को चेक करना है तो मैं तुम्हे एक तरीका बता सकता हूं


रुचि : कौनसा तरीका

मैं : तुम्हारे पास कोइ ऐसी ड्रेस है जिसमे तुम्हारे बूब्स ज्यादा दिखाइ देते हों

रुचि : एक सूट है जिसका गला बहुत बडा है जब मै उसे पहनती तो मम्मी भी चुन्नी ध्यान से लगाने के

लिए कहती है

मैं : तुम मेरे कहने से एक बार वही सूट पहनो और अपने भाइ के सामने जाते समय अपनी चुन्नी को

इस तरह करो कि उसे तुम्हारे बूब्स दिखाइ दे। अगर वो तुम्हारे बूब्स की तरफ़ देखता है तो वो जरूर तुममे

इन्ट्रेस्ट लेता होगा

रुचि : पर मुझे अपने भैया के साथ ऐसा नही करना है

मैं : मै तुम्हे ऐसा करने के लिए थोडी कह रहा हू मै तो सिर्फ़ तुम्हारे भैया को चेक करने के लिए कह रहा


हूं
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09-26-2012, 06:00 PM
Post: #6
RE: मस्तानी बहन
रुचि : अगर भैया मेरे बूब्स में देख रहे हो तो ।

मैं : फ़िर तुम उसकी पैण्ट में देखना कि कुछ फ़ूली फ़ूली सी तो नही लग रही है

रुचि : उनकी पैण्ट कई बार फ़ूली हुइ रहती है

मैं : इसका मतलब तुम भी उसकी तरफ़ देखती हो

रुचि : कई बार नजर चली जाती है मेरी सहेलियां बताती हैं कि जब लडके एक्साईटेड होते है तब उनकी

पैण्ट मे लण्ड फ़ूल जाता है।
(रुचि मेरे साथ पहले लडका बन कर बात करती थी इसलिए वो लण्ड और ऐसे ही शब्दों का इस्तमाल मेरे


साथ आसानी से कर रही थी)

मैं : तुम अपनी सहेलियों से ऐसी बातें करती हो

रुचि : कभी कभी

मैं : और जब लडकियां एक्साइटेड होती है तब क्या होता है

रुचि : वेजिना गीली हो जाती है

मैं : और क्या होता है बताओ ना

रुचि : मुझे नही पता पर बहुत मन होता है सेक्स करने का

मै : क्या तुम वो वाला सूट पहनोगी जिसके बारे में अभी बात हुइ थी

रुचि : मुझे नही पता

मैं : प्लीज बताओ ना

रुचि : तुम मुझसे ऐसी बात नही करो नही तो मैं चैट बन्द कर दूंगी

मैं : पर तुमने अभी तो कहा था कि मैं आज बात कर सकता हूं


रुचि : मै कोशिश करुंगी

मैं : फ़िर मुझे बताओगी कि क्या हुआ सूट पहनने के बाद

रुचि : तुम क्या पूछना चाहते हो

मैं : यही कि तुम्हारे भैया भी तुम्हारे बूब्स की तरफ़ देखते हैं या नही

रुचि : शटअप मिस्टर मेरे भैया ऐसे नही हैं

मैं : मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि तुम्हारे भैया बूब्स की तरफ़ जरुर देखेंगे

रुचि : और अगर नही देखे तो

मैं : तो मैं कभी तुम्हारे भैया के बारे में ऐसी बातें नही करुंगा और अगर देखे तो मैं वेब कैम पर तुम्हारे

बूब्स और वेजाइना दोनो देखूंगा, और तुम्हारे भाइ के बारे में भी बात करूंगा

रुचि : तुम तो अपनी सिस्टर की रोज देखते होगे

मैं : पर मैं तुम्हारे भी देखना चाहता हूं बोलो मन्जूर है


रुचि : ओके

मैं : पक्का ना

रुचि : हां पक्का

मैं : अगर तुम्हारा भाइ तुम्हारे बूब्स की तरफ़ देखे तो क्या तुम उससे सेक्स करोगी

रुचि : ज्यादा बकवास मत करो

मैं : प्लीज बताओ ना

रुचि : मैं जा रही हूं बाय

मैं : एक बार बता दो ना

रुचि : तुम ज्यादा ही सिर चढ रहे हो


मै : प्लीज बता दो ना

रुचि : मै सोच कर बताउंगी

मैं : तुम अभी सोच लो

रुचि : मुझे नही पता

मैं : प्लीज तुमने मुझसे आज ऐसी बाते करने का वादा किया है

रुचि : पर तुम मुझसे ये सब कुछ क्यों पूछ रहे हो?

मैं : मुझे तुमसे बातें करना अच्छा लगता है और तुम पर भरोसा भी है इसलिए मैने तुम्हे अपनी सारी


बातें बता दी।

रुचि : कई बार जब मैं हाथ से करती हूं तो भैया की याद आती है और ऐसा लगता है जैसे वो मेरे साथ

सब कुछ करें लेकिन जब मेरा हो जाता है तो मुझे बहुत शर्म आती है।

मैं : क्या हो जाता है?

रुचि : वही होता है जब झटके आ जाते हैं

मैं : मतलब डिस्चार्ज होने के बाद

रुचि : हां पर मैं हमेशा भैया के लिए नही सोचती कभी कभी होता है ऐसा

मैं : अगर तुम्हारा भाइ तुम्हे ये सब करने के लिए कहे तो तुम क्या करोगी?

रुचि : मेरा भाइ ऐसा नही है और मुझे नही पता तुम कोइ और बात करो

मैं : क्या तुम अभी एक्साइटेड हो रही हो?

रुचि : हां बहुत ज्यादा

मैं : किसके बारे में सोच कर? अपने भाइ के बारे में या मेरे बारें मे सोच कर

रुचि : दोनो के बारे में

मैं : मतलब तुम्हारी भी इच्छा हो रही है कि तुम्हारा भाइ भी मेरी तरह तुम्हारे साथ सब कुछ करे


रुचि : तुम पागल हो गए हो।

मैं : और क्या सभी पागल हो जाते हैं सेक्स के लिए।

रुचि : पर तुम ज्यादा पागल हो

मैं : अगर तुम्हारा भाइ अपना तना हुआ लण्ड लेकर तुम्हारे सामने आ जाए और तुम अभी की तरह एक्साइटेड रहो तो क्या करोगी?

रुचि : तुम बकवास मत करो मैं जा रही हूं।

मैं : बस एक बार बता दो

रुचि : जब ऐसा होगा तब सोचूंगी।

उस दिन मुझे रुचि ने कोइ जबाब नही दिया लेकिन मुझे बातों से लगने लगा कि वो अब मुझमे इन्ट्रेस्ट जरुर लेगी मै जब घर पर आया तो मेरे सामने वही मासूम सी रुचि थी उसे देख कर मुझे लगा कि वो ऐसा नही करेगी पर मैने एक बात नोट की और वो ये कि वो मुझसे ठीक से नजरें मिला कर बातें नही कर पा रही थी शायद वो मुझसे शर्मा रही थी या उसका मुझे देखने का नजरिया बदल गया था मुझे लग रहा था जिस तरह मैं उसे पाना चाहता था अब वो भी मुझे उसी तरह पाना चाहती थी लेकिन वो शायद डर रही थी और मुझे उसका डर ही तो दूर करना था।

उस रात को मैने उसके जिस्म को और दिन को हुइ बात को याद कर के जम कर मुठ मारी और
मेरे खयालों मे रुचि का कोरा और करारा बदन था मैने ये सोचते हुए मुठ मारी की मैं रुचि को बहुत ही मस्ती
से चोद रहा हूं। अगले दिन मुझे रुचि के नहाने का बेसब्री से इन्तजार था क्योंकि मैं देखना चाहता था कि रुचि
आज कौन सी ड्रेस पहनती है जब वो दोपहर को नहा कर आइ तो मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना नही रहा
रुचि ने एक नीले रंग का सूट पहना था जो वास्त्व में डीप गले का था और उसकी स्लीवज भी बहुत छोटी थी
उसके गले के बीच में उसके बूब्स दिख रहे थे इतनी कम उम्र में भी उसके बूब्स का साइज कुछ अलग ही
लग रहा था और उसके बूब्स इतने भी विकसित नही थे कि औरतों की तरह दरार सी नजर आए लेकिन
इतने बडे थे कि उसके गले में से घाटियों जैसा दिखाइ दे रहा था।
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09-26-2012, 06:01 PM
Post: #7
RE: मस्तानी बहन
मै पूरे दिन रुचि को महसूस कराता रहा कि मैं उसके बूब्स की तरफ़ देख रहा हूं यही नही मैं उसके साथ खेल खेल में उसके कूल्हों और पीठ पर भी हाथ फ़ेरता रहा रुचि मेरी हरकतों को समझ कर भी अन्जान बनने की कोशिश करती रही और मेरी किसी भी बात का विरोध नही किया बल्कि मेरा साथ ही दिया मैने पूरे दिन में कई बार रुचि की cविकसित होती हुइ चूचियों को किसी ना किसी बहाने से हाथ लगाया और वो मेरे हाथ लगाते ही जड हो जाती थी मुझे लगता था कि वो इससे ज्यादा चाहती है।
अब मैंने उसके साथ दस दिनों तक चैट नही की और इस बीच मैने अपना जलवा पूरी तरह से दिखाया मैं उसको जबरदस्ती गोद में उठा लेता, कभी मैं उसको पीछे से पकड लेता और अपना लण्ड उसके कूल्हों पर महसूस करवा देता मै जानता था कि उसे इस खेल में मजा आ रहा है क्योंकि उसने मेरा कभी विरोध नही किया और कई बार जब मैने नेकर या पायजामा पहना तो अपना लण्ड अन्डरवीयर से बाहर करके उसके सामने जानबूझ कर जाता और वो मेरी ओर देखती रहती थी जब वो कम्प्यूटर पर बैठती तो मैं जानबूझ कर उसके पास नही जाता था क्योंकि मैं जानता था कि वो चैटिंग पर मेरा ही इन्तजार कर रही है।

द्स दिनों के बाद जब मैं चैटिंग पर बैठा तो वो चैट पर आते ही बोली

रुचि : तुम तो मण्डे को ही आने वाले थे

मैं : सारी मुझे कोइ काम पड गया था

रुचि : ओके मैने तुम्हारा वेट किया


मैं : सारी

रुचि : तुमने अपनी सिस्टर से सेक्स किया इन दिनों

मैं : आज आते ही मूड में हो

रुचि : मै तो ऐसे ही पूछ रही थी

मैं : यार इन दिनों काम भी बहुत था इसलिए 2-3 बार ही मौका मिला

रुचि : कैसे करते हो तुम, मेरा मतलब है कहां करते हो घर पर या बाहर

मैं : हम लोग अक्सर घर की छत पर बने स्टोर में करते हैं और जब ज्यादा मौका रहता है तब बेडरूम में करते है

रुचि : तुम्हारी बहन कितने साल की है

मैं ; वो भी लगभग तुम्हारी उम्र की है

रुचि : शुरुआत तुमने की थी या तुम्हारी सिस्टर ने

मै : मै उसके साथ एक बार रात में सोया था और उस दिन मैने उसे बातों बातों में उसके बूब्स प्रेस किये
पहले तो वो नही मानी पर मेरे रिक्वेस्ट करने पर उसने अपने बूब्स को किस करने दिया।


रुचि : फ़िर

मैं : फ़िर मैने उसकी शर्ट खोल दी और बूब्स चूस कर उसे अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया और उसे जबरदस्त एक्साइटेड कर के पुरा काम कर लिया

रुचि : उसके दर्द नही हुआ

मैं : थोडा सा हुआ था पहली दूसरी बार में उसके बाद नही हुआ

रुचि : क्या वो सचमुच में पूरा सेक्स कर लेती है मेरा मतलब है वो तुम्हारा पूरा लण्ड अन्दर घुसवा लेती है क्या

मैं : हां वो पूरा सेक्स करती है और ब्लू फ़िल्म की तरह करती है जैसा मैने तुम्हे पहले बताया था

रुचि : वो तुम्हारा लण्ड सचमुच में मुंह मे लेकर चूसती है क्या

मैं : हां वो मेरा वीर्य भी पी जाती है उससे उसके बूब्स बडे हो गए और सेक्स करने की पावर भी ज्यादा हो गई। कई बार तो वो मेरा सिर्फ़ चूस के निकाल देती है और सारा पी जाती है।

रुचि : कितना वीर्य निकलता है एक बार में

मैं : मैने नापा तो नही पर एक से डेढ चम्मच तो निकलता ही है

रुचि : मैं आज बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो रही हूं

मै : मुझे भी लग रहा है तुम एक्साइटेड हो

रुचि : मेरे भैया मुझमे इन्ट्रेस्ट लेते है मैं तुमको बताना चाहती थी


मैं : वो कैसे

रुचि : मैने तुम्हारे कहने पर वो ड्रेस पहनी थी और भैया ने मेरे साथ ऐसी हरकतें की जो मैं सोच भी नही सकती थी वो मेरे बूब्स की तरफ़ तब भी देखते है जब मैं नार्मल ड्रेस पहनती हूं।

मैं : इसका मतलब तुम्हारे भैया तुमसे सेक्स करना चाहते है

रुचि : मुझे भी ऐसा ही लगता है, वो कई बार मुझे पकड कर अपनी तरफ़ खींच लेते हैं और अपना लण्ड मुझसे टच करते हैं।

मै : अभी तुम्हारे भैया कहां हैं

रुचि : वो अपने किसी दोस्त के पास गए है

मैं : क्या तुम अपने भैया से करना चाहती हो मेरी तरह

रुचि : मुझे नही पता लेकिन अब मैं भैया के बारे में सोच कर एक्साईटेड हो जाती हूं

मैं : तुम ही सोच कर बताओ तुम करना चाहती हो या नही


रुचि : हां

मैं : तो कर लो

रुचि : पर मुझे डर लगता है और मुझे पता नही कि भैया करना भी चाहते हैं या नही, बुरा मान गए तो

मैं : अगर तुम्हे पता ही लगाना है तुम भी भैया के साथ वही करो जो भैया तुम्हारे साथ करते है।

रुचि : पर कैसे

मै : अपने भैया से चिपको और ड्रेस वही वाली ज्यादा पहनो जिसमें कुछ दिखता हो जितना हो सके उसके पास रहो

रुचि : अब मैं ऐसा ही कर रही हूं, वो कई बार मेरे बूब्स पर हाथ लगाते हैं तो मैं नही हटती

मैं : जब भी शुरुआत करना मुझे जरुर बताना और तुम्हे एक बात और बता देता हूं तुम लण्ड जरूर चूसना उसमे लडकों को ज्यादा मजा आता है

रुचि : पहले शुरु तो होने दो उसके बाद मैं सब कुछ कर लूंगी, मै उनके साथ वो सब करूंगी जो मैने इण्टरनेट पर देखा है।

मै : अब तुम्हारे बूब्स दिखाओ


रुचि : आज नही दिखा सकती

मै : कब दिखाओगी

रुचि : दिखा दूंगी

अब रुचि के मूड का पता चल गया था हमारे रिश्तेदार की शादी थी सो मैने रुचि को ही ले जाने का प्लान किया। रुचि अब मेरे पास रोज शाम को पढने के लिए आ जाती थी मैने उसे मना किया तो उसने मम्मी को कह दिया भैया मुझे नही पढाते तब मम्मी ने ही कहा कि रुचि को पढा दिया कर मैने मम्मी को कहा मैं इसे खाना खाने के बाद रात को पढा दिया करूंगा। मैने भी रुचि को मन ही मन दाद दी, उसने मेरे नजदीक रहने का कितना अच्छा बहाना ढूंढा था।
मैने खाना खाने के बाद पढाने के लिए इसलिए कहा क्योंकि उसके बाद सोने का टाइम हो जाता है या फ़िर मम्मी पापा अपने बेडरूम में टीवी देखते हैं और उस समय हम सबसे ज्यादा अकेले होते हैं, रुचि भी मम्मी के सामने तो सलीके से कपडे पहनती थी पर जब मेरे साथ होती थी तब कुछ ज्यादा ही लापरवाह हो जाती थी मैं उसकी एक एक बात को गौर कर रहा था। दो दिन तक मैं उसे सामान्या तरीके से पढाता रहा फ़िर तीसरे दिन वो वही वाला सूट पहन कर आइ जिसमे उसके बूब्स दिखाइ देते थ।

उस दिन मैंने उसे अपनी बगल में बैठा लिया वो मेरे पास आ कर बैठ गई मैं उसको पढाते हुए उसके सूट के अन्दर देख लेता था उसके बूब्स भरे भरे से हो गए थे और उसने अन्दर समीज पहने हुए थी मै बीच बीच में उसके कन्धे पर हाथ रख देता था उसने एक बार तो मेरी तरफ़ देखा लेकिन बाद में उसने मेरे हाथ रखने पर कोइ ध्यान नही दिया। शायद वो मेरा विरोध नही करना चाहती थी।
इधर मेरे पायजामे में मेरा लण्ड खडा हो गया मैने उसे छुपाने के बजाय वैसे ही रखा ताकि रुचि उसे देख सके अब मैं रुचि के बूब्स की तरफ़ देखता और रुचि मेरे लण्ड की तरफ़ चोरी-चोरी देखती रही मै रोजाना उसे 10 बजे तक पढाता था लेकिन उस दिन 10:30 तक रुचि नही गई तो मम्मी ने उसे आवाज लगाइ – रुचि क्या कर रही है बहुत देर हो गई बेटा सोजा।
रुचि तुरन्त मेरे बगल से उठ कर दरवाजे तक गई और मम्मी से बोली – मम्मी मेरे परसों से टेस्ट हैं मै तैयारी कर रही हूं
मम्मी बोली – ठीक है बेटा मै सोने जा रही हूं तू ज्यादा देर तक मत जागना
रुचि ने कहा – मम्मी मुझे थोडा टाइम लगेगा जैसे ही काम हो जाएगा मैं सो जाऊंगी
अब रुचि मेरे पास वापस आकर बैठ गई इस बार उसने अपनी चेयर मुझसे एकदम सटा ली अब जरा सा हिलने डुलने पर हम एक दूसरे से टच हो जाते थे अब मै उसके कन्धे से हाथ हटाते हुए उसकी पीठ तक सहलाते हुए ले आता था अब रुचि को भी मजा आने लगा था क्योंकि मैं जैसे ही उस पर से हाथ हटा लेता वो मेरे और नजदीक आने की कोशिश करने लगती वो लगभग एक घण्टे मेरे साथ रही और हम दोनो के बीच अनकहा सेक्स हो रहा था। इस बीच मैने उसकी जांघों पर भी हाथ रखा पर उसने कोइ विरोध नही किया।
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