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मेरी बहू मेनका
02-27-2013, 12:18 PM
Post: #51
RE: मेरी बहू मेनका
रात 9 बजे राजा साहब मेनका & उसके माता-पिता के साथ उनके महल मे बैठे खाना खा रहे थे.उनलोगो ने ज़िद करके राजा साहब को आज रात महल मे रुक कल सुबह राजपुरा जाने के लिए तैय्यार कर लिया था.

खाने के बाद राजा साहब को 1 नौकर उनके लिए तैय्यर किए गये कमरे मे ले आया.थोड़ी ही देर बाद मेनका भी वाहा 1 नौकर के साथ आई,"लाओ ग्लास हमे दो,शंभू.",ग्लास थामा वो नौकर कमरे से बाहर चला गया.

"ये लीजिए दूध पीकर सो जाइए."

राजा साहब ने 1 हाथ बढ़ा ग्लास लिया & दूसरा उसकी कमर मे डाल उसे अपने पास खींच लिया,"हमे ये नही वो दूध चाहिए.",उनका इशारा उसकी छातियो की तरफ था.

"क्या कर रहे हो?कोई आ जाएगा...छ्चोड़ो ना!",मेनका घबरा के उनकी गिरफ़्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी.

"कोई नही आएगा.चलो हमे अपना दूध पिलाओ.",उन्होने उसके 1 गाल पे चूम लिया.

"प्लीज़..यश...!कोई देख लेगा ना!"

"जब तक नही पिलाओगी,नही छ्चोड़ेंगे.",उन्होने उसके होंठ चूम लिए.

"अच्छा बाबा..पहले ये ग्लास ख़तम करो..जल्दी!",उसने उनके हाथ से ग्लास ले उनके मुँह से लगा दिया.राजा साहब ने 1 घूँट मे ही उसे ख़तम कर दिया.,"चलो अब अपना दूध पिलाओ."

"शंभू!",मेनका ने नौकर को पुकारा.

"जी!राजकुमारी.",नौकर की आवाज़ सुनते ही राजा साहब अपनी बहू से अलग हो गये.

"ये ग्लास ले जाओ.",और उसके पीछे-2 वो भी कमरे से बाहर जाने लगी,दरवाज़े पे रुक के मूड के उसने शरारत से राजा साहब की तरफ देखा & जीभ निकाल कर चिढ़ते हुए अंगूठा दिखाया & चली गयी.राजा साहब मन मसोस कर रह गये.उनका खड़ा लंड उन्हे बहुत परेशान कर रहा था.उसे शांत करने की गाराज़ से वो कमरे से बाहर आ टहलने लगे.तभी उन्हे रानी साहिबा,मेनका की मा आती दिखाई दी.

"क्या हुआ राजा साहब?कोई तकलीफ़ तो नही?"

"जी बिल्कुल नही.सोने के पहले थोड़ा टहलने की आदत है बस इसीलिए यहा घूम रहे हैं....बुरा मत मानीएगा पर ये दावा किसी की तबीयत खराब है क्या?",उन्होने उनके हाथों की तरफ इशारा किया.

"अरे नही,राजा साहब बुरा क्यू मानेंगे.हुमारी नींद की गोलिया हैं,कभी-कभार लेनी पड़ जाती हैं."

इसके बाद थोड़ी सी और बातें हुई & फिर दोनो अपने-2 कमरो मे चले गये पर राजा साहब के आँखों मे नींद कहा थी.जब तक अपनी बहू के अंदर वो 2-3 बार अपना पानी नही गिरा देते थे,उन्हे नींद कहा आती थी.मेनका के जिस्म की चाह कुच्छ ज़्यादा भड़कने लगी तो उन्होने उस पे से ध्यान हटाने के लिए दूसरी बातें सोचना शुरू किया.


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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #52
RE: मेरी बहू मेनका
वो जब्बार से बदला लेने के बारे मे सोचने लगे.उनका दिल तो कर रहा था की उस नीच इंसान को अपने हाथो से चीर के रख दे पर ऐसा करने से वो क़ानून की नज़रो मे गुनेहगार बन जाते.अगर वो क़ानून का सहारा लेते तो जब्बार शर्तिया बच जाता क्यूकी कोई भी सबूत नही था जोकि उसे विश्वा का कातिल साबित करता.उसे सज़ा देने के लिए उन्हे उसी के जैसी चालाकी से काम लेना होगा,ये उन्हे अच्छी तरह से समझ मे आ गया था.मगर कैसे....वो ऐसी चाल चलना चाहते थे जिस से साँप भी मार जाए & लाठी भी ना टूटे.पहले की बात होती तब शायद वो इतना नही सोचते & अभी तक जब्बार उनके हाथो मर भी चुका होता पर अब मेनका की ज़िंदगी भी उनके साथ जुड़ी थी & वो कोई ऐसा कदम नही उठना चाहते थे जिस से उसे कोई परेशानी उतनी पड़े.उसका ख़याल आते ही उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा.

वो फिर से बेचैन हो उठे.1 बार तो उन्होने सोचा कि लंड को हाथ से ही शांत कर दे पर फिर उनके दिल ने कहा कि लानत है राजा यशवीर सिंग!तुम्हारी दिलरुबा बस चंद कदमो के फ़ासले पे है & तुम खुद को मूठ मार कर शांत करोगे!वो तुरंत उठ खड़े हुए & कमरे से निकल गये.बाहर अंधेरा था,वो दबे पाँव मेनका के कमरे की ओर गये & धीरे से दरवाज़े पे हाथ रखा.

मेनका को भी कहा नींद आ रही थी.उसे अपने ससुर के लंड की ऐसी लत लगी थी की रात होते ही बस वो उनकी मज़बूत बाहों मे क़ैद हो उनसे जम कर चुदवाना चाहती थी.वो बिस्तर पे कर वते बदल रही थी & उसकी बगल मे उसकी मा गहरी नींद मे सो रही थी.उसकी चूत राजा साहब के लंड के लिए बावली होने लगी तो वो नाइटी के उपर से ही उसे दबाने लगी.तभी उसकी नज़र दरवाज़े पे गयी जोकि आहिस्ते से खुला & उसे उसमे उसके ससुर नज़र आए.

वो जल्दी से उठ दबे पाँव भागते हुई दरवाज़े पे आई,"क्या कर रहे हो?तुम बिल्कुल पागल हो.जाओ यहा से!मा सो रही हैं यहा.",वो फुसफुसा.

"चले जाएँगे पर तुम भी साथ चलो."

"ऑफ..ओह!तुम सच मे पागल हो गये हो रात मे मा उठ गयी तो क्या होगा?!"

"ठीक है तो हम ही यहा आ जाते हैं.",राजा साहब अंदर आए & दरवाज़ा बंद कर दिया.

"यश..यहा...जाओ ना..मा उठ जाएँगी!"

"नही उठेंगी.नींद की गोलिया उन्हे उठने नही देंगी.",उन्होने उसे बाहों मे भर के चूम लिया.

"नही...प्लीज़..",मेनका कसमसाई पर राजा साहब ने उसे पागलो की तरह चूमना शुरू कर दिया था.चाहिए तो उसे भी यही था पर उसकी मा के कमरे मे होने की वजह से उसे बहुत डर लग रहा था.राजा साहब भी जानते थे कि सब कुच्छ जल्दी करना होगा.उन्होने उसकी नाइटी नीचे से उठा अपने हाथ अंदर घुसा दिए.मेनका ने नाइटी के नीचे कुच्छ भी नही पहना था & अब राजा साहब के हाथों मे उसकी भरी-2 गंद मसली जा रही थी.

उसकी आँखे बंद हो गयी,"..ना..ही..यश..मा...जाग जा..एँ...गी.."

राजा साहब उसे चूमते हुए दीवार से लगे 1 छ्होटे शेल्फ के पास ले गये & उसे उसपे बिठा दिया.उनका 1 हाथ उसकी छातिया दबा रहा था & दूसरा चूत मे घुस गे था.मेनका हवा मे उड़ने लगी.उसने अपनी आँखें खोल अपनी मा की तरफ देखा,वो बेख़बर सो रही थी,उसे बहुत डर लग रहा था पर साथ ही मज़ा भी बहुत आ रहा था.पकड़े जाने का डर उसे 1 अलग तरह का मज़ा दे रहा था.

राजा साहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को छेड़ने लगी तो उसकी चूत बस पानी पे पानी छ्चोड़ने लगी.बड़ी मुश्किल से उसने अपनी आहों पे काबू रखा था.उसने भी अपने हाथ राजा साहब के कुर्ते मे घुसा उनकी पीठ नोचना शुरू कर दिया.राजा साहब ने जैसे ही महसूस किया कि मेनका उनके चूत रगड़ने से झाड़ कर पूरी तारह गीली हो चुकी है,उन्होने हाथ पीछे ले जाके उसकी नाइटी का ज़िप खोल उसे नीचे कर दिया.अब नाइटी उसकी कमर पे थी & उसकी चुचियाँ & चूत नंगे थे.

राजा साहब झुके & उसकी छातिया चूसने लगे,उनका 1 हाथ अभी भी उसकी चूत पे लगा हुआ था.मेनका ने दीवार से टिकाते हुए अपना बदन कमान की तरह मोड़ अपनी छातिया अपने ससुर की तरफ & उभार दी & उनके सर को पकड़ उनपे दबा दिया.उसकी कमर भी हिलने लगी & वो उनके हाथ को चोदने लगी.

तभी उसकी मा ने करवट ली तो मेनका & राजा साहब जहा थे वही रुक गये.मेनका का कलेजा तो उसके मुँह को आ गया & सारा नशा हवा हो गया.दोनो सांस रोके उसकी मा को देख रहे थे.उन्होने फिर करवट ली & इस बार उनकी पीठ उन दोनो की तरफ थी.राजा साहब ने फिर से धीरे-2 अपनी बहू की चूत कुरेदना शुरू कर दिया.मेनका तो शेल्फ से उतर कर वापस सोने की सोच रही थी पर उसके ससुर की इस हरकत ने उसकी चूत की प्यास को फिर से जगा दिया.1 बार फिर राजा साहब उसकी छत पे झुक उसके निपल्स चूसने लगे.

मेनका फिर से गरम हो गयी तो उसने उनके पाजामे मे हाथ डाला तो पाया की राजा साहब ने अपनी झांते साफ कर ली थी.उसे उनपे बहुत प्यार आया & वो लंड को मुट्ठी मे भर हिलाने लगी.राजा साहब के लिए ये इशारा काफ़ी था,उन्होने अपना पाजामा उतार दिया & शेल्फ पे बैठी मेनका की जांघे खोल उनके बीच आए & अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया.मेनका ने अपनी आ उनके कंधे मे दाँत गाड़ा के ज़ब्त की & अपनी टांगे & बाँहे उनके बदन से लिपटा कर अपनी कमर हिला कर उनके साथ चुदाई करने लगी.राजा साहब उसके उरज़ो को दबाते हुए उसके निपल्स अपनी उंगलियो के बीच ले मसल्ते हुए उसे चूमने लगे.

उनका हर धक्का उनके लेंड़ को मेनका की कोख पे मार रहा था & वो बस झाडे चले जा रही थी.राजा साहब का जोश भी अब बहुत बढ़ गया था,वो अब बहुत ज़ोर के धक्के मार रहे थे.चोद्ते-2 उन्होने अपने हाथ नीचे ले जा उसकी गंद को थामा & उसे शेल्फ से उठा लिया.अब मेनका शेल्फ से कुच्छ इंच उपर हवा मे अपने ससुर से चिपकी उनसे चुद रही थी.राजा साहब का लंड उसकी चूत के दाने को रगड़ता हुआ सीधा उसकी कोख पे ऐसे वार कर रहा थी की थोड़ी ही देर मे मेनका झाड़ गयी & अपने ससुर की गर्दन मे मुँह च्छूपा सुबकने लगी.राजा साहब ने उसे उठाए हुए ही अपनी कमर हिला उसकी चूत को अपने विर्य से भर दिया.

उन्होने उसे वापस शेल्फ पे बिताया & उसके बालों को सहलाते हुए उसके सर को हौले- चूमने लगे.जब मेनका थोडा सायंत हुई तो उसने भी उनके सीने पे हल्के से चूम लिया.राजा साहब ने 1 नज़र उसकी सोई हुई मा पे डाली & फिर उसे बाहों मे भर कर उसके होंठो को चूम लिया.धीरे से अपना सिकुदा लंड उसकी चूत मे से निकाला & फिर उसकी नाइटी उसे वापस पहना दी,फिर अपना पाजामा बाँध लिया & उसे गोद मे उठा कर उसे उसकी मा की बगल मे लिटा दिया.

जैसे ही वो जाने लगे मेनका ने उनके गले मे बाहें डाला अपने उपर खींच कर चूमा & फिर कान मे फुसफुसा,"आइ लव यू."

"आइ लव यू टू.",राजा साहब ने उसके होठों को चूमा & कमरे से बाहर चले गये.

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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #53
RE: मेरी बहू मेनका
मलिका कमरे मे लेटी अपनी चूत मे उंगली कर रही थी,जब्बार 2 दीनो से बाहर गया हुआ था & वो 2 दीनो से चूड़ी नही थी.तभी उसका फोन बजा,"हेलो."

"हा,मैं देल्ही मे हू.कल सवेरे 10 बजे तक वापस आऊंगा.",ये जब्बार था.

थोड़ी देर तक बात करने के बाद मलिका ने फोन किनारे रखा & फिर से चूत रगड़ने लगी.वो लंड के लिए पागल हो रही थी.तभी उसे कल्लन का ख़याल आया तो उसने फोन उठा कर उसका नंबर. डाइयल किया.

"हेलो.",कल्लन ने फोन उठाया.

"क्या कर रहा है,ज़ालिम?"

"बस यहा से जाने की तैय्यरी मे हू.",जब्बार ने कल ही कल्लन के अकाउंट मे उसके हिस्से के बाकी पैसे जमा कराए थे.कल्लन का काम हो गया था & अब वो किसी और चक्कर मे 2-3 महीनो के लिए बाहर जा रहा था.

"मुझे यहा तड़प्ता छ्चोड़ कहा जा रहा है?जब्बार देल्ही मे है.यहा आ के मेरी आग बुझा दे ना."

"मैं वाहा आने का चान्स नही ले सकता.अगर किसी ने देख लिया तो सारा भंडा फूटने मे देर नही लगेगी....वैसे तू चाहती है तो तू यहा आ जा.मैं कल चला जाऊँगा.",कल्लन भी मलिका को चोदने का लालच हो आया था.

"अच्छा ठीक है.मैं ही आती हू.वो कमीना तो कल सुबह आएगा.मैं आती हू पर कहा आना है?"

"शहर के चोवोक बाज़ार मे वो 'फियेस्टा' केफे है ना,वही पहुँच जाना.मैं वाहा से तुम्हे अपने घर ले चलूँगा.कितने बजे आओगी?"

"मैं 3 बजे तक 'फियेस्टा' पहुँच जाऊंगी.",उसने दीवार-घड़ी की तरफ देखा.

"ठीक है."

कहते हैं कि शातिर से शातिर मुजरिम से भी 1 ग़लती कर देता है & यहा तो कल्लन ने 3-3 ग़लतिया कर दी थी.पहली ग़लती उसने उस दिन की थी जब बॅंगलुर से आने के बाद मलिका ने उसे फोन किया & उसने उसे अपना शहर का ठिकाना बताया.वो कुच्छ दीनो मे अपने ठिकाने बदल देता था,पर मलिका उस से चुद ने के लिए लगभग उसके हर ठिकाने पे आ चुकी थी.दूसरी ग़लती उसने ये की,कि अपना जाना कल पे टाल दिया.

इन दोनो ग़लतियो का उसे खामियाज़ा नही भुगतना पड़ता अगर वो तीसरी ग़लती नही करता & तीसरी ग़लती थी कि वो चोवोक बाज़ार के मल्टिपलेक्स मे 11:30 बजे का फिल्म शो देखने चला गया.आपको लग रहा होगा कि कल्लन कोई स्कूल स्टूडेंट तो नही है जो बंक मार कर फिल्म देखना उसकी ग़लती हो गयी.पर नही दोस्तो,देखिए कैसे उस फिल्म के चलते कल्लन अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल मे फँसता है...

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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #54
RE: मेरी बहू मेनका
दुष्यंत वेर्मा का जासूस मनीष अपनी गर्लफ्रेंड पूजा के साथ फिल्म देख रहा था या यू कहें पूजा को चूमने-चाटने के बीच वो फिल्म भी देख रहा था..."आहह..इंटर्वल होने वाला है,लाइट्स जल जाएँगी.अब छ्चोड़ो ना!",पूजा ने उसे परे धकेल दिया.

"अच्छा बाबा.",तभी लाइट्स जल गयी,"क्या लॉगी कोल्ड ड्रिंक या कॉफी?",मनीष खड़ा होकर नीचे उतरने लगा.उनकी सीट्स सबसे आख़िरी रो की कॉर्नर मे थी.

"कोल्ड ड्रिंक ले आना & पॉपकॉर्न भी."

"ओके."

शो हौसेफुल्ल जा रहा था & रेफ्रेशमेंट काउंटर्स पे भी काफ़ी भीड़ थी.मनीष 1 लाइन मे खड़ा अपनी बारी आने का इंतेज़ार करता हुआ इधर-उधर देख रहा था कि तभी उसकी नज़र साथ वाली लाइन मे खड़े 1 लंबे शख्स पे पड़ी...ये तो वही आदिवासी के मोबाइल की फोटो वाला इंसान लग रहा था जिसकी उसे तलाश थी.इसने अपना हुलिया बदला हुआ है.ये फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली है...ये वही है.

पर फिर उसे लगा कि पहले बात कन्फर्म करनी चाहियर.उसने तुरंत दुष्यंत वेर्मा को फोन लगाया,इस केस के बारे मे एजेन्सी मे बस यही दोनो इस केस के बारे मे जानते थे,"सर,मैं मनीष.."&उसने पूरी बात बता दी.

"मनीष,किसी भी तरह उस आदमी का फोटो अपने मोबाइल केमरे से ले के मुझे भेजो.मैं यहा बॉमबे के ऑफीस मे हू.यही से दोनो फोटोस चेक कर के तुम्हे बताता हू."

"मनीष पूजा के साथ फिर से फिल्म देखने लगा.वो शख्स उनसे 3 रो नीचे साथ वाले सीट्स के ब्लॉक की सेंटर कॉर्नर सीट पे बैठा था.मनीष पूजा को बाहों मे भर प्यार कर रहा था पर उसकी नज़र लगातार उस शख्स पे बनी हुई थी.उसका फोन बजा,"एस सर?"

"तुम सही हो मनीष,ये वही इंसान है.अब तुम 1 काम करो.मैं तो वाहा हू नही.अब तुम्हे ही सब संभालना है.मैं अभी यशवीर को खबर करता हू कि वो शहर पहुँचे & तुम साए की तरह इस आदमी के पीछे लगे रहो.मैं यश को तुम्हारा नंबर. भी दे देता हू.ऑफीस फोन करता हू,1 आदमी हॉल के बाहर शो ख़त्म होने के बाद वो किट तुम्हे दे जाएगा.ठीक है.सब काफ़ी सावधानी से संभालना बेटा.इस आदमी को हमे अपनी पकड़ मे लेना है.पोलीस के पास नही जा सकते क्यूकी हुमारे पास 1 भी पुख़्ता सबूत नही है.इसीलिए पहले हमे ही इस से सब उगलवाना होगा.ओके,बेटा.बेस्ट ऑफ लक!"

"थॅंक्स,सर."

"क्या यहा भी काम की बातें कर रहे हो?"

"सॉरी,डार्लिंग.",मनीष ने नाराज़ पूजा को बाहों मे भर के चूमा & उसके टॉप के उपर से ही उसकी चूचिया दबा दी.

"अफ..बदमाश..",पूजा मज़े मे फुसफुसा.दोनो इसी तरह फिल्म ख़त्म होने तक 1 दूसरे से चिपते रहे.

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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #55
RE: मेरी बहू मेनका
पिक्चर ख़त्म होने ही वाली थी,"पूजा..",मनीष अपनी गर्लफ्रेंड को बाहों मे भरे हुए उसके कान मे फुसफुसाया.

"ह्म्म.."

"वो 3 रो नीचे सेंटर कॉर्नर वाली सीट पे ब्लॅक शर्ट वाला इंसान दिख रहा है?"

"कौन?वो जो हंस रहा है?",पूजा ने मनीष के आगोश मे ही गर्दन घुमा कर देखा.

"हा,वही."

"कौन है वो?"

"1 क्रिमिनल जिसकी मैं तलाश कर रहा था.आज इसे पकड़ने मे मेरी हेल्प करोगी?"

"ये भी कोई पुच्छने की बात है.क्या करना है?"

"मैं अभी निकल कर पार्किंग से बाइक निकलता हू वरना बाद मे बहुत भीड़ हो जाएगी & ये कही हमसे बच के ना निकल जाए.तुम उस सेकुच्छ दूरी पे रह उसके पीछे-2 निकलना & देखना कि ये किस तरफ जाता है.अगर पार्किंग की ओर आता है तो मुझे फोन करना नही तो बस इसके पीछे सावधानी से चलती जाना.मैं बाइक लेकर बाहर मैं गेट पे मिलूँगा."

"ठीक है."

मनीष हॉल से निकल भागता हुआ पार्किंग की ओर जा रहा था कि उसका मोबाइल बजा,"हेलो."

"मनीष,मैं अमीन.किट लाया हू."

"वेरी गुड यार.इधर पार्किंग मे आजा."

थोड़ी ही देर बाद 1 बेल्ट-बॅग जिसमे 1 नाइलॉन की रस्सी,1 हथकड़ी,1 क्लॉत नॅपकिन & ई क्लॉरोफॉर्म की शीशी उसके हाथों मे थी.यही वो किट थी जिसे मनीष ने अपने गले मे लटका लिया & बाइक स्टार्ट कर तुरंत मैं गेट पे पहुँचा.इतनी देर मे शो ख़त्म हो गया था & सारी भीड़ हल्लसे बाहर जा रही थी.गेट पे उसे पूजा दिखी,"मनीष,वो देखो उधर.वो उस ऑटो मे बैठ रहा है.",वो उसके पीछे बैठ गयी & मनीष ने बाइक कल्लन के ऑटो के पीछे लगा दी.

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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #56
RE: मेरी बहू मेनका
राजा साहब मेनका के साथ उसके मायके से 11 बजे राजपुरा पहुँचे &सीधा ऑफीस गये.अपने चेंबर मे उन्होने अपनी बहू को हमेशा की तरह बाहों मे भर कर चूमना शुरू कर दिया & उसने भी हमेशा की तरह घबरा कर उनसे छूटने की कोशिश.

"अफ...तुम बिल्कुल पागल हो.... किसी दिन कोई हमे ज़रूर देख लेगा.",उसने उनके बाल पकड़ उनका चेहरा अपनी गर्दन से अलग किया.

"तुम बेकार मे इतना डरती हो.कुच्छ नही होगा.",उनके हाथ उसकी नंगी कमर को सहला रहे थे."घबराव मत.अभी हुमारे पास वक़्त नही है,शहर जाना है अपने वकील से मिलने.कुच्छ ज़रूरी काम है."

"क्या?फिर से जा रहे हो.",मेनका ने गुस्से से पूचछा.

"लो,अभी तो हमे अलग कर रही थी & अब जा रहे हैं तो नाराज़ हो रही हो."

"हम तो यहा ऑफीस मे मना करते हैं.घर पे थोड़े ही ना रोकते हैं.",उसने उनके सीने पे सर रख दिया.

राजा साहब हँसे & उसका चेहरा अपने हाथों मे ले उसके रसीले होंठ चूमने लगे.थोड़ी देर तक दोनो 1 दूसरे को चूमते रहे,फिर राजा साहब ने उसके होतो को आज़ाद किया,"अच्छा,अब चलते हैं."

"जल्दी आना."

"ओके."

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02-27-2013, 12:18 PM
Post: #57
RE: मेरी बहू मेनका
जब दुष्यंत वेर्मा का फोन राजा साहब के पास आया तो वो अपने वकील को अपनी नयी वसीयत जिसमे उन्होने अपना सब कुच्छ मेनका के नाम कर दिया था,लिखवा रहे थे.

"यार..यश ..तेरे कहे मुताबिक केवल मनीष उसके पीछे है.मैं उसकी मदद के लिए किसी और को नही भेज रहा हू.ऐसे काम मे बहुत ख़तरा होता है.तुम कहो तो मैं कुच्छ और लोगो को भी इस काम पे लगा देता हू."

"नही,दुष्यंत.ऐसा नही करना.फ़िक्र मत करो,मनीष को मैं किसी भी तरह के ख़तरे मे नही पड़ने दूँगा.तुम मुझे उसका नंबर. दो,मैं उस से बात कर के आगे की प्लॅनिंग करता हूँ."

"ओके,यश.ये ले उसका नंबर..."

कल्लन का ऑटो 1 ट्रॅफिक सिग्नल पर खड़ा था.उसके 2 गाड़ियाँ पीछे मैन्श & पूजा भी बाइक पे थे,"पूजा.तुम यहा से ऑटो लेकर घर चली जाओ.पता नही ये आदमी कहा जा रहा है.आगे ख़तरा भी हो सकता है."

"मनीष,मुझे बहुत डर लग रहा है.मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी."

"बात समझो,पूजा.मुझे कुच्छ नही होगा.तुम घर जाओ.मैं तुम्हे फोन करूँगा.चलो...वो देखो वो ऑटो खाली है..जाओ."

"मनीष.."

"मुझे कुच्छ नही होगा,डार्लिंग.फ़िक्र मत करो.देखो बत्ती हरी होने वाली है.चलो जल्दी से वो ऑटो पाकड़ो."

"ठीक है.मैं तुम्हारे फोन का इंतेज़ार करूँगी."

मनीष अब अकेला ही कल्लन का पीचछा करने लगा.मोबाइल बजा तो उसने हंडसफ़री ऑन कर दिया,"हेलो."

"हम यशवीर सिंग बोल रहे हैं,मनीष.तुम इस वक़्त कहा हो?"

"नमस्ते,सर.लगता है ये आदमी चोवोक बाज़ार की ओर जा रहा है.मैं बाइक से उसके ऑटो का पीचछा कर रहा हू."

"ठीक है,हम भी वही पहुँचते हैं.",& फोन काट गया.

थोड़ी देर बाद मनीष राजा साहब के साथ उनकी स्कॉर्पियो मे बैठा था,गाड़ी 'फियेस्टा' केफे केसाम्ने खड़ी थी जहा थोड़ी देर पहले कल्लन गया था.थोड़ी देर बाद 1 कार रुकी &मलिका उसमे से उतर कर केफे के अंदर चली गयी.

"सर,ये तो..-"

"हा,मनीष.अब तो शक़ नही पक्का यकीन है कि ये इंसान जब्बार का साथी है & हुमारे बेटे की मौत मे इसका हाथ है.",तभी दोनो केफे से बाहर आकर मलिका की कार मे बैठ कही जाने लगे.मनीष दौड़ कर अपनी बाइक पे चला गया & वो & राजा साहब 1 बार फिर कल्लन का पीचछा करने लगे.मलिका ने कार 1 सस्ते से होटेल के सामने रोक दी & कल्लन के साथ होटल के अंदर चली गयी.

होटेल के कमरे के अंदर मलिका & कल्लन 1 दूसरे के कपड़े उतारते हुए पागलों की तरह चूम रहे थे.."..कितना तदपि हू ज़ालिम तेरे लिए.",मलिका ने कल्लन की पॅंट 1 झटके मे उतार दी & झुक कर उसका लंड अपने मुँह मे भर लिया.कल्लन खड़े-2 ही उसके सर को पकड़ उसका मुँह चोदने लगा.मालिका ने लंड चूस्ते हुए उसकी कमर को अपनी बाहों मे कस लिया & अपनी 1 उंगली उसकी गंद के छेद मे डाल दी.

"एयेए..आहह..",कल्लन जोश मे करहा.उसने अपनी कमर और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.मलिका ने उसका लंड छ्चोड़ दिया & उसे बिस्तर पे धकेल दिया & फिर उसकी छाती पे चढ़ अपनी चूत उसके मुँह पेरख़् दी & 1 बार फिर उसका लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी.कल्लन ने उसकी गंद को मसल्ते हुए अपनी जीभ उसकी चूत मे डाल दी & लगा उसके दाने को चाटने.

मलिका जोश मे अपनी कमर हिलाने लगी & मस्त होकर आहें भरने लगी.कल्लन ने उसे मज़बूती से थाम रखा था & अपनी जीभ तेज़ी से उसकी चूत मे फिरा रहा था.अचानक मलिका ने अपनी चूत उसके चेहरे पे दबा दी अपने मुँह से लंड निकाल अपना चेहरा उसकी झांतो मे च्छूपा लिया,वो झाड़ गयी थी.कल्लन उसकी चूत के छ्चोड़े पानी को चाट रहा था.मलिका थोड़ा होश मे आई तो उसने उसके लंड को पकड़ ज़ोर-2 सहिलना शुरू कर दिया & लंड के सूपदे को अपनी जीभ से च्छेदने लगी.अब कल्लन की बारी थी,उसकी कमर अपने आप हिलने लगी.मलिका ने उसके अंदो को हाथो मे भर कर दबाया & उसका पूरा लंड अपने मुँह मे भर लिया.लंड उसके मुँह से होता हुआ उसके कंठ तक चला गया तो वो मुँह उपर-नीचे कर उसे मुँह से चोदने लगी.

मलिका के हाथो का अंदो पे दबाव & उसके मुँह की हर्कतो ने तुरंत ही कल्लन का पानी निकाल दिया,जिसे मलिका ने खुशी से निगल लिया.थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े रहे,कल्लन उसकी गंद सहलाता रहा & मलिका उसके लंड को हौले- चाटती रही.कुच्छ ही देर मे लंड फिर से खड़ा होने लगा तो मलिका घूम कर अब कल्लन के उपर लेट गयी और उसे चूमने लगी.कल्लन ने उसकी नंगी पीठ & कमर को सहलाने लगा.

उसने उसे बाहों मे भरा & करवट ले उसके उपर चढ़ गया.उसकी गर्दन चूमते हुए उसने अपने हाथों मे उसकी चूचिया भर ली & दबाने लगा.उसने उनके निपल्स को अपनी उंगलियो मे भर कर मसला &फिर 1 चूची को अपने मुँह मे भर लिया 7 दूसरे से उसकी दूसरी चूची मसल्ने लगा.

"..ऊ..ऊओह....और दबा ज़ालिम...और ज़ोर से...अब इस वाली को चूस ना..",उसने अपने हाथो से अपनी 1 चूची उसके मुँह मे डाल दी.

"आनन्न...आनन्नह...हान्न्न..ऐसे ही ..",मलिका ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पे लगा लिया & घुसाने लगी.कल्लन ने 1 धक्का मारा & लंड आधा अंदर चला गया.,"आईईयईी...",मलिका चीखी.

दूसरे धक्के मे लंड पूरा अंदर चला गया & फिर कल्लन ने उसकी चुदाई शुरू कर दी.दोनो 1 दूसरे से चिपते 1 दूसरे को चूम रहे थे.कल्लन कभी उसके चेहरे तो कभी उसकी चूचियो को चूमता & दबाता & मलिका भी अपने नाखूनओ को उसकी पीठ & गांद मे गादती हुई उसकी किस्सस का जवाब देती.उसने अपनी टांगे उसकी कमर पे लपेट ली थी & कमर हिलाकर उसके धक्कों की ताल से ताल मिलाते हुए चुद रही थी.

धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी & थोड़ी ही देर मे मलिका की चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.कल्लन ने जोश मे उसकी 1 चूची पे अपने होंठ कस दिए & उसकी कमर झटके खाने लगी & उसका लंड मलिका की चूत को अपने पानी से भरने लगा.

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02-27-2013, 12:19 PM
Post: #58
RE: मेरी बहू मेनका
थोड़ी ही देर मे मेनका ने अपने होठ खोल दिए & विश्वा ने अपनी जीभ उसके मुँह मे दाखिल करा दी और उसे बिस्तर पे लिटा दिया..उसकी बाहें अभी भी मेनका को कसे हुए थी & उसकी जीभ मेनका की जीभ के साथ खेल रही थी.उसका सीना मेनका की चूचियो को दबा रहा था & दाईं टाँग उसकी टाँगों के उपर थी..

थोड़ी देर ऐसे ही चूमने के बाद वो अपने हाथ आगे ले आया और ब्लाउस के उपर से ही अपनी बीवी की चूचिया दबाने लगा ...फिर उसने अपने होत उसके क्लीवेज पर रख दिए...मेनका की साँसें भारी हो गयी..धीरे-2 वो भी गरम हो रही थी.

पर विश्वजीत बहुत बेसबरा था और उसने जल्दी से मेनका का ब्लाउस खोल दिया & फिर रेड ब्रा मे क़ैद उसकी चूचियों पर टूट पड़ा....मेनका की नही-2 का उसके उपर कोई असर नही था.

मेनका के लिए ये सब बड़ा जल्दी था.वो 1 कॉनवेंट मे पढ़ी लड़की थी..सेक्स के बारे मे सब जानती थी पर कुच्छ शर्म & कुच्छ अपने खानदान की मर्यादा का ख़याल करते हुए उसने अबी तक किसी से चुडवाया नही था.विदेश मे कॉलेज मे कभी-कभार किसी लड़के के साथ किस्सिंग की थी बस.विश्वा को भी उसने शादी से पहेले किस्सिंग से आगे नही बढ़ने दिया था.

सो उसके हमले से वो थोड़ा अनसेटल्ड हो गयी.इसी का फायडा उठा कर विश्वजीत ने उसके सारी & पेटीकोआट को भी उसके खूबसूरत बदन से अलग कर दिया.अब वो केवल रेड ब्रा & पॅंटी मे थी.टांगे कस कर भीची हुई..हाथों से अपने सीने को ढकति हुई...शर्म से उसका चेहरा ओर गुलाबी हो गया था & आँखें बंद थी-मेनका सच मच भगवान इन्द्र के दरबार की अप्सरा मेनका जैसी लग रही थी.

विश्वा ने 1 नज़र भर कर उसे देखा और अपने कपड़े निकाल कर पूरा नंगा हो गया.उसका 4 1/2 इंच का लंड प्रिकम से गीला था.उसने उसी जल्दबाज़ी से मेनका के ब्रा को नोच फेका और उसका मुँह उसकी चूचियो से चिपक गया.वो उसके हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को कभी चूस्ता तो कभी अपनी उंगलियों से मसलता.मेनका उसकी इन हरकतों से और गरम हो रही थी.फिर विश्वा उसकी चूचियो को छ्चोड़ उसके पेट को चूमता उसकी गहरी नाभि तक पहुचा.

जब उसने जीभ उसकी नाभि मे फिराई तो वो सीत्कार कर उठी,"आ....अहह.."

फिर वो और नीचे पहुचा,पॅंटी के उपर से उसकी चूत पर 1 किस ठोकी तो मेनका मारे शर्म के उठती हुई उसका सर पकड़ कर अपने से अलग करने लगी पर वो कहा मानने वाला था.उसने उसे फिर लिटाया & झटके के साथ उसकी पॅंटी खीच कर फेक दी.मेनका की चूत पे झाँत हार्ट शेप मे कटी हुई थी.ये उसकी सहेलियों के कहने पर उसने किया था.

"वाह!मेरी जान",विश्वा के मुँह से निकला,"वेरी ब्यूटिफुल पर प्लीज़ तुम इन बालों को सॉफ कर लेना.मुझे सॉफ बिना बालों की चूत पसंद है."

ये बात सुनकर मेनका की शर्म और बढ़ गयी.1 तो वो पहली बार किसी के सामने ऐसे नंगी हुई थी उपर से ऐसी बातें!

विश्वा ने 1 उंगली उसकी चूत मे डाल दी और दूसरे हाथ से उसके बूब्स मसल्ने लगा.मेनका पागल हो गयी.तभी वो उंगली हटा कर उसकी टाँगो के बीच आया और उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.अब तो मेनका बिल्कुल ही बेक़ाबू हो गयी.उसे अब बहुत मज़ा आ रहा था.वो चाहती थी की विश्वजीत ऐसे ही देर तक उसकी चूत चाटता रहे पर उसी वक़्त विश्वा ने अपना मुँह उसकी चूत से हटा लिया.

मेनका ने आँखें खोली तो देखा कि वो अपना लंड उसकी चूत पर रख रहा था.

वो मना करने के लिए नही बोलते हुए उसके पेट पर हाथ रखने लगी पर बेसब्र विश्वा ने 1 झटके मे उसकी कुँवारी नाज़ुक चूत मे अपना लंड आधा घुसेड दिया.यूँ तो मेनका की चूत गीली थी पर फिर भी पहल्ली चुदाई के दर्द से उसकी चीख निकल गयी,"उउउइईईईई........माअ.....अनन्न्न्न्न...न्न्न्न...ना...शियीयियी "

विश्वा उसके दर्द से बेपरवाह धक्के मारता रहा & थोड़ी देर मे उसके अंदर झाड़ गया.फिर वो उसके सीने पे गिर कर हाँफने लगा.

मेनका ने ऐसी सुहागरात की कल्पना नही की थी, उसने सोचा था कि विश्वा पहले उससे प्यारी-2 बातें करेगा.फिर जब वो थोड़ा कंफर्टबल हो जाए तब बड़े प्यार से उसके साथ चुदाई करेगा.पर विश्वा को तो पता नही किस बात की जल्दी थी.

"अरे...तुम्हारी खूबसूरती का रस पीने के चक्कर मे तो मैं ये भूल ही गया!",विश्वा अपने ज़मीन पर पड़े कुर्ते को उठा कर उसकी जेब से कुच्छ निकालते हुए बोला तो मेनका ने 1 चादर खीचकर अपने नंगे पन को ढँकते हुए उसकी तरफ देखा.

"ये लो.अपना वेड्डिंग गिफ्ट.",कहते हुए उसने 1 छ्होटा सा बॉक्स मेनका की तरफ बढ़ा दिया.

मेनका ने उसे खोला तो अंदर 1 बहुत खूबसूरत & कीमती डाइमंड ब्रेस्लेट था.ऐसा लगता था जैसे किसी ने मेनका से ही पसंद करवा के खरीदा हो.वो बहुत खुश हो गयी & अपना दर्द भूल गयी.उसे लगा कि अभी बेसब्री मे विश्वजीत ने ऐसा प्यार किया.

"वाउ!इट'स सो ब्यूटिफुल.आपको मेरी पसंद कैसे पता चली?",उसने ब्रेस्लेट अपने हाथ मे डालते हुए पूचछा.

"अरे भाई,मुझे तो तुमहरे गिफ्ट का ख़याल भी नही था",विश्वा ने उसकी बगल मे लेटते हुए जवाब दिया."वो तो मेरे कज़िन्स शादी के 1 दिन पहले मुझ से पुच्छने लगे कि मैने उनकी भाभी के लिए क्या गिफ्ट लिया तो मैने कह दिया कि कुच्छ नही.यार,मुझे लगा कि अब गिफ्ट क्या देना.पर पिताजी ने मेरी बात सुन ली.वो उसी वक़्त शहर गये ओर ये ला कर मुझे दिया.कहा कि बहू को अपनी तरफ से गिफ्ट करना.",इतना कह कर वो सोने लगा.

मेनका निराश हो गयी,उसने तो सोचा था कि उसका पति उसके लिए प्यार से तोहफा लाया है पर उसे तो तोहफे का ध्यान भी नही था.मेनका ने भी विश्वा के लिए गोल्ड चैन ली थी जो उसने सोते हुए विश्वा के गले मे डाल दी & खुद भी सो गयी.

उसी वक़्त महल के उसी उपरी मंज़िल जिसमे मेनका & विश्वा का कमरा था,के एक दूसरे हिस्से मे राजा यशवीर अपने पलंग पर लेट सोच रहे थे कि आज कितने दीनो बाद उनके महल मे फिर रौनक हुई."प्रभु,इसे बनाए रखना.",उन्होने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की.

अब उनका ध्यान अपने बेटे-बहू पर गया.इस वक़्त दोनो एक-दूसरे मे खोए होंगे.उन्हे अपनी सुहागरात याद आ गयी.सरिता देवी के आती धार्मिक होने के कारण उन्हे चुदाई के लिए तैइय्यार करने मे उन्हे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.ज़बरदस्ती उन्हे पसंद नही थी,वरना जो 6'2" लंबा-चौड़ा इंसान आज 52 वर्ष की उम्र ने भी 45 से ज़्यादा का नही लगता था वो जवानी मे किसी औरत को काबू करने मे कितना वक़्त लेता!

अपनी सुहागरात याद करके उनके होठों पे मुस्कान आ गयी ओर अनायास ही वो अपने बेटे-अभू की सुहागरात के बारे मे सोचने लगे.उनका ध्यान मेनका की ओर गया.

"कितनी खूबसूरत है.विश्वा बहुत लकी है बस इस बात को वो खुद भी रीयलाइज़ कर ले.",फिर वो भी सो गये.

आइए चलते हैं हम अब राजपुरा के 1 दूसरे कोने मे.वाहा 1 बड़ी कोठी अंधेरे मे डूबी है.लेकिन उपरी मंज़िल के 1 कमरे से कुच्छ आवाज़ें आ रही हैं.देखते हैं कौन है वाहा.

उस कमरे के अंदर 1 काला, भद्दा & थोड़ा मोटा आदमी नगा बिस्तर पर बैठा है.उसके सर के काफ़ी बाल उड़ गये हैं & चेहरे पर दाग भी है.मक्कारी और क्रूरता उसकी आँखो मे सॉफ झलकती है.यही है जब्बार जिसका बस 1 मक़सद है-राजा साहब की बर्बादी.

वो शराब पी रहा है & एक बला की सुंदर नंगी लड़की उसके लंड को अपनी चूचियों के बीच रगड़ रही है.वो लंड रगड़ते-2 बीच-2 मे झुक कर उसे अपने पतले गुलाबी होठों से चूस भी लेती है.दूर से देखने से लगता है जैसे कि एक राक्षस & 1 परी जिस्मों का खेल खेल रहे हैं.

अचानक जब्बार ने अपना ग्लास बगल की तिपाई पर रखा और उस खूबसूरत लड़की को उसके बालों से पकड़ कर खीचा & उसे बिस्तर पर पटक दिया.

"औ..छ्ह",वो कराही पर बिना किसी परवाह के जब्बार ने उसकी टांगे फैलाई & अपना मोटा लंड उसकी चूत मे पेल दिया.

"आ...आहह......हा...ईईईईईई......रा....आमम्म्ममम...",वो चिल्लाई.

जब्बार ने बहुत बेरहमी से उसे चोदना शुरू कर दिया.उस लड़की के चेहरे पर दर्द & मज़े के मिले-जुले भाव थे.उसे भी इस जुंगलिपने मे मज़ा आ रहा था 7 वो नीचे से अपनी कमर हिल-2 कर जब्बार का पूरा साथ दे रही थी.थोड़ी ही देर मे उसने अपनी बाहें जब्बार की पीठ पर & सुडोल टाँगें उसकी कमर के गिर्द लपेट दी & चिल्लाने लगी,"हा.....आई....से....हीईीईई.....ज़ो...र्र.... से ...कर....ते...रहो!"

"आ..हह...एयेए...हह!"

जब्बार उसकी चूचियो को काटने & चूसने लगा & अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी.थोड़ी ही देर मे वो लड़कीजद गयी,"ऊऊऊओ.....एयेए....हह....!"

और साथ-साथ जब्बार भी.

उसकी चूत मे से लंड निकाल कर जब्बार बिस्तर से उतरा & तिपाई पे रखे ग्लास मे शराब डालने लगा.उस लड़की ने अपना बाया हाथ बढ़ा कर जब्बार के सिकुदे हुए लॅंड & बॉल्स को पकड़ किया & मसालने लगी,"ज़ालिम तो तू बहुत है पर आज कुच्छ ज़्यादा ही हैवानियत दिखा रहा था.वजह?"

ग्लास खाली करके जब्बार ने जवाब दिया,"मुझे उंगली कर रही है ना,मलिका."

" साली,ये ले.",कहते हुए उसने अपना अपने ही वीर्य & मलिका के रस भीगा लंड फिर से मालिका के मुँह मे घुसा दिया.अपने मोटे हाथों से उसे बालों से पकड़ कर उसका सिर उपर किया और उसके मुँह को ही चोदने लगा,"राजा के यहा खुशी मने & मैं यहा संत बना रहूं..हैं!"

जवाब मे मलिका ने हाथों से उसकी कमर को पकड़ा & अपनी दो उंगलियाँ जब्बार की गांद मे घुसा दी.वो चिहुका लेकिन उसने अपनी रखैल का मुँह चोदना नही छ्चोड़ा.

मलिका उसकी रखैल थी.उसके ही जैसी निर्दयी & ज़ालिम.भगवान जितनी खूबसूरती उसे बक्शी थी उतनी ही कम उसके दिल मे दया & प्यार भरा था.

इन ज़ालिमों को इनके जुंगलिपने पे छ्चोड़ हम आगे बढ़ते हैं आने वाली सुबह की ओर जब विषजीत अपनी दुल्हन को लेकर हनिमून के लिए स्विट्ज़र्लॅंड को जाने वाला है.

सुबह सूरज की रोशनी चेहरे पर पड़ने से मेनका की आँख खुली.विश्वजीत कमरे मे नहीं था & वो पलंग पर अकेली नंगी पड़ी थी.वो उठकर बाथरूम मे आ गयी.नौकरानियों ने कल ही उसका सारा समान उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसको रूम मे अरेंज कर दिया था.

बाथरूम मे घुसते ही वो चौंक पड़ी-आदम कद शीशे मे अपने अक्स को देख कर..उसे लगा कि कोई और खड़ा है पर जब रीयलाइज़ किया कि ये तो उसी का अक्स है तो हंस पड़ी.वो शीशे मे अपने नंगे बदन को निहारने लगी.......अपना परियो जैसा खूबसूरत चेहरा,कमर तक लहराते घने,काले बाल...मांसल बाहें,लंबी सुरहिदार गर्दन...उसके 36 साइज़ के बूब्स बिना ब्रा के भी बिल्कुल टाइट और सीधे तने हुए थे..उसे खुद भी हैरत होती थी कि इतने बड़े साइज़ के होने के बावजूद उसकी चूचिया ऐसी कसी थी ज़रा भी नही झूलती थी...ब्रा की तो जैसे उन्हे ज़रूरत ही नही थी....उसने धीरे से उन्हे सहलाया और अपने हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को हल्का सा मसला..अब उसके हाथ अपनी सपाट पेट पर गये जिसके बीच मे उसकी गोल,गहरी नाभि चमक रही थी .अब उसने अपना बदन घुमा कर अपनी मखमली पीठ का मुआयना किया,नीचे अपनी 26 इंच की कमर को देखा & फिर अपनी मस्त 34 साइज़ की गांद को निहारा जो की उसकी चूचियो की तरह ही बिल्कुल पुष्ट & कसी थी.उसकी मांसल, भारी जांघे & उसके सुडोल टाँगें तो ऐसे चमक रही थी जैसे संगमरमर की बनी हो.

उसे अपनी सुंदरता पर थोड़ा गुरूर हो आया पर उसी वक़्त उसकी नज़र उसकी छातियो पर बने विश्वजीत के दांतो के निशान पर पड़ी & उसे कल की रात याद आ गयी & 1 परच्छाई सी उसके चेहरे पर से गुज़र गयी-उसकी छातियो को देख कर ऐसा लगता था जैसे चाँद पे दाग पड़ा हो...फ़र्क बस इतना था कि यहा 2-2 चाँद थे.

वो एक गहरी सांस भर के पानी भरे बाथ-टब मे बैठ गयी.उसके हाथ अपनी जांघों पर से होते हुए उसकी झांतों भरी चूत से टकराए & उसे रात को विश्वा की कही बात याद आ गयी.उसने हाथ बढ़ा कर बगल के शेल्फ से हेर-रिमूविंग क्रीम निकाली & अपनी झाँटें सॉफ करने लगी.

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02-27-2013, 12:19 PM
Post: #59
RE: मेरी बहू मेनका
होटेल के बाहर मनीष राजा साहब के साथ उनकी कार मे बैठा उन्हे अपनी किट दिखा रहा था,"..और ये क्लॉरोफॉर्म है सर जिसके सहारे हम टारगेट को बेहोश कर अपने क़ब्ज़े मे ले सकते हैं."

"तुम लोगो को ये सब इस्तेमाल करने की क़ानूनी इजाज़त है या नही?"

"नही,सर.पर इस जैसे लोगो को पकड़ने के लिए ये सब उसे करना पड़ता है.",मनीष मुस्कुराया.

"वो देखिए सर,दोनो बाहर आ रहे हैं...मैं अपनी बाइक पे जाता हू.",मनीष दरवाज़ा खोल कर तेज़ी से अपनी बाइक पे चला गया,उसकी किट वही कार मे छूट गयी थी.

कल्लन & मलिका फिर से उसकी कार मे बैठ कर चल पड़े & उनके पीछे-2 राजा साहब & मनीष.अब उनकी कार शहर से बाहर जाने वाले रास्ते पे भाग रही थी.राजा साहब ने ड्राइव करते हुए मेनका को फोन लगाया,शाम हो चुकी थी & वो उनका इंतेज़ार कर रही होगी.उन्हे पता नही था कि इस आदमी को पकड़ने मे उन्हे कितना समय लगेगा,"हेलो..हम यशवीर बोल रहे हैं....आज रात हम वापस नही आएँगे."

"ये क्या बात है.मैं यहा तुम्हारा इंतेज़ार कर रही हूँ & तुम हो कि...बस!आख़िर ऐसा कौन सा काम है वकील साहब से?"

"अरे बाबा,आ गया है ऐसा कुच्छ काम.नाराज़ मत हो,कल सवेरे हम तुम्हारे पास पहुँच जाएँगे..ठीक है...चलो बाइ!"

उन्होने बात करते हुए भी अपनी निगाह उस कार से नही हटाई थी.1 लेफ्ट टर्न लेते ही वो 1 धार्मिक जुलूस मे जा फँसे.मलिका की कार उस जुलूस के रोड पे आने से पहले ही निकल चुकी थी.राजा साहब ने फुर्ती से अपनी कार 1 साइड की गली मे घुसा दी पर मनीष इतना फुर्तीला नही था.थोड़ी ही देर मे राजा साहब गलियो से होते हुए वापस मैं रोड पे थे.उन्होने कार तेज़ी से आगे बढ़ाते हुए उस कार को ढूँढना शुरू किया.करीब 3-4 मिनिट के बाद उन्हे वो कार नज़र आ गयी & वो उसके पीछे लग गये.

मनीष ने जैसे-तैसे उस जाम से बाइक निकली पर जैसे ही स्पेड बधाई,बाइक झटके खा के रुक गयी,"शिट!अब इसे क्या हुआ?!!",उसने झट से उतर कर बाइक चेक की पर वो फिर भी स्टार्ट नही हुई.उसने तुरंत राजा साहब को फोन मिलाया,"सर,पहले तो जाम मे फँस गया & अब मेरी बाइक खराब हो गयी है.आप कहा पहुँच गये?"

राजा साहब के दिमाग़ ने तेज़ी से काम किया,आज जब्बार का ये आदमी उनके हाथ मरने वाला था & वो नही चाहते थे कि इस बात का कोई गवाह हो,"मनीष,लगता है वो हमारे हाथ से निकल गया.उस जुलूस की वजह से हमने उन्हे खो दिया.तुम परेशान मत हो,अपनी बाइक ठीक करवा के वापस लौट जाओ.हम भी वापस जा रहे हैं....पर तुम्हारी जितनी भी तारीफ की जाए कम है,बेटे.तुमने कमाल का काम किया था पर शायद उसकी किस्मत उसके साथ है जो वो आज हमारे हाथ नही लगा."

"थॅंक्स,सर.पर अगर वो पकड़ मे आ जाता तब मुझे चैन मिलता."

"कोई बात नही.चलो,अब फोन काट ते हैं.हम ड्राइव कर रहे हैं."

"ओके,सर."

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02-27-2013, 12:20 PM
Post: #60
RE: मेरी बहू मेनका
मलिका की कार अब शहर से बाहर 1 ऐसे इलाक़े मे आ गयी थी जो बहुत कम बसा हुआ था.वाहा बस इक्का-दुक्का मकान थे & कुच्छ तो अभी बन ही रहे थे.कोई भी ऐसा घर नही लग रहा था जहा कि पूरा परिवार रहता हो.कार जिस रास्ते पे जा रही थी उसके 1 तरफ बस खाली मैदान था & दूसरी तरफ बस 2 मकान थे & दोनो के बीच करीब 1/2 किमी का फासला था.मलिका की कार अब रोड के आख़िर मे दूसरे मकान के सामने रुक गयी,यही कल्लन का ठिकाना था.

राजा साहब ने 1 किमी पीछे अपनी कर रोड से उतार कर लगाई,किट उठाई & कार से उतर कर पहले मकान के पीछे चले गये & दौड़ते हुए कल्लन के मकान के पिच्छवाड़े पहुँच गये.कार रुकी थी & कल्लन कार से उतर कर ड्राइवर'स साइड पे आ ड्राइविंग सीट पे बैठी मलिका से बात कर रहा था.राजा साहब मकान की बगल मे आ खड़े हो उन्हे छिप कर देखने लगे.

"आज तो बिल्कुल मन नही भरा.तू क्यू जा रहा है?रुक जा ना..सारी रात मज़ा करते हैं."

"फिर कभी.बस1-2 महीनो की बात है.अभी जाना ज़रूरी है.",उसने झुक कर मलिका को चूमा & 1 हाथ उसके टॉप मे डाल कर उसकी छातियो को दबा दिया,"चल अब निकल.."

"तू बहुत ज़ालिम है.",उसने कल्लन का लंड पॅंट के उपर से ही दबाया & कार स्टार्ट कर घुमा दी.उसके जाते ही कल्लन घूम कर अपने घर के दरवाज़े पे आया & ताला खोलने लगा.

"एक्सक्यूस मी,सर.",आवाज़ सुन कर जैसे ही वो घुमा 1 मज़बूत हाथ ने उसकी नाक पे 1 कपड़ा दबा दिया.वो उस आदमी को परे धकेलने लगा पर उसे लग रहा था कि जैसे उसके बदन मे ताकता ही नही है,फिर भी उसने अपना पूरा ज़ोर लगा कर उस आदमी को धकेल दिया.

कल्लन का डील-डौल राजा साहब जैसा ही था & वो उन्ही की तरह ताकतवर भी था.उसके धक्के से राजा साहब गिर पड़े.कल्लन ने पास पड़ी 1 ईंट उठा कर उनपर फेंकी पर वो उसका वार बचा गये & अपनी 1 लात उसकी टाँगो पे मारी,कल्लन चारो खाने चित हो गया तो राजा साहब उसकी छाती पे चढ़ बैठे & क्लॉरोफॉर्म से भीगा नॅपकिन उसकी नाक पे लगा दिया.कल्लन अब पूरी तरह से बेहोश था.

राजा सहब ने उठ कर चारो तरफ देखा-कोई नही था.उन्होने अपनी कमर पे बँधी किट से हथकड़ी निकली & कल्लां को पेट के बाल लिटा कर उसके हाथ पीच्चे लाकर उस से बाँध दिए.फिर वो दौस कर गये & अपनी कार ले आए & कल्लन को उसमे डाल कर वाहा से निकल गये.

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