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वासना ओर बदले की आग
10-07-2016, 09:42 AM
Post: #21
RE: वासना ओर बदले की आग
रॉनी- ये मर गई क्या.. कुछ बोल नहीं रही.. देख इसकी आँखें कैसे फटी हुई हैं..

पुनीत- अरे कुछ नहीं हुआ इसे.. पूरा लौड़ा अन्दर गया तो ये ऐसी हो गई.. थोड़ा हिला इसको.. आह्ह.. मज़ा आ गया क्या टाइट चूत है।

रॉनी ने मुनिया के चेहरे को थोड़ा हिलाया तो वो होश में आई और रोने लगी कि उसको बहुत दर्द हो रहा है।

पुनीत- अरे रानी.. बस थोड़ी देर दर्द होगा.. उसके बाद तुझे मज़ा आएगा.. आह्ह.. बस थोड़ा सहन कर ले आह्ह.. उहह..

पुनीत चूत में झटके देने लगा और मुनिया हर धक्के के साथ ‘आह’ भरती। करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मुनिया का दर्द कुछ कम हुआ।

रॉनी उसके पास बैठा हुआ.. उसके गालों को सहला रहा था.. उसे तसल्ली दे रहा था।

मुनिया- आह्ह.. ईसस्स.. आह.. बाबूजी ये आपने क्या कर दिया.. उउउहह.. मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.. ओह्ह..

पुनीत- अरे पगली रोती क्यों है.. तुझे रानी बना कर रखूँगा.. आह्ह.. ले.. अब आह्ह.. चुदाई का मज़ा ले आह्ह.. उहह..

पुनीत की ठुकाई से अब मुनिया की चूत में दर्द के साथ एक मीठा अहसास भी होने लगा था.. उसकी कामवासना फिर से जाग उठी थी।

मुनिया- आह उईई.. बाबूजी उफ़फ्फ़ आह.. मर गई.. आह्ह.. ज़ोर से करो आह.. उईई…

अब पुनीत स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लग गया और कुछ ही देर में उसके लौड़े ने वीर्य की धार मुनिया की चूत में मारी.. जिससे चूत पानी-पानी हो गई और धारा से धारा मिल गई यानि मुनिया भी झड़ गई।

पुनीत ने जब चूत से लौड़ा बाहर निकाला तो सफेद और लाल रंग का मिला-जुला पानी लौड़े के साथ बाहर आया।

पुनीत- आह मुनिया.. तेरी चूत तो आग की भट्टी थी रे.. साला लौड़ा देख कैसे लाल हो गया है।

मुनिया कुछ ना बोली और बस उसी हालत में पड़ी रही।

रॉनी- यार तेरा तो हो गया.. मेरा लौड़ा वैसे का वैसा तना खड़ा है।

पुनीत- तुझे किसने रोका है.. कर दे इसका मुहूरत तू भी..

रॉनी- मुहूरत तो तूने कर दिया.. अब मैं क्या खाक करूँ.. और चूत का हाल तो देख.. कैसे पानी और खून से भरी पड़ी है.. इसमें कौन लौड़ा पेलेगा..

मुनिया- आह्ह.. आह्ह.. बाबूजी.. मुझ पर रहम करो.. आह्ह.. मेरी फुद्दी में बहुत दर्द है.. मैं अब सह नहीं पाऊँगी.. आह्ह.. मर जाऊँगी..

रॉनी- अरे साली.. कुछ नहीं होगा तुझे.. अभी तो सील टूट गई.. अब क्या होने वाला है तुझे..

पुनीत- तुझे करना है तो कर.. मैं तो चला कमरे में.. पूरा गंदा हो गया हूँ.. जाकर नहाऊँगा..

पुनीत वहाँ से चला गया.. तो रॉनी ने चादर से मुनिया की चूत को अच्छे से साफ किया। वो कराह रही थी मगर रॉनी पर तो चुदास सवार थी.. उसने मुनिया के पैरों को मोड़ा और लौड़े को चूत पर टिका कर ज़ोर का धक्का मार दिया.. बस आधा लौड़ा घुसते ही मुनिया के चीखें फिर से कमरे में गूँजने लगीं और रॉनी के तगड़े लौड़े ने मुनिया का हाल से बेहाल कर दिया।

रॉनी- उफ्फ.. पुनीत सही कह रहा था.. तेरी चूत तो बड़ी क़यामत है रे साली..

मुनिया- आह उहह.. नहीं बाबूजी.. आह्ह.. मेरी जान निकल रही है.. आह नहीं.. करो..

रॉनी दे दनादन लौड़ा पेले जा रहा था और मुनिया चीखे जा रही थी। कुछ देर बार मुनिया की चूत में दर्द कम हुआ और चूत की चिकनाहट के कारण लौड़ा आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा।

मुनिया- आह.. ईससस्स.. नहीं उईईइ.. आह.. मर गई ओह.. बाबूजी आह्ह.. आराम से उफ्फ.. आह्ह.. नहीं ओह.. उउउहह आह ससस्स..

रॉनी का लौड़ा पहले ही बहुत गर्म था अब मुनिया की सीत्कारों से उसकी वासना और बढ़ गई। वो तेज़ी से धक्के देने लगा और कुछ ही देर में उसका ज्वालामुखी चूत नाम की गुफा में फट गया और वो निढाल सा होकर मुनिया के पास में लेट गया।

दर्द के मारे मुनिया अभी तक सिसक रही थी और रॉनी उसके पास लेटा हुआ उसके मम्मों को मसल रहा था।

मुनिया- आह ईससस्स.. नहीं बाबूजी अब और ताक़त नहीं है.. आह्ह.. काम के बहाने आप मेरे बदन से खेल गये.. अब मेरा क्या होगा.. उउउह उउहह.. मैं क्या करूँगी अब..

रॉनी- अरे अरे.. रोती क्यों है.. कुछ नहीं होगा तुझे.. मैं हूँ ना.. देख चुप हो जा.. अब तेरे साथ जो होना था सो हो गया.. अब तू मज़े करेगी बस.. चल आज की इस ठुकाई के तुझे 2 हज़ार देते हैं.. बस अब खुश चुप हो जा तू..


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10-07-2016, 09:42 AM
Post: #22
RE: वासना ओर बदले की आग
मुनिया- नहीं बाबूजी पैसे से इज़्ज़त का सौदा मत करो.. मुझे घर जाना है.. बस अब यहाँ नहीं रहना मुझे..

रॉनी- अरे मेरी भोली रानी घर जाने से क्या होगा.. अब यहीं रह.. देख तेरी माँ बहुत गरीब है.. तू यहाँ रह कर पैसे कमा उसका सहारा बन..

रॉनी बहुत देर तक मुनिया को समझाता रहा.. जब जाकर वो मानी।

मुनिया- अच्छा ठीक है बाबूजी.. मगर आप दोनों एक साथ मुझे परेशान नहीं करोगे.. बहुत दुःखता है मुझे..

रॉनी- हा हा हा हा अरे बस.. इतनी सी बात.. चल नहीं करेंगे बस.. अकेला मैं ही करूँगा।

मुनिया- आप ही करेंगे तो बड़े बाबूजी का क्या होगा?

रॉनी- ओये मेरी सोणिए.. क्या बात है बड़ी फिकर है उसकी.. अरे उसके साथ भी मज़े ले लेना यार अकेले में… और सुन ये क्या ‘बाबूजी बाबूजी..’ लगा रखा है.. जानू बोलो.. डार्लिंग बोलो.. अगर ये नहीं तो यार हमारे इतने प्यारे नाम हैं.. वो लिया करो..

मुनिया- ठीक है रॉनी जी.. हा हा हा ये अच्छा है ना..

मुनिया को हँसता देख कर रॉनी को उस पर बड़ा प्यार आया। उसने मुनिया को अपनी बाँहों में भर लिया।

कुछ देर वो दोनों बातें करते रहे.. उसके बाद रॉनी की मदद से मुनिया बाथरूम तक गई.. उसको बहुत दर्द था मगर वो एक बहादुर लड़की थी.. सब दर्द को सह गई और चूत को अच्छी तरह साफ किया। बाद में कमरे को भी ठीक किया तब तक रॉनी जा चुका था।

दोपहर तक सब नॉर्मल हो चुका था। हाँ मुनिया के पैर ठीक से काम नहीं कर रहे थे.. उसको चूत में दर्द था और उसको बुखार भी हो गया था.. तो रॉनी ने नौकर से कहकर उसे कुछ दवा और ट्यूब देदी ओर कहा कि वो कमरे से बाहर ना आए.. बस आराम करे, शाम तक ठीक हो जाएगी।

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10-07-2016, 09:42 AM
Post: #23
RE: वासना ओर बदले की आग
मुनिया की चुदाइ तो आपने देख ली अब चलते हें गर्लस हाॅस्टल।

रामू और बबलू अपने कमरे में बैठे चाय पी रहे थे और बातें कर रहे थे।

रामू- अरे बबलू भाई.. अब तो बता दे रात क्या हुआ था.. तू किसके साथ मज़ा ले रहा था?

बबलू- अरे बताता हूँ ना.. सुन तुझे तो पता है.. मैं रात को हॉस्टल के हर कमरे के पास आँख लगा कर देखता हूँ कि कोई हसीना नंगी दिख जाए या कोई दो लड़की मज़े लेती दिख जाएं..

रामू- अरे हाँ.. ये तो पता है.. कल रात क्या हुआ.. वो बता?

बबलू- अरे बता रहा हूँ ना.. कल साली कोई लड़की की चूत ना देख पाया तो परेशान होकर पूजा के कमरे के पास गया.. उसका तो तेरे को पता है ना.. साली पक्की छिनाल है.. सब लड़कियों को उसने ही बिगाड़ा है। मैंने सोचा आज इस हॉस्टल की सबसे हसीन लड़की पायल के साथ वो जरूर कुछ करेगी.. तो उसकी चूत देखने का मौका मिल जाएगा।

रामू- अरे ये बात मेरे दिमाग़ में क्यों नहीं आई.. नहीं तो मैं भी आ जाता.. पायल को नंगा देखने की तलब तो यहाँ सब करते हैं.. वो है ही चाँद का टुकड़ा।

बबलू- हाँ यार.. इसी चक्कर में तो उसके कमरे के पास गया था। मैंने होल से देखा तो कमरे में हल्की रोशनी थी और पायल अकेली बेसुध सोई पड़ी थी, वो साली पूजा वहाँ नहीं थी, मैंने दरवाजे को हल्के से खोलना चाहा.. तो खुल गया।

रामू- अरे बापरे.. तुझे डर नहीं लगा.. वो जाग जाती तो?

बबलू- अरे मैंने तो बस ऐसे ही देखा था.. अब दरवाजा खुल गया तो मैंने हिम्मत करके अन्दर का मुआयना किया कि वो पूजा कहाँ है। जब काफ़ी देर वो नहीं आई.. तो मैं समझ गया वो रंडी किसी दूसरे कमरे में अपनी प्यास बुझाने गई होगी और ये सोच कर मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैं धीरे से बिस्तर के पास गया और वहाँ का नजारा देख कर मेरी हालत पतली हो गई रे.. पायल एकदम सीधी सोई थी और सांस के साथ उसके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी नाईटी भी जाँघों से भी ऊपर तक थी.. उसे कोई होश नहीं था.. उसकी गोरी टाँगें नंगी मेरे सामने थीं.. और मैं उसको देख कर बेहोश सा होने लगा। मेरे लंड महाराज घंटी की तरह हिलने लगे।

रामू- अरे वाह.. ऐसा नजारा देख कर मेरा लंड घंटी क्या घंटा बन जाएगा.. तू आगे बता ना..

बबलू- आगे क्या बताऊँ.. मुझसे रहा नहीं गया.. तो मैंने डरते हुए उसकी जाँघों पर हाथ रख दिया। उफ्फ.. क्या गर्म थी यार.. और ऐसी मुलायम की बस मेरे हाथ काँपने लगे। कुछ देर तक जाँघ पर हाथ फेरने के बाद मैंने उसके चूचों को छुआ.. बड़े ही लाजवाब थे यार.. मेरा लंड झटके खाने लगा था। थोड़ा डर भी लग रहा था कहीं कोई आ ना जाए..

रामू- भाई ऐसे समय डर तो लगता ही है मगर ऐसे मज़े के आगे सब डर दूर हो जाते हैं..

बबलू- हाँ यार वो साली ऐसी सोई थी जैसे 4 बोतल पीके सोई हो। उसको होश ही नहीं था और मेरी हालत खराब हो रही थी। अब मेरी हिम्मत बढ़ गई.. मैंने आगे से उसकी नाईटी को खोल दिया.. सामने उसका बेदाग जिस्म था। एकदम गोरे जिस्म पर उसकी काली ब्रा और पैन्टी देख कर लौड़े से पानी की बूँदें बाहर आ गईं। उसके बाद तो बस मेरा सर डर निकाल गया.. मैं उसकी चूत की महक लेने लगा। धीरे से उसको छुआ तो 440 वोल्ट का झटका लगा मुझे.. मैंने उसकी कसी हुई चूत पर अपने होंठ रख दिए। अब साली थोड़ा कसमसाई.. मैं समझा कहीं उठ ना जाए.. तो धीरे से बस उसको सहलाता रहा। अब मेरा लंड काबू में नहीं था.. मैंने उसे बाहर निकाल लिया और पायल की चूत पर हल्के से रगड़ने लगा। कसम से क्या बताऊँ उसकी चूत को छूते ही लौड़े में करंट पैदा हो गया.. जैसे अभी झड़ जाएगा। तभी मुझे बाहर कुछ आवाज़ सुनाई दी.. मैं एकदम से डर गया और जल्दी से कमरे से बाहर निकल आया।

रामू- उफ़फ्फ़ बबलू भाई.. क्या सुना दिया.. मेरा लौड़ा तो सुनकर झटके खा रहा है.. तूने तो उस कमसिन कन्या की चूत को छुआ है.. आह्ह.. क्या मज़ा आया होगा ना.. उसके बाद क्या हुआ.. वो बता ना यार..

बबलू- अरे उसके बाद मेरी अन्दर जाने की हालत नहीं थी.. लौड़ा बुरी तरह अकड़ा हुआ झटके खा रहा था.. बस वहाँ से निकल कर सीधा टॉयलेट गया.. लौड़े को ठंडा किया.. तब जाकर सुकून मिला.. मगर वो नजारा आँखों के सामने से हट ही नहीं रहा था। दोबारा हिम्मत करके गया.. तो सामने से पूजा आती दिखाई दी.. तो मैं जल्दी से वापस मुड़ गया और भाग कर कमरे में आ गया।

रामू- अरे बाप रे, वो कहाँ से आ गई.. साली रंडी.. यार ऐसा मौका दोबारा मिले तो मुझे भी बुलाना.. उसकी चूत देखने की बड़ी तमन्ना है मेरी.. दिल करता है साली को उठा के ले जाऊँ।

इस वार्तालाप से आप ये समज गये होंगे की पुजा की चुदाई बबलू ने नही की, तो वो कोन था पुजा के साथ?

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10-07-2016, 09:43 AM
Post: #24
RE: वासना ओर बदले की आग
अब चलते हे फार्म हाउस पर, जहाँ गेम की मीटींग होने वाली है।

मुनिया की चुदाइ के बाद दोनों भाइयों ने लंच किया और टीवी देखने लगे.. तभी वहाँ सुनील और विवेक आ गए।

विवेक- हाय रॉनी हाय पुनीत.. कैसे हो?

पुनीत- अरे आओ आओ.. तुम्हारा ही इंतजार था और टोनी कहाँ है.. वो नहीं आया क्या?

सुनील- वो बस आता ही होगा.. हम जरा पहले आ गए।

रॉनी- वो साला कहाँ रह गया.. ऐसे तो बड़ा बोलता था एक बार मैं गेम में आ जाऊँ.. तो ऐसा कर दूँगा.. वैसा कर दूँगा.. अब गाण्ड फट गई क्या उसकी?

विवेक- अरे ऐसी बात नहीं है.. वो यहाँ से कुछ दूर कॉलेज का कैंप लगा है वहाँ उसकी बहन भी है.. उसको वहाँ छोड़ कर आते वक़्त यहाँ आएगा वो..

रॉनी- अच्छा उस साले हरामी की बहन भी है क्या?

सुनील- हाँ यार बहन तो सबकी होती हैं.. उसमें नया क्या है.. बस बीवी नहीं है किसी के पास हा हा हा हा..

पुनीत- अबे कुत्ते गेम जीत और बना ले अबकी बार नई-नई बीवी.. पूरा मौका मिलेगा हा हा हा..

सन्नी- हैलो कमीनो.. क्या हाल हैं?

{दोस्तो, यह है सन्नी इसकी उम्र 22 साल है.. अच्छी कद काठी का बांका जवान है.. लड़कियाँ इसको देख कर अपना बना लेने की तमन्ना रखती हैं.. मगर यह बिंदास है, हर महीने गर्लफ्रेण्ड बदलता है और मज़ा करता है। पुनीत का बेस्ट फ्रेंड।}

पुनीत- अरे आओ आओ मेरे बब्बर शेर.. तुम्हारी ही कमी खल रही थी।

सन्नी- सब आ गए क्या?

विवेक ने बताया कि टोनी नहीं आया.. वो अपनी बहन को छोड़ कर आएगा।

तभी वहाँ टोनी भी आ गया.. उसके साथ कोमल भी थी। आज कोमल ने लाल रंग की स्कर्ट और काली टी-शर्ट पहनी हुई थी, बहुत हल्का सा मेकअप किया हुआ था.. उसके होंठों पर लाल लिपस्टिक उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी।

जब वो अदा के साथ चलकर आ रही थी उसके चूचे थिरक रहे थे और कमर नागिन की तरह बलखा रही थी। वो ऐसे चल रही थी जैसे कोई मॉडलिंग कर रही हो, उसको देखकर पुनीत की लार टपकने लगी।

टोनी- हैलो दोस्तो.. हाउ आर यू.. क्या मीटिंग मेरे बीना ही शुरु कर दी?

विवेक- अरे आओ आओ बॉस.. आपका ही इंतजार हो रहा था.. लेकिन यह कोमल को यहाँ क्यों ले आए.. इसे तो आप कैंप छोड़ने गए थे ना..

टोनी- अरे जाना तो वहीं था.. बाइक ने धोखा दे दिया.. आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया.. साली पंचर हो गई यहाँ तक ऑटो में आया हूँ।

सुनील- यहाँ ऑटो में आए.. सीधे वहीं चले जाते..

टोनी- अरे साला ऑटो वाला नहीं माना वहाँ जाने को.. तो मैंने कहा अच्छा फार्म पर छोड़ दे.. आगे मैं चला जाऊँगा..

ये सब बातें कर रहे थे और कोमल बड़ी शराफत के साथ एक तरफ खड़ी बस पुनीत के सामने नजरें झुका कर खड़ी थी और पुनीत भी बस उसको निहार रहा था।
बीच-बीच में कोमल पुनीत की ओर देखती और हल्का सा मुस्कुरा देती।

रॉनी- अब तू चाहता क्या है.. ये बोल?

टोनी- यार.. तू अपनी गाड़ी की चाभी देना जरा.. बस अभी इसको कैम्प तक छोड़ कर अभी आता हूँ.. उसके बाद अपनी मीटिंग शुरू..

पुनीत- अरे टोनी.. तेरी बहन बोल नहीं सकती क्या.. गूंगी है?

टोनी कुछ बोलता.. उसके पहले कोमल बड़ी सेक्सी अदा के साथ बोली- जी नहीं.. मैं बोल सकती हूँ.. मगर आप दोस्तों के बीच.. मैं क्या बोलूँ.. इसलिए चुप खड़ी हूँ।

पुनीत- अरे, कम से कम ही हैलो ही कर लेती..

टोनी- बस बस.. पुनीत ज़्यादा स्मार्ट मत बन.. ला चाभी दे.. इसको छोड़ कर आता हूँ.. बाद में बात करेंगे।

कोई कुछ नहीं बोला और बस सब कोमल को ही निहारते रहे। रॉनी ने गाड़ी की चाभी टोनी को दी.. वो कोमल के साथ जाने लगा.. तो पुनीत की नज़र बस कोमल की मटकती गाण्ड को घूरती रही, उसका लौड़ा पैन्ट में टेंट बनाने लगा।

सन्नी- अरे बस भी कर.. चली गई वो.. अब क्या कैम्प तक अपनी नजरें ले जाएगा.. हा हा हा हा हा..

सभी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।

पुनीत- अबे चुप रहो कमीनों.. मैं तो बस यूँ ही देख रहा था.. कि लड़की बहुत ही खूबसूरत है।

विवेक- ये गलत बात है पुनीत.. टोनी अपना फ्रेण्ड है.. और उसकी बहन अपनी बहन जैसी ही है.. उसको ऐसे देखना ठीक नहीं है यार..

पुनीत- अबे चुप साले कुत्ते.. बहन होगी तेरी.. मैं तो उसको गर्लफ्रेण्ड बनाने की सोच रहा हूँ।

सुनील- ठीक कहा यार.. मेरी भी काफ़ी समय से उस पर नज़र थी.. साली एकदम से पटाखा लगती है।

सन्नी- अरे कमीनों.. अच्छा हुआ वो चली गई.. वरना तुम यहीं उसकी चूत का चीर-फाड़ कर देते।

विवेक- नहीं सालो.. कुछ भी कहो ये सब गलत है.. अगर टोनी को पता लगेगा तो वो लफड़ा करेगा।

पुनीत- क्या लफड़ा करेगा.. हमको मारेगा क्या..? अबे सालों हमारे फेंके हुए टुकड़े उठाते हो.. हमको आँख दिखाओगे क्या?

विवेक- पुनीत.. ये कुछ ज़्यादा हो रहा है समझे.. हम यहाँ बेइज़्ज़ती करवाने नहीं आए हैं..

सन्नी- अरे कूल यार.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है..

राॅनी- अरे किसी को कोई प्राब्लम नहीं है.. तो तू क्यों भड़क रहा है?

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10-07-2016, 09:43 AM
Post: #25
RE: वासना ओर बदले की आग
सन्नी- हाँ सही है.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है और पुनीत चाहे तो कुछ भी मुमकिन हो सकता है.. कहीं ऐसा ना हो कि टोनी खुद अपनी बहन को इसके हवाले कर दे..

सुनील- नहीं नहीं यार.. ऐसा नहीं हो सकता.. कोई भाई ऐसा नहीं कर सकता..

रॉनी- पैसे में बहुत ताक़त होती है साले.. हम जिसे चाहे खरीद लें..

विवेक- अच्छा अगर ये बात है.. तो कोमल को हासिल करके दिखाओ.. तब मानूँगा कि तुम कितने बड़े रईस हो..

पुनीत- तू मुझे चैलेन्ज करता है.. अब देख.. मैं कैसे टोनी को मनाता हूँ।

काफ़ी देर तक ये बहस चलती रही.. तब तक टोनी भी वापस आ गया..

टोनी- अरे क्या बात है.. किस बात पर इतना हंगामा हो रहा है।

सन्नी ने विवेक को चुप रहने का इशारा कर दिया.. ताकि बात बिगड़े ना..

पुनीत- अरे कुछ नहीं.. इस बार क्या करें.. बस इस बात पर बहस हो रही है.. ये सन्नी कहता है कि हर बार गर्लफ्रेण्ड को साथ लाते हैं और गेम खेलते हैं अबकी बार कुछ अलग ट्राय करते हैं।

पुनीत ने ये बात सन्नी की तरफ़ आँख मारते हुए कही थी।

टोनी- अरे यार ऐसे सूखे-सूखे प्लान बनाओगे क्या.. मज़ा नहीं आ रहा है.. पहले कुछ बियर-वियर पिलाओ.. ताकि दिमाग़ ठीक से काम कर सके।

रॉनी ने नौकर को आवाज़ दी तो वो ठंडी बियर लेकर आ गया। अब सब बियर का मज़ा लेने लगे और बातों का दौर फिर शुरू हुआ।

पुनीत- अब बताओ टोनी क्या सोचा.. मेरी बात समझ में आई कि नहीं?

टोनी- हाँ तो सही है ना.. मैं तो पहले भी आ चुका हूँ और ये दोनों(सुनील ओर विवेक) पहली बार आए हैं.. तो अबकी बार कुछ धमाल होना चाहिए।

विवेक और सुनील बस उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला रहे थे।

सन्नी- तूने कुछ तो सोचा ही होगा टोनी.. इस बार के लिए वैसे भी तेरा शैतानी दिमाग़ कुछ ना कुछ सोचता रहता है।

टोनी- नहीं अभी कुछ सोचा तो नहीं है.. पर सोच लेते हैं और मेरा दिमाग़ कहाँ इतना फास्ट चलता है यार.. कुछ भी बोल रहा हे..

रॉनी- साले ज़्यादा भोला मत बन.. तेरी सब हरकत हम जानते हैं। अब जो सोच कर आया है.. बता दे..

रॉनी की बात सुनकर एक बार तो टोनी को झटका लगा कि इनको प्लान के बारे में कैसे पता लगा.. मगर उसने बात को संभाल लिया।

टोनी- अच्छा बाबा माफ़ करो.. तुम ऐसे मानोगे तो है नहीं.. तो सुनो.. मेरा प्लान क्या है.. इस बार भी गर्लफ्रेण्ड ही लाएँगे.. मगर अबकी बार वर्जिन होंगीं.. समझे…

सन्नी- तू कहना क्या चाहता है?

टोनी- देखो दोस्त हर बार चुदी-चुदाई गर्लफ्रेण्ड को लाते हैं इस बार फ्रेश माल पटाओ.. उसको गेम के लिए राज़ी करो.. और यहाँ लेकर आओ.. तो मज़ा दुगुना हो जाएगा।

विवेक- हाँ.. ये आइडिया अच्छा है.. सील पैक लड़की होगी तो गेम खेलने में मज़ा ज़्यादा आएगा..

रॉनी- हम तो फ्रेश माल को पटा भी लेंगे.. तुम तीनों ला पाओगे?

टोनी- बस क्या गुरु.. हमको क्या समझा है.. टोनी नाम है मेरा.. जिस लड़की पर हाथ रख दूँ ना.. वो अपनी हो जाती है समझे..

पुनीत- अच्छा इतना भरोसा है खुद पर.. तो चल अब मेरा प्लान सुन..

टोनी- हाँ बता.. सब अपना आइडिया दो.. जिसका आइडिया सबसे अच्छा होगा.. वही हम करेंगे..

पुनीत- मैं तुम्हें एक लड़की का नाम बताऊँगा.. अगर तुम उसको ले आओ तो इस बार इनाम की रकम 5 लाख होगी और गेम के रूल भी चेंज करेंगे।

टोनी- क्या बात है साले.. 5 लाख.. अरे तू बोल बस कौन है वो लड़की.. साली को चुटकियों में ले आऊँगा।

टोनी के अलावा बाकी सब समझ गए कि पुनीत किसका नाम लेगा.. सबकी दिल की धड़कन तेज़ हो गईं कि अब क्या होगा?

पुनीत- तेरी बहन कोमल को ला पाएगा तू?

पुनीत के इतना बोलते ही टोनी गुस्से में आग-बबूला हो गया और झटके से खड़ा हो गया- पुनीत ज़बान को लगाम दे अपनी.. साले तू पैसे वाला होगा.. तेरे घर का.. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन का नाम लेने की?

सन्नी- टोनी चुप रहो.. रूको एक मिनट मैं बात करता हूँ.. यार पुनीत ये क्या है.. तू कुछ भी बोल देता है। हम सब दोस्त हैं अगर ये मजाक था तो बहुत बुरा था.. चल सॉरी बोल..

पुनीत- सन्नी तुम होश में तो हो.. मैं पुनीत खन्ना हूँ.. मैं सॉरी बोलूँ? अरे इसकी बहन पर दिल आ गया मेरा.. इसको बोल 10 लाख दूँगा.. अब तो उसको अपना बना के ही रहूँगा..

इतना सुनते ही टोनी और ज़्यादा भड़क गया.. लड़ने की नौबत आ गई, बड़ी मुश्किल से विवेक और सुनील उसको बाहर लेकर गए।

इधर रॉनी ने पुनीत को काबू में किया- यार तुजे क्या हो गया है.. ऐसे लड़ना ठीक नहीं और उसके सामने बोलने की क्या जरूरत थी तूजे.. वो लड़की चाहिए ना.. उसको तो कैसे भी पटा सकते हें..

पुनीत- नहीं रॉनी.. मैं इसका गुस्सा देखना चाहता था। अब तू देख ये खुद उसको यहाँ लाएगा.. खरीद लूँगा मैं इस कुत्ते को.. सन्नी जा उसको कीमत पूछ.. उसकी बहन की? मैं हर कीमत पर उसको यहाँ लाना चाहता हूँ। इसको किस बात पर इतना घमण्ड है.. बहुत बार ये मुझसे उलझ चुका है। मैं इसका घमण्ड तोड़ कर रहूँगा..

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10-07-2016, 09:43 AM
Post: #26
RE: वासना ओर बदले की आग
सन्नी- होश में आओ पुनीत.. ऐसा नहीं होता.. वो उसकी बहन है.. कोई रंडी नहीं.. जो तुम उसकी कीमत लगा रहे हो.. संभालो अपने आपको.. अब मैं उसको लेकर आता हूँ। ये बात दोबारा मुँह से मत निकालना.. वरना उनके साथ मैं भी चला जाऊँगा।

पुनीत कैसा भी हो.. सन्नी की बात मानता था, उसने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया और सन्नी बाहर गया और टोनी को समझाने लगा।

सन्नी- अरे क्या हो गया तुझे.. तू पुनीत को जानता नहीं क्या.. पीने के बाद ऐसे ही बकवास करता है और रही तुम्हारी बहन की बात.. उसके बोलने से वो आ गई क्या? ऐसे लड़ना ठीक नहीं है यार!

टोनी- उसको अपने पैसों पर बहुत घमण्ड है ना.. साले को 2 मिनट में ठंडा कर सकता हूँ।

सुनील- बॉस आप शान्त हो जाओ और चलो यहाँ से.. अब यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं।

टोनी- नहीं अब उस कुत्ते को सबक़ सिखा कर ही जाऊँगा..

सन्नी- देख तू अन्दर चल.. पुनीत को मैं समझा दूँगा.. बस तू चुप रहना ओके..

टोनी भी गुस्से को काबू करके अन्दर आ गया। वैसे तो दोनों एक-दूसरे को देख कर आँखें दिखा रहे थे.. मगर कोई कुछ बोल नहीं रहा था।

सन्नी- हाँ तो फ्रेश माल लाने का प्लान सबको मंजूर है या किसी के दिमाग़ में कुछ और है..

रॉनी- मुझे यही ठीक लगता है.. इससे ज़्यादा क्या होगा?

टोनी- इससे भी ज़्यादा हो सकता है.. अब जब बात मुँह से निकल ही गई तो उसे पूरा भी कर ही लो।

सन्नी- मैं कुछ समझा नहीं.. तुम क्या कहना चाहते हो..

टोनी- पुनीत ने मेरी बहन पर गंदी नज़र मारी है.. तो इस बार सब अपनी बहनों को ही क्यों ना लेकर आएं..

रॉनी- टोनी कुत्ते.. तेरी ये मजाल तूने ऐसी बात सोची भी कैसे?

टोनी- क्यों जब पुनीत मेरी बहन के बारे में सोच सकता है तो बहन इसकी भी है.. उसको लाने में क्या दिक्कत है.. बड़ा घमण्ड है ना इसको अपने खिलाड़ी होने पर.. तो डर किस बात का.. ये तो हारेगा भी नहीं..

सन्नी- ये क्या बकवास है टोनी.. तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो.. एक खेल के लिए हम अपनी बहन को लाएं.. इतने गिरे हुए नहीं हैं।

पुनीत- ओके मैं कुछ ज़्यादा बोल गया था.. पर टोनी अपनी बहन को मेरी बहन से मिला कर बड़ी ग़लती कर दी तूने.. अब देख मैं क्या करता हूँ।

टोनी- हाँ जानता हूँ… तू पैसे के दम पर मुझे मरवा देगा या मेरी बहन को उठा लेगा.. मगर इसमें तेरी जीत नहीं हार होगी.. अगर दम है तो खेल में मुझे जीत कर दिखा.. मैं कसम ख़ाता हूँ कि मेरी बहन को तेरे सामने लाकर खड़ा कर दूँगा.. मगर अगर तू हार गया तो तेरी बहन मेरी होगी.. बोल है मर्द तो कर मुकाबला.. नहीं तो दोबारा ऐसी बात मुँह से मत निकालना..

पुनीत गुस्से में पूरी बोतल एक सांस में पी गया।

रॉनी- पुनीत ये तूजे फंसा रहा है.. तू कुछ मत बोल.. मैं इस साले को अभी सीधा करता हूँ।

पुनीत- नहीं रॉनी नहीं.. अगर ऐसा है तो ऐसा ही सही.. इसका गुरूर मैं तोड़ कर ही रहूँगा.. मुझे हराने की हिम्मत किसी में नहीं.. अब तो ये खेल सिर्फ़ हम दोनों के बीच में होगा।

टोनी- हाँ ठीक है.. हम दोनों ही खेलेंगे अब तो फैसला हो ही जाए।

सन्नी- चुप रहो दोनों.. पुनीत मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है.. चलो मेरे साथ.. रॉनी तुम भी आओ मेरे साथ..

सन्नी ज़बरदस्ती दोनों को साथ ले गया इधर टोनी बियर का घूँट लेकर मुस्कुराने लगा।

विवेक- बॉस ये क्या हो गया.. हमने तो सोचा था कि हम पुनीत को इस बात के लिए रेडी करेंगे.. मगर साला वो तो खुद शुरू हो गया।

सुनील- लेकिन ये सन्नी काम बिगाड़ देगा साला.. बॉस आपको ऐसे गुस्सा नहीं होना चाहिए था।

टोनी- अबे चुप… साले फट्टू.. अगर मैं गुस्सा नहीं होता.. तो उनको शक हो जाता.. अब देख खेल का असली मज़ा।

उधर दूसरे कमरे में रॉनी गुस्सा हो रहा था।

रॉनी- पुनीत तू पागल हो गया है क्या..? उस दो कौड़ी की लड़की के लिए हमारी बहन को दांव पर लगा रहा है?

पुनीत- नहीं रॉनी.. मैं इतना पागल नहीं हूँ.. जो गुड्डी को यहाँ लाऊँगा.. मैं बस उसके साथ गेम खेलूँगा और जीत भी मेरी होगी.. उसके बाद उसकी बहन को उसके सामने चोदूँगा.. तब जाकर मेरा गुस्सा ठंडा होगा।

सन्नी- पागल हो तुम.. अगर ग़लती से वो जीत गया.. तो क्या करोगे?

पुनीत- ना मुमकिन है ये.. मुझे वो नहीं हरा सकता..

रॉनी- पागल जेसी बाते मत कर.. पत्तों का गेम है.. सब लक पर चलता है..

पुनीत- ठीक है अगर मैं हार भी गया तो क्या.. साले का मुँह पैसों से बन्द कर दूँगा.. अपनी गुड्डी थोड़े ही उस कुत्ते को दूँगा..

सन्नी- पुनीत, वो कोई बच्चा नहीं है.. जो मान जाएगा.. मैंने कल रॉनी को कहा था कि इस बार वो कोई गेम खेलेगा.. और देखो उसने गेम में तुम्हें फँसा लिया। अरे कोमल का यहाँ आना कोई इत्तफ़ाक़ नहीं है.. वो प्लान करके उसको यहाँ लाया है.. तुम मेरी बात सुनो.. सब समझ जाओगे..

रॉनी- क्या बात कर रहे हो.. ये बात रात को क्यों नहीं बताई?

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10-07-2016, 09:44 AM
Post: #27
RE: वासना ओर बदले की आग
सन्नी- रात को मुझे खुद नहीं पता था कि इसका ये प्लान है.. अब सुनो रात को मैं बुलबुल गेस्ट हाउस के पास था.. वहाँ इसको देख कर शक हुआ.. तो मैंने छुप कर इसका पीछा किया। इसने बुलबुल गेस्ट हाउस को बुक किया.. फिर फ़ोन पर किसी से बात की कि काम हो गया.. अब कल देखना असली तमाशा.. उसके बाद ये सलीम गंजा से मिला और हंसों को जमा करने और पार्टी में पाउडर लाने का काम उसको दिया.. तभी मुझे शक हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ है और मैंने रॉनी को फ़ोन करके बता दिया।

पुनीत- नहीं नहीं.. उन सब बातों का इस बात से कोई लेना-देना नहीं.. वो क्यों अपनी बहन को यहाँ लाएगा.. ये सब इत्तफाक ही है और शुरूआत मैंने की.. उसने नहीं.. तो ये बात मानने वाली नहीं है।

रॉनी- चलो मान लिया.. कि ये बात अलग है.. मगर तू आगे उसकी ऐसी कोई बात ना मान लेना.. बस ये गेम किसी तरह क्लोज़ करो.. गुड्डी यहाँ नहीं आएगी.. ओके.. अगर वो तेरे रूल ना माने.. तो ये गेम खेलने से मना कर देना।

पुनीत- मानेगा कैसे नहीं.. साले को मानना पड़ेगा.. अब चलो..

कुछ देर बाद सब उसी जगह बैठे थे। अब टोनी कुछ शान्त हो गया था.. उसके हाथ में बोतल थी और बियर के एक घूँट के साथ उसने बात शुरू की।

टोनी- क्यों पुनीत.. क्या सोचा.. गेम खेलना है.. या हार मान ली?

पुनीत- तेरे जैसे कुत्ते से मैं हार जाऊँ.. यह हो नहीं सकता.. अब सुन, यह गेम आज ही हम दोनों के बीच खेला जाएगा, 7 राउंड होंगे.. जो 4 जीत गया वो विनर.. उसके बाद जो होना है वही होगा.. तू समझ गया ना?

टोनी- वाह वाह.. क्या चाल चली है चूतीये.. आज तक तो लड़कियाँ साथ लेकर खेलते थे.. अब यह रूल चेंज क्यों? अगर गेम खेलना है तो उसी तरह खेलो.. एक तरफ़ मेरी बहन होगी दूसरी तरफ तेरी.. उसके बाद खेल शुरू होगा.. हाँ अगर तुझे पास में ये पब्लिक नहीं चाहिए तो मुझे कोई हर्ज नहीं.. मगर खेल ऐसे ही खेलेंगे।

टोनी की बात से रॉनी को बड़ा गुस्सा आ रहा था.. मगर सन्नी ने उसके हाथ को दबा कर उसको चुप रहने का इशारा किया।

पुनीत- नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. वो मेरी बहन है.. ऐसे कैसे इस गेम के लिए उसको तैयार करूँ?

टोनी- यही बात तेरे मुँह से सुनना था.. अरे तू हार गया.. तो बाद में कैसे तैयार करेगा.. देख तेरे दिल में कुछ धोखा देने की बात है.. तो उसको निकाल दे.. गेम होगा तो पुराने रूल से ही होगा.. वरना मैं समझूँगा तेरे में दम नहीं.. कि तू मुझसे मुकाबला करे!

पुनीत को बहुत ज़्यादा गुस्सा आ गया, उसने बियर की आधी बोतल एक सांस में गटक ली।

पुनीत- चुप कुत्ते.. अब मेरी सुन गेम होगा और पुराने तरीके से ही होगा.. अब हम दोनों नहीं.. ये चारों भी हारने वाली लड़की को चोदेंगे.. बोल है तेरे को मंजूर?

रॉनी और सन्नी तो बस एक-दूसरे को देखने लगे कि यह पुनीत ने क्या कह दिया.. वो कुछ बोलते इसके पहले टोनी ने ‘हाँ’ कह दी।

टोनी- ठीक है.. ऐसा ही सही अब बात ज़ुबान की है.. तो मैं पीछे नहीं हटूँगा। किसी भी तरह मेरी बहन को मना लूँगा, बोल कब लाना है.. समय तू ही बता दे.. बाद में यह ना कहना कि तेरी बहन नहीं मान रही थी.. हा हा हा हा.. जरा सोच समझ कर बताना।

पुनीत- नहीं.. मैंने जो बोल दिया वो बोल दिया.. अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

रॉनी- रूको.. तुम दोनों पागल हो गए हो.. मुझे यह बात मंजूर नहीं.. मेरी बहन इस गंदे खेल का हिस्सा नहीं बनेगी.. बस..

पुनीत- क्या बकवास कर रहा है.. मैंने बोल दिया ना और वो सिर्फ़ तेरी बहन नहीं.. मेरी भी है.. तू डर मत.. हम जीतेंगे और इसकी बहन को इसके सामने नंगा करेंगे।

टोनी- वो तो समय ही बताएगा.. कौन किसको नंगा करता है.. बोल गेम कब शुरू होगा?

पुनीत- देख बहन को मना कर लाना आसान काम नहीं है.. कुछ दिन तो लग ही जाएँगे.. समय हम बाद में तय कर लेंगे.. ओके..

टोनी- ठीक है.. मगर बस 10 दिन का समय होगा.. उस दौरान तू अपनी बहन को पटा कर लाएगा.. नहीं तो तू हार जाएगा.. ओके..

पुनीत- ठीक है साले.. मगर तू भी याद रखना.. अगर तू ना पटा पाया.. तो क्या होगा..

टोनी- मेरी फिकर मत कर.. मुझे पता है.. मुझे किस तरह पटाना है।

सन्नी और रॉनी बस बेबस से अपने आप को कोस रहे थे कि पुनीत ने यह क्या कर डाला.. देर शाम तक वो सब वहीं बैठे बकवास करते रहे।

सन्नी- अरे यार शाम होने को आई है.. मीटिंग तो ओवर हो गई.. अब क्या इरादा है?

पुनीत- इरादा तो बहुत कुछ है.. मगर आज मूड दूसरा हो गया.. तुम लोग जाओ.. हम सुबह आ जाएँगे..

टोनी- ठीक है यार.. अब जाने में ही भलाई है.. वरना पुनीत कहीं अपनी बात से मुकर ना जाए।

पुनीत- कुत्ते.. ये किसी ऐरे-गैरे की ज़ुबान नहीं.. पुनीत खन्ना की ज़ुबान है तू अपना संभाल..

विवेक- तुम हमारे साथ आ जाओ टोनी.. सन्नी तो अपनी कार से जाएगा।

सन्नी- हाँ तुम निकल जाओ.. मैं बाद में आता हूँ ओके..

वो तीनों वहाँ से निकल गए और सन्नी और रॉनी गेट के बाहर तक उनको छोड़ने आए।

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10-07-2016, 09:44 AM
Post: #28
RE: वासना ओर बदले की आग
काफ़ी देर तक सन्नी और रॉनी बाहर खड़े बातें करते रहे.. उसके बाद अन्दर आ गए।

पुनीत- रॉनी मेरे भाई.. यहाँ आ.. यार मुझसे ऐसे नाराज़ मत हो।

रॉनी- पर ये तूने क्या कर दिया.. उस टोनी की बातों में आ गया.. अब क्या होगा? हमारी बहन को तू यहा इस गंदे गेम का हिस्सा बनायेगा? अरे वो कितनी स्वीट है.. मासूम है!

पुनीत- नही यार.. तू मुझे पागल समझता है क्या.. उस कुत्ते को मैंने अपने जाल में फँसा लिया है। वो कौन सा हमारी बहन को जानता है.. हम किसी और को बहन बना कर लाएँगे।

रॉनी- ओह्ह वाउ.. मान गया तेरे दिमाग़ को.. अब उस कुत्ते की बहन को सबके सामने नंगा करेंगे।

सन्नी- यार सच्ची पुनीत.. तेरे दिमाग़ को मान गया.. साले शैतान को भी पीछे छोड़ दिया। वैसे बहन का रोल देगा किसे?

रॉनी- ये मुनिया कैसी रहेगी.. वो उमर में भी छोटी है और माल भी मस्त है.. टोनी तो उसको देखते ही लट्टू हो जाएगा..

पुनीत- नहीं यार मुनिया गाँव की छोरी है.. साला कुत्ता.. उसको तुरंत पकड़ लेगा। अब उसको ये तो पता है ना हमारी बहन गुड्डी कॉलेज में है और मुनिया ठहरी अनपढ़… सारा गेम खराब हो जाएगा।

रॉनी- तो अब क्या करेंगे.. किसको गुड्डी की जगह लेकर आएँगे?

पुनीत- इसकी फिकर ना कर.. दिल्ली जाकर किसी ना किसी को ढूँढ ही लेंगे.. आज मुनिया को ठीक से चोद कर कल निकल जाएँगे.. ठीक है ना..

सन्नी- यार ये मुनिया कौन है?

रॉनी- अरे एक कच्ची कली है यार.. आज ही उसका मुहूरत किया है.. साली बड़ा मज़ा देती है।

पुनीत- उसकी चूत इतनी टाइट है क्या बताऊँ.. साला लंड अन्दर जाते ही ऐसा महसूस करता है कि किसी भट्टी में फँस गया हो।

सन्नी- अरे यार मेरा तो सुनकर ही ये हाल हो गया.. कहाँ है वो.. रूप की रानी.. काम की देवी?

पुनीत- अरे नहीं यार सन्नी.. वो ऐसी लड़की नहीं है.. बड़ी मुश्किल हम दोनों से चुदी है। अब तेरे बारे में बात करूँगा तो गड़बड़ हो जाएगी।

सन्नी- अरे क्या मेरे यार.. मुझे इतना गिरा हुआ समझा है क्या.. जो तेरे माल पर हाथ साफ करूँगा.. बस दिखा दे एक बार.. पता तो लगे ये कामदेवी कैसी है?

पुनीत- ठीक है रुक.. अभी दिखाता हूँ मेरी सोने की चिड़िया को..

इतना कहकर पुनीत कमरे में गया उस वक़्त मुनिया नहा कर कपड़े पहन रही थी।

पुनीत- हाय मेरी जान बहुत सोई रे तू.. अब नहा कर एकदम मस्त लग रही है। आज पूरी रात मज़ा लेंगे हम दोनों.. क्यों क्या बोलती है..?

मुनिया- आप भी ना ऐसे ही चले आते हो.. कपड़े तो पहने दो मुझे और आज कुछ नहीं होगा.. मेरी तबीयत ठीक नहीं है जी..

पुनीत- अरे मेरी भोली मुनिया.. मेरे सामने नंगी हो चुकी है.. अब कैसी शर्म? पहन लिए ना अब कपड़े और शुरू में थोड़ा दर्द होता है.. उसके बाद बड़ा मज़ा आता है।

मुनिया- नहीं बाबूजी.. रॉनी जी ने बहुत ज़ोर से किया.. मुझे नीचे बहुत दर्द हो रहा है।

पुनीत- अच्छा जाने दे.. ये बात बाद में कर लेंगे.. मेरा एक दोस्त आया है.. चल तुझे उससे मिलवाता हूँ.. प्यार से बात करना.. हाँ.. वो मेरा खास दोस्त है.. कहीं वो नाराज़ ना हो जाए..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. मैं कोई वेश्या नहीं हूँ.. जो आप सबके सामने मुझे भेज रहे हो.. मैंने आपको अपना माना.. आपके कहने पर आपके भाई को भी मैंने बर्दाश्त किया.. मगर अब और नहीं बस..

मुनिया के बोलने का तरीका उसकी आँखों में गुस्सा देख कर एक बार तो पुनीत भी घबरा गया।

पुनीत- अरे पगली.. तू गलत समझ रही है.. मैंने कब कहा तुझे ऐसा? तू बस उससे मिल ले.. वो कुछ ऐसा-वैसा नहीं करेगा.. ठीक है ना..

मुनिया- ठीक है बाबूजी.. आप जाओ.. मैं अभी आती हूँ।

पुनीत बाहर आ गया और सन्नी को कहा- साली गुस्सा हो गई.. अब आ रही है.. देख लेना यार कुछ कहना मत.. नहीं तो साली रात को चुदवाएगी नहीं..

सन्नी- अरे गाँव की होकर साली के इतने नखरे.. चल आने तो दे.. मैं भी देखूँ.. कौन है ये मुनिया मस्तानी?

मुनिया ने लाइट ब्लू सलवार सूट पहना हुआ था.. उसके बाल खुले थे.. जिसमें वो अप्सरा जैसी लग रही थी। जैसे ही मुनिया और सन्नी की नजरें मिलीं.. दोनों ही एक-दूसरे में खो गए.. मुनिया धीरे-धीरे सन्नी के पास आकर खड़ी हो गई।

मुनिया- नमस्ते बाबूजी..

सन्नी कुछ नहीं बोला.. बस मुनिया को घूरता रहा।

पुनीत- अरे कहाँ खो गया सन्नी.. ये है मुनिया.. देख लो..

सन्नी- अह.. ह.. हाँ अच्छी है.. मुझे ऐसा क्यों लगता है.. कि मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा है..

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10-07-2016, 09:44 AM
Post: #29
RE: वासना ओर बदले की आग
मुनिया- क्या बाबूजी.. आप भी कैसा मजाक करते हो.. मैं अपने गाँव से कभी बाहर ही नहीं निकली.. आपने कहाँ देख लिया मुझे?

सन्नी- शहर या गाँव मेंने देखा है तुझे.. यार कहाँ देखा है ये समझ नहीं आ रहा.. लेकिन देखा है मैंने!

रॉनी- अरे क्या सन्नी.. ये गाँव की छोरी है.. तू शहर के नुस्खे ना आजमा.. हा हा हा.. ये नहीं पटने वाली..

पुनीत भी हँसने लगा और मुनिया भी हँसती हुई वापस अन्दर चली गई, मगर सन्नी वैसे ही खड़ा बस सोचता रहा।

रॉनी और पुनीत अब भी हंस रहे थे मगर सन्नी चुपचाप खड़ा हुआ बस उस कमरे की ओर देख रहा था.. जिसमें मुनिया गई थी..

रॉनी- अरे सन्नी क्या हुआ.. बहुत पसन्द आ गई क्या.. बोलो.. तब तो आज रात यहीं रुक जाओ.. तुमको भी इसका रस पिलवा देंगे.. हा हा हा हा..

पुनीत- अरे नहीं रे.. वो नहीं मानेगी साली.. आज के लिए तो मेरे को ही मना कर रही है।

रॉनी- उस अनपढ़ गंवार को मनाना कौन सा मुश्किल है?

सन्नी- चुप रहो यार.. दोनों मेरी बात को मजाक में मत लो.. ये मुनिया को मैं जानता हूँ.. कुछ तो है साला.. याद नहीं आ रहा.. मगर देख लेना मैं बता दूँगा.. इसको मैं जानता हूँ। अब तुम ही चोदो इसको.. मुझे एक काम है.. अभी मेरा जाना जरूरी है।

पुनीत- ठीक है जा.. और याद आ जाए तो मुझे भी बता देना.. कि मुनिया कौन है.. हा हा हा..

सन्नी के जाने के बाद रॉनी अपने कमरे में चला गया और पुनीत नौकरों को कुछ खाना बनाने को बोल कर मुनिया के पास चला गया।

मुनिया- पुनीत बाबू.. ये आपके दोस्त क्या बोल रहे थे.. इन्होंने मुझे कहाँ देखा है?

पुनीत- अरे तेरी जवानी देख कर उसका मन बहक गया था.. बस ऐसे ही बोल रहा था.. वैसे तू है बड़ी क़यामत.. यार आज पूरी रात मेरे साथ बिता ले.. मैं तेरी लाइफ बना दूँगा..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. सच्ची आज मेरी ‘वो’ बहुत दर्द कर रही है.. कल कर लेना.. आज नहीं..

पुनीत- अरे ‘वो’ क्या दर्द कर रही है.. साफ-साफ बोल ना.. उसको चूत कहते हैं और मेरे हथियार को लौड़ा बोला कर..

मुनिया- छी: बाबूजी.. आप बड़े बेशर्म हो.. मुझसे नहीं बोला जाएगा..

पुनीत- अरे मेरी जान.. नाम लेगी तो ज़्यादा मज़ा आएगा.. चल यहाँ मेरे पास बैठ और बता..

पुनीत ने मुनिया को अपने से चिपका कर बैठा लिया और उसके मम्मों को हल्के से दबा कर उसको पूछा।

पुनीत- तेरे इन चूचों में भी दर्द है क्या.. मेरी जान?

मुनिया- हाँ बाबूजी.. थोड़ा इनमें भी है.. आह्ह.. दबाओ मत.. दुःखता है।

पुनीत ने ज़ोर से दबाते हुआ कहा- इनका नाम बोल.. नहीं ऐसे ही दबाता रहूँगा और दर्द करता रहूँगा।

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. उफ़फ्फ़.. मेरे चूचे मत दबाओ ना.. आहह..

पुनीत- यह हुई ना बात.. अब तू अपने हर अंग का नाम बताएगी.. तभी मुझे सुकून मिलेगा.. ठीक है..

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. आप तो ससस्स बेशर्म हो.. मुझे भी ऐसा ही बना दोगे.. आह्ह.. अब आप मानोगे नहीं.. ओह.. मेरे चूचों पर रहम करो.. और आह्ह.. मेरी चूत को सहलाओ.. आह्ह.. आपके मोटे लौड़े ने मेरी चूत को सुजा कर रख दिया है आह..

पुनीत- ओह.. मार डाला रे.. मेरी मुनिया.. ये हुई ना बात.. अब लगा कि तू मेरी रानी है। चल मुझे दिखा तेरी चूत.. मैं उसको अपनी जीभ से चाट कर आराम दिए देता हूँ।

मुनिया- अभी नहीं.. रात को दिखाऊँगी.. अभी मुझे जोरों की भूख लगी है.. कुछ खाने के बाद आप देख लेना.. ठीक है..

पुनीत- अरे मेरी जान.. मैं हूँ ना.. मुझे खाले.. इससे ज़्यादा अच्छा खाना तुझे कहाँ मिलेगा.. हा हा हा..

मुनिया- नहीं बाबूजी.. मुझे माँस खाना पसन्द नहीं.. मैं तो सब्जी ही खाऊँगी.. अब आप जाओ.. रात को आ जाना.. मुझे भी रसोई में जाने दो..

पुनीत मस्ती के मूड में था.. मगर मुनिया जल्दी से वहाँ से निकल कर रसोई में चली गई और पुनीत कुछ ना कर सका।

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10-07-2016, 09:45 AM
Post: #30
RE: वासना ओर बदले की आग
दोस्तो, उम्मीद है.. आपको कहानी में मज़ा आ रहा है। अब मुनिया तो गई रसोई में, तब तक चलो टोनी के पास चलते हैं। वहाँ क्या हो रहा है.. अभी ये भी जान लो।

सुनील- बॉस अपने तो कमाल कर दिया.. एक बार तो मैं डर ही गया था कि सारा प्लान चौपट हो गया।

विवेक- अरे ऐसे-कैसे चौपट हो जाता.. बॉस पर मुझे पूरा भरोसा था.. मगर एक बात अभी भी समझ के बाहर है बॉस?

टोनी- कौन सी बात.. तेरी समझ के बाहर है रे.. चल बता?

विवेक- बॉस हमने तो उसकी बहन को देखा भी नहीं है.. कहीं वो भी हमारी तरह नकली बहन ले आया तो?

टोनी- हा हा हा तुम दोनों मुझे क्या समझते हो.. मैंने कच्ची गोली नहीं खेली हैं। तुम दोनों ने क्या मैंने भी अब तक उसकी बहन को नहीं देखा है.. मगर ये खेल का असली विलेन तो उसकी बहन को जानता है ना..

विवेक और सुनील दोनों एक साथ चौंक उठे और एक ही सुर में बोले- ये असली विलेन कौन है बॉस?

टोनी- अरे चौंको मत.. मेरे दोस्तो.. ये काम में उसके लिए ही कर रहा हूँ। अब वो क्या चाहता है.. ये तो पता नहीं मगर गेम कुछ बड़ा है.. इतना मैं समझ गया हूँ।

सुनील- बॉस हम तो समझ रहे थे.. कि ये आपकी दुश्मनी का खेल है.. मगर ये पहेली तो उलझती ही जा रही है.. एक चूत के लिए इतना पंगा?

टोनी- अरे दोस्तो, तुम नहीं समझोगे दुनिया में छोटी सी चूत बड़ी-बड़ी तबाही मचा देती है.. भाई को भाई से लड़वा देती है.. ये चूत सिर्फ़ चूत नहीं.. बल्कि ये चूत एक पहेली होती है.. समझे.. जिसने इसको सुलझा दिया.. वो दुनिया का सबसे अकलमंद आदमी होता है।

विवेक- बॉस जो भी हो.. हमें तो पैसे से मतलब है.. अब देखो ना हम जैसे कंगलों को आपने इतनी बड़ी पार्टी में घुसाया.. गेम खेला और जीत कर चूत के गेम के दावेदार बने। अब तो बस मज़ा ही मज़ा है। आज तक रण्डियों को ही चोदा है.. अब किसी शरीफजादी को चोदने का मौका मिलेगा।

सुनील- बॉस आपने बताया नहीं कि कोमल को कहाँ छोड़ा आपने?

टोनी- इसमें क्या बड़ी बात है.. टैक्सी को दूर खड़ा करके आया था। बस पुनीत को उसकी क़ातिल जवानी दिखा कर वापस टैक्सी में छोड़ आया और खुद गाड़ी को इधर-उधर घुमा कर समय पास किया और वापस आ गया समझे..

सुनील- आपका दिमाग़ बहुत चलता है.. इसलिए आप हमारे बॉस हो.. अब आगे क्या करना है?

टोनी कुछ बोलता उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा।

टोनी- हैलो भाई कैसे याद किया.. काम हो गया.. मैंने उसको बातों में फँसा लिया। अब उसकी बहन गेम में आएगी और हम उसको नंगा कर देंगे। आप बस नजारा देखो अब..

भाई- ओह्ह.. रियली.. ये हुई ना बात.. अब आगे क्या करना है.. पता है ना?

टोनी- नहीं भाई.. आपने कहा था.. पहले पुनीत और रॉनी को जाल में फँसाओ.. उसके बाद आगे का प्लान बताऊँगा।

भाई- हाँ याद है.. तू पहले ये बता वहाँ क्या हुआ था?

टोनी ने सारी बात भाई को बताई.. जिसे सुनकर वो खुश हो गया।

भाई- अब सुन तेरे फ़ोन में मैसेज भेज रहा हूँ.. ये एक जगह का पता है.. तू कल वहाँ चला जा..

काफ़ी देर तक भाई बोलता रहा और टोनी बस चुपचाप सुनता रहा।

टोनी- वाह भाई मान गया.. आप तो मेरे दिमाग़ को पढ़ लेते हो.. मुझे भी यही शक था कि साला कोई नकली बहन ना ले आए.. अब देखता हूँ साला कैसे बचाता है.. अपनी बहन को.. मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच जाऊँगा।

फ़ोन रखने के बाद टोनी ने उन दोनों को मुस्कुरा कर देखा.. उनके चेहरे भी चमक गए।

विवेक- क्या हुआ.. भाई ने क्या कहा?

टोनी- अरे ये देख.. कल इस जगह हमें जाना है.. पुनीत की बहन कल यहीं मिलेगी और वो दोनों हरामी भी वहीं अपनी बहन के साथ होंगे.. तब हम आराम से उसको पहचान लेंगे।

विवेक- मगर बॉस वो वहाँ आएँगे कैसे.. वो दोनों तो फार्म हाउस पर हैं ना.. और उनको वहाँ भेजेगा कौन?

टोनी- अरे कुत्तों.. ये भाई ऐसी-वैसी चीज नहीं है.. वो कल के लिए कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही लेगा..

सुनील- वाह.. बॉस ये भाई तो बड़ा माइंडेड है.. कैसे सब प्लान बना लेता है..? अब उसकी बहन नहीं बचने वाली है.. बस कल सब काम ठीक से हो जाए।

टोनी- अरे सब ठीक ही होगा.. चलो अब कुछ खाने का बंदोबस्त करो.. बहुत जोरों की भूख लगी है।

{लो यहाँ तो खाना शुरू हो गया.. अब यहाँ रहकर क्या फायदा.. तो वापस फार्म हाउस ही चलते हैं.. शायद कुछ मिल जाए।}

उधर रॉनी अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी पुनीत वहाँ आ गया।

रॉनी-* कहाँ रह गया था.. अब क्या सोचा तूने.. हम तो एक हफ्ते के लिए यहाँ आए थे.. मगर इस नकली बहन के चक्कर में कल ही जाना पड़ेगा।

पुनीत- अरे अब करें भी तो क्या करें.. बात ज़ुबान की आ गई है.. कल जाकर किसी लड़की को तलाश करते हैं जिसे टोनी ना जानता हो।

रॉनी- हाँ ये बात तो है.. सन्नी को पूछें शायद वो कुछ जुगाड़ जमा दे।

पुनीत- हाँ ये सही रहेगा.. उसका दिमाग़ हमसे ज़्यादा चलता है.. वो कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही देगा।

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