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वासना ओर बदले की आग
10-07-2016, 09:45 AM
Post: #31
RE: वासना ओर बदले की आग
सन्नी- ठीक है.. करता हूँ.. तुम आओ तो सही.. यहाँ आकर बात करेंगे मगर एक बात का ख्याल रहे.. टोनी बहुत हरामी है.. उसको ज़रा भी भनक ना लगने पाए.. इसलिए तुम दोनों अपनी बहन को अपने साथ कहीं मत ले जाना। अगर टोनी या उसके किसी चमचे ने गुड्डी को देख लिया तो सब प्लान चौपट हो जाएगा।

रॉनी- अरे इसकी फिकर मत करो.. वैसे भी गुड्डी को बहुत कम लोग जानते हैं। वो कहीं आती-जाती तो है नहीं.. बस अपनी पढ़ाई से मतलब रखती है।

सन्नी- तब ठीक है.. अब उस टोनी का काम तमाम हो गया समझो.. तुम दोनों आ जाओ.. लड़की हम ढूंढ लेंगे.. मगर फिर भी सावधानी के लिए मुझे टोनी पर नज़र रखनी होगी।
रॉनी- हाँ ये ठीक रहेगा.. तुम उस पर नज़र रखो.. हम कल आ रहे हैं बाकी बातें वहीं आकर करेंगे।

पुनीत- गुड्डी को टोनी ने कभी नहीं देखा और ना कभी देख पाएगा क्योंकि पापा कितने सख़्त मिज़ाज हैं गुड्डी को लेकर उस बेचारी को किसी फ्रेण्ड तक के साथ अकेली बाहर जाने की इजाज़त नहीं है। हमारे पड़ोसी तक गुड्डी को नहीं पहचानते.. तो वो कुत्ता क्या खाक जान पाएगा।
रॉनी- अरे यार वो सख़्त इसलिए हैं कि गुड्डी को बहुत प्यार करते हैं। याद है एक बार गुड्डी के पैर में हल्की सी मोच आ गई थी। कैसे पूरे घर में हंगामा मचा दिया था।


पुनीत- हाँ सब याद है.. चल यार भूख लगी है.. खाना खा ही लेते हैं। उसके बाद दोनों मिलकर मुनिया का गेम बजाएँगे।
रॉनी- अरे खाना ऐसे ही खाओगे क्या.. पहले कुछ पीना हो जाए?
पुनीत- सुबह से पी ही रहे हैं चल आ जा.. अब खाना ही खाएँगे.. बड़ी भूख लगी है।
दोस्तों इनको खाने दो.. हम थोड़ा घूम कर आते हैं।

हॉस्टल में रात को सभी लड़कियाँ खाना खाने के बाद अपने कमरों में बैठी बातें कर रही थीं।

पूजा- अरे यार तू दिखने में तो बड़ी स्टाइलिश है.. मगर सेक्स से इतनी दूर क्यों रहती है?
पायल- अरे में कोई गाँव की थोड़ी हूँ.. जो स्टायल में नहीं रहूँगी.. बस ये सेक्स मुझे पसन्द नहीं..
पूजा- अरे आजकल तो ये फैशन बन गया है.. लड़की जब तक एक आध ब्वॉय-फ्रेण्ड ना बनाए.. उसको शक की निगाह से देखा जाता है कि कहीं ये लेसबो तो नहीं.. मगर तू तो वो भी नहीं है..

पायल- अरे ये सब बकवास बात है.. लड़के बस मज़े लेकर लड़की को छोड़ देते हैं उनको तो बस तड़पाओ.. मगर घास ना डालो..
पूजा- अरे तू तो हर बात को उल्टा ही बोलेगी.. कभी किसी को देखा है सेक्स करते हुए.. कितना मज़ा आता है उसमें.. तू क्या जाने?
पायल- बस बस.. तू क्या समझती है.. मुझे कुछ पता नहीं.. अरे मैं इन सब से दूर रहती हूँ… तो क्या हुआ.. जानकारी सब है मुझे..
पूजा- हा हा हा.. आजकल नेट के जमाने में जानकारी तो बच्चे को भी हो जाती है.. तूने कौन सा तीर मार लिया।
पायल- अरे तूने जब सोचा भी नहीं होगा.. तब मैंने लाइव सेक्स देख लिया था और तब से मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।

पायल जोश में बोल तो गई.. मगर जब उसको ख्याल आया कि वो यह क्या बोल गई.. तब उसके चेहरे पर परेशानी के भाव आ गए और वो चुप हो गई।

पूजा- ओये होये.. मेरी भोली पायल.. तूने कब और क्या देख लिया.. बता ना यार.. इतने साल पहले किसे देखा.. बता ना यार.. मुझे जानना है..
पायल- नहीं किसी को नहीं देखा.. बस ऐसे ही मुँह से निकल गया.. सच्ची..
पूजा- बस यार ये नाटक मत कर.. मुझे पता है तूने अपने मॉम-डैड को ही देखा होगा.. इतने साल पहले.. तो वही देख सकती है। मैंने भी बहुत देखा है अपनी मॉम को डैड से चुदवाते हुए.. उनकी फिल्म देख कर ही तो मैं सब सीखी हूँ।
पायल- चल हट.. कुछ भी बकवास करती है.. मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा। अब दूसरी बात कर..
पूजा- अरे यार.. अब बता भी दे.. इसमें शरमाना कैसा और तुझे सेक्स से नफ़रत क्यों हो गई.. बता ना यार?

पायल- ठीक है बताती हूँ.. मगर किसी को कहना मत तू.. प्लीज़ यह मेरे घर की बात है।
पूजा- अरे पागल है क्या.. मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. चल अब बता..

पायल- ये बहुत साल पहले की बात है जब मैं छोटी थी.. तो एक रात मेरे सर में बड़ा दर्द हो रहा था। मैं अपने कमरे से निकल कर मॉम के कमरे के पास गई.. गेट को नॉक करने ही वाली थी कि दूसरे कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं। वो कमरा मेरी आंटी का था.. मैं धीरे से उस कमरे के पास गई और खिड़की से झाँक कर अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए।
पूजा- ऐसा क्या देखा तूने आंटी के कमरे में.. बता ना यार?
पायल- मेरी आंटी एकदम नंगी लेटी हुई थीं और मेरे पापा उनके मम्मों को चूस रहे थे, उनके नीचे हाथ से रगड़ रहे थे।
पूजा- ओह वाउ.. तेरे पापा अगर आंटी के साथ थे तो तेरी मॉम अकेली क्या कर रही थीं।


पायल- मॉम अपने कमरे में सोई हुई थीं। उनको ऐसी हालत में देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया। उस समय सेक्स का पता भी नहीं था.. मैं डर गई और जल्दी से मॉम के कमरे की तरफ़ भागी और नॉक किया।


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10-07-2016, 09:45 AM
Post: #32
RE: वासना ओर बदले की आग
पूजा- अरे तेरी की.. कर दी ना गड़बड़.. पहले चुदाई का खेल तो देखती.. उसके बाद क्या हुआ.. तेरी मॉम उठ गई होगी और झगड़ा शुरू हो गया होगा?
पायल- नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ.. तू आगे तो सुन.. नॉक के साथ ही दरवाजा अपने आप खुल गया। मैं धीरे से अन्दर गई तो मॉम बैठी रो रही थीं मुझे देख कर अपने आँसू पोंछे।

मॉम- अरे बेटा क्या हो गया.. इतनी रात को तू यहाँ क्यों आई है?
पायल- मॉम मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है.. इसलिए आई हूँ।
मॉम- अरे आ.. मैं दवा दे देती हूँ.. सब ठीक हो जाएगा।

मैं मॉम के पास जाकर बैठ गई.. वो बड़े प्यार से मेरा सर दबाने लगी।
पायल- मॉम सब ठीक तो है ना..
मॉम- हाँ बेटा सब ठीक है.. क्या हुआ.. तूने यह सवाल क्यों पूछा?
पायल- सब ठीक है तो आप रो क्यों रही थीं?

मॉम- नहीं बेटा.. मैं कहाँ रो रही हूँ.. वो वो बस ऐसे ही आँख में कुछ चला गया था।
मॉम ने बहुत कोशिश की.. मुझे टालने की.. मगर उनकी आँखों से 2 बूँद आँसू और आ गए।
पायल- नहीं मॉम.. कुछ तो बात है.. देखो आपकी आँख फिर से भर आईं और पापा कहाँ हैं?
मॉम- मैंने कहा ना.. कुछ नहीं हुआ और तेरे पापा को कुछ काम था.. वो बाहर गए हैं।
पायल- मॉम आप झूठ बोल रही हो.. मैंने पास के कमरे में सब देखा है.. पापा और आंटी..

मैं आगे कुछ बोलती.. मॉम ने मुझे एक चांटा मार दिया और मुझे सीने से चिपका कर रोने लगीं।

मॉम- आई एम सॉरी बेटा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैंने तुम्हें मारा.. तेरे पापा को ये बात मत कहना.. वो नाराज़ होकर कहीं चले जाएँगे.. बेटा मेरी तो लाइफ बर्बाद हो गई। अब अगर तेरे पापा चले गए तो हम सब की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। तू अभी बच्ची है.. भूल जा सब.. किसी को कुछ मत कहना।

पायल- लेकिन मॉम ये सब क्या है.. वो इतने गंदे काम कर रहे हैं.. आप कुछ बोलती क्यों नहीं?
मॉम- चुप रह तू.. मैंने कहा ना.. तेरी आंटी का घर में आना मेरी जिंदगी में तूफान से कम नहीं.. तेरे पापा अब बदल गए हैं। बस अब तू ये बात किसी को मत बताना.. ले दवा ले.. चुपचाप अपने कमरे में चली जा..

मॉम ने मुझे दवा देकर वहाँ से भेज दिया। जब तक मैं अपने कमरे में नहीं चली गई.. वो दरवाजे पर खड़ी मुझे देखती रहीं।
बस उस दिन से मुझे मेरी आंटी से नफ़रत हो गई। मेरे पापा बहुत अच्छे थे.. मगर उनके आने के बाद वो काफ़ी बदल से गए, अक्सर मेरी मॉम को मैंने रोते देखा है।
मुझे पता लग गया कि ये सब सेक्स के कारण हुआ और बस मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।

पूजा- अरे यार तेरी मॉम के साथ तो बुरा हुआ.. वैसे तू गलत है यार तेरे पापा के कांड के कारण तू सेक्स से क्यों नफ़रत करती है। तुझे उनसे नफ़रत करनी चाहिए थी। अपनी लाइफ क्यों बर्बाद कर रही हो?

पायल- नो वे.. मेरे पापा मुझे अभी भी उतना ही प्यार करते हैं। ये सब तो मेरी आंटी का किया-धरा है.. मैंने बहुत बार उनको जलील भी किया.. मगर वो पक्की रंडी हैं उनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती.. बस इसी सब के चलते मुझे हॉस्टल में आना पड़ा.. घर में घुटन सी होने लगी थी मुझे, मैंने पापा को राज़ी किया कि मुझे पढ़ाई में दिक्कत है.. हॉस्टल में रह कर ठीक से पढ़ाई कर सकूँगी।

पूजा- तेरे पापा को पता है कि तू उनके राज़ जान गई है?
पायल- ये मैं नहीं जानती.. शायद उस रंडी ने उनको बताया होगा.. मगर मैंने कभी पापा को यह बात नहीं कही और ना ही कभी उनको मेरे आगे शरमिंदा होना पड़ा.. वो मेरी हर बात मानते हैं। मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं चाहती तो उनको उस रंडी से दूर कर सकती थी.. अपनी कसम देकर मगर मैं अपने पापा को अपनी नज़रों में गिरने नहीं दे सकती.. इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।

पूजा- वाह यार.. तू भी कमाल की है.. आंटी को रंडी और पापा को कुछ नहीं.. ये भेदभाव क्यों?
पायल- मेरे पापा शुरू से अच्छे थे और अब भी अच्छे हैं.. उस रंडी ने उनको बहका दिया.. उसमें पापा का क्या कसूर? मेरी माँ ओल्ड टाइप की हैं.. और वो रंडी मॉर्डन.. बला की खूबसूरत.. जिसे देख कर वो क्या.. कोई भी बहक जाए.. खास कर जब कि वो अपने हुस्न के जलवे दिखाए.. समझी?

पूजा- अच्छा तो ये बात है.. तेरी आंटी जलवा दिखाती हैं.. मगर ये तो बता तेरे अंकल कहाँ हैं? वो कैसे कुछ नहीं कहते?
पायल- यार अब बस भी कर.. क्या बकवास टॉपिक लेकर बैठ गई? तू अपनी सुना ना.. कैसे तूने पहली बार सेक्स किया था और किसके साथ किया था?
पूजा- अरे ये टॉपिक तो तेरे टॉपिक से भी ज़्यादा बकवास है.. तू सुन नहीं पाएगी और वैसे भी तेरी नज़र में मेरी इज्जत कम है.. वो बात सुनकर तो तू मेरे को थर्ड क्लास रंडी का दर्जा दे देगी।
पायल- अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. मैं क्यों तुझे गलत समझूँगी.. यार तेरी लाइफ है.. तू जैसे चाहे जिए.. चल बता..

अब पूजा आराम से सीधे होकर बैठ गई और वो बोली- अब पूरी बात सुनने के बाद ही कुछ बोलना समझी..
पायल ने कुछ सोचा और खड़ी हो गई।
पूजा- अरे क्या हुआ.. तेरे को मेरी बात नहीं सुनना क्या?
पायल- अरे नहीं नहीं.. सुन रही हूँ ना.. लेकिन तू शुरू करे उसके पहले मैं बाथरूम जाकर आती हूँ.. ताकि बाद में तेरी बात काटकर ना जाऊँ.. बड़े जोरों की लगी है यार..
पूजा- अरे अभी असली मज़ा शुरू भी नहीं हुआ और तेरी चूत रिस गई क्या.. हा हा हा हा.. जा जल्दी आना..
पायल- तू बहुत बेशर्म है.. अब बाथरूम जाने में भी गंदी बात बोल दी.. तू नहीं जाती क्या..
पूजा- अच्छा बाबा सॉरी.. अब जा जल्दी आ जाना ओके..

पायल के जाने के बाद पूजा वहीं बैठ कर पुराने लम्हों को याद करके मुस्कुराने लगी।
दोस्तो, अब पायल जब तक नहीं आ जाती.. यहाँ हम क्या करेंगे.. चलो हमारे दोनों हीरो को देख लेते हैं।

पुनीत और रॉनी खाने के बाद अपने कमरे में बैठे थे.. तभी वहाँ मुनिया आ गई.. जिसे देख कर दोनों के होश उड़ गए क्योंकि मुनिया ने अपने जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया लपेटा हुआ था।

पुनीत- अरे मुनिया.. ये क्या.. ऐसे अधनंगी क्यों घूम रही हो.. क्या इरादा है तुम्हारा.. क्यों हमारा ईमान खराब कर रही हो तुम?
मुनिया- बाबूजी.. आप बुरा ना मानना.. मगर आप जैसे बेईमान का ईमान कहाँ होता है.. मुझे काम के बहाने यहाँ लाए और यहाँ मुझसे दूसरा ही काम करवा रहे हो।
रॉनी- हा हा हा मेरी जान.. ऐसे तो ना कहो.. हमने काम ही कहा था और मालिश की बात की थी.. उसके अलावा क्या बेईमानी की.. बता तू?

मुनिया- अब रहने दो.. आप लोगों ने तो इतना बड़ा बम्बू मेरी छोटी से जगह में घुसा दिया.. ये कौन सा काम हुआ?
पुनीत- अरे अभी भी तेरी शर्म नहीं निकाली क्या.. जगह नहीं चूत बोल चूत.. हा हा.. और ये तो बता ऐसे क्यों आई है?
मुनिया- अब कपड़े पहने का फायदा ही क्या.. कुछ देर बाद तो आप निकाल ही दोगे.. मैंने सोचा ऐसे ही आपके पास चली आती हूँ.. और एक बात भी पूछनी है।

रॉनी- आ जाओ मेरी जान.. यहाँ आओ.. सही कहा.. जब नंगी होना ही है तो कपड़े पहने का फायदा क्या.. बोल क्या बात पूछनी थी तेरे को?
मुनिया- वो आप कल चले जाओगे तो मैं यहाँ अकेली क्या करूँगी.. आप मुझे अपने साथ शहर ले चलो ना..
पुनीत- अरे मुनिया रानी.. तुझसे अब दूर कहाँ रहा जाएगा.. बस कुछ दिन की बात है.. हम वापस आ रहे हैं ना.. और तू यहाँ मत रहना तुझे वापस गाँव छोड़ देंगे.. जब दोबारा आएँगे तू साथ आ जाना समझी..

मुनिया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और खुश हो गई। अब वो दोनों के बीच में बैठी हुई थी और शर्मा रही थी।
पुनीत धीरे-धीरे उसके गालों को सहला रहा था और रॉनी उसकी जाँघों को दबा रहा था। मुनिया ने आँखें बन्द कर ली थीं.. और आने वाले पलों के बारे में सोच कर मज़ा ले रही थी।

पुनीत- उफ़फ्फ़ मुनिया.. तेरे ये पतले होंठ मुझे पागल बना रहे हैं कल क्या मज़ा दिया था तूने.. अपने इन मुलायम होंठों से मेरे लंड को.. आह्ह..
रॉनी- हाँ.. मुनिया तू लौड़ा बहुत अच्छा चूसती है.. चल आज तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा में.. और तू भाई का लौड़ा चूस के मज़ा ले.. चल आ जा..

मुनिया- नहीं बाबूजी.. मैंने कहा था ना.. दोनों एक साथ मत करना.. मुझे बहुत दुःखता है।
रॉनी- अरे यार दोबारा वही बाबूजी.. बड़ा अजीब लगता है.. नाम लो यार तुम.. उसमें ज़्यादा मज़ा आएगा।
पुनीत- अरे मुनिया.. दो का मज़ा ही कुछ और होता है.. आज तेरे को डबल का असली मज़ा देंगे.. तू बस देख और रॉनी ठीक कहता है.. नाम ले हमारा..
मुनिया- अच्छा पुनीत जी.. आप जैसा कहो.. ठीक है.. अब मैं मना नहीं करूँगी.. जैसे चाहे चोद लो मुझे.. बस खुश.. अब शुरू हो जाओ..
रॉनी- ये हुई ना बात मेरी जान.. अब आएगा असली मज़ा..

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10-07-2016, 09:48 AM
Post: #33
RE: वासना ओर बदले की आग
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10-07-2016, 09:48 AM
Post: #34
RE: वासना ओर बदले की आग
मुनिया- रॉनी जी.. एक बात कहूँ.. मुझे आज पूरा मज़ा दे दो.. ताकि कल जब आप लोग चले जाओ.. तो मैं बस आपको याद करके दिन बिताऊँ..
रॉनी- हा हा हा हा.. देखा भाई.. यह है लंड का चस्का.. साली एक दिन में ही हमारी गुलाम हो गई।
पुनीत- हाँ.. अब ऐसे मस्त लौड़े इसे कहाँ मिलेंगे.. चल मेरी जान.. पहले हम दोनों के लौड़े को चूस कर चिकना कर.. उसके बाद तेरी चुदाई करेंगे..

इतना कहकर दोनों ने अपने कपड़े निकाल दिए और बिस्तर पर सीधे लेट गए, मुनिया ने भी अपना तौलिया उतार दिया, अब वो भी नंगी थी और दोनों के पैरों के बीच बैठ कर दोनों हाथों से एक साथ दोनों के लौड़े सहला रही थी।

पुनीत- आह्ह.. तेरे हाथ भी कमाल के हैं लंड को छूते ही इसमें करंट पैदा हो जाता है.. देख ये कैसे अकड़ने लग गया है..
मुनिया- पुनीत जी.. आप भी बहुत उतावले हो.. रॉनी जी को देखो कैसे आँखें बन्द किए हुए मज़ा ले रहे हैं अब बस आप चुप रहो.. मुझे प्यार से सब करने दो..

उसके बाद कोई कुछ ना बोला और मुनिया बारी-बारी दोनों के लंड चूसने लगी.. जो अब पूरे विकराल रूप में आ गए थे।
मुनिया एक्सपर्ट तो नहीं थी मगर अपनी पूरी कोशिश कर रही थी कि किसी तरह दोनों को पूरा मज़ा दे सके।

पुनीत- उफ्फ.. जालिम ऐसे ना चूस.. नहीं लौड़ा चूत में जाने से पहले ही ठंडा हो जाएगा..
रॉनी- आह्ह.. मज़ा आ रहा है भाई.. इसके 2 होल तो खोल दिए हमने.. आज तीसरा भी खोल ही देते हैं।

उन दोनों की बात सुनकर मुनिया ने लौड़ा मुँह से निकाला और सवालिया निगाहों से उनको देखने लगी।
पुनीत- अरे क्या हुआ.. चूस ना मेरी रानी रुक क्यों गई..
रॉनी- लगता है थक गई भाई.. या इसकी चूत बहुत गीली हो गई है शायद..
मुनिया- आप दोनों ना बस गंदी बातें करना जानते हो.. ये होल का क्या मतलब है.. ये तो बताओ?

रॉनी- अरे होल नहीं जानती.. हा हा हा अरे जानेमन.. हम तेरे छेद की बात कर रहे हैं देख एक तेरा मुँह भी एक छेद है.. जिसका मज़ा हमने ले लिया.. दूसरा छेद है.. तेरी फड़कती चूत.. जिसको हमने खोल दिया। अब आख़िर का छेद बचा तेरी गाण्ड का.. आज उसको भी खोल कर तुझे पूरी तरह औरत बना देंगे हा हा हा हा..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. भगवान के लिए आज ऐसा कुछ ना करना.. वरना कल माँ के सामने नहीं चल पाऊँगी.. मेरी फुद्दी में ही अभी बहुत दर्द है.. इसका दर्द तो ख़त्म होने दो.. अगली बार आऊँगी तो जो चाहे कर लेना.. मगर आज नहीं..
पुनीत- अरे डरती क्यों है.. कुछ नहीं होगा.. तू हमें जानती नहीं है.. चोदने के पक्के खिलाड़ी है हम..

मुनिया- नहीं पुनीत जी.. बस मेरी ये बात मान लो.. आपको भगवान की कसम है.. अगर मेरी बात ना मानी तो..
रॉनी- अरे डर मत.. जा आज नहीं करेंगे.. मगर जल्दी ही तेरी मुलायम गाण्ड का मुहूरत मैं ही करूँगा.. ठीक है..
पुनीत- अरे तू क्यों.. मैं करूँगा.. इतनी प्यारी गाण्ड को तो मैं ही खोलूँगा..
रॉनी- नहीं भाई अपने चूत को खोला है ना.. अब गाण्ड की बारी मेरी है.. समझे आप..

मुनिया- हा हा हा दोनों लड़ाई मत करो.. सिक्का उछाल कर तय कर लेना कि कौन पहले करेगा..
रॉनी- अगर ऐसी ही बात है तो सिक्का क्यों.. हम ताश का गेम खेल कर तय करे लेंगे.. क्यों भाई क्या कहते हो.?
पुनीत- अरे हार जाएगा.. तू जानता है ना.. किस्मत हमेशा मेरे साथ होती है तीन इक्के लाऊँगा हा हा हा..

रॉनी- वो तो समय आने पर पता लगेगा भाई.. कि कौन जीतेगा.. अभी क्यों मूड खराब करना.. इतनी प्यारी कन्या चूत फैलाए पड़ी है.. इसका तो इन्तजाम कर दे पहले..
पुनीत को रॉनी की बात समझ आ गई उसने मुनिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके निप्पल चूसने लगा।
इधर रॉनी ने उसकी चूत को अपना निशाना बनाया और चाटने लगा..

मुनिया- आह्ह.. नहीं उफ्फ.. रॉनी जी आह्ह.. दुःखता है.. आह्ह.. ऐसे ना करो ना.. आ…

रॉनी चूत के दाने को जीभ से हिला रहा था.. कभी पूरी चूत को होंठों में दबा कर ज़ोर से चूसने लगता.. जिससे मुनिया की सिसकी निकल जाती.. ऊपर से पुनीत उसके निप्पल को दाँतों से दबा कर मज़ा दे रहा था।
उन दोनों के लौड़े उफान खाने लगे थे.. अब वासना का तूफान अपने चरम पर पहुँच गया था।

रॉनी- उफ्फ.. नारियल पानी से भी ज़्यादा टेस्टी रस है तेरी चूत का.. चल जानेमन अब तेरी चूत को ठंडा करता हूँ.. जल्दी से बन जा घोड़ी.. देर मत कर..

पुनीत बिस्तर से टेक लगा कर बैठ गया और मुनिया पुनीत के पैरों की तरफ़ मुँह करके घोड़ी बन गई।
अब पुनीत का खड़ा लंड उसके मुँह के पास था, उधर पीछे रॉनी लौड़े को चूत पर टिका कर शॉट लगाने की तैयारी में था।

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10-07-2016, 09:48 AM
Post: #35
RE: वासना ओर बदले की आग
पुनीत- अरे मुनिया रानी.. तू तो बहुत ज़बरदस्त घोड़ी बनी है रे.. चल.. सोच क्या रही है.. चारा तेरे सामने है.. तो खा ना.. हा हा हा..

मुनिया मुस्कुरा कर लौड़े को मुँह में लेके चूसने लगी और रॉनी ने सुपारा चूत में घुसा कर धक्का मारा.. तो दर्द के मारे मुनिया आगे को सरक गई। मगर रॉनी ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर ज़ोर का धक्का मारा.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया और मुनिया दर्द से कराह उठी। मगर पुनीत का लौड़ा मुँह में था तो बस बेचारी कसमसा कर रह गई..

रॉनी- आह्ह.. मुनिया.. तेरी चूत तो मक्खन जैसी है.. मज़ा आ गया रानी.. अब घोड़ी ठीक से बनी रहना.. मैं रफ़्तार बढ़ा रहा हूँ.. तेरी सवारी का मज़ा आराम से लेने में मज़ा नहीं आएगा.. जितनी स्पीड तेज होगी.. उतना ज़्यादा लुत्फ़ मिलेगा मेरी जान..।

रॉनी अब चूत में लौड़े की ठोकमठोक करने लगा था.. उधर बेचारी मुनिया आगे पुनीत के लौड़े से और पीछे रॉनी के लौड़े से चुद रही थी। फ़र्क ये था पुनीत आराम से बैठा था और मुनिया मुँह आगे-पीछे करके उसके लौड़े को चूस रही थी और रॉनी अपनी कमर को स्पीड से हिला रहा था।

पुनीत- आह्ह.. चूस जान उफ्फ.. तेरा मुँह भी चूत जैसा मज़ा दे रहा है आह्ह..

रॉनी 10 मिनट तक स्पीड से चुदाई करता रहा। इधर पुनीत भी लौड़े की चुसाई से बेहाल हो गया था। अब दोनों ने पोज़ चेंज किया। रॉनी सामने बैठा और पुनीत चूत को पेलने लगा।

रॉनी- आह तेरी चूत में जो मज़ा है.. आ अब मुँह से वैसा ही मज़ा दे.. होंठ भींच कर चूस मेरी जान…

पुनीत स्पीड से लौड़े को आगे-पीछे करने लगा.. वो झड़ने वाला था। इधर रॉनी का भी हाल बुरा था.. वो मुनिया के मुँह को ज़ोर से चोदने लगा.. कमर को झटके देने लगा। तभी उसके लौड़े ने मुनिया के मुँह में माल गिरा दिया.. इधर पुनीत भी चूत में लावा भरने लगा।
इस दौरान मुनिया 2 बार झड़ चुकी थी उसकी कमर दुखने लगी थी। उसकी चूत का तो हाल पूछो मत.. पहले ही सूजी हुई थी.. अब तो और सूज गई, वो बेहाल सी होकर एक तरफ़ लेट गई.

दोस्तो, मुनिया ने तो दो का मज़ा एक साथ ले लिया.. अब यहाँ रुकने का फायदा नहीं.. इनको थोड़ा आराम करने दो.. वहाँ पायल वापस आ गई होगी.. तो वहाँ चलते हैं।

पायल आकर पूजा के पास बैठ गई और कहा- अब सुना तेरी कहानी..
पूजा- ठीक है सुन.. अब से 3 साल पहले की बात है.. जब मैं 18 साल की थी.. घर में मॉम-डैड के अलावा मेरा बड़ा भाई पुरषोत्तम उर्फ पुरु और छोटा भाई राजू भी है। पुरु उस समय 22 का था और कॉलेज में लास्ट इयर की पढ़ाई कर रहा था और राजू कम उम्र का था।

पायल- छी: पुरषोत्तम.. इतना पुराना नाम है तेरे भाई का?
पूजा- ओए.. मेरे भाई के बारे में कुछ मत बोलो.. आई लव माय ब्रदर और यह मेरे दादा का नाम था.. सो डैड ने भाई को ये नाम दिया.. मगर सब उसे पुरु ही कहते हैं समझी..!
पायल- अच्छा अच्छा आगे बता क्या हुआ कैसे तू सेक्स की

पूजा- हाँ.. सुन ना यार.. मेरा भाई मुझे बहुत प्यार करता था। वो बहुत स्मार्ट ब्वॉय है.. और मेरा फिगर भी उस समय 28-24-30 का था। एरिया के सब लड़के मुझे देख कर कमेन्ट करते थे कि इसके अमरूद छोटे हैं कौन खुशनसीब होगा जो इन्हें सेब बनाएगा.. मगर मैं समझ नहीं पाती थी। तू तो शायद अभी इतनी नादान नहीं है.. मगर मैं बहुत भोली थी।

पायल- सच्ची तू इतना नहीं समझती थी.. ये तो सोचने वाली बात है और 3 साल पहले तेरे मम्मे इतने छोटे थे और अब इतने बढ़ गए.. ये कमाल कैसे?
पूजा- अरे कहानी सुनेगी तो सब समझ जाएगी कि ये अमरूद को खरबूज कैसे बनाया जाता है हा हा हा..

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