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चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
02-23-2014, 03:34 PM
Post: #1
Wank चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
मैरा नाम शाकिर अली है. मेरी उमर 22 साल है और में लाहोर में रहता हूँ. जो वाक़िया आज आप को सुनाने जा रहा हूँ बिल्कुल सच्चा है और आज से चार साल पहले पेश आया था. मेरे घर में माँ बाप के अलावा एक बहन और एक भाई हैं. मै सब से बड़ा हूँ. ये तब की बात है जब में दसवीं जमात में पढ़ता था. मै उन दिनों अपनी खाला जिनका नाम अम्बरीन है को बहुत पसंद करता था. खाला अम्बरीन मेरी अम्मी से दो साल छोटी थीं और उनकी उमर उस वक़्त क़रीब 36 बरस थी. वो शादी शुदा थीं और उनके दो बेटे थे. उनका बड़ा बेटा राशिद तक़रीबन मेरा हम-उम्र ही था और हम दोनो अच्छे दोस्त थे. खाला अम्बरीन के शौहर नावेज़ हुसैन की लाहोर में जूतों की दुकान थी. 

खाला अम्बरीन बड़ी खूबसूरत और दिलकश औरत थीं. तीखे नैन नक़्श और दूध की तरह सफ़ेद रंग. उनके लंबे और घने बाल हल्के ब्राउन रंग के और आँखें भी हल्की ब्राउन थीं. उनका क़द दरमियाना था और बदन बड़ा गुदाज़ और सेहतमंद था. कंधे चौड़े और फारबा थे. मम्मे बहुत मोटे और गोल थे जिन का साइज़ 40/42 इंच से तो किसी तरह भी कम नही होगा और चूतड़ गोल और गोश्त से भरपूर थे. गर्मियों के मौसम में जब खाला अम्बरीन पतले कपड़े पहनतीं तो उनका गोरा, सेहतमंद और गदराया हुआ बदन कपड़ों से झाँकता रहता था. 

में गर्मियों में उनके घर बहुत ज़ियादा जाया करता था ताके उनके उभरे हुए मम्मों और मांसल चूतड़ों का नज़ारा कर सकूँ. खाला होने के नाते वो मेरे सामने दुपट्टा ओढ़ने का तकलूफ नही करती थीं इस लिये मुझे उनके मम्मे और गांड़ देखने का खूब मोक़ा मिलता था. कभी कभी उन्हे ब्रा के बगैर भी देखने का इतिफ़ाक़ हो जाता था. पतली क़मीज़ में उनके भारी मम्मे बड़ी क़यामत ढाते थे. काम काज करते वक़्त उनके मोटे ताज़े मम्मे अपनी तमामतर गोलाइयों समेत मुझे साफ़ नज़र आते थे. उनके मम्मों के निप्पल भी मोटे और बड़े थे और अगर उन्होने ब्रा ना पहना होता तो क़मीज़ के ऊपर से बाहर निकले हुए साफ़ दिखाई देते थे. ऐसे मोक़ों पर में आगे से और साइड से उनके मम्मों का अच्छी तरह जाइज़ा लेता रहता था. साइड से खाला अम्बरीन के मम्मों के निप्पल और भी लंबे नज़र आते थे. यों समझिये के मैंने तक़रीबन उनके मम्मे नंगे देख ही लिये थे. मम्मों की मुनासबत से उनके चूतड़ भी बहुत मांसल और गोल थे. जब वो चलतीं तो दोनो गोल और जानदार चूतड़ अलहदा अलहदा हिलते नज़र आते. उस वक़्त मेरे जैसे कम-उमर और सेक्स से ना-वाक़िफ़ लड़के के लिये इस क़िसम का नज़ारा पागल कर देने वाला होता था. 

खाला अम्बरीन के बदन को इतने क़रीब से देखने के बाद मेरे दिल में उनके बदन को हाथ लगाने का खन्नास समा गया. मेरी उमर भी ऐसी थी के सेक्स ने मुझे पागल किया हुआ था. रफ़्ता रफ़्ता खाला अम्बरीन के बदन को छूने का शोक़् उनकी चूत मारने की खाहिश में बदल गया. जब उन्हे हाथ लगाने में मुझे कोई ख़ास कामयाबी ना मिल सकी तो मेरा पागल-पन और बढ़ गया और में सुबह शाम उन्हे चोदने के सपने देखने लगा. इस सिलसिले में कुछ करने की मुझ में हिम्मत नही थी और में महज़ खाबों में ही उनकी चूत के अंदर घस्से मार मार कर उस का कचूमर निकाला करता था. फिर एक ऐसा वाक़िया पेश आया जिस के बारे में मैंने कभी सोचा भी नही था. 

मेरी बड़ी खाला के बेटे इमरान की शादी पिंडी में हमारे रिश्त्यदारों में होना तय हुई. बारात ने लाहोर से पिंडी जाना था. खालू ने जो फौज से रिटाइर हुए थे पिंडी के आर्मी मेस में खानदान के ख़ास ख़ास लोगों को ठहराने का बंदोबस्त किया था. बाक़ी लोगों ने होटेलों में क़याम करना था. हम ने 2 बस और 2 वैन किराए पर ली थीं. बस को शादी की मुनासबत से बहुत अच्छी तरह सजाया गया था. बस के अंदर लड़कियों का सारे रास्ते शादी के गीत गाने का प्रोग्राम था जिस की वजह से खानदान के सभी बचे और नोजवान बसों में ही बैठे थे. मैंने देख लिया था के खाला अम्बरीन एक वैन में बैठ रही थीं. मेरे लिये ये अच्छा मोक़ा था. 

में भी अम्मी को बता कर उसी वैन में सवार हो गया ताके खाला अम्बरीन के क़रीब रह सकूँ. उनके शौहर माल खरीदने दुबई गए हुए थे लहाज़ा वो अकेली ही थीं. उनके दोनो बेटे उनके मना करने के बावजूद अपनी माँ को छोड़ कर हल्ला गुल्ला करने बस में ही बैठे थे. वैन भारी हुई थी और खाला अम्बरीन सब से पिछली सीट पर खिड़की के साथ बैठी थीं. जब में दाखिल हुआ तो मेरी कोशिश थी के किसी तरह खाला अम्बरीन के साथ बैठ सकूँ. वैन के अंदर आ कर मैंने उनकी तरफ देखा. मै उन से काफ़ी क़रीब था और मेरा उनके घर भी बहुत आना जाना था इस लिये उन्होने मुझे देख कर अपने साथ बैठने का इशारा किया. मै फॉरन ही जगह बनाता हुआ उनके साथ चिपक कर बैठ गया. 

खाला अम्बरीन शादी के लिये खूब बन संवर कर घर से निकली थीं. उन्होने सब्ज़ रंग के रेशमी कपड़े पहन रखे थे जिन में उनका गोरा गदराया हुआ बदन दावत-ए-नज़ारा दे रहा था. बैठे हुए भी उनके गोल मम्मों के उभार अपनी पूरी आब-ओ-ताब के साथ नज़र आ रहे थे. कुछ देर में हम लाहोर शहर से निकल कर मोटरवे पर चढ़े और अपनी मंज़िल की तरफ रवाना हो गए. मै खाला अम्बरीन के साथ खूब चिपक कर बैठा था. मेरी रान उनकी रान के साथ लगी हुई थी जब के मेरा बाज़ू उनके बाज़ू से चिपका हुआ था. उन्होने आधी आस्तीनो वाली क़मीज़ पहन रखी थी और उनके गोरे सुडोल बाज़ू नंगे नज़र आ रहे थे. खाला अम्बरीन के नरम गरम बदन को महसूस करते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने फॉरन अपने हाथ आगे रख कर अपने तने हुए लंड को छुपा लिया. 

खाला अम्बरीन ने कहा के में राशिद को समझाऊं के मेट्रिक के इम्तिहान की तय्यारी दिल लगा कर करे क्योंके दिन थोड़े रह गए हैं. मैंने उनकी तवजो हासिल करने लिये उन्हे बताया के राशिद एक लड़की के इश्क़ में मुब्तला है और इसी वजह से पढने में दिलचस्पी नही लेता. वो बहुत सीख-पा हुईं और कहा के में उस की हरकतें उनके ईलम में लाऊँ. इस तरह में ना सिरफ़ उनका राज़दार बन गया बल्के उनके साथ मर्द और औरत के ता’अलुक़ात पर भी बात करने लगा. वो बहुत दिलचस्पी से मेरी बातें सुनती रहीं. उन्होने मुँह बना कर कहा के आज कल की लड़कियों को वक़्त से पहले सलवार उतारने का शोक़् होता है. ये ऐसी कुतिया की मानिंद हैं जिन को गर्मी चढ़ी हो. ये बातें मुझे गरम कर रही थीं. मैंने बातों बातों में बिल्कुल क़ुदरती अंदाज़ में उनकी मोटी रान के ऊपर हाथ रख दिया. उन्होने क़िस्सी क़िसम का कोई रद्द-ए-अमल ज़ाहिर नही किया और में उनके बदन का मज़ा लेता रहा. 

बिल-आख़िर साढ़े चार घंटे बाद हम पिंडी पुहँच गए. मै खाला अम्बरीन के साथ ही रहा. अम्मी, नानी जान और और कुछ और लोग मेस में चले गए. खाला अम्बरीन के दोनो बेटे भी मेस में ही रहना चाहते थे. मैंने खाला अम्बरीन से कहा के कियों ना हम होटेल में रहें. कमरे में और लोग भी नही हूँगे, बाथरूम इस्तेमाल करने का मसला भी नही होगा और अगले दिन बारात के लिये तय्यारी भी आसानी से हो जायेगी. खाला अम्बरीन को ये बात पसंद आई. उन्होने अपने बेटों को कुछ हिदायात दीं और मेरे साथ मुर्री रोड पर वाक़िया एक होटल में आ गईं जहाँ खानदान के कुछ और लोग भी ठहर रहे थे. मैंने अम्मी को बता दिया था के खाला अम्बरीन अकेली हैं में उनके साथ ही ठहर जाऊंगा. उन्होने बा-खुशी इजाज़त दे दी. 

होटल दरमियाना सा था. कमरे छोटे मगर साफ़ सुथरे थे. उस में 2 बेड थे. खाला अम्बरीन काफ़ी तक चुकी थीं. उनके बदन में दर्द भी हो रहा था. फिर हम ने कपडे तब्दील किये. खाला अम्बरीन ने घर वाला पतली सी लॉन का जोड़ा पहन लिया जिस में से हमेशा की तरह उनका गोरा बदन नज़र आ रहा था. कपड़े बदलने के बावजूद उन्होने अपना ब्रा नही उतारा था. मुझे थोड़ी मायूसी हुई क्योंके बगैर ब्रा के में उनके मम्मों को ज़ियादा बेहतर तरीक़े से देख सकता था. खैर खाला अम्बरीन को अपने साथ एक कमरे में बिल्कुल तन्हा पा कर मेरे दिल में उन्हे चोदने की खाहिश ने फिर सर उठाया. लेकिन में ये कैसे करता? वो भला मुझे कहाँ अपनी चूत लेने देतीं. मै दिमाग लड़ाने लगा. 

मैंने कुछ अरसे पहले एक फिल्म देखी थी जिस में एक आदमी एक औरत को शराब पीला कर चोद देता है. शराब की वजह से वो औरत नशे में होती है और उस आदमी से चुदवा लेतीं है. मगर में वहाँ शराब कहाँ से लता. फिर मैंने सोचा शायद होटेल का कोई मुलाज़िम मेरी मदद कर सके. मुझे दर भी लग रहा था लेकिन इस मोक़े से फायदा भी उठाना चाहता था. बहरहाल में किसी बहाने से बाहर निकला तो 40/45 साल का एक काला सा आदमी जो होटेल का मुलाज़िम ही था मिल गया. वो बहुत छोटे क़द का और बदसूरत था. छोटी छोटी आँखें और अजीब सा फैला हुआ चौड़ा नाक. थोड़ी पर दाढ़ी के चन्द बाल थे और मूंछें भी बहुत छिडड़ी और हल्की थीं. वो हर तरह से एक गलीज़ शख्स लगता था. 
में उस के साथ सीढियां उतर कर नीचे आया और उससे बताया के मुझे शराब की बोतल कहाँ मिल सकेगी. उस ने पहले तो मुझे गौर से देखा और फिर कहने लगा के कौन सी शराब चाहिये. मुझे किसी ख़ास शराब का नाम नही आता था इस लिये मैंने कहा के कोई भी चल जाएगी. हम लोग शादी पर आए हैं ज़रा मोज मस्ती करना चाहते हैं. उसने शायद मुझे और खाला अम्बरीन को कमरे में जाते देखा था. कहने लगा के तुम तो अपनी माँ के साथ हो कमरे में शराब कैसे पियोगे. मै ये सुन कर घबरा गया मगर खुद को संभालते हुए उससे बताया के में अपनी खाला के साथ हूँ और उनके सो जाने के बाद पीना चाहता हूँ. उस ने मुझ से 1600 रुपय लिये और कहा के आधे घंटे तक शराब ले आएगा में उस का इंतिज़ार करूँ. उस ने अपना नाम नज़ीर बताया. 

में कमरे में वापस आ गया. मेरा दिल धक धक कर रहा था. मै दर रहा था के नज़ीर कहीं पैसे ले कर भाग ही ना जाए मगर वो आध घंटे से पहले ही शराब की बोतल ले आया. बोतल के ऊपर वोड्का लिखा हुआ था और उस में पानी जैसी रंग की शराब थी. मुझे ईलम नही के वो वाक़ई वोड्का थी या किसी देसी शराब को वोड्का की बोतल में डाला गया था. खैर मैंने बोतल ले कर फॉरन अपने नैफ़े में छुपा ली. उसने कहा के बाथरूम के तौलिये चेक करने हैं. मै उसे ले कर कमरे के अंदर आ गया. उस ने बाथरूम जाते हुए खाला अम्बरीन को अजीब सी नज़रों से देखा. मै समझ नही पाया के उस की आखों में किया था. वो कुछ देर बाद चला गया. 

मैंने अपने और खाला अम्बरीन के लिये 7-UP  की बोतलें मँगवाईं जो नज़ीर ही ले कर आया. इस दफ़ा भी उस ने मुझे और खाला अम्बरीन को बड़े गौर से देखा. उस के जाने के बाद में उठ कर कोने में पड़ी हुई मेज़ तक आया और खाला अम्बरीन की तरफ पीठ कर के उनकी बोतल में से तीन चोथाई सेवेन उप ग्लास में डाली और उस की जगह वोड्का डाल दी. मैंने वो बोतल उनको दे दी. उन्होने बोतल से चन्द घूँट लिये और बुरा सा मुँह बना कर कहा के ये तो बड़ी कड़वी है बिल्कुल दवाई की तरह. ये पीने वाली नही. मेरा दिल बैठ गया के कहीं वो पीने से इनकार ही ना कर दें. मैंने कहा के उन्हे बोतल पी लानी चाहिये क्योंके इस से उनका दर्द अच्छा हो जाएगा. वो इनकार करती रहीं मगर मेरे इसरार पर आख़िर पी ली. 

रात के कोई साढ़े बरा बजे का वक़्त होगा. खाला अम्बरीन की हालत बदलने लगी थी. उनका चेहरा थोड़ा सा लाल हो गया था और आँखें भारी होने लगी थीं. वो मेरी बातों को ठीक से समझ नही पा रही थीं और बगैर सोचे समझे बोलने लगती थीं. उनकी आवाज़ में हल्की सी लरज़िश भी आ गई थी. वो वाज़ेह तौर पर अपने ऊपर कंट्रोल खोती जा रही थीं. कभी वो खामोश हो जातीं और कभी अचानक बिला वजह बोलने लगतीं. नशा उन पर असर कर रहा था. उन्होने ज़िंदगी में पहली दफ़ा शराब पी थी इस लिये उस का असर भी ज़ियादा हुआ था. उन्होने कहा के अब वो सोना चाहती हैं. वो एक कुर्सी पर बैठी हुई थीं. जब उठने लगीं तो लररखड़ा गईं. मैंने फॉरन आगे बढ़ कर उन्हे बाज़ून से पकड़ लिया. उनके गोरे, मोटे और नरम बाज़ू पहली दफ़ा मेरे हाथों में आये थे. 

में उस वक़्त बहुत घबराया हुआ था मगर फिर भी उनके बदन के लांस से मेरा लंड खड़ा हो गया. मै उन्हे ले कर बेड की तरफ चल पारा. मैंने उनका दुपट्टा उनके गले से उतार दिया और उन से चिपक गया. फिर मैंने अपना एक हाथ उनके मोटे चूतड़ों से ज़रा ऊपर रख दिया और उन्हे बेड तक ले आया. मेरी उंगलियों को उनके तवाना चूतड़ों की आगे पीछे हरकत महसूस हो रही थी. मेरे सबर का पैमाना लब्राइज़ हो रहा था. मैंने अचानक अपना हाथ उनके मोटे और उभरे हुए चूतड़ के दरमियाँ में रख कर उससे आहिस्ता से टटोला. उन्होने कुछ नही कहा. इस पर मैंने उनके एक भारी चूतड़ को थोड़ा सा दबाया. बड़ी मज़बूत और ताक़तवर गांड़ थी खाला अम्बरीन की. उन्होने अपने चूतड़ पर मेरे हाथ का दबाव महसूस किया तो मेरे हाथ को जो उनके चूतड़ के ऊपर था पकड़ कर अपनी कमर की तरफ ले आईं लेकिन कहा कुछ नही. 

उन्हे बेड पर बिठाने के बाद मैंने उन से कहा के वो बहुत थक गई हैं इसी लिये तबीयत खराब हो रही है में उनके कपड़े बदल देता हूँ ताके वो आराम से सो सकैं. उनके मुँह से अजीब सी भारी आवाज़ निकली. शायद वो समझ ही नही सकी थीं के में किया कह रहा हूँ. मैंने उनकी क़मीज़ पेट और कमर पर से ऊपर उठाई और उनका एक बाज़ू उठा कर उससे बड़ी मुश्किल से क़मीज़ की आस्तीन में से निकाल लिया. अब उनका एक मोटा और सूजा हुआ मम्मा सफ़ेद रंग के ब्रा में बंद मेरी आँखों के सामने था. उनका दूसरा मम्मा अब भी क़मीज़ के नीचे ही छुपा हुआ था. मैंने उनके मम्मे के नीचे हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही उससे पकड़ लिया. खाला अम्बरीन का मम्मा भारी भरकम था और उससे हाथ लगा कर मुझे अजीब तरह का मज़ा आ रहा था. फिर मैंने दूसरे बाज़ू से भी क़मीज़ निकाल कर उन्हे ऊपर से बिल्कुल नंगा कर दिया. उनके दोनो मम्मे ब्रा में मेरे सामने आ गए. मैंने जल्दी से पीछे आ कर उनके ब्रा का हुक खोला और उससे उनके बदन से अलग कर के उनके मम्मों को बिल्कुल नंगा कर दिया. 

ये मेरी ज़िंदगी का सब से हसीन लम्हा था. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. खाला अम्बरीन के मम्मे बे-पनाह मोटे, गोल और बाहर निकले हुए थे. उनके दोनो मम्मों के ऊपर और साइड में ब्रा की वजह से हल्की लकीरें पड़ी हुई थीं. सुर्खी मा'आइल गुलाबी रंग के खूबसूरत निप्पल बड़े बड़े और बाहर निकले हुए थे. निपल्स के साथ वाला हिस्सा काफ़ी बड़ा और बिल्कुल गोल था जिस पर छोटे छोटे दाने उभरे हुए थे. मैंने उनका एक मम्मा हाथ में ले कर दबाया तो उस का निप्पल मेरी हतैली में धँस कर दब गया. उन्होने मेरा हाथ अपने मम्मे से दूर किया और दोनो मम्मों के दरमियाँ में हाथ रख कर अजीब अंदाज़ से हंस पड़ीं. शायद नशे ने उनकी सोचने समझने की सलाहियत पर असर डाला था. 

मैंने अब उनके दूसरे मम्मे को हाथ में लिया और उस के मुख्तलीफ़ हिस्सों को आहिस्ता आहिस्ता दबाता रहा. मैंने ज़िंदगी में कभी किसी औरत के मम्मों को हाथ नही लगाया था. खाला अम्बरीन के मम्मे अब मेरे हाथ में थे और मेरी जेहनी कैफियत बड़ी अजीब थी. मेरे दिल में खौफ भी था और ज़बरदस्त खुशी भी के खाला अम्बरीन मेरे सामने अपने मम्मे नंगे किये बैठी थीं और में उनके मम्मों से खेल रहा था. उन्होने उंगली उठा कर हिलाई के में ऐसा ना करूँ. उनका हाथ ऊपर की तरफ आया तो शलवार में अकड़े हुए मेरे लंड से टकराया लेकिन शायद उन्हे एहसास नही हुआ के में उनकी चूत में अपना लंड डालने को बेताब था. मै उसी तरह खाला अम्बरीन के मम्मों को हाथों में ले कर उनका लुत्फ़ उठाता रहा. 

अचानक कमरे का दरवाज़ा जो मैंने लॉक किया था एक हल्की सी आवाज़ के साथ खुला और नज़ीर अंदर आ गया. नज़ीर ने फॉरन दरवाज़ा लॉक कर दिया. उस के हाथ में मोबाइल फोन था जिस से उस ने मेरी और खाला अम्बरीन की उसी हालत में तस्वीर बना ली. ये सब पलक झपकते हो गया. मै फॉरन खाला अम्बरीन के पास से हट गया और उनकी क़मीज़ उठा कर उनके कंधों पर डाल दी ताके उनके मम्मे छुप जायें. नज़ीर के बदनुमा चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी. उस ने अपनी जेब से 6/7 इंच लंबा चाक़ू निकाल लिया मगर उससे खोला नही. खौफ से मेरी टांगें काँपने लगीं. नज़ीर ने कहा के वो जानता था मुझे शराब क्यों चाहिये थी मगर में फ़िक्र ना करूँ वो किसी से कुछ नही कहेगा. उससे सिर्फ़ अपना हिस्सा चाहिये. अगर हम ने उस की बात ना मानी तो वो होटेल मॅनेजर को बतायगा जो पोलीस को खबर करेगा और आगे फिर जो होगा हम सोच सकते हैं. उस ने कहा के शराब पीना भी जुर्म है और अपनी खाला को चोदना तो उस भी बड़ा जुर्म है. मुझ से कोई जवाब ना बन पड़ा. खाला अम्बरीन नशे में थीं मगर अब खौफ उनके नशे पर हावी हो रहा था और वो हालात को समझ रही थीं. मेरा दिल भी सीने में ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. 

मुझे सिर्फ़ पोलीस के आने का खौफ ही नही था. होटेल में खानदान के और लोग भी ठहरे हुए थे और अगर उन्हे पता चलता के में खाला अम्बरीन को शराब पीला कर चोदना चाहता था तो किया होता? खाला अम्बरीन की कितनी बदनामी होती. खालू नॉवज़ किया सोचते? उनका बेटा राशिद मेरा दोस्त था. उस पर किया गुज़रती अगर उससे पता चलता के में उस की माँ की चूत मारना चाहता था? मेरे अब्बू ने सुबह पिंडी पुहँचना था. उन्हे पता चलता तो किया बनता? बड़ी खाला के बेटे की शादी अलग खराब होती. मेरा दिल डूबने लगा. खाला अम्बरीन ने हल्की सी लड़खड़ाई हुई आवाज़ में कुछ कहा. नज़ीर उनकी तरफ मुड़ा और उन्हे मुखातिब कर के बड़ी बे-बाकी से बोला के अगर वो उसे अपनी चूत दे दें तो कोई मसला नही होगा लेकिन अगर उन्होने इनकार किया तो पोलीस ज़रूर आएगी. खाला अम्बरीन चुप रहीं मगर उनके चेहरे का रंग ज़र्द पड़ गया. उन्होने अपनी क़मीज़ अपने नंगे ऊपरी बदन पर डाली हुई थी. 

नज़ीर ने मुझ से पूछा के किया मैंने पहले कभी किसी औरत को चोदा है. मैंने कहा नही. वो बोला के औरत नशे में हो तो उससे चोदने का मज़ा नही आता. वो खाला अम्बरीन के लिये तेज़ कॉफी ले कर आता है जिससे पी कर उनका नशा कम हो जाएगा और चूत मरवाते हुए वो मज़ा देंगी भी और लेंगीं भी. उस ने अपना मोबाइल जेब में डाला और तेज़ तेज़ क़दम उठाता हुआ कमरे से निकल गया. खाला अम्बरीन ने उस के जाते ही अपनी क़मीज़ ब्रा के बगैर ही पहन ली. 

जब उन्होने क़मीज़ पहन’ने के लिये अपने हाथों को हरकत दी तो उनके मोटे मोटे मम्मे बुरी तरह हिलने लगे. लेकिन इन हालात में मेरे सर से उन्हे चोदने का भूत उतार चुका था और उनके हिलते हुए नंगे मम्मों को देख कर भी मुझे कुछ महसूस नही हुआ. उनके नशे पर भी खौफ गालिब हो रहा था. उन्होने कहा के शाकिर तुम ने ये किया कर दिया? अब किया होगा? ये कमीना तो मुझे बे-आबरू करना चाहता है. उनकी परैशानी बजा थी. अगर हम नज़ीर को रोकते तो वो हमें जान से भी मार सकता था या कोई और नुक़सान पुहँचा सकता था. अगर हम होटेल में मोजूद अपने रिश्त्यदारों को खबर करते तो हुमारे लिये ही मुसीबत बनती क्योंके नज़ीर के फोन में हुमारी तस्वीर थी. मैंने खाला अम्बरीन से अपनी हरकत की माफी माँगी. वो कुछ ना बोलीं. 

कुछ देर में नज़ीर एक मग में कॉफी ले आया जो खाला अम्बरीन ने पी ली. उनका नशा कॉफी से वाक़ई कम हो गया और वो बड़ी हद तक नॉर्मल नज़र आने लगीं. नज़ीर ने मुझे कहा के में आज तुम्हे भी मज़े कराओंगा क्योंके तुम अपनी खाला पर गरम हो. वैसे तुम्हारी खाला है नंबर वन माल. इस का नाम किया है? मुझे उस की बकवास सुन कर गुस्सा तो आया मगर किया करता. मैंने कहा - अम्बरीन. उस ने होठों पर ज़बान फेर कर खाला अम्बरीन की तरफ देखा. वो अपना ब्रा उठा कर बाथरूम चली गईं. जब वापस आईं तो उन्होने अपना ब्रा पहन रखा था. उनके आते ही नज़ीर ने अपने कपड़े उतारे और अलिफ नंगा हो गया.

उस का क़द बहुत छोटा था मगर जिसम बड़ा घुटा हुआ और मज़बूत था. उस का लंड इन्तहाई मोटा था जो उस वक़्त भी आधा खड़ा हुआ निसफ दायरे की तरह उस के टट्टों पर झुका हुआ था. उस के लंड का सुपाडा छोटा था मगर पीछे की तरफ इन्तहाई मोटा हो जाता था. उस की झांटो के बाल घने थे और उन के अलावा उस के जिसम पर कहीं बाल नही थे. टटटे बहुत मोटे मोटे थे जिन की वजह से उस का लंड और भी बड़ा लगता था. खाला अम्बरीन नज़ीर के लंड को देख कर हैरान रह गईं. वो एक घरैलू औरत थीं और उन्होने इतनो मोटा लंड पहले कभी नही देखा होगा. मुझे यक़ीन था के अपने शौहर के अलावा उन्हे कभी किसी ने नही चोदा था. 

नज़ीर ने जान लिया के खाला अम्बरीन उस के लंड को हैरत से देख रही हैं. उस ने अपना लंड हाथ में ले कर उसे ऊपर नीचे हरकत दी और मुस्कुरा कर खाला अम्बरीन से पूछा के किया उन्हे उस का लंड पसंद आया? वो खामोश रहीं. वो फिर बोला के जब ये लंड तेरी फुद्दी में जाएगा तो तुझे बहुत मज़ा देगा. खाला अम्बरीन ने अपनी नज़रें झुका लीं. नज़ीर ने अपना फोन और चाक़ू बेड के साथ पड़ी हुई छोटी सी मेज़ पर रखे और मुझे भी कपड़े उतारने को कहा. मै खौफ के आलम में सेक्स का कैसे सोच सकता था. मैंने इनकार कर दिया. 

वो खाला अम्बरीन के पास गया और उनका हाथ पकड़ कर उन्हे बेड से उठाने लगा. उन्होने अपना हाथ छुड़ाना चाहा तो नज़ीर उन्हे गलीज़ गालियाँ देने लगा. कहने लगा  कुछ देर पहले तू अपने भानजे से चुदवाने वाली थी और अब नायक बन रही है. इस बे-इज़्ज़ती पर खाला अम्बरीन का चेहरा लाल हो गया और आँखों में बे-साख्ता आँसू आ गए. मै भी अंदर से हिल कर रह गया. उस वक़्त मुझे एहसास हुआ के में नादानी में किया गज़ब कर बैठा था. 

नज़ीर ने खाला अम्बरीन को खड़ा किया और उन से लिपट गया. उस का क़द खाला अम्बरीन से 2 इंच छोटा तो ज़रूर होगा. वो उनके दिलकश चेहरे को चपड़ चपड़ चूमने लगा. उस का लंड अब पूरी तरह खड़ा हुआ था और खाला अम्बरीन की चूत से नीचे उनकी रानों में घुस रहा था. मै जो थोड़ी देर पहले तक खाला अम्बरीन को चोदने के लिये बे-ताब था अब खौफ और पशेमानी की वजह से सूब कुछ भूल चुका था. मुझे अपना दिल पसलियों में धक धक करता महसूस हो रहा था. 

नज़ीर ने खाला अम्बरीन के होठों को मुँह में ले कर चूसा तो उन्होने अपना मुँह कुछ ऐसे दूसरी तरफ फेरा जैसे उन्हे घिन आ रही हो. इस पर नज़ीर ने उनकी शलवार के ऊपर से ही उनकी चूत को हाथ में पकड़ लिया और कहा - बाज़ आ जा कुतिया, अगर मुझे रोका तो तेरी इस मोटी फुद्दी के बाल नोच लूंगा. खाला अम्बरीन तक़लीफ़ में थीं जिसका मतलब था के नज़ीर ने वाक़ई उनकी चूत के बाल अपनी मुट्ठी में पकड़ रखे थे. उन्होने फॉरन अपना चेहरा उस की तरफ कर लिया. नज़ीर ने दोबारा अपने होंठ उनके होठों पर जमा दिये. उस का काला बदसूरत चेहरा खाला अम्बरीन के गोरे हसीन चेहरे के साथ चिपका हुआ अजीब लग रहा था. नज़ीर उनका मुँह चूमते हुए कपड़ों के ऊपर से ही उनके मोटे मम्मों को मसलने लगा. 
कुछ देर बाद उस ने मेरी तरफ देखा और कहा - इधर आ कमीने, अपनी खाला की क़मीज़ उतार और इस की बाड़ी खोल. वो ब्रा को बाड़ी कह रहा था. मैंने फिर इनकार कर दिया. सिर्फ़ एक घंटा पहले में खाला अम्बरीन के मम्मों की एक झलक देखने के लिये बे-ताब था मगर अब बिल्कुल ठंडा पड़ चुका था. मेरे इनकार पर नज़ीर खाला अम्बरीन को छोड़ कर मेरी तरफ आया. क़रीब आ कर उस ने एक ज़ोरदार थप्पड़ मेरे मुँह पर रसीद कर दिया. मै इस के लिये तय्यार नही था. मेरा सर घूम गया. उस ने एक और तमाचा मेरे मुँह पर लगाया. मेरा निचला होंठ थोड़ा सा फॅट गया और मुझे अपनी ज़बान पर खून का ज़ा’इक़ा महसूस हुआ. खाला अम्बरीन घबरा गईं और नज़ीर से कहा - इसे मत मारो. तुम्हे जो करना है कर लो और फिर यहाँ से चले जाओ. नज़ीर गुस्से में उनकी जानिब पलटा और कहा - चुप, अभी तो मुझे तेरी फुद्दी का पानी निकालना है. फिर मुझे देख कर कहने लगा - तेरी माँ भी तेरी इस गश्ती खाला ही की तरह फिट माल होगी. उसे भी चोदूंगा मैं. बता किया नाम है तेरी माँ का? में चुप रहा तो उस ने एक घूँसा मेरी गर्दन पर मारा.

इस पर खाला अम्बरीन बोलीं - इस की माँ का नाम यासमीन है. नज़ीर ने कहा - में इसकी माँ की भी जरूर मारूंगा. मैंने बे-बसी से उस की तरफ देखा तो कहने लगा - तेरी माँ यासमीन की चूत में भी ज़रूर अपना पानी डालूँगा. उसकी वो फुद्दी जिस से तू निकला है तेरे सामने ही मेरा ये मोटा लंड लेगी. चल जो कह रहा हूँ वो कर वरना मार मार कर हड्डियाँ तोड़ दूँगा. मुझे बाद में एहसास हुआ के नज़ीर गाली गलोच और मार पीट से मुझे और खाला अम्बरीन को डरा रहा था ताके हम उस की हर बात मान लें. ये नफ्सीयाती हर्बा बड़ा कामयाब भी था क्योंके हम दोनो वाक़ई डर गए थे. उस ने फिर मुझे कपड़े उतारने को कहा. मै इल्तिज़ा-आमीज़ लहजे में बोला के मेरा दिल नही है इसलिए वो मुझे मजबूर नहीं करे. लेकिन वो बा-ज़िद रहा के में वोही करूँ जो वो कह रहा है. मुझे डर था के कहीं वो फिर मेरी और खाला अम्बरीन की और नंगी तस्वीरें ना ले ले. 

वो खाला अम्बरीन को ले कर बेड पर चढ़ गया और उनके होठों के बोसे लेने लगा. वो भूकों की तरह उनका गदराये हुए बदन को अपने हाथों में ले ले कर टटोल रहा था. उस ने मुझे घूर कर देखा और अपनी तरफ बुलाया. मै बेड पर चढ़ कर खाला अम्बरीन के पीछे आया तो वो सीधी हो कर बैठ गईं. मैंने उनकी क़मीज़ को दोनो तरफ से ऊपर उठा कर सर से उतार दिया. उनके लंबे बाल उनकी गोरी कमर पर पड़े थे जिन के नीचे उनके ब्रा का हुक था. मैंने उनके बाल कमर पर से हटा कर ब्रा का हुक खोला और उसे उनके मम्मों से अलग कर दिया. नज़ीर ने फिर कहा के में कपड़े उतारू. मैंने जवाब दिया के में सेक्स नही कर पाऊंगा वो मेहरबानी कर के मुझे कुछ ना कहे. वो ज़ोर से हंसा और कहा - जा नामर्द, तू भला किया किसी औरत को चोदेगा. चल जा वहाँ बैठ और देख में तेरी खाला को कैसे चोदता हूँ. मै सख़्त शर्मिंदगी के आलम में बेड से उतरा और सामने पड़ी हुई एक कुर्सी पर जा बैठा. 

नज़ीर खाला अम्बरीन के मोटे मोटे नंगे मम्मों पर टूट पड़ा. उस ने उनका एक मम्मा हाथ में पकड़ कर मुँह में लिया और उससे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. कमरे में लपर लपर की आवाजें गूंजने लगीं. खाला अम्बरीन होंठ भींच कर नाक से तेज़ तेज़ साँस लेने लगीं. उनका चेहरा सुर्ख हो गया. मम्मे चुसवाने से वो गरम हो गई थीं. उनके भारी मम्मे चूसते चूसते नज़ीर की साँस भी उखड़ गई मगर वो उनके मम्मों से चिपका ही रहा उन्हे चूसने के दोरान उन्हे मसलता रहा. उस ने खाला अम्बरीन को कहा के वो उस के लंड पर हाथ फेरें. उन्होने उस का लंड हाथ में लिया और अपने मम्मे चुस्वाते हुए उस पर हाथ फेरने लगीं. उनकी हालत अब और ज़ियादा खराब हो गई थी. मै ये सब कुछ देख रहा था. नज़ीर ने अम्बरीन के दोनो मम्मों को चूस चूस कर बिल्कुल गीला कर दिया था. फिर उस ने खाला अम्बरीन को सलवार उतारने को कहा. उन्होने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और उसे उतार दिया. मुझे उनकी चूत नज़र आई जिस पर हल्के सियाह बाल थे. नज़ीर ने उनकी नंगी चूत पर अपना हाथ फेरा. कई दफ़ा उनकी चूत को सहलाने के बाद उस ने उन्हे बेड की तरफ धकेल दिया. जब वो बेड पर लेट गईं तो नज़ीर उन से फिर लिपट गया और उनके पूरे बदन पर हाथ फेरने लगा. उस ने उनकी कमर, चूतड़ों, पेट और रानों को मुठियों में भर भर कर टटोला. फिर उनकी मज़बूत टांगें खोल कर उनकी चूत पर अपना मुँह रख दिया. 

मैंने देखा के वो अपनी ज़बान खाला अम्बरीन की चूत पर फेर रहा था. उस ने दोनो हाथ नीचे कर के उनके चूतड़ों को पकड़ लिया और उनकी चूत चाटने लगा. खाला अम्बरीन क़ाबू से बाहर हो रही थीं और उनके मोटे चूतड़ बार बार अकड़ जाते थे. वो नज़ीर के जिसम को हाथ नही लगाना चाहती थीं इस लिये उन्होने अपने हाथ सर से पीछे बेड पर रखे हुए थे. नज़ीर ने उनकी चूत से मुँह उठाया और कहा – चुदक्कड, अभी खलास ना हो जाना. तुझे अपने लंड पर खलास करूंगा. खाला अम्बरीन शर्मिंदा सी हो गईं. वो ये छुपाना चाहती  थीं के अपनी चूत पर नज़ीर की फिरती हुई ज़बान उन्हे मज़ा दे रही थी. मगर वो इंसान थीं और मज़ा तो उन्हे बहरहाल आ रहा था. 

इसी तरह कुछ देर उनकी चूत चाटने के बाद नज़ीर सीधा लेट गया और खाला अम्बरीन से कहा के वो उस का लंड चूसें. उस का मोटा लंड किसी डंडे की तरह सीधा खड़ा हुआ था. खाला अम्बरीन ने कहा के वो लंड चूसना नही जानतीं. नज़ीर हंस कर बोला - ये कौन सा मुश्किल काम है. तुझ जैसी औरतें तो होती ही चूसने के लिये हैं. तुझे तो कोई मसला नही होना चाहिये लंड चूसने में. उस ने उनके हाथ की बड़ी उंगली अपने मुँह में डाली और उससे चूस कर उन्हे लंड चूसने का तरीक़ा बताया. फिर अपना लंड उनके मुँह की तरफ बढ़ा दिया. खाला अम्बरीन ने झुक कर बेमन से उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगीं. उन्हे इतने मोटे लंड को मुँह के अंदर कर के चूसने में दुश्वारी हो रही थी. उनके दाँत नज़ीर के लंड को चुभ रहे थे जिस पर उस ने उन्हे कहा वो उस के लंड पर ज़बान फेरें, दाँत ना लगाए. वो उस का लंड एहतियात से चूसने लगीं. नज़ीर ने अपनी टांगें फैला दीं और वो उस के लंड को हाथ में ले कर चूसती रहीं. मुझे उनके मोटे सेहतमंद मम्मे दिखाई दे रहे थे जिन्हे नज़ीर मुसलसल मसल रहा था. 
क्रमशः

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02-23-2014, 03:36 PM
Post: #2
RE: चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
देर तक यही सिलसिला चलता रहा. फिर नज़ीर ने खाला अम्बरीन को कमर के बल लिटा दिया और खुद ऊपर आ कर अपना लंड हाथ में ले कर उनकी मोटी चूत के अंदर डालने लगा. मेरे दिल की धडकनें तेज़ हो गई. जब नज़ीर के लंड का अगला हिस्सा खाला अम्बरीन की चूत में घुसा तो उनके मुँह से एक तेज़ सिसकारी निकली. नज़ीर ने कहा के तेरी चूत तो बड़ी टाइट है और उनके होठों पर अपना मुँह रख दिया. कुछ लम्हो तक वो इसी हालत में अपने जिसम की बॅलेन्स करता रहा रहा और फिर अचानक उनकी चूत में पूरी ताक़त से घस्सा मारा. उस का अकड़ा और फूला हुआ लंड खाला अम्बरीन की चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया. खाला अम्बरीन ने ज़ोर से ईई….. कहा और उनका पूरा बदन लरज़ उठा. अब उस ने फॉरन ही तावातूर के साथ उनकी चूत में घस्से मारने शुरू किये. कुछ ही देर बाद वो खाला अम्बरीन को बड़ी महारत से चोदने लगा. उस के मोटे लंड ने खाला अम्बरीन की चूत को फैला दिया था और जब घस्सों के दोरान वो अपना लंड उनके अंदर करता तो उनकी चूत जैसे चिर जाती. 

हर घस्से के साथ नज़ीर के भारी टट्टे उनकी गांड़ से टकराते. खाला अम्बरीन की टांगें नज़ीर की कमर के दोनो तरफ थीं और उनके पांव मेरी जानिब थे. उनकी चूत से पानी निकल रहा था और उस के आस पास का सारा हिस्सा अच्छा ख़ासा गीला हो चुका था. चूत देते हुए उन के मुँह से मुसलसल ऊऊऊं….. ओह…….आह की आवाजें निकल रही थीं. उनकी आँखें बंद थीं. खाला अम्बरीन की चूत में बड़े ज़ोरदार और ताबड़ तोड़ घस्से मारते हुए नज़ीर ने अपने दोनो हाथों में उनके हिलते हुए मम्मे दबोच लिये और अपने घस्सों की रफ़्तार और भी बढ़ा दी. खाला अम्बरीन ने अपनी आँखें खोल कर नज़ीर की तरफ अजीब तरह की हैरानगी से देखा. उनका मुँह सुर्ख हो रहा था. 

अचानक खाला अम्बरीन ने अच्छी ख़ासी तेज़ आवाज़ में ऊ…. आअहह…….. ऊ….. आआहह……. ऊ….. आआहह करना शुरू कर दिया. लगता था जैसे वो अपने आप को ऐसा करने से रोक ना पा रही थीं. वो अपने चूतड़ों को उठा उठा कर नज़ीर के घस्सों का जवाब देने लगी थीं और उनके मोटे ताज़े चूतड़ों की हरकत में तेज़ी आती जा रही थी. नज़ीर समझ गया के खाला अम्बरीन खलास होने वाली हैं. वो उन्हे चोदते हुए कहता रहा - चल अब निकाल अपनी चूत का पानी, मेरी जान. शाबाश, निकाल…. हाँ... चल, हो जा खलास मेरे लंड पर ….. ये ले….. ये ले. कोई एक मिनिट तक खाला अम्बरीन का जिस्म ज़बरदस्त झटके खाता रहा और वो खलास हो गईं. मुझे नीचे से उनकी चूत में घुसा हुआ नज़ीर का लंड दिखाई दे रहा था. जब वो छूटने लगीं तो उनकी चूत से और ज़ियादा गाढ़ा पानी निकला जो उनकी गांड़ के सुराख ती तरफ बहने लगा. खाला अम्बरीन ने अपना मुँह सख्ती से बंद कर लिया और उनका बदन ऐंठ गया. मै समझ गया के खलास हो कर उन्हे बहुत मज़ा आया था. 

खाला अम्बरीन के खलास हो जाने के बाद भी नज़ीर उनकी चूत में घस्से मारता रहा. अभी कुछ ही देर गुज़री थी के खाला अम्बरीन ने बेड की चादर को अपनी दोनो मुठियों में पकड़ लिया और फिर निहायत तेज़ी से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे हरकत देने लगीं. ये देख कर नज़ीर ने उनकी चूत में अपने घस्सों की रफ़्तार कम कर दी. जब उस ने घस्से मारना तक़रीबन रोक ही दिये तो खाला अम्बरीन खुद नीचे से काफ़ी ज़ोरदार धक्के मारने लगीं. वो एक बार फिर खलास हो रही थीं और चाहती थीं के नज़ीर उनकी चूत में घस्से मारना बंद ना करे. वो बिल्कुल पागलों की तरह नज़ीर के लंड पर अपनी चूत को उछल रही थीं. 

नज़ीर ने अब उनका मम्मा हाथ में ले लिया. उन्होने अपना एक हाथ नज़ीर के उसी हाथ पर रखा जिस में उनका मम्मा दबा हुआ था और दूसरा हाथ अपने पेट पर ले आईं. फिर उनके बदन ने तीन चार झटके लिये और वो दोबारा खलास होने लगीं. चंद सेकेंड तक वो इसी हालत में रहीं. नज़ीर ने उनके मम्मे पर ज़बान फेरी और पूछा के किया उन्हे चुदने का मज़ा आया. खाला अम्बरीन की साँसें बे-रब्त और उखड़ी हुई थीं. वो चुप रहीं. नज़ीर ने एक झटके से अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया. मैंने देखा के खाला अम्बरीन की चूत से निकालने वाला गाढ़ा पानी उस के सारे लंड पर लगा हुआ था और वो रोशनी में चमक रहा था. 

फिर वो बेड पर लेट गया और खाला अम्बरीन को बोला – चल, मेरे लंड पर बैठ. खाला ने उसके ऊपर आ कर लंड को हाथ में पकड़ा और उस पर बैठने लगीं तो उनकी नज़रें मुझ से मिलीं. मैंने महसूस किया के ये नज़रें पहली वाली खाला अम्बरीन की नही थीं. आज के वहशत-नाक तजरबे ने मेरे और उनके दरमियाँ एक नया ता’अलूक़ कायम कर दिया था. शायद अब हम भी पहले वाले खाला-भानजे नही बन सकते थे. खैर खाला अम्बरीन ने नज़ीर के लंड पर अपनी फुद्दी रख दी और उस का लंड अपने अंदर ले लिया. उस ने खाला अम्बरीन को कमर से पकड़ कर अपने ऊपर झुकाया और अपनी मज़बूत रानों को उठा उठा कर उनकी फुद्दी में घस्से मारने लगा. खाला अम्बरीन के गदराए और गोल चूतड़ अब मेरी तरफ थे. 

नज़ीर की रानें बड़ी वर्ज़िशी और ताक़तवर थीं और वो खाला अम्बरीन की चूत में नीचे से पुरजोर धक्के मार रहा था. फिर उस ने उनके चूतड़ों को दोनो हाथों से गिरफ्त में ले लिया और उन्हे पूरी तरह क़ाबू कर के चोदने लगा. उस के हलक़ से अजीब आवाजें निकल रही थीं. खाला अम्बरीन बड़ी खूबसूरत औरत थीं. मुझे यक़ीन था के नज़ीर ने कभी उन जैसी औरत को नही चोदा होगा. उस के चेहरे के नक्श बिगड़ गए थे. वो अब शायद झड़ने वाला था. 

उस ने खाला अम्बरीन को अपने लंड से नीचे उतारा और दोबारा उन्हे कमर के बल लिटा कर उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया. अब उस के घस्से बहुत शदीद हो गए थे और वो बड़ी बे-रहमी से उनकी चूत ले रहा था. हर घस्से के साथ उस के चूतड़ों के पाट अकड़ते और फैलते थे. उस ने खाला अम्बरीन के मम्मों में अपना मुँह दे दिया और उस का लंड तेज़ी से उनकी चूत के अंदर बाहर होने लगा. कोई एक मिनिट के बाद नज़ीर किसी पागल भैंसे की तरह गुर्राने लगा और उस ने खाला अम्बरीन की चूत में खलास होना शुरू कर दिया. इस दफ़ा खाला अम्बरीन उस के घस्सों का जवाब नही दे रही थीं मगर जब उस का पानी उनकी चूत के अंदर जाने लगी तो शायद वो खुद पर कंट्रोल ना रख सकीं और फिर उस का साथ देनें लगीं. नज़ीर ने अपना सारा पानी उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया था. मुझे खाला के चूतड़ों की हरकत से लगा के वो एक दफ़ा फिर खलास हुई थीं. 

थोड़ी देर बाद नजीर खाला अम्बरीन के ऊपर से हटा और बेड से उतर आया. खाला अम्बरीन ने जल्दी से अपने कपड़े उठाये और बाथरूम की जानिब चल पड़ीं. उनका ब्रेसियर वहीं बेड पर रह गया. नज़ीर ने उनका ब्रा उठाया और उस से अपने लंड को, जिस पर खाला अम्बरीन की चूत का और उसका अपना पानी लगी हुआ था, साफ़ किया. फिर ब्रा उनकी तरफ फैंक दिया लेकिन वो रुकी नहीं और बाथरूम में चली गईं. मेरा खून खोल गया. 

नज़ीर भी कपड़े पहन’ने लगा. कुछ देर बाद खाला अम्बरीन ने बाथरूम से बाहर आ कर अपना ब्रा एक चुटकी में उठा कर साइड पर रख दिया. नज़ीर ने हंस कर उन से कहा -  तुम्हारी चूत मेरे लंड का पानी पी चुकी है और तुम अब भी नखरे कर रही हो. फिर मेरी तरफ देख कर कहने लगा – यार, तुम्हारी खाला को चोद कर बड़ा मज़ा आया. तुम ठीक ही इस पर गरम थे क्योंके ये तो माल ही चोदने वाला है. अब बताओ के तुम लोग कब तक यहाँ हो? में बेवकूफों की तरह खड़ा उस की बातें सुन रहा था. लेकिन मेरे ज़हन में चूँके खाला अम्बरीन की ज़बरदस्त चुदाई और उनकी बे-इज़ती के मंज़र घूम रहे थे इसलिये में उसे फॉरन कोई जवाब नही दे सका. इस पर वो बोला - मुँह से कुछ फूटो ना. चूतियों की तरह चुप क्यों खड़े हो. मैंने कहा - हम कल वापस चले जायेंगे. वो बोला - में तुम्हारी माँ यासमीन से मिलना चाहता हूँ कैसे मिलवाओगे? उस की तो गांड़ भी मार कर दिखाऊंगा तुम्हे. मज़े करवा सकता हूँ तुम्हे अगर तुम अपनी माँ के दल्ले बनना क़बूल करो. 

में पिछले 2 घंटे से ज़िल्लत बर्दाश्त कर रहा था. नज़ीर की मारपीट, गालियों और तंज़िया बातों ने मुझे इंतहाई मुश्ता’इल कर दिया था. मेरे सामने उस ने खाला अम्बरीन की चूत ज़बरदस्ती ली थी और जब उसने अम्मी को चोदने की बात कही तो में उसका ये जुमला सुन कर होश-ओ-हवास खो बैठा और मेरे खौफ पर गुस्सा घालिब आ गया. मैंने आव् देखा ना ताव और सामने मेज़ पर रखा हुआ शीशे का जग उठाया और पूरी ताक़त से उस के मनहूस सर पर दे मारा. जग का निचला मोटा हिस्सा नज़ीर के सर से टकराया और धाब की तेज़ आवाज़ निकली. खाला अम्बरीन के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई. नज़ीर किसी मुर्दा छिपकली की तरह फ़रश पर गिरा और उस के सर से खून बहने लगा. 

मैंने फॉरन उस का मोबाइल फोन और चाक़ू उठाये और फिर उस के मुँह पर एक ज़ोरदार लात रसीद की. नज़ीर के मुँह से गूं गूं की आवाज़ बरामद हुई और उस ने अपना सर अपने सीने पर झुका लिया. मैंने चाक़ू खोला तो खाला अम्बरीन ने मुझे रोक दिया और कहा के इस कुत्ते को यहाँ से दफ़ा हो जाने दो. उन्होने नज़ीर से कहा के वो चला जाए वरना में उसे मार डालूंगा. वो मुझ से कहीं ज़ियादा ताक़तवर था लेकिन शायद सर की चोट ने उसे हवास-बाख्ता कर दिया था. मेरे हाथ में चाक़ू और आँखों में खून उतरा देख कर उस ने इसी में केफियत जानी के वहाँ से चला जाए. वो करहता हुआ उठा और अपने सर के ज़ख़्म पर हाथ रख कर कमरे से निकल गया. 

मैंने उस के मोबाइल से अपनी और खाला अम्बरीन की तस्वीर डिलीट की और फिर उस की सिम निकाल ली. अब वो हरामी हमें ब्लॅकमेल नही कर सकता था. मुझे अफ़सोस हुआ के मैंने खाला अम्बरीन के चुदने से पहले ही ये हिम्मत क्यों नही की. लेकिन वो खुश थीं. उन्होने मुझे शाबाशी दी और कहा के मैंने बड़ी बहादुरी दिखाई. मैंने कहा के ये सब कुछ मेरी वजह से ही हुआ है जिस के लिये में बहुत शर्मिंदा हूँ. वो कहने लगीं के बस अब किसी को इस बात का पता ना चले और जो हुआ वो सिर्फ़ हम दोनो तक ही रहना चाहिये. मैंने कहा में पागल तो नही हूँ जो किसी को कुछ बताऊंगा. 

उन्होने जल्दी जल्दी कमरे के क़ालीन पर गिरा हुआ नज़ीर का खून अच्छी तरह धो कर साफ़ कर दिया और दोबारा बाथरूम में चली गईं. मै हैरान था के मैंने उनके साथ इतनी बुरी हरकत की जिसका नतीजा बड़ा खौफनाक निकला था मगर उन्होने मुझे कुछ नही कहा. मैंने बाहर निकल कर इधर उधर नज़र दौड़ाई लेकिन नज़ीर का कोई पता नही था. मै वापस कमरे में आ गया. जब खाला अम्बरीन बाथरूम से निकल आईं तो हम सोने के लिये लेट गए. 

सुबह मैंने होटेल के रिसेप्शनिस्ट से पूछा के मुझ से रात को होटेल का एक छोटे से क़द का मुलाज़िम दवा लाने के लिये पैसे ले गया था मगर वापस नही आया. उस ने मेज़रात की और बताया के उस का नाम नज़ीर था और वो रात को काम छोड़ कर भाग गया. था तो वो पंजाब का मगर सारी उमर कराची में रहा था. शायद वहीं चला गया हो. मैंने सुख का साँस लिया. 

शादी की तक़रीब में मेरा और खाला अम्बरीन का आमना सामना नही हुआ. हम उसी दिन बारात ले कर लाहोर रवाना हुए. वापसी पर में अब्बू की कार में बैठा और खाला अम्बरीन से कोई बात ना हो सकी. रास्ते में हम लोग भेरा इंटरचेंज पर रुके तो वो मुझे मिलीं और कहा के में कल स्कूल से छुट्टी करूँ और उनके घर आऊं लेकिन इस का ज़िक्र अम्मी से ना करूँ. मैंने हामी भर ली. उनके चेहरे पर कोई बहुत ज़ियादा परैशानी के आसार नही थे. वो अच्छे मज़बूत आसाब की औरत साबित हुई थीं वरना इतना बड़ा वाक़िया हो जाने के बाद किसी के लिये भी नॉर्मल रहना मुश्किल था. लेकिन शायद उन्हे इस वाक़िये को सब से छुपाना था और इस के लिये ज़रूरी था के वो अपने आप पर क़ाबू रक्खें. जब उन्होने मुझे अपने घर आने का कहा तो में डरा भी के ऐसा ना हो खाला अम्बरीन अब मेरी हरकत पर गुस्से का इज़हार करें. लेकिन अगर वो ऐसा करतीं भी तो इस में हक़-बा-जानिब होतीं. मैंने सोचा अब जो होगा कल देखा जाएगा. 

रात को में सोने के लिये लेटा तो मेरे ज़हन में हलचल मची हुई थी. खाला अम्बरीन के साथ नज़ीर ने जो कुछ किया उस ने मुझे हिला कर रख दिया था और में जैसे एक ही रात में नौ-उमर लड़के से एक तजर्बा-कार मर्द बन गया था. बाज़ तजरबात इंसान को वक़्त से पहले ही बड़ा कर देते हैं. खाला अम्बरीन वाला वाक़िया भी मेरे लिये कुछ ऐसा ही था. मुझे भी अब दुनिया बड़ी मुख्तलीफ़ नज़र आने लगी थी. 

उस रात जब नज़ीर खाला अम्बरीन को चोद रहा था तो मैंने फैसला किया था के अब कभी उनके बारे में कोई गलत बात नही सोचूंगा. मै इस फैसला पर कायम रहना चाहता था. मैंने बहुत ब्लू फिल्म्स देखी थीं लेकिन नज़ीर को खाला की चूत लेते हुए देखना एक नया ही तजर्बा था जिस ने मुझे बहुत कुछ सिखाया था. अब अगर में किसी औरत को चोदता तो शायद मुझे इस में कोई ज़ियादा मुश्किल पेश ना आती. सब से बढ़ कर ये के नज़ीर ने जिस नंगे अंदाज़ में मेरी अम्मी का ज़िक्र किया था उस ने मुझे अम्मी के बारे में एक बिल्कुल मुख्तलीफ़ अंदाज़ में सोचने पर मजबूर कर दिया था. 

ये तो में जानता ही था के अम्मी भी खाला अम्बरीन की तरह एक खूबसूरत औरत थीं लेकिन मैंने हमेशा उनके बारे में इस तरह सोचने से गुरेज़ किया था. आख़िर वो मेरी माँ थीं और में उन पर बुरी नज़र नही डाल सकता था. लेकिन ये भी सच था के अम्मी और खाला अम्बरीन में जिस्मानी ऐतेबार से कोई ऐसा ख़ास फ़र्क़ नही था. बल्के अम्मी खाला अम्बरीन से थोड़ी बेहतर ही थीं. उनकी उमर 38 साल थी और वो भी बहुत मज़बूत, भरे हुए और भरपूर बदन की मालिक थीं. 

उनका बदन बड़ा जोबन वाला और कसा हुआ था. इस उमर में औरतें जिस्मानी तौर पर भारी हो जाती हैं और उनका बदन लटक जाता है लेकिन अम्मी का बदन तंदुरस्त और तवाना होने के साथ साथ बड़ा कसा हुआ भी था. अम्मी के मम्मे मोटे और बड़े बड़े गोल उभारों वाले थे जो खाला अम्बरीन के मम्मों से भी एक आध इंच मोटे ही हूँगे. अपने मोटे और भारी मम्मों को अम्मी रात दिन ब्रा में छुपा कर रखती थीं. वो अपने मम्मों पर बड़ा टाइट ब्रा पहनती थीं जो उनके मोटे मम्मों को अच्छी तरह बाँध कर रखता था और उन्हे हिलने नही देता था. मैंने उनके बाथरूम में बहुत मर्तबा उनके सफ़ेद और काले ब्रेसियर देखे थे. 

चूँके वो कभी अपना ब्रा नही उतारती थीं इस लिये उनके साथ रहने के बावजूद मुझे उनके नंगे मम्मे देखने का इतिफ़ाक़ कम ही हुआ था. जब में 12 साल का था तो मैंने उनके बदन का ऊपरी हिस्सा नंगा देखा था. एक दिन में अचानक ही बेडरूम में दाखिल हो गया था जहाँ अम्मी कपड़े बदल रही थीं. उन्होने शलवार पहनी हुई थी मगर ऊपर से बिल्कुल नंगी थीं. उनके हाथ में एक काले रंग का झालर वाला ब्रा था जिससे वो उलट पुलट कर देख रही थीं. शायद वो उस ब्रा को पहनने वाली थीं . 

मेरी नज़र उनके मोटे ताज़े मम्मों पर पड़ी जो उनके हाथों की हरकत की वजह से आहिस्ता आहिस्ता हिल रहे थे. मुझे देख कर उन्होने फॉरन अपनी पुष्ट मेरी तरफ कर ली और कहा के में कपड़े बदल रही हूँ. मै फॉरन उल्टे क़दमों बेडरूम से बाहर आ गया. वैसे भी वो अपने बदन के बारे में बड़ी हस्सास थीं और ख़ास तौर पर बाहर के लोगों के सामने हमेशा दुपट्टा या चादर ओढ़े रखती थीं . अम्मी की गांड़ मोटी लेकिन टाइट थी. चूतड़ भारी, काफ़ी चौड़े और गोश्त से भरे हुए थे. अम्मी की कमर हैरत-अंगैज़ तौर पर पतली थी और ये बात उनके बदन को सेक्स के लिये गैर-मामूली तौर पर पूर-कशिश बनती थी. 

मुझे अचानक एहसास हुआ के अम्मी के बारे में सोचते हुए मेरा लंड खड़ा हो गया है. मैंने फॉरन अपने ज़हन से इन गंदे ख़यालात को झटक दिया और सोने की कोशिश करने लगा. मुझे अगले दिन खाला अम्बरीन ने घर बुलाया था मगर में नदमत और खौफ की वजह से अभी उनका सामना नही करना चाहता था. मैंने सुबह स्कूल जाने से पहले उन्हे फोन कर के बताया के स्कूल में मेरा टेस्ट है में आज उनके घर नही आ सकता. 

स्कूल में मुझे खाला अम्बरीन का बेटा राशिद मिला. वो भी दसवीं में ही पढ़ता था मगर उस का सेक्शन दूसरा था. उस से मिल कर मेरा एहसास-ए-जुर्म और भी बढ़ गया. वो मेरा कज़िन भी था और दोस्त भी लेकिन मैंने उस की माँ को चोदने की कोशिश की थी. मेरी इस ज़लील हरकत की वजह से ही नज़ीर जैसे घटिया आदमी ने उस की माँ की चूत ली थी. खैर अब जो होना था हो चुका था. 

उस दिन मेरी जेहनी हालत ठीक नही थी लहाज़ा मैंने आधी छुट्टी में ही घर जाने का फ़ैसला किया. हम दसवीं के लड़के सब से सीनियर थे और हमें स्कूल से निकलने में कोई मसला नही होता था. मै खामोशी से स्कूल से निकल कर घर की तरफ चल पड़ा. घर पुहँच कर मैंने बेल बजाई मगर काफ़ी देर तक किसी ने दरवाज़ा नही खोला. तक़रीबन 11/30 का वक़्त था और उस वक़्त घर में सिरफ़ अम्मी होती थीं. अब्बू सरकारी मुलाज़िम थे और उनकी वापसी शाम पाँच बजे होती थी. मेरे छोटे बहन भाई तीन बजे स्कूल से आते थे. खैर कोई 6/7 मिनिट के बाद अम्मी ने दरवाज़ा खोला तो में अंदर गया. 

अम्मी मुझे देख कर कुछ हैरान भी लग रही थीं और बद-हवास भी. लेकिन एक चीज़ जिस का एहसास मुझे फॉरन ही हो गया ये थी के उस वक़्त अम्मी ने ब्रा नही पहना हुआ था. जब हम दोनो दरवाज़े से अंदर की तरफ आने लगे तो मैंने अम्मी के दोपटे के नीचे उनके भारी मम्मों को हिलते हुए देखा. जब वो ब्रा पहने होती थीं तो उनके मम्मे कभी नही हिलते थे. ऐसा भी कभी नही होता था के वो ब्रा ना पहनें. मैंने सोचा हो सकता है अम्मी नहाने की तय्यारी कर रही हूँ. खैर मैंने उन्हे बताया के मेरी तबीयत खराब थी इस लिये जल्दी घर आ गया. 

अभी में ये बात कर ही रहा था के एक कमरे से राशिद निकल आया. अब हैरानगी की मेरी बारी थी. मै तो उससे स्कूल छोड़ कर आया था और वो यहाँ मोजूद था. उस ने कहा के वो खाला अम्बरीन के कपड़े लेने आया था. उस का हमारे घर आना कोई नई बात नही थी. वो हफ्ते में तीन चार बार ज़रूर आता था. मै उससे ले कर अपने कमरे में आ गया जहाँ अम्मी कुछ देर बाद चाय ले कर आ गईं. मैंने देखा के अब उन्होने ब्रा पहन रखा था और उनके मोटे मम्मे हमेशा की तरह कोई हरकत नही कर रहे थे. मुझे ये बात भी कुछ समझ नही आई. कोई आध घंटे बाद राशिद चला गया. 

मुझे ये सब बड़ा अजीब लगा. राशिद का स्कूल से आधी छुट्टी में यों हमारे घर आना और मेरे आने पर अम्मी का परेशां होना. और फिर उनका बगैर ब्रा के होना. वो तो शदीद गर्मी में भी कभी अपने मम्मों को खुला नही रखती थीं लेकिन आज राशिद के घर में होते हुए भी उन्होने ब्रा उतारा हुआ था. पता नही किया मामला था. मुझे ख़याल आया के कहीं राशिद मेरी अम्मी की चूत तो नही लेना चाहता. आख़िर में भी तो खाला अम्बरीन पर गरम था बल्के उन्हे चोदने की कोशिश भी कर चुका था. वो भी अपनी खाला यानी मेरी अम्मी पर गरम हो सकता था. मगर अम्मी ने अपने मम्मों को खुला क्यों छोड़ रक्खा था? किया वो राशिद को अपनी मर्ज़ी से चूत दे रही थीं? मेरे ज़हन में कई सवालात गर्दिश कर रहे थे. 

लेकिन फिर मैंने सोचा के चूँके में खुद खाला अम्बरीन को चोदना चाहता था और मेरे अपने ज़हन में घिलज़ात भारी हुई थी इस लिये राशिद के बारे में ऐसी बातें सोच रहा था. मुझे यक़ीन था के अगर वो अम्मी पर हाथ डालता भी तो वो कभी उसे अपनी चूत देने को राज़ी ना होतीं. वो बड़े मज़बूत किरदार की औरत थीं. मै ये सोच कर कुछ पूर-सकूँ हो गया लेकिन मेरे ज़हन में शक ने जड़ पकड़ ली थी. मैंने सोचा के अब राशिद पर नज़र रखूंगा. 

हमारे घर मैं बड़े दरवाज़े के अलावा एक दरवाज़ा और भी था जो ड्रॉयिंग रूम से बाहर गली में खुलता था. यहाँ से मेहमानों को घर के अंदर लाया जा सकता था. मैंने इस दरवाज़े के लॉक की चाबी की नक़ल बनवा कर रख ली. स्कूल में अब में राशिद की निगरानी करने लगा. कोई चार दिन के बाद मुझे पता चला के राशिद आज स्कूल नही आया. मेरा माथा ठनका और में फॉरन अपने घर पुहँचा. ड्रॉयिंग रूम के रास्ते अंदर जाने में मुझे कोई मुश्किल पेश नही आई. अंदर अम्मी और राशिद के बोलने की हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं. वो दोनो बेडरूम में थे. मै दबे पांव चलता हुआ बेडरूम की खिड़की के नीचे आ गया जिस पर अंदर की तरफ पर्दे लगे थे लेकिन बीच में से परदा थोड़ा सा खुला था और तक़रीबन दो इंच की दराज़ से अंदर देखा जा सकता था. मैंने बड़ी एहतियात से अंदर झाँका. 

मैंने देखा के राशिद बेडरूम में पड़ी हुई एक कुर्सी पर बैठा हुआ था और चाय पी रहा था. वो स्कूल के बारे में कुछ कह रहा था. अम्मी सामने दीवार वाली अलमारी से कुछ निकाल रही थीं. उनकी पतली कमर के मुक़ाबले में मोटे मोटे चूतड़ बड़े नुमायाँ नज़र आ रहे थे. उनका तौर तरीक़ा उस वक़्त काफ़ी मुख्तलीफ़ था. वो अपने दोपटे को हमेशा अपने मम्मों पर फैला कर रखती थीं लेकिन उस वक़्त उनके मोटे उभरे हुए मम्मे साफ़ नज़र आ रहे थे जिन की उन्हे कोई परवा नही थी. वो अपने मम्मों को छुपाने की कोई कोशिश नही कर रही थीं. उनके चेहरे पर भी वो ता’असूरात नही थे जो मैंने हमेशा देखे थे. 

कुछ देर इधर उधर की बातों के बाद राशिद ने कहा - खाला जान, अब तो मुझे चोद लेने दें. मैंने स्कूल वापस भी जाना है. अम्मी ने जवाब दिया – राशिद, आज वक़्त नही है अभी शाकिर की फूफी ने आना है और उस के साथ और औरतें भी हैं. तुम कल आ जाना. सकूँ से सब कुछ कर लेना. राशिद बोला - खाला जान, अभी तो घर में कोई नही है हम क्यों वक़्त ज़ाया कर रहे हैं. मै आज जल्दी खलास हो जाऊंगा. 

ये बातें मेरे कानो में पहुँचीं तो मेरे दिल-ओ-दिमाग पे जैसे बिजली गिर पड़ी. इन बातों का मतलब बिल्कुल साफ़ था. राशिद ना सिरफ़ मेरी अम्मी को चोद रहा था बल्के इस में अम्मी की पूरी मर्ज़ी भी शामिल थी. वो अपने भानजे से चुदवा रही थीं जिसे उन्होने गोद में खिलाया था. अम्मी और खाला अम्बरीन की शादी एक ही दिन हुई थी और मेरी और राशिद की पैदाइश का साल भी एक ही था. मै बेडरूम की दीवार के साथ ज़मीन पर बैठ गया. हैरत, गुस्से, शर्मिंदगी और नफ़रत के मारे मेरी आँखों में आँसू आ गए. मै कुछ देर दीवार के साथ इसी तरह सर झुकाय बैठा रहा. फिर मैंने हिम्मत कर के दोबारा अंदर झाँका. 

उस वक़्त राशिद कुर्सी से उठ कर अम्मी के क़रीब पुहँच चुका था जो बेड के साथ पड़ी हुई छोटी मेज़ साफ़ कर रही थीं. उस ने पीछे से अम्मी की पीठ के साथ अपना जिसम लगा लिया और आगे से उनके मम्मों और पेट पर हाथ फेरने लगा. अम्मी ने मेज़ साफ़ करनी बंद कर दी और मेज़ पर अपने दोनो हाथ रख दिये. फिर राशिद एक हाथ से अम्मी के मम्मों को दबाने लगा जबके दूसरा हाथ उसने उनके मोटे चूतड़ों पर फैरना शुरू कर दिया. 

अम्मी ने गर्दन मोड़ कर उसकी तरफ देखा. उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी जैसे उन्हे ये सब बड़ा सकूँ और लुत्फ़ दे रहा हो. वो थोड़ा सा खिसक कर साइड पर हो गईं और बेड की तरफ आ कर उस के ऊपर दोनो हाथ रख दिये. राशिद उनके मम्मों और गांड़ से खेलता रहा. अम्मी ने अपना हाथ पीछे कर के राशिद के लंड को पतलून के ऊपर से ही पकड़ लिया. साफ़ नज़र आ रहा था के ये सब कुछ उन्हे अच्छा लग रहा था. 

राशिद ने अम्मी के मम्मों और कमर पर हाथ फेरते फेरते सलवार के ऊपर से ही उनके चूतड़ों के बीच में अपनी उंगली डाल कर आगे पीछे हिलाई. अम्मी के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली. राशिद ने पतलून के बावजूद खड़े खड़े ही अम्मी की गांड़ के ऊपर दो चार घस्से लगाए  और उन्हे अपनी तरफ मोड़ कर चूमने लगा. अम्मी कुछ देर पूरी तरह उस का साथ देती रहीं. वो अपना मुँह खोल खोल कर राशिद के होंठ चूस रही थीं. लेकिन फिर उन्होने अपना मुँह पीछे कर लिया और बोलीं – राशिद, ज़ियादा वक़्त नही है. तुम अपना काम शुरू करो और जल्दी से जल्दी फ़ारिग़ होने की कोशिश करो. अम्मी को इस अंदाज़ में बातचीत करते सुन कर में हैरान रह गया. 

अम्मी के लहजे में थोड़ी सी सख्ती थी जिसे महसूस कर के राशिद ने अपनी पतलून खोल कर नीचे की और अंडरवेर में से उस का अकड़ा हुआ लंड एक दम बाहर आ गया. उस का लंड पतला मगर ख़ासा लंबा था. उस के लंड का सुपाड़ा सुर्खी-माइल था और मुझे साफ़ नज़र आ रहा था. अम्मी ने उस के लंड की तरफ देखा और उससे हाथ में ले लिया. राशिद उनकी क़मीज़ का दामन उठा कर मम्मों तक ले गया और फिर उनका ब्रा बगैर खोले ही ज़ोर लगा कर उनके मम्मों से ऊपर कर दिया. अम्मी के मोटे मोटे और सुर्ख-ओ-सफ़ेद मम्मे उछल कर बाहर आ गए. उनके निप्पल तीर की तरह सीधे खड़े हुए थे जिस से अंदाज़ा लगाया जा सकता था के वो कितनी गरम हो चुकी हैं. 

राशिद ने अम्मी के मोटे ताज़े मम्मे हाथों में ले लिया और उन्हे चूसने लगा. अम्मी ने अपनी आँखें बंद कर के गर्दन एक तरफ मोड़ ली और राशिद के कंधे पर हाथ रख दिया. राशिद उनके मम्मों को हाथों में भर भर कर चूसता रहा. वो जज़्बात में जैसे होश-ओ-हवास खो बैठा था. दुनिया से बे-खबर किसी प्यासे कुत्ते की तरह मेरी अम्मी के खूबसूरत मम्मों को चूस चूस कर उन से मज़े ले रहा था. कुछ देर बाद अम्मी ने राशिद को ज़बरदस्ती अपने मम्मों से अलग किया और एक बार फिर उससे कहा के वो जल्दी करे, मेहमान आते ही हूँगे. 

राशिद बेड पर लेट गया और अम्मी को हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ खैंचा. अम्मी उस के साथ बेड बैठ गईं तो उस ने उन्हे अपना लंड चूसने का कहा. अम्मी ने जवाब दिया - आज चूसने का वक़्त नही है तुम बस जल्दी फ़ारिग़ हो जाओ. राशिद अपनी पतलून और अंडरवेर उतारते हुए बोला - खाला जान, बस दो मिनिट चूस लें. मुझे मज़ा भी आएगा और इसे आप की चूत के अंदर करने में भी आसानी होगी. ये सुन कर अम्मी झुक कर उस का लंड जल्दी जल्दी चूसने लगीं. राशिद ने हाथ नीचे कर के उन का दायां मम्मा हाथ में ले लिया और उसे मसलने लगा. 

कुछ देर उस का लंड चूसने के बाद अम्मी ने फिर कहा – राशिद, देर ना करो. राशिद फॉरन बेड से उतरा और अम्मी को भी खड़ा कर दिया. फिर उस ने हाथ बढ़ा कर अम्मी की सलवार का नाड़ा खोल दिया. अम्मी की शलवार उनके पैरों में गिर गई. वो फुर्ती से अम्मी के पीछे आया और उनके चूतड़ों के ऊपर से क़मीज़ उठा कर उनकी कमर तक ऊँची कर दी. अम्मी के मोटे और गोल चूतड़ नज़र आने लगे. राशिद ने अपना लंड अम्मी की चूत के अंदर करने की कोशिश की मगर कामयाब नही हुआ. उस ने अपने लंड पर ऊपर नीचे दो तीन दफ़ा हाथ फेरा और उस का सुपाड़ा अम्मी के चूतड़ों के बीचों बीच रख कर हल्का सा घस्सा मारा. 

कोशिश के बावजूद राशिद के लंड को इस दफ़ा भी अम्मी की चूत में दाखिला ना मिल सका. अम्मी ने कहा - ऐसे अंदर नही जाएगा. थूक लगा कर डालो. उन्होने अपने पैरों में पड़ी सलवार से टांगें बाहर निकलीं और एक पैर से उसे थोड़ा दूर खिसका दिया. फिर वो सामने बेड पर हाथ रख कर थोड़ा सा और नीचे झुक गईं ताके राशिद का लंड उनकी चूत के अंदर जा सके. राशिद ने अपने हाथ पर थूका और अम्मी की टांगें खोल कर उनकी चूत पर अपना थूक लगा दिया. राशिद का हाथ उनकी चूत से लगा तो अम्मी के मुँह से ऊ.. ऊ.. की आवाज़ निकली और उनके चूतड़ थरथरा कर रह गए. 

राशिद ने अपने लंड पर भी थूक लगाया और उसे चूत से सटा दिया. अम्मी ने थोड़ा पीछे हो कर उस का लंड अपनी चूत में ले लिया. थोड़ी कोशिश के बाद राशिद अपना लंड पूरी तरह अम्मी की चूत के अंदर ले जाने में कामयाब हो गया. अम्मी ने आँखें बंद कर लीं. अब राशिद ने उनकी चूत में घस्से मारने शुरू किये. चुदवाते हुए अम्मी का मुँह हल्का सा खुला हुआ था और राशिद के धक्कों की वजह से उनका पूरा बदन हिल रहा था. मुझे अम्मी के चूतड़ आगे पीछे होते नज़र आ रहे थे. हर घस्से के साथ राशिद की रानों का ऊपरी हिसा अम्मी के चूतड़ों से टकराता और उनके खूबसूरत बदन को एक झटका लगता. क़मीज़ के ऊपर से उनके मम्मे ज़ोर ज़ोर से हिलते हुए नज़र आ रहे थे. राशिद ने आगे से क़मीज़ के अंदर हाथ डाल कर अम्मी के बे-क़ाबू मम्मे पकड़ लिये और अपना लंड उनकी चूत के अंदर बाहर करने लगा. 

मुझे ना जाने क्यों उस वक़्त नज़ीर का ख़याल आया. मैंने अपना मोबाइल जेब से निकाला और अम्मी और राशिद की चुदाई करते हुए कई तस्वीरें ले लीं. राशिद चुदाई में नज़ीर की तरह तजुर्बेकार नही लग रहा था. वो चंद मिनिट के घस्सों के बाद ही बे-क़ाबू होने लगा. उस ने अम्मी की कमर को पकड़ लिया और उनकी चूत के अंदर खलास होने लगा. अम्मी ने अपने चूतड़ों को आहिस्ता आहिस्ता तीन चार दफ़ा गोलाई में हरकत दी. मुझे लगा कि राशिद का काम हो चुका था. जब राशिद ने अपना लंड अम्मी की चूत से बाहर निकाला तो अम्मी ने झट से फ़रश से अपनी सलवार उठा कर पहन ली. राशिद भी अपनी पतलून उठा कर बाथरूम में घुस गया. मै खामोशी से उठा और ड्रॉयिंग रूम के रास्ते घर से बाहर निकल गया. 

वहाँ से निकल कर में सड़कों पर आवारागर्दी करता रहा. एक बार फिर में शदीद जेहनी उलझन का शिकार था. इस दफ़ा तो मामला खाला अम्बरीन वाले वाकये से भी ज़ियादा संगीन था. अम्मी और राशिद के ता’अलुक़ात का ईलम होने के बाद मेरी समझ में नही आ रहा था के मुझे किया करना चाहिये. किया अबू से अम्मी की इस हरकत के बारे में बात करूँ? किया अम्मी को बता दूँ के मैंने उन्हे राशिद से चुदवाते हुए देख लिया है? किया खाला अम्बरीन के ईलम में लाऊं के उनका बेटा अपनी खाला यानी उनकी सग़ी बहन को चोद रहा है? किया राशिद का गिरेबां पकडूं के पूछूं कि वो क्यों मेरी माँ को चोद रहा था? मेरे पास फिलहाल किसी सवाल का जवाब नही था. 
क्रमशः
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02-23-2014, 03:37 PM
Post: #3
RE: चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
मुझे अम्मी को राशिद के साथ देख कर दुख हुआ था बल्के सख़्त गुस्सा भी आया हुआ था. लेकिन इस से भी ज़ियादा मुझे जलन हो रही थी कि आख़िर राशिद में ऐसी किया बात थी के मेरी अम्मी जैसी हसीन और शानदार औरत उसे अपनी चूत देने को रज़ामंद हो गई थी? वो एक आम सा लड़का था जिस में कोई ख़ास बात नही थी. लेकिन इस के बावजूद वो किस अंदाज़ में अम्मी से गुफ्तगू कर रहा था? लग रहा था जैसे अम्मी पूरी तरह उस के कंट्रोल में हूँ. मै उनका बेटा होते हुए भी उन से बहुत ज़ियादा फ्री नही था. हम तीनो बहन भाई अब्बू से ज़ियादा अम्मी के गुस्से से घबराते थे. मगर राशिद का तो उनके साथ कोई और ही रिश्ता बन गया था और यही बात मेरी बर्दाश्त से बाहर थी. 

मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरी कोई बहुत क़ीमती चीज़ किसी ने छीन ली हो. आख़िर ये सब कुछ कैसे हुआ? अम्मी को राशिद में क्या नज़र आया था? अम्मी और अबू के ता’अलुक़ात भी अच्छे ही थे. उनका आपस में कोई लड़ाई झगड़ा भी नही था और वो एक खुश-ओ-खुर्रम ज़िंदगी गुज़ार रहे थे. फिर अम्मी ने अपने भानजे के साथ जिस्मानी ता’अलुक़ात क्यों कायम किये? ये सब बातें सोच कर मेरा दिमाग फटने लगा. मै घर वापस आया लेकिन अम्मी पर ये ज़ाहिर नही होने दिया के में उनका राज़ जान चुका हूँ. मगर फिर चंद घंटों के अंदर ही मेरे ज़हन पर छा जाने वाली धुंध छंटने लगी और मैंने फ़ैसला कर लिया के मुझे इन हालात में किया करना है. 

मैंने फ़ैसला किया था के मुझे खुद ही इन सारे मामलात को सुलझाना होगा. किसी को ये बताना के राशिद मेरी अम्मी की चूत मार रहा था पूरे खानदान के लिये तबाही का मंज़र बनता. अगर में राशिद से इंतिक़ाम लेता भी तो अम्मी ज़रूर उस की ज़द में आतीं और मुझे अपने तमामतर गुस्से के बावजूद ये मंज़ूर नही था. मुझे अम्मी से बहुत पियार था और उनकी बद-किरदारी के बावजूद मेरे दिल में उनके लिये नफ़रत पैदा नही हो सकी थी. हाँ ये ज़रूर था के रद्दे-ए-अमल के तौर पर अब में अम्मी की चूत पर अपना हक जायज़ समझने लगा था. 

हैरत की बात ये थी के मुझे ऐसा सोचते हुए कोई एहसास-ए-गुनाह नही था. मैंने पहले भी ज़िक्र किया है के बाज़ हौलनाक वाकेयात इंसान को बहुत कम वक़्त में बहुत कुछ सीखा देते हैं. मेरे साथ तो 2 ऐसे वाकेयात हुए थे जिन्हो ने मुझे एक बिल्कुल मुख्तलीफ़ इंसान बना दिया था. खाला अम्बरीन का नज़ीर के हाथों चुद जाना और और फिर राशिद का अम्मी की चूत लेना दोनो ने ही मेरी ज़िंदगी को बदल कर रख दिया था. इसीलिये शायद मुझे अब अम्मी की चूत  लेने में कोई बुराई नज़र नही आ रही थी. मेरी कमीनगी अपनी जगह लेकिन अम्मी को चोदने की इस खाहिश में हालात का सितम भी शामिल था. मामलात को संभालने के लिये ये बहुत ज़रूरी था के में कुछ ऐसा करूँ के राशिद और अम्मी का ता’अलूक़ हमेशा के लिये ख़तम हो जाए. इस का बेहतरीन तरीक़ा यही था के में अम्मी की ज़िंदगी में राशिद की जगह ले लूं. मुझे यक़ीन था के में ऐसा करने में कामयाब हो जाऊंगा. 

ये बात तो साफ़ थी के राशिद अम्मी को चोद कर यक़ीनन उनकी जिस्मानी ज़रूरत पूरी कर रहा वरना अम्मी अपने शौहर के होते हुए अपने भानजे को अपनी चूत क्यों देती? उनकी ये ज़रूरत अब में पूरी करना चाहता था. मै फिर कहूँगा के बिला-शुबा इस फ़ैसले में मेरे अपने ज़हन की कमीनगी भी शामिल थी. मैं अपनी दिलकश खाला को नहीं चोद पाया तो अब अपनी अम्मी को ही चोदना चाहता था. मगर ये भी तो सही था के राशिद से चुदवा कर मेरे दिल से गुनाह के एहसास को मिटा दिया था. अगर वो अपनी चूत का तोहफा राशिद को दे सकती थीं तो मुझे देने में उन्हे क्या मसला हो सकता था? इस तरह राशिद भी उनकी ज़िंदगी से निकल जायेगा और में भी उन्हे चोद लूँगा. 

मैंने ये भी सोच लिया था के अब मेरे लिये खाला अम्बरीन की चूत लेना लाजमी था. आख़िर हरामी राशिद ने मेरी अम्मी को चोदा था तो में उस की माँ को क्यों छोडूं? खाला अम्बरीन को इस सारे मामले में लाये बगैर वैसे भी हालात ठीक नही हो सकते थे. वो ना सिरफ़ राशिद को रोक सकती थीं बल्के इस बात को भी यक़ीनी बना सकती थीं के ये राज़ हमेशा राज़ ही रहे. लेकिन अम्मी को चोदना सूरत-ए-हाल में एक मुश्किल काम था. मेरे मोबाइल में उनकी और राशिद की तस्वीरें मोजूद थीं मगर में उन्हे ब्लॅकमेल कर के उनकी चूत नही मारना चाहता था. मेरी ख्वाहिश थी के वो खुशी से मुझे अपनी चूत लेने दें. इस के लिये ज़रूरी था के में उनके और ज़ियादा क़रीब होने की कोशिश करूँ. 

मैंने उस दिन से अम्मी को बहलाना फुसलाना शुरू कर दिया. उनका बेटा होने की वजह से में उनके क़रीब तो पहले ही था मगर अब में उनके साथ और ज़ियादा वक़्त गुज़ारने लगा और घरैलू काम काज में उनकी भरपूर मदद करने लगा. मै उनके कहने पर फॉरन सोदा सुलफा ले आता और पहले की तरह मुँह नही बनाता था. मै हर रोज़ किसी ना किसी वजह से उनकी तारीफ करता जिससे सुन कर वो बहुत खुश होती थीं. पता नही उन्होने मेरे बदले हुए रवय्ये को महसूस किया या नही मगर चन्द हफ्तों के अंदर ही में उनके बे-हद क़रीब आ गया और वो हर बात मुझ से शेयर करने लगीं. फिर सालाना इम्तिहानात की वजह से स्कूल की छुट्टियाँ हो गईं और में ज़ियादा वक़्त घर में गुज़ारने लगा. शायद इसी लिये राशिद का हमारे घर आना जाना बिल्कुल ख़तम हो गया. मुझे बड़ी खुशी थी के कम-आज़-कम इन छुट्टियों में वो अम्मी को नहीं चोद सकेगा. 

एक दिन मेरे दोनो बहन भाई नाना जान के घर गए हुए थे और घर में सिरफ़ अम्मी और में ही थे. उस दिन हफ़्ता था और हर हफ्ते को हमारे घर कपड़े धोने वाली मासी आती थी और अम्मी उस के साथ कपड़े धुलवाया करती थीं. दोपहर साढ़े तीन बजे के क़रीब अम्मी ने घर का सारा काम ख़तम किया और नहाने के लिये बेडरूम में चली गईं. मासी पहले ही जा चुकी थी. मै भी कुछ देर बाद उनके पीछे बेडरूम में आ गया. वो नहाने के बाद बड़ी निखरी निखरी लग रही थीं लेकिन उनके चेहरे पर थकान के आसार अब भी मोजूद थे. मैंने उन्हे कहा के वो बहुत ज़ियादा काम करती हैं और आराम बिल्कुल नही करतीं. मैंने उनकी तारीफ भी की के घर को संभालने में उनका कोई सानी नही. वो अपनी तारीफ सुन कर मुस्कुराईं और बोलीं के घर के काम काज में थकान तो हो ही जाती है लेकिन किया किया जाए घर तो संभालना तो पड़ता ही है. 

उनके लंबे बाल अब भी हल्के गीले थे और उनका गोरा सेहतमंद बदन बड़ा शानदार लग रहा था. वो बिस्तर पर बैठ गईं. मैंने कहा के आज तो वो बहुत थकी हूई लग रही हैं में उन्हे दबा देता हूँ. वो फॉरन मान गईं और कहा के उनकी कमर में बहुत दर्द है. इस में कोई नई बात नही थी क्योंके में बचपन से ही अम्मी को दबाया करता था. उन्होने अपना दुपट्टा उतारा और बेड पर उल्टी हो कर लेट गईं. लेट कर उन्होने अपने भारी चूतड़ों के ऊपर अपनी क़मीज़ को ठीक किया. क़मीज़ अपने तंदूरस्त बदन के नीचे से निकालने के लिये उन्होने अपने मोटे चूतड़ों को ऊपर उठाया और फिर हाथ पीछे ले जा कर उन्हे क़मीज़ के दामन से धक लिया. अम्मी के गुदाज़ चूतड़ों की हरकत ने मेरा खून गरमा दिया. मैंने सोचा के आज अम्मी को चोदने की कोशिश कर ही लेनी चाहिये. 


अम्मी के लेट जाने के बाद मैंने आहिस्ता आहिस्ता उनकी कमर को दबाना शुरू कर दिया. मेरे हाथों के नीचे अम्मी की कमर का गोश्त बड़ा गुदगुदा महसूस हो रहा था. मेरी हथेलियों ने अम्मी के सफ़ेद ब्रा के स्ट्रॅप्स को महसूस किया जो उनकी क़मीज़ में से झाँक रहा था. मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैंने अम्मी के गोल कंधों को दोनो हाथों में पकड़ लिया और उन्हे होले होले दबाने लगा. कंधों के थोड़ा ही नीचे उनके मोटे मोटे मम्मे उनके बदन के वज़न तले दबे हुए थे. मै अपनी उंगलियों को अम्मी के कंधों से कुछ नीचे ले गया और उनके मम्मों का ऊपरी नरम नरम हिस्सा मेरी उंगलियों से टकराया. उनको अब सरूर आने लगा था और वो आँखें बंद किये अपना बदन दबवा रही थीं. कमर से नीचे आते हुए मैंने बिल्कुल गैर महसूस अंदाज़ में अम्मी के चौड़े और मोटे चूतड़ों पर हाथ रख कर उन्हे दबाया और जल्दी से उनकी गोरी पिंडलियों की तरफ आ गया. मैंने पहली दफ़ा अम्मी के चूतडों को हाथ लगाया था. मेरे जिसम में सनसनाहट सी होने लगी. मुझे अपने लंड पर क़ाबू रखना मुश्किल हो गया. 

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को अम्मी की गांड़ के सुराख में उंगली देने से रोका. मैंने इस से पहले कभी अम्मी को दबाते हुए उनके चूतड़ों को हाथ नही लगाया था इसलिये मुझे डर था के कहीं वो बुरा ना मान जाएं मगर वो चुपचाप लेटी रहीं और में इसी तरह उन्हे दबाता रहा. मेरा लंड अकड़ कर तन चुका था. तीन चार दफ़ा अम्मी के चूतडों का इसी तरह लुत्फ़ लेने के बाद मैंने एक क़दम और आगे बढ़ने का इरादा किया. मै अपना हाथ उनकी बगल की तरफ ले गया और साइड से उनके एक मोटे ताज़े मम्मे को आहिस्ता से दबाया. पहले तो उन्होने किसी क़िसम का रिऐक्शन ज़ाहिर नही किया लेकिन जब मैंने दोबारा ज़रा बे-बाकी से उनके मम्मे को हाथ में लेने की कोशिश की तो वो एक दम सीधी हो कर बैठ गईं और बड़े गुस्से से बोलीं के ये तुम किया कर रहे हो शाकिर. तुम्हे शरम आनी चाहिये में तुम्हारी माँ हूँ. पहले तुम ने मेरी पीठ को टटोला और अब सीने को हाथ लगा रहे हो. उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था. 

अगरचे मुझे पहले ही तवक्को थी के वो इस तरह का रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करेंगी और में जानता था के मुझे इस के बाद किया करना था लेकिन फिर भी उन्हे गुस्से में देख कर मेरा दिल लरज़ कर रह गया. मैंने कहा के मैंने कुछ गलत नही किया में तो आप को दबा रहा था. उन्होने जवाब दिया के में उनके सीने को टटोल रहा था जो बड़ी बे-शर्मी की बात है. ये कह कर वो गुस्से में बिस्तर से नीचे उतरने लगीं. अब मेरे पास इस के एलावा कोई चारा नही था के में उन्हे बता देता के में उनकी शरम-ओ-हया से बड़ी अच्छी तरह वाक़िफ़ हूँ. मैंने कहा के अम्मी आप राशिद को देती हैं तब  तो आपको कोई शरम महसूस नही होती मगर मैंने आप के मम्मे को ज़रा सा हाथ लगा लिया तो आप इतना गुस्सा कर रही हैं. मेरे इस जुमले को सुन कर अम्मी जैसे सन्नाटे में आ गईं. उनका चेहरे के ता’औरात फॉरन बदल गए और मुँह खुला का खुला रह गया. बिस्तर से नीचे लटकी हुई उनकी टांगें लटकती ही रहीं और वो वहीं बैठी रह गईं. 

मेरे इस ज़बरदस्त हमले ने उन्हे संभलने का मोक़ा नही दिया था. उनकी हालत देख कर मेरा खौफ अचानक बिल्कुल ख़तम हो गया. इस से पहले के वो कोई जवाब देतीं मैंने कहा - अम्मी, मेहरबानी कर के अब झूठ ना बोलियेगा के आपने कभी राशिद को नही दी है. में अपनी आँखों से उसे आप की लेते हुए देख चुका हूँ और मेरे पास इस का सबूत भी है. मैंने जल्दी से अपना मोबाइल निकाल कर उन्हे उनकी और राशिद की तस्वीरें दिखाईं. 

तस्वीरें अगरचे दूर से ली गई थीं और थोड़ी धुंधली थीं मगर अम्मी और राशिद को साफ़ पहचाना जा सकता था. राशिद ने पीछे से अम्मी की चूत में अपना लंड डाला हुआ था और अम्मी बेड पर हाथ रखे नीचे झुकी हुई उसे अपनी चूत दे रही थीं. तस्वीरें देख कर अम्मी का चेहरा हल्दी की तरह ज़र्द हो गया और एक लम्हे में उनके चेहरे से सारा गुस्सा यक्सर गायब हो गया. अब उनकी आँखों में खौफ और खजालत के आसार थे. ऐसा महसूस होता था जैसे उन्होने कोई बड़ी खौफनाक बला देख ली हो. 

उन्होने कुछ देर सर नीचे झुकाए रखा और फिर बोलीं के राशिद ने उन्हे बरगला कर उनके साथ ये सब किया है और वो अपनी हरकत पर बहुत शर्मिंदा हैं. वाक़ई उन से बहुत बड़ी गलती होई है. फिर अचानक ही उन्होने रोना शुरू कर दिया. मै जानता था के वो झूठ बोल रही हैं. अम्मी को मैंने अपनी आँखों से राशिद से चुदते हुए देखा था. वो जो कुछ कर रही थीं अपनी मर्ज़ी से और खुशी से कर रही थीं. ये रोना सिर्फ इसलिये था के उनका राज़ फ़ाश हो गया था. 

में अम्मी के पास बेड पर बैठ गया और उनके बदन के गिर्द अपने बाज़ू डाल कर उन्हे अपनी तरफ खैंचा. उन्होने कोई मुज़ाहीमत तो नही की लेकिन और ज़ियादा शिद्दत से रोने लगीं. मै थोड़ा सा परेशां हुआ के अब किया करूँ. मैंने अम्मी से कहा के वो फिकर ना करें में उनके और राशिद के बारे में किसी से कुछ नही कहूँगा. ये राज़ हमेशा हमेशा के लिये मेरे सीने में ही दफ़न रहेगा. ये सुनना था के अम्मी ने रोना बंद कर दिया और बड़ी हैरत से मेरी तरफ देखा. मैंने फिर कहा के अम्मी जो होना था वो हो चुका है. मै अपना मुँह बंद रखूंगा मगर आप ये वादा करें के आ’इन्दा कभी राशिद को अपने क़रीब नही आने देंगी. उन्होने जल्दी से जवाब दिया के बिल्कुल ऐसा ही होगा. 

अगरचे अब अम्मी इस पोज़िशन में नही थीं के मेरी किसी बात को टाल सकतीं और में उन से हर क़िसम का मुतालबा कर सकता था मगर ना जाने क्यों मतलब की बात ज़बान पर लाते हुए अब भी में घबरा रहा था. बहरहाल मैंने दिल मज़बूत कर के अम्मी के गाल को चूम लिया. उन्होने मेरी गिरफ्त से निकालने की कोशिश नही की मगर बिल्कुल ना-महसूस तरीक़े से अपने बदन को सिमटा लिया. मैंने हिम्मत कर के कहा - अम्मी, में एक बार आप के साथ वोही करना चाहता हूँ जो राशिद ने किया है मगर आप मुझे नही देना चाहें तो में आप को मजबूर नही करूँगा. बस मेरी यही दरखास्त होगी के राशिद कभी आप के क़रीब नज़र ना आए. मेरी बात सुन कर अम्मी कुछ सोचने लगीं. उन्होने किसी क़िसम का रद-ए-अमल ज़ाहिर नही किया जो मेरे लिये हैरानगी का सबब था. 

कुछ देर सोच में डूबे रहने के बाद अम्मी ने कहा के तुम कब इतने बड़े हो गए मुझे अंदाज़ा ही नही हो सका. वैसे में कई हफ्तों से तुम्हारे अंदर एक तब्दीली सी महसूस कर रही थी और मुझे शक था के तुम्हारी नज़रें बदली हुई हैं. ये बात भी मेरे लिये हैरान-कुन थी के अम्मी को अंदाज़ा हो गया था के में उन्हे चोदने का ख्वाहिसमंद था. मैंने पूछा के उन्हे कैसे इस बात का पता चला. उन्होने जवाब दिया के औरत को मर्द की नज़र का फॉरन पता चल जाता है चाहे वो मर्द उस का बेटा ही क्यों ना हो. मैंने उन्हे अपनी गिरफ्त से आज़ाद किया और कहा - अब इन बातों को छोड़ें और मुझे ये बताएं के क्या आप मुझे भी एक मर्तबा देंगी? अम्मी अब काफ़ी हद तक संभल चुकी थीं. उन्होने कहा – शाकिर, तुम जो करना चाहते हो उस के बाद मेरा और तुम्हारा रिश्ता हमेशा के लिये बदल जाएगा. इसलिये अच्छी तरह सोच लो. 

मैंने जवाब दिया – अम्मी, राशिद को देने से आप का और उस का रिश्ता तो नही बदला. वो जब यहाँ आता था तो आप दोनो को देख कर कोई ये नही कह सकता था के आप का भांजा आप की चूत ले रहा है. फिर भला हमारा रिश्ता क्यों बदल जाएगा. मै आप की चूत ले कर भी हमेशा आप का बेटा रहूंगा. मेरे और आपके जिस्मानी रिश्ते के बारे में कभी किसी को पता नही चलेगा. सब कुछ वैसा ही रहेगा जैसा पहले था. उनके पास इस दलील का कोई जवाब नही था. 

वो कुछ देर सोचती रहीं फिर ठंडी साँस ले कर बोलीं – शाकिर, हम बहुत बड़ा गुनाह करने जा रहे हैं मगर लगता है मेरे पास तुम्हारी खाहिश को पूरा करने के अलावा कोई चारा नही है. मेरे दिल में फुलझडीयाँ छूटनें लगीं. मैंने अपना एक हाथ आगे कर के अम्मी का एक मोटा मम्मा पकड़ लिया. उन्होने सर मोड़ कर मेरी तरफ देखा और कहा के अभी तो मेरी जेहनी हालत बहुत खराब है किया तुम कल तक सबर नही कर सकते. मैंने कहा के कल छोटे भाई बहन यहाँ होंगे क्योंके स्कूल बंद हैं. अम्मी ने जवाब दिया के वे उन्हे दोबारा नाना के घर भेज देंगी वैसे भी वो वहाँ जाने की हमेशा ज़िद करते हैं. 

मैंने कहा - ठीक है. मगर अम्मी, ये तो बताएं के आख़िर आप राशिद को देने के लिये क्यों राज़ी हुईं? किया अब्बू आप की जिस्मानी ज़रूरियात पूरी नही करते? अम्मी मेरे सवालात सुन कर थोड़ी परेशां हो गईं. फिर कहने लगीं – शाकिर, ये बातें कोई माँ अपने बेटे से नही करती मगर में तुम्हे बता ही देती हूँ के सेक्स मर्दों की तरह औरतों की ज़रूरत भी होती है. पिछले कई सालों से तुम्हारे अब्बू ने मुझ में दिलचस्पी लेना बहुत कम कर दिया है. इसलिये मुझे राशिद के साथ ऐसा काम करना पड़ा जो मुझे नही करना चाहिये था. पहल उस की तरफ से हुई थी और मुझे उसी वक़्त उसे रोक देना चाहिये था. वो वाज़ेह तौर पर शर्मिंदा नज़र आ रही थीं और इस गुफ्तगू से दामन बचाना चाहती थीं. मैंने भी उन्हे मज़ीद परेशां करना मुनासिब नही समझा और चुप हो गया. अम्मी कुछ देर बाद उठ कर बेडरूम से बाहर चली गईं. मै बे-सबरी से अगले दिन का इंतज़ार करने लगा. 

में अम्मी के कहने पर उस वक़्त तो खामोश हो गया लेकिन अगले दिन तक सबर करना मुझे बड़ा मुश्किल लग रहा था. मै वक़्त ज़ाया किये बगैर फॉरी तौर पर अम्मी की चूत हासिल करना चाहता था. हर गुज़रते मिनिट के साथ मेरी ये खाहिश बढ़ती ही जा रही थी. शाम को मेरे भाई बहन घर वापस आ गए. मोक़ा मिला तो मैंने अलहदगी में अम्मी से कहा के अगर वो रात को मेरे कमरे में आ जाएं तो में वहाँ उनकी ले  लूंगा. मेरे कमरे मे किसी के भी आने का कोई इमकान नही है. 

अम्मी और मेरे दोनो छोटे बहन भाई एक कमरे में सोते थे जबके उनके बिल्कुल साथ वाला कमरा मेरा था. अबू घर की ऊपर वाली मंज़िल में एक अलहदा बेडरूम में सोया करते थे. रात के पिछले पहर सब के सो जाने के बाद अम्मी खामोशी से मेरे कमरे में आ सकती थीं और में उन्हे आराम से चोद सकता था. किसी को कानोकान खबर ना होती. मेरी बात सुन कर अम्मी कुछ सोचने लगीं और फिर बोलीं के ठीक है में तुम से बाद में बात करती हूँ. अबू क़रीबन 10 या 10 ½ बजे सो जाया करते थे क्योंके उन्हे अगली सुबह 8 बजे दफ़्तर पुहँचना होता था. उस रात भी वो 10 बजे के क़रीब अपने कमरे में चले गए. उनके जाने के बाद अम्मी ने आहिस्ता से मेरे कान में कहा के वो रात 12 बजे के बाद मेरे कमरे में आएँगी. दोनो बहन भाई भी कोई आध घंटे बाद सो गए और में अपने कमरे में चला आया. 

नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी. आज की रात मेरी ज़िंदगी की बड़ी ख़ास रात थी. मुझे आज रात अपनी अम्मी को चोदना था जो अगरचे मेरी सग़ी माँ थीं मगर एक बड़ी खूबसूरत और पुरकशिश औरत भी थीं. दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होंगे जिन्होने ज़िंदगी में सब से पहले जिस औरत को चोदा वो उनकी अपनी माँ थी. अपनी अम्मी की चूत लेने का ख़याल मेरे जज़्बात को बड़ी बुरी तरह भड़का रहा था. में मुसलसल सोच रहा था के जब मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर होगा तो किस तरह के घस्से मारना माकूल होगा ताकि उन्हें तकलीफ दिए बिना मैं उन्हें चोदने का लुत्फ़ उठा सकूं. आखिर कौन बेटा अपनी माँ को तकलीफ देना चाहेगा?

पता नही कितनी ही फिल्मों के मंज़र बड़ी तेज़ी से मेरे दिमाग में घूम रहे थे. यही सब कुछ सोचते हुए मेरा लंड अकड़ चुका था और मुझे अब ये खौफ लाहक़ हो गया था के कहीं अम्मी के आने और उनकी चूत लेने से पहले ही में खलास ना हो जाऊं. फिर तो सारा मज़ा किरकिरा हो जाता. मै बड़ी बे-सबरी से 12 बजने का इंतिज़ार करने लगा. ना जाने मैंने वो वक़्त किस तरह गुज़ारा. फिर मालूम नही कब मेरी आँख लग गई. 

कोई 12 ½ बजे अम्मी कमरे में दाखिल हुईं और दरवाज़े की चटखनी बंद करने लगीं तो उस की आवाज़ से में जाग गया. उन्होने दुपट्टा नही ओढ़ा हुआ था और उनके भरे हुए मम्मे अपनी पूरी उठान के साथ तने हुए नज़र आ रहे थे. वो सीधी आ कर मेरे बेड पर बैठ गईं. उनके चेहरे पर किसी क़िसम का कोई ता’असुर नही था. ना खुशी ना गम, ना गुस्सा ना प्यार. उस वक़्त वो बिल्कुल बदली हुई लग रही थीं. ऐसा लगता था जैसे वो अम्मी ना हूँ बल्के कोई और ही हों. पता नही ये उनका कौन सा रूप था. शायद चूत मरवाने से पहले वो हमेशा ऐसी हो जाती हों या शायद अपने बेटे को चूत देने की ख़याल से उनके अंदाज़ बदले हुए थे. मै कुछ कह नही सकता था. हम दोनो ही थोड़ी देर खामोश रहे. मुझे तो समझ ही नही आ रही थी के उन से किया बात करूँ. 

बिल-आख़िर मैंने हिम्मत कर के अम्मी का एक बाज़ू पकड़ कर उन्हे अपनी तरफ खैंचा. उन्होने मुझे रोका नही और उनका बदन मेरे ऊपर झुक गया. मैंने एक हाथ उनके गले में डाला और उनके होठों को चूमते हुए दूसरे हाथ से उनके मम्मों को मसलने लगा. अम्मी के मम्मे बड़े मांसल और वज़नी थे और ब्रा के अंदर होने के बावजूद मुझे उन्हे मसलते हुए ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उनके नंगे मम्मों को हाथों में पकड़ रखा हो. उनका ब्रा शायद ज़ियादा मोटे कपड़े से नही बना था. मैंने उनके मम्मों को ज़रा ज़ोर से दबाया तो उनके मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गई. उन्होने अपने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाया और मेरे कान के पास मुँह ला कर पूछा के क्या मैंने पहले कभी यह काम किया है? 

यही सवाल मुझ से नज़ीर ने भी किया था जब वो पिंडी में खाला अम्बरीन की चूत मार रहा था. मुझे अपनी ना-तजर्बेकारी पर बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई मगर मैंने बहरहाल नहीं में सर हिला दिया. अम्मी ने कहा के में उनके मम्मे आहिस्ता दबाऊं क्योंके ज़ोर से दबाने पर मज़ा नही आता. ये सुन कर मैंने दोबारा अम्मी के तने हुए भरपूर मम्मों की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन उन्होने फिर मुझे रोक दिया और कहा के हमें कमरे की लाईट बुझा देनी चाहिये. फिर वो खुद ही उठीं और लाईट ऑफ कर दी. कमरे में अब भी अम्मी के बेडरूम की तरफ खुलने वाले रोशनदान में से काफ़ी रोशनी आ रही थी और में अम्मी को बिल्कुल साफ़ तौर से देख सकता था. 

अम्मी वापस बेड के क़रीब आईं ओर खड़े खड़े ही अपनी क़मीज़ उतारने लगीं. क़मीज़ उनके मम्मों के ऊपर से होती हुई सर पर आई जिसे उतार कर उन्होने उसे एहतियात से बेड पर एक तरफ रख दिया. उनका गोरा बदन हल्की ज़र्द रोशनी में इंतहाई खूबसूरत लग रहा था. मोटे और उभरे हुए मम्मे सफ़ेद रंग के ब्रा में से काफ़ी हद तक नंगे नज़र आ रहे थे और यों लग रहा था जैसे दो सफ़ेद तोपों ने अपने दहाने मेरी तरफ कर रखे हूँ. अम्मी के मम्मे बड़े और भारी होने के साथ साथ काफ़ी चौड़े भी थे और ऐसा लगता था जैसे उनके दोनो मम्मों के दरमियाँ बिल्कुल कोई फासला नही था. उनके मज़बूत कंधे जिन पर ब्रा के स्ट्रॅप चढ़े हुए थे चौड़े और सेहतमंद थे. मैंने सोचा के किया अब्बू का दिमाग खराब है जो अम्मी जैसी खूबसूरत और दिलकश औरत को चोदना नही चाहते? ऐसा कौन मर्द होगा जिसे अम्मी जैसी औरत हासिल हो और वो उनकी चूत नही लेना चाहे? अम्मी चलती हुई मेरे बेड के पास आ गईं. अब उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उन्होने देख लिया था के में उनके बदन को ललचाई हुई नज़रों से देख रहा था. वो ब्रा और शलवार उतारे बगैर ही बेड पर चढ़ कर मेरे साथ लेट गईं. मै हज़ारों दफ़ा अपनी अम्मी के साथ एक ही बेड पर लेटा था मगर आज की रात मामला ज़रा मुख्तलीफ़ था. 

मैंने भी फॉरन अपने कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो कर अम्मी की तरफ करवट ली और उन से लिपट गया. जैसे ही मेरा नंगा बदन उन के अधनंगे बदन से टकराया मुझे लगा जैसे मेरे लंड में आग सी लग गई हो. अम्मी का बदन नर्म-ओ-मुलायम और हल्का सा गरम था. मेरा लंड फॉरन ही खड़ा होने लगा. अम्मी ने अपनी रानों के पास मेरे लंड का दबाव महसूस किया और मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में किसी क़िसम की ताश्वीश या शर्मिंदगी नही थी. 

उसी वक़्त मेरे ज़हन में एक बहुत ही परेशां-कुन ख़याल आया. मैंने फिल्मों में चुदाई का बहुत मुजाहिदा किया था और फिर नज़ीर को खाला अम्बरीन की फुद्दी लेते हुए देखा था. लेकिन आज तक मुझे किसी औरत को चोदने का इत्तेफ़ाक़ नही हुआ था. मेरे दिल में अचानक ये खौफ पैदा हुआ के कहीं ऐसा ना हो में अम्मी को अपनी ना-तजुबेकारी की वजह से ठीक तरह चोद ना पाऊँ. फिर क्या होगा? में इस एहसास-ए-कमतरी का भी शिकार था के राशिद चुदाई में मुझ से ज़ियादा तजुर्बेकार था. मैंने खुद अपनी आँखों से उसे अम्मी को चोदते हुए देखा था. उस ने यक़ीनन और भी कई दफ़ा अम्मी की बुंड मारी थी और मुझे ये भी एहसास था के राशिद उन्हे चोद कर ठंडा कर देता था क्योंके अगर ऐसा ना होता तो अम्मी बार-बार उसे अपनी बुंड क्यों मारने देतीं. आज अगर में अम्मी को चोदते हुए उन्हें राशिद जैसा मज़ा ना दे सका तो किया होगा? अम्मी ने मुझे बताया था के अब्बू उन्हे अब कभी कभार ही चोदा करते थे और मुझ से भी उन्हें मज़ा ना मिला तो वो अपना वादा तोड़ कर दोबारा राशिद से चुदवाना शुरू कर सकती थीं. ये बात मुझे हरगिज़ क़बूल नही थी. मुझे हर सूरत में एक तजर्बकार मर्द की तरह अम्मी की चूत की ज़रूरियात पूरी करनी थीं. 

अम्मी मेरे चेहरे से भाँप गईं के मुझे कोई परेशानी है. उन्होने पूछा – शाकिर, किया बात है?  किया सोच रहे हो? में कुछ सटपटा सा गया मगर फिर उन्हे बता ही दिया – अम्मी, आज मैं  पहली दफ़ा ये काम कर रहा हूं. में डर रहा हूँ के मै जल्दी निपट गया तो आपको तो मायूसी ही हासिल होगी. 

अम्मी ने हंस कर कहा - पहली दफ़ा सब मर्दों के साथ ऐसा ही होता है. तुम फिकर ना करो. मैं तुम्हारी मदद करूंगी. मै पूर-सकूँ हो गया और मेरी जेहनी उलझन बड़ी हद तक कम हो गई. मैंने अपने ज़हन में सर उठाते हुए खौफ से तवजो हटाने की कोशिश की और अम्मी का चेहरा अपनी तरफ फेर कर उनके गालों को ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा. उन्होने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपने मज़बूत बाज़ू मेरी कमर के गिर्द लपेट कर मुझे अपने ऊपर आने दिया. मैंने अपने दोनो बाज़ू उनकी गर्दन में डाले और उन से पूरी तरह चिपक कर उन्हे चूमने लगा. मैंने अम्मी के होठों, गालों, ठोड़ी और गर्दन को चूम चूम कर उनका पूरा चेहरा अपने थूकों से गीला कर दिया. वो इस चूमाचाटी का मज़ा ले रही थीं. फिर मैंने उनके मुँह के अंदर अपनी ज़बान डाली तो उन्होने मुझे अपनी ज़बान चूसने दी. मैंने उनकी ज़बान होठों में पकड़ी और उससे चूसने लगा. अम्मी के मुँह के अंदर मेरी और उनकी ज़बानें आपस में टकरतीं तो अजीब तरह का मज़ा महसूस होता. तजर्बा ना होने की वजह से अगर उनकी ज़बान चूसते चूसते मेरे होठों से निकल जाती तो वो फॉरन ही उससे दोबारा मेरे होठों में दे देतीं. मुझे अम्मी की ज़बान चूसने में गज़ब का लुत्फ़ आ रहा था. मेरा लंड अम्मी के नरम पेट से नीचे उनकी सलवार में घुसा हुआ था. 

अम्मी के चेहरे के ता’असूरात से पता चल रहा था के उन्हे भी ये सब मज़ा दे रहा है. ये देख कर मुझे बड़ी खुशी हुई और मेरी हिम्मत बढ़ गई. कम-अज़-कम अब तक तो में ठीक ही जा रहा था. मै अम्मी से बुरी तरह चिपटा हुआ उन्हे चूम रहा था और वो भी मेरी ताबड़तोड़ चुम्मियों का जवाब दे रहीं थीं. हमारी साँस चढ़ गई थी और अम्मी अब वाज़ेह तौर पर गरम होने लगी थीं. उनका बदन जैसे हल्के बुखार की कैफियत में था. अपनी माँ को चोदने का ख्याल  मुझे पागल किये दे रहा था. मेरे ज़हन से अब जल्दी खलास होने का डर भी बिल्कुल निकल चुका था. मैंने सोचा के फिल्मों से सीखी हुई चीजें कामयाबी से कर के अम्मी को इंप्रेस करने का यही वक़्त है. 

में अम्मी के ऊपर से उठ गया और उन्हे करवट दिला कर साइड पर कर दिया. फिर मैंने कमर पर से उनका ब्रा खोला और उससे उनके बदन से जुदा कर दिया. इस पर अम्मी ने खुद ही अपनी सलवार उतार कर टाँगों से अलग कर दी. मैं पहली बार उन्हें मुकम्मल नंगी हालत में देख रहा था. मैंने उन्हे सीधा करने के लिये आगे हाथ ले जा कर उनके मोटे मोटे नंगे मम्मों को हाथों में दबोच लिया और उन्हे अपनी जानिब खैंचा. उन्होने अपने खूबसूरत और दिलनशीं  जिस्म को संभालते हुए मेरी तरफ करवट ले ली. मै एक अरसे से छुप छुप कर अम्मी के मम्मों का नज़ारा किया करता था. आज क़िस्मत से ये मोक़ा भी मिल गया था के में उनके नंगे मम्मों को चूस सकूँ. मैंने उनके दूधिया मम्मों को पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया. मेरी नज़र में चूंचियां औरत के बदन का सब से शानदार हिस्सा होते हैं और मेरी अम्मी की चूंचियों की तो बात ही कुछ और थी. मैंने अम्मी के दोनो मम्मों को बारी बारी इस बुरी तरह चूसा और चाटा के उनका रंग लाल हो गया और वो मेरे थूकों से भर गए. अम्मी के निपल्स को मैंने इतना चूसा था के वो अकड़ कर बिल्कुल सीधे खड़े हो गए थे. 

में उनकी ये बात बिल्कुल भूल चुका था के चूंचियों के साथ नर्मी और एहतियात से पेश आना चाहिये. कई दफ़ा जब मैंने उनके मम्मे ज़ोर से चूसे या दबाए तो वो बे-साख्ता कराह उठीं लेकिन उन्होने मुझे रोका नही. अपने मम्मे चुसवाने के दोरान अम्मी काफ़ी मचल रही थीं और मुसलसल अपना सर इधर उधर घुमा रही थीं. जब में उनके मम्मों के निप्पल मुँह में ले कर उन पर ज़बान फेरता तो वो बे-क़ाबू होने लगतीं और मुझे उनके जिस्मानी रद्द-ए-अमल से महसूस होता जैसे वो अपने पूरे मम्मे मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हैं. उनके मम्मों के मोटे, गोल और काफ़ी लंबे निप्पल थे भी बे-इंतिहा खूबसूरत. पता नही औरत के निपल्स में ऐसी किया बात है के उन्हे चूसने में ऐसा ज़बरदस्त मज़ा आता है? मेरे लंड की भी बुरी हालत थी. मैंने अम्मी का हाथ अपने अकड़े हुए लंड पर रखा जिससे उन्होने पकड़ लिया और बड़ी नर्मी से उस पर ऊपर नीचे हाथ फेरने लगीं. जब उन्होने मेरा लंड अपने हाथ में लिया तो मुझे अपने आंडों में अजीब क़िसम का खिचाओ महसूस होने लगा. 

बहुत देर तक अम्मी की चूंचियों को चूसने के बाद में उनकी टाँगों की तरफ आया और उन्हे घुटनो से पकड़ कर फैला दिया. अब मैं पहली मर्तबा उस दिलकश चूत का नज़ारा देख रहा था जिसने मुझे जनम दिया था. अम्मी की चूत पर हल्के हल्के लेकिन एकदम काले बाल थे और फूली होने के बावजूद उनकी चूत सख्ती से बंद नज़र आ रही थी. मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरा तो उन्होने शायद गैर-इरादि तौर पर उन्होंने अपनी टांगें बंद करने की कोशिश की मगर में अपने सर को नीचे कर के उनकी टाँगों के बीच में ले आया और मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर रख दिया. यहाँ भी फिल्म्स ही मेरे काम आईं. मैंने अम्मी की चूत पर ज़बान फेरी और उससे ज़ोरदार तरीक़े से चाटने लगा. मेरे लिए चूत चाटने का यह पहला मौका था मगर जल्द ही में जान गया के मुझे किया करना है. अम्मी की टांगें अकड़ गई थीं और उनका एक हाथ मुसलसल मुझे अपने सर को सहलाता हुआ महसूस हो रहा था. उनके मुँह से वक़फे वक़फे से सिसकने की आवाज़ आ रही थी. मैंने अपनी ज़बान उनकी चूत पर फेरते फेरते नीचे की तरफ से उनके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो मुझे अचानक उनकी गांड़ का सुराख मिल गया. जब मैंने उसे अपनी जीभ की जद में लिया तो शायद अम्मी को बहुत मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया. उसका नमकीन ज़ायक़ा अपनी ज़बान पर महसूस कर के मुझे फख्र हुआ कि मैं अम्मी को फारिग करने में कामयाब हो गया था. 
क्रमशः
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02-23-2014, 03:38 PM
Post: #4
RE: चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
फिर में बेड पर लेट गया और अम्मी से कहा के अब वो मेरा लंड चूसें. मैंने उन्हें राशिद का लंड चूसते हुए देखा था और नज़ीर ने भी खाला अम्बरीन के साथ ऐसा ही किया था. अम्मी मेरी बात सुन कर थोड़ा झिझकीं. शायद अपने बेटे का लंड मुंह में लेने में उन्हें शर्म महसूस हो रही थी. मगर फिर वो घुटनो के बल बैठ गईं और मेरे ऊपर झुक कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया. मेरे लंड का सुपाडा अम्मी के मुँह के अंदर चला गया और वो उस पर अपनी ज़बान फेरने लगीं. अम्मी ने राशिद का लंड काफ़ी जल्दी में चूसा था मगर मेरे लंड को वो बड़ी तसल्ली और महारत से चूस रही थीं . 

उन्होने पहले तो सुपाडे पर अच्छी तरह अपनी ज़बान फेर कर उससे गीला कर दिया और फिर लंड के निचले हिस्से को चाटने लगीं. फिर इसी तरह मेरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर उनकी ज़बान गर्दिश करती रही. लंड चूसते चूसते अम्मी की ज़बान बहुत गीली हो चुकी थी और जब वो मेरे लंड को अपने मुँह के अंदर करतीं तो ऐसे लगता जैसे मेरा लंड जन्नत के अंदर हो. यकायक् अम्मी ने बड़ी तेज़ी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. उनके होंठों और जीभ की हरकत से मेरे लंड में तेज़ सनसनाहट होने लगी और मेरे आंड सिकुडने लगे. मुझे लगा कि में खलास होने वाला हूं. मैंने अम्मी को रोकना चाहा मगर उन्होने नही सुना. फिर मैंने देखा के उन्होने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रखा हुआ था और वे अपनी बड़ी उंगली तेज़ी से चूत के अंदर अंदर बाहर कर रही थीं . में समझ गया के वो भी खलास होना चाहती हैं. अम्मी को अपनी चूत में उंगली करते देख कर मेरा सबर टूट गया और मेरे लंड से झटकों के साथ उनके मुँह में मेरा पानी निकलने लगा. अम्मी ने मेरे लंड को मुकम्मल खाली कर के ही अपने मुँह से बाहर निकाला और तब तक वो भी तेज़ साँसें लेतीं हुई खलास हो गईं थीं. 

हम दोनो नंगे ही एक-दूसरे की बांहों में लेटे रहे. मैंने इस से पहले अपनी मुट्ठी में ही अपना पानी निकाला था. आज पहली बार एक औरत के मुंह में झड कर मैं बेइंतेहा खुश था. साथ ही मुझे इस बात की भी तसल्ली थी कि अम्मी भी दो बार झड चुकी थीं. लेकिन मेरा लंड अभी चूत की गिरफ्त से नावाकिफ था. अम्मी के ओसान बहाल हुए तो मैंने कहा – अम्मी, आपने तो कमाल कर दिया. मुझे मज़ा तो बहुत आया मगर मैं आपकी तो चूत ले ही नही सका और यों ही निपट गया. उन्होने हंस कर जवाब दिया - अभी तो एक ही बजा है. तुम थोडा आराम कर के अपनी ताक़त फिर से हासिल कर लो. फिर तुम अपनी बाकी मुराद भी पूरी कर लेना. मैंने सोचा के अब मुझे नींद तो आने से रही. लेकिन ऐसा नही हुआ. अम्मी मेरे सर पर हाथ फेरने लगीं तो मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब नींद की आगोश में चला गया. अम्मी शायद अपने तजुर्बे से जानती थीं कि झड़ने के बाद अमूमन मर्दों को नींद आ जाती है. 

कोई एक घंटे के बाद मेरी नींद तब खुली जब मैंने अपने लंड पर एक निहायत पुरलुत्फ जकडन महसूस की. मैंने आँखें खोली तो पाया कि मेरा तना हुआ लंड अम्मी के मुंह में था. अम्मी ने मुस्कराते हुए कहा – शायद तुम कोई खुशनुमा ख्वाब देख रहे थे. तभी ये नींद में ही खड़ा हो गया. में अम्मी को लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया और उनके बदन को चूमने चाटने लगा. मेरा लंड बेचैन हो चुका था और मैं अपनी अम्मी के पुरकशिश और गदराये हुए जिस्म से पूरी तरह लुत्फ़-अंदोज़ होना चाहता था. मै उनके ऊपर लेट कर उनका एक मम्मा पकडे हुए उनकी गर्दन के बोसे ले रहा था के अचानक अम्मी ने अपनी टांगें पूरी तरह खोल दीं. मेरा तना हुआ लंड उनकी चूत के मुहाने से टकराया तो में बे-खुद सा हो गया. मैं अपना एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी फुद्दी को मसलने लगा. अम्मी की फुद्दी पूरी तरह गीली हो चुकी थी. वो भी मेरी तरह गरम हो चुकी थीं. अब अपनी माँ की चूत में लंड घुसाने का वक़्त आन पुहँचा था. मैंने अपना लंड अम्मी की चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की मगर मुझे कामयाबी नहीं मिली. अम्मी मेरी नातजुर्बेकारी को समझ गयीं. मेरी मदद करने की खातिर उन्होने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर ठीक से जमाया. फिर उनकी कमर उठी और मेरा लंड अम्मी की चूत को फैलाता हुआ उसके अंदर समाने लगा. उन्होने हल्की सी सिसकी ली और अपने दोनो हाथ मेरे बाजुओं पर रख कर अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर-नीचे किया ताके मेरा लंड अच्छी तरह उनकी चूत में अपनी जगह बना ले. लंड अंदर जाते ही मैंने बे-साख्ता घस्से मारने के लिये अपने जिस्म को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया. ये बिल्कुल क़ुदरती तौर पर हुआ था. अम्मी ने मेरे चूतडों को कस के पकड़ा और बोलीं – रुको बेटा, इतनी जल्दी नहीं! मैं उतावला हो रहा था. मैंने इल्तिजा भरी नज़रों से अम्मी की तरफ देखा. मेरी आँखें कह रही थीं - क्यों रोक रही हैं, अम्मी? अब चोदने दीजिए ना! उन्होंने कहा – तुम जल्दबाज़ी करोगे तो पूरा मज़ा नहीं ले सकोगे! जैसा मैं कहती हूं वैसा करो. मैंने बमुश्किल अपने धक्कों को रोका. अम्मी ने मेरे चेहरे को अपनी जानिब खींचा और मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिए. उनके बोसे का मज़ा लेने के साथ-साथ मैंने अपने लंड के र्गिर्द अम्मी की चूत की गिरफ्त को महसूस किया. चूत अंदर से नरम और गीली थी मगर काफ़ी चुस्त भी थी. मैं पहली बार अपने लंड पर चूत की कसावट महसूस कर रहा था और यह एहसास नाकाबिले-बयां था.

कुछ देर बाद अम्मी अपने चूतड़ हौले-हौले उठा कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगीं. उन्होंने मुझे आँखों से इशारा किया कि मैं भी धक्के मारूं. मैंने उनकी ताल से ताल मिला कर हलके-हलके धक्के लगाने लगा. कुछ घस्सों के बाद मेरा लंड आसानी से अम्मी की चूत के अंदर बाहर होने लगा तो अम्मी ने अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी. अब हम दोनों एक दूसरे के घस्सों का जवाब पुरजोर घस्सों से दे रहे थे. मुझे खाला अम्बरीन याद आई. वो भी इसी तरह अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर नज़ीर से चुदी थीं. अम्मी कुछ देर तो चुप-चाप चुदती रहीं लेकिन जब मेरे लंड के झटके तेज़ हो गए तो वे दबी आवाज़ में उंह……. आह….. ओह... करने लगीं. 

अम्मी को चोदते हुए में मज़े के एक गहरे समंदर में गोते खा रहा था. उनके मुँह से निकलने वाली सिस्कारियों से मुझे लगा कि उन्हें भी इस काम में मज़ा आने लगा था. इन आवाज़ों ने मेरे जेहन को बड़ा सकूँ बख्शा और मेरे एहतमाद में इज़ाफ़ा हुआ कि मैं अम्मी को चुदाई का  मज़ा देने की सलाहियत रखता हूं. कुछ देर के बाद अम्मी की साँसें तेज़ हो गईं. उन्होने नीचे लेटे लेटे अपनी कमर को गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया और मेरा सर नीचे कर के मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये और खूब कस कर मुझे चूमने लगीं. उनकी चूत में बला की कसावट आ गयी थी. 

मेरे नीचे उनके चूतड़ों की हरकत और तेज़ हो गई. मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे अम्मी की चूत ने मेरे लंड को सख्ती से अपनी गिरफ्त में जकड लिया हो. उनकी चूत का टाइट होना इस बात की निशानी थी के अम्मी अब झड़ने के कगार पर थीं और. मुझे ये जान कर बहुत खुशी हुई कि मै अपनी पहली ही चुदाई में अम्मी को खलास करने वाला था. मैंने पूरा दम लगा कर उनकी चूत में घस्से मारने लगा. अम्मी की चूत अब लगातार पानी छोड़ रही थी और उनका बदन बुरी तरह लहरा रहा था. इन हालात में मेरे लिये अपने आप को रोकना मुश्किल हो रहा था पर किसी तरह मैंने अपना लंड अम्मी चूत से बाहर निकाला और उनकी बगल में लेट गया. 

अम्मी का जिस्म चंद लम्हे ऐसे ही लरजता रहा. फिर उन्होने अपनी साँसें क़ाबू में करते हुए मुझ से पूछा के क्या हुआ. मैंने कहा - मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं. मैं आपको और मजा देना चाहता हूं. इसीलिये मैंने लंड बाहर निकाल लिया. वो एक बार फिर हंस कर बोलीं – बेटे, तुम एक घंटे पहले ही खलास हुए हो. मर्द एक दफ़ा झड़ने के बाद दूसरी बार इतनी जल्दी नही झडता. वैसे भी तुम मुझे उम्मीद से पेश्तर मज़ा दे चुके हो. अब तुम्हारी बारी है. आ जाओ, अब मैं तुम्हे खलास करूंगी ताके तुम भी इस काम का पूरा मज़ा तो ले सको. 
मुझे खयाल आया कि राशिद ने अम्मी को कैसे चोदा था तो मैंने कहा – अम्मी, क्या मैं आपको पीछे से चोद सकता हूँ? वो बोलीं – तुम्हे मुझ से इजाज़त माँगने की जरूरत नहीं है. तुम जो चाहो और जैसे चाहो करो. वो उठीं और अपनी कुहनियों और घुटनों के बल झुक गयीं. अम्मी के उभरे हुए चूतड़ों के बीच उनकी गांड से ज़रा नीचे मुझे उनकी चूत नज़र आई. मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रख कर उसे आगे धकेला. अम्मी ने भी अपने चूतड़ों को थोड़ा सा पीछे किया और लंड चूत के अंदर धंसने लगा. चूत चिकनाई से सराबोर थी इसलिये मेरे लंड को उस के अंदर दाखिल होतने में कोई मुश्किल पेश नहीं आई. मैंने अम्मी के चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़ लिया और उनकी चूत में घस्से मारने लगा. 

मुझे अपना लंड अम्मी के गोरे चूतड़ों में से गुज़र कर उनकी चूत में अंदर बाहर होता नज़र आ रहा था. मैं उनकी चूत में घस्से पे घस्सा लगा रहा था और वो अपनी कमर को आगे पीछे कर के मेरा साथ दे रही थीं. मुसलसल घस्सों की वजह से उनके चूतड़ लरज़ रहे थे. फिर मुझे अपने लंड पर एक लज्ज़त-आमीज़ दबाव महसूस होने लगा. मैंने बे-अख्तियार अपने घस्सों की रफ़्तार बढ़ा दी. अम्मी को शायद इल्म हो गया कि मैं अब खलास होने वाला हूँ. उन्होने अपनी चूत को मेरे लंड पर भींचना शुरू कर दिया. ताबडतोड धक्कों के बीच मेरे लंड से पानी की बौछार शुरू हो गयी. मेरी रग रग में एक अजीब-ओ-ग़रीब और मदहोश कर देने वाली लज्ज़त का तूफान उठ रहा था. ठीक उसी वक़्त अम्मी की चूत ने एक दफ़ा फिर मेरे लंड को अपने शिकंजा में कसा और अम्मी भी मेरे साथ फिर झड गईं. मैं अम्मी को बांहों में भींच कर उनके ऊपर पसर गया. तूफ़ान के गुजरने के बाद अम्मी ने उठ कर अपने कपड़े पहने. मै अभी खुशी और बेखबरी के आलम में नंगा ही लेटा हुआ था. अम्मी ने मेरा गाल चूमा और अपने कमरे में चली गयीं. 
 
अम्मी ने मेरी मुराद पूरी कर दी थी पर मुझे अपनी पहली चुदाई में इतना मज़ा आया था कि मेरा मन उन्हें फिर से चोदने के लिए मचल रहा था. पर क्या हो सकता था? बात तो एक बार चोदने की ही हुई थी. अगली रात मैं बेकरारी में करवटें बदलते-बदलते सो गया. सपने में मैं अपने लंड को सहला रहा था और उम्मीद कर रहा था कि खुदा शायद मुझ पर मेहरबान हो जाए और अम्मी को मेरे पास भेज दे. मैंने अपने लंड को मुट्ठी में ले कर दबाया तभी मेरी नींद टूट गयी. ... ये क्या? अम्मी मेरे पास लेटी थीं और मेरा लंड उनकी मुट्ठी में था. उन्होंने मुस्कुरा कर पूछा – तुम कोई सपना देख रहे थे? मैंने शरमा कर कहा – मैं तो सपने में आपके आने का इंतज़ार कर रहा था. मुझे गुमान ही नहीं था कि आप हकीकत में आ जायेंगी. अम्मी ने प्यार से कहा – अब आ गयी हूं तो जो तुम सपने में करना चाहते थे वो हकीकत में कर लो. यह सुन कर मेरा मन बल्लियों उछलने लगा. मैंने अम्मी को अपनी बांहों में भींच लिया. फिर तो पिछली रात वाला सिलसिला फिर से शुरू हो गया और मैंने जी भर कर अम्मी को चोदा. अगली रात को भी यही हुआ और तीसरी रात को भी. 
तीसरी रात उन्हें चोदने के बाद मैंने कहा – अम्मी, मैंने आप से महज़ एक बार चूत देने की गुजारिश की थी. अगर आपको तकलीफ होती हो तो अब आपको यह करने की जरूरत नहीं है. 
उन्होने संजीदा होते हुए कहा – शाकिर, मैंने राशिद को अपने साथ जो करने दिया  उस पर अब मुझे मलाल हो रहा है. 
मैंने कहा – अम्मी, जो हुआ उसे अब भूल जाइए. 
उन्होंने कहा – मैं ये कैसे भूल सकती हूं कि मेरे बेटे से ज्यादा मर्तबा उसने मेरा लुत्फ़ उठाया है. ये मेरे सीने पर क़र्ज़ के बोझ की मानिंद भारी लग रहा है और मैं इसे सूद के साथ उतारना चाहती हूं. 
मैंने उन्हें गले लगा कर कहा – अम्मी, आप पर कोई क़र्ज़ नहीं है. क़र्ज़ तो उस राशिद पर है जिसने आपकी चूत न जाने कितनी बार ली है. और ये क़र्ज़ तब उतरेगा जब मैं उसकी माँ की चूत लूँगा. 
अम्मी – यह तो मैंने सोचा ही नहीं. ... तुम ठीक कहते हो पर अम्बरीन को तो कुछ मालूम ही नहीं है. वो क्यों इसके लिए रज़ामंद होगी? और तुम क्या वाकई अपनी खाला की चूत लेना चाहते हो?

उनकी बात सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई. एक तो इसलिए कि उन्होने मेरी पेशकश पर कोई ऐतराज़ नहीं जताया था और दूसरे इसलिए कि उन्होंने पहली बार मेरे सामने चूत जैसा लफ्ज़ बोला था. मैंने अब उन्हें हकीकत से वाकिफ करवाना मुनासिब समझा और उन्हें होटल वाला वाकिया बता दिया. उसे सुन कर पहले तो उन्होंने मेरी मजम्मत की कि मेरी बेवकूफी की वजह से एक टुच्चा इंसान अम्बरीन खाला की इज्ज़त लूट कर चला गया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक खातून को धोखे से शराब पिला कर उसकी चूत हासिल करना कोई बहादुरी का काम नहीं है. मैंने उनकी बात से इत्तेफाक जाहिर किया और उन्हें बताया कि मैं खाला से माफ़ी मांग चुका हूं. लेकिन मसला यह था कि अम्बरीन खाला को अपनी मर्ज़ी से अपनी चूत मुझे पेश करने के लिए कैसे राज़ी किया जाए. अम्मी की राय थी कि होटल वाले वाकिये का इस मामले में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. 
मैंने कहा – फिर तो एक ही सूरत बचती है. अगर उन्हें बताया जाए कि राशिद ने आपके साथ क्या किया है तो शायद वो मान जाएँ.
अम्मी – ये जरूरी नहीं है. हो सकता है कि वो नाराज़ हो कर राशिद को ही घर से निकाल दें या अपने शौहर से उसकी शिकायत कर दें.
मैं – अम्मी, ये खतरा तो मोल लेना ही पड़ेगा लेकिन उसी सूरत में जब आपको कोई ऐतराज़ न हो.
अम्मी – ठीक है, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है. तुम कोशिश कर के देखो. अगर अम्बरीन एक बार मान गई तो वो बार-बार तुम्हे अपनी चूत देना चाहेगी.
मैंने हैरत से कहा – यह आप कैसे कह सकती हैं?
अम्मी – बेटा, वो इसलिए कि तुम अब इस काम में माहिर हो चुके हो और माशाअल्लाह, तुम्हारा हथियार भी बहुत तगड़ा है.

यह सुन कर तो फख्र से मेरा सीना तन गया, और सीना ही नहीं मेरा हथियार भी. मुझे अफ़सोस था कि अम्मी ने अभी तक उसे लंड नहीं कहा था. खैर, वो उसे कुछ भी कहें पर जब उन्होंने अपनी रानों पर उसका का तनाव महसूस किया तो उन्होंने खुद ही अपनी चूत फिर से देने की पेशकश कर दी. हमारा खेल फिर शुरू हो गया और काफी लंबा चला. उनकी चूत का लुत्फ़ लेते हुए मैं यही सोचता रहा कि अम्बरीन खाला की चूत तक कैसे पहुंचा जाए. 

अगले दिन मै खाला के घर गया. होटल वाले हादसे के बाद मैं पहली बार उनसे रूबरू हुआ था और एक बार फिर मैंने उनसे माफ़ी मांगी. उन्होंने कहा कि जो हुआ वो बिलकुल गलत था पर इसका किसी को पता ना चले तो उनकी इज्ज़त महफूज़ रहेगी. मैंने उन्हें यकीन दिलाया कि मेरी तरफ से वो बेफिक्र रहें. मैं उनकी इज्ज़त पर आंच नहीं आने दूंगा, ... पर मेरी अम्मी की इज्ज़त का क्या होगा? 
वो चौंक कर बोलीं – क्या कह रहे हो तुम? आपा को क्या हुआ? 
मैंने शर्म से सर झुका कर उन्हें हिचकते-हिचकते बताया कि उनके बेटे ने मेरी अम्मी के साथ क्या किया था. सुन कर उन्हें यकीन नहीं हुआ. 
उन्होंने हैरत से कहा – राशिद ऐसा कैसे कर सकता है? और वो भी अपनी खाला के साथ! तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो? 
यह इलज़ाम सुन कर तो मैं गुस्से से तमतमा गया. एक तो मेरी माँ चुद गई और ऊपर से ये मुझ पर झूठ बोलने की तोहमत लगा रही हैं. गुस्से में मैंने अपना मोबाईल निकाला और उन्हें कहा – आपको लगता है मैं झूठ बोल रहा हूं तो ये देखिये. 
तस्वीरें देख कर वो चौंक गयीं. उनके चेहरे का मंज़र हैरानी से गुस्से, और गुस्से से परेशानी में तब्दील हो गया. वे माथा पकड़ कर बोलीं – हाय अल्लाह! ये क्या कर दिया राशिद ने! 
मैं चुप रहा. वे फिर बोलीं – तुमने आपा को तो नहीं बताया ना कि तुम यह जान चुके हो? 
मैंने उन्हें जवाब दिया - ये देख कर मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं राशिद की गर्दन नापने वाला था. किसी तरह मैंने अपने गुस्से पर काबू किया पर मैं यह राज़ अम्मी के सामने जाहिर करने से अपने आपको नहीं रोक पाया. मैंने उन्हें यह भी जता दिया कि अब राशिद ज्यादा रोज़ महफूज़ नहीं रहेगा. 
यह सुन कर खाला घबरा गयीं. वे परेशां-हाल हो कर बोलीं – इस से तुम्हे क्या हासिल होगा, शाकिर. जो होना था वो तो हो चुका. और सोचो, मैं तुम्हारी खाला हूं फिर भी होटल में तुमने मेरे साथ वही करने की कोशिश की थी जो राशिद ने अपनी खाला के साथ किया है.
मैं – खालाजान, मैंने तो सिर्फ कोशिश की थी. राशिद ने तो मेरी अम्मी की चूत हासिल भी कर ली. और होटल में वो दो कौड़ी का नजीर आपकी इज्ज़त का मज़ा ले गया पर मुझे क्या मिला?
खाला – तो तुम क्या चाहते हो?
मैं – वही जो राशिद ने मेरी अम्मी के साथ किया है. अगर आप वो मुझ से करवा लें तो मसला हल हो जाएगा.
खाला – यह क्या कह रहे हो तुम? राशिद ने जो किया वो गलत था. अगर तुम भी वही गलत काम करोगे तो मसला हल कैसे हो जाएगा? और कहीं आपा को पता चल गया तो वो क्या सोचेंगी?
मैं – आपकी पहली बात का जवाब यह है कि जब राशिद का और मेरा हिसाब बराबर हो जाएगा तो कोई मसला रहेगा ही नहीं. और रही दूसरी बात तो मैं हिसाब बराबर करने की बात अम्मी को बता चुका हूं और वे मेरी तजबीज से इत्तेफ़ाक रखती हैं.
खाला – या खुदा, ... क्या करूं मैं? मेरे एक तरफ कुआ है और दूसरी तरफ खाई.
मैंने सोचा कि लोहा गरम है. हथौड़ा मारने का यही मौका है. मैंने कहा – खालाजान, जब नजीर जैसा गलीज़ इंसान ये काम कर गया तो क्या मैं उस से भी बुरा हूं? और मेरे हाथों में आपकी इज्ज़त भी महफूज़ रहेगी क्योंकि मैं तो ये बात किसी को बताने से रहा.
खाला अपने ख्यालों में खो गयीं. उनकी कशमकश वाजिब थी. भानजे को अपनी चूत पेश करने का फैसला आसान नहीं था. पर वे ये भी सोच रही होंगी कि उनकी बड़ी बहन को भी ये करना पड़ा था (वो सोच रही होंगी, किसी मजबूरी में). और वे मान जाती हैं तो इस फैसले से उनकी बड़ी बहन भी रज़ामंद होंगी. इज्ज़त जाने का भी डर नहीं था. मैं बेचैनी से उनके जवाब का इंतज़ार कर रहा. अब सारा दारोमदार उनके फैसले पर था. इंतज़ार लंबा होता जा रहा था. 
... आखिर उन्होंने जवाब दिया – अगर आपा भी यही चाहती हैं तो मुझे भी ऐतराज़ नहीं है.
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मैंने कहा – आप चाहें तो अम्मी से पूछ सकती हैं.
खाला – उन्हें तो पूछूंगी ही.

अब काम बनने में कोई अड़चन नहीं थी क्योंकि अम्मी तो इंकार करने से रहीं. लेकिन काम आधा ही हुआ था. अम्बरीन खाला की चूत तो अब मेरी पहुंच में थी लेकिन अगर राशिद ने अपनी अम्मी को मुझ से चुदते नहीं देखा तो हिसाब बराबर नहीं होगा. अनजाने में ही सही मगर उसने मेरी अम्मी को मेरी आँखों के सामने चोदा था. मैं भी उसकी अम्मी को उसके सामने चोदना चाहता था. अब मुझे राशिद का इंतजाम करना था. थोड़ी देर में मैंने उसे ढूंढ लिया. इधर-उधर की बात ना करके मैंने सीधे उस से पूछा - तुमने कितनी बार ली है मेरी अम्मी की?
वो चौंक कर बोला – खाला की...? क्या...? ये क्या कह रहे तो तुम?
मैं – क्या का क्या मतलब? तुमने उनकी चूत के अलावा कुछ और भी ली है?
राशिद सकपका कर बोला – ये क्या बक रहे हो तुम, शाकिर भाई? तुम्हे जरूर कोई गलत फहमी हुई है.
मैंने उसे मोबाईल वाला वीडियो दिखाते हुए पूछा – अच्छा, तो ये क्या है?
वीडियो देखते ही उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. वो सर झुका कर बोला – शाकिर भाई, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है. मुझे ये नहीं करना चाहिए था पर मैं बहकावे में आ गया.
मैंने उसके गाल पर एक थप्पड़ रसीद किया और कहा – अच्छा, तो मेरी अम्मी ने तुम्हारे जैसे भोले-भाले बच्चे को बहका दिया था?
राशिद – मुझे माफ कर दो, भाई. मैं अब ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा, ... अम्मी की कसम.
मैं – मेरी मां तो चुद गई और तेरी मां सिर्फ कसम से बच जायेगी?
राशिद – क्या मतलब? तुम बताओ मैं क्या करूं?
मैं – मतलब यह है कि चूत के बदले चूत. तूने मेरी अम्मी की ली है, अब मुझे अपनी अम्मी की दिला.
राशिद – मैं ये कैसे कर सकता हूं?
मैं – कैसे का क्या मतलब? तू अपनी अम्मी को तैयार कर.
राशिद तकरीबन रोता हुआ बोला – भाई, मैं अपनी अम्मी से ऐसी बात कैसे कर सकता हूं? हां, तुम उन्हें तैयार कर लो तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है.
मैं – ठीक है, उन्हें मैं तैयार कर लूंगा. पर तुम वही करोगे जो मैं कहूँगा.

खाला तो पहले ही मान चुकी थीं. मुझे सिर्फ राशिद के सामने ड्रामा करना था सो मैंने अगले दिन उसे फिर पकड़ा और बताया कि बहुत तिकडम भिडाने के बाद आखिर खाला ने मंजूरी दे दी है. मैंने सोचा था कि यह सुन कर राशिद को दुःख होगा मगर उसके के हाव-भाव से ऐसे लगा जैसे उसके ऊपर से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो. वह बोला – शाकिर भाई, अब तो आप मेरे से नाराज़ नहीं हैं?
मैं – हां, खाला के कारण तुम बच गए. मगर तुम्हे याद है ना कि तुम वही करोगे जो मैं कहूँगा.
राशिद – भाई, आपका काम तो हो गया. अब मुझे क्या करना है?
मैं – काम हुआ नहीं है, होने वाला है और वो भी आधा. पूरा काम तब होगा जब तुम अपनी अम्मी को मेरे से चुदते हुए देखोगे.
राशिद – लेकिन इसकी क्या जरूरत है? 
मैं – जरूरत क्यों नहीं है? जब मैंने अपनी अम्मी को चुदते हुए देखा है तुम्हे भी अपनी अम्मी को चुदते हुए देखना पड़ेगा.
राशिद – पर अम्मी इसके लिए तैयार हैं क्या?
मैं - नहीं हैं तो हो जायेंगी. पर तुम तो तैयार हो ना?
राशिद थोड़ी कशमकश में दिखा. पता नहीं उसे अपनी अम्मी के चुदने का गम था या उनकी चुदाई देखने का. आखिर वो बोला – शाकिर भाई, मैं आप की बात मानने के लिए तैयार हूं पर आप बुरा ना माने तो मैं एक तजबीज आपके सामने रखूँ?
मैं – ठीक है, बताओ.
राशिद – मैंने यास्मीन खाला की सिर्फ चार बार ली है. मेरी अम्मी की चार बार लेने के बाद आपका हिसाब बराबर हो जाएगा और फिर आप उनकी नहीं ले पायेंगे. जहाँ तक मुझे गुमान है अब्बू आजकल उनकी कभी-कभार ही लेते हैं. अगर आप थोडा मेरा खयाल रखें तो आप आगे भी उनकी लेते रहेंगे.

उसका मतलब मेरे समझ में नहीं आया. मैं अपनी अम्मी की ले रहा था. तो क्या वो भी अपनी अम्मी को चोदने का ख्वाहिशमंद है?

मैं – ऐसा हो जाए तो बहुत बढ़िया होगा पर मैं कैसे तुम्हारा खयाल रखूँ?
राशिद – शाकिर भाई, पता नहीं क्या वजह है कि आजकल खाला मुझे नहीं देती हैं. मैं कोई दूसरा इंतजाम भी नहीं कर पाया हूं. जब आपका बदला पूरा हो जायेगा तो क्या आप मुझे यास्मीन खाला की दिला सकते हैं? इस तरह हम दोनों का इंतजाम हो जाएगा और हमारी अम्मियों की जरूरियात भी पूरी होती रहेंगी. लेकिन आपको अम्मी की चूत पसंद न आये तो यह सब करने की जरूरत नहीं है. 

यह तजबीज मुझे निहायत रद्द-ए-अमल लगी. मैं तो सोच रहा था कि बदला मुकम्मल होने के बाद मैं खाला की चूत से महरूम हो जाऊँगा और मुझे सिर्फ अम्मी से काम चलाना पड़ेगा. अम्मी की चूत बिला-शक बहुत दिलकश थी पर जब दो चूत मिलने का इमकान हो तो एक से क्यों काम चलाया जाए? मैंने राशिद को अम्मी से दूर रखने की तजबीज की थी पर अब मुझे लगा कि उसकी पेशकश से हम चारों का फायदा हो सकता था. मैंने तय किया कि मैं अपनी अम्मी पर लगाई बंदिश हटा लूँगा. और इसके लिए बदला पूरा होने तक इंतज़ार करने से क्या हासिल होगा? मैंने सोचा कि मैं खाला की चूत का मज़ा लूं और वो मेरे लंड का तो अम्मी चुदाई से क्यों महरूम रहे! 

मैंने कहा – तुम ठीक कहते हो, राशिद. अम्मी मेरे कहने पर ही तुम्हे नहीं दे रहीं हैं. अब मैं उनको मना लूँगा. और तुम्हे अपनी अम्मी के चार बार चुदने तक इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है. हम इस काम को एक साथ अंजाम दे सकते है.
यह सुन कर तो राशिद खुशी से उछल पड़ा. वह बोला – भाई, हम कब कर सकेंगे ये? और मेरा एक और सुझाव है. हम इस काम को एक साथ अंजाम देने की बजाय इसे मिल कर अंजाम दें तो कैसा रहेगा?
मैं – क्या? ... चारों मिल कर? मगर इसके लिए खाला और अम्मी को राज़ी करना आसान नहीं होगा.
राशिद – भाई, तुम्हारे लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है. तुम कोशिश तो करो.

जब यह तय हो गया कि मैं कोशिश करूंगा तो मैंने पहले अम्मी से बात करना मुनासिब समझा. मौका मिलते ही मैंने उन्हें बताया कि खाला मेरी बात मान गई हैं पर वो पहले उनसे तस्दीक करेंगी. इसमें कोई मसला नहीं था क्योंकि अम्मी तो पहले ही मान चुकी थीं. फिर मैंने उन्हें बताया कि मैं खाला को राशिद के सामने चोदूंगा. 
क्रमशः
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02-23-2014, 03:40 PM
Post: #5
RE: चोदना था मुझे और खाला को चोद गया वो
अम्मी – क्या? ... अम्बरीन इसके लिए भी तैयार हो गई? 
मैं – अभी तो नहीं पर उन्हें तैयार होना पड़ेगा. आखिर राशिद भी तो देखे कि मैं उसकी माँ को ठीक तरह से चोदता हूं या नहीं.
अम्मी – मुझे यकीन है कि तुम इस काम को पूरी सलाहियत से अंजाम दोगे. न अम्बरीन को शिकायत का मौका मिलेगा और न राशिद को. पर तुम अम्बरीन को इसके लिए कैसे मनाओगे?
मैं – अम्मी आप मेरे साथ हैं तो सब हो जाएगा. लेकिन एक बात और है. मैंने आप पर राशिद से दूर रहने की जो बंदिश लगाई थी उसे मैं वापस लेता हूं.
अम्मी – क्या मतलब?


अब मैंने उन्हें राशिद की तजबीज तफसील से बताई और कहा कि मैं भी इस से इत्तेफ़ाक रखता हूं. उन्होंने इसे मानने में आना-कानी की और कहा कि तुम्हारे जैसे बेटे के होते मैं क्यों राशिद को खुश करूं? मैंने उन्हें बताया कि राशिद के मुताबिक़ उसके अब्बू अम्बरीन खाला की जिस्मानी ख्वाहिशात पूरी नहीं कर पाते हैं. जब मैं उनकी ख्वाहिशात पूरी करने में मशगूल हो जाऊँगा तो अम्मी तो प्यासी ही रह जायेंगी. मेरा मकसद राशिद को खुश करने का नहीं है बल्कि मैं तो चाहता हूं कि वो मेरी अम्मी को खुश रखे. यह सुन कर उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया और कहा कि उन्हें पता नहीं था कि मैं उनका इतना खयाल रखता हूं. बहरहाल वो मेरी बात से रज़ामंद हो गयी. अब मैंने अगला तीर छोड़ा और उन्हें बताया कि हम चारों ये काम मिल कर करेंगे. यह सुन कर तो वो बिदक गयीं.


अम्मी – ये क्या बेवकूफी है! मैं अपने बेटे और अपनी बहन के सामने ये कैसे करूंगी?
मैं – अम्मी, आपकी बहन भी तो यह काम आपके और अपने बेटे के सामने करेगी.
अम्मी – वो कभी नहीं मानेगी.
मैं – क्यों नहीं मानेंगी? वो जरूर आपके सामने ये साबित करना चाहेंगी कि उनका बेटा इस काम में मेरे से ज्यादा हुनरमंद है. और आप भी उन्हें ये दिखाना चाहेंगी कि आपका बेटा राशिद से किसी तरह कम नहीं है. है कि नहीं?
अब अम्मी ने हथियार डालते हुए कहा – ये बात तो है. और मुझे यकीन है कि एक बार ये काम हो जाए तो अम्बरीन तुम्हारी कुव्वत की कायल हो जायेगी.
मैं – तो जब खाला आपसे बात करें आप उन्हें राज़ी करने की कोशिश कीजिये.


उसी दिन शाम को अम्बरीन खाला हमारे घर आईं. उनके आते ही अम्मी उन्हें अपने कमरे में ले गयी. कोई एक घंटे तक उनकी गुफ्तगू चलती रही और मैं बेसब्री से इसके नतीजे का इंतज़ार करता रहा. जब वे बाहर निकलीं तो खाला ने एक नज़र मेरे पर डाली और बिना कुछ बोले अपने घर के लिए रवाना हो गयीं. मैंने अम्मी को सवालिया नज़र से देखा तो उन्होंने धीमी आवाज में कहा कि वे रात को मुझे बताएंगी. मैं इंतज़ार करता रहा और आधी रात हो गई. आख़िरकार अम्मी मेरे कमरे में दाखिल हुईं तो मैंने पूछा कि क्या हुआ. उन्होंने मेरे पास लेट कर कहा कि अम्बरीन खाला कल सुबह नौ-दस बजे आएँगी और मेरी मुराद पूरी कर देंगीं. जब मैंने पूछा कि एक घंटे में इतनी ही बात हुई तो उन्होंने कहा कि थोडा इंतज़ार करो. मैं सब बताती हूं. ये कहते हुए उन्होंने मेरी जाँघों पर हाथ फेरा. नतीज़ा जो होना था हुआ. कुछ ही देर में अम्मी मेरे नीचे नंगी लेटी थीं मैं उन्हें चोद रहा था. चुदाई के दरमियान हमारी बातें भी चलती रहीं.


अम्मी – अम्बरीन ने पहले तो राशिद की तरफ से मुझ से माफ़ी मांगी और कहा कि जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था. मैंने कहा कि तुम ठीक कहती हो पर जो हो गया उसे अब मिटाया तो नहीं जा सकता. उसने पूछा कि अब क्या किया जाए तो मैंने कहा कि शाकिर बहुत नाराज़ है. उसका गुस्सा तुम्ही दूर कर सकती हो. उसने कहा कि इस का मतलब है जो वो चाहता है वो मुझे करना पडेगा. मैंने कहा कि सिर्फ इस से काम नहीं चलेगा, तुम्हे कुछ और भी करना पड़ेगा. उसने पूछा कि और क्या तो मैंने कहा कि राशिद ने मेरे साथ जो किया वो अनजाने में शाकिर ने देख लिया. अब वो चाहता है वो तुम्हारे साथ जो करेगा वो राशिद भी देखे. यह सुन कर तो अम्बरीन तैश में आ गयी. उसने कहा कि ये क्या वाहियात बात है.
मैं – इसमें वाहियात क्या है? उनका बेटा मेरी अम्मी को मेरे सामने चोदे और उसकी अम्मी अकेले में चुदे! यह क्या इन्साफ हुआ?
अम्मी – देखो बेटा, राशिद को थोड़े ही पता था कि ये तुम्हारी नज़रों के सामने हो रहा है. खैर, अम्बरीन ने पूछा कि यह कितनी बार हुआ है तो मुझे बताना पड़ा कि ऐसा तीन बार पहले भी हो चुका था. उसने पूछा कि इतनी बार हुआ और तुमने उस बदमाश को रोका नहीं. मैं तुम्हारे अब्बू की शिकायत नहीं करना चाहती थी पर मुझे कहना पड़ा कि हम औरतों की तकदीर ही ऐसी होती है. हमारे शौहरों की उम्र हम से काफी ज्यादा होती है और एक उम्र के बाद या तो उनकी मरदाना ताक़त कम हो जाती है ये किसी और वजह से उनकी बीवियों में दिलचस्पी नहीं रहती. अम्बरीन ने कहा कि यह तो सच है. तुम्हारे दूल्हा भाई (नावेज) भी अब मेरे पास कम ही आते हैं. मैंने कहा कि सोचो, तुम्हे शाकिर जैसा नौजवान मिल जाए और वो तुम्हे मुतमईन कर दे तो तुम्हारा मन डोलेगा या नहीं. मेरे साथ भी यही हुआ. पहली बार जब राशिद ने तकरीबन जबरदस्ती मेरे साथ ये काम किया तो मुझे गुस्सा आया था पर फिर मुझे यह अच्छा लगने लगा और मैं उसे रोक नहीं पाई.
मैंने अम्मी को चोदते हुए पूछा – क्या आपको सच में यह अच्छा लगने लगा था?
अम्मी – उस वक्त तो अच्छा ही लगा था पर बाद में पता चला कि तुम उस से कहीं बेहतर हो. और जल्द ही अम्बरीन भी तुम्हे मान जायेगी.
मैं – अच्छा? पर खाला ने कुछ जवाब दिया?
अम्मी – हां, उसने पूछा कि जब तुम उसके साथ ये करोगे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा क्या? मैंने कहा कि यह तो तभी पता चलेगा जब तुम मेरे सामने करवाओगी. 
मैं – तो वो आपके सामने करवाने के लिए तैयार हो गयीं?
अम्मी – हां, पर बड़ी मुश्किल से. साथ ही उसने यह भी कहा कि अगर राशिद यह काम होता देख कर अपने आप पर काबू नहीं रख पाया तो? मैंने कहा कि मैं भी तो वहां रहूंगी. उस का ज्यादा मन हुआ तो मैं उसका खयाल रखूंगी.
मैं – अम्मी, आपने तो कमाल कर दिया. फिर तो खाला मान गई होंगी.
अम्मी – हां, अब कल सुबह तक इंतज़ार करो. फिर जो तुम चाहते हो वो तुम्हे हासिल हो जाएगा.


मैंने प्यार से अम्मी का मुंह चूम लिया और पूरे जोश से उन्हें चोदने लगा. कुछ ही देर में मेरा लंड अम्मी की चूत में लावा उगलने लगा. जब अम्मी अपने कमरे में चली गयीं तो मैं अगली सुबह का इंतज़ार करते-करते सो गया.


अगले दिन अम्बरीन खाला सुबह 9 ½ बजे अकेली ही आईं. मै यह देख कर मायूस हो गया. मुझे लगा कि वक्त आने पर खाला की हिम्मत जवाब दे गई. अम्मी के कहने पर में अपने छोटे भाई-बहन को नाना के घर छोड़ने चला गया. वापस आते वक्त मैं सोच रहा था कि एक बार खाला अम्मी के सामने मेरे से चुद गयीं तो अगली बार राशिद के सामने चुदने को भी तैयार हो जायेंगी. एक घंटे बाद मैं वापस घर पहुंचा तो खुशी से उछल पड़ा. वजह थी कि राशिद भी वहां नमूदार हो चुका था. थोड़ी रस्मी बातचीत के बाद मैंने कहा कि हमें वक्त जाया नहीं करना चाहिए. खाला थोड़ी संजीदा लग रही थीं और शर्मसार भी. अम्मी ने मुझे राशिद को बेडरूम में ले जाने के लिए कहा. मैं उसे अंदर ले गया. कुछ देर में अम्मी और खाला भी वहां पहुंच गयी. 


फिजा में एक अजीब किस्म का तनाव था. हम चारों में से कोई भी पहल नही कर रहा था. अम्मी बेड पर बैठी हुई थीं और खाला अम्बरीन कुर्सी पर. मै खाला के पास बैठ गया और उनकी कमर में हाथ डाल कर मैंने उनका गाल चूम लिया. उन्होने मेरी रान पर अपना हाथ रख दिया. मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं उन्हें शिद्दत से चूमने लगा. राशिद अम्मी के पास बैठ कर ये नज़ारा देख रहा था. थोड़ी देर बाद मैं अम्बरीन खाला को उठा कर बेड पर ले आया. मैं उनके ऊपर झुक गया. उन्होने अपने मुँह पर मेरे होंठ महसूस किये तो शर्माते हुए अपने होंठ मेरे होठों के साथ चिपका दिये. मै उनके बोसे लेता रहा और वो जवाब में अपने लिपस्टिक लगे होठों से मुझे चूमती रहीं. मेरा लंड तन कर फौलाद बन गया था. उनके होंठों और गालों के जी भर के बोसे लेने के बाद मैं उठा. जब मैं उनके कपड़े उतारने लगा तो अम्मी ने कहा – यह ठीक नहीं है, शाकिर.
मैंने कहा – लेकिन यह किये बिना काम कैसे होगा?
अम्मी – थोडा तहजीब का खयाल रखो. पहले तुम्हे नंगा होना चाहिए. 


उनकी बात मान कर मैंने अपने कपडे उतारे. नंगा होने के बाद मै खाला के सामने खड़ा हो गया और अपना लंड उनके मुँह के सामने कर दिया. खाला ने शर्म से सर झुका लिया पर वे समझ चुकी थीं कि उन्हें ये तो करना ही होगा. वो मेरे सामने नजीर का लंड चूस चुकी थीं पर अपने बेटे के सामने मेरा लंड मुंह में लेने में उन्हें शर्म आ रही थी. मैं यही नज़ारा देखना चाहता था. मेरे इसरार करने पर उन्होंने मेरा लंड हाथ में थाम कर मुँह में ले लिया और उससे चूसने लगीं. मैंने राशिद पर नज़र डाली. वो भी शर्मसार था पर कुछ कर नहीं सकता था. हां, उसकी पैंट में तम्बू बन चुका था. मेरा लंड चूसते हुए खाला के मुँह से लप-लप की आवाजें सुनाई दे रही थीं. 


मैंने सोचा कि मैं जो चाहता था वो हो ही रहा था. अब राशिद को और तडपाना मुनासिब नहीं था. मैंने कहा – राशिद, मैंने अम्मी की बात मान ली पर इस कमरे में सिर्फ मैं नंगा हूं. यह तहजीब है क्या?
यह सुनते ही राशिद एक मिनट से भी कम वक्त में नंगा हो गया. और उसने कहा – लो शाकिर भाई, मैं भी नंगा हो गया मगर यहाँ सिर्फ हम दोनों नंगे रहें ये तहजीब है क्या?
मैं – हां, यह तो मुनासिब नहीं है. अब हमें दोनों खवातीन को भी नंगा कर देना चाहिए. 


फिर क्या था, मैंने खाला के कपड़े उतारने शुरू कर दिये और राशिद ने अम्मी के. मैं बहुत दिनों बाद अम्बरीन खाला के नंगे जिस्म का दीदार कर रहा था. राशिद ने भी शायद काफी दिनों के बाद अम्मी को नंगा देखा था. हम दोनों के लंड टनटना रहे थे. मैंने खाला को आगोश में ले लिया और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनके मांसल चूतड़ों को दबाने लगा. उधर राशिद भी यही कर रहा था. राशिद ने अम्मी को बिस्तर पर लेटा कर उनके होठों को अपने मुँह में लिया और दोनो हाथों से उनके मम्मे मसलने लगा. अम्मी अपना मुँह खोल खोल कर उस का साथ दे रही थीं. दोनो बुरी तरह एक दूसरे को चूम-चाट रहे थे. 


मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था. मैंने अम्बरीन खाला को अम्मी के पास लिटाया और उनके होंठों और मम्मों पर काबिज़ हो गया. बेडरूम में चूमा चाटी की आवाजें फैली हुई थीं. होंठों और चूंचियों की दावत उडाने के बाद मैंने खाला अम्बरीन की चूत की जानिब रुख किया. मुझे उनकी चूत का रस पीते देख कर राशिद ने भी अपना मुंह मेरी अम्मी की बुंड पर रख दिया. कुछ ही देर में खाला और अम्मी के जिस्म बुरी तरह मचलने लगे. अब जाहिर था कि दोनों की बुंड में आग लग चुकी थी. मैं अम्बरीन खाला को और तडपाना चाहता था मगर जब उन्होंने मुझे अपने ऊपर आने को कहा तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाया. जिस लम्हे का मैं अरसे से मुन्तज़िर था वो आ चुका था और मेरा लंड भी मेरे काबू में नहीं था. मैंने खाला को अपने नीचे लिया और अपना लंड उनकी बुंड में घुसा कर आहिस्ता आहिस्ता घस्से लगाने लगा. वो भी अपने बदन को ऊपर-नीचे हरकत दे रही थीं. मै खाला अम्बरीन की चूत में घस्से मारता रहा. धक्कों की वजह से उनके मम्मे डांस कर रहे थे. 


राशिद ने अपनी माँ को चुदते हुए देखा तो उसने भी अम्मी की टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख लीं. अम्मी की चूत का मुँह उस के सामने आ गया. राशिद ने जब अपना लंड अम्मी की चूत में डाला तो अम्मी की टांगें उनके सीने की तरफ आ गईं. अम्मी ने ज़ोर से उफफफ्फ़ कहा और अपने हाथों से राशिद को पीछे ढकैलने की कोशिश की. राशिद ने अपना पूरा वज़न डाल कर अम्मी के घुटने उनके सीने से मिला दिये और उनकी उभरी हुई चूत में घस्से मारने लगा. वो इतना ताक़तवर नज़र नही आता था मगर उस ने अम्मी जैसी तंदरुस्त औरत को बड़ी अच्छी तरह क़ाबू किया हुआ था. अम्मी उस के हर घस्से पर बड़ी तेज़ आवाज़ में कराहती थीं. उनकी चूत से पानी काफ़ी मिक़दार में निकल रहा था. फिर राशिद के चेहरे के नक्श बिगड़ गये. उस ने अपना लंड अम्मी की फुद्दी से बाहर निकाला और तेजी से मूठ मारने लगा. फ़ौरन ही उसके लंड से पानी निकल कर अम्मी के पेट पर गिरने लगा. अपना लंड खाली कर के राशिद बेड से उठ गया और सामने पड़ी हुई कुर्सी पर जा बैठा. अम्मी बेड पर ही लेटी रहीं. 


राशिद को खलास होते देख कर मुझे खुशी हुई के में उस से पहले नही झडा. मैंने अम्बरीन खाला की चूत से लंड निकाला और उन्हे पीछे से चोदने की ख्वाहिश जाहिर की. वे घुटनो और कोहनियों के बल कुतिया बन गयीं. मैं लंड घुसा कर पीछे से उनकी चूत का मज़ा लेने लगा. उन्हें चंद मिनट हलके धक्कों से चोदने के बाद मैं उनकी चूत में खलास होने की नीयत से जबरदस्त घस्से लगाने लगा. जल्द ही मुझे अपने लंड के सुपाड़े पर एक मीठी गुदगुदी महसूस हुई और मैंने अम्बरीन खाला की चूत में ताबड़तोड़ घस्से मारने शुरू कर दिये. वो अपने बदन की सारी ताक़त लगा कर के पीछे की तरफ धक्के लगा रही थीं. हमारी मेहनत रंग लाई और मेरे लंड ने उनकी चूत में पिचकारियाँ मारनी शुरू कर दीं. मेरे साथ-साथ खाला का भी पानी निकल गया और वो बेदम हो कर लेट गयीं. मैं भी निढाल हो कर उनके ऊपर लेट गया. थोड़ी देर बाद हम सब उठ कर नहाए. अम्मी नाश्ता लायीं और हम सब बातें करने लगे. इतनी लज़्ज़तदार और बेबाक चुदाई के बाद हम काफी बेतकल्लुफ हो चुके थे.


राशिद – शाकिर भाई, अब तो आप गुस्सा नहीं हो? आप जो चाहते थे वो हो गया ना?
मैं – मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है. लगता है मैं कोई ख्वाब देख रहा था.
राशिद – यकीन तो मुझे भी नहीं हो रहा है. यह तो यास्मीन खाला और अम्मी ही बता सकती हैं कि कुछ हुआ था या नहीं.
खाला – बदमाश, अपनी अम्मी के सामने सब कुछ करने के बाद अब नाटक कर रहा है.
राशिद – लेकिन शाकिर भाई ने भी तो आपके बेटे और अपनी अम्मी के सामने आपकी ली थी.
खाला – तुम दोनों ही बेशर्म हो.
मैं – इसका मतलब है कि ये ख्वाब नहीं हकीक़त थी. लेकिन खाला, ये दुबारा होगा या नहीं?
खाला (शर्माते हुए) – तुम्हारा मन हो तो कर लेना.
मैं – मेरा मन तो अभी कर रहा है.
अम्मी – अम्बरीन, पहले ये बता कि शाकिर ने ये काम तसल्लीबख्श तरीके से किया या नहीं?
खाला – शाकिर मियां इस काम में यकीनन होशियार हैं.
राशिद (मेरी अम्मी से) – खाला, शाकिर भाई ने जितनी देर अम्मी की ली मैं उतनी देर नहीं ले पाया. आप का काम तो हुआ ही नहीं होगा.
अम्मी – शायद इन दोनों की मौजूदगी की वजह से तुम जल्दी फारिग हो गये.
मैं – अम्मी, सिर्फ ये वजह नहीं हो सकती. आपकी चूत है ही इतनी टाइट कि उसमे ज्यादा देर टिकना मुश्किल है.
राशिद (मुझ से) – यह तो सच है पर ये आपको कैसे मालूम हुआ? 


अब मुझे एहसास हुआ कि मैं बिना सोचे ये बोल गया था. लेकिन अब क्या हो सकता था? मैं यह भी नहीं कह सकता था कि मैंने यह सिर्फ सुना था क्योंकि राशिद ने तो मुझे बताया नहीं था और अब्बू मुझे ये बताने से रहे. और इन दोनों के अलावा किसी ने अम्मी की चूत ली नहीं थी.


खाला (अम्मी से) – ये लड़का क्या कह रहा है, आपा. कहीं इसने भी आपकी ...
मैंने बात को संभालने की कोशिश की – खाला, आपको तो इल्म होगा कि अब्बू अब ये कभी-कभार ही करते हैं और अम्मी को पता चल गया था कि मैं एक अरसे से आपकी चूत का ख्वाहिशमंद था जो मुझे हासिल नहीं हो रही थी. इसलिए उन्होंने ...
खाला – लेकिन राशिद के अब्बू भी तो ये काम अब कम ही करते हैं. तो क्या इस वजह से मैं ...
अम्मी (खाला से) – अम्बरीन, अब ये भूल जाओ. अब तो तुम्हे एक नौजवान लड़का मिल गया है.
राशिद -  लेकिन खाला, शाकिर भाई को आप की चूत ही अच्छी लगती है.
मैं – मैंने ये कब कहा? मेरा मतलब था कि अम्मी की ज्यादा टाइट है मगर लज्ज़त में अम्बरीन खाला की चूत भी कम नहीं है. लेते वक्त ऐसा लगता है जैसे लंड एक फोम के गद्दे में लिपटा हुआ हो!
राशिद – सच?
मैं – तुम्हे यकीन नहीं है तो खुद ले कर देख लो.
राशिद (खाला से) – अम्मी, एक बार मुझे भी दे दो ना.
खाला – ये क्या कह रहे हो तुम?
मैं – खाला, इसे भी देखने दीजिए ना कि आप की चूत कितनी मज़ेदार है.
अम्मी (खाला से) – अम्बरीन, अब मान भी जाओ. बच्चे इतना कह रहे हैं तो एक बार राशिद को भी दे दो.
खाला – तुम सब यही चाहते हो तो ठीक है.


फिर क्या था, जब अम्मी-बेटे राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी? तहजीब के मुताबिक पहले राशिद ने और मैंने अपने कपडे उतारे और फिर हमने अपनी-अपनी अम्मी को बेपर्दा करना शुरू किया. अम्बरीन खाला थोड़ी देर पहले हमारे सामने बे-लिबास हो चुकी थीं पर इस बार अपने बेटे के हाथों नंगी होने में वो शर्मा रही थीं. जब उनके जिस्म से आखिरी कपडा अलग हुआ तो वे शर्मा कर अपने बेटे की बाहों में समा गयी. मैं भी अम्मी से लिपट कर उनके गालों और होंठों का रस पीने लगा. मेरे हाथ उनके चूतडों पर घूम रहे थे. राशिद भी कहाँ पीछे रहने वाला था. उसने खाला के होंठों को चूसते हुए उनके मम्मों को अपने हाथों में ले लिया. मैंने अम्मी को बिस्तर पर लिटाया और मेरे होंठों ने उनकी चूंचियों पर कब्ज़ा कर लिया. अम्बरीन खाला भी अब अब बिस्तरदराज़ हो चुकी थीं और राशिद उन पर चढ़ा हुआ था. वो उनके मम्मों को बिल्कुल दीवानों की तरह चूस रहा था. खाला अम्बरीन के मुँह से मस्ती की  आवाजें निकलना शुरू हो गईं थीं और वो आहिस्ता आहिस्ता अपना सीना आगे पीछे कर रही थीं. ये मंज़र खून गरमा देने वाला था. राशिद और अम्बरीन खाला मुझ से क़रीब ही थे. जब राशिद अम्बरीन खाला का एक मम्मा चूस रहा था तो मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उनके दूसरे मम्मे को दबाना शुरू कर दिया. खाला अम्बरीन के मुँह से निकलने वाली आवाजें एक लम्हे के लिये बंद हुईं और फिर फॉरन ही उन्होने ज़ियादा तेज़ आवाज़ में सिसकना शुरू कर दिया.


अम्मी ने मुझे इशारा किया कि मैं अपना लंड उनके मुंह में दे दूं. मेरा लंड तो इंतज़ार कर रहा था कि उसे मुंह या चूत की गर्मी नसीब हो. मैंने अपना लंड उनके मुंह के सामने किया और उनके मुंह ने फ़ौरन उसे लपक लिया. ये देख कर राशिद ने भी अपना लंड अपनी माँ के मुँह के हवाले कर दिया. अम्बरीन खाला अपने बेटे का लंड चूसने लगीं मगर उनके चेहरे पर हया के आसार साफ़ नज़र आ रहे थे. इधर अम्मी के मुँह के अंदर मेरे लंड में मज़े की मौजें उठने लगीं. मै अपना लंड आहिस्ता आहिस्ता अम्मी के मुँह के अंदर बाहर करने लगा. जब मेरा लंड अम्मी के मुँह में घुसता तो वो अपनी ज़बान नीचे कर लातीं और जब लंड उनके मुँह से बाहर निकलता तो वो उस के टोपे पर ज़बान फेरतीं. लंड चुसवाते हुए मैंने खाला के मम्मे पर हाथ फेरा तो वो खिसक कर मेरे क़रीब आ गईं और में उनके मम्मे को मसलने लगा. राशिद ने अपनी माँ में मेरी दिलचस्पी देखी तो उठ कर अम्मी के पास आया और अपना लंड उनके मुँह के आगे कर दिया. अम्मी ने मेरा लंड मुँह से निकाला और राशिद के लंड का सुपाडा चाटने लगीं. मैंने भी अपना लंड खाला के मुँह में दाखिल कर दिया. मुझे अंदाज़ा हुआ के जब दो मर्द दो औरतों को एक साथ चोदते हैं तो दोनो एक दूसरे को देख कर एक जैसी हरकतें करने लगते हैं. 


फिर राशिद ने अम्मी से कहा के खाला ज़रा अपने चूतड़ मेरी तरफ करें. अम्मी ने अपने नंगे चूतड़ों को राशिद की तरफ कर दिया. राशिद ने उनके चूतड़ों को अपने हाथों से खोला और उनकी चूत और गांड़ चाटने लगा. अम्मी ने बिस्तर की चादर पकड़ ली और ऊऊं ऊऊऊं करने लगीं. मै भी खाला अम्बरीन के पीछे आ गया और बिल्कुल राशिद की तरह उनके चूतड़ों को खोल कर उनकी चूत पर ज़बान फेरने लगा. अम्बरीन खाला भी अपनी चूत चटवाते हुए खुद पर क़ाबू ना रख सकीं और मज़े से सिसकने लगीं. दोनो बहने एक दूसरे से चंद इंच के फ़ासले पर थीं. 


मैंने अम्बरीन खाला का हाथ पकड़ कर अम्मी के हिलते हुए मम्मों के क़रीब कर दिया. उन्होने अम्मी के मम्मों को पकड़ा और उन्हे दूध दुहने वाले अंदाज़ में नीचे की तरफ खैंचने लगीं. मैंने खाला अम्बरीन की चूत को चूमते हुए उनकी गांड़ के सुराख को देखा जो कभी खुल रहा था और कभी बंद हो रहा था. मैंने अपनी एक उंगली उनके गांड़ के सुराख पर रखी और उससे आहिस्ता से अंदर धकेला. खाला अम्बरीन ने एक तेज़ आवाज़ निकाली और अपना एक हाथ नीचे ला कर अपनी चूत को मसलने लगीं. वो इस दोहरे हमले को ज्यादा देर ना झेल सकीं. उनका जिस्म जोर से लहराया और वो झड़ने लगीं.


राशिद ने जब देखा के उस की माँ खलास हो गई है तो वो अम्मी को छोड़ कर अम्बरीन खाला के पास आ गया. चूँके कुछ देर पहले राशिद ने खाला अम्बरीन को मेरे लिये छोड़ा था इसलिये में भी उसे अम्मी के पीछे से उठते हुए देख कर वहाँ से हट गया. राशिद ने अम्बरीन खाला के चूतड़ों को अपने लंड की तरफ घुमाया और अपना फूँकारता हुआ लंड उनकी चूत के अंदर डाल दिया. लंड अंदर जाते ही वो कस कर घस्से मारने लगा. खाला ने उसे जल्दबाज़ी न करने की हिदायत दी तो उसके धक्कों की तेज़ी कुछ कम हो गयी. शायद खाला कोशिश कर रही थीं कि वो जल्दी न झडे.


मैंने भी अम्मी को घुटनो के बल झुकाया और उनकी चूत में अपना लंड दाखिल कर दिया. अम्मी की चूत राशिद ने काफ़ी देर चाटी थी और वो पूरी तरह चिकनी हो चुकी थी. मेरा लंड उनकी चूत में आसानी से रास्ता बनाता हुआ उस के अंदर घुस गया और मैंने उनके चूतड़ पकड़ कर घस्से मारने शुरू कर दिये. क्या दिलकश नज़ारा था! दोनों बहने पास-पास थीं और उनके बेटे उनको खुल कर चोद रहे थे. हमारे लंड एक लय के साथ अपनी अम्मियों की फुद्दियों में अंदर बाहर हो रहे थे. वो दोनो भी अपने चूतड़ों को हमारी जानिब धकेल-धकेल कर हमारा साथ दे रही थीं. दोनो के मम्मे हमारे झटकों की वजह से बुरी तरह हिल रहे थे. अम्मी और खाला अम्बरीन वक़फे-वक़फे से एक दूसरे की तरफ भी देख लेतीं थीं. वो अब इस खेल का पूरा मज़ा ले रही थीं और दोनो के चेहरों पर इतमीनान और सकून नज़र आ रहा था. 


में चुदाई में ज्यादा तजुर्बेकार नही था लेकिन फिर भी मुझे एहसास हो गया के अम्मी की बुंड पानी छोड़ने वाली है. उन्होने तेज़ रफ़्तारी से मेरे लंड पर अपनी फुद्दी को आगे पीछे किया और झडने लगीं. उनकी फुद्दी पूरी तरह पानी में भीग गई और वो सर बिस्तर में घुसा कर मुँह से बे-हंगम आवाजें निकालने लगीं. उन्होने खलास होने के बाद अपनी राने नीचे की और उल्टी लेट गईं. मेरा लंड अब भी उनकी फुद्दी के अंदर था. मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला. जब अम्मी थोड़ी नोर्मल हुईं तो मैंने फिर घस्से मारने शुरू किये लेकिन अब मुझे अपना लंड उनकी बुंड के ज्यादा अंदर पहुंचाने में मुश्किल हो रही थी. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सीधा लेट कर उन्हे अपने लंड पर चढा लिया. मेरा लंड फिर अम्मी की चूत के अंदर था और वो उस पर आहिस्ता आहिस्ता धक्के लगाने लगीं. मैंने अम्बरीन खाला की तरफ सर घुमाया. 


राशिद अब भी उन्हें पीछे से ही चोद रहा था. जब वो अपना लंड उनकी चूत में अंदर करता तो खाला मुँह से उफफफफ्फ़ की आवाज़ निकलटीं लेकिन जब उस का लंड उनकी चूत से बाहर निकलता तो उनके चेहरे पर तक़लीफ़ के आसार आ जाते. राशिद की पतली रानें खाला के मांसल चूतड़ों से टकरा कर नशीली आवाजें पैदा कर रही थीं. उस ने खाला के चूतड़ों को कस कर पकड़ा और अपने घस्सों में थोड़ी तेज़ी ले आया. कुछ देर इस तरह खाला को चोदने के बाद वो भी मेरे पास लेट गया और अपनी माँ को अपने ऊपर चढ़ने के लिए कहा. अब खाला की शर्म उनसे कोसों दूर जा चुकी थी. उन्होंने अपने हाथ से राशिद का लंड पकड़ कर अपनी फुद्दी पर रखा और एक शानदार धक्का लगाया. एक ही धक्के में उन्होंने पूरा लंड अपनी बुंड में ले लिया. अब अम्मी की तरह अम्बरीन खाला भी अपने बेटे के लंड पर फुदकने लगीं. 


अभी तक मैंने अपने ऊपर काफ़ी क़ाबू रखा था और खलास नही हुआ था लेकिन जब अम्मी के भरे हुए चूतड़ों ने बार बार मेरे लंड पर वज़न डाला तो मुझे लगा के में खलास हो जाऊंगा. अम्मी मेरे चेहरे के ता’असूरात से समझ गईं के में खलास होने वाला हूँ. उन्होने अपने चूतड़ों की हरकत धीमी कर दी. वो खामोशी से मेरी मदद कर रही थीं. मैंने अपनी साँसें दुरुस्त कीं और एक हाथ से अम्मी का एक मम्मा पकड़ा और दूसरे हाथ से खाला का उछलता हुआ मम्मा दबोच लिया. खाला अब मजीद रफ़्तार से फुदक रही थी और झड़ने के कगार पर थीं. अम्मी ने भी अपने घस्सों को तेज़ी दी और फिर दोनों बहने एक साथ चीखें मारते हुए झड़ने लगीं. राशिद का बदन भी अकड गया. शायद वो भी अपनी अम्मी की चूत में झड रहा था. सब को झड़ते देख कर मेरा भी बाँध टूट गया.  कुछ मिनट बाद मेरी हालत ज़रा बेहतर हुई तो में खाला अम्बरीन की तरफ मुखातिब हुआ. वो राशिद के लंड से उतर कर मेरे साथ लिपट गईं. अम्मी ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और राशिद के पास खिसक गयी. वो भी गर्मजोशी से उन से लिपट गया. 


इस वाक़िये को चार साल बीत चुके हैं. उस दिन मैंने और राशिद ने फ़ैसला किया था के हम दोनों की शादी होने तक हम सिर्फ अपनी खाला और अम्मी को चोदेंगे. हम आज तक इस फ़ैसले पर कायम हैं. अम्मी और अम्बरीन खाला भी हमारा साथ दे रही हैं. जब मैं अकेला होता हूं और अम्मी को लगता है मुझे चूत की जरूरत है तो  वो बिना झिझक मुझे अपनी चूत दे देती हैं. उधर खाला भी राशिद की चूत की ख्वाहिश खुशी से पूरी कर देती हैं. और जब मौका मिलता है, हम चारों इकट्ठे हो जाते हैं. मैं खाला को चोद लेता हूं और राशिद मेरी अम्मी को. हमें पता है कि मेरी और राशिद की शादी होने के बाद ये हालात नहीं रहेंगे. तब ये सिलसिला शायद बंद करना पड़े. ... पर मेरी और राशिद की बीवियां तो होंगी. हम कोशिश करेंगे कि हम इकट्ठे अपनी बीवियों को चोदें, ... और एक दूसरे की बीवी को भी.


हम दोनों फिक्रमंद हैं कि जब हमारी शादी हो जायेगी तब खाला और अम्मी का क्या होगा. मेरी तजबीज तो यह होगी कि उन दोनों को मिल कर एक दूसरे के शौहर को पटाने की कोशिश करनी चाहिए. मैंने सुना है कि साली को चोदने से उम्रदराज़ इंसान की भी मरदाना ताक़त लौट आती है.
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