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मेरी माँ डेयरी गायों से भी अधिक दूध देती है
02-22-2013, 01:02 PM
Post: #1
Wank मेरी माँ डेयरी गायों से भी अधिक दूध देती है
मेरा नाम प्रेम है और मैं मेरी माँ सरोजा, जिनकी उम्र 32 साल है उनके साथ रहता हूँ.
मेरी मम्मी और मुझमे एक अनोखा रिश्ता है. मेरी मम्मी मुझे इस उम्र में भी अपना दूध पिलाती हैं.माँ चाहती थी की उनके चार-पांच बच्चे हो और वो बहुत सालों तक उन्हें स्तनपान कराती रहे पर उनको सिर्फ एक औलाद ही पैदा हुई. पर मम्मी की स्तनपान करने की इच्छा बहुत मज़बूत निकली और उन्होंने मुझसे अपने स्तनों का दूध नहीं छुड़वाया बल्कि समय के साथ उनके स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ता गया.
मेरी माँ एक बहुत मोटी औरत हैं. उनके पूरे बदन पे वसा की बड़ी-बड़ी परतें जमी हैं. माँ के बदन को ढकने के लिए माँ को बदन ढकने के लिए अबद्ध आकर के वस्त्रों की ज़रुरत पड़ती है. माँ अपने भारी स्तनों को समाने के लिए 48-KK कप की चोली पहनती हैं. घर में मम्मी चोली नहीं पहनती पर स्तनों को ठीक से ढकने के लिए उन्हें बहुत बड़ी ब्लाउज की आवश्यकता पड़ती है
माँ के स्तनों ने हमेशा से दूध की ​​भारी मात्रा का उत्पादन किया है.मेरी माँ का दूध न केवल मेरी पोषण की मांग को संतुष्ट करता था जब मैं 1 साल से छोटा था, बल्कि मेरी उम्र में वृद्धि के साथ, माँ ने अपने दूध से बने खाने के सामान मुझे देने शुरू कर दिए और इस पूरे समय मुझे ज्यादा-ज्यादा देर तक स्तनपान करवाती रही.मैं एक बच्चा हूँ.मैं कैसे आनंद नहीं लेता स्तनपान का, माँ के दूध के मीठे स्वाद का, माँ की चूचियां चूसने का ?तो मैंने स्तनपान जारी रखा और माँ ने मुझसे दूध नहीं छुड्वाया, जिसके परिणामस्वरूप.मैं अभी भी माँ का दूध पीता हूँ. माँ का दूध अभी भी मेरे पोषण का प्रमुख भाग प्रदान करता है.



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02-22-2013, 01:02 PM
Post: #2
RE: मेरी माँ डेयरी गायों से भी अधिक दूध देती है
सुबह के नाश्ते में माँ का दूध

यह नाश्ते का समय था. नाश्ते की मेज़ पतली पर चौड़ी थी और उसके दोनों तरफ एक कुर्सी लगी थी. मकई के फ्लेक से भरा कटोरा, एक लीटर का खाली जग और बौर्न्विता की शीशी मेज़ पर राखी हुई थी.
मम्मी आकर कुर्सी पर बैठ गयी और मुझे वहां पर मौजूद नहीं देखकर जोर से बोली, " कहाँ है प्रेम? जल्दी आ."
मैंने कमरे में घुसते हुए कहा, " नहा रहा था, मम्मी ." मैं लाल टी-शर्ट और काले हाफ पैंट में था. मम्मी काली साड़ी और काले ब्लाउज में थी. मैं मम्मी के सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया.
माँ स्पष्ट रूप से असहज महसूस कर रही थी.उसने मुझे गुस्से के संकेत के साथ कहा, "तुम अपनी माँ के बारे में बिलकुल भी चिन्तित नहीं हो."
मैंने कहा, "आप क्या कह रही हैं, माँ?"
माँ ने कहा, "मेरे स्तनों अत्यधिक दूध के दबाव से फट जाने के कगार पर हैं, और तुम शॉवर में समय ले रहे हैं. मेरा ब्लाउज मेरे भारी स्तनों के वजन को झेलने में असमर्थ है."
मैंने मजाक में कहा, "तो यह समय आपके स्तनों को ब्लाउज के बाहर निकालने का है ."
माँ ऐसे बैठी थी कि उनके विशाल स्तन मेज पर फैल गए थे .मेरे हाथ उनके स्तनों को छूने के लिए आगे बढे .मैंने एक-एक स्तन पर एक हथेली रखी और उन्हें सहलाने लगा. माँ ने बेचैनी के साथ कहा, "बेटा, पहले थोडा दूध पीकर स्तनों से दवाब हटाओ, फिर तुम आराम से इन्हें सहला सकते हो. मेरा ब्लाउज खोलो और मेरा दूध चूसना शुरू करो." उन्होंने मेज से अपने स्तनों को उठा लिया और मैं नीचे से उनके ब्लाउज हुक खोलने लगा लगा. के बाद मैं माँ के ब्लाउज के तीन हुक खोलने के बाद मैंने उनका ब्लाउज स्तनों के ऊपर उठाकर उनके दूध से लदे भारी स्तनों को उघाड़ दिया.
ब्लाउज़ के स्तनों के ऊपर उठते ही मम्मी के स्तन झटके से टेबल पर गिर गए. मम्मी बहुत गोरी हैं और मम्मी के स्तन भी दूध की तरह उजले हैं. मम्मी की चूचियां और चूचियों के आस-पास का घेरा हलके भूरे रंग की हैं. मम्मी की चूचियां आम तौर पर 1 इंच लम्बी और 3 / 4 इंच मोटी हैं, पर अभी स्तनों के दूध से लबालब भरे होने के कारण सूज कर और भी बड़ी दिख रही थी. माँ ने बांये हाथ से अपने बांये स्तन को इस तरह उठाया कि बांयी चूची बिलकुल मेरे होठों के सामने आ गयी. मैंने झट से आगे बढ़कर माँ की चूची को होठों के बीच में पूरी तरह घेरा और धीरे-धीरे चूची को होठों के बीच में लिए हुए ही पूरा खींचा. इधर माँ के स्तन से दूध कि धार निकल कर मेरे मुंह में गिरने लगी और उधर माँ के मुंह से कराह निकली.

माँ की कराह सुनकर और स्तन का दूध चूसकर मैं उत्तेजित हो गया. मैंने फिर से चूची को होठों के बीच रखे हुए ही खींचने लगा... जब चूची पूरा खींच गयी तो मैंने चूची को होठों के बीच रखे हुए ही अपने मुंह को आगे बढाकर स्तन से होठों को सटाकर वापस चूची को पूरा खींचा और इसी तरह मैं माँ की चूचियां चूसने लगा.
माँ: "आह प्रेम... आह, मेरा बच्चा...मेरा दूध पी मेरे बेटे."
मेरे स्तन चूसने के साथ स्तन से दूध का बहाव भी बढ़ने लगा. तेज़ी से बहते दूध के कारण मैं और उत्तेजित हो गया और जोर-जोर से चूची खींच कर दूध चूसने लगा.
माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी और मेरे दूध चूसने की चू-चू की आवाज़ भी तेज़ हो गयी. मम्मी ने अपना बांया स्तन दबाना शुरू कर दिया जिससे दूध का बहाव और तेज़ हो गया.
माँ: "हाँ मेरा बच्चा.....इसी तरह से मेरी चूची खींच -खींच कर दूध पी....आह"
पांच मिनट तक इसी तरह दूध पीने के बाद मैंने मम्मी की चूची छोड़ दी और जोर से साँस लेने लगा.
मम्मी ने प्यार से मेरे सर पे हाथ फेरा और बेचैनी के साथ पूछी, " माँ के दूध का स्वाद कैसा है ?"
मैंने हँसते हुए कहा, " बहुत मीठा लगा मम्मी, यम्मी."
कुछ देर तक मम्मी ने मुझे साँस लेने दिया, और उसके बाद दांये हाथ में दांये स्तन को उठाते हुए बोली, " अब थोड़ा सा दूध इस स्तन से भी पी ले तो मुझे चैन मिले."
मम्मी ने चूची मेरे होठों से सटा दी. मैंने चूची को फिर से होठों के बीच दबाया और फिर से पूरा खींचा. स्तन के दूध से पूरी तरह भरे होने के कारण मेरे मुंह में दूध की तेज़ धर तुरंत ही फूट पड़ी. मम्मी ने जोर से आह भरी और स्तन दबाना शुरू कर दिया जिससे दूध की धार और तेज़ हो गयी. जिस तरह मैंने बांये स्तन का दूध चूसा था, उसी तरह मैंने बांयी चूची को बार-बार खींचते हुए,और फिर होठों को स्तन से सटाते हुए ही बांये स्तन का भी दूध चूसा. तीन मिनट तक मेरे जोर-जोर से स्तन चूसने के कारण माँ उत्तेजित हो गयी थी पर दूध का दबाव धीरे-धीरे हटने के कारण उन्हें आराम भी पहुँच रहा था.
माँ:" आह..बस बेटा...कुछ देर और....बस थोड़ा और दूध पी ले......."
मैं और दो मिनट तक इसी तरह दूध पीता रहा. मैं दूध की तेज़ धारें जल्दी-जल्दी निगल रहा था. फिर स्तनों से अत्यधिक दूध का दबाव खत्म होने के कारण माँ का शरीर तनावमुक्त भी हो गया.
माँ की आवाज़ अब साफ़ निकल रहा थी. माँ ने आँखों की चमक के साथ कहा.
माँ:" आह बेटा...तूने दूध पीकर मेरे स्तनों से दबाव तो हटा दिया. और अब जब स्तनों से दूध आराम से बहने लगा है तो अपनी माँ का दूध दुहो."
माँ ने फ्रिज से एक 500 ml का ग्लास निकाला और उसमे 250 ml फ्रूटी डाला. फिर मम्मी आकर मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गयी. माँ ने फ्रूटी की ग्लास के बगल में कॉर्न फ्लेक्स से आधा भरा कटोरा रख दिया. यह था मेरा नाश्ता - कॉर्न फ्लेक्स और आम का जूस- पर मजेदार बात यह है कि मेरे नाश्ते में भी माँ के दूध का हिस्सा रहता है. कॉर्न फ्लेक्स को मैं जिस दूध में मिला कर खाता हूँ वो दूध माँ के स्तनों का होता है और आम के जूस में भी माँ का दूध मिला होता है.
मम्मी ने दोनों स्तनों पे हाथ फेरते हुए कहा, " लो बेटा, माँ के स्तनों का दूध दुह कर अपना नाश्ता तैयार करो."
माँ अपने दोनों हाथों में एक स्तन उठाकर बर्तनों के पास ले आई. मैंने उनके स्तनों को एक-एक हाथ में लेकर सहलाने लगा.
मैं:" ओह माँ, आपके स्तन इतने बड़े हैं कि मेरे दोनों हाथ भी आपके एक स्तन को ठीक से पकड़ नहीं पाते हैं."
माँ:" हाँ बेटा, मेरे स्तन इतने बड़े हैं कि मेरा हर ब्लाउज और मेरी हर चोली इन्हें संभालने में असमर्थ है."
मैं:" माँ, आपके स्तन तो डेयरी की गायों के थनों से भी बड़े हैं. "
माँ ने अपने भारी स्तनों को हिलाते हुए कहा:" क्यों क्या कहता है, क्या मैं एक अच्छी गाय बन सकती हूँ?"
मैं:" आप तो पहले से ही इतनी अच्छी गाय हैं. डेयरी गायों को तो बाँध के रखना पड़ता है और उनके थनों को पकड़ो तो परेशान करती हैं. जबकि मैं तो दिन भर आपके स्तनों से चिपका रहता हूँ, इन्हें सहलाता रहता हूँ, इनका दूध चूसता रहता हूँ और आप मुझे और बढ़ावा देती रहती हैं."
माँ:" तेरी इस गाय माँ को अपने थनों का दूध पिलाना अच्चा लगता है.....अपनी माँ के थन पकड़ और इन्हें दुह कर माँ का दूध निकाल."
माँ का दांया स्तन फ्रूटी की ग्लास के ऊपर और बांया स्तन कॉर्न फ्लेक्स के कटोरे के ऊपर था. मम्मी ने बांयी चूची को कटोरे के अन्दर रखा और दांयी चूची को ग्लास के अन्दर किया. मैं जो अभी तक माँ के दोनों स्तनों के पूरे भाग पर हाथ फेर रहा था, अब मैंने अपने दोनों हाथ स्तन के आगे वाले भाग पर ले आये. माँ की अरेओला फूली हुई है और उनका व्यास 6 cm है. मेरे अंगूठों ने अरेओला को एक तरफ से और बाकी चार उँगलियों ने दूसरी तरफ से जकड लिया था. मैंने धीरे-धीरे माँ की दांये स्तन को 12 -13 बार खींचा और फिर बांये स्तन को भी इतनी ही बार खींचा.
माँ:"यह क्या कर रहा है प्रेम?"
मैं:" गाय का दूध दूहने के पहले गाय के थन खींचते हैं न." और मैंने दोनों स्तनों को लगभग 10 बार और खींचा.
मैंने फिर दाहिने स्तन को अरेओला के आस - पास दबाया, माँ की चूची से दूध की धार निकल कर फ्रूटी में मिल गयी. माँ ने उत्तेजना में अपनी आंखें बंद कर ली और नाक सिकोड़ कर खूब जोर की आह भरी. मैंने फिर से दांये स्तन को दबाया और फिर से दूध की लम्बी धार फ्रूटी में मिल गयी. माँ ने फिर आह भरी. मैंने बांये स्तन को अरेओला के इर्द-गिर्द दबाया और फिर से चूची से दूध की धार निकल कर कटोरे में गिरी. मैंने बारी-बारी से दोनों स्तनों को दबाना शुरू किया और पांच मिनट तक उन्हें दबाते रहा. माँ जोर-जोर से आह-आह करते रही और मैं लगातार मम्मी के स्तनों को दबाकर उनका दूध दूहता रहा.
जब दोनों बर्तन दूध से भरने वाले थे तो मम्मी ने जग में लगभग 100 ग्राम बौर्न्विता डाला. मैंने दांये स्तन को मेज़ से ऊपर उठाया और पूरा नीचे खींच दिया जिससे दूध की तेज़ मोटी धार ग्लास में गिरी. फिर दांये स्तन के साथ भी ऐसा करके दूध की मोटी धार कटोरे में गिराई. मम्मी मज़े में कराह उठी. मैंने ये काम इस बार दोनों स्तनों के साथ एक ही समय में किया, दोनों स्तनों से दूध की मोटी धारें गिरी. पांच बार और ऐसा करने पर दोनों बर्तन दूध से भर गए और मैंने स्तनों को छोड़ दिया. पर माँ की चूचियों से दूध अभी भी टपक रहा था इसलिए मैंने माँ के दोनों स्तन उठाकर शीशे की जग के ऊपर इस तरह रख दिए कि चूचियां जग के अन्दर थी और उनसे टपकती दूध कि बूंदे साफ़ दिख रही थी.
मैंने चम्मच उठाकर कटोरे और ग्लास के मिश्रण को ठीक से मिलाया और कहा, "मम्मी, आप कुछ देर अब इसी तरह आराम कीजिये. इन्हें खा लेने के बाद मैं फिर से आपका दूध दुहुंगा."
मम्मी कुर्सी पर बैठी हुई थी. मैं मम्मी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और मम्मी के मोटे स्तनों को दोनों हाथों में जकड लिया.
मम्मी:" मैं तुमसे तंग आ गयी हूँ, तुम बार-बार मेरे स्तनों को बेरहमी से जकड लेते हो, अब जल्दी से मेरा दूध दुहो."
मैंने माँ के स्तनों के निचले हिस्से पर हाथ फेरते हुए अपनी हथेलियों को स्तनों के आगे के हिस्से पर ले गया. और दोनों हाथों से माँ एक स्तनों को जोर से हिलाया.
मैं:" आपके स्तन कितने कोमल हैं माँ, इन्हें छूने के बाद छोड़ने का मन ही नहीं करता है."
कहकर मैंने अपनी उँगलियों को माँ की अरेओला पर घुमाया.
माँ:" शैतान, अपनी माँ के स्तनों से खेल रहा है."
मैं:" आप जैसी गायों के थनों के साथ तो खेलना ही चाहिए."
कहकर मैंने फिर से अपनी हथेलियों को स्तनों पर फेरा. मैंने अपने हाथों में स्तन के आगे के हिस्सों को पकड़ा और जोर-जोर से दबाने लगा. मम्मी ने सिसकी भरी.
मम्मी:" ऐसा है तो अपनी गाय माँ की चूचियों के साथ जम कर खेल."
मम्मी कुर्सी से उठकर खड़ी हो गयी. मैं माँ के बदन से चिपक गया. और माँ के बदन को झुका दिया जिससे की उनके स्तन जग के ऊपर हो गए. मैंने उँगलियों के बीच माँ की मोटी चूचियां पकड़ी और उनपे ऊँगली फेरने लगा. माँ ने जोर की आह भरी.
मम्मी:" आह बेटा, तू सीधे-सीधे दूध दूह क्यों नहीं देता. क्या मेरी चूचियों के साथ खेल रहा है?"
मैंने माँ की दोनों स्तनों को सटाकर चूचियां को आपस में रगड़ने लगा. माँ ने फिर से आह भरी. चूचियों को आपस में कुछ देर रगड़ने के बाद मैंने दोनों स्तनों को अलग किया और अपनी उँगलियों से चूचियों को सहलाने लगा. कुछ देर तक चूचियां सहलाने के बाद मैंने चूचियों को खींचना शुरू कर दिया. मम्मी को दर्द तो हुआ पर साथ में उन्हें मज़ा भी आया.
माँ:" तू जब भी मेरी चूची खींचता है तो मुझे बहुत मज़ा आता है."
माँ के ऐसा बोलने पर मैंने इस बार उनकी दोनों चूचियां और जोर से खींची जिससे उन्होंने फिर जोर की आह भरी.
माँ:"बेटा, अब जल्दी से माँ का दूध जग में निकाल और बौर्न्विता पी ले."
मैंने माँ को नीचे की ओर झुकाया. दोनों स्तनों पे मेरी हथेलियाँ इस तरह थी की मेरी पाँचों उँगलियों के बीच माँ के स्तन का आगे का हिस्सा था और चूचियां जग के अन्दर थी. मैंने दांये स्तन का आगे का हिस्सा दबाया तो माँ की चूची के छेद से दूध की धार निकली. माँ ने आह भरी. फिर मैं दांये स्तन को कुछ देर तक दबाते रहा और इस दौरान मेरा बांया हाथ माँ के बाये स्तन को उठा-गिरा कर खेल रहा था. माँ की सिसकियाँ तेज़ हो रही थी. दांये स्तन से दूध की धार निकल कर जग में गिरती रही.
माँ:" आह बेटा, सिर्फ दांयी चूची ही नहीं, बांयी चूची से भी दूध निकाल."
मैं दांये स्तन को उठाने-गिराने लगा और माँ की बांये स्तन को दबाकर कुछ देर तक दूध दूहते रहा. धीरे-धीरे जग आधा दूध से भर गया.
मैं:" माँ, आपको अपना स्तन दबवाकर दूध दूहवाने में कैसा लगता है."
मम्मी:" तेरी माँ एक गाय है और गाय को दूध दूहवाने में मज़ा आता है. और तेज़ी से दूह माँ का दूध."
मैंने माँ की बात सुनकर दोनों स्तनों को जग की तरफ मोड़ा और स्तनों के आगे वाले भाग को दबाकर दोनों चूचियों का दूध जग में गिराने लगा. माँ जोर-जोर से सांस लेने लगी. मैंने माँ के स्तन जोर से आगे की ओर खींचे और फिर वापस उन्हें सामान्य आकर में लाकर फिर से खींचा. इससे दूध बहुत तेज़ी से गिरने लगा. माँ जोर-जोर से सिसकियाँ लेने लगी.
माँ:" हाँ मेरा शैतान बेटा, अपनी माँ का दूध दुहो, माँ के स्तनों को दबाकर इनका दूध निकालो."
जब दूध से जग पूरा भर गया तो माँ ने अपना बदन उठाकर मुझे रूकने का इशारा किया. उनकी चूचियों से जो दूध की बूंदे टपक रही थी, वोह उन्होंने जग के किनारे में पोछ कर जग में गिरा दिया. माँ की चूचियां इतने देर से खेंची जाने के कारण फूल गयी थी और बहुत ही उत्तेजक लग रही थी. मैंने जग को हाथ में उठाया जिसमे 100 ग्राम बौर्न्विता और माँ के एक लीटर दूध का मिश्रण था. मैंने झट से पूरा का पूरा बौर्न्विता पी लिया.
मैं:" यम्मी, माँ. आपका दूध कितना स्वादिष्ट है. पी के मज़ा आ जाता है."
मम्मी:" वो मुझे पता है, तू जिस तरह मेरे स्तन से चिपका रहता है, तुझे मेरे दूध का स्वाद बहुत अच्छा लगता है.."
मैं:"मम्मी, मैं आपका इतना दूध पीता हूँ, पर फिर भी आपके स्तनों से दूध ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेता है. मैंने उतने देर आपका स्तन चूसकर दूध पिया और फिर उसके बाद आपका दूध दूहकर कॉर्न फ्लेक्स और मैंगो जूस में मिलाया. और उसके बाद फिर एक लीटर दूध जग में फिर से दूहा. पर अभी भी आपके स्तन दूध से भारी ही दिख रहे हैं."
मम्मी:" बेटा, तेरी माँ के भारी स्तन में इतना दूध पैदा होता है की मत पूछ. मन करता है की दिन भर तुझे अपने बगल में लिटाकर अपनी चूचियां चुसवाती रहूँ."
मैं:"(माँ के दोनों स्तनों पर हाथ रखकर) मैं तो आपके बगल में लेटकर आपका दूध चूसने के लिए तैयार हूँ."
मम्मी ने अपनी बाहों में मुझे भरकर मेरा सर अपने स्तनों के ठीक बीच में रख दिया. मैंने माँ के दोनों स्तनों को सटाया और माँ की दोनों फूली हुई चूचियां अपने होठों के बीच लेकर खींचने लगा. माँ के स्तनों से दूध की धार फूटकर मेरे मूंह में गिरने लगी. माँ मुझे अपने स्तनों से लगाकर दूध चुस्वाते हुए ही बिस्तर की तरफ बढ़ने लगी.

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02-22-2013, 01:02 PM
Post: #3
RE: मेरी माँ डेयरी गायों से भी अधिक दूध देती है
माँ को गाय बनाकर उनका दूध दुहा

एक दिन सुबह की बात है - लगभग 6 बज रहे थे। मैं बेचैनी से किचन में बैठा हुआ था और बेसब्री से माँ का इंतज़ार कर रहा था। बात ये थी कि कल शाम जब मैं खेल कर वापस आ रहा था तो मैंने एक दूधवाले को गाय दुहते हुए देखा - गाय बहुत ही मोटी-तगड़ी और विशालकाय थन वाली थी। दूधवाले ने पहले गाय के बछड़े को खोल दिया था और बछड़ा दौड़ कर गाय के थनों की ओर बढ़ा और थनों को अपने मुंह में लेकर दूध चूसने लगा.
पांच मिनट बाद दूधवाले ने बछड़े को गाय के थनों से अलग करके बाँध दिया. बाल्टी में पानी लेकर गाय के थनों को पोंछने लगा और फिर गाय के थनों को खींच-खींच कर दूध निकालने लगा - पहले उसने दूध से बाल्टी भरी, फिर एक जग भरा और आखिर में एक बड़ी ग्लास में दूध भर के खुद पीने लगा और बछड़े को खोल दिया। बछड़ा फिर से तेज़ी से दौड़ कर अपनी माँ के थनों के पास पहुँचा। पहली बार दूध पीते समय बछड़ा गाय के थनों को सिर्फ दबा रहा था पर इस बार, थनों में दूध कम हो जाने के कारण, थनों को जोर-जोर से खींच कर दूध पी रहा था. लगभग 10 मिनट तक दूध चूसने के बाद उसने गाय के थन छोड़ दिए।
इस गाय को देखकर बार-बार मेरे दिमाग में माँ कि तस्वीर आ रही थी - मेरी माँ भी अच्छी-खासी मोटी हैं और उनके स्तन भी बहुत विशालकाय हैं, साथ-ही-साथ माँ के स्तनों में भी अत्यधिक दूध पैदा होता है। सुबह उठकर जब माँ मुझे पहली बार दूध पिला रही होती हैं तो उनकी एक चूची को चूसकर मैं दूध पी रहा होता हूँ और दूसरी चूची को ब्रेस्ट पम्प चूसकर दूध निकाल रहा होता है।
मम्मी को ये दोनों काम बहुत पसंद हैं - माँ मुझे दिन में 6 घंटे अपने सीने से लगाकर अपनी चूचियां चुस्वाकर दूध पिलाती थी, और नियमित तौर पर ब्रेस्ट पम्प से अपने स्तनों का दूध निकालती हैं - बिलकुल किसी गाय की तरह।
ये सोचते समय मेरे दिमाग में ये बात घर कर गयी कि अब से माँ के स्तनों के दूध को ब्रेस्ट पम्प चूसकर नहीं निकालेगा बल्कि मैं माँ के स्तनों को खींचकर माँ का दूध दुहूँगा। आधी रात को जब मम्मी गहरी नींद में सो थीं तो मैं किचन में गया और मैंने ब्रेस्ट पम्प की मोटर के तार काट दिए और मन ही मन बहुत खुश हुआ कि अब कल सुबह जब मम्मी उठेंगी और दूध निकालने के लिए जब पम्प को अपने स्तनों से लगाएंगी और पम्प नहीं चलेगा, तो फिर माँ के स्तनों से अत्यधिक दूध निकालने के लिए मैं ....
उसी समय मुझे मम्मी किचन में घुसती हुई दिखाई दी।

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02-22-2013, 01:03 PM
Post: #4
RE: मेरी माँ डेयरी गायों से भी अधिक दूध देती है
माँ को गाय बनाकर उनका दूध दुहा

माँ उजली ब्लाउज और पेटीकोट पहनी हुयी थीं. माँ ने ब्लाउज के अंदर अपने भारी-भरकम स्तनों को सहारा देने के लिए जालीदार ब्रा पहन रखी थी. मम्मी को देखकर मैं व्याकुल हो गया.
माँ: “आज तो तू मुझसे पहले ही उठ गया, क्या हुआ?”
मैं: “कुछ नहीं मम्मी, बस नींद नहीं आ रही थी.”
मम्मी मेरे बगल में आ कर बैठ गयीं. सुबह के समय मम्मी के स्तनों में सबसे ज्यादा दूध पैदा होता है और माँ के पूरी तरह तने हुए विशालकाय स्तन इस बात की गवाही दे रहे थे. मेरे हाथ अपने आप ही माँ के स्तनों की तरफ बढ़ गए और मैंने अपनी हथेलियों को ब्लाउज के ऊपर से ही स्तनों पर फेरने लगा.
माँ: “ मेरे स्तन दूध से पूरी तरह भर गए हैं. न जाने मेरे स्तनों में दूध का उत्पादन इतना ज्यादा क्यों होता है?”
माँ ने एकदम सही बात कही थी. मैंने माँ के स्तनों को कभी दूध से खाली नहीं देखा था. जब कभी भी मैं माँ की चूचियां चूसता हूँ तो माँ के स्तन मुझे ढेर सारा मीठा दूध पिलाते हैं. हर रोज मम्मी मुझे 6 घंटे से भी ज्यादा दूध पिलाती हैं और मैं कोई छोटा बच्चा नहीं जो धीरे-धीरे दूध चूसता है, मैं बहुत तेज़ी से दूध पीता हूँ. साथ ही साथ सुबह नाश्ते में corn flakes, bournvita और जूस में, दोपहर को चावल में और रात को खीर में अपने स्तनों का दूध ही इस्तेमाल करती हैं. इसके बाद भी माँ को दिन में दो बार अपने स्तनों को ब्रेस्ट पम्प से दूह कर ढेर सारा दूध निकलती हैं और इस दूध के milk products बनाती हैं.
माँ ने अभी अलमारी से ब्रेस्ट पम्प निकाला है.माँ हर रोज सुबह मुझे दूध पिलाने के साथ-साथ अपने स्तनों से दूध भी निकलती हैं. माँ ने ब्रेस्ट पम्प को ज़मीन पर अपने सामने रखा और अलमारी से टिक कर बैठ गयीं. फिर उन्होंने पम्प का स्विच ऑन किया पर मोटर तो चालू नहीं हुआ. होता भी कैसे, कल रात में मैंने तार जो काट दिए थे. मम्मी परेशान हो गयी और बार-बार स्विच ऑन-ऑफ करके देखने लगी पर पम्प नहीं चला. मुझे अपना प्लान कामयाब होता नज़र आ रहा था जिससे मेरी धडकन तेज हो गयी और मैं जोर-जोर से माँ के स्तनों को सहलाने लगा.
मैं: “ क्या हुआ माँ, आप परेशान लग रही हैं?”
माँ: “ अरे पम्प तो खराब हो गया. अब मैं कैसे अपना दूध दूहूँगी? मैंने तो सोचा था कि 5 लीटर दूध निकाल कर आज मैं पनीर बनाउंगी पर अब क्या करूं मैं?”
माँ की चूचियां सूज कर इतनी मोटी हो गयी थी कि ब्रा पहने होने के बाद भी ब्लाउज के बीच में उनका निशान बन रहा था. मैं अपनी उँगलियों को चूचियों के आस-पास गोल-गोल घुमा कर माँ के स्तनों से खेल रहा था.
माँ ने थोड़े गुस्से में कहा, " मैं यहाँ परेशान हूँ कि अपना दूध कैसे दुहुंगी और तू जो मेरी चूचियों से खेले जा रहा है, वो मुझे कुछ सोचने नहीं दे रहा है?"
मुझे इसी मौके का इंतज़ार था कि जब माँ को कोई आईडिया नहीं समझ में आएगा तो मैं माँ को आसानी से मना पाऊँगा.
मैं: " माँ, अगर आप चाहे तो मैं आपके स्तन दुह दूंगा."
मैंने माँ की ब्लाउज के हुक भी खोलने शुरू कर दिए.
माँ: " तू मेरा दूध दुहेगा, मगर कैसे?"
मैं: "वैसे ही जैसे दूधवाला गाय का दूध दुहता है."
माँ को जैसे बहुत बड़ा झटका लग गया हो.
माँ: " ये तू क्या कह रहा है, बेटा? तू अपनी माँ को ही गाय बनाकर उसका दूध दुहेगा. बेशरम कहीं का."
मैं: " माँ, मैंने तो आपके आराम के बारे में ही सोचकर ये बात कही थी. "
मैंने माँ की ब्लाउज के सभी हुक खोल दिए थे और जैसे ही माँ के विशालकाय स्तनों को सँभालने वाली ब्रा प्रदर्शित हुयी, मैंने अपने दोनों हथेलियों से माँ के स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही मसल दिया. माँ के स्तनों में अत्यधिक दूध का दवाब पहले से ही था; मेरे स्तनों को मसलते ही माँ के मुंह से दर्द भरी आह निकल आई.
माँ: "धीरे-धीरे दबा मेरे स्तनों को, अभी दर्द कर रहे हैं."
मैं: " और अगर आपने मुझे दूध दुहने नहीं दिया तो फिर आपके स्तन दिन भर दर्द करते रहेंगे."
कहकर मैंने एक बार फिर माँ के दोनों स्तनों को दबा दिया जिससे फिर माँ को दर्द हुआ.
माँ: " आह..प्रेम...तू सही कह रहा है. जब तक मेरे स्तनों में ज्यादा दूध रहेगा, तब तक ये दर्द करते ही रहेंगे. अब स्तनों का दूध तो दुहना ही पड़ेगा अगर मुझे दर्द से आराम चाहिए "
मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था. मैं माँ की ब्लाउज को कन्धों के रास्ते खिसका कर खोलने लगा और अब माँ सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी. मैंने अपनी हथेलियों को स्तनों के नीचले हिस्से में सहारा देकर माँ के स्तनों को उठाकर खेलने लगा.
मैं: " ओह माँ, ऐसा लग रहा जैसे कि आप के विशालकाय स्तन तो आपकी ब्रा फाड़ कर बाहर निकल जायेंगे. जल्दी से इन्हें ब्रा से बाहर निकालिए.फिर आप देखिएगा माँ कि मैं कितने अच्छे तरीके से आपके स्तनों का दूध चूसुंगा और दुहुंगा."
माँ: " मुझे बहुत अजीब लग रहा है, बेटा."
मैं: " क्या हुआ, माँ?"
माँ: " अपने बच्चे के सामने मैं गाय की तरह खड़ी रहूंगी और मेरा बेटा अपने हाथों से मेरे स्तनों को खींच-खींचकर बाल्टी में मेरा दूध दुहेगा, ये सोच कर मुझे बहुत शर्म आ रही है."
मैं: "इसमें शर्म वाली कौन सी बात है, माँ? अगर माँ के बड़े स्तन दूध से भारी हो रहे हैं तो बच्चा ही तो खेलेगा उन स्तनों से. "
माँ:" तू सही ही कह रहा है, प्रेम. और वैसे भी घर में अभी कोई नहीं है, तू जितनी देर चाहे आज उतनी देर खेलना अपनी माँ के स्तनों से ."
माँ उठ कर खड़ी हो गयी और पास ही पड़े टेबल के पास चली गयी.
माँ: “ बेटा, वो छोटी वाली बाल्टी ले आना, उसी में मेरा दूध दुहना.”
मैं हाथ में बाल्टी उठाकर माँ के पास जाता हूँ. माँ टेबल से थोड़ी-सी दूरी पर इस तरह झुक जाती हैं कि उनकी हथेलियाँ टेबल के किनारे का सहारा ले रही थी. माँ ने ज़मीन पर अपने चारों ‘limbs’ इसलिए नहीं रखे थे क्योंकि माँ के स्तन इतने बड़े हैं कि उस स्थिति में माँ के स्तन ज़मीन को छूने लगते. माँ के झुकते ही माँ के स्तन भारीपन की वज़ह से ब्रा के अंदर से स्तन पूरी लम्बाई तक लटक गए. मैं इस तरह टेबल के पास माँ के स्तनों के बगल में बैठ गया कि माँ की चूचियां मेरे चेहरे तक आ रही थीं. मैंने अपनी हथेलियाँ माँ के स्तनों पर रख दी और गोल-गोल फेरने लगा.
मैं: “मैं आपके इन कोमल भारी स्तनों से दिन भर खेल सकता हूँ.”
मैंने अपनी उँगलियों के बीच में ब्रा से स्पष्ट तौर पर उभर आई माँ की मोटी सूजी चूचियों को पकड़ा और ज़रा-सी ताकत लगाकर चूचियों को ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही खींचा. माँ कराह उठी.
माँ: “आह, मेरी सूजी चूचियां, ये कितनी संवेदनशील हो गयी हैं..आह, बेटा अब तुम ज़ल्दी से मेरे स्तनों को दुहना शुरू करो नहीं तो दूध अपने आप ही बहना शुरू हो जाएगा और दूध बर्बाद हो जाएगा. अब जल्दी से मेरे स्तनों को उघाड़ दो और इन्हें दुहना शुरू करो.”
मैं: “इतनी जल्दी क्या है मम्मी, अभी तो मुझे आपके स्तनों से कुछ देर और खेलना है.”
मैंने माँ की ब्रा के ऊपर से ही स्तनों के निचले हिस्से पर अपनी हथेलियाँ रखी और माँ के स्तनों को हथेलियों से आगे कि तरफ झटका देने लगा. माँ के स्तन झूलने लगे. फिर मैंने अपनी हथेलियाँ माँ के स्तनों के उपरी हिस्से पर फेरनी शुरू कर दी. माँ के स्तनों के उपरी हिस्से पर अपना हाथ पूरे स्तनों पर फेरकर मैं फिर से अपनी हथेलियों को स्तनों के अगले हिस्से से होए हुए निचले हिस्से तक ले आया और फिर स्तनों के नीचले हिस्से को सहलाते हुए स्तनों के अगले हिस्से पर हाथ फेरते हुए स्तनों के उपरी हिस्से को सहलाने लगा. माँ के स्तन काफी तेज़ी से झूल रहे थे और इसके कारण माँ की ब्रा धीरे-धीरे स्तनों के ऊपर खिसक रही थी. स्तनों के नीचले हिस्से का कुछ भाग प्रदर्शित हो गया था. माँ को भी अपने स्तनों को सहलाये जाने में मज़ा आ रहा था.
माँ: “ आह, बेटा, जब भी तू मेरे स्तनों को सहलाता है तो मुझे बहुत मज़ा आता है और मुझे पता है कि तुझे भी मेरे स्तनों का मर्दन करना बहुत पसंद है पर अभी मेरे स्तन दूध से लबालब भरे हुए हैं. ज़रा सा भी दबाव पड़ने पर मेरी चूचियां दूध निकालने लगेंगी. और मैं अपने स्तनों के दूध की एक भी बूँद बर्बाद नहीं होने देना चाहती हूँ. या तो मेरा दूध तेरे मुंह में गिरेगा या फिर दूध की बाल्टी में. इसलिए पहले तू मेरे स्तनों को उघाड़ कर इनमें से थोडा दूध पहले निकाल दे, फिर तेरा जैसे मन करे वैसे तू मेरे स्तनों से खेलना.”
माँ की बात सुनकर मैंने माँ के स्तनों को फिर से हलके झटके देकर झुलाया. माँ के स्तनों के ऊपर से ब्रा खिसकते-खिसकते उन्हें प्रदर्शित करने लगी.
मैं: “ देखिये माँ, मुझे कुछ करने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी, आपके स्तन तो खुद ही आपकी ब्रा में से निकलने को बेताब है.”
माँ के स्तनों पर हाथ फेरने से माँ कि ब्रा और खिसक गयी पर माँ कि सूजी चूचियों पे अटक गयी. मैंने फिर माँ के स्तनों के उघडे हिस्से पर अपनी हथेलियाँ फेरते हुए ब्रा के अंदर मैंने हाथ घुसाए और जब मेरी उंगलियां माँ की चूचियों तक पहुँच गयी तो मैंने माँ की ब्रा को चूचियों के ऊपर उठा दिया और फिर अपनी हथेलियों से ब्रा को माँ के स्तनों के ऊपर खिसका दिया जिससे कि माँ के दोनों स्तन पूरी तरह उघड गए.

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