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मियां के लंड से बीवी परेशान
05-04-2014, 02:51 PM
Post: #1
Wank मियां के लंड से बीवी परेशान
अशोक एक गठीले बदन वाला कड़ियल जवान है| उसका कपड़ों का थोक का व्यापार लखनऊ और कानपुर के आस पास के छोटे छोटे शहरों कस्बों और गाँवों के फुटकर व्यापारियों में फैला है जिसे वो लखनऊ में रहकर चलाता है। उसे अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहरों, कस्बों और गाँवों में आना जाना पड़ता है. उसे अक्सर रात में भी यहाँ वहाँ रुकना पड़ता है। जब उसकी उम्र थोड़ी कम थी वो अपनी जिस्मानी जरुरतों को पूरा करने के लिए यहाँ वहाँ बदमाश लडकियों में मुंह मार लेता था| पर जब वो उन्नीस साल का हो गया तब उसके हथियार के साइज़ और उसकी प्रचंड चोदन शक्ति की वजह से बड़ी से बड़ी चुदक्कड़ औरतें भी उसके नीचे आने से कतराने लगीं।
दरअसल उसका लंड नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा था और वो इतनी देर में झड़ता था कि जो औरत, यहाँ  तक की रंडियां भी, एक बार उस से चुदवा लेती तो दोबारा उसके पास नहीं फटकती थीं| धीरे धीरे वो इतना बदनाम हो गया की जब वो रात में किसी शहर या गांव में रुकता तो उसे जांघों के बीच लंड दबा के सोना पड़ता क्योंकि सब औरते उसके बारे में जान गयीं थीं.
पर इसी बीच बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा| अशोक पास के एक कस्बे में व्यापार के सिलसिले में गया था| वहां के फुटकर व्यापारियों से हिसाब किताब करते रात हो गयी तो उन लोगो ने पड़ोस की एक विधवा अधेड़ औरत चम्पा से गुजारिश करके उसके यहाँ अशोक के रुकने का इंतजाम कर दिया. ये विधवा किसी दूर के गाँव से अपनी जवान खुबसूरत गदराई हुई भतीजी महुआ, जिसके माँ बाप कुछ धनदौलत छोड़ गए थे, उसे बेच-बाच के ये मकान लेकर यहाँ रहने के लिए आई थी. क्योंकि उन्हें आये हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ था अतः ये लोग अशोक की असलियत नहीं जानते थे| अशोक को महुआ पसंद आ गई| उसने चम्पा से उसका हाथ मांग लिया और दोनों का विवाह हो गया।
सुहागरात को अशोक ने दुलहन का घूँघट उठाया महुआ की खूबसूरती देख उसके मुंह से निकला “सुभान अल्लाह ! मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत इतनी अच्छी है।” ऐसा कहते हुए अशोक ने अपने होंठ उसके मदभरे गुलाबी होठों पर रख दिये। महुआ को चूमते समय उसके बेल से स्तन अशोक के चौड़े सीने पर पूरी तरह दब गये थे वो उसके निप्पल अपने सीने पर महसूस कर रहा था । महुआ की फ़ूली बुर पर उसका लण्ड रगड़ खा कर साँप की तरह धीरे धीरे फ़ैल रहा था। महुआ की बुर गर्म हो भी उसे महसूस कर रही थी जिस्मों की गरमी में सारी शरम हया बह गई और अब महुआ और अशोक सिर्फ़ नर मादा बचे थे अशोक की पीठ पर महुआ की और महुआ की पीठ पर अशोक की उँगलियाँ धसती जा रही थी । दोनों ने एक दूसरे को इतनी जोर से भींचा कि अशोक के शर्ट के बटन और महुआ का ब्लाउज चरमरा के फ़टने लगे अपने जिस्मों की गर्मी से पगलाये दोनो ने एक दूसरे की शर्ट और ब्लाउज उतार फ़ेंकी । अब महुआ ब्रा और पेटीकोट में और अशोक अन्डरवियर मे था। साँसों की तेज़ी से महुआ का सीना उठ-बैठ रहा था और उसके बेल से स्तन बड़ी मस्ती से ऊपर नीचे हो रहे थे। अशोक ने उन्हें दोनो हाँथों में दबोच कर, उन पर जोर से मुँह मारा। इससे उत्तेजित हो महुआ ने उसका टन्नाया हुआ हलव्वी लण्ड जोर से भीच दिया । तभी अशोक ने उसके पेटीकोट का नारा खीच दिया| महुआ की मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों से पेटीकोट नीचे सरक गया। अशोक पागलों की तरह उसके गदराये जिस्म मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों को दबोचने टटोलने लगा। महुआ से अब रहा नहीं जा रहा था, सो उसने अशोक का लण्ड खीचकर अपनी बुर के मुहाने पर लगाया और तड़पते हुए बोली, "आहहहहहह! अब घुसा दो नहीं तो मैं अपने जिस्म की गर्मी में जल जाऊँगी| हाय राजा, अब मत तड़पाओ।"
अब अशोक ने और रुकना मुनासिब नहीं समझा। महुआ की टाँगें फ़ैला और एक हाथ उसकी गुदाज चूतड़ों पे घुमाते हुए दूसरे से अपना खड़ा, कड़क, मोटा, गर्म लण्ड पकड़ कर महुआ की फ़ूली हुई पावरोटी सी बुर के मुहाने पर रगड़ते हुए बोला, "ले महुआ, अब तेरी बुर अपना दरवाजा खोल कर चूत बनने जा रही है।"
महुआ ने सिसकारी ली और आँखें बंद कर लीं। महुआ को पता था कि पहली चुदाई में दर्द होगा, वो अब किसी भी दर्द के लिये तैयार थी। लंड का सुपाड़ा ठीक से महुआ की बुर के मुँहाने पे रख कर अशोक ने ज़ोर लगाया। बुर का मुँह ज़रा सा खुला और सुपाड़ा आधा अंदर घुस गया।
महुआ दर्द से कराही, "इस्स्स्स्स्स्स अशोक।"
वो महुआ की कमर पकड़ कर बोला, "घबरा मत महुआ, शुरू में थोड़ा दर्द तो होगा| फ़िर मजा आयेगा।"
महुआ की कमर कस कर पकड़ कर अशोक ने लण्ड अंदर धकेला पर बुर फ़ैलाकर लण्ड का सुपाड़ा बुर में आधा घुस कर अटक गया था। महुआ ने दर्द से अपने होंठ दाँतों के नीचे दबा लिये और अब ज़रा घबराहट से अशोक को देखने लगी। महुआ की बुर को अपने लण्ड का बर्दास्त करने देने के लिये अशोक कुछ वक्त वैसे ही रहा और महुआ का गदराया गोरा गुलाबी जिस्म सहलाते हुए उसके बेल से स्तन की घुन्डी चूसने लगा, जब अशोक को एहसास हुआ कि महुआ की साँसें सामन्य हो गयी हैं तो फिर अपनी कमर पीछे कर के, महुआ को कस कर पकड़ कर पूरे ज़ोर से उचक के धक्का दिया। इस हमले से अशोक के लण्ड का सुपाड़ा महुआ की कम्सिन, अनचुदी बुर की सील की धज्जियाँ उड़ाते हुए पूरा अन्दर हो गया । अशोक के इस हमले से दर्द के कारण महुआ, अशोक को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी और अपनी चूत से अशोक का लण्ड निकालने की नाकाम कोशिश करते हुए ज़ोर से चिल्ला उठी, "आहहहहहहहह...! उ़़फ्फ़्फ़्फ़़... ! निकालो बाहर..., अशोक| मेरी  फ़ट रही है।"
ये देख कर अशोक ज़रा रुका और महुआ का एक निप्पल होठों मे दबाके चुभलाने लगा । अशोक के रुकने से महुआ की जान में जान आयी। उसे अपनी बुर से खून बहने का एहसास हो रहा था । अशोक महुआ के बेल से स्तन की घुन्डी चूस रहा था, उसका गदराया गोरा गुलाबी जिस्म सहला रहा था जब अशोक को एहसास हुआ कि महुआ की साँसें अब सामन्य हो गयी हैं और वो धीरे धीरे अपनी बुर को भी आगे पीछे करने लगी तो उसने हल्के से लण्ड का सुपाड़ा दो-तीन बार थोड़ा सा आगे पीछे किया। पहले तो महुआ के चेहरे पर हलके दर्द का भाव आया फ़िर वो मजे से "आहहहहह, ओहहहहह" करने लगी । पर जब कुछ और धक्कों के बाद महुआ ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ अशोक की तरफ़ देखा, तो अशोक समझ गया कि महुआ की चूत का दर्द अब खतम हो गया है। अबकी बार अशोक ने लण्ड का आधा सुपाड़ा बाहर निकाला और फ़िर से धीरे से चूत में धक्का मारा। पर लण्ड का सुपाड़ा फ़िर से चूत में घुस कर अटक गया और महुआ ज़ोर से चिल्ला उठी, "आहहहहहहहह! मर गयी रे! ईईईईईई..., उ़़फ्फ़्फ़्फ़़..., बस अशोक, अब और मत डालो।"
अनुभवी अशोक समझ गया कि ये इससे ज्यादा बर्दास्त नहीं कर पायेगी सो मन मार के उसे सुपाड़े से ही चोदने लगा| अशोक को इसमें ज्यादा मजा तो नहीं आया पर उसे महुआ के गदराये गुलाबी जिस्म से खेलने और उसके मम्मों को चूसने का सुख तो मिला| काफ़ी मशक्कत के बाद वो उसकी छोटी सी चूत में झड़ने में कामयाब हो ही गया| इस बीच उसकी हरकतों से महुआ झड़ी तो सही पर बुरी तरह थक गई। इसीलिए मजा आने के बावजूद महुआ ने अगले दिन चुदने से इन्कार कर दिया| और फ़िर पहले दिन की थकान और घिसाई के बारे में सोच कर हर रोज ही चुदवाने में टालमटोल करने लगी। घर में सुन्दर बीबी होते हुए बिना चोदे जीवन बिताना अशोक के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था| अत: अशोक ने झूठ का सहारा लिया| एक दिन उसने महुआ से कहा कि उसके पेट में दर्द है और वो डाक्टर के यहाँ जा रहा है| वहाँ से लौट कर उसने महुआ को बताया कि डाक्टर ने दर्द की वजह चुदाई की कमी बताया है और कहा है कि ये दर्द चुदाई करने से ही जायेगा। ये सुन कर महुआ चुदने को तैयार हो गई पर उसने सुपाड़े से ज्यादा अपनी चूत में लेने से इन्कार कर दिया क्योंकि उसे सचमुच बहुत दर्द होता था। अशोक भी जो कुछ मिल रहा है उसी को अपना भाग्य समझ इस आधी-अधूरी चुदाई पर ही सन्तोष कर जीवन बिताने लगा।
इसी बीच अशोक व्यापार के सिलसिले में जिस कसबे में उसकी ससुराल थी, वहाँ गया। फुटकर व्यापारियों से हिसाब किताब करते रात हो गयी तो सास से मिलने रात ही में पहुंच पाया और रात में वापस आना ठीक न समझ ससुराल में ही रुक गया| उसे देख उसकी विधवा सास चम्पा बहुत खुश हुई। महुआ की तरह वह भी उन्हें चाची ही कहता था। चाची की उम्र यही कोई 40 या 42 साल के आस पास होगी। उनका रंग गोरा डील डौल थोड़ा भारी पर गठा कसा हुआ था|  वो तीस पैंतिस से ज्यादा की नहीं लगती थी|
अशोक ने पाँव छुए तो वो झुककर उसे कन्धे पकड़ उठाने लगीं| उनके सीने से आंचल ढलक गया और चाची के हैवी लंगड़ा आमों जैसे स्तनों को देख अशोक सनसना गया।
चाची बोली- “अरे ठीक है ठीक है आओ आओ बेटा मैं रोटी बना रही थी इधर रसोईं मे ही आ जाओ जब तक तुम चाय पियो तब तक मैं रोटी निबटा लूँ।
अशोक ने महसूस किया कि चाची ने ब्रा नहीं पहनी है उसने सोचा शायद रसोई की गर्मी से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया हो।
चाची ने उसे चाय पकड़ाते हुए पूछा – “ महुआ कैसी है?”
बोला-“जी ठीक है।”
अशोक डाइनिंग टेबिल की कुर्सी खींच के उनके सामने ही बैठ गया। चाची रोटी बेलते हुए बातें भी करती जा रहीं थी। उनके लो कट ब्लाउज से फ़टे पड़ रहे उनके कटीले आम जैसे स्तन रोटी बेलते पर और भी छ्लके पड़ रहे थे। जिन्हें देख देख अशोक का दिमाग खराब हो रहा था। वो उनपर से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहा था। उसने सोचा ये कोई महुआ की माँ तो है नहीं चाची है मेरा इसका क्या रिश्ता?
अगर मैं इसे किसी तरह पटा के चोद लूँ तो क्या हर्ज है, कौन सा पहाड़ टूट जायेगा। उसने आगे सोचा आज तो महुआ भी साथ नही है मकान में सिर्फ़ हमीं दोनों हैं पता नहीं ऐसा मौका दोबारा कभी मिले भी या नहीं ये सोंच उसने चाची को आज ही पटा के चोदने का पक्का निश्चय कर लिया। वो चाय पीते और उन कटीली मचलती चूचियों को घूरते हुए चाची को पटाने की तरकीब सोचने लगा।
तभी चाची बोली- क्या सोच रहे हो बेटा? बाथरूम में पानी रखा है| नहा धो के कुछ खा लो| दिन भर काम करके थक गये होगे।”
अशोक(हड़बड़ा के) – “मैं भी नहाने के ही बारे में सोंच रहा था।”
ये कहकर वो जल्दी से उठा और के नहाने चला गया। नहाते नहाते उसने महुआ की चाची को पटा के चोदने की पूरी योजना बना ली थी। नहा के अपने कसरती बदन पर सिर्फ़ लुन्गी बांध कर वो बाहर आया और जोर जोर से कराहने लगा। कराहने की आवाज सुन चाची दौड़ती हुई आयीं पर अचानक अशोक के कसरती बदन को सिर्फ़ लुन्गी में देख के सिहर उठीं।
वो बोली- “क्या हुआ अशोक बेटा।”
अशोक (कराहते हुए)- “आह! पेट में बड़ा दर्द है चाची।”
चाची बोली- “तू चल के कमरे में लेट जा, बेटा| मेरे पास दवा है, मैं देती हूँ |अभी ठीक हो जायेगा।”
वो उसे सहारा दे के उसके कमरे की तरफ़ ले जाने लगी सहारा लेने के बहाने अशोक ने उन्हें अपने गठीले बदन से लिपटा लिया। अशोक के सुगठित शरीर की मांसपेशियाँ बाहों की मछलियाँ चाची के गुदाज जिस्म में भी उत्तेजना भरने लगी पति की मौत के बाद से वो किसी मर्द के इतने करीब कभी नहीं आई थीं ऊपर से अशोक का शरीर तो ऐसा था जैसे मर्द की कोई भी औरत कल्पना ही कर सकती है। बाथरूम से कमरे की तरफ़ जाते हुए उसने देखा कि उत्तेजना से चाची के निपल कठोर हो ब्लाउज में उभरने लगे हैं वो मन ही मन अपनी योजना को कामयाबी की तरफ़ बढ़ते देख बहुत खुश हुआ। जैसे ही वो चाची के कमरे के पास से निकले वो जान बूझ के हाय करके उसी कमरे में घुस उन्हीं के बिस्तर पर लेट गया जैसे कि अब उससे चला नहीं जायेगा।
चाची ने उसे अपना अचूक चूरन देते हुए कहा- “ये ले बेटा ये चूरन| कैसा भी पेट दर्द हो ठीक कर देता है।” 
अशोक चूरन खाकर फ़िर लेट गया चाची बगल में बैठ उसका पेट सहलाने लगीं काफ़ी देर हो जाने के बाद भी अशोक कराहते हुए बोला-“हाय चाची मर गया हाय बहुत दर्द है ये दर्द जब उठता है कोई दवा कोई चूरन असर नहीं करता। इसका इलाज तो यहाँ हो ही नही सकता इसका इलाज तो महुआ ही कर सकती है।”
चाची ने अपने अचूक चूरन का असर न होते देख पूछा- “आखिर ऐसा क्या इलाज है जो महुआ ही कर सकती है।”
अशोक कराहते हुए बोला-“हाय चाची मैं बता नहीं सकता| बताने लायक बात नहीं है। हाय मर गया, बड़ा दर्द है चाची।”
चाची ने फ़िर पूछा- “बीमारी में शर्माना नहीं चाहिये| यहां मेरे सिवा और तो कोई है नहीं| बता आखिर ऐसा क्या इलाज है जो महुआ ही कर सकती है।”
अशोक कराहते हुए बोला-“ चाची, आप नहीं मानती तो सुनिये| ये दर्द सिर्फ़ औरत के साथ सोने से जाता है| अब महुआ होती तो काम बन जाता। हाय, बड़ा दर्द है मर गया।”
अशोक का पेट सहलाते हुए चाची ने उसके सुगठित शरीर की मांसपेशियों बाहों की मछलियों की तरफ़ देखा और उन्हें ख्याल आया इस एकान्त मकान में वो यदि इस जवान मर्द के साथ शारीरिक सुखभोग लें तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। ये सोच उनके अन्दर भी जवानी अंगड़ाइयाँ लेने लगी। वो अशोक को सान्त्वना देने के बहाने उसके और करीब आकर सहलाने गयीं यहाँ तक कि उनका शरीर अशोक के शरीर से छूने लगा वो बोलीं- “ये तो बड़ी मुसीबत है बेटा।”
चाची की आवाज थरथरा रही थी। अशोक कराहते हुए बोला-“हाँ चाची, डाक्टर ने कहा है कि इसका और कोई इलाज नहीं है।”
तभी अशोक के पेट पर सहलाता चाची का हाथ बेख्याली या जानबूझकर अशोक के लण्ड से टकराया सिहर कर चाची ने चौंककर उधर देखा, लुंगी में कुतुबमीनार की तरह खड़े उसके लण्ड के आकर का अनुमान लगा कर उसे ठीक से देखने की अपनी इच्छा को चाची के अन्दर की जवान और भूखी औरत दबा नहीं पायी और अशोक के पेट दर्द की बीमारी का नाजुक मामला उन्हें इसका माकूल मौका भी दे रहा था। सो चाची ने बीमारी के मोआयने के अन्दाज में लुन्गी हटाके उसका नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा लण्ड थाम लिया उसके आकार और मर्दानी कठोरता को महसूस कर चाची के अन्दर की जवान औरत की जवानी बुरी तरह से अंगड़ाइयाँ लेने लगी। अपनी उत्तेजना से काँपती आवाज में वे बोल उठी, “अरे बेटा, यह तो खड़ा है! क्या पेट दर्द की वजह से?”
अशोक(लण्ड अकड़ा के उभारते हुए) – “और क्या,चाची! हाय इसे छोड़ दें।”
चाची की आवाज उत्तेजना से काँपने के अलावा अब उनकी साँस भी तेज चलने लगी थी। वो अशोक के लण्ड को सहलाते हुए बोलीं- “अगर मैं हाथ से मसल के इसे शांत कर दूँ तो तेरा दर्द चला जायेगा।”
अशोक- “ये ऐसी आसानी से झड़ने वाला नहीं है, चाची।”
चाची ने सोचा एकान्त मकान, फ़िर ऐसी मर्दानी ताकत (आसानी से न झड़ने वाला), ऐसी सुगठित बाहों की मछलियाँ वाला गठीला मर्द, ऐसे मौके और मर्द की कल्पना तो हर औरत करती है। फ़िर उन्हें तो मुद्दतों से मर्द का साथ न मिला था| ऐसे मौके और मर्द को हाथ से निकल जाने देना तो बेवकूफ़ी होगी।
सो चाची ने खुल के सामने आने का फ़ैसला कर लिया और जी कड़ा कर धड़कते दिल से बोल ही दिया- “बेटा, फ़िर तो तेरी जान बचाने का एक ही तरीका है| तू मेरे साथ कर ले।
अशोक-“अरे ये क्या कह रही हैं, चाची! ये कैसे हो सकता है। हाय, मैं मरा! आप तो महुआ की चाची यानि कि मेरी सास हैं। ”
चाची अशोक के मर्दाने सीने पर झुक अपने ब्लाउज में उभरते उत्तेजना से कठोर हो रहे निपल रगड़ लण्ड को सहलाते हुए बोलीं- ये सच है कि मैं महुआ की चाची हुँ इस नाते वो मेरी मुँहबोली बेटी हुई उसके एवज में मुँहबोली माँ का फ़र्ज मैं अदा कर चुकी उसकी शादी कर उसका घर बसा दिया उसी नाते मैं तेरी मुँहबोली सास हुँ अस्लियत में मेरा तेरा कोई रिश्ता नहीं। 
अशोक (दर्द से छ्ट्पटाने के बहाने लण्ड अकड़ा के उभारते हुए) - “मगर चाची……!
चाची अपनी धोती खींच के खोलते हुए बोली- “क्या अगर मगर करता है? तू मेरी महुआ बेटी का पति है| तेरी सास होने के नाते तेरी जान और तेरे शरीर की रक्षा करना मेरा फ़र्ज है।”
अशोक (उनके हाथ से झूठ्मूठ लण्ड छुटाने की कोशिश करते हुए)- “मगर चाची, बड़ी शरम आ रही है। हाय, ये दर्द……!!
चाची ने एक ही झटके में अपना चुट्पुटिया वाला ब्लाउज खोल अपने बड़े बड़े विशाल स्तन अशोक की आँखों के सामने फ़ड़फ़ड़ा के कहा- “ इधर देख बेटा| क्या मेरा बदन इस लायक भी नही कि तेरे इस पेट दर्द की दवा के काम आये।”
ये कह के चाची ने अपना पेटीकोट का नारा खींच दिया पेटीकोट चम्पा चाची के संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ों शानदार रेशमी जांघों से सरक कर उनके पैरों का पास जमीन पर गिर गया। चाची ने अशोक बगल में लेट अपना नंगा बदन के बदन से सटा दिया और अपनी एक जाँघ उसके ऊपर चढ़ा दी। अशोक उत्तेजाना से पागल हुआ जा रहा था।
उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक के जिस्म में चुभे तो अशोक बोला - “हाय चाची, कहीं कोई आ न जाय| कोई  जान गया तो क्या होगा!”
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05-04-2014, 02:54 PM
Post: #2
RE: मियां के लंड से बीवी परेशान
चाची – “अरे यहाँ कौन आयेगा? घर का दरवाजा बाहर से बन्द है| फ़िर भी आवाज बाहर न जाये इस ख्याल से मैं कमरे का दरवाजा भी बन्द कर लेती हुँ।”
ये कह वे जल्दी से उठ कमरे का दरवाजा बन्द करने जल्दी जल्दी जाने लगीं। उत्तेजना से उनका अंग अंग थिरक रहा था। वो आज का मौका किसी भी कीमत पर गवाना नही चाहती थी। अशोक दरवाजे की तरफ़ जाती चाची की गोरी गुदाज पीठ, हर कदम पर थिरकते उनके संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ शानदार रेशमी जांघें देख रहा था। दरवाजा बन्द कर जब चाची घूंमी तो अशोक को अपना बदन घूरते देख मन ही मन मुस्कराईं और धीरे धीरे वापस आने लगीं। अशोक एक टक उस अधेड़ औरत के मदमाते जवान जिस्म को देख रहा था। धीरे धीरे वापस आती चाची की मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत थी जो कभी जांघों के बीच विलीन हो जाती तो कभी सामने आ जाती। पास आकर चाची मुस्कुराती हुई उसके बिस्तर के दाहिनी तरफ़ इत्मिनान से खड़ी हो गईं क्योंकि अशोक को अपना बदन घूरते देख वो समझ गईं थी कि उसपर पर चाची के बदन का जादू चल चुका है। खड़े खड़े ही चाची ने उसकी लुंगी हटा कर उसका दस इन्ची लण्ड फ़िर से थाम लिया और हाथ फ़ेर के बोली – “ बेटा, ये इतना लम्बा और मोटा हथियर महुआ झेल लेती है?” 
अशोक- “ नहीं चाची, सिर्फ़ सुपाड़ा ही ले पाती है| किसी तरह सुपाड़े से चोद के ही मैं झड़ जाता हूँ| उससे कभी मेरी चुदाई की प्यास नहीं बुझी। डाक्टरों के अनुसार इसीलिए मुझे हमेशा पेट दर्द होता रहता है।”
अशोक का लण्ड सहलाती चाची के बड़े बड़े विशाल स्तन, उनके खड़े खड़े निपल, मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघें, जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत ने अशोक की बर्दास्त खत्म कर दी थी। उसने अपना दाहिना हाथ उनकी कमर के पीछे से डालकर उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक की मर्दानी छाती में धँस गये। अशोक ने महसूस किया कि चाची का बदन अभी तक जवान औरतों की तरह गठा हुआ है। 
वो उनके गुदाज कन्धे पर मुँह मारते हुए बोला- “मुझे आज पहली बार अपने पसन्द की औरत मिली है| बदन तो आपका ऐसा है चम्पा चाची कि मैं खा जाऊँ| मगर अब देखना है कि आपकी चूत मेरे लण्ड के जोड़ की है या नहीं।
चाची हँसते हुए बगल में लेट गई और उसका दस इन्ची लण्ड फ़िर से थाम कर हाथ फ़ेरते बोलीं- “अशोक, तेरे पेट का दर्द ठीक हो गया तो मानेगा कि ये चाची और उसकी चूत तेरे जोड़ की है।”
अशोक-“हाँ, चाची।
चाची, “तो आ जा|”
अशोक उठकर चाची की जाँघों के बीच बैठ गया और उनकी केले के तने जैसी सुडोल संगमरमरी रेशमी चिकनी और गुदाज मोटी मोटी रानों को सहलाते हुए बोला- “ आह चाची, आप कितनी अच्छी हो। बोलते हुए उसका हाथ चूत पर जा पहुँचा। जैसे ही अशोक ने पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत सहलाई चाची ने सिसकारी ली, "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
चाची ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी अब उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुंह खुला दिख रहा था अशोक ने अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुहाने पर टेक दिया। चाची ने सिसकारी ली –  "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
अशोक चूत के मुंह की दोनों फूली फांको के ऊपर अपना फौलादी सुपाड़ा घिसने लगा| चाची की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। उत्तेजना में आपे से बाहर हो चाची ने जोर से सिसकारी ली और झुन्झुलाहट भरी आवाज में कहा – "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह अब डाल न।”
ये कह चाची ने उसका लण्ड अपने हाथ से पकड़कर निशाना ठीक किया। ये देख अशोक ने उन्हें और परेशान करना ठीक नही समझा| उसने हाथ बढ़ाकर चाची की सेर सेर भर की चूचियाँ थाम लीं और उन्हें दबाते हुए लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला।
पक्क की आवाज के साथ सुपाड़ा चाची की चूत में घुस गया  पर चाची की चीख निकल गई- “आ---आ---ईईईईईह”
क्योंकि चाची की चूत में मुद्दतों से कोई लण्ड नहीं गया था सो वो दर्द से चीख पड़ी थीं पर अशोक को बिलकुल कोरी बुर का मजा आ रहा था।
अशोक – “ हाय चाची, आपकी चूत तो बहुत टाइट है| एकदम कोरी बुर जैसी लग रही है।”
चाची(बेकरारी से) – “हाय अशोक बेटा, तेरे लण्ड का सुपाड़ा मुझे भी सुहागरात का मजा दे रहा है| राजा, किस्मत से मुझे ऐसा मर्दाना लण्ड और तुझे अपनी टक्कर की चूत मिली है। महुआ के साथ सुपाड़े से मनाई आधी-अधूरी सुहागरात की भरपायी आज उसकी  चाची से कर ले| आज तू अपनी सास की चूत में पूरा लण्ड धंसा के अपने मन की सुहाग रात मना ले। पर अब जल्दी कर, मेरी चूत में आग लगी है।”
अशोक - “पर आप पूरा सह लोगी, चाची? आपकी चूत भी तो इतनी टाइट और छोटी सी ही लगती है| मैं आप को तकलीफ़ नहीं पहुँचाना चाहता। मुझे डर लगता है क्योंकि आज तक कोई औरत मेरा पूरा लण्ड नहीं सह पाई है।”
चाची – “अरे तू डर मत बेटा, मेरी चूत छोटी होने की वजह से टाइट नहीं है बल्कि इसका टाइट होना एक राज की बात है| वो मैं बाद में बताऊँगी| तू पहले पूरा लन्ड तो डाल| मेरी इतने सालों की दबी चुदास भड़क के मेरी जान निकाले ले रही है।
अशोक ने थोड़ा सा लण्ड बाहर खीच के फ़िर धक्का मारा तो थोड़ा और लण्ड अन्दर गया| चाची कराहीं– “उम्महहहहहहहहहहह।”
पर अशोक ने उनके कहे के मुताबिक  परवाह न करते हुए चार-पांच धक्कों में पूरा लण्ड उनकी चूत में ठूंस दिया 
जैसे ही अशोक के हलव्वी लण्ड ने चाची की चूत की जड़ बच्चेदानी के मुँह पर ठोकर मारी, उनके मुँह से निकला- “ओहहहहहहहहहहह! शाबाश बेटा।”
आज तक चाची ने जिस तरह के लण्ड की कल्पना अपनी चूत के लिए की थी अशोक के लण्ड को उससे भी बढ़ कए पाया उनके आनन्द का पारावार नहीं था। चाची ने अपनी टाँगे उठा के अशोक के कन्धों पर रख ली। अशोक ने उनकी जांघों के बीच बैठे बैठे ही चुदाई शुरू की। पॉव कन्धों पर रखे होने से लण्ड और भी अन्दर तक जाने लगा। उनके गोरे गुलाबी गद्देदार चूतड़ अशोक की जॉंघों से टकराकर उसे असीम आनन्द देने लगे। साथ ही उसको उनकी सगंमरमरी जॉंघों पिन्डलियों को सहलाने और उनपर मुँह मारने में भी सुविधा हो गई। उसके हाथ चाची की हलव्वी चूचियाँ थाम सहला रहे थे बीच बीच में वो झुककर उनके निपल जीभ से सहलाने और होठों में दबाके चूसने लगता। धीरे धीरे चाची के बड़े बड़े स्तनों पर उसके हाथों और होठों की पकड़ मजबूत होती गई और कमरे में सिसकारियॉ गूँजने लगी। चाची टॉगें ऊपर उठाकर फैलाती गईं अशोक की रफ्तार बढ़ती गई और अब उसका लण्ड धॉस के पूरा अन्दर तक जा रहा था। अब दोनों घमासान चुदाई कर रहे थे। अब चाची अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के चुदवाते हुए सिसकारियॉं भरते हुए बड़बड़ा रही थीं- “शाबाश बेटा! मिटा ले अपना पेट का दर्द और बुझा दे इस चुदासी चाची की उमर भर की चुदास| जी भर के चोद आज।
अशोक चाची के दबाने मसल़ने से लाल पड़ बडे़ बड़े स्तनों को दोनों हाथों में दबोचकर चूत में धक्का मारते हुए कह रहा था- “उम्म्ह… चाची, तुम कितनी अच्छी हो! इस तरह पूरा लण्ड धँसवा के आज तक किसी ने नही चुदवाया मुझसे| इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। उम्म.., उम्म..., उम्म! लो और लो चाची, आह!”
चाची (भारी चूतड़ उछाल उछाल के सिसकारियॉं भरते हुए) - “उंह..., उन्ह.., आह! बेटा, किसी लण्ड की कीमत उसके जोड़ की चूत ही जान सकती है| उन सालियों को क्या पता तेरे लण्ड की कीमत?  तेरा लंड तो लाखों मे एक है! बेहिचक चोदे जा.... जब तक तू यहाँ है रोज मेरी चूत को रगड़| मैं रोज तेरे लंड से अपनी चूत घिसवाऊंगी| ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म!!!!!!! अब तू जब भी यहाँ आयेगा मेरी चूत को अपने लण्ड के लिए तैयार पायेगा।
अब दोनों दनादन बिना सोचे समझे पागलों की तरह धक्के लगा रहे थे दोनों को पहली बार अपने जोड़ के लन्ड और चूत जो मिले थे। आधे घण्टे कि धुँआधार चुदाई के बाद अचानक अशोक के मुँह से निकला - आह चाची, लगता है मेरा होने वाला है। आआअह... अआआह... मैं झड रहा हूं।
चाची- “ उम्म... ईईई... आ जा बेटा, मैं भी झड़नेवाली हूँ।”
 “आह... चाची, आह... ये लो... ये लो...!”
झड़ने के बाद अशोक थक कर चाची के बदन पर बिछ सा गया। वो अपनी उखड़ी सॉसों को सम्हालने की कोशिश करते हुए उनका चिकना बदन सहलाने लगा।
चाची –“अब दर्द कैसा है, बेटा।“
अशोक उनके ऊपर से हट बगल में लेट कर बोला- अब आराम है, चाची। फ़िर मुस्कुरा के उनकी चूत पर हाथ फ़ेर के बोला- “आपकी इस दवा ने तो सारा दर्द निचोड़ लिया।”
चाची ने भी मुस्कुरा के उसकी तरफ़ करवट ली और अपनी गोरी मोटी मांसल चिकनी जाँघ उसके ऊपर चढ़ा लन्ड पे रगड़ते हुए बोलीं- “एक बात सच सच बताना बेटा, मैं बुरा नहीं मानूँगी। देख मैं भी उम्रदराज औरत हूँ| मैंने भी दुनियाँ देखी है| ये बता कि सचमुच तेरे पेट में दर्द था या तू सिर्फ़ मुझे चोदने का बहाना खोज रहा था।”
अशोक ने शर्मा कर कहा- “अब क्या बताऊँ, चाची। दरअसल चुदाई की इच्छा होने पर मुझे पेट दर्द होता है। जब आपको रसोई में सिर्फ़ धोती ब्लाउज में देखा……।”
“तो पेट दर्द शूरू हो गया”  चाची ने मुस्कुरा के वाक्य पूरा किया।
अशोक ने झेंपते हुए कहा- “अरे छोड़िये न, चाची”
कहते हुए उनके बायें स्तन के निपल को उंगलियों के बीच मसलते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदा के स्तन का निपल अपने होठों मे दबा उनके विशाल सीने में अपना मुँह छिपा लिया और उनके मांसल गुदाज बदन से लिपट गया. अब उसका लण्ड कभी चाची की मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों कभी भारी नितंबों तो कभी उनकी चूत से रगड़ खा रहा था।
अशोक झेंपते हुए मुस्कुरा के बात बदलने की कोशिश की- “अच्छा ये बताइये, आप कह रहीं थी कि चूत टाइट होना राज की बात है। कैसा राज?”
चाची – “ अरे हाँ बेटा, ये तो बड़े काम की बात याद दिलाई। तू कह रहा था कि महुआ तेरे लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही ले पाती है क्योंकि उसकी चूत बहुत छोटी है| पहले मेरी भी बहुत छोटी थी| मेरे मायके के पड़ोस मे एक वैद्यजी रहते हैं. उनका एक लड़का चन्दू था. जब मैं 15 साल की थी तो वो चन्दूजी 16 या 17 के होंगे। हमारा एक दूसरे के घर आना जाना भी था। अब ठीक से याद नहीं पर धीरे धीरे जाने कैसे चन्दूजी ने मुझे पटा लिया और एक दिन जब हम दोनों के घरों में कोई नहीं था वो मुझे अपने कमरे में ले गये और चोदने की कोशिश करने लगे. पर एक तो 15 साल की उम्र, ऊपर से जैसा मैंने बताया मेरी कुंवारी बुर मेरी अन्य सहेलियों के मुकाबले छोटी थी सो लण्ड नहीं घुसा| तभी चन्दू उठा और अपने पिताजी के दवाखाने से एक मलहम ले आया और  उसे मेरी बुर और अपने लण्ड पर लगाया| उसे लगाते ही बुर मे चुदास कि गर्मी और खुजली बढ़ने लगी| तभी वो अपना लण्ड मेरी बुर पे रगड़ने लगे| थोड़ी ही देर में मैं खुद ही अपनी बुर में उनका लण्ड लेने की कोशिश करने लगी और आश्चर्यजनक रूप से मैंने उनका पूरा सुपाड़ा अपनी बुर मे ले लिया| उस दिन उस से ज्यादा नही ले पाई| चन्दू जी ने भी सुपाड़े से ही चोद के संतोष कर लिया।
पर अब तो मुझे भी चस्का लग गया था| अगले दिन फ़िर मैं मौका देख कर उनके के पास पहुंची| वो बहुत खुश हुए और हम दोनों चुदाई करने की कोशिश करने लगे। पर आज मेरी चूत ने आधे सुपाड़े के बाद लण्ड को अंदर लेने से इन्कार कर दिया| चंदू जी ने कहा – “तुम यहीं रुको, मैं अभी इसका इंतजाम करता हूं|” वो जाने लगे तो मैंने पूछा कि क्या इंतजाम करोगे| उन्होंने बताया कि उनके वैद्य पिता एक अनोखा मलहम बनाते हैं (जो कि उन्होंने कल लगाया था)। अगर कम उम्र की लड़कियाँ उसे अपनी बुर पे लगा के चुदवाने की कोशिश करें तो धीरे धीरे कुछ ही समय में बुर में रबड़ जैसा लचीलापन आ जाता है पर बुर ढ़ीली नहीं होती| यहाँ तक कि भयंकर चुदक्कड़ बन जाने पर भी चूतें कुंवारी बुर सी टाइट रहती हैं पर साथ ही अपने लचीलेपन के कारण बड़े से बड़ा लण्ड लेने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। मैं बहुत खुश हुई।
इस बीच वे मलहम ले आये और मेरी चूत पर लगाने लगे. मैं तो चुदासी थी ही सो उनसे मलहम लगवा कर चुदने को तैयार हो गई। इस बार न मुझे कोई परेशानी हुई और न चंदू जी को| फिर तो यह रोज होने लगा और कुछ ही दिनों मैं आसानी से उनके पूरे लण्ड से चुदवाने लगी। मेरी बुर चुद के बुर से चूत बन गई पर देखने और इस्तेमाल करने मे पन्द्रह सोलह साल की बुर ही लगती रही| आज तूने भी देखा और महसूस किया है। चन्दूजी से गाँव की शायद ही कोई लड़की बची हो? धीरे धीरे वो बदमाश लड़कियों मे पहले चन्दू चाचा और फ़िर चोदू चाचा के नाम से मशहूर हो गये और अभी भी हैं। वो अभी भी अपने हुनर के उस्ताद है और नाम कमा रहे है।”
इतना बताते बताते चाची मारे उत्तेजना के हाँफ़ने लगीं क्योंकि एक तो उनकी ये गरमागरम कहानी ऊपर से उनके जिस्म पर अशोक की हरकतें, इन दोनों बातों ने उन्हें बहुत गरम कर दिया था। इस समय वो चाची की मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच अपना फ़ौलादी लण्ड दबाकर बारी बारी से उनके निपल चूसते हुए, अपने हाथों से उनके बड़े बड़े भारी नितंबों को दबोच टटोल रहा था।
अशोक ने पूछा – “चाची, क्या आप उनसे महुआ की चूत ठीक करवा सकती हैं?”
अशोक की हरकतों के कारण सिस्कारियाँ भरते हुए- “इस्स्स्स... उइइईई उम्म्म्म...! पर उसके लिए तो महुआ को चन्दू चाचा से चुदवाना पड़ेगा।”
अशोक बायें हाथ से चाची की पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैला, दायें हाथ से चूत के मुहाने पर अपने लण्ड का सुपाड़ा धीरे धीरे घिसते हुए बोला- “अरे तो कौन सी उसकी चूत घिस जायेगी? उल्टे आपकी तरह हमेशा के लिए जवान बनी रहेगी| साथ ही हमेशा के लिए सारी परेशानी दूर हो जायेगी सो अलग।”
चूत पे लण्ड घिसने से चाची की सिसकारियाँ और साँसे और भी तेज होने लगी – “ इस्स्स्स...  उइइईई... ! पर तुझे महुआ को फ़ुसलाकर चाचा से चुदवाने के लिए तैयार करना पड़ेगा।”
अशोक- “मेरे ख्याल से हम चुदाई करते हुए सोचें तो इसका कोई न कोई तरीका सूझ जायेगा।”
अचानक चाची ने एक झटके से उसे पलट दिया और बोली- “अच्छा ख्याल है, तू आराम से लेटे लेटे चाची से चुदवाते हुए सोच और चाची का कमाल देख इस बार मैं चोदूंगी|  तुझे ज्यादा मजा आयेगा जिससे सोचने में आसानी होगी और तेरा बचखुचा दर्द भी चला जायेगा।”
वो अशोक के ऊपर चढ़ गयी और बायें हाथ की दो उँगलियों से अपनी पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैलाये और दायें हाथ से उसके लण्ड को थाम, उसका सुपाड़ा अपनी, चुदास से बुरी तरह पनिया रही अपनी चूत के मुहाने से सटाया और दो ही धक्कों में पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया और सिसकारियॉं भरते हुए अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी चूतड़ उछाल उछाल कर धक्के पे धक्का लगाने लगी ।
अशोक के लिए ये बिलकुल नया तजुर्बा था| उसने तो अब तक औरतों को अपने फ़ौलादी लण्ड से केवल डरते, बचते, चूत सिकोड़ते ही देखा था| शेरनी की तरह झपट कर लण्ड को निगल जाने वाली चाची पहली औरत थीं सो अशोक को बड़ा मजा आ रहा था। उनके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ अशोक के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गद्दे का मजा दे रहे थे। वो दोनों हाथों से उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को, गुदाज चूतड़ों को दबोचने लगा। उनके उछलते कूदते तरबूज जैसे स्तन देख अशोक उनपर मुँह मारने लगा । कभी निपल्स होठों मे पकड़ चूसने लगता, पर अशोक का पूरा लण्ड अपनी चूत मे जड़ तक ठोकने के जुनून में चाची उसके लण्ड पे इतनी जोर जोर से उछल रहीं थी कि निपल्स बार बार होठों से छूट जा रहे थे। वो बार बार झपट कर उनकी उछलती बड़ी बड़ी चूचियाँ पकड़ निपल्स होठों में चूसने के लिए दबाता पर चाची की धुआँदार चुदाई की उछल कूद में वे बार बार होठों से छूट जा रहे थे. करीब आधे घण्टे की धुआँदार चुदाई के बाद इन दोनों चुदक्क्ड़ उस्तादों ने एक दूसरे को सिगनल दिया कि अब मंजिल करीब है. सो अशोक ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियाँ पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली इस बार और उनके चूतड़ों को दबोच कर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़ तक लण्ड धॉस कर झड़ने लगा तभी चाची अपनी चूँचियाँ अशोक के मुँह में दे उसके ऊपर लगभग लेट सी गईं और उनके मुँह से जोर से निकला- “उहहहहहहहहहहह ” और वो जोर से उछल कर अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक अशोक का भयंकर फ़ौलादी लण्ड धॉंस कर बुरी तरह झड़ने लगी।
दोनो झड़ के पूरी तरह से निचुड़ गये थे। चाची बुरी तरह पस्त हो अशोक के ऊपर पड़ी थीं तभी अशोक ने पलट के चाची को नीचे कर दिया। अब अशोक उनके ऊपर आ गया था उसने चाची के बायें स्तन पर हाथ फ़ेरते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदाते हुए कहा- “मैंने महुआ को राजी करने का तरीका सोच लिया है. बस आप चन्दू चाचा को उनकी दवा के साथ बुलवा लीजिये। सुबह महुआ को फ़ोन करेंगे. मैं जैसा बताऊँ आप उससे वैसा कहियेगा. समझ लीजिये काम हो गया।”
चाची- “ठीक है सबेरे ही फ़ोन करके मैं चन्दू जी को बुलवा लेती हूँ।”
फ़िर अशोक ने उन्हें समझाना शुरू किया कि उन्हें सुबह महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे लिपटे सबेरे की योजना पे बात करते हुए कब उन्हें नींद आ गई पता ही नही चला। दूसरे दिन सबेरे ही सबेरे चाची ने फ़ोन करके चन्दू चाचा को बुलवा भेजा। फ़िर रोजमर्रा के कामों से निबट कर दोनों ने नाश्ता किया और चाची के कमरे में पलंग पर बैठ इतमिनान से एक बार फ़िर इस बात पर गौर किया कि महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। पूरी तरह से तैयारी कर लेने के बाद अशोक की योजना अनुसार स्पीकर आन कर महुआ को फ़ोन मिलाया।
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05-04-2014, 02:57 PM
Post: #3
RE: मियां के लंड से बीवी परेशान
महुआ –“हलो!”
चाची- “महुआ बेटी मैं चाची बोल रही हुँ. कैसी हो बेटी।
महुआ- “अच्छी हूँ चाची! आप कैसी हैं? रात अशोक वापस नहीं आए. लगता है आपके पास रुक गये।
चाची- “ मैं ठीक हुँ बेटी! दामाद जी के साथ तू भी क्यूँ नहीं चली आई चाची से मिलने, महुआ।
महुआ- “मैंने सोंचा ये अपने काम से जा रहे हैं। कहाँ मुझे साथ साथ लिए फ़िरेगें, अकेले रहेंगे, तो काम जल्दी निबटा कर शाम तक वापस आ जायेंगे।
चाची (तेज आवाज में) - “पर क्या तुझे अशोक के अचानक उठने वाले पेट दर्द का ख्याल नहीं आया? क्या इस बात का ख्याल रखना तेरी जिम्मेदारी में नहीं आता? मुझे तो इस बात का पता ही नहीं………
महुआ (घबरा के बीच में बात काटते हुए)- “हाय, तो क्या दर्द उठा था?”
चाची- “वरना मुझे कैसे पता चलता? मुझे कोई सपना तो आया नहीं।“
महुआ (घबराहट से)- “अशोक ठीक तो है? क्योंकि उसमें तो कोई दवा………
चाची- “…… असर नही करती। घबरा मत, अशोक अब ठीक है। वो यही मेरे पास है स्पीकर आन है ले बात कर, बोलो अशोक बेटा। ”
अशोक- “हलो महुआ! घबरा मत मैं ठीक हूँ।“
चाची ने आगे अपनी बात पूरी की- “हाँ तो मैं बता रही थी कि रात का समय, ये एक छोटा सा गाँव, न कोई डाक्टर, ना वैद्य। उसपे तुर्रा ये मैं अकेली बूड्ढी औरत।”
बुड्ढी शब्द सुनते ही अशोक ने आँख मार के उनकी कमर में हाथ डाल के अपने से सटा लिया।
महुआ(फ़िक्र से)- “ये तो मैंने सोंचा ही नही था। अशोक को तो बड़ी तकलीफ़ हुई होगी। फ़िर क्या तरकीब की चाची?
चाची- “ऐसी हालत में बिना डाक्टर, वैद्य के कोई कर भी क्या सकता है? जब चूरन मालिश किसी भी चीज का असर नहीं हुआ तो मुझसे लड़के का तड़पना देखा नही गया। एक तरफ़ मेरी अपनी मान मर्यादा थी दूसरी तरफ़ मेरी बेटी के सुहाग की जान पे बनी हुई थी| मैने सोंचा मेरी मान मर्यादा का अब क्या है? मेरी तो कट गई पर बेटी-दामाद के आगे तो सारी जिन्दगी पड़ी है। आखीर में जीत तेरी हुई और मुझे वो करना पड़ा किया जो ऐसे मौके पे तू करती है।”
महुआ- “हे भगवान! ये आपने कैसे … चाची … ये दुनिया के लोग क्या …
अशोक की पहले से सिखाई पढ़ाई चाची बात काटकर बोली –“ मैंने जो किया मजबूरी में किया. आज हम दोनों चाची और भतीजी के पास अशोक के अलावा और कौन सहारा है? भगवान न करे अगर अशोक को कुछ हो जाता तो क्या ये दुनिया हमें सम्हालती। फ़िर रोने और इस दुनिया के हाथों का खिलौना बन जाने के अलावा क्या कोई चारा था? सो दुनिया का नाम तो तू न ही ले तभी अच्छा। तू अपनी बता, तेरे लिए अशोक की जान या समाज में से क्या जरूरी था।
महुआ जिन्दगी की इस सच्चाई को समझ भावुक हो उठी- “नहीं नहीं, मेरे लिए तो अशोक की जिन्दगी ही कीमती है. आपने बिलकुल ठीक किया मेरे ऊपर आपका ये एक और अहसान चढ़ गया।”
चाची की आवाज भी भावुक हो उठी- “अपने बच्चों के लिए कुछ करने में अहसान कैसा पगली।”
महुआ को दूसरी तरफ़ फ़ोन पे ऐसा लगा कि चाची बस रोने ही वाली हैं सो माहौल को ह्ल्का करने की कोशिश में हँस के बोली- “अरे छोड़ो ये सब बातें, चाची. ये बताओ मजा आया कि नहीं। सच सच बोलना।”
महुआ की हँसी सुन अशोक और चाची दोनों की जान में जान आई अशोक तो चाची से लिपट गया।
चाची झेंपी हुई आवाज में - “चल हट, शैतान! तुझे मजाक सूझ रहा है. यहाँ इस बुढ़ापे में जान पे बन आई। कितना तो बड़ा है लड़के का!
कहते हुए चाची ने लुंगी मे हाथ डाल अशोक का हलव्वी लण्ड थाम लिया।
महुआ (हँसते हुए)- “क्या, चाची?”
चाची - “चुप कर, नट्खट! शुरू में तो मेरी आँखे ही निकलने लगी थीं. लगा कि कही मैं टें ही ना बोल जाऊँ। 
चाची ने लण्ड सहलाते हुए साफ़ झूठ बोल दिया। इस बीच अशोक उनका ब्लाउज खोल के गोलाइयाँ सहलाने लगा था।
महुआ- “सच चाची? पर क्या हो सकता है? अशोक का है ही ऐसा!”
चाची- “हाँ, खूब याद दिलाया. इस हादसे के बाद अशोक ने बताया कि तू अभी तक उसका आधा भी नहीं … ।”
महुआ- “मैं क्या करूँ, चाची? कहाँ मैं नन्हीं सी जान और कहाँ अशोक। अभी आपने भी माना कि उनका बहुत …।”
चाची- “इसका इलाज हो सकता है, बेटी। मेरे गांव के एक चाचा वैद्य हैं, चन्दू चाचा| वो इसका इलाज करते हैं| दरअसल मेरा हाल भी तेरे जैसा ही था| मैंने भी उन्हीं से इलाज कराया था|  ये उनके इलाज का ही प्रताप है कि मैं कल का हादसा झेल गई।”
ये कहते हुए चाची ने शैतानी से मुस्कुरा कर अशोक की ओर देखते हुए उसका लण्ड मसल दिया।
फ़िर आगे कहा – “मैंने अशोक से भी बात कर ली है, वो तैयार है। ले तू खुद ही बात कर ले।”
अशोक- “ महुआ! मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ पर रात में इसके अलावा और कोई चारा नजर नही आया।”
महुआ– “छोडिये जी, बीमारी में इलाज तो करवाना ही पड़ता है! अब तबियत कैसी है। और ये मेरे इलाज का क्या किस्सा है? ”
अशोक– “ये इलाज भी वैसा ही जरूरी है जैसे कल मेरा जरूरी था। पर इसके बाद तुम वैसे ही ठीक हो जाओगी जेसे वैद्य जी ने चाची को ठीक किया था।”
अशोक ने चाची की चूचियों पर अपना सीना रगड़ते हुए जवाब दिया।
महुआ– “हाय राम, इस इलाज में वो तो नहीं करना पड़ेगा जो चाची ने तुम्हारे साथ किया था?”
अशोक – “ वो तो करना पड़ेगा पर तुमने कहा था ना कि बीमारी में इलाज तो करवाना ही पड़ता है. अगर मैं चाची से करवा सकता हूं तो तुम वैद्य जी से क्यों नहीं करवा सकती? हां, अगर तुम मुझे खुश नहीं देखना चाहती ...
महुआ – “ये क्या कह रहे हो? तुम्हारी खुशी के लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।”
अशोक –“तब तो इससे पहले कि कोई और हादसा हो, हमें ये इलाज करा लेना चाहिये। बाकी सब चाची तुम्हें ठीक से समझा देंगी।”
कहकर अशोक ने चाची के पेटीकोट को पकड़ कर नीचे खींच दिया। अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं। चाची ने अशोक की लुंगी खीच के उसे भी अपने स्तर का कर लिया और नंगधड़ंग उससे लिपटते हुए बोलीं – “मैं चन्दू चाचा को भेज रही हूँ तेरे पास. विश्वास रख सब ठीक हो जायेगा, बस तू पूरे मन और लगन से उनसे इलाज करवाना। इलाज करीब हफ़्ते भर चलेगा। अशोक के सामने तुझे झिझक आयेगी और वैसे भी जितने दिन तेरा इलाज चलेगा उतने दिन तुझे अशोक से दूर रहना होगा| तू उसका ख्याल न रख पायेगी सो उसे मैं तब तक यहीं रोक लेती हूँ।” 
महुआ – “ओह, तो जितने दिन मेरा इलाज यहाँ चलेगा उतने दिन अशोक का वहाँ चलेगा। चाची, आपको तो बहुत मुश्किल होगी।”
चाची ने अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा अपनी गुलाबी चूत पर रगड़ते हुए कहा- “ठीक कहा, बेटा! पर वैद्य जी का मल्हम लगने के बाद कोई मुश्किल नहीं होगी – न वैद्य जी से और न अशोक से।
महुआ- “हाय दैय्या! मुझे तो सुन कर ही शर्म आ रही है|”
अशोक (चाची की चूत पे अपने लण्ड का सुपाड़ा हथौड़े की तरह ठोकते हुए)- “अरे, जिसे आपरेशन करवाना हो उसे चाकू तो लगवाना ही पड़ता है। और चाची कहती हैं कि उनके मलहम में वो जादु है कि तुझे बिलकुल तकलीफ़ नहीं होगी। चाची ने तो खुद आजमाया है|”
महुआ –“हे भगवान! ठीक से सोच लिया है, अशोक? तुम्हें बाद में बुरा तो नहीं लगेगा?
अशोक (चाची की चूचियों पे गाल रगड़ते हुए) – “तू जानती है कि मैं कोई दकियानूसी टाइप का आदमी तो हूँ नहीं। मैं खुले दिल से तेरा इलाज करवाना चाहता हूं ताकि हम दोनों जीवन का सुख भोग सके। सो दिमाग पे जोर डालना छोड़ और जैसे चन्दू चाचा बतायें वैसे ही करना।”
चाची – “ठीक है, महुआ बेटी? चन्दू चाचा कल शाम तक पहुंच जायेंगे। अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ। ऊपर वाला चाहेगा तो सब ठीक हो जायेगा। खुश रहो।”
महुआ –“ठीक है चाची, प्रणाम।
सुन कर चाची ने फ़ोन काट दिया और अशोक के ऊपर यह कहते हुए झपटीं – “इस लड़के को एक मिनट भी चैन नहीं है. अरे अपने पास पूरा हफ़्ता है. एक मिनट शान्ती से फ़ोन तो कर लेने देता। अभी मजा चखाती हूँ।”
कहते हुए चाची ने अपनी लण्ड से रगड़ते रगड़ते लाल हो गई पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ बायें हाथ की उँगलियों से फ़ैलाये और दूसरे हाथ से अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा चूत के होठों के बीच फ़ँसा लिया। और इतनी जोर का जोर का धक्का मारा कि अशोक की चीख निकल गई।
चाची बोलीं – “ अभी से चीख निकल गई? अभी तो पूरे एक हफ़्ते चाची तेरे पेट दर्द का इलाज करेगी।”
अशोक मक्कारी से मुस्कुराते हुए बोला–“ ठीक है चाची, अब निचोड़ दो मुझे|”
चाची भी मस्ती में आ चुकी थीं| उन्होने अशोक को निचोड़ने के बाद ही छोड़ा| 
उधर अगले दिन शाम को चन्दू चाचा अशोक के घर पहुँचे|  महुआ ने चन्दू चाचा की तरफ़ देखा| चन्दू इस उमर में भी मजबूत कद काठी का तगड़ा मर्द लगता था। इलाज के तरीके की जानकारी होने के कारण उनका मर्दाना जिस्म देख महुआ को झुरझुरी के साथ गुदगुदी सी हुई। महुआ ने उनका स्वागत किया।
महुआ –“आइये चाचाजी, चम्पा चाची ने फ़ोन करके बताया था कि आप आने वाले हैं।”
चन्दू चाचा ने महुआ को ध्यान से देखा। महुआ थोड़ी ठिगनी भरे बदन की गोरी चिट्टी कुछ कुछ गोलमटोल सी लड़की जैसी लगती थी। उसके चूतड़ काफ़ी बड़े बड़े और भारी थिरकते हुए से थे और उसका एक एक स्तन एक एक खरबूजे के बराबर लग रहा था। चन्दू चाचा महुआ को देख ठगे से रह गये। उन्हें ऐसे घूरते देख महुआ शरमा के बोली- बैठिये चाचा मैं चाय लाती हूँ।”
चन्दू चाचा –“नहीं नहीं, चाय वाय रहने दे, बेटा|  हम पहले नहायेंगे फ़िर सीधे रात्रि का भोजन करेंगे क्योंकि शाम ढ़लते ही भोजन करने की हमारी आदत है। और हाँ, वैसे तो चम्पा ने बताया ही होगा कि हम वैद्य हैं और उसने मुझे तुम्हारे इलाज के लिए भेजा है| सो समय बर्बाद न करते हुए तेरा इलाज भी हम आज ही शुरू कर देंगे क्योंकि इस इलाज में हफ़्ते से दो हफ़्ते के बीच का समय लगता है।”
चन्दू चाचा नहा धो के आये और महुआ के साथ रात का खाना खा कर वहीं किचन के बाहर बरामदे मे टहलने लगे| अनुभवी चन्दू ने महुआ से उसकी जिस्मानी समस्या के बारे में विस्तार से बातचीत की जिससे महुआ की झिझक कम हो गई और वो चन्दू चाचा से अपनेपन के साथ सहज हो बातचीत करने लगी। ये देख चन्दू चाचा ने अपना कहा- “महुआ बेटी एक लोटे मे गुनगुना पानी ले कर खाने की मेज के पास चल| इतनी देर में अपना दवाओं वाला बैग लेकर तेरा चेकअप करने वहीं आता हूँ।”
जब गुनगुना पानी ले महुआ खाने की मेज के पास पहुंची तो चाचा वहाँ अपने दवाओं वाले बैग के साथ पहले से ही मौजूद थे। वो अपने साथ महुआ के कमरे से एक तकिया भी उठा लाये थे।
चन्दू चाचा टेबिल के एकतरफ़ तकिया लगाते हुए बोले –“ये पानी तू वो पास वाली छोटी मेज पे रख दे और साड़ी उतार के तू इस मेज पर पेट के बल लेट जा  ताकि मैं तेरा चेकअप कर लूँ।”
महुआ साड़ी उतारने में झिझकी तो चाचा बोले –“बेटी, डाक्टर वैद्य के आगे झिझकने से क्या फ़ायदा।”
महुआ शर्माते झिझकते साड़ी उतार मेज पर पेट के बल(पट होकर) लेट गई।
चन्दू चाचा ने पहले उसके कमर कूल्हों के आस पास दबाया टटोला पूछा कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने इन्कार में सिर हिलाया तो चन्दू चाचा ने उसका पेटीकोट ऊपर की तरफ़ उलट दिया और उसके शानदार गोरे सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों पर दबाया, टटोला और वही सवाल किया कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने फ़िर इन्कार में सिर हिलाया तो उसे पलट जाने को बोला अब महुआ के निचले धड़ की खूबसूरती उनके सामने थी। संगमरमरी गुदाज गोरी मांसल सुडौल पिन्डलियाँ, शानदार सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों और केले के तने जैसी रेश्मी चिकनी मोटी मोटी जांघों के बीच दूध सी सफ़ेद पावरोटी सी फ़ूली हुई चूत, जिसपे थोड़ी सी रेश्मी काली झाँटें। चन्दू चाचा ने पहले उसके पेट कमर नाभी के आसपास दबाया टटोला फ़िर उसकी नाभी में उंगली डाल के घुमाया तो महुआ की सिसकी निकल गई। इस छुआ छेड़ी से वैसे भी उसका जिस्म कुछ कुछ उत्तेजित हो रहा था। सिसकी सुन चन्दू चाचा ने ऐसे सिर हिलाया जैसे समस्या उनकी समझ में आ रही है। वो तेजी से उसके पैरों की तरफ़ आये और बोले –“ अब समझा, महुआ बेटी! जरा पैरों को मोड़ नीचे की तरफ़ इतना खिसक आ कि तेरा धड़ तो मेज पे रहे पर पैर मेज पर सिर्फ़ टिके हों और जरूरत पड़ने पर उन्हें नीचे लटका के जमीन पर टेक सके।
महुआ ने वैसा ही किया चन्दू चाचा ने दोनों हाथों की उंगलियों से पहले उसकी रेश्मी झांटे हटाईं और फ़िर चूत की फ़ाँके खोल उसमें उंगली डाल कर बोले जब दर्द हो बताना. जैसे ही महुआ ने सिसकी ली, चाचा ने अपनी उंगली बाहर खींच ली और बोले –“चिन्ता की कोई बात नहीं. तू बिलकुल ठीक हो जायेगी. पर पूरा एक हफ़्ता लगेगा इसलिए इलाज अभी तुरन्त शुरू करना ठीक होगा।” 
इतनी देर तक एकान्त मकान में चंदू चाचा के मर्दाने हाथों की छुआ छेड़ से उत्तेजित महुआ सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी. वैसे भी पति की रजामन्दी के बाद सोचने समझने को बचा ही क्या था सो महुआ बोली –“ठीक है चाचा।”
चन्दू चाचा ने एक तौलिया महुआ के चूतड़ों के नीचे लगा कर गुनगुने पानी से उसकी रेशमी झाँटें गीली की फ़िर अपने बैग से दाढ़ी बनाने की क्रीम निकाल उन पर लगाई और उस्तरा निकाल फ़टाफ़ट झाँटें साफ़ कर दीं। महुआ के पूछने पर उन्होंने बताया कि झाँटें न होने पर मलहम जल्दी और ज्यादा असर करता है। अब चन्दू चाचा ने चूतड़ों के नीचे से तौलिया बाहर निकाला फ़िर उसी से चूत और उसके आसपास का गीला इलाका पोंछपाछ के सुखा दिया। अब महुआ की बिना झाँटों की चूत सच में दूध सी सफ़ेद और पावरोटी की तरह फ़ूली हुई लग रही थी।
चाचा ने अपना मलहम निकाला और महुआ की चूत की फ़ाँके अपने बायें हाथ के अंगूठे और पहली उंगली से खोल अपने दूसरे हाथ की उंगली अंगूठे से उसमें धीरे धीरे मलहम लगाने लगे।
पहले से ही उत्तेजित महुआ को अपनी चूत में कुछ गरम-गरम सा लगा फ़िर धीरे धीरे गर्मी के साथ कुछ गुदगुदाहट भरी खुजली बढ़ने लगी जो कि चुदास में बदल गई। जैसे जैसे चन्दू चाचा चूत में मलहम फैला रहे थे वैसे वैसे चूत की गर्मी और चुदास बढ़ती जा रही थी। महुआ के मुँह से सिस्कियाँ फ़ूट रही थी और उसकी दोनों टांगे हवा में उठ कर फ़ैलती जा रही थी। चाचा के मलहम और उंगलियो के कमाल से थोड़ी ही देर में महुआ ने अपनी टांगे हवा मे फैला दी और सिस्कारी ले के तड़पते हुए चिल्लाई- " इस्स्स्स्स्स्स! आहहहहहह! चाचा, ये मुझे क्या हो रहा है? लग रहा है कि मैं गर्मी से जल रही हूं| कुछ कीजिये ना अब।”
चन्दू चाचा – “अभी इन्तजाम करता हूँ, बेटा।”
ये कहते हुए चन्दू चाचा अपनी धोती हटा के अपना फ़ौलादी लण्ड निकाला और उसके सुपाड़े पर अपना जादुई मलहम लगा के उसे चूत के मुहाने पर रखा। फ़िर सुपाड़ा चूत पर सटाए हुए ही आगे झुक कर महुआ का ब्लाउज खोला और दोनो हाथों से उसकी चूंचियों को दबाने के बाद उसके निपल चूसने लगे। चुदासी चूत की पुत्तियाँ अपना मुँह खोल के लण्ड को निगलने लगीं। मारे मजे के महुआ की आँखें बन्द थी और दोनों टांगे हवा में फ़ैली हुई थीं। जब लण्ड घुसना रुक गया तो चाचा ने लण्ड आगे पीछे कर के चुदाई शुरू कर दी| उन्होंने चूचियाँ दबाते हुए ज़ोर ज़ोर से निपल चूसना जारी रखा तो महुआ ने आँखें खोली| हाथ से अपनी चूत मे टटोला और महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब आधा इन्च लण्ड चूत में घुस गया था जब्कि पहले उसकी चूत में अशोक के लण्ड का सुपाड़ा घुसने के बाद आगे बढ़ता ही नहीं था। उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।
तभी शायद चाचा को भी महसूस हो गया कि लण्ड चूत में आगे जाना रुक गया है| सो उन्होंने चूचियों से मुँह उठाया और कहा –“अब आगे का इलाज इस मेज पर नहीं हो सकता| तू मेरी कमर पर पैर लपेट ले और अपनी बाहें मेरे गले मे डाल ले ताकि मैं तुझे उठा के बिस्तर पर ले चलूँ| आगे की कार्यवाही वहीं होगी।”
महुआ ने वैसा ही किया| सोने के कमरे की तरफ़ जाते हुए लगने वाले हिचकोलों से लण्ड चूत में अन्दर को ठोकर मारता था| उन धक्कों की मार से महुआ के मुँह से तरह तरह की आवाजें आ रहीं थी- "उफ्फ़... ऊऊओह...इस्स्स..."
सोने के कमरे में पहुँच चाचा महुआ को लिये लिए ही बिस्तर पर इस प्रकार आहिस्ते से गिरे कि लण्ड बाहर न निकल जाये। चाचा ने महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब एक इंच लंड महुआ की चूत के अन्दर चला गया है| पहले दिन को देखते हुए ये बहुत बड़ी कामयाबी थी| ये सोच कर  महुआ के गोरे नंगे जिस्म के ऊपर झुककर उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबोच कर वे उतने ही लण्ड से उसे चोदने लगे। उन्के मुँह से आवाजें आ रही थीं – “उह्ह्ह्ह्ह... आह... ऊह्ह्ह्ह्ह”
उधर महुआ भी चुदते हुए तरह तरह की आवाजें कर रहीं थी – "उफ्फ़... आह रे!  उम्म...  इस्स्स... आहहहहहहहहह..."
महुआ एक अरसे से लण्ड के डर के कारण टालमटोल कर के  चुदने से बचती आई थी| आज इतने अरसे से उसकी बिन चुदी चूत चन्दू चाचा के कमाल से झड़ने के करीब पहुँच गई और उसके मुँह से निकला – "आह्ह चाचा! लगता है मैं झड़ने वाली हूं ... उफ्फ्फ़ ... इस्स्स ..."
ये देख अनुभवी चन्दू चाचा अपनी स्पीड बढ़ा के बोला- “शाबाश बेटी, जम के झड़| मैं भी झड रहा हुँ! ये ले ... ले अंदर ..."
और दोनों झड़ गये। महुआ को लगा जैसे मुद्दत के प्यासे को पानी मिल गया| और इस तरह चन्दू चाचा ने पहले राउण्ड का इलाज खत्म किया। वो महुआ के ऊपर से उतर कर बगल में लेट गये और बोले – “तूने बहुत अच्छी तरह से हर काम मेरे कहे मुताबिक किया। अगर तू ऐसे ही मेरे कहे मुताबिक चलती रही तो मेरे मलहम के कमाल से तू बहुत जल्द अशोक को झेलने के लायक हो जायेगी। मेरे मलहम का एक कमाल और है कि तेरी चूत कभी ढीली नही होगी। तेरी चाची की चूत अब तक इसी कारण टाइट और जवान है।”
महुआ ये सोच के मन ही मन मुस्कुराई कि तब तो अशोक को बहुत मजा आ रहा होगा। बेचारे ने जमाने से चूत का पूरा मज़ा नहीं लिया था। ऐसे ही बातें करते दोनों को नींद आ गई।
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05-04-2014, 03:00 PM
Post: #4
RE: मियां के लंड से बीवी परेशान
जल्दी सो जाने के कारण दूसरे दिन दोनों की नींद जल्दी खुल गई। रोजमर्रा के कामों से निबट के महुआ ने चाय और नाश्ता बनाया और  फ़िर दोनों ने नाश्ता किया।
चाचा बैठक मे आकर बैठ गये और महुआ को बुलाया| जब महुआ आई तो चाचा बोले – “महुआ बेटी, कल के इलाज से तू सुपाड़े के अलावा एक इन्च और लण्ड अपनी चूत में लेने में कामयाब रही| इसका मतलब है कि अगर हम दोनों मेहनत करें तो शायद एक हफ़्ते से भी कम में तू अशोक का पूरा लण्ड डलवाने के लायक बन सकती है। यहाँ हम दोनों को और कोई काम तो है नहीं| सो क्यों न हम लोग मन लगा कर इस काम को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करें?” 
महुआ – “ठीक कहा, चाचाजी। मैं भी जल्द से जल्द अशोक के लायक बन के दिखाना चाहती हूँ।
चन्दू चाचा – “तो ऐसा कर अगर स्कर्ट ब्लाउज हो तो साड़ी उतार के स्कर्ट ब्लाउज पहन ले। इस से वक्त बच जाएगा|” 
उधर महुआ स्कर्ट ब्लाउज पहनने गई इधर चन्दू चाचा ने अपना मलहम का डिब्बा बैग से निकाल के महुआ की चूत के इलाज की पूरी तैयारी कर ली। चन्दू चाचा ने स्कर्ट ब्लाउज पहने महुआ को आते देखा। स्कर्ट ब्लाउज में उसके बड़े बड़े खरबूजे जैसे स्तन और भारी चूतड़ थिरक रहे थे। चन्दू चाचा ने हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया। उनकी गोद में बैठते ही महुआ ने चन्दू चाचा का लण्ड अपनी स्कर्ट में गड़ता महसूस किया। उसने अपने चूतड़ थोड़े से उठाये और चन्दू चाचा की धोती हटा के उनका लण्ड नंगा किया और अपनी स्कर्ट ऊपर कर चन्दू चाचा का लण्ड अपने गुदाज चूतड़ों मे दबा कर बैठ गई|
चन्दू चाचा ने उसका ब्लाउज खोलते हुए कहा- वाह बेटी, ऐसे ही हिम्मत से काम ले।
बटन खुलते ही महुआ ने ब्लाउज उतार दिया। चन्दू चाचा उसकी नारंगियां सहलाने और दबाने लगे। कुछ ही देर में महुआ के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। अचानक महुआ ऊठी और चन्दू चाचा की तरफ़ मुँह घुमाकर उनकी गोद में दोनों तरफ़ पैर कर बैठ गई। चन्दू चाचा ने देखा महुआ की चूचियाँ उनके मसलने दबाने से लाल पड़ गई हैं। अब महुआ की चूत चन्दू चाचा के लण्ड पर लम्बाई मे लेट सी गई। महुआ ने अपने एक स्तन का निपल चन्दू चाचा के मुँह में ठूँसते हुए कहा – “ अब इलाज शुरू करो न, चाचा।”
चन्दू चाचा – “अभी लो, बेटा।”
चन्दू चाचा ने अपना मलहम निकाला और महुआ की चूत की फ़ाँके खोल फ़ाँकों के बीच थोप दिया| फ़िर अपने लण्ड के सुपाड़े पर भी मलहम थोपा और उसे महुआ के हाथ में पकड़ा दिया| वे अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ थाम, उन पर मुँह मारने में व्यस्त हो गये। उनकी हरकतों से उत्तेजित महुआ ने उनका लण्ड अपने हाथ में ले अपनी चूत के मुहाने पर रखा और सिसकारियाँ भरते हुए अपनी चूत का दबाव लण्ड पर डाला। पक्क से सुपाड़ा चूत में घुस गया। मारे मजे के महुआ और चन्दू चाचा दोनों के मुँह से एक साथ निकला – “उम्म्म्म्म्म्म्म्ह”
चन्दू चाचा ने भी दबाव बढ़ाया और लंड थोडा और अंदर पहुंच गया। जैसे जैसे उनका दबाव बढ़ा, वैसे वैसे महुआ भी अपनी चूत का दबाव लण्ड पर बढ़ाती रही और उसकी चूत मलहम के कमाल से रबड़ की तरह फ़ैलते हुए चन्दू चाचा का लण्ड अपने अन्दर लेती गई। जब लण्ड अन्दर घुसना बन्द हो गया तो महुआ ने नीचे झुक कर देखा| आज  कल के मुकाबले एक इंच ज्यादा लण्ड चूत में घुसा था| इस कामयाबी से खुश हो चुदासी महुआ अपनी कमर चला-चला के चाचा से चुदवाने लगी।
चन्दू चाचा – “शाबाश बेटा, इसी तरह मेहनत किये जा| तू जितनी मेहनत करेगी, उतनी ही जल्दी तुझे कामयाबी मिलेगी और अशोक तेरा दीवाना हो जायेगा।”
अगले पाँच दिन चन्दू चाचा और महुआ ने चुदाई की झड़ी लगा दी। जरा सी फ़ुरसत होते ही चन्दू चाचा महुआ को इशारा करते और दोनों मलहम लगा के शुरू हो जाते| पाँचवें दिन शाम को दोनों कुर्सी पर बैठे चुदाई कर रहे थे कि अचानक महुआ चन्दू चाचा का पूरा लण्ड लेने में कामयाब हो गई| वो खुशी से किलकारी भर उठी| बस फ़िर क्या था| चन्दू चाचा ने उसे गोद में उठाया और ले जा के बिस्तर पर पटक दिया| वे खुशी से बोले – “शाबाश महुआ, आज तू पूरी औरत बन गई है| अब मैं तुझे चुदाई का आखरी पाठ पढाता हूं।”
ये कह के चन्दू चाचा ने महुआ की हवा में फ़ैली दोनों टांगे उठाकर अपने कंध़ों पर रख लीं| अपने फ़ौलादी लण्ड का सुपाड़ा उसकी भीगी अधचुदी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही धक्के में पूरा लण्ड ठाँस दिया और धुँआधार चुदाई करने लगे। महुआ को आज पहली बार पूरे लण्ड से चुदने का मजा मिल रहा था| वो मज़े से सिसकते हुए चूतड़ उछाल उछाल के चुदवा रही थी। महुआ को चूतड़ उछालते देख कर चन्दू चाचा बोले- “शाबाश बेटी, अब मुझे भरोसा हो गया है कि तू अशोक को खुश कर के वैद्यराज चंदू चाचा का नाम रोशन करेगी।”
चन्दू चाचा भी पाँच दिनों से आधे अधूरे लण्ड से चुदाई कर कर के बौखलाये हुए से थे| आज पूरी चूत मिलने पर वे महुआ को धुँआधार तरीके से चोद रहे थे। दोनों के धक्कों की ताकत और जिस्म से जिस्म टकराने की आवाजें बढ़ती जा रही थी| आधे घण्टे की भीषण चुदाई के बाद अचानक महुआ के मुँह से निकला – 
"अहह...! और जोर से चोदो, चाचा| ... मैं झड़ने वाली हूं! उफ्फ.... इस्स्स... आह...."
चन्दू चाचा – “ले मेरा पानी... ले चूत में... और ले... अह्ह्हहा..."
और दोनों झड़ गये। साँसों पे काबू पाने के बाद महुआ ने चाची को फ़ोन मिलाया। जब फ़ोन की घण्टी बजी, उस समय चम्पा चाची पलंग पर लेटी दोनों टाँगे फ़ैलाये अशोक के लण्ड से अपनी चूत ठुकवा रही थी| उनका गदराया हुआ जिस्म अशोक के पहाड़ जैसे बदन के नीचे दबा हुआ था और अशोक उन्हें रौंद रहा था। चम्पा चाची बड़बड़ा रही थीं –“हाय रे... इस लड़के का तो मन ही नहीं भरता! अरी महुआ, देख तेरा मर्द कैसे चाची को पीस रहा है, ऑह!”
तभी फ़ोन की घण्टी बजी| चाची ने चुदते-चुदते फ़ोन का स्पीकर आन किया और हाँफ़ती सी आवाज में कहा – “हलो!”
महुआ ने चाची को छेड़ा – “हलो चाची! हाँफ़ रही हो! बचने के लिए भाग रही थीं क्या?”
चम्पा चाची (अशोक की कमर में टाँगे लपेट कर चुदाई धीमी करने का इशारा करते हुए) - “अरे नहीं, रसोईं की तरफ़ थी सो फ़ोन उठाने के लिए दौड़ के आना पड़ा| इसीलिए साँस उखड़ रही है।” चाची ने झूठ का सहारा लिया।
महुआ – “छोड़ो चाची, अब मैं बच्ची नहीं रही! चन्दू चाचा ने मेरा इलाज कर मुझे आप की टक्कर की बना दिया है| मैं कल सुबह आ रही हूँ, आपको अशोक की बदमाशी से छुटकारा दिलाने।”
जवाब में अशोक ने चाची की चूत में जोर का धक्का मारते हुए कहा –“शाबाश महुआ! जल्दी से आजा! मेरा मन तुझसे कुश्ती लड़ने को कर रहा है।”
महुआ – “बस आज-आज सबर कर लो, मेरे राजा! कल से तो अपनी कुश्ती रोज ही होगी| ... और सबर क्या करना! तुम तो वैसे भी मजे कर रहे हो| मेरे इलाज की खुशी में चाची को पूरी तरह खुश कर के उनका आशीर्वाद लो।”
चम्पा चाची ने पलट कर अशोक को नीचे लिया और उसके ऊपर उछल उछल के उसके लण्ड को कुचलते हुए बोली - “अरे, मैं बाज आई ऐसे दामाद से!  बेटी, जल्दी से आ जा और ले जा अपने इस पहलवान को| अच्छा, रात बहुत हो गई है| अब सो जा।”
महुआ फ़ोन रखते रखते भी छेड़ने से बाज नहीं आई – “ठीक है चाची, मैं फ़ोन रखती हूँ| आप अपना प्रोग्राम जारी रखो।”
तभी अशोक ने नीचे से कमर उछाल कर चूत में लण्ड ठाँसते हुए नहले पे दहला मारा – “चाची, तुमने महुआ को तो सोने को कह दिया पर तुम्हे आराम नहीं मिलने वाला| जिसके लण्ड को तुम्हारी मालपुए जैसी चूत का चस्का लग़ जाये वो तुम्हे छोड़ने वाला नहीं है|  वैसे भी तुमने वादा किया है कि अब जब भी मैं यहाँ आऊँगा, तुम्हारी चूत को अपने लण्ड के सामने पाऊँगा।”
चाची मुस्कुरा के बोलीं - “मैंने कब मना किया है, दामाद जी! पर जब महुआ तुम्हे छोड़ेगी तभी मेरा नंबर आएगा ना।”
इसी तरह हँसते-खेलते दोनों ने चुदाई संपन्न की और सो गये|
उधर चन्दू चाचा और महुआ अगले दिन अलसाये से उठे और धीरे धीरे जाने की तैयारी करने लगे। धीरे धीरे इसलिए क्योंकि बीच बीच में चन्दू चाचा महुआ को चुदाई की ट्रिक्स सिखाने लगते, और वो भी महुआ के साथ प्रेक्टिकल कर के। सो शाम  को करीब 5 बजे चन्दू चाचा और  महुआ चाची के घर पहुंचे। खाना पीना होते होते 7 बज गये| अंधेरा हो गया तो महुआ और अशोक मेहमानों वाले कमरे में अपनी मुद्दतों की अधूरी सुहागरात पूरी करने के लिए जा पहुँचे। दोनों ने एक दूसरे को हफ़्ते भर से नहीं देखा था| वैसे भी दोनों के बीच चुदाई कभी कभार ही होती थी और वह भी आधी अधूरी| सो दोनों को ही चन्दू चाचा के इलाज के असर को आजमाने की जल्दी थी। कमरे में पहुँचते ही अशोक महुआ से लिपट गया और बोला – “महुआ रानी, कितने दिनों बाद तू हाथ आई है! अब बोल तू तैयार है कुश्ती के लिए? आज मैं कोई रियायत करने के मूड में नहीं हूँ।” 
महुआ – “घबरा मत राजा, आज मैं भी पीछे हटने वाली नहीं हूँ।”
अशोक ने महुआ के पेटीकोट में हाथ डाल के उसकी चूत दबोच ली| महुआ ने सिसकी भरी तो अशोक ने उंगली अंदर चुभो दी। उसने पाया कि चूत पहले की तरह ही टाइट है| वो आश्चर्य से बोला – “तू तो बोली थी कि वैद्य जी ने तेरा पूरा इलाज किया है पर ये तो पहले जैसी ही टाईट है?”
महुआ – “यही तो कमाल है चाचा के मलहम का।”
अशोक – “चल, अब देखते हैं|”
यह कह कर अशोक ने उसके कपड़े नोच डाले| महुआ ने भी तुर्की बतुर्की उसे नंगा कर दिया| ये देख अशोक ने नंगधड़ग महुआ को उठा के बिस्तर पर पटक दिया| महुआ ने दोनों टाँगे फ़ैला कर उसके लण्ड को चुनौती दी तो अशोक उस पर टूट पड़ा। आज पहली बार वो अपना पूरा लंड महुआ की चूत में घुसा पाया था| दोनों ने उस रात पहले ही राउण्ड में इतनी धुआंदार चुदाई की  कि थकान से कब नींद आ गई उन्हें पता ही नहीं चला।
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05-04-2014, 03:03 PM
Post: #5
RE: मियां के लंड से बीवी परेशान
उधर अशोक और महुआ के जाते ही चंपा चाची ने चन्दू चाचा से कहा – “अब इतनी रात में कहाँ जाओगे, चन्दू? आज यहीं रुक जाओ ना।”
चन्दू चाचा (खुश हो कर) –“ठीक है, चम्पा।”
चम्पा चाची चन्दू चाचा को लगभग घसीटते हुए अपने कमरे में ले गई। चाची ने उनकी धोती हटा कर उनका हल्लाबी लण्ड बाहर निकाला|  चाचा को पलंग बैठा कर उनका लंड सहलाते हुए वो बोली – “जमाना हो गया चन्दू तेरा ये मूसल देखे हुए।”
फ़िर चम्पा अपना पेटीकोट उठा कर उनकी गोद में बैठ गयी। चन्दू चाचा के सीने से चम्पा चाची की गुदाज पीठ सटी थी। चन्दू चाचा के गरम लण्ड पर चम्पा चाची की फ़ूली पावरोटी सी चूत धरी थी और वो चन्दू चाचा के लण्ड की गरमी से अपनी चूत सेंक कर गरम कर रही थीं। चाचा ने अपनी गोद में चाची के शानदार बड़े बड़े गोल गुदाज चूतड़ों का मजा लेते हुए अपने दोनो हाथ उनके ब्लाउज में घुसेड़ दिये और उनकी बड़ी बड़ी चुचियों को टटोलने लगे। चम्पा चाची सिस्कारियाँ भरने लगीं| उनकी पहले से गरम चुदक्कड़ चूत बहुत जल्द पानी छोड़ चन्दू चाचा के लण्ड को तर करने लगी।
अचानक चम्पा चाची उठी और उन्होंने चन्दू चाचा की तरफ़ घूम कर उनकी तरफ़ मुँह करके फ़िर से गोद में सवारी गाँठ ली  जैसे घोड़े के दोनों तरफ़ एक एक पैर डालकर बैठते हैं। अब चन्दू चाचा के लण्ड का सुपाड़ा चम्पा चाची की चूत के मुहाने से टकरा रहा था| चन्दू चाचा ने देखा चाची की बड़े खरबूजों जैसी चूचियाँ मसलने से लाल हो गईं थी। चन्दू चाचा उन पर मुंह मारने लगे। ये देख चम्पा चाची अपने दोनो हाथों से अपना एक भारी स्तन पकड़ अपना निपल चन्दू के मुँह में दे बोली – “जोर से चूस, चन्दू राजा।”
चन्दू चाचा चूचियों को बारी बारी से अपने मुँह मे ले कर चाटने और चूसने लगे और चम्पा चाची सिस्कारियाँ भरते हुए मस्ती से अपने दोनो हाथों से अपनी चूचियाँ उठा उठा कर चन्दू चाचा से चुसवा रही थी। चम्पा चाची मस्त हो अपनी दोनो जांघों के बीच चन्दू चाचा का लण्ड मसलने और रगड़ने लगी. यह देख कर चन्दू चाचा भी उनकी चूत की घुंडी को अपनी उँगलिओं से सहलाने और मसलने लगे. चम्पा चाची ने मारे उत्तेजना के उनकी धोती खींच के फ़ेक दी और अपने चूतड़ उछालते हुए बोली, “हाय चन्दू राजा,  मेरी चुदासी चूत मे आग लगी है| अब जल्दी कर वरना ये बिना चुदे ही झड़ जायेगी।
चन्दू चाचा ने उन्हें लिटा कर उनकी जाँघों के बीच पोजीशन ले ली। चाची ने अपनी टाँगे उनके कंधों पर रख कर उनका सुपाड़ा अपनी भीगी चूत के मुहाने पर जमा दिया। चन्दू ने धक्का मारा। पकक् से सुपाड़ा अन्दर।
चाची सिसकी - “इस्स्स्स्स… और घुसा ना, चंदू ... हां, ऐसे!”
चन्दू चाचा – “वाह चम्पा रानी, तेरी चूत तो अभी भी वैसी ही टाईट है जैसी पन्द्रह साल की उमर में थी।”
चम्पा चाची – “चन्दू राजा, यह सब तेरे मलहम का प्रताप है! तुझे पता है कि मैं पिछले एक हफ़्ते में कितनी बार चुदी हूं? और वो भी अपने दामाद के भयंकर लण्ड से! तू अशोक का लंड देखेगा तो देखता ही रह जाएगा।” 
चन्दू चाचा – “पर चम्पा रानी, ऐसा लंड मज़ा भी पूरा देता होगा| तुमने भी खूब खेला होगा उसके साथ।”
चम्पा चाची (चूतड़ उछाल कर चन्दू का बचा लण्ड भी अपनी चूत में निगलते हुए) – “हाय चन्दू, मज़ा तो मैं इस समय भी ले रही हूँ। पूरी जवानी चूत का खेत लण्ड के बिना सुखाने के बाद अब ऊपर वाले को तरस आया है| उसने मेरी चूत को सींचने के लिए दो-दो धाकड़ लण्ड भेज दिये हैं।”
चन्दू चाचा (धक्का लगाते हुए) – “हाय चम्पा रानी, ये हरा भरा मांसल बदन और ये पावरोटी सी फ़ूली चूत! ऊपर से मुहल्ले भर की बुज़ुर्ग चाची का ठप्पा! चाहे जितना खेलो, कोई शक नहीं कर सकता। ऐसा बुढ़ापा ऊपर वाला सब को दे।”
चाची हँस पड़ी। दोनों पुराने खिलाडी थे| दोनों ने चुदाई का जम कर मजा लिया। 
रात के करीब दो बजे पहले अशोक और महुआ की नींद खुली| दोनों ने मुस्कुरा के एक दूसरे की तरफ़ देखा।
महुआ – “कहो कैसी रही? आज पूरा मज़ा आया या नहीं?”
अशोक – “महुआ रानी, आज तो तुमने कमाल कर दिया।”
महुआ – “कमाल तो चाचा के मलहम का है।”
अशोक – “फिर तो उनका नाम चन्दू वैद्य के बजाय चोदू वैद्य होना चाहिये|”
इस बात पर महुआ को हँसी आ गई| अशोक भी हँसने लगा। तभी चाची के कमरे से हँसने की आवाज आई।
अशोक – “लगता है ये लोग अभी तक जाग रहे हैं! चलो, ज़रा देखते हैं कि क्या हो रहा है।
महुआ कपड़े पहनने लगी तो अशोक बोला – “कपड़े पहनने का झंझट मत कर| तेरा सब माल चाचा ने और मेरा सामान चाची ने देखा और बरता है।”
सो दोनों सिर्फ चादर लपेट के चाची के कमरे में पहुँचे। चन्दू चाचा नंगधड़ग बैठे थे और चम्पा चाची उनकी गोद में नंग़ी बैठी उनका लण्ड सहला रही थी| चाचा उनकी एक चूची का निपल सहला रहे थे। इन्हें देख चाची चन्दू चाचा की गोद से उठते हुए बोलीं – “आओ अशोक बेटा, अभी तुम्हारी ही बात हो रही थी।“
चन्दू चाचा –  “आ महुआ बेटी, मेरे पास बैठ।”  यह कह कर चाचा ने उसे गोद में बैठा लिया।
अशोक – “मेरे बारे में क्या बात हो रही थी, चाची?”
चाची (खींच के अशोक को अपनी जांघों के बीच में बैठाते हुए) – “अरे, मैंने इन्हें बताया कि मेरे अशोक का लण्ड शायद दुनियाँ का सबसे लंबा और तगड़ा लण्ड है। इसी पर ये हँस रहे थे कि कही ऐसा लण्ड भी होता है? अब तू इन्हें दिखा ही दे।”
यह कह कर चाची ने अशोक की चादर खींच के फेंक दी। इस कमरे का सीन देख कर अशोक का लण्ड खड़ा होने लगा था| फ़िर चम्पा चाची के गुदाज बदन से और भी टन्ना गया। चम्पा चाची ने अशोक का फ़नफ़नाता लण्ड हाथ में थाम के चन्दू चाचा को दिखाया – “ये देख, चन्दू। मैं झूठ कह रही थी?”
चन्दू चाचा – “भई वाह, ऐसा तगड़ा लंड तो मैं पहली बार देख रहा हूं| पर दामाद जी, महुआ बेटी ये पूरा लण्ड झेल पायी या आज भी कमी रह गई।”
इस बीच महुआ अपने बदन से चादर उतार के एक तरफ़ रख चुकी थी| चन्दू चाचा के गले में बाहें डालते हुए बोली – “चाचा, आज तो मैने पूरा धँसवा के चुदवाया! आपका इलाज सफ़ल रहा।”
चन्दू चाचा (उसके गाल पर चुम्मा लेते हुए) – “शाबाश बेटी!”
चाची (अशोक के लण्ड को सहलाते हुए) – “अब तो इस मूसलचंद को मेरी भतीजी की चूत से कोई शिकायत नहीं?”
अशोक ने मुस्कुरा के चाची के टमाटर से गाल को होठों में दबा कर जोर का चुम्मा लिया| एक हाथ से उनकी चूंची और दूसरे से उनकी चूत सहलाते हुए बोला – “चाची, अब इसे न महुआ की चूत से शिकायत है और न आपकी चूत से, बशर्ते कि दोनों इसे मिलती रहें!”
चाची (अशोक का लण्ड अपनी चूत पर रगड़ते हुए) – “हाय, इस बुढ़ापे में मैंने अपने आप को किस जंजाल में फ़ँसा लिया। चन्दू ने मेरी भतीजी का इलाज कर के जो उपकार किया है उसका क़र्ज़ भी चुकाना है और दामाद जी को भी झेलना है।”
चन्दू – “अपनी सास की बातों पर भरोसा मत करना, अशोक बेटा। ये नखरे भी दिखाती है और चुदाई का पूरा मज़ा भी लेती है|”
चन्दू चाचा ने अशोक को चुदाई शुरू करने का इशारा किया। अशोक ने चम्पा चाची और चन्दू चाचा ने महुआ को बिस्तर पर पटक दिया और उन पर चढ कर दनादन चुदाई शुरू कर दी|  दोनों औरतें मारे आनन्द के किलकारियाँ भर रही थी। पूरी रात चन्दू चाचा और अशोक ने चूतें बदल बदल के धुँआदार चुदाई की।
अगले दिन अशोक और महुआ लखनऊ लौट गये| चन्दू चाचा  और चम्पा चाची बचपन के बिछ्ड़े यार थे| इस लंबी जुदाई की भरपाई करने के लिए दोनों मिल कर एक हफ़्ते तक लण्ड और चूत को छकाते रहे।
अब सब की जिन्दगी मजे से कट रही है| जिन दिनों महुआ महीने से होती है, वो चम्पा चाची को लखनऊ बुला लेती है| उन दिनों चम्पा चाची अशोक के लण्ड की सेवा अपनी चूत से करती हैं| महुआ के फ़ारिग होने के बाद भी अशोक एक दो दिन उन्हें रोके रखता है ताकि वो चूतें बदल बदल कर उन्हें चोद सके। इसके अलावा अशोक जब भी काम के सिलसिले में चम्पा चाची के गाँव जाता है तो वादे के अनुसार चाची की चूत को अपने लण्ड के लिए तैयार पाता है। अशोक न हो और चम्पा चाची की चु्दवाने की इच्छा हो तो वो चन्दू चाचा को बुलवा लेती हैं। तो पाठकों, जैसे अशोक और चम्पा चाची के दिन फिरे वैसे ही आप सब के भी फिरें।
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